By पं. अभिषेक शर्मा
मकर राशि के ग्रह, नक्षत्र, अंग और शुभ रत्नों की जानकारी

मकर राशि का नाम लेते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि बनती है जो चुपचाप पहाड़ की चढ़ाई जैसा कठिन काम भी बिना शोर किए लगातार करता रहता है। ऊपर से शांत, भीतर से अत्यंत दृढ़। बाहर से मिट्टी जैसा सादा, भीतर से खदान जैसा बहुमूल्य। मकर राशि उस ऊर्जा का प्रतीक है जो धीरे धीरे, पर लगातार आगे बढ़ते हुए अंत में शिखर पर पहुँचती है और वहीं टिककर पूरी दुनिया को व्यावहारिक दृष्टि से देखती है।
अक्सर अचानक यह समझने की ज़रूरत पड़ती है कि मकर राशि का स्वामी ग्रह कौन है, इसमें कौन से नक्षत्र आते हैं, शरीर के किन अंगों पर इसका प्रभाव अधिक होता है या मकर राशि के लिए कौन सा रत्न शुभ माना गया है। ऐसी सभी सूक्ष्म जानकारियों को एक ही स्थान पर समेटकर रखना बहुत उपयोगी हो जाता है। इसी उद्देश्य से मकर राशि का यह संपूर्ण ज्योतिषीय डेटा तैयार किया गया है, ताकि जब भी मकर राशि के बारे में कोई जानकारी चाहिए हो, यह लेख सटीक संदर्भ की तरह उपयोग किया जा सके।
मकर राशि की पहली पहचान इसे अजेय कर्मयोगी बनाती है। शनि के स्वामित्व के कारण मकर जातक कार्य की पराकाष्ठा तक जाने का धैर्य रखते हैं। ये पत्थर को भी लगातार तराशते हुए आकार दे सकते हैं। रुकावट, देरी और कठिनाई इन्हें रोकती नहीं बल्कि और अधिक अनुशासित बना देती है।
दूसरी विशेषता इनका दोहरे जगत पर अधिकार है। मकर का प्रतीक मगरमच्छ और पहाड़ी बकरे के गुणों का मिश्रण है। मगरमच्छ की पकड़ और बकरी की जिद इन्हें जल और थल दोनों क्षेत्रों में जीत दिलाती है। यानी भावनात्मक गहराई और भौतिक ऊँचाई, दोनों क्षेत्रों में यह राशि काम कर सकती है।
तीसरी विशेषता सर्वोच्च साहस है। मकर राशि में मंगल उच्च का होता है, इसलिए यहाँ साहस और ऊर्जा अत्यंत अनुशासित रूप में काम करती है। ये उग्रता या आवेग में ऊर्जा नष्ट नहीं करते बल्कि सही समय पर सटीक प्रहार करना जानते हैं।
चौथी विशेषता इनकी समय पर पकड़ है। मकर जातक समय के साथ और अधिक मजबूत और प्रभावशाली होते जाते हैं। जहाँ लोग उम्र बढ़ने के साथ पीछे हटने लगते हैं, वहीं मकर जातक उसी उम्र में अपनी असली ऊँचाई पर चढ़ना शुरू करते हैं।
पाँचवीं विशेषता यह है कि ये सफलता के देर से खिलने वाले फूल हैं। शुरुआत में इन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है, पर जैसे जैसे अनुभव और समय साथ आते हैं, ये समाज में स्थिर, मजबूत और सम्मानित स्थान प्राप्त कर लेते हैं।
मकर राशि से देवताओं का द्वार भी जुड़ा हुआ माना जाता है। सूर्य का उत्तरायण, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है, मकर से ही प्रारंभ होता है। यह वह प्रतीक है जहाँ अंधकार घटता है और प्रकाश बढ़ना शुरू होता है। इस अर्थ में मकर राशि वह कौशल है जो अंधेरी परिस्थितियों में भी आगे का रास्ता देखकर व्यवस्था और प्रकाश लाती है।
ऊर्जा के स्तर पर मकर राशि को सर्वोच्च शिखर का प्रतिनिधि कहा जा सकता है। साहस और शक्ति के कारक मंगल केवल इसी राशि में परम उच्च के माने जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि मकर के पास ब्रह्मांड की सबसे अनुशासित और अजेय कार्यक्षमता का बीज छिपा होता है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में लग जाए तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
शनि की विशेष भूमिका के कारण मकर जातकों में एक और अनोखा गुण देखा जाता है। ये समय के साथ निखरने वाले लोग होते हैं। युवा अवस्था में अक्सर इन्हें कम आँका जाता है। लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, ये और अधिक सफल, ऊर्जावान और अंदर से आकर्षक बनते जाते हैं। अनुभव इनका सबसे बड़ा सहयोगी बन जाता है।
मकर का संस्कृत नाम मकर ही है, जिसका अर्थ मगरमच्छ या घड़ियाल है। यह जल में छिपा रहने वाला, अवसर देखकर अचानक पकड़ लेने वाला प्राणी है। यह प्रतीक मकर राशि की गहराई, धैर्य और समय देखकर कदम उठाने की क्षमता को दर्शाता है।
मकर का ज्योतिषीय चिह्न अक्सर सी गोट के रूप में दर्शाया जाता है। सामने का हिस्सा हिरण या बकरी जैसा और पीछे का भाग मगरमच्छ जैसी पूँछ। यह आधा थल और आधा जल, दोनों क्षेत्रों के बीच सेतु जैसी ऊर्जा का संकेत है। पहाड़ की चोटी तक चढ़ने की ज़िद और जल की गहराई में छिपी सहनशक्ति, दोनों मकर में एक साथ दिखाई देते हैं।
राशि क्रम में मकर दसवीं राशि है। यह कर्म, सत्ता, प्रतिष्ठा और पुरुषार्थ के भाव से जुड़ी है। कालपुरुष कुंडली में मकर वह स्थान है जो करियर, पेशे, सामाजिक कर्तव्यों और सार्वजनिक प्रतिष्ठा का आधार बनता है। समाज में आपकी स्थिति, मान सम्मान और शासन करने की शक्ति को यह राशि स्पष्ट रूप से दिखाती है।
मकर राशि के जातक केवल महत्वाकांक्षी नहीं होते बल्कि वास्तव में अजेय कर्मयोगी होते हैं। यह राशि अटूट अनुशासन, दीर्घकालिक योजना और धीरे धीरे साम्राज्य खड़ा करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है।
मकर राशि के स्वामी ग्रह शनि हैं। शनि अनुशासन, न्याय, सीमाएँ, श्रम और समय के कारक हैं। इस कारण मकर जातक नियमों का पालन करने वाले, कठोर परिश्रम करने वाले और परिणामों के प्रति गंभीर होने वाले लोग माने जाते हैं।
स्वामी देवता के रूप में मकर राशि पर भगवान शिव की विशेष कृपा मानी जाती है, विशेष रूप से महाकाल रूप। यह रूप समय के स्वामी और गहरे वैराग्य के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इसी कारण मकर जातकों में बाहरी व्यस्तता के भीतर भी अंदर कहीं दृढ़ वैराग्य और गहरी गंभीरता छिपी हो सकती है।
तत्त्व की दृष्टि से मकर राशि पृथ्वी तत्व की है। पृथ्वी ठोस, व्यावहारिक और यथार्थवादी ऊर्जा से जुड़ी है। मकर जातक कल्पनाओं से अधिक वास्तविकता पर भरोसा करते हैं। इनकी योजना ज़मीन पर टिककर बनती है, हवा में नहीं।
स्वभाव के स्तर पर मकर को चर राशि माना जाता है। यह निरंतर सक्रिय और गतिशील ऊर्जा का संकेत है। बाहर से शांत दिखते हुए भी ये लोग हमेशा अंदर से किसी न किसी दिशा में आगे बढ़ने की योजना बनाते रहते हैं।
गुण की दृष्टि से मकर राशि तमोगुणी कही गई है। यहाँ तमोगुण का अर्थ भौतिक लक्ष्यों, स्थिरता और जिम्मेदारियों की ओर झुकाव से है। यह ऊर्जा अंदर की गहराई, जिम्मेदार कार्य और दीर्घकालिक संरचना बनाने पर काम करती है।
लिंग के रूप में मकर स्त्री राशि है। यह अंतर्मुखी, ग्रहणशील और भीतर केंद्रित ऊर्जा का संकेत है। मकर जातक अपनी भावनाएँ, योजनाएँ और संघर्ष चुपचाप भीतर रखते हैं, बाहर कम दिखाते हैं।
जाति की दृष्टि से मकर को वैश्य समान माना गया है। इस वर्ग की ऊर्जा प्रबंधन, संसाधनों की योजना, धन के उपयोग और व्यापारिक दृष्टि से जुड़ी होती है। इसलिए मकर जातक प्रबंधन, आयोजन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग में कुशल होते हैं।
दिशा के स्तर पर मकर राशि दक्षिण दिशा की स्वामिनी है। दक्षिण दिशा कई बार कर्म, परीक्षण और गंभीरता से जुड़ी मानी जाती है। यही कारण है कि मकर जातक कर्म क्षेत्र में गहरी जिम्मेदारी उठाने की क्षमता रखते हैं।
शरीर के अंगों में मकर राशि घुटनों से जुड़ी है। घुटने पूरे शरीर को संभालने और खड़े रहने की क्षमता का आधार होते हैं। यदि घुटने कमजोर हों तो ऊँचाई तक चढ़ने या बोझ उठाने में कठिनाई होती है। उसी प्रकार जीवन के लंबे सफर के लिए मकर राशि की ऊर्जा एक प्रकार का आधार है।
प्रकृति की दृष्टि से मकर राशि वात प्रधान कही गई है। वात गति, शुष्कता और अस्थि तंत्र से जुड़ा है। इसलिए मकर जातकों में अधिक मेहनत, चिंता या तनाव की दशा में जोड़, हड्डियों या त्वचा से जुड़े संकेत दिख सकते हैं।
इन सब बिंदुओं को एक नज़र में समझने के लिए यह सारणी उपयोगी रहेगी।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शनि |
| स्वामी देवता | शिव महाकाल |
| तत्त्व | पृथ्वी |
| स्वभाव | चर |
| गुण | तमोगुणी |
| लिंग | स्त्री |
| जाति | वैश्य समान |
| दिशा | दक्षिण |
| शरीर का अंग | घुटने |
| प्रकृति | वात प्रधान |
मकर राशि पृष्ठोदय है। इसका अर्थ है कि यह राशि पीछे की ओर से उदय होती है। गहरे स्तर पर इसका संकेत यह है कि मकर जातकों के जीवन में परिणाम अक्सर देर से दिखाई देते हैं। पहले संघर्ष, फिर धीरे धीरे स्थिर सफलता। लोग जब पीछे मुड़कर देखते हैं तब उन्हें मकर जातक की वास्तविक उपलब्धियाँ दिखती हैं।
शक्ति काल के रूप में मकर रात्रि बली है। रात के समय इनकी ऊर्जा अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। शांत माहौल, गहरी योजना और बिना शोर किए काम करना, इनकी कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता है।
वश्य वर्गीकरण में मकर जलचर और चतुष्पद दोनों से जुड़ा है। यह मगरमच्छ और बकरी के प्रतीक के माध्यम से समझा जा सकता है। जलचर का अर्थ भावनात्मक गहराई और छिपी हुई शक्ति से है। चतुष्पद का अर्थ स्थिरता, व्यावहारिकता और धीरे धीरे ऊपर चढ़ने की क्षमता से है।
कद के स्तर पर मकर जातकों को प्रायः ह्रस्व यानी मध्यम या थोड़ा कम कद वाला माना गया है, पर शरीर प्रायः सुदृढ़ होता है। इनकी हड्डियाँ हल्की उभरी हुई और बनावट छरहरी हो सकती है।
शब्द की दृष्टि से मकर को मूक या मंद शब्द वाली राशि कहा गया है। यह कम बोलने वाले, काम पर अधिक ध्यान देने वाले स्वभाव की ओर संकेत है। ये आवश्यक बात ही बोलते हैं, वह भी अक्सर शांत और गहरे स्वर में।
प्राणी श्रेणी में मकर को मकर यानी सी गोट के रूप में रखा गया है, जो जल और थल दोनों का विजेता है। प्रजनन क्षमता में मकर को मंद या मध्यम क्षमता वाली राशि माना गया है।
मकर राशि का विस्तार राशि चक्र में दो सौ सत्तर डिग्री से तीन सौ डिग्री तक माना जाता है। यह वह क्षेत्र है जहाँ सूर्य धनु के उत्साह से आगे बढ़कर मकर के अनुशासन और जिम्मेदारी के क्षेत्र में प्रवेश करता है।
वर्ण के रूप में मकर राशि का रंग कर्दम, मटमैला और काला माना गया है। यह रंग धरती, मिट्टी, मेहनत और गहराई का प्रतीक हैं। बाहर से कठोर दिखने वाली मिट्टी के भीतर ही खनिजों की सबसे मूल्यवान खानें छिपी रहती हैं।
मकर राशि में मंगल उच्च के होते हैं। यह स्थिति साहस, कार्य क्षमता और संघर्ष शक्ति को अत्यंत उच्च स्तर तक ले जाती है। यहाँ मंगल उग्रता से नहीं बल्कि अनुशासन के साथ काम करते हैं।
इसी राशि में बृहस्पति नीच के माने जाते हैं। गुरु का नीच होना संकेत देता है कि यहाँ केवल आदर्शवाद से काम नहीं चलता बल्कि यथार्थवादी कदमों और कर्म आधारित दर्शन की ज़रूरत होती है। कभी कभी अति भौतिकता या ज़िम्मेदारियों के बोझ के कारण आध्यात्मिक विस्तार सीमित भी महसूस हो सकता है।
मकर राशि में किसी भी ग्रह का मूलत्रिकोण नहीं है। इसलिए यहाँ ग्रहों को स्वभाविक रूप से तटस्थ धरातल पर काम करने का अवसर मिलता है।
ग्रह मैत्री के रूप में मकर के स्वामी शनि के लिए मित्र ग्रह शुक्र और बुध हैं। शत्रु ग्रह सूर्य, चन्द्रमा और मंगल हैं। तटस्थ ग्रह के रूप में बृहस्पति का नाम आता है।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 270° से 300° |
| वर्ण | कर्दम, मटमैला, काला |
| उच्च ग्रह | मंगल |
| नीच ग्रह | बृहस्पति |
| मूलत्रिकोण | किसी ग्रह का नहीं |
| मित्र ग्रह | शुक्र, बुध |
| शत्रु ग्रह | सूर्य, चन्द्रमा, मंगल |
| तटस्थ ग्रह | बृहस्पति |
मकर राशि के भीतर तीन मुख्य नक्षत्र शामिल होते हैं। सबसे पहले उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अंतिम तीन पद मकर राशि में स्थित हैं। इसके बाद श्रवण नक्षत्र के सभी चार पद पूरे के पूरे मकर में आते हैं। अंत में धनिष्ठा नक्षत्र के दो पद मकर राशि में पड़ते हैं। इस प्रकार मकर राशि में कुल नौ पद सम्मिलित होते हैं।
नक्षत्र स्वामियों में उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है। यह स्थायी सफलता, प्रतिष्ठा और नेतृत्व की क्षमता देता है। श्रवण का स्वामी चन्द्रमा है, जो सुनने, सीखने, स्मृति और लोगों से जुड़ने की शक्ति से संबंधित है। धनिष्ठा का स्वामी मंगल है, जो लय, साहस, संगीत और समूह ऊर्जा का प्रतिनिधि है।
नाम अक्षरों के रूप में मकर राशि के लिए भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी माने जाते हैं। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम सामान्यतया मकर राशि या इसके नक्षत्रों से जुड़े होते हैं।
| नक्षत्र | पद | नाम अक्षर | नक्षत्र स्वामी |
|---|---|---|---|
| उत्तराषाढ़ा | 3 पद | भो | सूर्य |
| श्रवण | 4 पद | जा, जी, खी, खू | चन्द्रमा |
| धनिष्ठा | 2 पद | खे, खो, गा, गी समूह | मंगल |
कालपुरुष के शरीर में मकर राशि घुटनों, जोड़ों और समग्र हड्डी तंत्र से संबंधित मानी जाती है। यह शरीर के ढांचे और स्थिरता का आधार है। यदि यह हिस्सा मजबूत हो तो जीवन की कठिन चढ़ाइयाँ भी पार की जा सकती हैं।
संवेदनशील अंगों में मकर राशि विशेष रूप से हड्डियों, जोड़ों, त्वचा और दाँतों पर प्रभाव डालती है। अधिक काम, तनाव या पोषण की कमी होने पर इन क्षेत्रों में कमजोरी या समस्या उभर सकती है। शुष्क त्वचा, जोड़ों में जकड़न या दाँतों से संबंधित चुनौती मकर राशि के संकेत हो सकते हैं।
प्रकृति के स्तर पर मकर जातक प्रायः गंभीर, अनुशासित, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं। ये लोग भावनाओं से निर्णय लेने के बजाय तर्क, अनुभव और व्यावहारिक लाभ हानि पर ध्यान देते हैं।
शारीरिक बनावट में मकर जातकों का शरीर अधिकतर छरहरा, हड्डियाँ थोड़ी उभरी हुई और आँखें गहरी तथा प्रभावशाली होती हैं। इनकी आँखों में अनुभव का भार और जिम्मेदारी का भाव साफ दिखाई दे सकता है।
दृष्टि के स्तर पर मकर राशि की ऊर्जा कर्क, मेष और तुला पर प्रभाव डालती है। यह प्रभाव परिवार, भावनाओं, पहल, साझेदारी और न्याय से संबंधित क्षेत्रों में विशेष स्थितियाँ बना सकता है।
मकर राशि का जीवन दर्शन सरल शब्दों में “मैं उपयोग करता हूँ” के भाव पर आधारित है। यह राशि संसाधनों, समय, अवसर और अनुभवों को उपयोगी रूप में ढालने पर विश्वास रखती है। इनके लिए केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं, जब तक उसे काम में न लाया जाए।
निवास के रूप में मकर राशि नदियों, खनन स्थल, दलदल और पथरीले स्थानों से जुड़ी मानी जाती है। जहाँ कच्चे संसाधन, मिट्टी, पत्थर और खनिज हों, वहाँ मकर की ऊर्जा सक्रिय रहती है। यह उन स्थानों की भी राशि है जहाँ कठोर परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है।
योगकारक ग्रह के रूप में मकर के लिए शुक्र और बुध अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। शुक्र पंचम और दशम भाव के स्वामी के रूप में रचनात्मकता, प्रेम, आनंद और करियर को जोड़कर प्रबल योग बना सकता है। बुध बुद्धि, संचार और प्रबंधन कौशल के माध्यम से इनकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
मारक ग्रहों में सूर्य, मंगल और चन्द्रमा का नाम आता है, जो कुछ चरणों में तनाव, अत्यधिक दबाव या भावनात्मक संघर्ष के संकेत दे सकते हैं। बाधक भाव के रूप में ग्यारहवाँ भाव यानी वृश्चिक और उसका स्वामी मंगल मकर के लिए बाधक माने गए हैं, जो लाभ, मित्र मंडली या उम्मीदों के क्षेत्र में परीक्षाएँ ला सकते हैं।
स्वर शक्ति के स्तर पर मकर राशि से ख, ग और ज ध्वनियाँ जुड़ी मानी जाती हैं। इन ध्वनियों में दृढ़ता, स्थिरता और गंभीरता का भाव सुनाई देता है।
विशेष संज्ञाओं में मकर को मृग और मृगमुख जैसे नामों से भी जाना गया है। यह नाम पहाड़ी मृग की तरह ऊँचाई की ओर लगातार बढ़ते रहने और कठिन रास्तों से गुजरते हुए भी लक्ष्य पर नज़र रखने की क्षमता को दर्शाते हैं।
आयुर्वेदिक दृष्टि से मकर राशि का संबंध कैल्शियम प्रबंधन और अस्थि स्वास्थ्य से जोड़ा जा सकता है। हड्डियों को मजबूत रखने वाला आहार, व्यवस्थित दिनचर्या और सूर्य प्रकाश मकर जातकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं।
रत्न के रूप में मकर राशि वालों के लिए नीलम शुभ माना गया है। नीला नीलम शनि की ऊर्जा को संतुलित और सशक्त करने के लिए धारण किया जाता है। शुभ धातुओं में लोहा और स्टील का उल्लेख आता है, जो शक्ति, स्थिरता और कार्य क्षमता के प्रतीक हैं।
अंकों में 8, 6 और 5 मकर राशि के लिए शुभ माने जाते हैं। शुभ रंगों में नीला, काला और गहरा हरा प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में काला तिल, तेल, लोहा, काली उड़द और काला कपड़ा मकर जातकों के लिए शनि की ऊर्जा को संतुलित करने के उपाय के रूप में देखे जाते हैं।
मकर जातकों के लिए आदर्श स्थान अक्सर सत्ता का केंद्र जैसा होता है। जहाँ बड़े निर्णय लिए जाते हों, नीतियाँ बनती हों और ज़िम्मेदारियाँ निभाई जाती हों। वे ऐसे वातावरण में सबसे अधिक प्रभावी होते हैं जहाँ उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट हो और परिणाम मापे जा सकें।
इनका स्वभाव जल थल संगम जैसा है। भीतर की गहराई मगरमच्छ जैसी और बाहर की चढ़ाई पहाड़ी बकरी जैसी। इसलिए ये ऐसे माहौल में सहज महसूस करते हैं जहाँ भावनात्मक गहराई और व्यावहारिक ऊँचाई दोनों का संतुलन हो।
मकर जातकों के परिवेश में अक्सर एक रत्नों की गुप्त खान जैसा भाव होता है। शनि का प्रभाव यह बनाता है कि बाहरी माहौल कभी कभी कठोर या सख्त दिखे, पर भीतर बहुत मूल्यवान संसाधन, कौशल और अनुभव छिपे रहते हैं।
ये लोग राजसी मर्यादा वाले स्थानों में सबसे अधिक चमकते हैं। मंदिर, राजदरबार या सुव्यवस्थित संस्थान जैसा अनुशासित वातावरण, जहाँ नियम स्पष्ट हों और मर्यादा बनी रहे, मकर के लिए अत्यंत अनुकूल होता है।
इनका वास्तविक घर अक्सर शिखर का एकांत होता है। जैसे पर्वत की वह ऊँची चोटी जहाँ से नीचे पूरा दृश्य साफ दिखाई देता हो। मकर जातक वहीँ सबसे अधिक सहज रहते हैं जहाँ वे नेतृत्व की स्थिति में हों और दूर तक देखने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर हो।
मकर राशि को दिव्य प्रकाश का द्वार भी कहा जा सकता है। यह वही ऊर्जा है जो अंधकार, अव्यवस्था और निराशा के बाद धीरे धीरे प्रकाश, व्यवस्था और स्थिरता लाती है। ये लोग संकट के समय हिम्मत नहीं हारते बल्कि काम को और व्यवस्थित करके समाधान ढूँढते हैं।
मंगल के उच्च होने के कारण मकर जातक ऊर्जा के सर्वोच्च स्वामी बन सकते हैं। यदि इनकी ऊर्जा अनुशासित दिशा में लग जाए तो ये ब्रह्मांड के सबसे अजेय योद्धा की तरह काम कर सकते हैं। इनके प्रहार आवेग से नहीं, सोच समझकर लिये गए निर्णय से होते हैं।
मकर जातकों को वास्तविक अर्थ में समय के विजेता कहा जा सकता है। समय के साथ ये अधिक कीमती, अधिक अनुभवी और अधिक शक्तिशाली होते जाते हैं। इनके लिए सबसे बड़ा सहारा इनकी धैर्यपूर्ण मेहनत, स्थिर दृष्टि और दीर्घकालिक सोच होती है।
मकर राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
मकर राशि का स्वामी ग्रह कौन है और यह क्या प्रभाव देता है
मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि है, जो अनुशासन, न्याय और समय का कारक है, इसलिए मकर जातक कर्मयोगी, जिम्मेदार और गंभीर स्वभाव के होते हैं।
मकर राशि शरीर के किन अंगों और स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़ी है
यह घुटनों, जोड़ों, हड्डियों, त्वचा और दाँतों से संबंधित है और वात प्रधान प्रकृति के कारण अधिक मेहनत या तनाव की दशा में इन अंगों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
मकर राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर शामिल हैं
उत्तराषाढ़ा के तीन पद, श्रवण के चारों पद और धनिष्ठा के दो पद मकर राशि में आते हैं और नाम अक्षर भो, जा, जी, खी, खू,खे, खो, गा, गी माने जाते हैं।
मकर राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ माने जाते हैं
शनि के लिए नीलम रत्न, नीला, काला और गहरा हरा रंग तथा 8, 6 और 5 अंक मकर राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
मकर राशि का जीवन दर्शन किस भाव पर आधारित माना जा सकता है
मकर राशि का जीवन दर्शन “मैं उपयोग करता हूँ” के भाव पर आधारित है, जहाँ समय, संसाधन और अनुभव को अनुशासन के साथ उपयोग करके स्थिर सफलता प्राप्त करना मुख्य उद्देश्य होता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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