मेष राशि और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध

By पं. नरेंद्र शर्मा

जानिए प्रथम स्पंदन और बाण स्तंभ का गुप्त रहस्य

मेष राशि और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध

सामग्री तालिका

वैदिक ज्योतिष और आध्यात्मिकता के अगाध सागर में प्रत्येक राशि किसी न किसी दिव्य ऊर्जा केंद्र से नियंत्रित होती है। मेष राशि और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध ब्रह्मांड के प्रथम स्पंदन और पुनरुत्थान का वह महासंगम है जो मृत्यु को भी मात देने की अभूतपूर्व क्षमता रखता है। यदि किसी जातक का जन्म मेष राशि के प्रभाव में हुआ है तो वह किसी साधारण मिट्टी का नहीं बना है बल्कि उसकी मूल संरचना उस ज्वालामुखी की भांति है जिसके उग्र लावे को केवल साक्षात देवाधिदेव महादेव का सोम अर्थात अमृत ही शांत कर सकता है। मेष राशि के जातकों के भीतर छिपी हुई प्रचंड ऊर्जा को जब तक सोमनाथ की चेतना का आधार नहीं मिलता तब तक वे व्यावहारिक संसार में निरंतर संघर्ष और कड़े मानसिक कड़ेपन का अनुभव करते रहते हैं।

यह अद्भुत दिव्य व्यवस्था जातक को एक अत्यंत परिष्कृत आंतरिक चेतना और अदम्य साहस प्रदान करती है जो जीवन के प्रत्येक कठिन मार्ग पर उसकी रक्षा करती है। मेष राशि के मूल स्वभाव, उसके अधिपति ग्रह मंगल और उसके अंतर्गत आने वाले सूक्ष्म तत्वों की गहराई में उतरने पर प्रथम ज्योतिर्लिंग की कड़ियां स्वतः ही सुलझने लगती हैं। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में अरब सागर के पावन तट पर स्थापित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मेष राशि के जातकों के लिए केवल एक पवित्र तीर्थ नहीं है बल्कि उनके संपूर्ण अस्तित्व को हील करने वाला एक परम ऊर्जा केंद्र है। यह संबंध जितना आध्यात्मिक है उतना ही तार्किक और वैज्ञानिक भी है जो व्यक्ति के कार्मिक ब्लॉकेज को खोलकर उसे जीवन में अभूतपूर्व सफलता और मानसिक स्थिरता प्रदान करने का सामर्थ्य रखता है।

ज्योतिषीय आयाम मेष राशि का व्यावहारिक स्वरूप सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक संबंध
अधिपति ग्रह और मुख्य तत्व उग्र मंगल की आक्रामकता, पराक्रम और अग्नि तत्व की प्रधानता प्रथम ज्योतिर्लिंग की अमृतमयी चेतना और सोम की परम शीतलता
प्रतीक चिन्ह और भौतिक स्वरूप अपने लक्ष्य की ओर सीधा सिर झुकाकर बढ़ने वाला मेढ़ा समुद्र तट पर स्थापित बाण स्तंभ और स्वर्ण कलश की भव्यता
मूल चेतना और शारीरिक संबंध कालपुरुष का प्रथम भाव, मनुष्य का मस्तिष्क और सहस्रार चक्र पृथ्वी का प्रथम चेतना केंद्र और अरब सागर का न्यूरो-हीलिंग नाद
कर्माधारित गुण और आत्मशुद्धि अश्विनी नक्षत्र की हीलिंग पावर और राख से उठने की महाशक्ति चंद्रमा का क्षय रोग निवारण और भालका तीर्थ का परम सत्य

मेष राशि का सोमनाथ से ही संबंध क्यों है

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार मेष राशि चक्र की सबसे पहली राशि मानी गई है जिसका स्वामित्व चराचर जगत के सेनापति और अदम्य साहस के प्रदाता ग्रह मंगल देव के पास है। खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह पूरा संबंध आरंभ के मूल सिद्धांत और नेतृत्व क्षमता के अद्भुत तालमेल पर आधारित है। जहां मेष संपूर्ण ज्योतिष चक्र की सबसे पहली राशि है वहीं द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला स्थान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को प्राप्त है। मेष राशि और सोमनाथ दोनों ही इस अनंत ब्रह्मांड में नई शुरुआत, नव-सृजन और सर्वोपरि नेतृत्व का मुख्य प्रतीक माने जाते हैं।

मेष एक अत्यंत उग्र और क्रियाशील अग्नि तत्व की राशि है जिसका स्वामी मंगल जातक को अत्यधिक आवेश, साहस और गति प्रदान करता है। सोम का वास्तविक शाब्दिक अर्थ चंद्रमा अथवा अमृत माना गया है जो परम शीतलता और शांति का प्रतिनिधित्व करता है। मेष राशि के जातकों के भीतर उबलते हुए लावे को एक सही रचनात्मक दिशा देने और उनके क्रोध को शांत करने का कार्य केवल सोमनाथ की यह दिव्य शीतलता ही कर सकती है। जब मेष राशि के लोग अपने व्यावहारिक जीवन में अत्यधिक मानसिक अशांति या बर्नआउट का अनुभव करते हैं तो सोमनाथ की इस ऊर्जा का ध्यान करने मात्र से उनके भीतर का अग्नि तत्व संतुलित होने लगता है जिससे उनकी खोई हुई निर्णय क्षमता पुनः लौट आती है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पावन कथा और चंद्रमा का पुनरुत्थान

गुजरात के सौराष्ट्र में प्रभास पाटन क्षेत्र में अरब सागर के विशाल तट पर स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को शास्त्रों में अत्यंत पावन और जीवन प्रदाता माना गया है। शास्त्रों में वर्णित पौराणिक गाथा के अनुसार स्वयं चंद्रमा अर्थात सोम ने राजा दक्ष की सत्ताइस पुत्रियों अर्थात सत्ताइस नक्षत्रों से विवाह किया था लेकिन वे अपनी सभी पत्नियों में केवल रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे और उन्हीं के समीप रहते थे। अपनी अन्य पुत्रियों के प्रति इस कड़े अन्याय को देखकर राजा दक्ष अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को क्षय रोग से ग्रसित होने का भयंकर श्राप दे दिया जिसके प्रभाव से चंद्रमा का तेज और आकार लगातार घटने लगा।

मृत्यु के अत्यंत निकट पहुंच चुके चंद्रमा ने अपनी रक्षा के लिए इसी पावन प्रभास क्षेत्र में आकर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और महादेव की घोर तपस्या करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप किया। देवाधिदेव महादेव उनकी इस कठीण भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और प्रकट होकर चंद्रमा को राजा दक्ष के उस भयंकर श्राप से पूरी तरह मुक्त करके नया जीवनदान प्रदान किया। महादेव ने चंद्रमा के इस तेज की रक्षा करने हेतु उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया जिससे वे इस चराचर जगत में सोमनाथ अर्थात चंद्रमा के स्वामी कहलाए। यह पावन कथा मेष राशि के जातकों को यह सिखाती है कि जब जीवन में सब कुछ समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाए तब शिव की शरण में जाने से नया जीवन प्राप्त होता है।

मेष राशि और सोमनाथ के गहरे ज्योतिषीय सूत्र

राख से दोबारा उठने की महाशक्ति

सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक सत्य इस बात का साक्षात गवाह है कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा इसे कई बार पूरी तरह तोड़ा और जलाया गया लेकिन यह भव्य मंदिर हर बार और अधिक दिव्यता के साथ अपनी ही राख से पुनः खड़ा हो गया। मेष राशि का स्वामी मंगल एक परम योद्धा है जो कभी हार नहीं मानता है।

मेष राशि के जातकों के जीवन में भी अक्सर ऐसे कड़े मोड़ आते हैं जहां व्यापार, रिश्ते या स्वास्थ्य के मोर्चे पर उन्हें लगता है कि सब कुछ पूरी तरह नष्ट हो चुका है। सोमनाथ की यह परम ऊर्जा मेष राशि के जातकों के रक्त में वह अजेय शक्ति भर देती है कि वे प्रत्येक बड़ी असफलता के पश्चात दुगुनी भव्यता के साथ पुनः उठ खड़े होते हैं। जीवन में निरंतर पुनर्निर्माण करना ही आपकी वास्तविक नियति है।

अश्विनी नक्षत्र और संजीवनी विद्या का संबंध

मेष राशि का आरंभ अश्विनी नक्षत्र से होता है जिसके अधिपति देवता इस ब्रह्मांड के सर्वोपरि राजवैद्य अश्विनी कुमार माने जाते हैं। सोमनाथ वह परम पावन स्थल है जहां स्वयं महादेव ने चंद्रमा के क्षय रोग का सफल उपचार करके उन्हें जीवनदान दिया था। अश्विनी नक्षत्र की हीलिंग पावर और सोमनाथ की अमृतमयी चेतना दोनों ही मृतप्राय स्थिति से वापस लाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

यही कारण है कि मेष राशि के जातकों के भीतर दूसरों का दुख दूर करने और संकट में फंसे असहाय लोगों की सहायता करने की एक अद्भुत प्राकृतिक उपचार शक्ति छिपी होती है। जब वे स्वयं सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का मानसिक स्मरण करते हैं तो उनके भीतर की यह हीलिंग पावर अत्यधिक जाग्रत हो जाती है जिससे वे समाज का परम कल्याण करने में पूरी तरह सक्षम होते हैं।

मस्तिष्क का स्वामित्व और सोम का दिव्य लेप

वैदिक ज्योतिष के कालपुरुष चक्र में मेष राशि मनुष्य के शरीर के सबसे ऊपरी भाग अर्थात मस्तिष्क और खोपड़ी को पूरी तरह नियंत्रित करती है। मेष राशि के जातक अपने व्यावहारिक जीवन में अक्सर अत्यधिक मानसिक गर्मी, भयंकर सिरदर्द, माइग्रेन या अचानक आने वाले अत्यधिक क्रोध से निरंतर पीड़ित रहते हैं क्योंकि मंगल की उग्र आग उनके मस्तिष्क में हमेशा जलती रहती है।

सोमनाथ की यह दिव्य ऊर्जा उस जलते हुए अशांत मस्तिष्क पर साक्षात बर्फ की भांति कार्य करती है। जब कोई मेष राशि का जातक शांत भाव से बैठकर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का ध्यान करता है तो उसके भीतर का वह अनियंत्रित क्रोध एक अत्यंत सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है जिससे उसका मानसिक शॉर्ट-सर्किट पूरी तरह ठीक हो जाता है और स्नायु तंत्र को शांति मिलती है।

बाण स्तंभ और लक्ष्य भेदने का अनुपम विज्ञान

सोमनाथ मंदिर के भव्य प्रांगण में समुद्र के तट पर एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक बाण स्तंभ स्थापित है। इस बाण स्तंभ का सबसे बड़ा वैज्ञानिक और खगोलीय रहस्य यह है कि इस स्तंभ के अंतिम बिंदु से लेकर सुदूर दक्षिण ध्रुव अर्थात अंटार्कटिका तक समुद्र के बीच में कोई भी भूखंड अथवा जमीन का टुकड़ा स्थित नहीं है। यह मार्ग पूरी तरह से बाधारहित और निष्कंटक है।

मेष राशि का प्रतीक चिन्ह स्वयं मेढ़ा है जो अपने लक्ष्य की ओर सीधे दिशा में मस्तक झुकाकर अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ता है। यह बाण स्तंभ मेष राशि के जातकों के उसी अचूक फोकस और अदम्य एकाग्रता का साक्षात प्रतीक माना जाता है। यदि मेष राशि का जातक सोमनाथ की इस बाधारहित ऊर्जा से मानसिक रूप से जुड़ जाता है तो उसके व्यावहारिक जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटें स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। आप जीवन में बाधाओं से लड़ने के लिए नहीं बल्कि उन्हें अपनी चेतना से पूरी तरह अदृश्य करने की दिव्य शक्ति रखते हैं।

चंद्र-मंगल योग और आर्थिक साम्राज्य का निर्माण

वैदिक ज्योतिष के कड़े सिद्धांतों के अनुसार जब कुंडली में चंद्रमा अर्थात सोमनाथ तत्व और मंगल अर्थात मेष तत्व का आपस में मिलन होता है तो वह साक्षात महालक्ष्मी योग का निर्माण करता है। सोमनाथ इतिहास का वह परम पावन स्थान है जहां चंद्रमा को श्राप से मुक्ति मिलने के पश्चात उनका खोया हुआ संपूर्ण राजसी वैभव पुनः प्राप्त हुआ था।

मेष राशि के जातक अपने व्यावहारिक जीवन में अपने पराक्रम से बहुत अधिक धन अर्जित करते हैं लेकिन उग्र मंगल के प्रभाव के कारण उनका पैसा टिकता नहीं है या उन्हें बार-बार व्यापार में अचानक बड़े कड़े घाटे का सामना करना पड़ता है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मेष राशि के जातकों के लिए एक फाइनेंशियल हीलर अर्थात आर्थिक उपचारक की भांति कार्य करता है। मेष की बाहुबल शक्ति जब सोमनाथ की अनन्य भक्ति से मिलती है तो वह जातक को समाज में एक अत्यंत विशाल और स्थायी आर्थिक साम्राज्य खड़ा करने का सामर्थ्य प्रदान करती है।

त्रिवेणी संगम और तीन नक्षत्रों का कॉस्मिक अलाइनमेंट

सोमनाथ के पावन प्रभास क्षेत्र में तीन अत्यंत पवित्र नदियों का संगम होता है जिन्हें कपिला, हिरण और सरस्वती कहा जाता है। ठीक इसी प्रकार मेष राशि के भीतर भी तीन नक्षत्रों का एक अद्भुत संगम विद्यमान है जिन्हें अश्विनी, भरणी और कृत्तिका कहा जाता है। यह एक अत्यंत सूक्ष्म कॉस्मिक अलाइनमेंट है जो जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है।

मेष राशि का अश्विनी नक्षत्र सरस्वती नदी की भांति ज्ञान और नई शुरुआत को प्रदर्शित करता है, भरणी नक्षत्र कपिला नदी की भांति गहन ऊर्जा व कर्माधारित रूपांतरण को दर्शाता है तथा कृत्तिका नक्षत्र हिरण नदी की भांति सूर्य की शुद्ध अग्नि और तेज को प्रकट करता है। मेष राशि के जातकों का पूरा जीवन इन तीनों धाराओं के मध्य निरंतर घूमता रहता है। सोमनाथ वह परम महासागर हैं जहां आकर ये तीनों सूक्ष्म धाराएं पूरी तरह शांत और संतुलित हो जाती हैं जिससे जातक का बौद्धिक स्तर अत्यंत सुदृढ़ हो जाता है।

अकाल मृत्यु का भय और सडन बर्नआउट का पूर्ण उपचार

राजा दक्ष के श्राप के कारण चंद्रमा को जो क्षय रोग हुआ था उसका सीधा तांत्रिक अर्थ जीवनी शक्ति और प्राण ऊर्जा का लगातार कम होना माना जाता है। मेष राशि के जातकों की सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या सडन बर्नआउट है जिसके प्रभाव से वे किसी भी नए कार्य को अत्यंत तीव्र उत्साह और जोश के साथ शुरू तो करते हैं लेकिन मार्ग में अचानक उनकी पूरी मानसिक ऊर्जा शून्य हो जाती है और वे कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं।

चंद्रमा ने सोमनाथ के पावन धाम में आकर ही अपनी उस लुप्त होती हुई प्राण ऊर्जा को पुनः प्राप्त किया था। मेष राशि का अधिपति ग्रह मंगल जातक को केवल तात्कालिक शक्ति प्रदान करता है लेकिन सोमनाथ की चंद्रमा चेतना उस शक्ति को शरीर में लंबे समय तक स्टोर करने की अद्भुत क्षमता देती है। जब मेष राशि के जातक सोमनाथ की इस चेतना से जुड़ते हैं तो उनकी कार्यक्षमता कभी समाप्त नहीं होती है और यह दिव्य ज्योतिर्लिंग उनके लिए एक कॉस्मिक बैटरी की भांति कार्य करता है जो उन्हें मानसिक थकान से सदा के लिए सुरक्षित रखता है।

भालका तीर्थ और शीर्ष का अनूठा आध्यात्मिक विरोधाभास

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अत्यंत समीप ही वह प्रसिद्ध भालका तीर्थ स्थित है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के पैर की एड़ी में एक साधारण बहेलिए का तीर लगा था और उन्होंने अपनी इस नश्वर लीला का संवरण किया था। मेष राशि मनुष्य के शरीर के शीर्ष भाग अर्थात सिर को नियंत्रित करती है जबकि भालका तीर्थ पैर की एड़ी अर्थात आधार को प्रदर्शित करता है। यह स्थान सिर और पैर के मध्य की ऊर्जा का एक अद्भुत आध्यात्मिक विरोधाभास और संतुलन प्रस्तुत करता है।

मेष राशि के जातक अक्सर अत्यधिक आक्रामक होकर केवल हवा में या बहुत ऊंचे विचारों में खोए रहते हैं जिससे वे यथार्थ धरातल से दूर हो जाते हैं। सोमनाथ और भालका तीर्थ का यह पूरा क्षेत्र मेष राशि के जातकों को व्यावहारिक रूप से ग्राउंडेड अर्थात जमीन से जुड़ा हुआ बनाना सिखाता है। यह पावन स्थल आपको यह संदेश देता है कि जीवन के सर्वोच्च शिखर पर हमेशा टिके रहने के लिए आपके चरणों में विनम्रता और स्थिरता का होना परम आवश्यक है। सोमनाथ की यह चेतना जातक के संकुचित अहंकार को समाप्त करके उसे साक्षात ईश्वरीय ज्ञान प्रदान करती है।

अरब सागर का नाद और न्यूरो-हीलिंग तरंगों का रहस्य

चिकित्सा ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मेष राशि का सीधा संबंध मनुष्य के मस्तिष्क की समस्त सूक्ष्म नसों और तंत्रिका तंत्र से माना गया है। सोमनाथ मंदिर की विशाल प्राचीन दीवारों पर अरब सागर की प्रचंड लहरों का जो निरंतर प्रहार होता रहता है वह प्रकृति में एक विशेष अल्ट्रा-लो फ्रीक्वेंसी अर्थात एक अत्यंत शांत प्रतिध्वनि पैदा करता है जो सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करती है।

मेष राशि के जातकों का दिमाग हमेशा अत्यंत तीव्र गति से कार्य करता रहता है जिसके कारण वे अक्सर स्लीप डिसऑर्डर अर्थात अनिद्रा, मानसिक बेचैनी और तनाव के शिकार हो जाते हैं। सोमनाथ के तट पर समुद्र की इन लहरों का निरंतर होने वाला नाद मेष राशि के जातकों के मस्तिष्क की तरंगों को पूरी तरह सिंक्रोनाइज अर्थात संतुलित कर देता है। यदि जातक सोमनाथ जाने में असमर्थ हो तो केवल इस पावन तट की लहरों के शोर और सोमनाथ की दिव्य घंटी की आवाज का मानसिक श्रवण करने मात्र से उसका पूरा नर्वस सिस्टम हील हो जाता है और उसे अद्भुत मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है।

मेष राशि के जातकों के लिए विशेष कर्माधारित उपाय

जीवन का व्यावहारिक पहलू किए जाने वाले विशिष्ट कार्य ज्योतिषीय लाभ और कर्माधारित प्रभाव
मानसिक अशांति और तीव्र क्रोध सोमवार के दिन शिवलिंग पर ठंडा कच्चा दूध अर्पित करें और उसमें थोड़े से काले तिल मिलाकर महाकाल का ध्यान करें। यह विशेष उपाय आपके उग्र मंगल की आग को शांत करके मस्तिष्क को असीम शीतलता प्रदान करता है।
सफलता में रुकावट और वैभव प्राप्ति रात्रि के समय जब चंद्रमा आकाश में पूर्ण रूप से जाग्रत हो तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके ॐ नमः शिवाय का जाप करें। यह कर्माधारित कार्य आपके लुप्त होते हुए तेज को पुनः जाग्रत करके रुके हुए कार्यों को त्वरित गति देता है।
शारीरिक रोग और स्वास्थ्य लाभ तांबे के पात्र में रखे शुद्ध जल में थोड़ा सा शहद मिलाकर नियमित सेवन करें और सोमनाथ के सागर तट का मानसिक ध्यान करें। यह सूक्ष्म क्रिया आपकी जीवनी शक्ति का विकास करके शरीर को सभी व्याधियों से पूरी तरह मुक्त रखती है।
आत्मविश्वास की कमी और भय मुक्ति मंगलवार के दिन लाल रंग के सात्विक वस्त्र धारण करके शिव मंदिर में लाल चंदन का लेप शिवलिंग पर अर्पित करें। यह उपाय आपके भीतर छिपे हुए अकारण भयों को समाप्त करके अदम्य साहस और दृढ़ता प्रदान करता है।

FAQ

मेष राशि के जातकों के लिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की आराधना क्यों सर्वोपरि मानी गई है

मेष राशि चक्र की सबसे पहली राशि है और सोमनाथ सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है जो सृष्टि के आरंभ और नेतृत्व को प्रदर्शित करता है। इसकी आराधना करने से मेष राशि के जातकों के भीतर की नेतृत्व क्षमता का विकास होता है और उनके जीवन के समस्त कार्मिक अवरोध दूर होते हैं।

क्या अत्यधिक मानसिक बर्नआउट और थकान को दूर करने में सोमनाथ की ऊर्जा सहायक है

हाँ सोमनाथ वह परम स्थान है जहां चंद्रमा ने अपनी खोई हुई शक्ति पुनः प्राप्त की थी। मेष राशि के जातक जब सोमनाथ की चंद्रमा चेतना से मानसिक रूप से जुड़ते हैं तो उनकी खोई हुई मानसिक ऊर्जा पुनः स्टोर हो जाती है और वे बर्नआउट से बच जाते हैं।

सोमनाथ मंदिर का बाण स्तंभ मेष राशि के जातकों को क्या प्रेरणा देता है

बाण स्तंभ लक्ष्य की बाधारहित दिशा को दर्शाता है जिसके मार्ग में दक्षिण ध्रुव तक कोई रुकावट नहीं है। यह मेष राशि के जातकों को सिखाता है कि सोमनाथ की कृपा से उनका जीवन भी पूरी तरह निष्कंटक हो जाता है और वे सीधे अपने लक्ष्यों को भेद सकते हैं।

मेष राशि के जातकों के अश्विनी नक्षत्र का सोमनाथ से क्या आध्यात्मिक संबंध है

अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं जो देवताओं के वैद्य हैं और सोमनाथ वह स्थान है जहां चंद्रमा के क्षय रोग का उपचार हुआ था। सोमनाथ का ध्यान करने से मेष राशि के जातकों के भीतर की प्राकृतिक हीलिंग पावर पूरी तरह जाग्रत हो जाती है।

आर्थिक तंगी और व्यापार के घाटे को दूर करने के लिए मेष राशि वालों को क्या करना चाहिए

मेष राशि के जातकों को सोमवार के दिन शिवलिंग पर अक्षत अर्थात चावल के साबुत दाने और लाल चंदन अर्पित करना चाहिए। यह उपाय कुंडली के चंद्र-मंगल योग को सक्रिय करके जातक के जीवन में एक स्थायी और भव्य आर्थिक साम्राज्य का निर्माण करता है।

राख से उठने वाले अजेय योद्धा और परम चेतना के सर्वोपरि प्रतीक महादेव के रूप में स्थापित सोमनाथ मेष राशि के जातकों को यह सिखाते हैं कि वे संसार को अपनी तलवार या आक्रामकता से नहीं बल्कि अपने मस्तक की जाग्रत चेतना से जीतेंगे। दुनिया चाहे आपको कितनी भी बार तोड़ने का प्रयास करे, आप सोमनाथ मंदिर की भांति उतनी ही भव्यता और दिव्यता के साथ बार-बार अपनी राख से पुनः खड़े होने का सामर्थ्य रखते हैं। आपका मन ही आपका सबसे बड़ा अस्त्र है, बशर्ते वह सोमनाथ की शीतलता से पूरी तरह जुड़ा रहे। अपने भीतर छिपे उस प्रथम स्पंदन और अदम्य साहस को पहचानिए तथा समय चक्र के नियमों का पालन करते हुए निरंतर इस संसार को प्रकाश का एक नया मार्ग दिखाते रहिए।

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लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

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