By पं. अमिताभ शर्मा
शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए लाल किताब के अचूक उपाय

यह लेख चन्द्र राशि के आधार पर तैयार किया गया है। चन्द्र राशि जानने के लिए आपको अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान की आवश्यकता होती है। आप किसी कुशल ज्योतिषी से अपनी जन्म कुंडली बनवाकर अपनी चन्द्र राशि का सटीक निर्धारण कर सकते हैं।
लाल किताब ज्योतिष शास्त्र की एक अनूठी और प्रभावशाली पद्धति है जो सरल उपायों और व्यावहारिक समाधानों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मकर राशि पृथ्वी तत्व की एक चर राशि है जिसके स्वामी शनि देव हैं। इस राशि में जन्मे जातक परिश्रमी, अनुशासित, न्यायप्रिय और दृढ़संकल्पी होते हैं। लाल किताब के अनुसार मकर राशि दशम भाव में स्थित मानी जाती है और शनि देव के स्थायी भाव आठवाँ और दसवाँ हैं। इस राशि के कारक ग्रह बुध, शुक्र और शनि माने जाते हैं। मकर लग्न के लिए अवरोधक राशि वृश्चिक और अवरोधक ग्रह मंगल है। लाल किताब के अनुसार मकर राशि के जातकों के लिए विशेष सावधानियाँ, उपाय और मार्गदर्शन दिया गया है जो जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
मकर राशि शरीर में घुटनों के बीच स्थित मानी जाती है। इस राशि के जातक स्वभाव से गंभीर, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं। ये व्यक्ति धीरे-धीरे परंतु निश्चित रूप से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं। शनि देव की कृपा से इन जातकों में धैर्य, अनुशासन और दीर्घकालिक सोच की क्षमता प्रचुर मात्रा में होती है। मकर राशि की प्रकृति चर होने के कारण ये जातक परिवर्तन को स्वीकार कर सकते हैं परंतु अपनी गति से कार्य करना पसंद करते हैं।
मकर राशि के जातक दक्ष, न्यायप्रिय, प्रसन्नचित्त और संघर्षशील होते हैं। इन जातकों में नेतृत्व की स्वाभाविक क्षमता होती है और ये समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी ये हार नहीं मानते और लगातार प्रयास करते रहते हैं। इनकी कार्यशैली व्यवस्थित और योजनाबद्ध होती है। परंतु कभी-कभी ये अत्यधिक गंभीर हो जाते हैं और जीवन का आनंद लेना भूल जाते हैं।
शनि देव मकर राशि के स्वामी होने के साथ-साथ इसके कारक ग्रह भी हैं। बुध और शुक्र भी मकर राशि के कारक ग्रहों में सम्मिलित हैं। शनि देव न्याय, कर्म, अनुशासन और समय के देवता हैं। बुध बुद्धि, संवाद और व्यापार के कारक हैं जबकि शुक्र सुख, समृद्धि और कला के प्रतीक हैं। इन तीनों ग्रहों का संयुक्त प्रभाव मकर राशि के जातकों को विशिष्ट बनाता है।
लाल किताब में मकर राशि को दशम भाव में रखा गया है। दशम भाव कर्म, व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्थान मकर राशि के जातकों की कर्मशील प्रकृति को दर्शाता है। शनि देव के स्थायी भाव आठवाँ और दसवाँ हैं। आठवाँ भाव रहस्य, परिवर्तन और दीर्घायु का प्रतीक है जबकि दसवाँ भाव कर्म और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रकार मकर राशि के जातकों का जीवन कर्म और परिवर्तन से गहराई से जुड़ा होता है।
लाल किताब अन्य ज्योतिष पद्धतियों से अलग है क्योंकि यह सरल, व्यावहारिक और तुरंत प्रभाव देने वाले उपाय बताती है। इस पद्धति में मित्र और शत्रु ग्रहों का निर्धारण कुंडली के आधार पर किया जाता है न कि सामान्य नियमों के आधार पर। यह विशेषता लाल किताब को अत्यधिक प्रभावी बनाती है। लाल किताब के उपाय घरेलू सामग्री और दैनिक जीवन की सरल क्रियाओं से जुड़े होते हैं जिससे इन्हें करना आसान हो जाता है।
शनि देव मकर राशि के स्वामी होने के कारण इस राशि पर इनका प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुभ शनि जातक को दीर्घायु, धन, प्रतिष्ठा और स्थिरता प्रदान करता है। परंतु अशुभ शनि अनेक कठिनाइयाँ और संघर्ष उत्पन्न करता है। लाल किताब में शनि की शुभता और अशुभता की पहचान के लिए विशेष संकेत दिए गए हैं।
अशुभ शनि का प्रभाव जातक के जीवन में अनेक प्रकार से प्रकट होता है। इन संकेतों को समझकर समय रहते उपाय करना आवश्यक है।
| अशुभ शनि के लक्षण | विवरण | प्रभाव की गंभीरता |
|---|---|---|
| घर में क्षति | घर या घर के किसी भाग का गिरना या क्षतिग्रस्त होना | अत्यधिक गंभीर |
| ऋण के कारण संपत्ति हानि | ऋण या झगड़े के कारण घर बेचना पड़ना | गंभीर |
| शारीरिक समस्याएँ | शरीर के बाल तेजी से झड़ना, दाँत और आँखें समय से पूर्व कमजोर होना | मध्यम से गंभीर |
| अग्नि दुर्घटना | अचानक आग लगने की घटना | अत्यधिक गंभीर |
| धन की हानि | किसी न किसी प्रकार से धन और संपत्ति का नष्ट होना | गंभीर |
घर में क्षति या गिरावट अशुभ शनि के प्रभाव से घर की दीवार, छत या कोई भाग अचानक गिर सकता है या क्षतिग्रस्त हो सकता है। यह संकेत अत्यंत गंभीर माना जाता है और तुरंत उपाय की आवश्यकता होती है।
संपत्ति का विक्रय ऋण के बोझ या पारिवारिक झगड़ों के कारण घर या संपत्ति बेचने की स्थिति उत्पन्न होती है। यह आर्थिक और मानसिक संकट का संकेत है।
शारीरिक लक्षण शरीर के बाल तेजी से झड़ना शनि के अशुभ प्रभाव का प्रमुख संकेत है। इसके अतिरिक्त दाँत और आँखें असामान्य रूप से जल्दी कमजोर हो जाती हैं। हड्डियों में कमजोरी और जोड़ों में दर्द भी शनि के अशुभ प्रभाव के लक्षण हैं।
अग्नि दुर्घटना घर में अचानक और अस्पष्ट कारणों से आग लगना अशुभ शनि का एक भयावह संकेत है। यह घटना जातक को सतर्क होने की चेतावनी देती है।
धन और संपत्ति की हानि विभिन्न प्रकार से धन और संपत्ति का नष्ट होना जैसे व्यापार में हानि, चोरी, धोखाधड़ी या अन्य अप्रत्याशित कारणों से आर्थिक क्षति होना।
शुभ शनि का प्रभाव जातक के जीवन में स्थिरता, सफलता और सम्मान लाता है। शुभ शनि वाले जातक निम्नलिखित लाभ प्राप्त करते हैं।
लाल किताब में मकर राशि के जातकों के लिए कुछ विशेष सावधानियाँ बताई गई हैं। इन सावधानियों का पालन करने से जीवन में आने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है और शनि देव की कृपा बनी रहती है।
दाँतों की स्वच्छता दाँतों को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन दो बार दाँतों को ब्रश करें और नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जाँच करवाएँ। दाँतों की समस्या शनि के अशुभ प्रभाव का संकेत है इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।
बालों की देखभाल बालों की उचित देखभाल करें। पौष्टिक आहार लें और बालों में नियमित रूप से तेल लगाएँ। बालों का झड़ना रोकने के लिए आवश्यक उपचार करें।
हड्डियों की मजबूती हड्डियों को कमजोर न होने दें। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार लें। नियमित व्यायाम करें और धूप में बैठें।
वैवाहिक निष्ठा किसी अन्य स्त्री या पुरुष के साथ अनुचित संबंध न रखें। वैवाहिक जीवन में वफादारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाल किताब में इसे शनि को अशुभ करने वाला कृत्य माना गया है।
जुआ और सट्टा किसी भी प्रकार के जुए, सट्टे या अवैध आर्थिक गतिविधियों में भाग न लें। यह शनि को अप्रसन्न करता है और आर्थिक हानि का कारण बनता है।
ब्याज का व्यवसाय ब्याज पर धन देने का व्यवसाय न करें। यह शनि के प्रभाव को नकारात्मक बनाता है। यदि आवश्यक हो तो न्यूनतम ब्याज पर और नैतिक तरीके से धन उधार दें।
मद्यपान से परहेज मदिरा या किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करें। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि शनि देव को भी अप्रसन्न करता है।
विकलांग और दीन-हीनों के प्रति सद्भावना अंधे, विकलांग, सेवकों और सफाई कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार करें। इन लोगों की सहायता करना और सम्मान देना शनि देव को प्रसन्न करता है। इनके साथ दुर्व्यवहार या अपमानजनक आचरण शनि को अत्यधिक अप्रसन्न करता है।
लाल किताब में कुंडली के विभिन्न भावों में शनि की स्थिति के आधार पर विशेष सावधानियाँ बताई गई हैं।
प्रथम भाव अर्थात लग्न में शनि यदि शनि आपकी कुंडली के प्रथम भाव में है तो किसी भिखारी को कभी भी ताँबा या ताँबे का सिक्का दान न करें। यह अत्यंत हानिकारक हो सकता है। इसके स्थान पर अन्य वस्तुएँ दान करें।
आयु भाव में शनि यदि शनि आयु भाव अर्थात आठवें भाव में स्थित है तो धर्मशाला का निर्माण न करवाएँ। यह आपके लिए समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। धार्मिक कार्य अन्य रूपों में करें।
आठवें भाव में शनि यदि शनि आठवें भाव में है तो घर का निर्माण या क्रय करने से बचें। यदि अत्यंत आवश्यक हो तो उपयुक्त उपायों के पश्चात ही यह कार्य करें।
लाल किताब में मकर राशि के जातकों के लिए अनेक सरल और प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को नियमित रूप से करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है।
भगवान भैरव शनि देव के प्रिय देवता हैं। भैरव जी की पूजा और उपासना करने से शनि की अशुभता दूर होती है और जीवन में शांति आती है।
उपासना विधि प्रतिदिन या शनिवार को भगवान भैरव की पूजा करें। भैरव चालीसा या भैरव आरती का पाठ करें। काले तिल के तेल का दीपक जलाएँ। भैरव जी को सरसों का तेल और उड़द का प्रसाद चढ़ाएँ। मन में भगवान भैरव से अपनी रक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करें।
लाल किताब में विशेष वस्तुओं का दान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ये दान शनि देव को प्रसन्न करते हैं।
| दान की वस्तु | दान का दिन | दान का तरीका | लाभ |
|---|---|---|---|
| तिल | शनिवार | काले तिल किसी गरीब या मंदिर में दान करें | शनि की शांति और आयु वृद्धि |
| उड़द की दाल | शनिवार | काली उड़द की दाल दान करें | आर्थिक स्थिति में सुधार |
| भैंस | शनिवार या विशेष अवसर | किसी जरूरतमंद को भैंस दान करें | बड़ी समस्याओं से मुक्ति |
| लोहा | शनिवार | लोहे की कोई वस्तु दान करें | शारीरिक शक्ति में वृद्धि |
| तेल | शनिवार | सरसों या तिल का तेल दान करें | रोग निवारण |
| काले वस्त्र | शनिवार | गरीबों को काले वस्त्र दान करें | शनि दोष शांति |
| काली गाय | विशेष अवसर | काली गाय का दान करें | बड़े संकट से मुक्ति |
| जूते | कभी भी | गरीबों को जूते दान करें | जीवन में स्थिरता |
तिल का दान काले तिल शनि देव को अत्यंत प्रिय हैं। शनिवार को तिल का दान करने से शनि की अशुभता दूर होती है और आयु में वृद्धि होती है। तिल को पानी में बहाना या किसी गरीब को देना लाभकारी है।
उड़द की दाल का दान काली उड़द की दाल भी शनि को प्रसन्न करती है। इसे शनिवार को दान करने से आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है।
भैंस का दान यह एक महादान माना जाता है। बड़ी समस्याओं और गंभीर शनि दोष की स्थिति में भैंस का दान किया जाता है। यदि संभव न हो तो भैंस को चारा खिलाना भी लाभकारी है।
लोहे का दान लोहा शनि का धातु है। लोहे की कोई वस्तु जैसे कील, छोटा औजार या लोहे का टुकड़ा दान करने से शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है।
तेल का दान सरसों या तिल के तेल का दान शनिवार को करना अत्यंत लाभकारी है। तेल के दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
काले वस्त्र का दान काला रंग शनि का प्रिय रंग है। गरीबों को काले वस्त्र दान करने से शनि दोष की शांति होती है।
जूतों का दान गरीबों और जरूरतमंदों को जूते दान करना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। यह जीवन में स्थिरता लाता है।
चींटियों को रोटी खिलाना प्रतिदिन चींटियों को रोटी या आटा डालना अत्यंत शुभ उपाय है। यह सरल उपाय नियमित रूप से करने से जीवन में समस्याएँ कम होती हैं और छोटे-छोटे कष्ट दूर होते हैं।
कौओं को रोटी खिलाना कौआ शनि देव का प्रतिनिधि माना जाता है। प्रतिदिन कौओं को रोटी या भोजन खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी शांत होता है। भोजन देते समय कौओं को आदर से बुलाएँ।
छाया दान लाल किताब का एक विशेष और अत्यंत प्रभावी उपाय है। यह उपाय पाप कर्मों के प्रभाव को कम करता है और शनि देव की कृपा प्राप्त करने में सहायक है।
छाया दान की विधि एक कटोरी में थोड़ा सरसों का तेल लें। शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात तेल में अपना मुख देखें। अपने चेहरे की परछाई को ध्यान से देखें। फिर मन में अपने पाप कर्मों के लिए क्षमा माँगते हुए इस तेल को शनि मंदिर में चढ़ा दें। यदि मंदिर न जा सकें तो तेल को किसी पीपल के वृक्ष के नीचे या बहते जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय को करते समय सच्चे मन से अपनी गलतियों को स्वीकार करें और भविष्य में सुधार का संकल्प लें।
पीपल का वृक्ष शनि देव का प्रिय वृक्ष माना जाता है। शनिवार को पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करना और जल चढ़ाना अत्यंत शुभ है। पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी लाभकारी होता है।
हनुमान जी शनि के प्रकोप को शांत करने में सक्षम हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी को सिंदूर और तेल चढ़ाएँ। नियमित रूप से हनुमान मंदिर जाएँ।
नीलम शनि देव का रत्न है परंतु इसे धारण करने से पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। कुछ कुंडलियों में नीलम धारण करना हानिकारक हो सकता है। यदि ज्योतिषी की सलाह अनुकूल हो तो शनिवार को शुभ मुहूर्त में नीलम धारण करें।
गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की सहायता करना शनि देव को अत्यंत प्रिय है। अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। भूखों को भोजन कराएँ। वस्त्र, दवाई या आर्थिक सहायता प्रदान करें। सेवा भाव से की गई सहायता शनि को प्रसन्न करती है।
शनि मंत्र का नियमित जाप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
शनि बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
इस मंत्र का प्रतिदिन न्यूनतम एक सौ आठ बार जाप करें। शनिवार को विशेष रूप से इस मंत्र का जाप लाभकारी है।
शनि गायत्री मंत्र ॐ कृष्णपुत्राय विद्महे छायापुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात
यह मंत्र भी अत्यंत प्रभावशाली है और नियमित जाप से शनि की कृपा प्राप्त होती है।
मकर राशि के जातक अपनी मेहनत और अनुशासन से व्यवसाय में सफल होते हैं। परंतु शनि की कृपा बनाए रखने के लिए नैतिक तरीके से कार्य करें। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बनाए रखें। कर्मचारियों और सहयोगियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करें। धैर्य रखें क्योंकि शनि धीरे परंतु निश्चित रूप से फल देते हैं।
अत्यधिक कार्य में व्यस्त रहने के कारण मकर राशि के जातक कभी-कभी पारिवारिक जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। परिवार के साथ समय बिताएँ। पत्नी या पति का सम्मान करें और उनकी भावनाओं का ध्यान रखें। बच्चों की परवरिश में रुचि लें। बुजुर्गों की सेवा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
शनि हड्डियों, दाँतों और त्वचा से संबंधित अंगों के कारक हैं। इन अंगों की विशेष देखभाल करें। नियमित व्यायाम करें। पौष्टिक आहार लें। धूप में बैठें जिससे विटामिन डी की पूर्ति हो। तनाव से बचें और पर्याप्त नींद लें।
भौतिक सफलता के साथ आध्यात्मिक विकास भी आवश्यक है। नियमित रूप से पूजा-पाठ करें। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें। ध्यान और योग का अभ्यास करें। मंदिर या धार्मिक स्थलों पर जाएँ। सत्संग में भाग लें।
लाल किताब के उपाय करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
सभी उपायों को करने से पूर्व किसी लाल किताब के विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। प्रत्येक कुंडली की स्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार उपाय प्रभावी होते हैं। सामान्य उपाय तो सभी कर सकते हैं परंतु विशेष उपायों के लिए ज्योतिषी का मार्गदर्शन आवश्यक है।
उपायों को नियमित रूप से और पूर्ण श्रद्धा के साथ करें। अधूरे मन से या अनियमित रूप से किए गए उपाय पूर्ण फल नहीं देते। धैर्य रखें क्योंकि उपायों का प्रभाव दिखने में समय लग सकता है।
उपाय करते समय सकारात्मक मानसिकता बनाए रखें। भगवान पर विश्वास रखें और यह मानें कि आपकी समस्याओं का समाधान अवश्य होगा। नकारात्मक विचारों से बचें।
केवल उपाय करना पर्याप्त नहीं है। अपनी जीवनशैली में भी सुधार लाएँ। बुरी आदतों को छोड़ें। नैतिक जीवन जीएँ। दूसरों की सहायता करें। सत्य और ईमानदारी का पालन करें।
साढ़े साती वह अवधि है जब शनि चन्द्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में गोचर करता है। मकर राशि के लिए यह अवधि तब आती है जब शनि धनु, मकर और कुंभ राशि में गोचर करता है। इस अवधि में विशेष सावधानी और उपाय आवश्यक हैं।
साढ़े साती में करने योग्य उपाय शनिवार का व्रत रखें। नीले या काले वस्त्र धारण करें। तेल का दान करें। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। शनि मंदिर में तेल चढ़ाएँ। गरीबों की सहायता करें।
ढैय्या वह अवधि है जब शनि चन्द्र राशि से चौथे या आठवें भाव में गोचर करता है। यह अवधि भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है परंतु साढ़े साती से कम गंभीर मानी जाती है।
ढैय्या में करने योग्य उपाय शनि के सामान्य उपाय करें। धैर्य बनाए रखें। अनावश्यक जोखिम से बचें। परिवार के साथ समय बिताएँ।
शनि की महादशा उन्नीस वर्ष की होती है। यदि शनि शुभ स्थिति में है तो यह अवधि अत्यंत लाभकारी हो सकती है। परंतु अशुभ शनि की दशा में कठिनाइयाँ आ सकती हैं। दशा के अनुसार उपाय करना आवश्यक है।
मकर राशि में तीन नक्षत्र आते हैं उत्तराषाढ़ा, श्रवण और धनिष्ठा। प्रत्येक नक्षत्र की अपनी विशेषताएँ होती हैं।
यह नक्षत्र सूर्य देव का है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक महत्वाकांक्षी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं। इन जातकों को सूर्य और शनि दोनों की कृपा प्राप्त करने के उपाय करने चाहिए।
यह नक्षत्र चन्द्रमा का है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिमान और ज्ञान की खोज में रहते हैं। इन्हें चन्द्रमा और शनि दोनों के उपाय करने चाहिए।
यह नक्षत्र मंगल का है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक साहसी और ऊर्जावान होते हैं। इन्हें मंगल और शनि दोनों के उपाय करने चाहिए।
मकर राशि के जातक अपनी स्वाभाविक क्षमताओं और लाल किताब के उपायों का उचित उपयोग करके जीवन में महान सफलता प्राप्त कर सकते हैं। शनि देव कर्म के देवता हैं और कठोर परिश्रम का पुरस्कार अवश्य देते हैं। नैतिकता, ईमानदारी और धैर्य को अपना आधार बनाएँ। दूसरों की सहायता करें और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएँ। आध्यात्मिक विकास को भी महत्व दें। लाल किताब के उपायों को नियमित रूप से करें और विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लें। याद रखें कि जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ आपको मजबूत बनाने के लिए हैं। शनि देव की कृपा से आप न केवल भौतिक सफलता प्राप्त करेंगे बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त करेंगे।
मकर राशि में शनि के अशुभ होने के मुख्य लक्षण क्या हैं?
घर में क्षति होना, संपत्ति बेचनी पड़ना, शरीर के बाल तेजी से झड़ना, अचानक आग लगना और धन की हानि होना अशुभ शनि के प्रमुख लक्षण हैं।
छाया दान की विधि क्या है?
शनिवार को सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें और फिर पाप कर्मों की क्षमा माँगते हुए इस तेल को शनि मंदिर में चढ़ा दें।
मकर राशि के जातकों को कौन से दान करने चाहिए?
तिल, उड़द, लोहा, तेल, काले वस्त्र और जूते का दान शनिवार को करना विशेष लाभकारी है।
क्या सभी मकर राशि वालों को नीलम धारण करना चाहिए?
नहीं, नीलम धारण करने से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें क्योंकि कुछ कुंडलियों में यह हानिकारक हो सकता है।
मकर राशि के जातकों को किन बातों से बचना चाहिए?
अवैवाहिक संबंध, जुआ, ब्याज का व्यवसाय, मदिरापान और विकलांगों के साथ दुर्व्यवहार से बचना चाहिए।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 32
इनसे पूछें: विवाह, करियर, व्यापार, स्वास्थ्य
इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
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