कर्क राशि की माँ और ममता का आध्यात्मिक सिद्धांत

By पं. संजीव शर्मा

जानिए अंतर्मन और पुष्य नक्षत्र का गुप्त रहस्य

कर्क राशि की माँ और ममता का आध्यात्मिक सिद्धांत

सामग्री तालिका

वैदिक ज्योतिष और खगोलीय चेतना के अगाध सिद्धांतों के अनुसार कर्क राशि चक्र की चौथी राशि है। जब इस राशि के परम करुणामयी, संवेदनशील और पोषक तत्वों का मिलन मातृत्व की पावन चेतना से होता है तो सृष्टि में ममता की उस आदि-शक्ति का प्राकट्य होता है जिसे साक्षात् चंद्रमा ने अपनी संपूर्ण शीतलता और पोषण की शक्ति सहर्ष सौंपी है। कर्क राशि की माँ को ज्योतिष शास्त्र में कालपुरुष कुंडली के चतुर्थ भाव अर्थात माता, आंतरिक सुख, मानसिक शांति और पाताल की अचल आधारशिला का सर्वोपरि स्वामित्व प्राप्त है। यदि सिंह राशि की माँ पराक्रम और सूर्य की प्रखर तपन की प्रतिमूर्ति है, तो कर्क राशि की माँ उस चंद्रमा की शीतल चांदनी है जो व्यावहारिक संसार की धूप में झुलसे हुए बच्चे के लिए एक अचूक दिव्य मरहम का कार्य करती है।

यह अद्भुत दिव्य व्यवस्था जातक को एक अत्यंत परिष्कृत, ग्रहणशील और अंतर्ज्ञानी आंतरिक चेतना प्रदान करती है जो उसे बच्चे के संपूर्ण अस्तित्व से सीधे कर्माधारित रूप से जोड़ देती है। कर्क माँ के लिए उसका बच्चा इस नश्वर संसार का कोई साधारण हिस्सा नहीं होता बल्कि वह उसकी स्वयं की चेतना और आत्मा का साक्षात प्रतिरूप होता है। उसका वात्सल्य ब्रह्मांड के उस गर्भ की भांति है जो बच्चे को बाहरी दुनिया के क्रूर थपेड़ों से सुरक्षित रखकर अपनी कोमलता की छांव में पल्लवित करता है। वह घर को केवल पत्थरों की इमारत नहीं बल्कि एक जाग्रत मंदिर बनाती है जहां बच्चे का मानसिक और शारीरिक पोषण सर्वोत्तम रूप से संपन्न हो सके।

ज्योतिषीय आयाम कर्क माँ का व्यावहारिक स्वरूप मातृत्व चेतना का आध्यात्मिक संबंध
अधिपति ग्रह और मुख्य तत्व भगवान चंद्रमा की अगाध शीतलता और शुद्ध जल तत्व की असीम संवेदनशीलता आदि-शक्ति का संचार, बिना शर्त ईश्वरीय प्रेम और पोषण की पराकाष्ठा
प्रतीक चिन्ह और सूक्ष्म स्वरूप बाहरी सख्त कवच और आंतरिक रूप से अत्यंत कोमल वनराज केकड़ा मानसिक गर्भनाल का अटूट बंधन और स्मृति की सुरक्षित तिजोरी
मूल चेतना और शारीरिक संबंध कालपुरुष कुंडली का चतुर्थ भाव, मन का गुप्त स्थान और पाताल की नींव सूक्ष्म प्राण ऊर्जा का स्थानांतरण, अन्नपूर्णा स्वरूप और हृदय चेतना
कर्माधारित गुण और आत्मशुद्धि पुनर्वसु की जादुई आशा, पुष्य का अमृतमयी दूध और आश्लेषा का आलिंगन संकुचित स्व का पूर्ण विसर्जन और मौन तपस्या द्वारा संरक्षण

कर्क राशि की माँ का नैसर्गिक स्वभाव और मानसिक गर्भनाल का रहस्य

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार कर्क एक चर और जल तत्व प्रधान राशि है जिसके मुख्य अधिपति ग्रह संपूर्ण चराचर जगत के मन और अवचेतन चेतना को नियंत्रित करने वाले भगवान चंद्रमा माने गए हैं। चंद्रमा स्वयं माता का ही साक्षात स्वरूप है, इसलिए कर्क राशि की माँ के भीतर ममता और वात्सल्य की एक ऐसी अति अर्थात पराकाष्ठा विद्यमान होती है जो संसार की किसी भी अन्य राशि में दुर्लभ है। जल तत्व की प्रचुरता के कारण वह जल की ही भांति बच्चे की बदलती हुई परिस्थितियों, उसकी सूक्ष्म आवश्यकताओं और उसके मानसिक स्तर के अनुसार स्वयं को पूरी तरह ढाल लेती है। उसका हृदय दुखों को सोखने वाले एक अत्यंत जाग्रत स्पंज की भांति कार्य करता है जो बच्चे के कष्टों का हलाहल स्वयं पीकर उसे केवल सुख की चांदनी प्रदान करता है।

चिकित्सा विज्ञान के नियमों के अनुसार जन्म के पश्चात भौतिक गर्भनाल को काट दिया जाता है, परंतु वैदिक ज्योतिष का कड़ा सिद्धांत यह प्रमाणित करता है कि कर्क माँ की मानसिक गर्भनाल अर्थात आध्यात्मिक सूत जातक से जीवनभर कभी नहीं कटता है। इसे ऋणानुबंध का वह गहरा कर्माधारित बंधन कहा जाता है जो कई जन्मों से निरंतर चला आ रहा है। कर्क माँ का अवचेतन मन बच्चे की चेतना से इस कदर सीधे जुड़ा होता है कि बच्चा दुनिया के किसी भी सुदूर कोने में हो, यदि उसका मन तनिक भी अशांत या पीड़ित है तो कर्क माँ के हृदय में एक अज्ञात बेचैनी, छाती में भारीपन और तीव्र शारीरिक कष्ट स्वतः ही उत्पन्न होने लगता है। वह बच्चे की केवल एक सामान्य आहट, मौन अथवा वाणी के सूक्ष्म कंपन से यह तुरंत जान लेती है कि उसकी रूह कहाँ और किस कारण से दुख रही है।

व्यावहारिक जीवन के कड़े मोड़ और कर्क माँ का दिव्य कर्माधारित निर्णय

जब बच्चा अत्यधिक दुखी होकर संसार के सम्मुख कहे कि "मैं पूरी तरह ठीक हूँ"

व्यावहारिक जीवन में जब कड़े संघर्षों के कारण बच्चा भीतर से पूरी तरह टूट जाता है परंतु समाज के सम्मुख अपने आंसुओं को छिपाकर केवल यह कहता है कि मैं ठीक हूँ तब कर्क राशि की माँ के सम्मुख उसका यह असत्य भाषण क्षणभर भी नहीं टिक पाता है। वह बिना कोई तीक्ष्ण सवाल किए चुपचाप अपने बच्चे के समीप जाकर बैठती है और अत्यंत वात्सल्य भाव से उसका मस्तक अपनी पावन गोद में रख लेती है।

वह बच्चे से किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं मांगती बल्कि अपनी जाग्रत अंतर्ज्ञान की शक्ति से उसकी प्राण ऊर्जा को पूरी तरह पढ़ लेती है। चंद्रमा अंतर्मन का स्वामी और सहज बोध की सर्वोच्च पराकाष्ठा माना जाता है। माँ का यही मूक स्पर्श बच्चे के जमे हुए मानसिक अवसाद को पिघलाकर उसे असीम सुरक्षा का अहसास कराता है जिससे जातक का आंतरिक तनाव पूरी तरह हील हो जाता है।

जब बच्चा अपनी उच्च प्रगति के लिए पहली बार अपने घर की चौखट छोड़कर सुदूर जाने लगे

जब बच्चा अपनी उच्च शिक्षा, करियर अथवा स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए पहली बार अपने पैतृक घर को छोड़कर किसी हॉस्टल या सुदूर अनजान शहर में विदा होता है, तो कर्क राशि की माँ के लिए यह क्षण एक कड़े मानसिक अवसाद और मूक मृत्यु के समान प्रतीत होता है क्योंकि चतुर्थ भाव उसके लिए उसका संपूर्ण ब्रह्मांड होता है। वह हफ़्तों पहले से बच्चे के मनपसंद व्यंजनों और सात्विक खाद्यों का एक विशाल ढेर लगाना प्रारंभ कर देती है।

विदाई के उस अंतिम क्षण में वह समाज के सम्मुख चिल्लाकर या फूट-फूटकर रोती नहीं है, परंतु उसकी आँखों में ममता का एक ऐसा अगाध समंदर उमड़ पड़ता है जो बच्चे के बढ़ते कदमों को एक पल के लिए थाम देता है। बच्चे के जाने के पश्चात उसके घर का कोना-कोना और उसकी यादों की अलमारी बच्चे के वियोग में मौन रुदन करती है। वह समय की गति को रोककर केवल अपने बच्चे की स्मृतियों के सहारे अपनी एकांत यात्रा को पूर्ण करती है।

जब बच्चा अपनी भूल को छिपाने के लिए माँ के सम्मुख ऊंची आवाज़ में बात करे

यदि बच्चा किशोरावस्था के नैसर्गिक भटकाव में फंसकर अथवा किसी कड़वे सच को छिपाने के लिए अपनी माँ के सम्मुख मर्यादा का उल्लंघन करके ऊंची आवाज़ में बात करता है, तो कर्क राशि की माँ पलटकर क्रोध की अग्नि में कोई जवाबी वार नहीं करती है। वह किसी प्रकार का हंगामा करने के बजाय अत्यंत शांत होकर चुपचाप दूसरे कक्ष में चली जाती है और एकांत के अंधेरे में मौन अश्रु बहाती है।

उसका यह इमोशनल साइलेंस अर्थात भावनात्मक मौन इतना अधिक मर्मभेदी और शक्तिशाली हथियार होता है कि बच्चे के अंतर्मन को भीतर तक बुरी तरह झकझोर देता है। बच्चे के भीतर एक ऐसी तीव्र कर्माधारित आत्मग्लानि और गिल्ट का जन्म होता है जो दुनिया की किसी भी कठोर डांट से कई गुना अधिक शक्तिशाली होती है। बच्चा स्वयं अपना अहंकार त्यागकर अपनी माँ के चरणों में क्षमा याचना करने पहुंच जाता है। वह अपमान के कड़वे घूंट को भी अपनी ममता से अमृत में बदलने का दिव्य सामर्थ्य रखती है।

जब समाज अथवा बाहरी दुनिया का कोई प्रभावशाली व्यक्ति बच्चे की चरित्रगत बुराई करे

जब कभी कोई बाहरी व्यक्ति, रिश्तेदार या समाज का कोई शक्तिशाली तत्व बच्चे के चरित्र पर उंगली उठाता है अथवा उसकी कमियों का उपहास उड़ाने का कुत्सित प्रयास करता है तब कर्क राशि की माँ के भीतर छिपा हुआ वह सख्त केकड़े का कवच अर्थात अभेद्य सुरक्षा घेरा साक्षात प्रकट हो जाता है। वह संसार की सबसे सौम्य और शांत महिला से क्षणभर में एक अत्यंत उग्र और हिंसक रक्षक के रूप में परिवर्तित हो जाती है।

वह उस समय न्याय, तर्क अथवा समाज के स्थापित नियमों की तनिक भी परवाह नहीं करती है। उसके लिए उसका बच्चा ही उसकी अंतिम सल्तनत और उसका ईश्वर होता है। वह साक्षात ढाल बनकर उस बाहरी प्रहार को अपने सीने पर झेल लेती है परंतु अपने बच्चे के स्वाभिमान पर एक खरोंच भी आने नहीं देती है। केकड़ा अपने प्रियजन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने का अदम्य साहस रखता है, यही उसका मूल कर्माधारित स्वभाव है।

जब बच्चा किसी भयंकर शारीरिक चोट अथवा असाध्य बीमारी से ग्रसित हो जाए

यदि बच्चा किसी गंभीर शारीरिक कष्ट, दुर्घटना अथवा भयंकर बीमारी की चपेट में आ जाता है जहां तार्किक चिकित्सा भी असफल प्रतीत होने लगती है तब कर्क राशि की माँ साक्षात अन्नपूर्णा और हीलिंग की देवी के रूप में स्थापित हो जाती है। वह अपने संपूर्ण अन्न-जल का त्याग कर देती है और बच्चे के सिरहाने बैठकर बिना अपनी पलक झपकाए पूरी-पूरी रातें मौन प्रार्थनाओं में काट देती है।

शास्त्रों के अनुसार कर्क राशि के भीतर आने वाला पुष्य नक्षत्र पोषण की सर्वोच्च पराकाष्ठा माना गया है जिसके अधिपति देवता स्वयं देवगुरु बृहस्पति हैं जो हीलिंग और प्राण ऊर्जा के सर्वोच्च दाता हैं। कर्क माँ के हाथों के स्पर्श और उसकी परिचर्या में एक ऐसी अलौकिक दिव्यता प्रवाहित होती है कि बच्चा केवल उसकी छुअन मात्र से ही आधा रोगमुक्त हो जाता है। वह बच्चे के शारीरिक दर्द को सूक्ष्म स्तर पर अपने स्वयं के शरीर पर स्थानांतरित कर लेती है ताकि उसका बच्चा मुस्कुरा सके।

अन्नपूर्णा की सूक्ष्म प्राण ऊर्जा और यादों का पवित्र संग्रहालय

कर्क राशि के जातक जब अपनी माँ के हाथ के बने साधारण भोजन का सेवन करते हैं तो उन्हें जो असीम तृप्ति प्राप्त होती है, वह किसी भौतिक रेसिपी का परिणाम नहीं होती है। पुष्य नक्षत्र की जाग्रत ऊर्जा के कारण कर्क माँ साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप मानी गई है। जब वह अपने बच्चे के लिए भोजन का निर्माण करती है तो वह अपनी शुद्ध चेतना, अपनी जीवनभर की दुआएं और अपनी सकारात्मक प्राण ऊर्जा अर्थात प्रकम्पनों को उस अन्न में पूरी तरह घोल देती है। यही कारण है कि संसार के सबसे महंगे रेस्टोरेंट का उत्तम भोजन भी कर्क माँ द्वारा परोसे गए उस साधारण दाल-चावल के सम्मुख पूरी तरह फीका और तेजहीन प्रतीत होता है।

इसके अतिरिक्त कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा कालपुरुष कुंडली में स्मृति अर्थात मेमोरी का मुख्य अधिपति ग्रह माना गया है। कर्क माँ का हृदय आपके संपूर्ण बचपन का एक ऐसा पवित्र संग्रहालय होता है जहां समय की गति भी पूरी तरह ठहर जाती है। वह आपके बचपन का पहला टूटा हुआ दांत, आपकी पहली अधूरी टेढ़ी-मेढ़ी ड्राइंग, आपके बचपन का पहला खिलौना और उस पहली पोशाक को भी अपनी अलमारी के सबसे गुप्त कोने में अत्यंत पवित्रता से संभालकर सुरक्षित रखती है जिसे संसार कचरा समझकर कब का फेंक चुका होता है। उसके लिए ये भौतिक वस्तुएं नहीं बल्कि उसकी अपनी सांसें और उसके जीवन की कुल वसीयत होती हैं। जब जातक अपनी प्रगति की होड़ में व्यस्त हो जाता है तब वह इन्हीं यादों की तिजोरी को खोलकर अपने अकेलेपन की कड़वी कड़ियों को हील करती है।

स्व का पूर्ण विसर्जन और जड़ों की मूक तपस्या

सिंह राशि की माँ जहाँ वृक्ष के खिले हुए भव्य फल की भांति समाज में दिखाई देती है और कन्या राशि की माँ उसकी व्यवस्थित शाखाओं का सूक्ष्म प्रबंधन करती है, वहीं कर्क राशि की माँ उस विशाल वृक्ष की वह पवित्र जड़ है जो हमेशा मिट्टी के नीचे, घोर अंधकार और नमी के मध्य रहकर संपूर्ण वृक्ष को जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करती है। वह माँ बनने के पश्चात अपने संपूर्ण व्यक्तिगत स्व अर्थात ईगो और अपनी स्वतंत्र पहचान को पूरी तरह विलीन कर देती है। यदि उससे उसकी व्यक्तिगत पसंद, उसके शौक या उसकी भूख के विषय में पूछा जाए तो वह केवल वही वस्तुएं बताएगी जो उसके बच्चे को अत्यधिक प्रिय होती हैं।

उसने अपने अस्तित्व को बच्चे के वजूद की परछाईं में इस कदर मिला दिया है कि उसका अपना कोई स्वतंत्र राग शेष नहीं बचता है। वह कभी नहीं चाहती कि उसका बच्चा उसकी आँखों के आंसुओं को देखे या उसके द्वारा की गई मूक कुर्बानियों का अहसास करके मानसिक रूप से कमजोर पड़े। वह चाहती है कि उसका बच्चा केवल आकाश की ऊंचाइयों और सफलता की शीतल छांव का आनंद ले। उसका यह त्याग इतना अधिक शांत और अंतर्मुखी होता है कि सांसारिक लोग अक्सर उसे टेकन फॉर ग्रांटेड अर्थात अत्यंत साधारण मानकर उसकी उपेक्षा कर देते हैं जो कि मातृत्व का सबसे बड़ा कड़वा सच है।

कर्क राशि की माँ की छिपी हुई कड़वी छाया और सुधार के मुख्य क्षेत्र

प्रत्येक ब्रह्मांडीय ऊर्जा के दो मुख्य पहलू होते हैं और कर्क राशि की माताओं के भीतर भी एक ऐसा गुप्त कड़ा अंधेरा छिपा होता है जिसे सुधारना उनके और उनके बच्चे के भविष्य के लिए परम आवश्यक माना जाता है। कर्क माँ की सबसे बड़ी चुनौती उनकी अत्यधिक भावुकता अर्थात हाइपर-सेंसिटिविटी और बच्चे को हमेशा अपने आंचल से बांधकर रखने की तीव्र प्रवृत्ति माना जाता है। वह बच्चे की सुरक्षा को लेकर इतनी अधिक व्याकुल और भयभीत रहती है कि अनजाने में उसके मार्ग की ढाल बनने के स्थान पर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, उसके कड़े संघर्षों और उसके आत्मबल के विकास को पूरी तरह रोक देती है जिससे बच्चा बाहरी क्रूर दुनिया का सामना करने के लिए मानसिक रूप से कमजोर रह जाता है।

इसके अतिरिक्त उनके भीतर अतीत में जीने अर्थात भयंकर नॉस्टेल्जिया की एक बहुत बड़ी कमजोरी पाई जाती है जिसके प्रभाव से वे बच्चे के बड़े होने की यथार्थ हकीकत को सहर्ष स्वीकार नहीं कर पाती हैं और हमेशा उसे एक असहाय छोटा बच्चा ही समझती हैं। जैसे चंद्रमा की कलाएं निरंतर घटती-बढ़ती हैं ठीक वैसे ही कर्क माँ का मूड भी बिना किसी बाहरी ठोस कारण के बहुत तीव्र गति से बदलता रहता है जिससे घर का परिवेश अशांत हो जाता है। वे अनजाने में इमोशनल ब्लैकमेल अर्थात गिल्ट ट्रिपिंग का सहारा लेकर अपनी भावनाओं के जाल में बच्चे को फंसाकर अपनी कड़े हठ को मनवाने का प्रयास करती हैं जो बच्चे के मस्तिष्क पर एक अदृश्य बोझ बन जाता है। उन्हें यह कड़ा आध्यात्मिक सत्य समझना होगा कि चंद्रमा की भांति उन्हें भी जीवन में बढ़ना और घटना सीखना होगा। कभी बच्चे को उनकी पूर्ण उपस्थिति अर्थात फुल मून की आवश्यकता होती है तो कभी उसे स्वयं का वजूद तलाशने के लिए एकांत अर्थात न्यू मून की भी उतनी ही आवश्यकता होती है।

कर्क राशि की माताओं के लिए विशेष कर्माधारित आत्म-सुधार तालिका

जीवन का सूक्ष्म पहलू कर्क माँ के कड़े अवरोध ज्योतिषीय सुधार और कर्माधारित उपाय
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विकास सुरक्षा के नाम पर बच्चे को हमेशा अपने आंचल से बांधकर रखना और स्वतंत्र न छोड़ना पंछी को मुक्त आकाश में उड़ने दें, याद रखें कि आपकी अति-सुरक्षा बच्चे की निर्णय क्षमता को कमजोर बना सकती है
भावनात्मक निर्भरता अपनी संपूर्ण खुशियों के लिए केवल बच्चे पर आश्रित रहना और मानसिक रूप से व्याकुल होना अपनी प्रसन्नता का स्रोत स्वयं बनें; बच्चे को अपनी भावनाओं के बोझ से मुक्त करके स्वयं के सात्विक शौक और ध्यान पर ध्यान दें
वैचारिक संतुलन और यथार्थ बच्चे को हमेशा छोटा बच्चा समझना और उसके बदलते हुए व्यावहारिक पैटर्न को स्वीकार न करना अतीत के नॉस्टेल्जिया से बाहर निकलें और बच्चे की प्रगति का आकलन केवल दिल की भावनाओं से नहीं बल्कि कड़े लॉजिक से भी करें
मूड स्विंग्स और व्यवहार चंद्रमा की कलाओं की भांति बिना किसी ठोस कारण के अचानक मानसिक रूप से उद्वेलित हो जाना अपने भीतर के इस अशांत जल तत्व को स्थिर करने के लिए नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना और जल तत्व का दान करें

FAQ

वैदिक ज्योतिष में कर्क राशि की माँ को ब्रह्मांडीय गर्भाशय क्यों कहा गया है

कर्क राशि कालपुरुष कुंडली का चतुर्थ भाव है जो मन की गहरी परतों और सुख का स्थान है तथा इसका स्वामी चंद्रमा है। कर्क राशि की माँ के भीतर बिना शर्त प्रेम और निस्वार्थ पोषण की ऐसी असीम ऊर्जा विद्यमान होती है जो बच्चे को संपूर्ण सृष्टि के दुखों से बचाकर अपने आंचल में सुरक्षित रखती है।

क्या कर्क राशि की माँ के आंसुओं का पूर्व जन्म के कर्मों से कोई संबंध होता है

हाँ कर्क राशि अष्टम से नवम भाव के सिद्धांतों के भीतर अवचेतन मन की गहरी अनुभूतियों को संजोकर रखती है। कर्क माँ को बच्चे के बचपन के वे सारे कड़वे घाव और अपमान आज भी पूरी सटीकता से याद होते हैं जिन्हें बच्चा भूल चुका होता है, वह उन दुखों को याद करके आज भी अकेले में रोती है।

आश्लेषा नक्षत्र की कर्क माँ अपने बच्चे को किस प्रकार प्रभावित करती है

आश्लेषा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह सर्प है जो गहन सुरक्षा और कुंडलीनुमा आलिंगन को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र के प्रभाव स्वरूप कर्क राशि की माँ का जुड़ाव सम्मोहन जैसा होता है, वह बच्चे को अपनी ममता के घेरे में इस कदर बांध लेती है कि जातक को पूरी बाहरी दुनिया बेगानी प्रतीत होने लगती है।

पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से कर्क माँ अन्नपूर्णा का स्वरूप कैसे धारण करती है

पुष्य नक्षत्र के देवता स्वयं देवगुरु बृहस्पति हैं जो पोषण और वृद्धि के कारक हैं। जब कर्क माँ अपने बच्चे के लिए भोजन तैयार करती है तो वह अपनी शुद्ध प्राण ऊर्जा को उस अन्न में स्थानांतरित कर देती है जिससे जातक को उस सात्विक भोजन से परम तृप्ति और हीलिंग पावर प्राप्त होती है।

पिता की कठोरता के सम्मुख कर्क राशि की माँ घर में क्या भूमिका निभाती है

जब कुंडली में सूर्य अथवा पिता का कड़ा अनुशासन बच्चे पर भारी पड़ता है तब कर्क राशि की माँ घर में एक कुशल शॉक एब्जॉर्बर अर्थात कुशन की भांति कार्य करती है। वह पिता के गुस्से के सारे कड़े प्रहार स्वयं झेल लेती है परंतु बच्चे के मानसिक संतुलन पर कभी कोई आंच नहीं आने देती है।

मौन प्रार्थना, अचल मर्यादा और संकुचित स्व के पूर्ण विसर्जन के सर्वोपरि प्रतीक महादेव और माता चंद्रमा के आशीर्वाद के रूप में स्थापित कर्क राशि की माँ यह भलीभांति जानती है कि उसका प्रेम किसी सांसारिक तर्क का मोहताज नहीं है। आपकी यह मूक तपस्या, आपकी यह जादुई छुअन और आपके आंचल की यह पावन छांव इस सृष्टि के इतिहास में एक अत्यंत अलौकिक कृत्य है, इसलिए स्वयं को कभी भी किसी कड़े बंधन में निर्बल महसूस न होने दें। अपने भीतर छिपे उस पुनर्वसु नक्षत्र की जाग्रत आशा और माता अदिति की असीम पोषण शक्ति को पहचानिए तथा अपने अभेद्य सुरक्षा कवच के साये में रहकर निरंतर अपने बच्चे की रगों में संस्कारों और आत्मिक शांति का परम प्रकाश फैलाती रहिए।

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मेरी चंद्र राशि

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लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


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