By पं. अमिताभ शर्मा
मेष के प्रेम, जुनून, निष्ठा और भावनात्मक तीव्रता को समझें

भारतीय ज्योतिष में मेष राशि को कालपुरुष की कुंडली की प्रथम राशि माना गया है। यह आरंभ, जिजीविषा, साहस और उस मूल ऊर्जा का प्रतीक है जहाँ से गति शुरू होती है। यही कारण है कि मेष राशि का प्रेम कभी साधारण नहीं होता। यह ठहरा हुआ, सोच समझकर धीरे बढ़ने वाला प्रेम नहीं है बल्कि ऐसा प्रेम है जो व्यक्ति के भीतर अचानक प्रज्वलित होता है और उसे पूरी तीव्रता के साथ अपने प्रभाव में ले लेता है। मेष राशि प्रेम को केवल एक भावनात्मक जुड़ाव की तरह नहीं जीती बल्कि उसे एक अभियान, एक विजय, एक घोषणा और कई बार एक प्रतिज्ञा की तरह जीती है। इस राशि का प्रेम व्यक्ति को यह महसूस कराता है कि जीवन में अभी बहुत कुछ जीतना बाकी है और यदि प्रेम सच्चा हो तो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ा भी जा सकता है। यही कारण है कि मेष राशि से प्रेम करना कई लोगों के लिए जादुई अनुभव भी बनता है और कई बार चुनौतीपूर्ण अग्निपरीक्षा भी।
मेष राशि का प्रेम बाहर से जितना तीखा दिखाई देता है, भीतर से उतना ही सीधा और निष्कपट होता है। इसमें छल, घुमाव, लंबा भावनात्मक खेल या परोक्ष संकेतों की जटिलता कम होती है। जो महसूस होता है, वही किसी न किसी रूप में सामने आ जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति भी है और सबसे बड़ा संकट भी। यह राशि प्रेम में नकलीपन नहीं निभा सकती। यदि इसे कोई पसंद आ जाए, तो यह रुक कर अधिक देर तक गणना नहीं करती। यह आगे बढ़ती है, छूती है, बोलती है, जताती है और संबंध को किसी स्पष्ट दिशा में ले जाना चाहती है। यदि सामने वाला व्यक्ति इसके उत्साह, इसकी स्वतंत्रता और इसके आत्मसम्मान को समझ ले, तो मेष राशि असाधारण रूप से वफादार, सुरक्षात्मक और समर्पित साथी सिद्ध हो सकती है। लेकिन यदि उसे धोखा, अपमान या नियंत्रण का अनुभव हो, तो वही प्रेम बहुत तीखा, निर्णायक और कठोर रूप भी ले सकता है।
मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगल केवल ऊर्जा का ग्रह नहीं बल्कि साहस, युद्ध, रक्षण, आवेग और प्रत्यक्ष कर्म का भी कारक माना जाता है। यही कारण है कि मेष राशि का प्रेम लंबे समय तक भीतर छिपा नहीं रहता। यहाँ भावना आती है तो उसके साथ तुरंत क्रिया भी आती है। यह राशि प्रेम में प्रतीक्षा की राजनीति नहीं समझती। इसे अस्पष्टता थका देती है और अत्यधिक विलंब क्रोधित कर सकता है। यदि इसे लगता है कि सामने वाला व्यक्ति सच्चा है, तो यह अपनी पूरी शक्ति के साथ संबंध में उतरती है। यदि इसे संदेह हो कि कहीं सामने केवल खेल हो रहा है, तो इसका धैर्य बहुत जल्दी समाप्त हो सकता है।
मंगल का एक और गहरा प्रभाव यह है कि मेष राशि प्रेम में केवल चाहत नहीं रखती बल्कि रक्षण भी करती है। यह अपने प्रिय के लिए लड़ने में संकोच नहीं करती। इसके प्रेम में कोमलता हो सकती है, पर उसके नीचे एक योद्धा सदैव जाग्रत रहता है। यही कारण है कि मेष राशि वाले साथी के दुख पर लंबे भाषण नहीं देते बल्कि तुरंत पूछ बैठते हैं कि समस्या क्या है और उसे हल कैसे करना है। उनके लिए प्रेम निष्क्रिय भावना नहीं बल्कि सक्रिय उपस्थिति है। इसीलिए इनके साथ प्रेम में सुरक्षा भी मिलती है और दबाव भी महसूस हो सकता है, क्योंकि वे प्रेम को निष्क्रिय दूरी में नहीं जीते।
मेष राशि का तत्व चर अग्नि है। यह स्थिर दीपक की लौ नहीं बल्कि वह अग्नि है जो आरंभ करती है, आगे बढ़ाती है और जीवन में गति भर देती है। प्रेम में इसका अर्थ यह है कि मेष राशि को जीवंतता चाहिए। यदि संबंध में नयापन, ऊर्जा, चुनौती, संवाद और आगे बढ़ने की भावना बनी रहे, तो यह राशि प्रेम में खिलती है। लेकिन यदि संबंध बहुत अधिक जड़, नीरस या अत्यधिक अनुमानित हो जाए, तो मेष राशि बेचैन होने लगती है।
चर अग्नि का स्वभाव यह भी बताता है कि मेष राशि बहुत जल्दी आकर्षित हो सकती है, बहुत जल्दी निर्णय ले सकती है और बहुत जल्दी क्रोध भी कर सकती है। पर इसका यह अर्थ नहीं कि इसका प्रेम झूठा होता है। बल्कि इसका सत्य यही है कि यह हर चीज़ पूरे तापमान के साथ जीती है। प्रेम में यह आधे मन से नहीं उतरती। यही कारण है कि इसका संबंध या तो बहुत ऊर्जावान होता है या बहुत संघर्षपूर्ण। बीच का धीमा धूसर क्षेत्र इस राशि को कम पसंद आता है।
मेष राशि का प्रतीक मेंढ़ा है और यह प्रतीक इसके प्रेम स्वभाव को आश्चर्यजनक सटीकता से प्रकट करता है। मेंढ़ा पीछे हटकर बहुत देर तक योजना नहीं बनाता, वह आगे बढ़कर टकराता है। प्रेम में भी मेष राशि का यही स्वभाव रहता है। यह परिणामों का अत्यधिक भय लेकर नहीं चलती। यदि किसी व्यक्ति की ओर आकर्षण हो जाए, तो वह उसे पाने की कोशिश करेगी। यह संकोच से अधिक पहल में विश्वास रखती है। कई बार यह गुण इसे रोमांचक प्रेमी बनाता है, क्योंकि इसके साथ संबंध में स्पष्टता रहती है। लेकिन यही गुण इसे आवेगी भी बना सकता है, क्योंकि हर टकराव को यह तुरंत सुलझा लेना चाहती है।
मेंढ़े का एक और अर्थ है आत्मसम्मान। मेष राशि वाले प्रेम में बहुत कुछ सह सकते हैं, पर अपमान नहीं। उनसे बहस की जा सकती है, उनसे मतभेद हो सकता है, उन्हें चुनौती भी दी जा सकती है, लेकिन यदि उनके सम्मान को चोट पहुँचे, तो उनका भीतर का योद्धा तुरंत सक्रिय हो उठता है। यही कारण है कि इनके साथ प्रेम में सत्य जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है सम्मान।
मेष राशि अश्विनी, भरणी और कृत्तिका के प्रथम चरण से प्रभावित होती है। अश्विनी प्रेम में गति, तात्कालिकता, उपचार और चुंबकीय शुरुआत देती है। इस प्रभाव वाले मेष व्यक्ति जल्दी जुड़ते हैं, तेजी से आगे बढ़ते हैं और कई बार साथी के जीवन में उपचारक ऊर्जा भी लाते हैं। भरणी प्रेम को गहराई, कामुकता, वफादारी और भीतर तक पकड़ लेने वाला भाव देती है। यहाँ मेष केवल तेज नहीं रहता बल्कि भीतर से गहरा और त्यागी भी हो सकता है। कृत्तिका का प्रभाव प्रेम में तेज, अहं और सत्य का संघर्ष लाता है। यहाँ व्यक्ति प्रेम में भी धारदार हो सकता है और गलत बात सहन नहीं करता।
| नक्षत्र | प्रेम का प्रमुख स्वरूप |
|---|---|
| अश्विनी | गति, आकर्षण, आरंभ, उपचार |
| भरणी | गहराई, वफादारी, तीव्र समर्पण |
| कृत्तिका | तेज, अहं, सत्य का टकराव |
इन नक्षत्रों के कारण मेष राशि का प्रेम एक ही रूप में नहीं रहता। कभी यह तेज और बालसुलभ उत्साह से भरा होता है, कभी अत्यंत रक्षक और गहरा हो जाता है और कभी इतना स्पष्ट और तीखा हो सकता है कि संबंध में कोई भ्रम बचता ही नहीं।
मेष राशि में सूर्य उच्च का माना जाता है, इसलिए इसके प्रेम में एक प्रकार का राजसी आत्मविश्वास और स्वाभाविक केंद्रता दिखाई देती है। मेष व्यक्ति प्रेम में केवल चाहता नहीं बल्कि यह भी चाहता है कि उसका संबंध विशिष्ट हो, स्पष्ट हो और उसमें उसकी गरिमा बनी रहे। वह अपने साथी को बहुत कुछ दे सकता है, पर बदले में वह निष्ठा और सम्मान चाहता है। उसके भीतर यह भावना गहरी होती है कि प्रेम में दोनों पक्ष पूरे मन से हों।
इसी राशि में शनि नीच का माना जाता है और यही कारण है कि मेष राशि के प्रेम में धैर्य की कमी कभी कभी समस्या बन सकती है। यह प्रतीक्षा, भावनात्मक विलंब, अनुत्तरित संदेश या अनिश्चितता को सहज नहीं ले पाती। जहाँ अन्य लोग समय देकर समझना चाहें, वहाँ मेष अक्सर तुरंत प्रतिक्रिया देना चाहती है। यह गुण कई बार इसे ईमानदार और प्रत्यक्ष बनाता है, पर कई बार इसी कारण यह जल्दबाजी में संबंध को कठिन मोड़ पर भी ले जा सकती है।
हाँ, मेष राशि वाले अत्यंत अच्छे साथी हो सकते हैं, विशेषकर उनके लिए जो स्पष्टता, सुरक्षा, साहस और जीवंतता को महत्व देते हैं। मेष राशि का प्रेम बनावटी नहीं होता। यह लंबे भावनात्मक खेलों में नहीं उलझती। यदि यह प्रेम करती है, तो सामने वाला व्यक्ति बहुत स्पष्ट रूप से महसूस कर सकता है कि वह महत्वपूर्ण है। यह साथी के सम्मान के लिए खड़ी हो सकती है, उसके संकट में पूरी शक्ति लगा सकती है और उसके लिए जोखिम तक उठा सकती है।
लेकिन इनके साथ संबंध निभाने के लिए सामने वाले को भी कुछ बातें समझनी पड़ती हैं। मेष राशि को चुनौती पसंद है, अपमान नहीं। इसे उत्साह पसंद है, ऊब नहीं। इसे सत्य पसंद है, गोलमोल व्यवहार नहीं। यदि साथी अत्यधिक नियंत्रित करने वाला हो, लगातार इसे रोकता रहे या इसके व्यक्तित्व को दबाना चाहे, तो मेष राशि भीतर से बुझने के बजाय भड़क उठेगी। इसी कारण इनके साथ प्रेम में स्वतंत्रता और परस्पर सम्मान दोनों आवश्यक हैं।
मेष राशि की सबसे उजली परत इसकी साहसी निष्ठा है। यह अपने प्रिय के लिए दीवार की तरह खड़ी हो सकती है। दूसरी बड़ी शक्ति है इसकी सीधापन। यह प्रेम को झूठ, संकेतों या चालाकी से नहीं जीती। तीसरी शक्ति है इसका उत्साह। यह साथी के जीवन में ऊर्जा, रोमांच और नयापन ला सकती है।
लेकिन इसकी अंधेरी परत को भी समझना आवश्यक है। इसमें अधीरता हो सकती है। क्रोध में यह ऐसे शब्द बोल सकती है जो सामने वाले को भीतर तक घायल कर दें, जबकि स्वयं कुछ देर बाद सामान्य भी हो जाए। इसमें अधिकार भावना भी आ सकती है, विशेषकर जब इसे लगे कि संबंध में इसकी भूमिका कमजोर पड़ रही है। इसके अतिरिक्त यदि संबंध में लगातार नीरसता बनी रहे, तो यह बहुत जल्दी मानसिक दूरी बनाने लगती है।
युवा अवस्था में मेष राशि का प्रेम अत्यधिक जुनूनी, प्रयोगशील और रोमांच केंद्रित होता है। इस समय वह आकर्षण, चुनौती और तीव्रता के पीछे भाग सकती है। तीस से चालीस वर्ष के बीच आते आते इसमें घर बसाने और रक्षक बनने की भावना बढ़ती है। अब यह अपने साथी को केवल चाहना नहीं बल्कि उसकी रक्षा और जीवन निर्माण में भागीदारी करना भी चाहती है।
चालीस से साठ वर्ष के बीच मेष राशि अधिक परिपक्व अग्नि बनती है। अब इसे केवल आवेग नहीं बल्कि सम्मान, बौद्धिक साथ और स्थिर उपलब्धि भी चाहिए होती है। साठ वर्ष के बाद इसका प्रेम अधिक शांत हो सकता है, लेकिन उसमें वफादारी और स्पष्टता की आवश्यकता बनी रहती है।
| आयु चरण | प्रेम का प्रमुख स्वरूप |
|---|---|
| 20 से 30 | आकर्षण, रोमांच, तीव्र पीछा |
| 30 से 40 | संरक्षण, अधिकार, घर बसाने की चाह |
| 40 से 60 | परिपक्व अग्नि, सम्मान, स्थिरता |
| 60 के बाद | शांति, वफादारी, स्पष्ट साथ |
यदि साथी झूठ बोले, तो मेष राशि का क्रोध बहुत तीखा हो सकता है, क्योंकि यह धोखे को केवल गलती नहीं बल्कि सम्मान पर आघात की तरह महसूस करती है। बड़ी लड़ाई के दौरान यह कड़वे शब्द कह सकती है, लेकिन यही व्यक्ति कुछ समय बाद फिर सामान्य भी हो सकता है, क्योंकि इसका क्रोध स्थायी विष की तरह नहीं बल्कि क्षणिक ज्वाला की तरह काम करता है। यदि साथी बीमार हो, तो मेष राशि पूरी दुनिया हिला देने जैसी तत्परता दिखा सकती है। इसे समस्या पर बैठकर रोना नहीं बल्कि समाधान करना आता है।
यदि साथी इसे अनदेखा करे, तो यह या तो सीधा सामना करेगी या फिर अपना ध्यान कहीं और मोड़ने लगेगी। सफलता के समय यह उदार हो सकती है और अपने साथी को सार्वजनिक रूप से सम्मान भी दे सकती है। यही इसका प्रकाशमय पक्ष है कि यह प्रेम में गर्व छिपाकर नहीं रखती, उसे जीती है।
मेष राशि के साथ संबंध में पहला नियम है सत्य। इसे पहेलियाँ, आधे उत्तर और चालाक भावनात्मक खेल पसंद नहीं। दूसरा नियम है सम्मान। बिना सम्मान के प्रेम इसके लिए खाली हो जाता है। तीसरा नियम है रफ्तार। इसे अत्यधिक जड़ता और नीरसता थका देती है। चौथा नियम है आज़ादी। इसे बाँधने की कोशिश उल्टा असर कर सकती है। पाँचवाँ नियम यह है कि टूटे हुए संबंध में यह कई बार बदला लेने से अधिक आगे बढ़ने और स्वयं को फिर से स्थापित करने में विश्वास रखती है।
मेष राशि को केवल गुस्सैल या जल्दबाज़ कह देना उसके स्वभाव के साथ अन्याय होगा। इसके भीतर एक ऐसी पहली ज्वाला होती है जो जीवन को आरंभ करती है, जो प्रेम को क्रिया में बदलती है, जो डर से पहले आगे बढ़ना जानती है। शायद इसी कारण इसका प्रेम कई बार कच्चा, असंसाधित और उग्र लगता है, पर उसी में इसकी सच्चाई भी छिपी होती है। जो व्यक्ति मेष राशि की इस अग्नि को संभालना सीख लेता है, उसे ऐसा साथी मिल सकता है जो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार हो।
क्या मेष राशि जल्दी प्यार में पड़ती है
हाँ, आकर्षण होने पर यह जल्दी आगे बढ़ सकती है।
क्या मेष राशि वफादार होती है
हाँ, यदि प्रेम सच्चा हो और सम्मान बना रहे, तो यह बहुत वफादार होती है।
क्या मेष राशि गुस्से में कठोर हो जाती है
हाँ, क्रोध में इसके शब्द बहुत तीखे हो सकते हैं, लेकिन इसका क्रोध लंबे समय तक नहीं रहता।
क्या मेष राशि को स्पेस चाहिए होता है
हाँ, यह प्रेम में भी स्वतंत्रता और अपने स्वभाव के लिए जगह चाहती है।
मेष राशि के प्रेम का सबसे बड़ा नियम क्या है
सत्य, सम्मान और जीवंतता, यही इसके प्रेम की सबसे आवश्यक शर्तें हैं।
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मेरी चंद्र राशि
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