By पं. अमिताभ शर्मा
शनि दोष निवारण और जीवन में समृद्धि के लिए प्रभावशाली उपाय और सावधानियां

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर लिखा गया है। चंद्र राशि आपके जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होती है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए आपको अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान की आवश्यकता होती है। यह जानकारी वैदिक ज्योतिष में व्यक्तित्व विश्लेषण और उपायों का आधार है।
वायु तत्व से संबंधित कुम्भ राशि का स्वामी शनि ग्रह है और इसके कारक ग्रह बृहस्पति, शुक्र और शनि हैं। यह राशि चर प्रकृति की है और कुम्भ लग्न की बाधक राशि सिंह और बाधक ग्रह सूर्य है। लाल किताब के अनुसार कुम्भ राशि को ग्यारहवें भाव में स्थान दिया गया है जहां शनि के पक्के घर आठवां और दसवां माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष और लाल किताब दोनों ही इस राशि के जातकों के लिए विशेष उपाय और सावधानियां बताते हैं जो जीवन में समृद्धि और शांति लाने में सहायक होते हैं।
कुम्भ राशि की आधारभूत संरचना इसके जातकों के जीवन पथ को निर्धारित करती है और उनके व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शनि देव |
| कारक ग्रह | बृहस्पति, शुक्र और शनि |
| तत्व | वायु तत्व |
| प्रकृति | चर राशि |
| बाधक राशि | सिंह राशि |
| बाधक ग्रह | सूर्य |
| भाव स्थिति | ग्यारहवां भाव |
| शनि के पक्के घर | आठवां और दसवां भाव |
शनि देव कुम्भ राशि में अपनी मूलत्रिकोण राशि में स्थित होते हैं जो इस राशि को विशेष शक्ति प्रदान करता है। यह स्थिति शनि की सबसे बलवान अवस्था मानी जाती है। कुम्भ राशि में शनि का प्रभाव मकर राशि से भिन्न होता है क्योंकि इसमें राहु की ऊर्जा भी सम्मिलित होती है। मकर श्मशान भूमि का प्रतीक है जबकि कुम्भ उससे परे की अवस्था को दर्शाता है।
लाल किताब वैदिक ज्योतिष के मौलिक सिद्धांतों पर आधारित एक अद्वितीय ग्रंथ है जो सरल और प्रभावी उपाय प्रदान करता है। इस ग्रंथ में कुम्भ राशि को ग्यारहवें भाव में स्थापित माना गया है जो लाभ और आय का भाव होता है। यह भाव धन प्राप्ति, मित्रता, सामाजिक संबंध, आकांक्षाओं की पूर्ति और बड़े लक्ष्यों की सिद्धि से संबंधित है। लाल किताब के अनुसार शनि के पक्के घर आठवां और दसवां माने जाते हैं जो आयु, रहस्य, कर्म और व्यवसाय से जुड़े हैं।
कुम्भ राशि के स्वामी शनि देव यदि कुंडली में अशुभ स्थिति में हों तो जातक के जीवन में अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
शनि की अशुभता शरीर पर भी प्रत्यक्ष प्रभाव डालती है। शरीर के बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और समय से पहले गंजापन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। दांत और आंखें समय से पूर्व कमजोर हो जाती हैं और दृष्टि संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। हड्डियों में कमजोरी आना और जोड़ों में दर्द रहना भी शनि की अशुभता का संकेत है। त्वचा संबंधी रोग और शरीर में कालिमा आना भी इसके लक्षण हैं।
शनि की अशुभता से बचने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कुम्भ राशि के जातकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए।
दांतों को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन सुबह शाम दांतों की उचित सफाई करनी चाहिए और दंत रोगों से बचाव के उपाय करने चाहिए। बालों की देखभाल विशेष रूप से करनी चाहिए और उनके झड़ने या असमय सफेद होने पर तुरंत उपचार लेना चाहिए। हड्डियों को कमजोर नहीं होने देना चाहिए और कैल्शियम युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। नियमित व्यायाम और योग से शरीर को सुदृढ़ बनाए रखना चाहिए।
| सावधानी | कारण |
|---|---|
| परस्त्री गमन से बचें | शनि का कोप और पारिवारिक विनाश |
| जुआ या सट्टा न खेलें | धन हानि और मानसिक अशांति |
| ब्याज का व्यवसाय न करें | शनि की अशुभता में वृद्धि |
| मदिरापान से दूर रहें | स्वास्थ्य हानि और सामाजिक पतन |
| नेत्रहीन और विकलांगों के साथ अच्छा व्यवहार करें | शनि की कृपा प्राप्ति |
| नौकरों और सफाई कर्मचारियों का सम्मान करें | शनि देव की प्रसन्नता |
अपने चरित्र और नैतिकता को सुरक्षित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य से दूर रहना चाहिए। समाज के निचले वर्ग के लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना शनि देव को प्रसन्न करता है।
यदि शनि आयु भाव अर्थात आठवें घर में स्थित हो तो धर्मशाला का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। यदि शनि आठवें भाव में हो तो घर का निर्माण या क्रय नहीं करना चाहिए। यदि शनि कुंडली के प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो किसी भिखारी को तांबा या तांबे का सिक्का दान में कभी नहीं देना चाहिए। जन्म कुंडली में शनि की स्थिति के अनुसार किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
लाल किताब में कुम्भ राशि के जातकों के लिए अनेक सरल और प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं जो जीवन में समृद्धि लाते हैं।
भगवान भैरव शनि देव के अवतार माने जाते हैं। कुम्भ राशि के जातकों को नियमित रूप से भगवान भैरव की पूजा करनी चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल भैरव बाबा के मंदिर में जाकर दीपक जलाना चाहिए। शनिवार को विशेष रूप से भैरव पूजा करनी चाहिए और प्रसाद चढ़ाना चाहिए। भैरव चालीसा और भैरव आरती का पाठ करने से शनि के दुष्प्रभाव कम होते हैं। काले तिल का तेल भैरव बाबा को अर्पित करना अत्यंत शुभफलदायी है।
शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है। तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काले वस्त्र, काली गाय और जूते का दान करना चाहिए। शनिवार को सरसों का तेल, काले तिल और काली वस्तुएं दान करने से शनि प्रसन्न होते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना और काले कंबल दान करना भी अत्यंत शुभ है। लोहे की वस्तुएं और काले रंग के कपड़े दान करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।
छायादान शनि को प्रसन्न करने का अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हुए उसे शनि मंदिर में रख दें। यह उपाय लगातार ग्यारह शनिवार या तेईस शनिवार करना चाहिए। छायादान करते समय मन में शुद्ध भाव रखना और शनि देव से क्षमा याचना करना आवश्यक है। यह उपाय शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति दिलाता है।
प्रतिदिन चींटियों को आटा और शक्कर मिलाकर खिलाना चाहिए। चींटियां शनि देव की प्रिय मानी जाती हैं और इन्हें भोजन देने से शनि प्रसन्न होते हैं। कौवों को रोटी खिलाना भी अत्यंत शुभफलदायी है। शनिवार को विशेष रूप से कौवों को भोजन देना चाहिए। काले तिल की रोटी या साधारण रोटी में सरसों का तेल लगाकर कौवों को देने से शनि की कृपा प्राप्त होती है। यह सरल उपाय नियमित रूप से करने से जीवन में स्थिरता आती है।
वैदिक ज्योतिष में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अनेक पारंपरिक और शक्तिशाली उपाय बताए गए हैं।
शनि के बीज मंत्र का नियमित जाप करना अत्यंत लाभकारी है। शनिवार को या शनि नक्षत्र में ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः या ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करना चाहिए। शनि स्तोत्र और शनि चालीसा का पाठ भी अत्यंत फलदायी है। शनि महामंत्र नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् का जाप करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।
| दिन | उपाय | लाभ |
|---|---|---|
| मंगलवार | शुद्ध घी से सिंदूर अर्पित करें | शनि दोष निवारण |
| शनिवार | हनुमान चालीसा का पाठ | शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति |
| प्रतिदिन | सुंदरकांड का पाठ | मानसिक शांति और बल |
| शनिवार | काले तिल के तेल का दीपक | शनि का आशीर्वाद |
हनुमान जी शनि के देवता माने जाते हैं। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि के सभी दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को शुद्ध गौ घी से सिंदूर अर्पित करना चाहिए। हनुमान मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ है।
भगवान शिव कुम्भ राशि के देवता हैं और वायु तत्व के स्वामी हैं। वायु के रूप में शिव को कालाहस्तीश्वर के नाम से कालाहस्ती मंदिर में पूजा जाता है। प्रतिदिन भगवान शिव को धूप अर्पित करनी चाहिए। यदि यह संभव न हो तो शनिवार को अवश्य धूप अर्पित करें। शिव के मंत्र ॐ नमः शिवाय केदारेश्वराय हौं जुं सः का जाप करने से कुम्भ राशि की सभी कमजोरियां दूर होती हैं और शक्ति तथा सुरक्षा प्राप्त होती है। ज्योतिर्लिंग मंत्र सर्वोच्च उपायों में से एक हैं।
कुम्भ लग्न वालों के लिए सूर्य को बलवान बनाना अत्यंत आवश्यक है। गायत्री मंत्र ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धिमहि धियो यो नः प्रचोदयात् का प्रातःकाल जाप करने से लग्न की रक्षा होती है और सूर्य अत्यंत बलवान हो जाता है। कुम्भ राशि के सूर्य देवता त्वष्ट्र हैं। ॐ घृणि त्वष्ट्र आदित्य मंत्र का जाप करके प्रतिदिन सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए। प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करना और सूर्य नमस्कार करना भी अत्यंत लाभकारी है।
लाल किताब में कुम्भ राशि के लिए कुछ अनूठे और विशिष्ट उपाय बताए गए हैं जो अन्य ग्रंथों में नहीं मिलते।
कुम्भ राशि वालों के लिए शरीर पर सोना पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्वर्ण की अंगूठी या माला धारण करने से भाग्य में वृद्धि होती है और ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम होता है। माथे पर केसर का तिलक लगाने से भी विशेष लाभ होता है। केसर का तिलक बुद्धि को तीव्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। नियमित रूप से केसर तिलक लगाने से सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
गेहूं, गुड़ तथा चावल का दान करना कुम्भ राशि वालों के लिए अत्यंत लाभकारी है। शनिवार को या शनि नक्षत्र में यह दान करना विशेष फलदायी होता है। गरीबों और जरूरतमंदों को गेहूं का आटा, गुड़ और चावल देने से शनि प्रसन्न होते हैं। मीठी वस्तुएं बच्चों को बांटना भी शुभ माना जाता है। यह उपाय करने से परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
सरसों के तेल का विशेष महत्व है। गाय को सरसों का तेल रोटी में लगाकर खिलाना चाहिए। काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी देना शनि को प्रसन्न करता है। शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना और तेल का दान करना अत्यंत शुभ है। पीपल के वृक्ष के नीचे शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
सप्ताह के विशेष दिनों में किए गए उपाय अधिक फलदायी होते हैं और शीघ्र परिणाम देते हैं।
मंगलवार को भगवान हनुमान की विशेष पूजा करनी चाहिए। प्रातःकाल स्नान करके हनुमान मंदिर जाएं और सिंदूर चढ़ाएं। लाल फूल और बूंदी का प्रसाद चढ़ाना शुभ है। हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान आरती गाएं। मंगलवार को लाल रंग के वस्त्र धारण करने से मंगल ग्रह प्रसन्न होता है। संकटमोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं।
| दान की वस्तु | लाभ |
|---|---|
| पीला वस्त्र | बृहस्पति की कृपा और ज्ञान वृद्धि |
| चना दाल | आर्थिक स्थिति में सुधार |
| हल्दी | स्वास्थ्य लाभ और रोग निवारण |
| पीले फूल | मानसिक शांति और प्रसन्नता |
| केला | संतान सुख और पारिवारिक सुख |
| केसर | बुद्धि विकास और स्मरण शक्ति |
गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभफलदायी है। इस दिन व्रत रखना और बृहस्पति की पूजा करना चाहिए। पीले रंग के वस्त्र पहनना और पीले फूल भगवान को अर्पित करना लाभकारी है।
सोमवार के दिन भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करना चाहिए। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत पवित्र कार्य है। सोमवार व्रत रखने से शिव की कृपा प्राप्त होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शिव चालीसा और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी है।
जल और नारियल वैदिक ज्योतिष में पवित्रता और शुद्धिकरण के प्रतीक माने जाते हैं।
बहते हुए जल में नारियल बहाना अत्यंत शुभफलदायी उपाय है। पूर्णिमा या अमावस्या के दिन नदी में जाकर नारियल बहाना चाहिए। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर और उसमें सिक्के रखकर जल में प्रवाहित करें। यह उपाय करते समय अपनी मनोकामना का स्मरण करें। बहते जल में काले तिल प्रवाहित करना भी शनि दोष निवारण के लिए लाभकारी है। यह उपाय नवग्रह शांति के लिए भी किया जाता है।
लगातार तैंतालीस दिन नंगे पांव मंदिर जाने से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव समाप्त होता है। यह उपाय अत्यंत कठिन है परंतु अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। प्रतिदिन प्रातःकाल शनि मंदिर या हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए। तैंतालीस दिन तक किसी एक मंत्र का नियमित जाप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
ग्यारह शनिवार तक छायादान करने का संकल्प लेना चाहिए। हर शनिवार को शनि मंदिर जाकर तेल दान करना और दीपक जलाना चाहिए। ग्यारह शनिवार तक लगातार व्रत रखने से शनि अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस अवधि में सात्विक भोजन करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ग्यारहवें शनिवार को गरीबों को भोजन कराना और दान करना विशेष फलदायी है।
वैदिक ज्योतिष में रुद्राक्ष और यंत्र ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने के शक्तिशाली साधन हैं।
कुम्भ राशि के जातकों के लिए बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत लाभकारी है। यह रुद्राक्ष सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करता है और कुम्भ लग्न की कमजोरी को दूर करता है। बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। इसे धारण करने से पहले किसी योग्य पंडित से शुद्धिकरण और प्राण प्रतिष्ठा करवा लेनी चाहिए। सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके इसे धारण करना चाहिए।
शनि यंत्र को सिद्ध करवाकर अपने पास रखना चाहिए। यंत्र को चांदी या तांबे की प्लेट पर बनवाना शुभ होता है। शनिवार को शनि नक्षत्र में यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। यंत्र के सामने नियमित रूप से दीपक जलाना और धूप देना चाहिए। शनि यंत्र पूजा स्थान में रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता। व्यवसाय स्थल पर भी शनि यंत्र रखना लाभकारी है।
स्फटिक से निर्मित हनुमान जी की मूर्ति की नियमित पूजा करनी चाहिए। स्फटिक पवित्रता का प्रतीक है और शनि दोष निवारण में विशेष सहायक है। स्फटिक हनुमान को मंगलवार को स्थापित करना चाहिए। प्रतिदिन सिंदूर चढ़ाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। स्फटिक हनुमान के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने से विशेष लाभ होता है।
शनि को प्रसन्न करने के लिए नीलम रत्न धारण करना सबसे प्रभावशाली उपाय माना जाता है। कुम्भ राशि के जातक नीलम पहन सकते हैं। परंतु नीलम धारण करने से पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। नीलम कभी कभी विपरीत प्रभाव भी डाल सकता है। शनिवार को शनि होरा में नीलम धारण करना चाहिए। रत्न को पहनने से पूर्व गंगाजल से शुद्ध करना और मंत्रों से सिद्ध करवाना आवश्यक है।
वैदिक ज्योतिष में प्रकृति से जुड़े उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं और दीर्घकालिक लाभ प्रदान करते हैं।
कुम्भ राशि में शनि के लिए वृक्षारोपण सर्वोत्तम उपायों में से एक है। अपनी जन्म नक्षत्र से संबंधित वृक्ष लगाना विशेष फलदायी होता है। पीपल का वृक्ष शनि का प्रिय माना जाता है और इसे लगाने से शनि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शनिवार को वृक्षारोपण करना अत्यंत शुभ है। वृक्षों की नियमित देखभाल करना और उन्हें जल देना पुण्य कार्य माना जाता है। वृक्षारोपण से पर्यावरण की रक्षा के साथ साथ ग्रह शांति भी होती है।
पीपल के वृक्ष की प्रतिदिन परिक्रमा करनी चाहिए। शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ है। पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाना और उसकी पूजा करना शनि को प्रसन्न करता है। पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर शनि स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ होता है। पीपल के वृक्ष की जड़ों में दूध चढ़ाना भी शुभफलदायी है।
शनि देव को दीन दुखियों और पीड़ितों का देवता माना जाता है। समाज सेवा के माध्यम से शनि को प्रसन्न किया जा सकता है।
कुम्भ राशि प्राकृतिक रूप से ग्यारहवें भाव की राशि है जो श्रवण से संबंधित है। जो लोग सुनने में असमर्थ हैं और श्रवण यंत्र नहीं खरीद सकते उन्हें श्रवण यंत्र दान करना अत्यंत लाभकारी है। यह दान करने से शनि की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कानों से संबंधित सभी समस्याएं दूर होती हैं। जरूरतमंद बधिर व्यक्तियों की सहायता करना शनि को अत्यंत प्रिय है।
| सेवा कार्य | फल |
|---|---|
| अंधों की सहायता | दृष्टि दोष निवारण और ज्ञान प्राप्ति |
| लंगड़ों को सहारा | गति संबंधी रोगों से मुक्ति |
| सफाई कर्मचारियों का सम्मान | शनि की प्रसन्नता |
| नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार | घरेलू शांति और समृद्धि |
| भिखारियों को भोजन | धन वृद्धि और पुण्य लाभ |
विकलांग, अंधे और लंगड़े लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना शनि को अत्यंत प्रिय है। इनकी सेवा करना और इनकी सहायता करना शनि दोष निवारण का सर्वोत्तम उपाय है। किसी भी प्रकार के शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति का मजाक नहीं बनाना चाहिए।
प्रतिदिन या सप्ताह में एक बार गरीबों को भोजन कराना चाहिए। शनिवार को विशेष रूप से जरूरतमंदों को भोजन देना शुभफलदायी है। पुराने कपड़े और कंबल गरीबों को दान करने से शनि प्रसन्न होते हैं। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े बांटना अत्यंत पुण्य कार्य है। भूखों को भोजन कराना सर्वोत्तम दान माना जाता है। अन्नदान से बढ़कर कोई दान नहीं है।
शनि अशुद्धता के प्रतीक हैं और इसके लिए सर्वोत्तम उपाय नारायण हैं जो सदैव पवित्र हैं।
विष्णु सहस्रनाम का प्रतिदिन पाठ या श्रवण करना चाहिए। विशेष रूप से यदि आपकी जन्म चंद्र राशि कर्क, वृश्चिक, मकर, कुम्भ या मीन है तो यह पाठ अत्यंत लाभकारी है। प्रातःकाल स्नान के पश्चात विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। यदि पूर्ण पाठ संभव न हो तो कम से कम सुनना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम सभी ग्रह दोषों को शांत करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
ॐ नमो नारायणाय मंत्र का नियमित जाप करना अत्यंत फलदायी है। यह मंत्र शनि के समस्त दोषों को दूर करता है। एकादशी के दिन इस मंत्र का विशेष जाप करना चाहिए। नारायण की पूजा करना और तुलसी के पौधे की सेवा करना शुभफलदायी है। विष्णु के विभिन्न रूपों की आराधना करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।
कुम्भ राशि कालपुरुष की प्राकृतिक बाधक राशि है। इसलिए बाधाओं के निवारण के लिए गणपति की उपासना अत्यंत आवश्यक है।
कुम्भ राशि से जुड़े भगवान गणेश की उपासना गजपतये नमः मंत्र से करनी चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल गणेश जी की पूजा करके यह मंत्र एक सौ आठ बार जपना चाहिए। बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल और मोदक चढ़ाना चाहिए। गणेश चालीसा और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।
गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करते हैं। कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से पूर्व गणेश वंदना करनी चाहिए। घर में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। मंगलवार को गणेश मंदिर जाना और प्रसाद चढ़ाना शुभ है। सिद्धिविनायक और अष्टविनायक के दर्शन करने से विशेष लाभ होता है।
कुछ विशेष तिथियां और समय शनि उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
शनि प्रदोष के दिन विशेष उपाय करने चाहिए। इस दिन आठ कदम चलना या कदम कदम चलने की विधि से मंदिर जाना अत्यंत फलदायी है। शनि प्रदोष के दिन शिव मंदिर जाकर पूजा करनी चाहिए। प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल चढ़ाना और प्रदोष स्तोत्र का पाठ करना शुभ है। शनि प्रदोष व्रत रखने से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
शनि जयंती के दिन कुम्भ राशि के जातकों को गरीब बच्चों को पेन, किताबें और पढ़ाई से जुड़ी चीजें दान करनी चाहिए। इससे शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शनि जयंती पर शनि मंदिर जाना और विशेष पूजा करना अत्यंत शुभफलदायी है। इस दिन व्रत रखना और शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। शनि जयंती पर तेल, काले तिल और लोहे का दान करना विशेष लाभकारी है।
जब अमावस्या और शनिवार का संयोग हो तो वह समय शनि उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा और दान करना चाहिए। शनि अमावस्या पर पितरों का तर्पण करना और शनि देव की पूजा करना दोनों ही फलदायी हैं। इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और काले तिल का दान करना अत्यंत शुभ है।
शनि से संबंधित आहार और जीवनशैली का पालन करने से ग्रह दोष कम होते हैं।
फास्ट फूड, जंक फूड और फ्रोजन फूड से दूर रहना चाहिए। शुद्ध सात्विक भोजन को अपनाना अत्यंत लाभकारी है। ताजा और घर का बना भोजन करना चाहिए। शनि और राहु से संबंधित खाद्य पदार्थ न खाने से पूरे वर्ष स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। हरी सब्जियां और फल अधिक खाने चाहिए।
| समय | आहार | लाभ |
|---|---|---|
| प्रातःकाल | केवल फल या दूध | शनि की प्रारंभिक कृपा |
| दोपहर | एक समय भोजन | संयम और अनुशासन |
| सायंकाल | हल्का भोजन या फलाहार | पाचन और शुद्धि |
| रात्रि | दूध या फल | शांतिपूर्ण नींद |
शनिवार को व्रत रखना अत्यंत फलदायी है। इस दिन केवल एक समय भोजन करना चाहिए। तेल और नमक रहित भोजन करने से विशेष लाभ होता है। शनिवार को काले तिल और उड़द की वस्तुओं का सेवन करना शुभ माना जाता है।
लाल किताब के उपाय कितने दिन करने चाहिए
लाल किताब के अधिकांश उपाय ग्यारह, तेईस या तैंतालीस दिन तक करने चाहिए। कुछ उपाय नियमित रूप से जीवनभर करने से अधिकतम लाभ मिलता है। छायादान ग्यारह या तेईस शनिवार तक करना चाहिए।
कुम्भ राशि में शनि की साढ़ेसाती कब आती है
कुम्भ राशि में शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चलता है जो सबसे कठिन माना जाता है। वर्तमान में शनि अपनी राशि में गोचर कर रहे हैं। इस समय हनुमान चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत लाभकारी है।
शनि को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है
शनि को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना और शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाना है। दीन दुखियों और विकलांगों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी अत्यंत प्रभावशाली है।
क्या नीलम रत्न धारण करना सुरक्षित है
नीलम रत्न धारण करने से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। कुम्भ राशि के जातक नीलम पहन सकते हैं परंतु पहले तीन दिन परीक्षण करना आवश्यक है। यदि कोई नकारात्मक प्रभाव दिखे तो तुरंत उतार देना चाहिए।
वृक्षारोपण क्यों महत्वपूर्ण उपाय है
वृक्षारोपण पर्यावरण सुरक्षा के साथ साथ शनि को प्रसन्न करने का दीर्घकालिक उपाय है। वृक्ष प्राण वायु प्रदान करते हैं और वायु तत्व की राशि होने के कारण कुम्भ राशि के लिए यह विशेष लाभकारी है। पीपल का वृक्ष शनि का निवास स्थान माना जाता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 32
इनसे पूछें: विवाह, करियर, व्यापार, स्वास्थ्य
इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
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