By पं. सुव्रत शर्मा
शक्ति, नेतृत्व और जीवन में तेज का प्रतीक

सिंह राशि ज्योतिष की पंचम राशि है जो सत्ता, अधिकार, तेज और जन्मजात नेतृत्व की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। जिस प्रकार शेर जंगल का राजा माना जाता है, उसी प्रकार सिंह राशि भी बारह राशियों के बीच एक स्वाभाविक राजसिक केंद्र के रूप में देखी जाती है। जब कभी यह जानने की इच्छा हो कि सिंह राशि का स्वामी ग्रह कौन है, सिंह राशि किस तत्त्व से जुड़ी है, कौन से नक्षत्र इस राशि में आते हैं या सिंह जातक का जीवन दर्शन कैसा होता है तब यह संपूर्ण सिंह ज्योतिषीय विवरण अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। इस विस्तृत सिंह राशि डेटा की सहायता से व्यक्ति अपने स्वभाव, नेतृत्व क्षमता और जीवन की दिशा को स्पष्ट रूप से पहचान सकता है।
सिंह राशि की पहली और सबसे स्पष्ट पहचान इसका जन्मजात नेतृत्व है। ऐसे जातक किसी के अधीन दबकर काम करना स्वभाव से पसंद नहीं करते। इनके व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक शाही आकर्षण और गरिमा रहती है। लोग इनकी उपस्थिति को महसूस किए बिना नहीं रह पाते। किसी समूह में ये प्रायः आगे आकर दिशा दिखाने की भूमिका निभाते हैं।
दूसरी बड़ी विशेषता स्वाभिमान है। सिंह जातकों के लिए अपना मान सम्मान सबसे ऊपर होता है। ये कठिनाई झेल सकते हैं, पर किसी के आगे हाथ फैलाना इन्हें भीतर से स्वीकार नहीं होता। स्वाभिमान इन्हें स्वयं पर भरोसा रखना और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करता है।
तीसरी विशेषता इनका उदार हृदय है। शेर की तरह ये अपने आश्रितों की रक्षा करने वाला स्वभाव रखते हैं। दिल से बहुत बड़े होते हैं। जब किसी को अपने संरक्षण में मान लेते हैं तो उसके लिए खुलकर सहयोग करते हैं। अपने परिवार, मित्रों या सहयोगियों के लिए इन्हें आगे खड़े होने में हिचक नहीं होती।
चौथी बात इनकी स्पष्टवादी प्रकृति है। ये पीठ पीछे वार करने वाले नहीं होते। जो भी कहना हो, सामने कहने में विश्वास रखते हैं। इनकी वाणी में दहाड़ जैसा प्रभाव हो सकता है, कम बोलते हैं, पर जो भी बोलते हैं उसका असर गहरा छोड़ते हैं।
पाँचवीं खास बात इनका प्रशंसा प्रेम है। सिंह जातक अपने कार्य, व्यक्तित्व और क्षमता की सराहना सुनना पसंद करते हैं। यदि कोई हृदय से इनकी प्रशंसा कर दे तो ये उसके लिए बहुत समर्पण दिखा सकते हैं। इन्हें झूठी चापलूसी नहीं बल्कि सच्ची स्वीकृति चाहिए होती है। सही प्रशंसा इनके उत्साह को कई गुना बढ़ा सकती है।
सिंह राशि शीर्षोदय राशि मानी जाती है। शीर्षोदय होने के कारण इस राशि में स्थित ग्रह अक्सर अपना फल अपेक्षाकृत जल्दी और सीधे ढंग से देते हैं। जब सिंह जातक मेहनत करते हैं तो बहुत बार परिणाम जल्दी दिखने लगते हैं। इनके प्रयासों का प्रभाव स्पष्ट और सामने दिखाई देने वाला होता है।
यह एक स्थिर राशि है। स्थिर स्वभाव का अर्थ है कि यदि सिंह जातक ने एक बार कोई निर्णय ले लिया, तो उसे बदल पाना लगभग असंभव हो जाता है। निर्णय में अडिग रहना इनकी खास पहचान है। सही लक्ष्य चुन लिया जाए तो यह दृढ़ता इन्हें बहुत ऊँचाई तक पहुँचा सकती है।
वास्तु संकेतों में सिंह जातकों के लिए घर की पूर्व दिशा को भारी और ऊँचा रखना शुभ माना गया है। जैसे उस दिशा में ऊँचा निर्माण, पहाड़ी जैसा स्थान या मजबूत संरचना हो। ऐसा वातावरण इनकी ऊर्जा को संतुलित रखकर सफलता की दिशा में सहायक माना जाता है।
सिंह का संस्कृत नाम सिंह है जिसका अर्थ शेर होता है। शेर निर्भीकता, शासन और राजसी गरिमा का प्रतीक है। सिंह राशि का चिह्न भी शेर है जो बताता है कि यह राशि डर कर छिपने वाली नहीं बल्कि सामने खड़े होकर नेतृत्व करने वाली है। ऐसे जातकों में जन्म से ही आत्मविश्वास और प्रभावशीलता का बीज रहता है।
राशि क्रम में सिंह पंचम राशि है। यह विद्या, बुद्धि, संतान और प्रेम के भाव से जुड़ी हुई है। सृजनशीलता, रोमांटिक अभिव्यक्ति, बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियां और अपनी प्रतिभा का मंच पर आकर प्रदर्शन, ये सब पंचम भाव के क्षेत्र हैं। सिंह राशि इन्हें तेज, गौरव और आत्माभिव्यक्ति के साथ जोड़ती है।
सिंह राशि पंचम स्थान पर स्थित होने के कारण सत्ता, अधिकार, तेज और नेतृत्व की राशि मानी जाती है। कालपुरुष कुंडली में यह आत्मा और राजसी ठाठ का प्रतिनिधित्व करती है। सिंह राशि के जातक केवल अहंकार से नहीं बल्कि क्षत्रिय वर्ण के उन स्तंभों के रूप में देखे जाते हैं जो समाज को दिशा, संरक्षण और व्यवस्था देते हैं।
सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है। सूर्य ग्रहों का राजा, आत्मा का कारक और पिता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। सूर्य के इस मजबूत प्रभाव से सिंह जातकों में आत्मचेतना, आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता स्वाभाविक रूप से प्रबल होती है। इन्हें प्रकाश के केंद्र की तरह देखा जा सकता है जहाँ से ऊर्जा बाहर की ओर फैलती है।
स्वामी देवता विष्णु माने जाते हैं। विष्णु संरक्षण, संतुलन और पालन की ऊर्जा के देवता हैं। इससे सिंह राशि में नेतृत्व के साथ एक संरक्षणकारी भाव भी जुड़ जाता है। ऐसे जातक केवल शासन करना नहीं बल्कि संरक्षण और मार्गदर्शन भी करना चाहते हैं।
तत्त्व की दृष्टि से सिंह अग्नि तत्व की राशि है। अग्नि ऊर्जा, उत्साह और प्रकाश का प्रतीक है। सिंह जातक के भीतर की अग्नि उन्हें आगे बढ़ने, जोखिम लेने और अपने तेज को प्रकट करने के लिए प्रेरित करती है। जब ये ऊर्जावान होते हैं तो आसपास का वातावरण भी प्रेरित होने लगता है।
स्वभाव के रूप में सिंह स्थिर राशि है। स्थिरता यहाँ विचारों और निर्णयों में दृढ़ता के रूप में प्रकट होती है। ये रोज दिशा बदलने वाले नहीं होते। एक बार जिस मार्ग को सही मान लें उस पर अडिग रहते हैं।
गुण की दृष्टि से सिंह सत्वगुणी राशि है। सत्वगुण न्यायप्रियता, सत्य और उच्च आदर्शों से जुड़ा होता है। आदर्श नेतृत्व, सही निर्णय और निष्पक्ष व्यवहार सिंह राशि के श्रेष्ठ स्वरूप की पहचान है।
लिंग के स्तर पर सिंह पुरुष राशि है। इसमें विषम और अत्यंत सक्रिय ऊर्जा प्रवाहित होती है। जाति की दृष्टि से इसे क्षत्रिय जैसा माना गया है। शासन करना, रक्षा करना और नेतृत्व करना इसकी स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
दिशा के रूप में सिंह राशि पूर्व दिशा से संबंधित है। पूर्व दिशा को उगते सूर्य, नई शुरुआत और तेज के उद्गम की दिशा माना जाता है, जो सिंह की मूल प्रकृति से गहराई से मेल खाती है।
सिंह राशि शरीर में हृदय, छाती का ऊपरी हिस्सा, रीढ़ की हड्डी और ऊपरी पेट का प्रतिनिधित्व करती है। हृदय की धड़कन, रीढ़ की सीध और छाती की मजबूती, ये सब सिंह के अधीन माने जाते हैं। आत्मविश्वास और साहस की अनुभूति भी सीने की मजबूती में ही दिखती है।
प्रकृति की दृष्टि से सिंह पित्त प्रधान राशि है। पित्त शरीर में गर्मी और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। इस कारण सिंह जातकों में ऊष्णता, तेज और सक्रियता अधिक दिखाई दे सकती है। पर यदि संतुलन बिगड़ जाए तो क्रोध, चिड़चिड़ापन या रक्तचाप संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
| वर्गीकरण | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | सूर्य |
| स्वामी देवता | विष्णु |
| तत्त्व | अग्नि |
| स्वभाव | स्थिर |
| गुण | सत्वगुणी |
| लिंग | पुरुष |
| जाति | क्षत्रिय जैसा |
| दिशा | पूर्व |
| शरीर अंग | हृदय, छाती का ऊपरी भाग, रीढ़, ऊपरी पेट |
| प्रकृति | पित्त प्रधान |
सिंह राशि का उदय प्रकार शीर्षोदय है। शीर्षोदय का प्रभाव यह बताता है कि इस राशि में स्थित ग्रह जल्दी और प्रत्यक्ष फल देने की प्रवृत्ति रखते हैं। सिंह जातक जब किसी कार्य में लगते हैं तो परिणाम की धारा भी अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप से सामने आती है। इनके प्रयास छुपे हुए नहीं रहते बल्कि समाज की दृष्टि तक पहुँचते हैं।
शक्ति काल में सिंह दिवा बली है। सूर्य की राशि होने के कारण दिन के समय इसकी शक्ति बहुत प्रबल होती है। दिन में की गई गतिविधियां, बैठकें और निर्णय सिंह जातकों के लिए अधिक प्रभावी देखे जा सकते हैं। उजाला और सक्रियता इनके स्वभाव से मेल खाती है।
वश्य के रूप में सिंह चतुष्पद श्रेणी में आता है। चतुष्पद का संबंध पशु, खासकर स्थलीय, शक्तिशाली जीवों से है। यह भौतिक जगत और प्राकृतिक क्षेत्र पर प्रभुत्व की क्षमता को दर्शाता है। शेर का वनचर स्वभाव भी इसी चतुष्पद वर्ग से जुड़ा है।
कद के रूप में सिंह जातकों को प्रायः दीर्घ या मध्यम कद, गठीला बदन और ऊँचा मस्तक वाला माना गया है। चौड़ी छाती, सीधा खड़ा रहना और चलने में एक तरह की राजसी चाल इनके व्यक्तित्व को उभारती है।
शब्द की दृष्टि से सिंह को अल्प शब्द श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि ये बोलते कम हैं बल्कि यह कि इनकी वाणी कम शब्दों में भी गहरा प्रभाव छोड़ने वाली होती है। दहाड़ की तरह निर्णायक और स्पष्ट।
प्राणी श्रेणी में सिंह वनचर है। जंगलों और निर्जन स्थानों का स्वामी। यह संकेत देता है कि सिंह जातक कई बार भीड़ में होते हुए भी स्वयं को अलग और ऊँचा महसूस करते हैं। इन्हें स्वतंत्रता और अपना क्षेत्र चाहिए होता है।
प्रजनन क्षमता के स्तर पर यह राशि अल्प प्रसव वाली मानी गई है। शुष्क अग्नि तत्व के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से संतान संख्या अपेक्षाकृत सीमित रहने का योग माना जा सकता है, हालांकि यह कई अन्य घटकों पर भी निर्भर करता है।
सिंह राशि का विस्तार एक सौ बीस डिग्री से एक सौ पचास डिग्री तक है। यह आकाश का वह भाग है जहाँ अग्नि तत्व अपनी स्थिर और दीप्तिमान अवस्था में कार्य करता है। इस राशि का वर्ण सुनहरा, नारंगी और तांबे जैसा माना गया है। ये रंग सूर्य के प्रकाश, गर्माहट और राजसी आभा का प्रतीक हैं।
सिंह में किसी भी ग्रह को विशेष उच्च या नीच की स्थिति नहीं दी गई। यह भी एक प्रकार से संकेत है कि यहाँ सूर्य स्वयं स्वामी होकर मुख्य केंद्र में स्थित है। सिंह राशि में सूर्य अपनी ही राशि में मूलत्रिकोण का फल देता है। इससे आत्मबल, नेतृत्व, आत्मविश्वास और तेज को विशेष शक्ति मिलती है।
मित्र ग्रहों में चन्द्रमा, मंगल और गुरु आते हैं। चन्द्रमा भावनात्मक गहराई, मंगल साहस और गुरु ज्ञान तथा विस्तार की ऊर्जा जोड़ते हैं। शत्रु ग्रहों में शुक्र और शनि माने गए हैं। शुक्र के भोग और शनि के अनुशासन का सिंह के स्वाभाविक तेज से कभी कभी टकराव हो सकता है। तटस्थ ग्रह बुध है जो न पूर्ण मित्र है न शत्रु।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 120 डिग्री से 150 डिग्री |
| वर्ण | सुनहरा, नारंगी, तांबे जैसा |
| उच्च ग्रह | कोई नहीं |
| नीच ग्रह | कोई नहीं |
| मूलत्रिकोण | सूर्य सिंह में |
| मित्र ग्रह | चन्द्रमा, मंगल, गुरु |
| शत्रु ग्रह | शुक्र, शनि |
| तटस्थ ग्रह | बुध |
सिंह राशि में तीन मुख्य नक्षत्र आते हैं। मघा के चारों पद, पूर्व फाल्गुनी के चारों पद और उत्तर फाल्गुनी का एक पद सिंह राशि में स्थित है। मघा पूर्वजों, वंश गौरव और सिंहासन की ऊर्जा से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। पूर्व फाल्गुनी आनंद, सृजन और आराम की भावना का संकेत देता है। उत्तर फाल्गुनी कर्तव्य, स्थिर संबंध और उत्तरदायित्व की ओर झुकाव दर्शाता है।
नाम अक्षर के रूप में सिंह राशि के लिए मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे प्रयोग किए जाते हैं। इन अक्षरों से प्रारंभ होने वाले नाम प्रायः सिंह राशि के नक्षत्रों से सम्बद्ध माने जाते हैं।
नक्षत्र स्वामी क्रमशः केतु मघा के, शुक्र पूर्व फाल्गुनी के और सूर्य उत्तर फाल्गुनी के स्वामी हैं। कुल पदों की संख्या नौ है। यह संयोजन सिंह जातक के भीतर वंश परंपरा, आनंद, प्रेम और उत्तरदायित्व की ऊर्जा को एक साथ सक्रिय करता है।
कालपुरुष के अंगों में सिंह राशि हृदय और रीढ़ की हड्डी का प्रतिनिधित्व करती है। हृदय की मजबूती, रक्त प्रवाह और रीढ़ की स्थिरता सिंह से जुड़ी हुई मानी जाती है। सिंह जातकों के लिए मानसिक तनाव और अहं की चोट का सीधा असर हृदय क्षेत्र पर दिखाई दे सकता है।
संवेदनशील अंगों में हृदय रोग, पीठ दर्द, आंखों की कमजोरी और ऊँचे रक्तचाप की प्रवृत्ति उल्लेखनीय है। अग्नि और सूर्य प्रभाव के कारण रक्तचाप और हृदय की देखभाल पर विशेष ध्यान देना हितकारी माना जा सकता है।
प्रकृति की दृष्टि से सिंह जातकों में राजसी तेज, स्वाभिमान और अग्नि तत्व प्रबल होता है। यह तेज यदि संयमित हो तो इन्हें ऊँचा स्थान दिला सकता है, पर यदि क्रोध और अहं में बदल जाए तो स्वास्थ्य और संबंध दोनों पर दबाव ला सकता है।
शारीरिक बनावट में चौड़ा सीना, आंखों में सुनहरी सी चमक और प्रभावशाली आवाज का वर्णन मिलता है। जब ये बोलते हैं तो लोग स्वाभाविक रूप से सुनने लगते हैं। चाल में भी एक अलग प्रकार की शान दिखाई दे सकती है।
सिंह राशि की विशेष दृष्टि तुला, मकर और मेष राशियों पर मानी जाती है। यह संबंध, कर्म, प्रतिष्ठा और उत्साह से जुड़े क्षेत्रों पर अपनी ऊर्जा फैलाती है। सिंह की दृष्टि से इन भावों में निर्णय क्षमता और नेतृत्व रंग ले सकता है।
जीवन दर्शन की दृष्टि से सिंह राशि का सूत्र वाक्य “मैं करूँगा, मैं शासन करता हूँ” माना जा सकता है। यह इच्छाशक्ति और क्रियाशक्ति पर आधारित दृष्टिकोण है। सिंह जातक स्वयं को जीवन के मंच का सक्रिय खिलाड़ी मानते हैं, केवल दर्शक नहीं।
निवास के रूप में सिंह राशि पर्वत, किले और शाही महल जैसे स्थानों से जुड़ी मानी जाती है। ऊँचाई, मजबूती और राजसी सजावट वाले स्थान इस राशि की आंतरिक छवि से मेल खाते हैं। इन्हें ऐसा घर या स्थान पसंद आता है जहाँ से वे स्वयं को केंद्र में महसूस कर सकें।
योगकारक ग्रह के रूप में मंगल सिंह राशि के लिए अत्यंत सहायक माना जाता है। मंगल साहस, पराक्रम और कार्य करने की शक्ति प्रदान करता है। मारक ग्रहों में बुध और शनि का उल्लेख है, जो कुछ स्थितियों में तर्क, छोटी बातों की उलझन या कठोर अनुशासन के रूप में चुनौती दे सकते हैं। सिंह के लिए बाधक भाव नवम भाव और उसका स्वामी मंगल बताए गए हैं, जो भाग्य, गुरु या दूरस्थ यात्राओं में कभी कभी विशेष परीक्षा का संकेत बन सकते हैं, हालांकि उचित साधना से यही ऊर्जा ऊँचे उद्देश्य की ओर भी मोड़ी जा सकती है।
सिंह राशि की स्वर शक्ति में मुख्य अक्षर म और ट माने गए हैं। इन ध्वनियों में जो ठहराव और प्रभाव है वह सिंह की दहाड़ और निर्णय की दृढ़ता का सूक्ष्म रूप माना जा सकता है।
विशेष संज्ञा के रूप में सिंह को पंचम, मृगेन्द्र, कण्ठीरव और स्थिर अग्नि का धारक कहा गया है। इसे कालपुरुष की आत्मा भी माना जाता है। मृगेन्द्र अर्थात पशुओं का राजा, कण्ठीरव दहाड़ने वाला सिंह। ये संज्ञाएं सिंह राशि की मूल प्रकृति को और स्पष्ट कर देती हैं।
आयुर्वेद में सिंह का संबंध पित्त दोष से जोड़ा गया है। पित्त ऊष्मा, पाचन शक्ति और चयापचय का प्रतिनिधि है। संतुलित पित्त सिंह जातकों को तेज बुद्धि, मजबूत पाचन और ऊर्जावान व्यक्तित्व देता है, पर अधिकता होने पर चिड़चिड़ापन और रोग की संभावना भी बढ़ सकती है।
रत्न के रूप में सिंह राशि के लिए माणिक्य शुभ माना जाता है। माणिक्य सूर्य का रत्न है, जो आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और आंतरिक तेज को सुदृढ़ करने में सहायक माना जाता है। शुभ धातुओं में सोना और तांबा आते हैं, जिनमें अग्नि और सूर्य की ऊर्जा का संकेत देखा जाता है।
अंक के रूप में 1, 4, 5, 9 सिंह राशि के लिए शुभ बताए गए हैं। शुभ रंगों में सुनहरा, नारंगी, केसरिया और गहरा लाल प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में लाल और ताम्र वस्तुएं, जैसे गेहूं, तांबा, गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प और केसर, सिंह जातकों के लिए कल्याणकारी मानी जाती हैं।
सिंह राशि का आदर्श वातावरण राजसी और भव्य होता है। इन्हें ऐसी जगह पसंद आती है जहाँ गुणवत्ता दिखाई दे। कीमती सजावट, सुंदर फर्नीचर और सुसंगठित माहौल इन्हें प्रसन्न करता है। छोटा स्थान भी हो, पर उसमें गरिमा और स्वच्छता अवश्य हो।
इन्हें भरपूर रोशनी वाला घर या कार्यस्थल पसंद होता है। बड़ी खिड़कियाँ, जहाँ से सीधी धूप आए और रात के समय उजला प्रकाश हो, इनकी ऊर्जा के लिए अनुकूल माने जा सकते हैं। प्रकाश जितना संतुलित होगा, इनका मन उतना अधिक प्रेरित रहेगा।
सामाजिक रूप से इन्हें ऐसा वातावरण अच्छा लगता है जहाँ ये केन्द्र बिंदु बन सकें। मंच पर, बैठक में या परिवारिक समारोह में, यदि इन्हें सम्मानजनक स्थान मिले तो ये अपने श्रेष्ठ रूप में सामने आते हैं। ये चाहत केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि भीतर बैठी नेतृत्व की स्वाभाविक भूख का प्रकट रूप है।
सिंह जातक अपनी सफलता का प्रदर्शन करने में संकोच नहीं करते। इन्हें अपनी उपलब्धियां, पदक, प्रमाणपत्र या स्मृति चिह्न दीवार पर सजा कर रखना अच्छा लगता है। जब ये अपने परिश्रम के परिणाम को सामने देखते हैं तो अगला लक्ष्य तय करने के लिए भीतर से नई ऊर्जा महसूस करते हैं।
इनके लिए खुला और ऊँचा स्थान भी विशेष रूप से प्रिय होता है। ऊँची छत वाले घर, पहाड़ी स्थान या ऐसे स्थल जहाँ से नीचे का दृश्य दिखाई दे, इन्हें राजा की तरह दृष्टि देने में मदद करते हैं। यह केवल प्रतीक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से आत्मविश्वास को और मजबूत करता है।
सिंह राशि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विचार सौर चुंबकत्व है। जिस प्रकार सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं, उसी प्रकार बहुत बार लोग अनजाने में सिंह जातक की ओर आकर्षित हो जाते हैं और इनसे मार्गदर्शन की अपेक्षा रखते हैं। इनका आभामंडल ऐसा होता है कि लोग इन्हें स्वाभाविक नेता मानने लगते हैं।
सिंह की ऊर्जा को स्थिर अग्नि कहा गया है। यह ऐसी ज्वाला है जो लगातार जलती रहती है। जब सिंह जातक किसी लक्ष्य को मन में ठान लेते हैं तो उसे अंत तक पहुँचाने का इनका संकल्प अत्यंत मजबूत होता है। राह में रुकावटें आएं, फिर भी इनका आंतरिक अग्नि तत्व इन्हें हार नहीं मानने देता।
इनकी कार्यक्षमता सराहना की ऊर्जा से कई गुना बढ़ जाती है। जब इन्हें अपने कार्य की सच्ची सराहना मिलती है, तो ये सामान्य से कहीं अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ काम करने लगते हैं। इन्हें चापलूसी नहीं बल्कि ईमानदार स्वीकृति चाहिए होती है। एक सच्चा प्रशंसात्मक वचन इन्हें भीतर तक प्रेरित कर सकता है।
सिंह राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
सिंह राशि का स्वामी ग्रह कौन है?
सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है, जो आत्मा, तेज और नेतृत्व का कारक माना जाता है।
सिंह राशि किन शरीर अंगों का प्रतिनिधित्व करती है?
यह हृदय, छाती के ऊपरी हिस्से, रीढ़ की हड्डी और ऊपरी पेट का प्रतिनिधित्व करती है और इन अंगों को विशेष रूप से सक्रिय और संवेदनशील बनाती है।
सिंह राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर आते हैं?
मघा के चार पद, पूर्व फाल्गुनी के चार पद और उत्तर फाल्गुनी का एक पद सिंह में आते हैं तथा नाम अक्षर मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे माने जाते हैं।
सिंह राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ हैं?
माणिक्य रत्न, सुनहरा, नारंगी, केसरिया और गहरा लाल रंग, तथा 1, 4, 5, 9 अंक सिंह राशि के लिए शुभ बताए जाते हैं।
सिंह राशि का जीवन दर्शन क्या है?
सिंह राशि का जीवन दर्शन “मैं करूँगा, मैं शासन करता हूँ” है, जहाँ इच्छाशक्ति, नेतृत्व और कर्म के माध्यम से स्वयं की पहचान बनाना प्रमुख उद्देश्य रहता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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