तुला राशि का गुप्त सत्य और स्वास्थ्य उपाय

By पं. संजीव शर्मा

कालपुरुष कुंडली के सातवें भाव का गहरा रहस्य

तुला राशि का गुप्त सत्य और रीढ़ की हड्डी का उपाय

इस संसार में हर इंसान किसी न किसी संघर्ष से जूझ रहा है लेकिन तुला राशि का पूरा जीवन दूसरों के बीच तालमेल बिठाने में ही गुजर जाता है। यह एक ऐसी राशि है जो खुद कष्ट सह सकती है लेकिन अपने सामने बैठे इंसान की थाली कभी खाली नहीं देख सकती। सबको खुश रखने की कोशिश में जो राशि अक्सर खुद सबसे ज्यादा अकेली हो जाती है उसका नाम है तुला।

यदि आपका जन्म तुला राशि या लग्न में हुआ है या आपका कोई बेहद करीबी तुला राशि का है तो इस अद्भुत ज्योतिषीय विश्लेषण को अपने दिल की गहराइयों से महसूस कीजिएगा। आज आपको पता चलेगा कि कैसे ब्रह्मांड की शक्तियां आपके शरीर के एक बेहद खास हिस्से में बैठकर आपके व्यवहार, आपकी मोहब्बत, आपके गुस्से और आपकी बीमारियों को तय कर रही हैं।

कालपुरुष और कालपुरुष कुंडली का गुप्त सत्य क्या है?

वैदिक ज्योतिष में कालपुरुष का अर्थ है इस पूरे ब्रह्मांड का एक विराट, जीवंत और मानवीय स्वरूप। हमारे ऋषियों ने माना कि यह अनंत आकाश और समय का चक्र कोई निर्जीव मशीन नहीं है बल्कि एक दिव्य पुरुष का शरीर है। हमारा छोटा सा मानव शरीर इसी ब्रह्मांडीय पुरुष का एक सूक्ष्म रूप है।

कालपुरुष कुंडली इस ब्रह्मांडीय पुरुष का वह पहला और प्राकृतिक नक्शा है जहां से ज्योतिष के सारे नियम जन्म लेते हैं। इस कुंडली की शुरुआत हमेशा मेष राशि से होती है जो मनुष्य के सिर का प्रतिनिधित्व करती है। जैसे जैसे राशियां आगे बढ़ती हैं वे शरीर के नीचे के अंगों की तरफ यात्रा करती हैं। इस यात्रा में तुला राशि को सातवां भाव मिला है जिसे ज्योतिष में कलत्र भाव या साझेदारी का स्थान कहा जाता है। यह वह स्थान है जो हमारे वैवाहिक जीवन, व्यापारिक साझेदारियों, सामाजिक छवि और दो लोगों के बीच के संतुलन को तय करता है। तुला राशि कालपुरुष के इस पूरे ढांचे का वह केंद्र बिंदु है जहां से पूरे शरीर का संतुलन नियंत्रित होता है।

तुला राशि और शरीर के संवेदनशील अंग

कालपुरुष कुंडली का सातवां हिस्सा होने के कारण तुला राशि हमारे शरीर के मध्य भाग और संतुलन बनाने वाले महत्वपूर्ण अंगों को संभालती है।

शरीर के अंग और प्रणालियां ज्योतिषीय महत्व और कार्य
कमर और रीढ़ का निचला हिस्सा पूरे ऊपरी धड़ को पैरों से जोड़कर सीधे खड़े रहने का संतुलन देना
दोनों गुर्दे (Kidneys) चौबीस घंटे बिना रुके खून को छानना और एसिड का संतुलन बनाना
नाभि के नीचे का हिस्सा और मूत्राशय शरीर के भीतरी तरल पदार्थों का नियंत्रण और शुद्धिकरण
भीतरी जननांग आंतरिक हार्मोन्स का संतुलन और प्रजनन क्षमता

तुला राशि के प्रतीक ग्रह तत्व और नक्षत्रों का खेल

तुला राशि के इन शारीरिक अंगों के पीछे ब्रह्मांड की जो शक्तियां काम कर रही हैं वे इनके पूरे जीवन की कहानी बयां करती हैं।

  • प्रतीक चिन्ह तराजू का रहस्य: तुला राशि का प्रतीक चिन्ह एक तराजू है जिसे एक पुरुष ने हाथ में उठा रखा है। पूरे राशि चक्र में तुला ही एकमात्र ऐसी राशि है जिसका प्रतीक कोई जीव या मनुष्य नहीं बल्कि एक बेजान वस्तु यानी तराजू है। यह तराजू सीधे तौर पर आपकी कमर और किडनी के काम से जुड़ा है। जैसे तराजू के दोनों पलड़े बराबर होने चाहिए वैसे ही आपकी दोनों किडनियां शरीर के रसायनों को बराबर रखती हैं। यही वजह है कि तुला राशि वालों के जीवन का सबसे बड़ा शब्द न्याय और संतुलन है।
  • स्वामी शुक्र और सौंदर्य की ऊर्जा: तुला राशि के स्वामी शुक्र देव हैं। शुक्र हमारे शरीर में त्वचा की चमक, हार्मोन्स के संतुलन, प्रजनन क्षमता और सुख सुविधाओं के कारक हैं। शुक्र की ऊर्जा तुला राशि वालों को एक बेहद आकर्षक व्यक्तित्व, खूबसूरत मुस्कान और मीठी वाणी देती है। ये लोग किसी भी बदसूरत या गंदी जगह पर नहीं रह सकते हैं इनके आसपास सब कुछ सलीके से और सुंदर होना चाहिए।
  • वायु तत्व और चर स्वभाव: तुला एक वायु तत्व की राशि है लेकिन इसका स्वभाव चर यानी सदा चलने वाला है। बहती हुई हवा कभी एक जगह रुकती नहीं है। यही कारण है कि तुला राशि के लोगों के विचार बहुत तेजी से बदलते हैं। वे किसी भी माहौल में खुद को ढाल लेते हैं। जैसे जैसे समय बदलता है ये अपनी सोच और काम करने के तरीके को बदल लेते हैं। लेकिन हवा जब अनियंत्रित होती है तो इनके भीतर एक मानसिक तूफान भी खड़ा कर देती है।

तीन नक्षत्रों की दिव्य त्रिशक्ति

तुला राशि के भीतर तीन विशेष नक्षत्रों की ऊर्जा प्रवाहित होती है जो इसके अस्तित्व को पूर्ण बनाती है। चित्रा नक्षत्र के उत्तरार्ध के स्वामी मंगल हैं और इसके देवता विश्वकर्मा हैं जो ब्रह्मांड के आर्किटेक्ट हैं। यह नक्षत्र तुला राशि वालों को बेहतरीन डिजाइनिंग सेंस, सजने संवरने का शौक और एक मजबूत शारीरिक ढांचा देता है।

स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इसके देवता वायु देव हैं। यह नक्षत्र सीधे तौर पर किडनियों के फिल्टर करने की प्रक्रिया और शरीर में ऑक्सीजन के बहाव को नियंत्रित करता है। यह तुला वालों को समाज में बहुत लोकप्रिय और खोजी बुद्धि वाला बनाता है। विशाखा नक्षत्र के प्रथम तीन चरणों के स्वामी गुरु हैं और इसके देवता इंद्र व अग्नि हैं। यह इन्हें ज्ञान, न्यायप्रियता और समाज में एक बड़ा मुकाम हासिल करने की तड़प देता है।

आपके स्वभाव और रिश्तों का इन अंगों से कनेक्शन

तुला राशि का जो शारीरिक काम है छानना और संतुलन बनाना वही उनके स्वभाव में भी शत प्रतिशत दिखाई देता है।

रिश्तों के फिल्टर

जैसे किडनियां शरीर के जहर को छानकर बाहर निकाल देती हैं और काम की चीजों को रोक लेती हैं वैसे ही तुला राशि के लोग अपने परिवार और दोस्तों के बीच एक फिल्टर का काम करते हैं। वे दो लड़ते हुए लोगों के बीच में आकर समझौता कराते हैं। वे दूसरों के कड़वे घूंट खुद पी जाते हैं ताकि घर का माहौल न बिगड़े।

कमर का दर्द और जिम्मेदारियों का बोझ

तुला राशि वाले जब भी किसी रिश्ते में आते हैं वे सामने वाले की जिम्मेदारी अपने कंधों और कमर पर उठा लेते हैं। वे पार्टनर को खुश रखने के लिए अपनी खुशियों का गला घोंट देते हैं। जब उन्हें बदले में वह प्यार और सम्मान नहीं मिलता तो उनकी यही भावनात्मक हताशा उनकी लोअर बैक में दर्द बनकर बैठ जाती है।

निर्णय लेने में दुविधा

तराजू का पलड़ा हमेशा हिलता रहता है जब तक कि उसमें बराबर वजन न हो। यही वजह है कि तुला राशि के लोग जीवन में छोटे छोटे फैसले लेने में बहुत समय लगाते हैं। एक शर्ट खरीदनी हो या करियर का बड़ा फैसला करना हो इनका दिमाग तराजू की तरह दोनों तरफ डोलता रहता है। वे हमेशा डरते हैं कि उनके किसी फैसले से कोई दुखी न हो जाए।

सेहत के छिपे हुए खतरे और सबसे कमजोर नस

चूंकि कमर, गुर्दे और मूत्राशय इनका मुख्य केंद्र हैं इसलिए तुला राशि के लोगों को इन अंगों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम हमेशा बने रहते हैं।

गुर्दे की पथरी और इन्फेक्शन

तुला राशि वालों को पानी कम पीने की आदत होती है क्योंकि वे काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी प्यास भूल जाते हैं। इस वजह से इन्हें किडनी में स्टोन होना, यूरिन इन्फेक्शन या किडनियों के ठीक से काम न करने की समस्या अक्सर घेर लेती है।

कमर के निचले हिस्से में पुराना दर्द

इनकी रीढ़ का निचला हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है। गलत तरीके से बैठने, भारी वजन उठाने या बहुत ज्यादा मानसिक तनाव लेने से इन्हें स्लिप डिस्क, सायटिका या पीठ के निचले हिस्से में भयंकर जकड़न का सामना करना पड़ता है।

मधुमेह और शुगर की बीमारी

शुक्र देव मीठे के कारक हैं। तुला राशि वालों को चॉकलेट, मिठाई और फास्ट फूड बहुत पसंद होता है। यदि ये अपनी डाइट पर कंट्रोल न करें तो इनका पेनक्रियाज प्रभावित होता है और इन्हें डायबिटीज होने का खतरा दूसरों से बहुत पहले हो जाता है।

त्वचा की एलर्जी और हार्मोनल असंतुलन

शुक्र के कारण इनकी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। कॉस्मेटिक्स, धूल या धूप से इन्हें स्किन एलर्जी होना, चेहरे पर दाने निकलना या शरीर में हार्मोन्स का बिगड़ना बहुत आम बात है।

अनिवार्य सावधानियां और अचूक उपाय

अगर आप अपनी ऊर्जा को संतुलित रखना चाहते हैं और इन शारीरिक कष्टों से बचना चाहते हैं तो इन वैज्ञानिक उपायों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं।

  • पानी को बनाएं अपना अमृत: आपकी किडनियों को जिंदा रखने के लिए पानी सबसे जरूरी है। हर दो घंटे में कम से कम एक से दो गिलास पानी पीने का नियम बनाएं। जितना ज्यादा पानी आपके शरीर से फ्लश आउट होगा आपकी किडनियां उतनी ही जवान रहेंगी और आपकी त्वचा पर कभी बुढ़ापा नहीं आएगा।
  • कमर को दें मजबूती: रोज सुबह कम से कम दस मिनट योग में भुजंगासन या मार्जरी आसन करें। यह आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से को लचीला बनाए रखेगा जिससे आपको बुढ़ापे में भी कमर दर्द की शिकायत नहीं होगी।
  • सफेद चीजों और चावल का दान: अपने शुक्र को शुभ बनाए रखने के लिए शुक्रवार के दिन बहुत ज्यादा खट्टी चीजें खाने से बचें। शुक्रवार को किसी जरूरतमंद को दूध, चावल या सफेद मिठाई का दान करना आपके स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए वरदान साबित होगा।
  • भावनात्मक सीमाएं तय करें: आपके बीमार होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि आप किसी को ना नहीं कह पाते। पूरी दुनिया का ठेका अपने सिर पर मत लीजिए। जो लोग आपकी कद्र नहीं करते उनके लिए अपनी किडनियों और कमर को दांव पर लगाना बंद कीजिए। खुद से प्यार करना सीखिए।

एक अंतिम और आत्मा को झकझोर देने वाला सच

तुला राशि के लोग इस दुनिया के वे मूक फरिश्ते हैं जो महफिल की जान होते हैं लेकिन महफिल खत्म होने के बाद जब अपने कमरे में आते हैं तो अकेलेपन के समंदर में डूब जाते हैं। वे पूरी दुनिया के आंसुओं को साफ करते हैं सबके बीच प्यार बांटते हैं लेकिन जब उन्हें खुद रोने के लिए एक कंधे की जरूरत होती है तो वे अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपाकर अकेले ही रो लेते हैं।

वे बाहर से जितने शांत, सलीकेदार और मुस्कुराते हुए दिखते हैं उनके अंदर अपनी इच्छाओं को मारने का उतना ही गहरा दर्द होता है। वे गिरते हैं, उनकी कमर टूटती है, उनके अपने उन्हें धोखा देते हैं लेकिन वे अगले ही पल अपने कपड़ों की धूल झाड़कर, अपने चेहरे पर एक खूबसूरत सी मुस्कान सजाकर फिर खड़े हो जाते हैं और कहते हैं कि चलो सब कुछ ठीक करते हैं।

अगर आपके जीवन में कोई तुला राशि का व्यक्ति है चाहे वह आपका जीवनसाथी हो, मित्र हो या सहकर्मी हो तो याद रखिए कि वे आपके जीवन का संतुलन बनाए रखने के लिए खुद को घिस रहे हैं। कभी चुपके से उनके पास बैठिए, उनके दोनों हाथों को थामिए और कहिए कि तुम्हें हमेशा परफेक्ट दिखने की या सबको खुश रखने की जरूरत नहीं है, तुम जैसे भी हो मेरे लिए अनमोल हो। यकीन मानिए आपके इस एक वाक्य से उनके भीतर का सारा मानसिक तनाव पिघल जाएगा और उनकी आत्मा खिल उठेगी।

FAQ

तुला राशि के लोगों को कमर दर्द की समस्या ज्यादा क्यों होती है?
कालपुरुष कुंडली में तुला राशि का अधिकार कमर और रीढ़ के निचले हिस्से पर होता है। जब तुला राशि के लोग दूसरों की जिम्मेदारियों का बोझ मानसिक रूप से अपने ऊपर उठा लेते हैं तो वह तनाव उनकी पीठ के निचले हिस्से में दर्द बनकर प्रकट होता है।

क्या तुला राशि के लोग सच में फैसले लेने में कमजोर होते हैं?
तुला राशि का प्रतीक तराजू है जो हमेशा हिलता रहता है। वे किसी को दुखी नहीं करना चाहते हैं इसलिए हर विकल्प को बहुत गहराई से तौलते हैं। इसी वजह से वे छोटे और बड़े फैसले लेने में बहुत अधिक समय लगाते हैं।

तुला राशि वालों को कौन सी बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
इन जातकों को किडनी में पथरी, यूरिन इन्फेक्शन, मधुमेह, त्वचा की एलर्जी और रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से जुड़ी समस्याओं का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

शुक्र ग्रह का तुला राशि के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
शुक्र देव सौंदर्य और हार्मोन्स के कारक हैं। जब शुक्र मजबूत होता है तो तुला राशि वालों को आकर्षक त्वचा और ऊर्जा मिलती है लेकिन शुक्र के असंतुलित होने पर इन्हें हार्मोनल गड़बड़ी और त्वचा से जुड़े रोग होने लगते हैं।

तुला राशि के जातकों को स्वस्थ रहने के लिए क्या करना चाहिए?
इन्हें प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए, नियमित रूप से कमर के आसन करने चाहिए और शुक्रवार के दिन सफेद चीजों का दान करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें दूसरों को ना कहना सीखना चाहिए।

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मेरी चंद्र राशि

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लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


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