By पं. संजीव शर्मा
जानिए किस प्रकार मेष राशि आपके सिर मस्तिष्क और स्वभाव को नियंत्रित करती है

ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच एक ऐसा गुप्त कनेक्शन विद्यमान है जिसे गहराई से समझ लिया जाए तो चेतना विस्मय से भर जाती है। सनातन काल की प्राचीन भारतीय ज्योतिषीय परंपरा यह स्पष्ट उद्घोषणा करती है कि मनुष्य मात्र हाड़ मांस और मिट्टी का पुतला नहीं है बल्कि उसके भीतर पूरा का पूरा ब्रह्मांड एक जीवंत रूप में सांस ले रहा है। यदि किसी व्यक्ति की राशि मेष है या उसके किसी बहुत प्रिय व्यक्ति का संबंध मेष राशि से है तो इस गूढ़ विज्ञान को पूरी आत्मीयता से महसूस करना आवश्यक है। आकाश मंडल के दूरस्थ सितारे और ग्रह किस प्रकार मनुष्य के सोचने के तरीके, उसके अनियंत्रित गुस्से, उसकी शारीरिक बीमारियों और यहां तक कि उसके चेहरे पर मौजूद बचपन के निशानों तक को तय करते हैं, यह देखना अत्यंत विस्मयकारी है।
वैदिक ज्योतिष के गहन सिद्धांतों के अनुसार कालपुरुष का सरल और सीधा अर्थ है समय का देवता अथवा ब्रह्मांडीय पुरुष। भारत के त्रिकालदर्शी ऋषियों ने ध्यान की उच्च अवस्था में यह साक्षात देखा था कि यह दृश्य और अदृश्य ब्रह्मांड वास्तव में एक विशाल मानव शरीर की ही तरह क्रिया करता है।
इसी दिव्य अवधारणा के आधार पर कालपुरुष कुंडली का निर्माण हुआ जो इस संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे पहला प्राकृतिक नक्शा या ब्लूप्रिंट है जहां से फलित ज्योतिष की नींव पड़ती है। इस नैसर्गिक कुंडली का प्रारंभ सदैव मेष राशि से होता है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि मेष राशि इस ब्रह्मांडीय पुरुष का पहला घर और सबसे महत्वपूर्ण शीर्ष हिस्सा है। ज्योतिष का शाश्वत नियम कहता है कि जो कुछ भी ब्रह्मांड में व्याप्त है वही सब हमारे पिंड अर्थात शरीर में भी हुबहू मौजूद है।
कालपुरुष की ब्रह्मांडीय संरचना में प्रथम स्थान पर सुशोभित होने के कारण मेष राशि को भचक्र का मुकुट माना जाता है। मानव शरीर में यह राशि मुख्य रूप से निम्नलिखित महत्वपूर्ण अंगों का पूर्ण संचालन और नियंत्रण करती है
यह मानव शरीर का वह परम पवित्र हिस्सा है जहां मनुष्य की चेतना और आत्मा का मुख्य निवास माना गया है। इसी स्थान से कोई भी व्यक्ति पूरी दुनिया को देखता है, अनुभूतियां संचित करता है और अपने जीवन के सबसे बड़े निर्णय लेता है।
मेष राशि के जातकों के भीतर अद्भुत जिद्द, निडरता और कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा पायी जाती है। इस व्यवहार का सीधा संबंध उनके मुख्य अंग सिर से ही जुड़ा हुआ है
मेष राशि का अपने शारीरिक अंगों के साथ जो संबंध है उसको समझने के लिए इसके पीछे कार्य कर रही विभिन्न ब्रह्मांडीय शक्तियों को टुकड़ों में देखना आवश्यक है
मेष राशि के अधिपति ग्रह मंगल हैं जो मानव शरीर के भीतर लाल रक्त और हड्डियों के भीतर की मज्जा को नियंत्रित करते हैं। जब भी किसी मेष राशि के व्यक्ति को तीव्र क्रोध आता है तो उसका चेहरा अचानक लाल हो जाता है और आंखें तन जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मंगल की अग्निवत ऊर्जा पूरे शरीर के खून के बहाव को सीधे उनके सिर और मस्तिष्क की तरफ धकेल देती है।
यह एक शुद्ध अग्नि तत्व की राशि है और इसका प्राकृतिक स्वभाव चर अर्थात निरंतर चलायमान रहने वाला है। यही कारण है कि इनके मस्तिष्क के भीतर विचारों की एक ऐसी भट्टी चौबीसों घंटे जलती रहती है जो कभी शांत नहीं होती। ये लोग सोते समय भी अपने अचेतन मन में किसी न किसी योजना या प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे होते हैं। इनका दिमाग चाहकर भी पूरी तरह रिलैक्स मोड पर नहीं जा पाता।
मेष राशि का प्रतीक चिन्ह एक सींग वाला भेड़ या मेंढा है। एक मेंढा अपनी लड़ाई सदैव अपने सिर के बल पर ही लड़ता है और सामने वाले से सीधे अपना सिर टकराता है। इसी वजह से मेष राशि के जातक जीवन की बड़ी से बड़ी विभीषिकाओं और मुसीबतों से सीधे आंखें मिलाने और उनसे सिर टकराने का हौसला रखते हैं। पीठ दिखाकर भागना इनके संस्कार में नहीं होता।
इस राशि के प्रधान देवता देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय हैं। जैसे एक कुशल सेनापति युद्ध में सबसे आगे रहकर सेना को दिशा देता है वही काम मेष राशि के लोगों का मस्तिष्क करता है। इसके साथ ही अग्नि देव इन्हें वह प्रखर मानसिक तेज प्रदान करते हैं जिससे ये कठिन से कठिन परिस्थितियों का हल भी अपनी कुशाग्र बुद्धि से पलक झपकते ही निकाल लेते हैं।
चूंकि सिर इस राशि का सबसे शक्तिशाली और ऊर्जावान अंग है इसलिए यही हिस्सा इनकी सबसे बड़ी शारीरिक कमजोरी भी बन जाता है। इस कारण इन्हें कुछ विशिष्ट शारीरिक और भावनात्मक जोखिमों का सामना सदैव करना पड़ता है
जब भी मेष राशि के लोग विपरीत परिस्थितियों में अपनी वास्तविक भावनाओं को जबरन दबाते हैं या अपनी क्षमता से अधिक मानसिक तनाव ले लेते हैं तो वह अवरुद्ध ऊर्जा इनके सिर में माइग्रेन या भयंकर सिरदर्द बनकर फूटती है।
मस्तिष्क के लगातार सक्रिय रहने और विचारों के अनवरत प्रवाह के कारण इन्हें रात के समय शांति से सोने में बहुत कठिनाई होती है। जब पूरी दुनिया सो रही होती है तब रात को दो बजे भी इनका दिमाग नए विचारों और योजनाओं को बुन रहा होता है जिससे इन्हें अनिद्रा की समस्या घेर लेती है।
यह एक अत्यंत अनूठा ज्योतिषीय तथ्य है कि लगभग हर मेष राशि या मेष लग्न के व्यक्ति के चेहरे, माथे या सिर के हिस्से पर बचपन की चोट, कटने या जलने का कोई न कोई स्थायी निशान अवश्य पाया जाता है। धारदार चीजों, वाहनों या आग से इनके शीर्ष भाग पर चोट लगने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
उम्र के बढ़ने के साथ साथ अत्यधिक गुस्सा, जल्दबाजी और लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव सीधे इनके मस्तिष्क की महीन नसों पर भारी दबाव डालता है। इसके कारण इन्हें उच्च रक्तचाप जैसी व्याधियों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।
मेष राशि के अंगों में ही क्यों सबसे ज्यादा संवेदनशीलता और बीमारियों का खतरा रहता है इसके पीछे तीन बेहद ठोस ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं
मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल हैं जो शरीर में अग्नि और जीवनदायिनी रक्त के प्रवाह के मुख्य नियंत्रक हैं। जब भी मेष राशि का जातक अचानक किसी भारी तनाव, अत्यधिक क्रोध या बहुत बड़े उत्साह की स्थिति में आता है तो उसके शरीर का पूरा रक्त परिसंचरण बहुत तीव्र गति से सीधे ऊपर की तरफ उसके मस्तक की ओर भागता है। रक्त की नसों पर अचानक बढ़ने वाला यही तीव्र दबाव माइग्रेन, नसों के खिंचाव और भयंकर बेचैनी का मुख्य आधार बनता है।
मेष राशि के भीतर कर्म और अनुशासन के स्वामी शनि देव पूर्णतः नीच अवस्था के हो जाते हैं। शनि का मूल स्वभाव है धीरज रखना, ठहरना, आत्मनिरीक्षण करना और अत्यंत सावधानी से आगे बढ़ना। चूंकि मेष राशि में आकर शनि अपनी शक्ति खो देते हैं इसलिए इस राशि के जातकों के भीतर से स्वाभाविक धीरज गायब हो जाता है। ये किसी भी कार्य को इतनी हड़बड़ी, अदम्य जल्दबाजी और अति उत्साह में करते हैं कि अक्सर इनका पैर फिसल जाता है या ये किसी भौतिक वस्तु से टकरा जाते हैं। इसी असावधानी के कारण इन्हें सिर या चेहरे पर चोट लगने का रिस्क सबसे ज्यादा रहता है।
मेष राशि में जगत की आत्मा कहे जाने वाले सूर्य देव उच्च अवस्था के होते हैं। सूर्य और अग्नि दोनों का ही सीधा संबंध प्रचंड ऊष्मा, प्रकाश और तेज से है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मेष राशि के व्यक्तियों के मस्तिष्क के भीतर विचारों की एक अदृश्य भट्टी चौबीसों घंटे प्रज्वलित रहती है। अपने दिमाग को कभी भी पूरी तरह शांत न रख पाने की इस आदत के कारण इनका मस्तिष्क धीरे धीरे ओवरहीट यानी मानसिक रूप से पूरी तरह थक जाता है जिसके परिणामस्वरूप चिड़चिड़ापन और ब्रेन बर्नआउट जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
मेष राशि वालों का दिमाग वास्तव में एक ऐसी सुपरफास्ट गाड़ी की तरह कार्य करता है जिसका इंजन तो बेहद शक्तिशाली है परंतु उसका ब्रेक यानी धीरज बहुत ज्यादा कमजोर है। यही आंतरिक असंतुलन उनके सिर और चेहरे को अक्सर संकट में डाल देता है।
अपने इस सबसे कीमती और संवेदनशील अंग अर्थात मस्तिष्क की सुरक्षा करने और उसकी ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए मेष राशि के लोगों को कुछ विशेष नियमों का पालन तुरंत शुरू कर देना चाहिए
इस पूरे ज्योतिषीय विश्लेषण के पीछे एक ऐसा मर्मस्पर्शी सच छुपा हुआ है जिसे केवल एक मेष राशि का जातक ही अपने अकेलेपन में महसूस कर सकता है। क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में मेष राशि वालों का रोना और उनकी आंखों से निकलने वाले आंसू सबसे ज्यादा सच्चे और पवित्र होते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि इनका सीधा संबंध उसी चेहरे और उन्हीं भावुक आंखों से है जो साक्षात कालपुरुष का मुकुट हैं।
मेष राशि के लोग बाहरी दुनिया के सामने जितने कठोर, जिद्दी, निडर और रफ एंड टफ दिखाई देते हैं उनका दिल अंदर से उतना ही ज्यादा मासूम, कोमल और एक छोटे नवजात बच्चे की तरह निष्पाप होता है।
वे दुनिया के सामने कभी भी अपनी लाचारी या अपने आंसुओं का तमाशा नहीं बनाते। जब वे बहुत ज्यादा टूट जाते हैं तो किसी अंधेरे अकेले कमरे में चुपचाप बैठकर अपने सिर को अपने दोनों घुटनों के बीच छुपाकर रो लेते हैं। परंतु इस भावुक अवस्था के बाद जब वे उस कमरे के दरवाजे से बाहर आते हैं तो उनके चेहरे पर वही विजेता वाली चिरपरिचित मुस्कान होती है। वे जीवन की राह में बार बार गिरते हैं, उनका सिर जख्मी होता है, लोग उनका भरोसा तोड़ते हैं परंतु वे अपनी राख से दोबारा उठ खड़े होते हैं और अपनी आंखें पोंछकर पूरी दुनिया से पूरे स्वाभिमान के साथ कहते हैं कि मैं अभी हारा नहीं हूं।
कालपुरुष कुंडली क्या होती है और चिकित्सा ज्योतिष में इसका क्या महत्व है कालपुरुष कुंडली इस पूरे ब्रह्मांड को एक विशाल पुरुष का स्वरूप मानकर बनाई गई एक दिव्य काल्पनिक कुंडली है। इसका मुख्य उपयोग चिकित्सा ज्योतिष में मानव शरीर के विभिन्न अंगों की बनावट, उनकी आंतरिक क्षमता, ग्रहों के प्रभाव और संभावित रोगों की सटीक पहचान करने के लिए प्राचीन काल से किया जाता रहा है।
क्या जन्मकुंडली के कमजोर भावों से भविष्य की शारीरिक बीमारियों का पता लगाया जा सकता है हां यह पूरी तरह संभव है। यदि कालपुरुष कुंडली का कोई विशेष भाव या राशि आपकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली में निर्बल अवस्था में है या उस पर पाप ग्रहों की पूर्ण दृष्टि पड़ रही है तो उस भाग से जुड़े शारीरिक अंगों में कमजोरी, संक्रमण या दीर्घकालिक रोग होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
पेट और पाचन तंत्र की खराबी का संबंध किस राशि और ग्रह से माना जाता है कालपुरुष कुंडली के सिद्धांतों के अनुसार छठी राशि यानी कन्या राशि हमारी आंतों और निचले पाचन तंत्र को पूरी तरह से नियंत्रित करती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कन्या राशि या उसका स्वामी बुध ग्रह पीड़ित होता है तो उसे कब्ज, गैस और पाचन संबंधी गंभीर विकार उत्पन्न होते हैं।
मानव शरीर में रीढ़ की हड्डी और हड्डियों की मजबूती के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है मानव शरीर की मुख्य रीढ़ की हड्डी और पीठ के ऊपरी हिस्से का पूरा नियंत्रण सिंह राशि के अधिकार क्षेत्र में आता है जिसका स्वामी ग्रह सूर्य है। कुंडली में सूर्य की स्थिति जितनी अधिक मजबूत और प्रकाशमान होगी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी और उसका आत्मबल उतना ही सुदृढ़ रहता है।
पैरों और टखनों में होने वाले लगातार दर्द का ज्योतिषीय कारण क्या होता है पैरों की पिंडलियों और दोनों टखनों का सीधा संबंध कुंभ राशि से होता है और पैर के तलवों का संबंध मीन राशि से माना जाता है। जब कुंडली में शनि और बृहस्पति ग्रह कमजोर होते हैं या इन राशियों पर राहु केतु का अशुभ प्रभाव होता है तब पैरों में दर्द और नसों की कमजोरी की समस्या उत्पन्न होती है।
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