By पं. अभिषेक शर्मा
स्वामी शुक्र, शनि उच्च, सूर्य नीच, नक्षत्र चित्रा स्वाति विशाखा, स्वास्थ्य संकेत और तुला के संतुलन स्वभाव का संपूर्ण डेटा

जब भी तुला राशि की बात आती है तो सबसे पहले तराजू की छवि सामने आती है। यह वही तराजू है जो जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन, न्याय और सामंजस्य खोजने की प्रवृत्ति को दिखाता है। तुला राशि के जातक अक्सर ऐसे मोड़ों पर खड़े दिखाई देते हैं जहाँ दो पक्षों के बीच फैसला करना आसान नहीं होता, फिर भी इनकी सहज समझ और कूटनीतिक स्वभाव से कोई न कोई संतुलित समाधान निकल ही आता है। इसी कारण तुला राशि को केवल अनिर्णय की प्रतीक नहीं बल्कि जीवन में संतुलन के आर्किटेक्ट ऑफ बैलेंस के रूप में समझना अधिक उचित है।
कई बार अचानक यह जानने की ज़रूरत पड़ती है कि तुला राशि का स्वामी ग्रह कौन है, कौन से नक्षत्र इस राशि में आते हैं, शरीर के किन अंगों पर इसका असर होता है या तुला राशि के लिए कौन सा रत्न शुभ माना गया है। ऐसे समय पर बिखरी हुई जानकारियाँ उलझा देती हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तुला राशि का यह संपूर्ण ज्योतिषीय डेटा एक ही जगह पर सहेज कर रखा गया है ताकि जब भी तुला राशि से जुड़ी कोई सूक्ष्म जानकारी चाहिए हो, तो यह लेख एक भरोसेमंद संदर्भ की तरह काम कर सके।
तुला राशि की पहली पहचान इसका कूटनीतिक स्वभाव है। ये जातक किसी भी विवाद में एक पक्ष का अंधा समर्थन करने के बजाय दोनों तरफ की बात ध्यान से सुनते हैं और फिर ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश करते हैं जिसमें सभी पक्षों को सम्मानित महसूस हो। इनकी यह आदत इन्हें परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में स्वाभाविक मध्यस्थ की भूमिका में ला देती है।
दूसरी विशेषता इनका गहरा सौंदर्य प्रेम है। तुला राशि को कला, सजावट, सुंदर वस्तुएँ और नफासत भरा वातावरण स्वभाव से आकर्षित करता है। अस्त व्यस्त और बिखरा हुआ माहौल इन्हें भीतर से बोझिल कर देता है। कमरे की दीवारों का रंग, फर्नीचर की बनावट और आसपास की सुगंध तक ये सूक्ष्मता से महसूस कर लेते हैं।
तीसरी विशेषता इनकी न्यायप्रियता है। तुला राशि के लिए पक्षपात सहना बहुत कठिन होता है। इनकी कुंडली में शनि उच्च के होने के कारण इनके भीतर एक अंदरूनी न्यायाधीश बैठा होता है जो हर स्थिति को तौलता है। सही और गलत का भेद समझने की यह स्वाभाविक क्षमता इन्हें निष्पक्ष निर्णय के लिए सक्षम बनाती है।
चौथी विशेषता इनका सामाजिक स्वभाव है। तुला जातक अकेले रहना पसंद नहीं करते। इन्हें लोगों के बीच रहना, मित्रों से घिरा रहना और संवाद करते रहना अधिक अच्छा लगता है। अच्छी संगत, स्नेह भरी बातचीत और साझा गतिविधियाँ इनके मन की ऊर्जा को संतुलित रखती हैं।
पाँचवीं विशेषता इनकी कभी कभी दिखने वाली अनिर्णय की स्थिति है। तुला जातक दोनों पक्षों को बहुत ईमानदारी से तौलते रहते हैं। इस कारण निर्णय लेने में समय लग सकता है। कई बार यह झिझक दूसरों को अनिर्णय की स्थिति जैसी दिखती है, जबकि भीतर से ये केवल न्यायपूर्ण विकल्प चुनने की कोशिश में लगे रहते हैं।
तुला राशि को राशि चक्र की इकलौती निर्जीव राशि माना जाता है। यहाँ प्रतीक कोई जीव नहीं बल्कि तराजू है जिसे एक पुरुष ने हाथ में पकड़ा हुआ दिखाया गया है। यह प्रतीक तुला राशि की उस क्षमता का संकेत है जो भावनाओं की हलचल से थोड़ी दूरी बनाकर किसी स्थिति को मशीन की तरह तटस्थ होकर तौल सकती है।
तुला राशि में सूर्य नीच के होते हैं। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह समझा जा सकता है कि यहाँ अहंकार को पीछे रखना सीखना होता है। साझेदारी निभाने, विवाह और सहयोगी संबंधों को संतुलित रखने के लिए स्वयं के अहं को थोड़ा त्यागना इन जातकों के लिए एक स्वाभाविक साधना बन जाता है।
दूसरी ओर, इसी राशि में शनि उच्च के होते हैं। शुक्र की राशि होने के कारण बाहरी तौर पर तुला जातक कोमल, आकर्षक और सुख प्रिय दिखाई देते हैं, पर भीतर से इनका अनुशासन, सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और न्याय के विषय में कठोरता किसी मखमल में लिपटे लोहे की तरह होती है। बाहर मुस्कुराहट और भीतर मजबूत नियम।
तुला का संस्कृत नाम तुला ही है, जिसका अर्थ तराजू या साम्यावस्था है। यह नाम ही इस राशि की आत्मा को प्रकट करता है। तुला का चिह्न एक ऐसा तराजू है जिसे एक पुरुष अपने हाथ में पकड़े हुए है। यह बताता है कि तुला राशि केवल सिद्धांतों पर नहीं रहती बल्कि वास्तविक जीवन में संतुलन और न्याय को पकड़ने की कोशिश करती है।
राशि क्रम में तुला सातवीं राशि है। यह साझेदारी, विवाह और सार्वजनिक छवि के भाव से जुड़ी है। जिस प्रकार जन्म कुंडली का सप्तम भाव विवाह, व्यापारिक साझेदारी और खुले शत्रुओं का प्रतिनिधित्व करता है, उसी प्रकार तुला राशि भी इन क्षेत्रों में सामंजस्य बनाने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।
तुला राशि को संतुलन, न्याय, साझेदारी और सामंजस्य की राशि कहा गया है। कालपुरुष कुंडली में यह विवाह, व्यापार, कूटनीति और सार्वजनिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। तुला राशि के जातक केवल अनिर्णायक नहीं, वे विवादों के बीच समाधान और जीवन में सुंदरता का संचार करने वाले आर्किटेक्ट ऑफ बैलेंस के रूप में देखे जाते हैं।
तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। शुक्र प्रेम, सौंदर्य, कला और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। इस कारण तुला जातकों के व्यक्तित्व में आकर्षण, सौम्यता, विनम्रता और संबंधों के प्रति सजगता स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है। अच्छी संगीत, सुंदर वस्त्र और कलात्मक वातावरण के प्रति इनका झुकाव अक्सर स्पष्ट होता है।
स्वामी देवताओं के रूप में तुला राशि से देवी लक्ष्मी और माँ दुर्गा की ऊर्जा जुड़ी मानी जाती है। लक्ष्मी समृद्धि और सौंदर्य का, जबकि दुर्गा शक्ति, मर्यादा और रक्षा का प्रतीक हैं। इस संयोजन के कारण तुला राशि में नरम सुंदरता और गरिमामय शक्ति दोनों का अनोखा संतुलन देखने को मिलता है।
तत्त्व के स्तर पर तुला राशि वायु तत्व की राशि है। वायु विचारों के संचार, संवाद और बौद्धिक प्रवाह का प्रतिनिधित्व करती है। तुला जातक बातों, विचारों और तर्क के माध्यम से ही संबंधों को संभालते हैं। इनके लिए संवाद और कूटनीतिक बातचीत किसी भी विवाद का सबसे महत्वपूर्ण साधन होती है।
स्वभाव की दृष्टि से तुला चर राशि है। चर स्वभाव नई पहल, गति और परिवर्तन की ओर संकेत करता है। तुला राशि हमेशा गतिशील रहकर परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार और निर्णयों को समायोजित करती है। स्थिर स्थिति की बजाय यह संवाद और समझौते के माध्यम से आगे बढ़ने में विश्वास रखती है।
गुण के स्तर पर तुला को रजोगुणी माना गया है। रजोगुण सुख सुविधाओं, सृजन, संबंधों और गतिविधियों की ओर आकर्षण का संकेत देता है। तुला जातक जीवन में सुंदरता, आराम और संतुलित आनंद की खोज करते हैं, साथ ही इन सबके बीच न्याय की कसौटी भी बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
लिंग के रूप में तुला पुरुष राशि है। इसमें सक्रिय, तर्कसंगत और बाहरी दुनिया की ओर उन्मुख ऊर्जा अधिक दिखाई देती है। जाति की दृष्टि से तुला को कला, कौशल और सेवा में निपुण वर्ग की राशि माना गया है। इस कारण यह राशि डिजाइन, परामर्श, मध्यस्थता और कला संबंधित कार्यों में विशेष रूप से सफल देखी जाती है।
दिशा के स्तर पर तुला राशि पश्चिम दिशा की अधिपति मानी जाती है। पश्चिम को अस्त होते सूर्य की दिशा भी कहा जाता है, जहाँ दिन और रात के मिलन में एक सूक्ष्म संतुलन बनता है। इसी प्रकार तुला जातक भी दो अलग दिशाओं के बीच संतुलन बनाने की क्षमता रखते हैं।
शरीर के अंगों में तुला राशि बस्ती प्रदेश, गुर्दे और कमर के नीचे का भाग नियंत्रित करती है। यह क्षेत्र शरीर के भीतर संतुलन, रक्त शुद्धि और विषाक्त तत्वों के निष्कासन से जुड़ा होता है। गुर्दों की कार्यप्रणाली और यूरिनरी सिस्टम का ठीक रहना तुला राशि के लिए विशेष महत्व रखता है।
प्रकृति की दृष्टि से तुला राशि को त्रिदोष प्रधान माना गया है। यहाँ वात, पित्त और कफ तीनों का मिश्रण पाया जाता है। वायु तत्व के कारण कई बार वात दोष थोड़ा अधिक सक्रिय हो सकता है, पर मूल रूप से यह राशि संतुलन के सिद्धांत से जुड़ी है। जब तक जीवनशैली संतुलित रहे तब तक स्वास्थ्य का आधार भी मजबूत रहता है।
नीचे दी गई सारणी में तुला राशि के इन मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में देख सकते हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शुक्र |
| स्वामी देवता | देवी लक्ष्मी, माँ दुर्गा |
| तत्त्व | वायु |
| स्वभाव | चर |
| गुण | रजोगुणी |
| लिंग | पुरुष |
| जाति | कला और सेवा में निपुण |
| दिशा | पश्चिम |
| शरीर अंग | बस्ती प्रदेश, गुर्दे, कमर के नीचे का हिस्सा |
| प्रकृति | त्रिदोष प्रधान |
तकनीकी दृष्टि से तुला राशि शीर्षोदय मानी जाती है। शीर्षोदय का अर्थ है कि यह राशि सिर की ओर से उदय होती है। यह संकेत अत्यंत शुभ और मानवीय गुणों से भरपूर माना गया है। ऐसे जातकों में विचार और विवेक की भूमिका अक्सर मजबूत रहती है।
शक्ति काल के स्तर पर तुला दिवा बली है। दिन के समय इस राशि की शक्ति प्रखर मानी जाती है। दिन में होने वाली बातचीत, बैठकें और निर्णय तुला जातकों के लिए विशेष प्रभाव वाले हो सकते हैं। प्रकाश और सामाजिक सक्रियता इनके स्वभाव से मेल खाते हैं।
वश्य वर्गीकरण में तुला द्विपद यानी मानव वश्य राशि है। यह कूटनीति, सभ्यता और सामाजिक संपर्कों में निपुण ऊर्जा का संकेत है। तुला जातक लोगों को पढ़ने, उनकी जरूरतों को समझने और शब्दों के माध्यम से पुल बनाने में विशेष रूप से सक्षम होते हैं।
कद के स्तर पर तुला राशि के जातकों का कद सामान्यतः संतुलित और मध्यम माना जाता है। न बहुत छोटे, न बहुत लंबे बल्कि सधे हुए शरीर के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व दिखाई देता है। शब्द के रूप में तुला की मध्यम शब्द श्रेणी बताई गई है। अर्थात न बहुत तेज, न अत्यंत धीमी बल्कि संतुलित और कूटनीतिक वाणी।
प्राणी श्रेणी में तुला द्विपद वर्ग में आती है, जहाँ बुद्धि और विवेक की प्रधानता होती है। प्रजनन क्षमता के स्तर पर इसे अल्प प्रसव वाली राशि के रूप में उल्लेखित किया गया है, जिसका संकेत अक्सर कम संतान या संतान संबंधी निर्णयों में बहुत विचार के रूप में देखा जा सकता है।
तुला राशि का विस्तार राशि चक्र में एक सौ अस्सी डिग्री से दो सौ दस डिग्री तक है। यह वह क्षेत्र है जहाँ सूर्य कन्या से आगे बढ़कर न्याय, साझेदारी और संबंधों के प्रकाश में प्रवेश करता है।
रंग के रूप में तुला का वर्ण कृष्ण या श्याम बताया गया है, कई मत इसे विचित्र या धूसर रंग से भी जोड़ते हैं। धूसर रंग दो चरम स्थितियों के बीच की मध्य रेखा जैसा है, जो तुला की संतुलनप्रियता से मेल खाता है।
तुला राशि में शनि उच्च के ग्रह हैं। शनि का उच्च होना अनुशासन, न्याय, नियम और जिम्मेदारी के क्षेत्रों को अत्यंत मजबूत बना देता है। यही कारण है कि तुला राशि में न्यायप्रियता और सिद्धांतों के प्रति कठोरता का एक गहरा आधार देखा जाता है।
इसी राशि में सूर्य नीच के होते हैं। सूर्य अहं, स्वाभिमान और व्यक्तिगत चमक से जुड़ा ग्रह है। नीच स्थिति यह संकेत देती है कि यहाँ व्यक्ति को अपने अहं को कुछ हद तक पीछे रखकर साझेदारी, सहयोग और न्याय को प्राथमिकता देना सीखना होता है।
शुक्र अपनी ही तुला राशि में शून्य से पंद्रह डिग्री तक मूलत्रिकोण में माने जाते हैं। इस स्थिति में शुक्र प्रेम, सौंदर्य, सामंजस्य और संबंधों के क्षेत्र में संतुलित और मजबूत फल दे सकता है।
ग्रह मैत्री में तुला के स्वामी शुक्र के लिए बुध और शनि मित्र ग्रह हैं। सूर्य और चन्द्रमा शत्रु ग्रह माने गए हैं, जबकि मंगल और गुरु तटस्थ ग्रह के रूप में देखे जाते हैं।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 180° से 210° |
| वर्ण | कृष्ण, धूसर, विचित्र |
| उच्च ग्रह | शनि |
| नीच ग्रह | सूर्य |
| मूलत्रिकोण | शुक्र 0° से 15° |
| मित्र ग्रह | बुध, शनि |
| शत्रु ग्रह | सूर्य, चन्द्रमा |
| तटस्थ ग्रह | मंगल, गुरु |
तुला राशि के भीतर तीन प्रमुख नक्षत्र आते हैं। पहला, चित्रा नक्षत्र के दो पद तुला में स्थित हैं। इसके बाद स्वाति नक्षत्र के चारों पद पूरे के पूरे तुला राशि में आते हैं। अंत में विशाखा नक्षत्र के तीन पद तुला में पड़ते हैं। इस प्रकार तुला राशि में कुल नौ पद शामिल होते हैं।
चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। यह नक्षत्र सौंदर्य, डिजाइन, वास्तु और रचनात्मक निर्माण की शक्ति देता है। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, जो स्वतंत्रता, स्वावलंबन और अलग ढंग से सोचने की क्षमता प्रदान करते हैं। विशाखा नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं, जो लक्ष्य साधना, विस्तार और धैर्यपूर्ण प्रयास की ऊर्जा से जुड़े हैं।
नाम अक्षर के रूप में तुला राशि के लिए टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो माने जाते हैं। इन अक्षरों से प्रारंभ होने वाले नाम सामान्यत: तुला राशि या इसके नक्षत्रों से संबद्ध माने जाते हैं।
| नक्षत्र | पद | नाम अक्षर | नक्षत्र स्वामी |
|---|---|---|---|
| चित्रा | 2 पद | पे, पो | मंगल |
| स्वाति | 4 पद | रु, रा आदि पारंपरिक, यहाँ नाम अक्षर समूह से जुड़ाव रहता है | राहु |
| विशाखा | 3 पद | ते, तो आदि पारंपरिक समूह | गुरु |
(नाम अक्षर सूची में लेख के आधार पर मुख्य अक्षरों टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो का प्रयोग नामकरण में किया जाता है।)
कालपुरुष के अंगों में तुला राशि निचले पेट, नाभि के नीचे का हिस्सा और जननांगों से जुड़ी मानी जाती है। यह क्षेत्र शरीर की संतुलन प्रणाली, प्रजनन शक्ति और शारीरिक सामंजस्य का आधार माना जा सकता है।
संवेदनशील अंगों में तुला राशि विशेष रूप से गुर्दों, यूरिनरी सिस्टम और कमर के निचले हिस्से की रीढ़ पर प्रभाव डालती है। यदि जीवन में संतुलन बिगड़ जाए, अत्यधिक तनाव हो या पर्याप्त आराम न मिले तो इन क्षेत्रों में शिकायतें उभर सकती हैं।
प्रकृति की दृष्टि से तुला जातक संतुलित, न्यायप्रिय, सामाजिक और कलात्मक स्वभाव के होते हैं। इनकी शारीरिक बनावट प्रायः संतुलित शरीर, हँसमुख चेहरा और प्रभावी मुस्कान से पहचानी जाती है। चेहरा अक्सर ऐसा होता है जिसमें कोमलता और आत्मीयता दोनों साफ दिखाई दें।
दृष्टि की दृष्टि से तुला राशि की ऊर्जा वृषभ, सिंह और कुंभ पर विशेष प्रभाव डालती है। यह प्रभाव संबंधों, संसाधनों, नेतृत्व और सामाजिक समूहों के बीच संतुलन और न्याय की भावना को बढ़ा सकता है।
तुला राशि का जीवन दर्शन संक्षेप में “मैं संतुलन बनाता हूँ” के विचार से समझा जा सकता है। यह दृष्टि केवल अपने लिए नहीं बल्कि रिश्तों, साझेदारी, समाज और कार्यक्षेत्र में भी संतुलन खोजने की प्रेरणा देती है। ये लोग अतियों के बजाय मध्य मार्ग पर विश्वास रखते हैं।
निवास के रूप में तुला राशि व्यापारिक स्थल, बाज़ार, ज्वेलरी शॉप, कला केंद्र और मनोरंजन गृह जैसे स्थानों से जुड़ी मानी जाती है। जहाँ सौंदर्य, मेलजोल, विनिमय और आकर्षण का वातावरण हो, वहाँ तुला राशि की ऊर्जा फलती फूलती है।
योगकारक ग्रह के रूप में तुला के लिए शनि को विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। शनि इस राशि में उच्च भी होते हैं, इसलिए उचित रूप से स्थित होने पर ये कर्म क्षेत्र, न्यायप्रियता और जीवन की संरचना को मजबूत करते हैं। मारक ग्रहों में मंगल और गुरु का उल्लेख किया गया है। बाधक भाव के रूप में ग्यारहवाँ भाव और उसका स्वामी सूर्य तुला के लिए बाधक माने गए हैं, जो कुछ परिस्थितियों में लाभ, मित्र मंडली या आकांक्षाओं के क्षेत्र में परीक्षाएँ ला सकते हैं।
तुला राशि की स्वर शक्ति में मुख्य रूप से र और त ध्वनियाँ मानी जाती हैं। इन ध्वनियों में संतुलन और दृढ़ता की अनुभूति होती है। अक्सर मंत्रोच्चारण में इन ध्वनियों की आवृत्ति इस राशि के जातकों के मन को स्थिरता प्रदान कर सकती है।
विशेष संज्ञाओं में तुला को तौली यानी तराजू, वणिक यानी व्यापारी, शीर्षोदय, चर और पश्चिम बली कहा गया है। यह सब नाम इसकी न्यायप्रिय, व्यापारिक, सक्रिय और पश्चिम दिशा में बलवान प्रकृति को दर्शाते हैं।
आयुर्वेदिक संदर्भ में तुला राशि का संबंध त्रिदोष से जोड़ा गया है, जिसमें वात, पित्त और कफ तीनों का मिश्रण रहता है। यदि जीवनशैली संतुलित रहे तो यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो सकता है, पर असंतुलन की स्थिति में तीनों दोषों में से कोई भी परेशान कर सकता है।
रत्न के रूप में तुला राशि के लिए हीरा शुभ माना गया है। हीरा शुक्र की ऊर्जा को सक्रिय कर चमक, आकर्षण और संबंधों में संतुलन बढ़ाने में सहायक माना जाता है। शुभ धातुओं में चाँदी और प्लैटिनम का उल्लेख मिलता है, जो शुक्र की शीतलता और चमक का प्रतीक हैं।
अंकों में 6, 2, 7 और 1 तुला राशि के लिए शुभ माने जाते हैं। शुभ रंगों में सफेद, हल्का नीला, गुलाबी और क्रीम प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में सफेद वस्तुएँ जैसे चावल, चीनी, कपूर, मिश्री, सफेद चंदन और घी तुला राशि की शुभता बढ़ाने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
तुला जातकों को कलात्मक और सुंदर वातावरण स्वभाव से प्रिय होता है। इन्हें ऐसी जगह पसंद आती है जो सुसज्जित हो, जहाँ सजावट में सामंजस्य हो और हर वस्तु अपनी सही जगह पर रखी हो। एक साधारण कमरे को भी यदि सुंदरता से व्यवस्थित किया जाए तो ये सहज महसूस करते हैं।
इनके लिए शांतिपूर्ण और सौम्य माहौल बहुत महत्वपूर्ण होता है। जहाँ लगातार विवाद, ऊँची आवाज़ या चीखने चिल्लाने की ऊर्जा हो, वहाँ इनका मन थकने लगता है। तुला राशि ऐसी जगह पर फलती है जहाँ बातचीत सम्मानजनक हो और वातावरण में शांति का भाव हो।
सामाजिक रूप से तुला जातक सजीव और मित्रवत माहौल में सबसे अधिक खिलते हैं। ये अकेलेपन से दूर रहना पसंद करते हैं और अक्सर ऐसे स्थान चुनते हैं जहाँ मित्रों, सहकर्मियों या परिवार के साथ समय बिताया जा सके। पार्टी, गेट टुगेदर और सांस्कृतिक कार्यक्रम इनके लिए आकर्षक होते हैं, बशर्ते वहाँ सौम्यता बनी रहे।
इन्हें सुगंधित और आरामदायक वातावरण भी बहुत पसंद आता है। अच्छी खुशबू, अगरबत्ती, हल्का परफ्यूम और आरामदायक फर्नीचर इनकी ऊर्जा को सहज बनाते हैं। कमरे की रोशनी, पर्दों का रंग और हवा का प्रवाह भी ये ध्यान से महसूस करते हैं।
तुला जातक ऐसे कार्यक्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जो संतुलित और न्यायप्रिय हो। जहाँ नियम सबके लिए समान हों, पक्षपात न हो और लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता हो। ऐसे दफ्तर और संस्थान इनके लिए दीर्घकालिक रूप से अधिक अनुकूल रहते हैं।
तुला राशि को सामंजस्य के उस्ताद कहा जा सकता है। विवादों के बीच संतुलन और न्याय की तलाश करना इनकी सबसे बड़ी शक्ति है। ये जातक जन्मजात कूटनीतिज्ञ होते हैं जो शब्दों और व्यवहार के माध्यम से लोगों को एक दूसरे के करीब ला सकते हैं।
इनके भीतर एक अनुशासित सौंदर्य बसा होता है। बाहर से शुक्र की तरह सौम्य, आकर्षक और नरम, पर भीतर से शनि की तरह सिद्धांतों के प्रति दृढ़ और अनुशासित। इनका आंतरिक ढांचा स्पष्ट नियमों और मूल्यों पर टिका होता है।
तुला राशि के लिए रिश्ते केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जीवन का केंद्र होते हैं। इनका पूरा व्यक्तित्व स्वयं के अहंकार को थोड़ा पीछे रखकर दूसरों के साथ जुड़ने और समाज में सुंदरता तथा संतुलन भरने के लिए बना है। जहाँ भी तुला जातक होते हैं, वहाँ संवाद, सजावट और न्याय की चर्चा अवश्य दिखाई देती है।
तुला राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
तुला राशि का स्वामी ग्रह कौन है और यह क्या फल देता है
तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है, जो प्रेम, सौंदर्य, कला और भौतिक सुखों का कारक है और इसी कारण तुला जातकों के व्यक्तित्व में आकर्षण, सौम्यता और संबंधों के प्रति सजगता देखी जाती है।
तुला राशि किन शरीर अंगों और स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़ी है
यह बस्ती प्रदेश, गुर्दे, निचले पेट और यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी है और असंतुलन की स्थिति में कमर के निचले हिस्से तथा गुर्दों से संबंधित समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
तुला राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर आते हैं
चित्रा के दो पद, स्वाति के चारों पद और विशाखा के तीन पद तुला राशि में आते हैं और नाम अक्षर टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो माने जाते हैं।
तुला राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ माने जाते हैं
हीरा रत्न, सफेद, हल्का नीला, गुलाबी और क्रीम रंग तथा 6, 2, 7 और 1 अंक तुला राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
तुला राशि का जीवन दर्शन क्या माना जाता है
तुला राशि का जीवन दर्शन “मैं संतुलन बनाता हूँ” की भावना पर आधारित है जहाँ संबंधों, निर्णयों और वातावरण में न्याय, सौंदर्य और सामंजस्य बनाए रखना प्रमुख लक्ष्य होता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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