By पं. अभिषेक शर्मा
बुध कैसे मिथुन की बुद्धि, संवाद और चंचलता को संचालित करता है

मिथुन राशि के जातकों के लिए उनका स्वामी ग्रह बुध केवल गणना की एक पंक्ति नहीं बल्कि व्यक्तित्व का इंजन माना जा सकता है। सौरमंडल का सबसे छोटा और सबसे तेज ग्रह होने के कारण बुध वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, संवाद और तर्क की उच्चतम क्षमता का प्रतीक बन जाता है। मिथुन राशि पर जब बुध का स्वामित्व सक्रिय होता है, तो व्यक्ति के भीतर विचारों, शब्दों और जिज्ञासा की लगातार चलने वाली धारा बनती रहती है।
मिथुन एक वायु तत्व की राशि है, इसलिए स्वभाव से हलचल, गति और बदलाव इसकी मूल पहचान हैं। जब इस वायु की गति को बुध की सजग बुद्धि दिशा देती है तब वहाँ से एक ऐसे व्यक्तित्व का जन्म होता है जो तेजी से सोच सकता है, तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है और स्थितियों के अनुसार स्वयं को सहजता से बदल भी सकता है। यही कारण है कि मिथुन राशि और बुध के संबंध को केवल बातूनी या बुद्धिमान कहकर समाप्त नहीं किया जा सकता।
संस्कृत में कहा जाता है “बुध्यते इति बुधः”, अर्थात जो जानता है, जो जागृत है, वही बुध है। इस अर्थ में बुध केवल ज्ञान का संग्रह नहीं बल्कि जागरूकता और सजग प्रतिक्रिया की क्षमता का प्रतिनिधि है।
कालपुरुष कुंडली में मिथुन तीसरे भाव का कारक है और बुध यहाँ स्वामी बनकर पराक्रम, छोटे भाई बहनों से संबंध, संवाद क्षमता और जिज्ञासा की दिशा तय करता है। तीसरा भाव साहस, पहल और रोजमर्रा के जीवन में प्रयोग करने की क्षमता से जुड़ा होता है, इसलिए मिथुन राशि के साथ बुध का स्वामित्व व्यक्ति को सक्रिय, प्रयासशील और लगातार सीखने वाला बना देता है।
मिथुन एक द्विस्वभाव राशि है। इस द्विस्वभाव का अर्थ केवल दोहरा स्वभाव नहीं बल्कि दो दृष्टिकोणों में एक साथ सोच पाने की शक्ति है। बुध यहाँ व्यक्ति के भीतर ऐसा मानसिक ढांचा बनाता है, जहाँ एक ही विषय को दो अलग कोण से देखना, एक ही समय में दो विचारों पर काम करना और दो दुनियाओं के बीच पुल बनना स्वाभाविक हो जाता है।
भारतीय ज्योतिष में बुध को ग्रहों के बीच राजकुमार का दर्जा दिया गया है। उसका स्वरूप मिथुन के स्वभाव के कई स्तर खोल देता है।
बुध के हरे वर्ण को प्रकृति, संतुलन और विकास का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मिथुन राशि वालों के विचार अक्सर ताजगी से भरे होते हैं। उन्हें नए विचार, नई तकनीक, नई जानकारी और नई बातें लगातार आकर्षित करती रहती हैं। मानसिक स्तर पर वे जल्दी बूढ़े नहीं होते बल्कि उम्र बढ़ने पर भी जिज्ञासा और सीखने की इच्छा काफी समय तक ज़िंदा रहती है।
कई चित्रों में बुध के हाथ में तलवार और ढाल का संकेत मिलता है। तलवार तेज बुद्धि और पैनी वाणी को दर्शाती है, जो तर्क के माध्यम से किसी भी विषय का विश्लेषण कर सकती है। ढाल उस तार्किक सुरक्षा भाव का प्रतीक है, जिसके कारण मिथुन जातक भावनाओं की जगह तथ्य और लॉजिक पर अधिक भरोसा रखते हैं।
बुध के हाथ में पुस्तक दिखाई जाती है जो उसकी कभी न समाप्त होने वाली जिज्ञासा का संकेत है। मिथुन राशि का व्यक्ति जीवन भर सीखने वाला विद्यार्थी बनकर रह सकता है, चाहे वह किताबों के माध्यम से हो या अनुभवों के माध्यम से।
जब बुध स्वामी ग्रह की तरह सक्रिय होता है, तो वह मिथुन जातक के जीवन को कई स्तरों पर संचालित करता है।
सबसे पहले वाक् शक्ति की बात आती है। मिथुन राशि के बहुत से लोगों की सबसे बड़ी ताकत उनकी वाणी होती है। वे शब्दों का चयन, हास्य, तर्क और उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात को इस तरह रख सकते हैं कि सामने वाला सहज ही जुड़ जाए। कभी स्थिति को गंभीरता से हल करते हैं, तो कभी कठिन परिस्थिति को हल्के अंदाज में संभाल लेने की क्षमता भी दिखा सकते हैं।
दूसरा पक्ष त्वरित निर्णय और तुरंत प्रतिक्रिया से जुड़ा है। बुध सबसे तेज गति से परिक्रमा करने वाला ग्रह है। इसी कारण मिथुन जातकों का दिमाग भी अक्सर बहुत तेज चलता है। वे एक साथ कई विचारों पर काम करने, अनेक कामों को संभालने और अलग अलग क्षेत्रों की जानकारी को जोड़ने में सहज महसूस करते हैं।
तीसरा पहलू अनुकूलनशीलता का है। मिथुन जातक परिस्थितियों के अनुसार बदल जाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। नए स्थान, नए लोग या नई भूमिका उनके लिए डर का कारण नहीं बल्कि अवसर बन सकती है। यही गुण उन्हें कई बार अलग अलग समूहों में सहजता से घुल मिल जाने वाला बना देता है।
बुध को राजकुमार कहा जाता है, इसलिए उसके स्वामित्व में मिथुन राशि में एक प्रकार की युवा ऊर्जा बनी रहती है। यह ऊर्जा प्रयोग करने, नई चीजें आजमाने और अलग अनुभव लेने के लिए प्रेरित करती है।
लेकिन जैसे एक बच्चा जल्दी ऊब जाता है, वैसे ही मिथुन जातक भी किसी एक काम या एक विचार पर बहुत देर टिक पाने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं। उन्हें हमेशा कुछ नया चाहिए। यह प्रवृत्ति यदि संतुलित न हो, तो अधूरापन, अस्थिरता और बीच में ही चीजें छोड़ देने की आदत भी बना सकती है।
बुध शरीर में स्नायु तंत्र से जुड़ा माना जाता है। तेज सोच, लगातार विश्लेषण और हर समय किसी न किसी विचार में उलझे रहने के कारण मिथुन जातक कभी कभी बेचैनी, घबराहट या नींद में कमी जैसी स्थितियाँ अनुभव कर सकते हैं। इनके लिए समय समय पर मौन, ध्यान या श्वास पर केंद्रित अभ्यास एक तरह की चिकित्सा की तरह काम कर सकता है।
ज्योतिष में बुध को तटस्थ या नपुंसक ग्रह माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि वह स्वयं किसी एक पक्ष में झुकने के बजाय परिस्थिति के अनुसार रंग ग्रहण कर सकता है। मिथुन जातकों में भी यह गुण देखा जा सकता है कि वे किसी भी मुद्दे के दोनों पक्षों को सुनने और समझने की क्षमता रखते हैं।
मिथुन राशि शरीर में कंधों, हाथों और फेफड़ों से भी जुड़ी होती है। बुध की ऊर्जा यहां हाथों और समन्वय को मजबूत बना सकती है। लिखना, पेंटिंग करना, टाइपिंग, वाद्ययंत्र बजाना या किसी भी काम में हाथों और दिमाग का समन्वय आवश्यक हो, वहाँ मिथुन जातक स्वाभाविक रूप से निपुण हो सकते हैं।
बुध को कई स्थानों पर भगवान विष्णु के रूप में भी देखा जाता है, जो सृष्टि के संचालन का कारक है। इसी तरह मिथुन राशि के लोग अपने आसपास सूचनाओं, संवाद और संबंधों के प्रवाह को संभालने वाले, एक प्रकार के व्यवस्थापक और संयोजक के रूप में दिख सकते हैं।
मिथुन राशि का प्रतीक जुड़वा रूप में समझाया जाता है। एक पक्ष कला, संगीत और सौम्य अभिव्यक्ति का प्रतिनिधि हो सकता है, तो दूसरा पक्ष शक्ति, तर्क और सवाल पूछने का।
बुध यहाँ व्यक्ति को एक प्रकार का द्वि प्रक्रिया दिमाग देता है। एक स्तर पर भावनाएँ चलती हैं, दूसरे स्तर पर वही भावनाएँ विश्लेषित होती रहती हैं। इसलिए कई मिथुन जातक अपनी भावनाओं को सरलता से महसूस करने के बजाय उन्हें सोचने या व्याख्या करने में अधिक समय लगा देते हैं।
यह गुण उन्हें एक साथ भक्त और तर्कशील बनने की क्षमता देता है। वे किसी विचार को स्वीकार भी कर सकते हैं और उसी के भीतर सवाल भी उठा सकते हैं।
आकाश में बुध हमेशा सूर्य के आसपास ही रहता है। ज्योतिष में कई बार इसे अस्त भी माना जाता है, लेकिन मिथुन की दृष्टि से यह निकटता एक विशेष क्षमता देती है।
मिथुन जातक अक्सर शक्ति, ज्ञान या नेतृत्व के केंद्रों के पास रहना पसंद कर सकते हैं। वे ऐसे लोगों के सहयोगी, दाहिने हाथ या सलाहकार बनकर काम करने में दक्ष हो सकते हैं, जिनके पास बड़ी जिम्मेदारियाँ हों। यहाँ बुध की बुद्धि दूसरों के दृष्टिकोण और विजन को शब्दों, योजनाओं और व्यावहारिक कार्यों में बदलने की भूमिका निभाती है।
बुध केवल दिमाग नहीं बल्कि पूरे स्नायु तंत्र और त्वचा से भी जुड़ा है। मिथुन जातकों की त्वचा कई बार अत्यधिक संवेदनशील दिखाई दे सकती है। वे आस पास के माहौल, तापमान, स्पर्श और वातावरण की ऊर्जा को बहुत जल्दी महसूस कर लेते हैं।
फेफड़े और सांस की प्रक्रिया भी मिथुन से जुड़ी मानी जाती है। जब विचार बहुत तेज चलने लगें और तनाव अधिक हो, तो सांसों की गति भी बदलती है। मिथुन जातकों के लिए प्राणायाम, गहरी सांसें और श्वास पर ध्यान विशेष रूप से सहायक हो सकता है, क्योंकि यह सीधे उनके विचार प्रवाह को शांत और संतुलित कर सकता है।
बुध जिस ग्रह के साथ रहता है, उसकी प्रकृति को ग्रहण करने की क्षमता रखता है। इसी कारण इसे तटस्थ कहा जाता है। मिथुन जातकों में भी एक प्रकार की मिररिंग शक्ति दिखाई दे सकती है।
वे सामने वाले व्यक्ति की भाषा, बॉडी लैंग्वेज और सोच के ढंग को जल्दी समझकर उसी के अनुसार स्वयं को ढाल सकते हैं। इसे कभी कभी लोग दोहरा व्यक्तित्व भी कह देते हैं, जबकि गहराई से देखें तो यह अत्यधिक अनुकूलन क्षमता का संकेत है। सही दिशा में यह गुण सलाह, मध्यस्थता और संवाद में बहुत उपयोगी हो सकता है।
बुध वर्ष में कई बार वक्री होता है। इस ज्योतिषीय संकेत को मानसिक स्तर पर देखें, तो मिथुन जातक के भीतर भी विचारों पर पुनर्विचार, अपनी ही बात को नए ढंग से देखना और पहले कही हुई बात को बदल देना जैसी प्रवृत्तियाँ दिखाई दे सकती हैं।
वे कभी कह सकते हैं, “मैंने ऐसा कहा था, लेकिन अब मुझे लगता है कि बात कुछ और थी।” इसका अर्थ अस्थिरता भर नहीं है बल्कि तेजी से अपडेट होती सोच का भी है। यह गुण यदि सजगता के साथ हो, तो व्यक्ति अपनी राय को समय के साथ परिष्कृत करने में सक्षम बनता है।
मिथुन और बुध का संबंध व्यक्ति को ब्रह्मांड के एक प्रकार के न्यूरल नेटवर्क की तरह बना देता है। सूचनाएँ, अनुभव और विचार लगातार उसके माध्यम से बहते रहते हैं।
इस ऊर्जा को संतुलित करने के लिए मिथुन जातकों के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
क्या हर मिथुन राशि वाले के भीतर बुध की ऊर्जा एक जैसी होती है?
मूल प्रवृत्तियों में समानता रहती है, लेकिन कुंडली में बुध किस भाव में है, किन ग्रहों से युति या दृष्टि बनाता है और कितना बलवान है, इससे परिणाम अलग हो जाते हैं।
क्या मिथुन राशि वाले हमेशा अस्थिर और जल्द ऊब जाने वाले होते हैं?
उनमें बदलाव और नयापन पसंद करने की प्रवृत्ति जरूर होती है, लेकिन सही दिशा मिले तो वही गुण उन्हें बहु प्रतिभावान और बहुआयामी भी बना सकता है। स्थिरता सीखना इनके लिए एक महत्वपूर्ण जीवन पाठ होता है।
क्या ज्यादा सोचने के कारण मिथुन जातक मानसिक तनाव के शिकार हो सकते हैं?
यदि विचार बिना विराम चलें और शरीर को पर्याप्त आराम न मिले, तो बेचैनी या घबराहट बढ़ सकती है। श्वास अभ्यास, नियमित दिनचर्या और स्क्रीन समय में संतुलन से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या मिथुन राशि के लोग केवल सतही ज्ञान तक सीमित रहते हैं?
यदि वे हर चीज में थोड़ा थोड़ा ही रुकते रहें, तो सतहीपन की संभावना रहती है। वहीं यदि अपनी जिज्ञासा को किसी चुनिंदा क्षेत्र में लगातार लगाएँ, तो बहुत उच्च स्तर का विशेषज्ञ ज्ञान भी प्राप्त कर सकते हैं।
क्या बोलने और लिखने से दूर रहना मिथुन जातक के लिए हानिकारक हो सकता है?
बुध और मिथुन दोनों संवाद से गहराई से जुड़े हैं। लंबे समय तक स्वयं को पूरी तरह अभिव्यक्ति से रोकने पर भीतर घुटन या असंतुलन महसूस होना स्वाभाविक है। स्वस्थ तरीके से बोलना, लिखना और साझा करना इनके लिए स्वाभाविक आवश्यकता की तरह है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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