By पं. संजीव शर्मा
भावनाएँ, गहराई और सुरक्षा का प्रतीक

कर्क राशि ज्योतिष की चतुर्थ राशि है जो मन, भावनाओं, ममता और आंतरिक सुख की गहराई को दर्शाती है। जिस प्रकार समुद्र की लहरें शांत भी होती हैं और अचानक तीव्र भी हो जाती हैं, उसी प्रकार कर्क राशि का मन भी बहुत सूक्ष्म और संवेदनशील तरंगों से गुजरता रहता है। जब कभी यह जानने की जरूरत महसूस हो कि कर्क राशि का स्वामी ग्रह कौन है, कर्क राशि किन अंगों और नक्षत्रों से जुड़ी है या इस राशि का जीवन दर्शन क्या है तब यह संपूर्ण कर्क ज्योतिषीय डेटा मार्गदर्शक की तरह काम करता है। इस डेटा को समझकर व्यक्ति अपने भावनात्मक स्वभाव, परिवार के साथ जुड़ाव और आंतरिक सुरक्षा की जरूरतों को और साफ तरीके से पहचान सकता है।
कर्क राशि की सबसे पहली पहचान इसकी अत्यधिक संवेदनशीलता है। कर्क जातक अक्सर दूसरों की भावनाओं को बिना कहे ही समझ लेते हैं। कई बार इनके सामने व्यक्ति कुछ बोलता नहीं, फिर भी इनके भीतर किसी अनकहे दर्द या खुशी की आहट महसूस होने लगती है। इस तरह का तेज छठा ज्ञानेंद्रिय इन्हें बहुत अलग बनाता है।
इनके स्वभाव की दूसरी गहरी परत ममता और देखभाल से जुड़ी है। कर्क राशि के लोग अपनों के लिए बहुत कुछ करने को तैयार रहते हैं। परिवार, बच्चे, बुजुर्ग या करीबी मित्र, इन सबके लिए इनका हृदय बहुत नरम रहता है। स्वभाव में एक पालने पोसने वाली ऊर्जा रहती है जो दूसरों को भावनात्मक आश्रय देने के लिए प्रेरित करती है।
तीसरी विशेषता मन के उतार चढ़ाव है। जैसे चन्द्रमा घटता बढ़ता है, वैसे ही कर्क राशि का मन भी जल्दी बदल सकता है। कभी बहुत उत्साहित तो कभी कुछ देर में ही शांत या उदास। इनके आसपास के लोग यदि इस बात को समझ लें तो संबंध और सरल हो सकते हैं, क्योंकि यह उतार चढ़ाव किसी कमजोरी से अधिक चंद्र प्रभाव की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
चौथी बात इनके भीतर की सुरक्षा की भावना है। कर्क जातक अपने घर, परिवार और निजी दुनिया से बहुत गहरा लगाव रखते हैं। अनजान लोगों के सामने ये बहुत जल्दी नहीं खुलते। अपना असली रूप दिखाने में समय लेते हैं। भीतर से ये चाहते हैं कि इनके अपने सुरक्षित रहें और घर का वातावरण स्थिर बना रहे।
पाँचवीं खास बात इनकी याददाश्त है। कर्क राशि वाले लोग पुरानी बातों, यादों और परंपराओं को बहुत संभालकर रखते हैं। इनके लिए अतीत केवल बीती हुई कहानी नहीं होता बल्कि वर्तमान को समझने का आधार होता है। पुराने चित्र, उपहार या अनुभव इनके जीवन में भावनात्मक ताकत के स्रोत बन जाते हैं।
कर्क राशि में एक प्रकार का आकर्षण होता है। कई बार ये स्वयं नहीं समझ पाते कि लोग इनकी ओर इतने सहज रूप से क्यों खिंचे चले आते हैं, लेकिन इनके स्वभाव की कोमलता और भीतर छिपी सुरक्षा देने वाली प्रवृत्ति अनजाने में ही लोगों को इनकी ओर खींच लेती है। लोग इन्हें अपना कहने लगते हैं, भले ही ये बाहर से बहुत अधिक बातूनी न हों।
कर्क जातकों पर चन्द्र प्रभाव बहुत साफ दिखाई देता है। पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास इनके व्यवहार और मनोदशा में भारी बदलाव आ सकता है। पूर्णिमा के समय ये अधिक खुश, भावुक और सक्रिय दिखाई दे सकते हैं, जबकि अमावस्या के आसपास थोड़ा शांत, अंतर्मुखी या उदास महसूस कर सकते हैं। यह असर सीधा स्वामी ग्रह चन्द्रमा से जुड़ा हुआ है।
इनके व्यक्तित्व में संग्रहण की प्रवृत्ति भी दिखती है। पुरानी चिट्ठियां, रसीदें, छोटी छोटी चीजें, स्मृति चिह्न और यादें इकट्ठा करने की इन्हें आदत हो सकती है। इनके लिए अतीत केवल वस्तुओं में नहीं बल्कि उन भावनाओं में सहेजा रहता है जो किसी घटना के साथ जुड़ी थीं।
कर्क का संस्कृत नाम कर्क या कर्कट है, जिसका अर्थ केकड़ा होता है। केकड़ा समुद्र के किनारे अपनी चाल, सुरक्षा और पकड़ के लिए पहचाना जाता है। कर्क राशि का चिह्न केकड़ा है जो सुरक्षात्मक स्वभाव और मजबूती से पकड़े रहने की प्रवृत्ति का प्रतीक है। जब यह राशि किसी चीज को अपने मन में पकड़ ले, चाहे व्यक्ति हो या विचार, फिर उसे छोड़ना इनके लिए आसान नहीं होता।
राशि क्रम में कर्क चतुर्थ राशि है। यह माता, सुख और संपत्ति के भाव से जुड़ी है। घर, भूमि, वाहन, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति जैसे विषय कर्क राशि के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। इस कारण कई कर्क जातक अपने घर और परिवार को जीवन के केंद्र में रखकर आगे बढ़ते हैं।
कर्क राशि राशि चक्र की चौथी राशि मानी जाती है। जहाँ मिथुन बुद्धि और संचार की राशि है, वहीं कर्क मन, भावनाओं, ममता और सुख की राशि है। कालपुरुष कुंडली में यह हृदय का स्थान है, इसलिए यह राशि केवल बाहरी सुरक्षा नहीं बल्कि भीतर की भावनात्मक सुरक्षा भी प्रदान करना चाहती है।
चतुर्थ भाव के रूप में कर्क राशि वक्षस्थल, फेफड़े, हृदय और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। दिल की धड़कन के साथ चलने वाली भावनाओं की तरंगें इस राशि से जुड़ी हैं। घर का माहौल, माँ का स्नेह और बाल्यकाल की स्मृतियां कर्क राशि के लिए बहुत गहरे अर्थ रखती हैं।
कर्क राशि का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है। चन्द्रमा मन, भावनाओं और शीतलता का कारक माना जाता है। इसलिए कर्क जातक के मन में जल्दी तरंगे उठती हैं। संवेदनशीलता अधिक होती है, पर साथ ही यह संवेदनशीलता इन्हें दूसरों के लिए दयालु और सहानुभूतिपूर्ण भी बनाती है।
स्वामी देवता के रूप में शिव और पार्वती का उल्लेख मिलता है। यह संयोजन संपूर्णता, गृहस्थ जीवन, तपस्या और कोमलता के अद्भुत संतुलन को दर्शाता है। कर्क राशि के भीतर त्याग भी होता है और साथ ही अपने परिवार और कर्तव्यों के प्रति निष्ठा भी।
तत्त्व की दृष्टि से कर्क जल तत्व की राशि है। यह भावनाओं के प्रवाह और संवेदनशीलता को दर्शाता है। जैसे पानी अपना आकार पात्र के अनुसार बदल लेता है, वैसे ही कर्क जातक भी अपने प्रियजनों के अनुसार अपने आप को ढालने की कोशिश करते हैं। पानी की तरह इनका मन भी गहराई और लहरों से भरा रहता है।
स्वभाव की बात करें तो यह चर राशि है। चर राशि होने के कारण इनकी भावनाओं में निरंतर उतार चढ़ाव और बदलाव रह सकता है। बाहर से शांत दिखने वाला कर्क व्यक्ति भीतर से कई भावनाओं के बीच से गुजर रहा होता है। यह गति इन्हें भीतर से जीवंत बनाती है।
गुण के स्तर पर कर्क सत्वगुणी राशि है। सत्वगुण शुद्धता, दया और शांति से जुड़ा होता है। ऐसे लोग दूसरों को चोट पहुँचाने की बजाय उन्हें समझने और सहारा देने की कोशिश करते हैं। मन में भलाई का भाव सहज रूप से रहता है।
लिंग की दृष्टि से कर्क स्त्री राशि मानी जाती है। इसमें ग्रहणशील, पोषण देने वाली और कोमल ऊर्जा सक्रिय होती है। जाति की दृष्टि से इसे ब्राह्मण जैसा कहा गया है। ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि इनकी प्रवृत्ति में देखी जा सकती है।
दिशा के रूप में कर्क राशि उत्तर दिशा से जुड़ी है। उत्तर दिशा स्थिरता, मार्गदर्शन और मानसिक विकास को भी दर्शाती है।
कर्क राशि शरीर में छाती, स्तन, फेफड़े के ऊपरी हिस्से, डायाफ्राम और पेट अर्थात पाचन तंत्र से संबंधित मानी जाती है। सांस की लय, छाती का फैलाव और पेट की कोमलता, ये सब कर्क के प्रभाव में आते हैं।
प्रकृति की दृष्टि से यह राशि कफ प्रधान मानी गई है। कफ शरीर में तरलता, नमी और ठंडक का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए कर्क जातक को कई बार सर्दी, खांसी, कफ या पाचन संबंधी समस्याओं की ओर ध्यान देना आवश्यक हो सकता है।
| वर्गीकरण | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | चन्द्रमा |
| स्वामी देवता | शिव, पार्वती |
| तत्त्व | जल |
| स्वभाव | चर |
| गुण | सत्वगुणी |
| लिंग | स्त्री |
| जाति | ब्राह्मण जैसा |
| दिशा | उत्तर |
| शरीर अंग | छाती, स्तन, फेफड़े, डायाफ्राम, पेट |
| प्रकृति | कफ दोष |
कर्क राशि का उदय प्रकार पृष्ठोदय है। यानी यह राशि पीछे से उदय होने वाली मानी जाती है। यह संकेत देता है कि कर्क जातक का प्रभाव कभी कभी धीरे धीरे सामने आता है। शुरुआत में ये लोग संकोची या शांत दिख सकते हैं, लेकिन समय के साथ इनका असली भावनात्मक गहरापन प्रकट होता है।
शक्ति काल में कर्क रात्रि बली है। रात के समय यह राशि अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। एकांत, शांति और चांदनी भरी रातें कर्क जातक के मन को अधिक सक्रिय कर सकती हैं। कई बार इनके गहरे विचार रात के समय ही आकार लेते हैं।
वश्य के रूप में कर्क जलचर श्रेणी की राशि है। जलचर का अर्थ है पानी में रहने वाले जीवों पर प्रभाव। यह संकेत कर्क के स्वभाव की ओर भी है, जो भावनाओं के समुद्र में रहकर ही शक्ति प्राप्त करता है। केकड़े की चाल भी जलचर प्रवृत्ति को दर्शाती है।
कद के स्तर पर कर्क जातक प्रायः अल्प या मध्यम कद के होते हैं और शरीर थोड़ा भरा हुआ दिखाई दे सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि सभी का रूप एक जैसा होगा, पर सामान्य प्रवृत्ति के रूप में यह वर्णन मिलता है।
शब्द की दृष्टि से कर्क बहु शब्द श्रेणी में आता है। इसका अर्थ है कि यह राशि भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता रखती है। कभी धीमे, कभी तेजी से, पर स्थिति के अनुसार ये अनेक प्रकार से अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं।
प्राणी श्रेणी में कर्क बहुपाद श्रेणी की राशि है। केकड़े की तरह कई पैरों वाली ऊर्जा, जो एक साथ कई दिशाओं में संवेदनाओं को फैलाने की क्षमता रखती है। प्रजनन क्षमता के स्तर पर यह राशि बहु प्रसव अर्थात अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। सृजन और वृद्धि के लिए यह ऊर्जा बहुत समर्थ होती है।
कर्क राशि का विस्तार 90 डिग्री से 120 डिग्री तक होता है। यह वह खगोलीय क्षेत्र है जहाँ जल तत्व और भावनाएं पूर्ण रूप से सक्रिय रहते हैं। वर्ण के रूप में इसका रंग श्वेत या हल्का लाल माना गया है। श्वेत रंग पवित्रता और शांति, जबकि हल्का लाल हल्की गर्माहट और प्रेम की कोमलता का प्रतीक माना जा सकता है।
उच्च ग्रह के रूप में गुरु कर्क में उच्च माने गए हैं। गुरु का उच्च होना ज्ञान, करुणा और संरक्षण की भावनाओं को बहुत बढ़ा देता है। नीच ग्रह के रूप में मंगल यहाँ नीच माने जाते हैं। मंगल का नीच होना कभी कभी आवेग और क्रोध को असंतुलित कर सकता है, इसलिए शांति बनाए रखना कर्क जातक के लिए महत्वपूर्ण होता है।
कर्क राशि चन्द्रमा की मूलत्रिकोण राशि भी मानी जाती है। लगभग 0 डिग्री से 10 डिग्री तक चन्द्रमा का मूलत्रिकोण क्षेत्र कर्क में आता है। यहाँ चन्द्रमा अपनी प्राकृतिक शक्ति के साथ मन और भावनाओं को संतुलित करने का प्रयास करता है।
मित्र ग्रहों में सूर्य, मंगल और गुरु का नाम आता है। सूर्य आत्मविश्वास, मंगल साहस और गुरु ज्ञान का सहयोग देते हैं। शत्रु ग्रहों में शुक्र और बुध माने गए हैं। तटस्थ ग्रह के रूप में शनि का उल्लेख मिलता है जो न पूरी तरह शत्रु है न पूर्ण मित्र।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 90 डिग्री से 120 डिग्री |
| वर्ण | श्वेत, हल्का लाल |
| उच्च ग्रह | गुरु |
| नीच ग्रह | मंगल |
| मूलत्रिकोण | चन्द्रमा 0 डिग्री से 10 डिग्री |
| मित्र ग्रह | सूर्य, मंगल, गुरु |
| शत्रु ग्रह | शुक्र, बुध |
| तटस्थ ग्रह | शनि |
कर्क राशि तीन नक्षत्रों में विभाजित है। पुनर्वसु का एक पद, पुष्य के चारों पद और आश्लेषा के चारों पद कर्क राशि में आते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र पुनः आरंभ, आशा और सुरक्षा की भावना से जुड़ा है। पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना जाता है, जो पोषण, धर्म और स्थिरता का प्रतीक है। आश्लेषा नक्षत्र पकड़, गहराई और अंतरंग मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित माना जाता है।
नाम अक्षर के रूप में कर्क राशि के लिए ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो माने जाते हैं। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम कर्क नक्षत्रों से जुड़े भावों को मजबूत कर सकते हैं। कई परिवार जन्म नक्षत्र के अनुसार नाम का पहला अक्षर चुनते हैं।
नक्षत्र स्वामी क्रमशः गुरु पुनर्वसु के, शनि पुष्य के और बुध आश्लेषा के स्वामी हैं। कुल पदों की संख्या 9 है, जो कर्क राशि के भीतर नक्षत्रों की विस्तृत ऊर्जा का संकेत देता है।
कालपुरुष के अंगों में कर्क राशि हृदय, छाती और फेफड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में कर्क का प्रभाव अधिक हो, उनमें दिल और छाती से संबंधित भावनात्मक प्रतिक्रियाएं ज्यादा दिखाई दे सकती हैं। भावनात्मक तनाव का सीधा असर कई बार छाती में भारीपन या सांस की लय पर भी दिख सकता है।
संवेदनशील अंगों में कफ, सर्दी, पाचन संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव मुख्य रूप से उल्लेखनीय हैं। ठंडी चीजें, अनियमित भोजन या अत्यधिक भावनात्मक बोझ कर्क जातकों के लिए कभी कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पाचन तंत्र की कोमलता इन्हें साफ और हल्का भोजन अपनाने की प्रेरणा देती है।
प्रकृति की दृष्टि से इन्हें पानी, समुद्र, पूर्वजों या परिवार से जुड़े सपने अधिक आ सकते हैं। सपनों में अक्सर बचपन का घर, पुराने रिश्ते या पानी से जुड़े दृश्य दिखाई देना, कर्क राशि की भावनात्मक स्मृति का हिस्सा हो सकता है।
शारीरिक बनावट में प्रायः गोल चेहरा, चमकदार आंखें और कोमल त्वचा का वर्णन मिलता है। ऐसा चेहरा आसानी से भावनाओं को व्यक्त कर देता है और आंखों में गहरी संवेदना दिखाई दे सकती है।
कर्क राशि की दृष्टि वृश्चिक, कुंभ और वृषभ राशियों पर मानी जाती है। यह बच्चों, गहरे परिवर्तन और लाभ या मित्रता के क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। कर्क की भावनात्मक ऊर्जा इन भावों में विशेष रंग भर सकती है।
कर्क राशि का जीवन दर्शन "मैं महसूस करता हूँ" माना जाता है। इस भावना में तर्क से अधिक भावनाओं का स्थान होता है। ये लोग जीवन को केवल दिमाग से नहीं देखते बल्कि हृदय से महसूस करते हैं। किसी भी स्थिति में पहला प्रश्न यह होता है कि इससे अपने और अपनों के मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
निवास के रूप में कर्क राशि जलाशय, नदी का किनारा, कुआं और उपजाऊ भूमि जैसे स्थानों से जुड़ी मानी जाती है। पानी के पास बैठना, बहते हुए जल को देखना या हरियाली से घिरे स्थान पर समय बिताना इनके मन को शांति देता है। घर के आसपास ऐसा वातावरण हो तो कर्क जातक अधिक सुरक्षित और संतुलित महसूस कर सकते हैं।
योगकारक ग्रह के रूप में मंगल कर्क राशि के लिए विशेष रूप से फलदायक माने जाते हैं। मंगल सही दिशा में साहस, सुरक्षा और कार्य करने की शक्ति देता है। मारक ग्रहों में बुध और शुक्र आते हैं जो कुछ स्थितियों में चुनौतीपूर्ण परिणाम दे सकते हैं, विशेषकर जब भावनाओं और तर्क या सुख की चाह के बीच संतुलन बिगड़ जाए। बाधक भाव के रूप में ग्यारहवां भाव और उसका स्वामी शुक्र कर्क के लिए बाधक माने गए हैं। यह कभी कभी मित्रों, बड़े समूहों या इच्छाओं की पूर्ति में रुकावट का संकेत बन सकता है।
कर्क राशि का स्वर श माना गया है। यह ध्वनि मन को शांति प्रदान करने वाली मानी जाती है। स्तुति, प्रार्थना या मंत्र में श ध्वनि का उच्चारण कर्क प्रकृति वाले लोगों के लिए विशेष रूप से सुकूनदायक हो सकता है।
विशेष संज्ञा की दृष्टि से कर्क को कुलीर अर्थात केकड़ा, चर जल अर्थात बहता पानी, सौम्य और सत्वगुणी कहा गया है। बहते हुए जल की तरह यह राशि स्थिर दिखते हुए भी भीतर से निरंतर गतिशील रहती है। सौम्य और सत्वगुणी होने के कारण कर्क जातक किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना पसंद नहीं करते।
आयुर्वेद में कर्क राशि का संबंध कफ दोष से विशेष रूप से जोड़ा गया है। कफ शरीर में तरलता, नमी और ठंडक का प्रतिनिधित्व करता है। इस कारण कर्क जातकों के लिए गर्म पानी, हल्का भोजन और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।
रत्न के रूप में कर्क राशि के लिए मोती शुभ माना जाता है। मोती चन्द्रमा का रत्न है और मन को शीतलता, स्थिरता और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। शुभ धातु चांदी है, जो चन्द्र शक्ति से जुड़ी हुई मानी जाती है।
अंक के रूप में 2, 7, 9 कर्क राशि के लिए शुभ बताए गए हैं। शुभ रंगों में सफेद, चांदी जैसा और हल्का नीला विशेष रूप से अनुकूल माने जाते हैं। दान सामग्री के रूप में दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, चांदी और सफेद पुष्प इस राशि के लिए शुभ फल देने वाली वस्तुएं मानी जा सकती हैं।
कर्क राशि का वातावरण भीतर से हमेशा घरेलू सुकून की तलाश में रहता है। इन्हें अपने घर का एक शांत कोना, पुरानी यादों से भरी चित्रावलियां और किसी प्रिय का दिया हुआ उपहार बहुत सुकून देता है। आरामदायक बिस्तर, मुलायम तकिए और स्नेह से भरा वातावरण इनके लिए पवित्र स्थान जैसा हो सकता है।
इनके लिए पानी का सानिध्य बहुत महत्वपूर्ण है। नदी, तालाब, झील या बारिश का हल्का सा माहौल भी इनके मन को शांति दे सकता है। समुद्र की आवाज या गिरती बूंदों की ध्वनि इनके अंदर के तनाव को धीरे धीरे धो सकती है।
कर्क जातकों को एकांत और गोपनीयता भी उतनी ही जरूरी लगती है। शोर शराबे से दूर ऐसा स्थान जहाँ ये सुरक्षित महसूस करें और बिना किसी डर के अपने मन की बात सोच सकें, इनके लिए बहुत मूल्यवान होता है। अनजान भीड़ के बजाय ये अपनों के बीच रहना अधिक पसंद करते हैं।
इनके लिए सौम्य और शीतल वातावरण वाला घर आदर्श माना जा सकता है। हल्की रोशनी, सफेद या हल्के रंग का सजावट, शांत संगीत और व्यवस्थित वातावरण इनके अशांत मन को स्थिर कर सकता है। यह राशि अपने घर को केवल रहने की जगह नहीं बल्कि भावनात्मक आश्रय बनाने की कोशिश करती है।
कर्क राशि वालों के बारे में कहा जाता है कि इनके पास एक तरह का अदृश्य संकेत तंत्र होता है। इनका अंतर्ज्ञान बहुत तीव्र होता है। आने वाली परिस्थितियों की आहट इन्हें पहले से महसूस हो जाती है। कई बार ये सोचते हैं कि बस एक अहसास था और बाद में वही घटना सच के रूप में सामने आ जाती है।
इनकी एक और खास बात इनकी अटूट पकड़ है। केकड़ा प्रतीक होने के कारण जब ये किसी विचार, व्यक्ति या याद को पकड़ लेते हैं, तो उसे छोड़ना इनके लिए लगभग असंभव हो जाता है। यह पकड़ यदि सही दिशा में रहे तो इन्हें बहुत स्थिर बना सकती है, पर यदि पुराने दुखों या डर पर हो तो इन्हें भीतर से थका भी सकती है।
चन्द्रमा का इन पर सीधा प्रभाव माना जाता है। चन्द्रमा की कलाओं के साथ इनका मन और ऊर्जा का स्तर घटता बढ़ता रह सकता है। शुक्ल पक्ष के दिनों में आशा और सक्रियता बढ़ सकती है, जबकि कृष्ण पक्ष में आत्मचिंतन और अंतर्मुखता बढ़ सकती है। पूर्णिमा के आसपास ये सबसे अधिक भावुक और सक्रिय दिखाई दे सकते हैं।
कर्क राशि का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका कवच है। ये बाहर से कभी कभी सख्त, रूखे या चुप दिख सकते हैं, लेकिन यह केवल इनके कोमल मन की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक आवरण होता है। जब इन्हें यकीन हो जाए कि सामने वाला व्यक्ति इनकी भावनाओं का सम्मान करेगा तब यह आवरण धीरे धीरे हटने लगता है।
कालपुरुष कुंडली के चौथे भाव की राशि होने के कारण कर्क का मुख्य जीवन उद्देश्य कई बार दूसरों को मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करना बन जाता है। ये अपने परिवार, मित्रों और करीबियों के लिए ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं जहाँ हर कोई सुरक्षित, स्वीकार और समझा हुआ महसूस करे।
कर्क राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
कर्क राशि का स्वामी ग्रह कौन है?
कर्क राशि का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है जो मन, भावनाओं और शीतलता का कारक माना जाता है।
कर्क राशि शरीर के किन अंगों का प्रतिनिधित्व करती है?
कर्क छाती, स्तन, फेफड़े, डायाफ्राम और पेट के हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है और इन अंगों को संवेदनशील बनाती है।
कर्क राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर कौन से हैं?
पुनर्वसु का एक पद, पुष्य के चार पद और आश्लेषा के चार पद कर्क में आते हैं तथा नाम अक्षर ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो माने जाते हैं।
कर्क राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ हैं?
मोती रत्न, सफेद, चांदी जैसा और हल्का नीला रंग तथा 2, 7, 9 अंक कर्क राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
कर्क राशि का जीवन दर्शन क्या है?
कर्क राशि का जीवन दर्शन "मैं महसूस करता हूँ" है, जहाँ निर्णय और रिश्ते तर्क से अधिक मन और भावनाओं के आधार पर बनते हैं।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें