By पं. अमिताभ शर्मा
साहस, नेतृत्व और नए आरंभ का प्रतीक

मेष राशि ज्योतिष की प्रथम राशि है। यह सृष्टि के आरंभ का प्रतीक बनी हुई है। मेंढे के चिह्न वाली यह राशि साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल प्रस्तुत करती है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित इस राशि की विशेषताएं जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। कई बार राशि से जुड़ी बारीक जानकारी की तत्काल आवश्यकता पड़ती है। जैसे स्वामी ग्रह, दृष्टि या नक्षत्र संबंधी। तब यह संपूर्ण डेटा उपयोगी सिद्ध होता है। ज्योतिष प्रेमी इसे आसानी से जांच सकते हैं। मेष राशि की ऊर्जा जीवन को गतिमान बनाती है। यह राशि नई यात्राओं की शुरुआत कराती है। व्यक्ति को सतत आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। प्राचीन काल से ज्योतिषकार इसे सृजन का केंद्र मानते हैं। वैदिक ज्योतिष में इसका विशेष स्थान है।
प्राचीन ग्रंथ जैसे सारावली में मेष राशि की कई अनोखी विशेषताओं का उल्लेख मिलता है। उग्र दृष्टि वाली आंखों में चमक या तेज स्पष्ट दिखाई देता है। यह आंखें साहस की झलक देती हैं। व्यक्ति की नजर में आकर्षण रहता है। घुटने कमजोर होते हैं। ये अक्सर शारीरिक रूप से संवेदनशील रहते हैं। चोट लगने पर सावधानी बरतनी चाहिए। व्यायाम से मजबूती लाएं। भृकुटी चौड़ी और स्पष्ट होती है। माथे पर स्पष्ट रेखाएं दिखाई देती हैं। यह बुद्धिमत्ता का संकेत है। चर राशि होने के कारण मेष सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशियों पर दृष्टि डालती है। यह दृष्टि प्रभावशाली होती है। कुंडली में इन राशियों पर असर पड़ता है। धातु प्रधान राशि है। खनिजों और धातुओं से गहरा संबंध रखती है। इसलिए रत्न और धातु संबंधी कार्यों में रुचि रहती है। खनन या धातु व्यापार सफल हो सकता है।
मेष राशि का संस्कृत नाम मेष या अज है। कभी विश्व भी कहा जाता है। चिह्न मेंढा है। यह केवल आगे बढ़ना जानता है। पीछे हटना नहीं सिखाया। राशि क्रम प्रथम है। कालपुरुष कुंडली में यह लग्न का स्थान रखती है। लग्न स्वयं को दर्शाता है। आत्मा का प्रतिनिधित्व। मेंढा अपने सिर से वार करता है। यह साहसपूर्ण और बाधा तोड़ने वाली प्रवृत्ति को दर्शाता है। जन्म और अस्तित्व की शुरुआत यही है। मेष में जन्मे व्यक्ति प्रारंभिक कार्यों में कुशल होते हैं। नई परियोजनाएं जल्दी शुरू करते हैं। चुनौतियों से लड़ते हैं।
मेष राशि वाले व्यक्ति में ऊर्जा का संचार प्रबल रहता है। वे नेतृत्व के गुणों से भरपूर होते हैं। निर्णय लेने में तीव्रता दिखाते हैं। जोखिम उठाने से नहीं घबराते। कभी आवेगपूर्ण हो जाते हैं। संयम सीखना लाभदायक रहता है। धैर्य से कार्य सिद्ध होते हैं। मेष प्रभाव से खेलकूद में सफलता मिलती है। सेना या पुलिस क्षेत्र उपयुक्त।
स्वामी ग्रह मंगल है। यह युद्ध, ऊर्जा और पराक्रम का कारक है। मंगल की स्थिति कुंडली में महत्वपूर्ण होती है। बलवान मंगल विजय दिलाता है। स्वामी देवता कार्तिकेय और हनुमान हैं। कार्तिकेय शक्ति के प्रतीक हैं। हनुमान भक्ति और बल के। मंगलवार को इनकी पूजा लाभकारी। तत्त्व अग्नि है। विशेष रूप से चराग्नि के रूप में जानी जाती है। चलने वाली आग की तरह सक्रिय। ज्वाला की भांति तेज। स्वभाव चर है। हमेशा सक्रिय रहने वाली। स्थिरता पसंद नहीं। परिवर्तन जीवन का हिस्सा। गुण रजोगुणी होता है। कर्म, इच्छा और जुनून प्रधान। रजोगुण सक्रियता बढ़ाता है। कार्यक्षेत्र में उन्नति। लिंग पुरुष है। आक्रामक और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त। पुरुष ऊर्जा नेतृत्व देती है। जाति क्षत्रिय है। शासन और संघर्ष की क्षमता प्रदान करती है। क्षत्रिय योद्धा स्वभाव का होता है। राजनीति या प्रशासन में सफल। दिशा पूर्व की ओर इशारा करती है। पूर्व दिशा सूर्योदय का प्रतीक है। नई शुरुआत का संकेत। घर का पूर्व भाग शुभ।
शरीर का अंग सिर है। इसलिए मेष जातक दिमागी कामों में तेज रहते हैं। सिरदर्द या माइग्रेन की शिकायत हो सकती है। तेल मालिश लाभदायक। कभी कभी जिद्दी स्वभाव भी दिखाते हैं। जिद से हानि हो सकती है। लचीलापन अपनाएं। प्रकृति पित्त प्रधान है। गर्मी और चयापचय से जुड़ी। पित्त की अधिकता से शरीर में ऊष्णता बनी रहती है। पित्त संतुलन के उपाय आवश्यक हैं। ठंडे पदार्थ ग्रहण करें। नारियल पानी पिएं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| तत्त्व | **अग्नि** (चराग्नि) |
| स्वभाव | **चर** |
| गुण | **रजोगुणी** |
| लिंग | **पुरुष** |
| जाति | **क्षत्रिय** |
| दिशा | **पूर्व** |
यह वर्गीकरण मेष को गतिशील और शक्तिशाली बनाता है। जीवन में नई शुरुआतें करने की प्रेरणा देता है। प्राचीन ज्योतिषकारों ने इसे सृष्टि चक्र का प्रारंभ बताया है। वैदिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन। दैनिक जीवन में उपयोगी।
उदय पृष्ठोदय है। पीछे से उदय होने वाली। रात्रि में प्रभाव बढ़ता है। चंद्रमा के साथ संयोग। शक्ति काल रात्रिबली है। रात में अधिक शक्तिशाली रहती है। रात्रि कार्यों में सफलता मिलती है। गुप्त कार्य लाभदायक। वश्य चतुष्पद है। चार पैरों वाले जीवों पर नियंत्रण। जैसे घोड़े या गाय। पशुपालन में रुचि। कद मध्यम होता है। न बहुत लंबा, न बहुत छोटा। संतुलित काया आकर्षक। शब्द अल्प शब्द है। शांत रहकर बड़ा प्रहार करने की प्रवृत्ति। बोलने से अधिक कार्य करने वाले। मौन शक्ति। प्राणी श्रेणी चतुष्पद है। चार पैरों वाला जीव। मेंढा इसका उदाहरण। प्रजनन क्षमता वंध्या या अल्प प्रसव वाली है। शुष्क ऊर्जा के कारण संतान में विलंब। गोपनीयता रखें। वर्ण रक्त वर्ण है। लाल या रक्त लाल रंग। रंग ऊर्जा का प्रतीक है। वस्त्र चयन में ध्यान। रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी।
ये विशेषताएं मेष को युद्धक्षेत्र का सिपाही बनाती हैं। शांत अवस्था में भी ताकत जमा करती है। ज्योतिष में ये तकनीकी बिंदु कुंडली विश्लेषण में सहायक हैं। फलादेश सटीक होता है। विवाह मिलान में उपयोग।
विस्तार 0° से 30° तक है। यह राशि का आकाशीय फैलाव है। नक्षत्रों का वितरण। उच्च का ग्रह सूर्य 10 अंश पर है। परम प्रतिष्ठा का स्थान। सूर्य यहां बलवान होता है। राजकीय सम्मान। नीच का ग्रह शनि 20 अंश पर है। परम संघर्ष का बिंदु। शनि यहां कमजोर पड़ता है। कष्ट सहनशीलता। मूलत्रिकोण में मंगल 0° से 12° तक रहता है। स्वामी की मजबूती। स्वाभाविक शक्ति। मित्र ग्रह सूर्य, गुरु और चन्द्रमा हैं। ये ग्रह सहायक सिद्ध होते हैं। मित्रता लाभ। शत्रु ग्रह बुध तथा शुक्र हैं। शुक्र सम भी माना जाता है। मारक भाव का स्वामी होने से शत्रु। वैवाहिक जीवन प्रभावित। तटस्थ ग्रह राहु और केतु हैं। कुंडली स्थिति पर निर्भर करते हैं। राहु केतु छाया ग्रह प्रभाव डालते हैं। अप्रत्याशित परिणाम। दशा में उतार चढ़ाव।
| ग्रह स्थिति | विवरण |
|---|---|
| उच्च | **सूर्य** (10 अंश) |
| नीच | **शनि** (20 अंश) |
| मूलत्रिकोण | **मंगल** (0°-12°) |
| मित्र | **सूर्य**, **गुरु**, **चन्द्रमा** |
| शत्रु | **बुध**, **शुक्र** |
ये बिंदु ग्रहों के प्रभाव को निर्धारित करते हैं। सूर्य की उच्च स्थिति नेतृत्व को मजबूत बनाती है। शनि नीच होने से धैर्य परीक्षा होती है। गोचर में सावधानी। वार्षिक फलादेश।
नक्षत्र अश्विनी के 4 पद, भरणी के 4 पद तथा कृत्तिका के 1 पद हैं। अश्विनी गति देती है। घोड़े की भांति तेज। भरणी परिवर्तन की। जन्म मृत्यु चक्र। कृत्तिका अग्नि की। काटने वाली। नाम अक्षर चे, चो, चू, ला, ली, लू, ले, लो, आ हैं। ये अक्षर जन्म नाम निर्धारित करते हैं। भाग्य प्रभावित। नक्षत्र स्वामी केतु, शुक्र और सूर्य हैं। केतु आध्यात्मिकता देता है। शुक्र सौंदर्य। सूर्य प्रतिष्ठा। कुल 9 पद हैं। ये नक्षत्र गति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। नाम अक्षर जीवन पथ को प्रभावित करते हैं। ज्योतिष में नाम से भाग्य जोड़ा जाता है। नाम शुभ रखें। अक्षरों का उच्चारण शक्ति।
कालपुरुष अंग मस्तिष्क, खोपड़ी और चेहरा हैं। सिर सभी कार्यों का केंद्र है। विचार उत्पत्ति। प्रकृति पित्त है। शरीर में गर्मी और अग्नि की अधिकता। गर्मी से त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। सनबर्न से बचें। संवेदनशील अंग आंखें, मस्तिष्क की धमनियां तथा ऊपरी जबड़ा हैं। आंखों की देखभाल जरूरी। चश्मा समय पर। शारीरिक बनावट में तीखी नाक, घनी भौहें तथा सुगठित मांसपेशियां होती हैं। मांसपेशियां मजबूत लेकिन चोट लगने पर ध्यान। व्यायाम नियमित। सिर संबंधी विकारों पर ध्यान आवश्यक है। रक्त संचार की समस्या हो सकती है। आयुर्वेद में पित्त शांत करने वाले उपाय लाभदायक। नस्य कर्म करें। ब्राह्मी घृत।
दृष्टि 5वीं, 8वीं और 11वीं राशि पर है। अर्थात सिंह, वृश्चिक, कुंभ। ये दृष्टियां लाभ, रहस्य और मित्रता प्रभावित करती हैं। पुत्र, आयु और लाभ भाव। अंधत्व अर्धरात्रि में माना जाता है। रात्रि में कमजोरी। दिन में बल। निवास पर्वत, रत्नमयी भूमि, अग्नि स्थान तथा जंगल हैं। पर्वत ऊंचाई के प्रतीक। यात्रा पसंद। योगकारक सूर्य, गुरु और चन्द्रमा हैं। ये ग्रह शुभ फल देते हैं। धन लाभ। मारक बुध, शुक्र और शनि हैं। इनसे सावधानी। स्वास्थ्य जांच। बाधक 11वां भाव कुंभ और उसका स्वामी शनि है। लाभ भाव में बाधा। मित्र वृत्ति प्रभावित। रोग योग ध्यान।
स्वर अ है। सभी ध्वनियों का आधार। वेदों में महत्वपूर्ण। मंत्र उच्चारण। विशेष संज्ञा क्रूर राशि है। दया से अधिक न्याय और अनुशासन। क्रूरता न्यायपूर्ण होती है। निर्णय क्षमता। आयुर्वेद संबंध सिर में रक्त संचार है। रक्तचाप नियंत्रण जरूरी। योगासन। जीवन दर्शन मैं हूँ है। अस्तित्व की घोषणा। आत्मविश्वास बढ़ाता है। ध्यान साधना। रत्न लाल मूंगा है। मंगलवार को धारण करें। अंगूठी में। शुभ धातु तांबा है। तांबे के बर्तन लाभकारी। जल पीने में। अंक 9, 1, 8, 27, 45 हैं। अंकों से भाग्यशाली दिन। नंबर चयन। शुभ रंग गहरा लाल, केसरिया, सिंदूरी हैं। वस्त्रों में प्रयोग करें। घर सज्जा। दान सामग्री मसूर दाल, गुड़, लाल वस्त्र, गेहूं हैं। मंगलवार को दान करें। गरीबों को। व्रत रखें।
मेष राशि पहाड़ों, चट्टानों, युद्ध के मैदान, अग्नि कुंड तथा चरागाहों का प्रतिनिधित्व करती है। ये स्थान ऊंचे और दुर्गम होते हैं। मेंढे का प्राकृतिक निवास यही है। युद्ध मैदान साहस परीक्षा का स्थान। ऊर्जा का केंद्र। प्रकृति से जुड़ाव।
पहाड़ और चट्टानें प्राकृतिक निवास हैं। ऊंचाई और कठिनाई इनका स्वभाव है। दुर्गम पथ पर चलना पसंद। ट्रेकिंग शौक। युद्ध का मैदान साहस और शक्ति का प्रदर्शन करता है। योद्धा भावना जगाता है। इतिहास में प्रसिद्ध। अग्नि कुंड आग के कार्यों से जुड़ा है। यज्ञ या भट्टी स्थान। धार्मिक कार्य। चरागाह पशुओं के चरने का स्थान है। हरियाली लेकिन सक्रिय। पशुपालन। जंगल दुर्गमता का प्रतीक हैं। वन्य जीवन से जुड़ाव। साहसिक यात्रा। रत्नमयी भूमि धन और मूल्यवान वस्तुओं को दर्शाती है। खनन कार्य सफल। धातु प्राप्ति। ये सभी स्थान मेष की चर गति को प्रतिबिंबित करते हैं। जीवन में विविधता। यात्रा शौक।
मेष राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
मेष राशि का स्वामी ग्रह कौन है?
मंगल स्वामी ग्रह है। यह युद्ध और ऊर्जा का कारक है। ऊर्जा प्रदान करता है। कुंडली में मजबूत हो तो सफलता। पूजा लाभ।
मेष राशि की दृष्टि किन राशियों पर पड़ती है?
यह सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशियों पर दृष्टि डालती है। चर राशि की विशेषता है। प्रभाव गहरा होता है। कुंडली विश्लेषण में देखें।
मेष राशि का तत्त्व क्या है?
अग्नि तत्त्व है। चराग्नि के रूप में जाना जाता है। सक्रियता और गर्मी का प्रतीक। पंच तत्त्व में प्रधान।
मेष राशि के शुभ रंग कौन से हैं?
गहरा लाल, केसरिया और सिंदूरी शुभ रंग हैं। ऊर्जा बढ़ाते हैं। दैनिक प्रयोग करें। वाहन चयन।
मेष राशि का रत्न क्या है?
लाल मूंगा इस राशि का रत्न है। मंगल को मजबूत करता है। ज्योतिषी सलाह लें। शुद्धिकरण करें।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 32
इनसे पूछें: विवाह, करियर, व्यापार, स्वास्थ्य
इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें