By पं. संजीव शर्मा
बृहस्पति दोष निवारण और जीवन में समृद्धि के लिए प्रभावशाली उपाय और सावधानियां

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर लिखा गया है। चंद्र राशि आपके जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होती है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए आपको अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान की आवश्यकता होती है। यह जानकारी वैदिक ज्योतिष में व्यक्तित्व विश्लेषण और उपायों का आधार है।
जल तत्व से संबंधित मीन राशि का स्वामी बृहस्पति ग्रह है और इसके कारक ग्रह सूर्य, मंगल और बृहस्पति हैं। यह राशि द्विस्वभाव या परिवर्तनशील प्रकृति की है और मीन लग्न की बाधक राशि वृषभ और बाधक ग्रह शुक्र है। लाल किताब के अनुसार मीन राशि को बारहवें भाव में स्थान दिया गया है जहां बृहस्पति के पक्के घर दूसरा, पांचवां, नौवां, ग्यारहवां और बारहवां माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष और लाल किताब दोनों ही इस राशि के जातकों के लिए विशेष उपाय और सावधानियां बताते हैं जो जीवन में समृद्धि और शांति लाने में सहायक होते हैं।
मीन राशि की आधारभूत संरचना इसके जातकों के जीवन पथ को निर्धारित करती है और उनके व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बृहस्पति देव |
| कारक ग्रह | सूर्य, मंगल और बृहस्पति |
| तत्व | जल तत्व |
| प्रकृति | द्विस्वभाव या चर राशि |
| बाधक राशि | वृषभ राशि |
| बाधक ग्रह | शुक्र |
| भाव स्थिति | बारहवां भाव |
| बृहस्पति के पक्के घर | दूसरा, पांचवां, नौवां, ग्यारहवां और बारहवां भाव |
बृहस्पति देव मीन राशि में अत्यंत शक्तिशाली होते हैं क्योंकि यह उनकी स्वयं की राशि है। यह स्थिति बृहस्पति की सबसे बलवान अवस्था मानी जाती है। मीन राशि में बृहस्पति का प्रभाव ज्ञान, आध्यात्मिकता, दर्शन और उच्च शिक्षा से गहराई से जुड़ा होता है। यह राशि कालपुरुष की कुंडली का बारहवां भाव है जो मोक्ष, त्याग, विदेश यात्रा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतिनिधित्व करता है।
लाल किताब वैदिक ज्योतिष के मौलिक सिद्धांतों पर आधारित एक अद्वितीय ग्रंथ है जो सरल और प्रभावी उपाय प्रदान करता है। इस ग्रंथ में मीन राशि को बारहवें भाव में स्थापित माना गया है जो व्यय, हानि, मोक्ष और आध्यात्मिक मुक्ति का भाव होता है। यह भाव विदेश यात्रा, अस्पताल, एकांतवास, दान और परोपकार से संबंधित है। लाल किताब के अनुसार बृहस्पति के पक्के घर दूसरा, पांचवां, नौवां, ग्यारहवां और बारहवां माने जाते हैं जो धन, संतान, भाग्य, लाभ और मोक्ष से जुड़े हैं।
कुंडली में बृहस्पति यदि अशुभ स्थिति में हो तो जातक के जीवन में अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
बृहस्पति की अशुभता का सीधा प्रभाव शरीर के वात दोष पर पड़ता है। वात संबंधी रोग बढ़ जाते हैं और पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। लीवर और अग्नाशय से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। मोटापा या अत्यधिक वजन बढ़ना भी बृहस्पति के प्रतिकूल होने का संकेत है।
बिना किसी कारण के शिक्षा रुक जाती है। अध्ययन में मन नहीं लगता और परीक्षाओं में असफलता मिलती है। ज्ञान प्राप्ति में बाधाएं आती हैं और उच्च शिक्षा अधूरी रह जाती है। धार्मिक ग्रंथों को समझने में कठिनाई होती है। गुरु या शिक्षक से संबंध खराब हो जाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश किया गया धन व्यर्थ चला जाता है।
| लक्षण | प्रभाव |
|---|---|
| स्वर्ण की हानि | सोना खो जाता है या चोरी हो जाता है |
| घर को क्षति | घर या संपत्ति को नुकसान पहुंचता है |
| मशीनरी की खराबी | यंत्र और उपकरण खराब होते रहते हैं |
| अनावश्यक व्यय | धन का अपव्यय और बेकार खर्च |
| ऋण का बोझ | कर्ज बढ़ता जाता है और चुकाना कठिन होता है |
व्यक्ति के बारे में अनावश्यक अफवाहें फैलती हैं। बिना किसी कारण के शत्रु बन जाते हैं। विश्वासघात का सामना करना पड़ता है। स्वप्न में सर्प दिखाई देते हैं। पिता, दादा या गुरु से संबंध खराब हो जाते हैं। धार्मिक स्थानों में जाने की इच्छा नहीं होती। आध्यात्मिक विश्वास कमजोर पड़ जाता है।
यदि बृहस्पति के शत्रु ग्रह दूसरे, पांचवें, नौवें या बारहवें भाव में हों या उसके साथ हों तो बृहस्पति कमजोर हो जाता है। बुध और शुक्र बृहस्पति के शत्रु ग्रह हैं। राहु भी बृहस्पति को कमजोर कर सकता है। जब ये ग्रह बृहस्पति के साथ या उसके घरों में हों तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बृहस्पति की अशुभता से बचने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मीन राशि के जातकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए।
कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। बृहस्पति सत्य और धर्म के देवता हैं और झूठ बोलने से उनका कोप बढ़ता है। हर परिस्थिति में सत्य का साथ देना चाहिए। व्यवहार में ईमानदारी रखनी चाहिए। धोखाधड़ी और कपट से दूर रहना चाहिए। वचन का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। जो कहें उसे पूरा अवश्य करें।
अपने ज्ञान पर अभिमान नहीं करना चाहिए। बृहस्पति ज्ञान के देवता हैं परंतु अहंकार को सहन नहीं करते। विनम्र रहकर अपना ज्ञान साझा करना चाहिए। दूसरों को नीचा न दिखाएं। सरल और सहज जीवन जीना चाहिए। अपनी उपलब्धियों का डींग नहीं मारना चाहिए। विद्वता का प्रदर्शन करने की बजाय सेवा करनी चाहिए।
| आचरण | महत्व |
|---|---|
| पवित्र जीवन | शुद्ध विचार और कर्म रखना |
| नैतिकता | धर्म के मार्ग पर चलना |
| संयम | इंद्रियों पर नियंत्रण रखना |
| त्याग | लोभ और मोह से मुक्त रहना |
अपने आचरण को शुद्ध रखना अत्यंत आवश्यक है। अनैतिक कार्यों से दूर रहें। ब्रह्मचर्य का यथासंभव पालन करें। मांस और मदिरा से परहेज करें। पवित्र और सात्विक जीवन जीने का प्रयास करें। बुरी संगति से बचें।
पिता, दादा और गुरु का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। इनका आशीर्वाद बृहस्पति को प्रसन्न करता है। गुरु की सेवा करनी चाहिए। पिता के प्रति समर्पण भाव रखना चाहिए। दादा दादी और बुजुर्गों का आदर करना चाहिए। शिक्षकों और मार्गदर्शकों का सम्मान करना चाहिए। इनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना शुभ है।
धार्मिक स्थलों, धार्मिक शास्त्रों, देवी देवताओं का अपमान नहीं करना चाहिए। मंदिरों और पूजा स्थलों को पवित्र मानें। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और उनका सम्मान करें। नास्तिकों और नास्तिकता से दूर रहना चाहिए। आस्तिक जीवन जीना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना चाहिए। प्रार्थना और पूजा नियमित रूप से करनी चाहिए।
लाल किताब में मीन राशि के जातकों के लिए अनेक सरल और प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं।
पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाना अत्यंत शुभफलदायी है। प्रतिदिन प्रातःकाल पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए। गुरुवार को विशेष रूप से पीपल की पूजा करनी चाहिए। पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। पीपल के वृक्ष की जड़ों में दूध और जल चढ़ाना शुभ है। यदि संभव हो तो घर के उत्तर दिशा में पीपल का वृक्ष लगाना चाहिए।
यदि संभव हो तो किसी योग्य व्यक्ति को अपना गुरु बनाना चाहिए। गुरु की सेवा करना बृहस्पति को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम उपाय है। गुरु के आदेशों का पालन करना चाहिए। गुरु दक्षिणा देनी चाहिए। गुरुवार को गुरु के दर्शन करने चाहिए। गुरु के चरणों की धूल लेकर माथे पर लगानी चाहिए। सच्चे गुरु के आशीर्वाद से जीवन में सभी बाधाएं दूर होती हैं।
घर में नियमित रूप से धूप बत्ती और दीपक जलाना चाहिए। प्रातःकाल और सायंकाल पूजा स्थल पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ है। गुरुवार को विशेष रूप से घी के दीपक जलाने चाहिए। धूप की सुगंध घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। अगरबत्ती या धूप की लकड़ी का उपयोग करना चाहिए। चंदन की धूप विशेष रूप से लाभकारी है।
गीता का पाठ करना या कृष्ण भगवान का नाम जपना अत्यंत फलदायी है। प्रतिदिन गीता के कुछ श्लोकों का पाठ करना चाहिए। हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करना चाहिए। गुरुवार को पूर्ण गीता का पाठ करना विशेष शुभ है। कृष्ण भगवान की मूर्ति या तस्वीर घर में रखनी चाहिए। भगवद गीता को पवित्र स्थान पर रखना चाहिए।
| उपाय | विधि | लाभ |
|---|---|---|
| हल्दी की गांठ | घर में रखना | सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि |
| हल्दी का तिलक | माथे पर लगाना | बृहस्पति की कृपा |
| हल्दी दान | गुरुवार को दान करना | धन वृद्धि |
| हल्दी का पानी | स्नान में उपयोग | शुद्धिकरण |
घर में हल्दी की गांठ रखना अत्यंत शुभफलदायी है। हल्दी को पीले कपड़े में लपेटकर पूजा स्थल में रखना चाहिए। प्रतिदिन माथे पर हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। गुरुवार को हल्दी दान करना विशेष लाभकारी है।
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए अनेक पारंपरिक और शक्तिशाली उपाय बताए गए हैं।
बृहस्पति के बीज मंत्र का नियमित जाप करना अत्यंत लाभकारी है। गुरुवार को या बृहस्पति नक्षत्र में ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करना चाहिए। बृहस्पति स्तोत्र और बृहस्पति चालीसा का पाठ भी अत्यंत फलदायी है। बृहस्पति महामंत्र देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसन्निभम् बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् का जाप करने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।
बृहस्पति भगवान विष्णु के देवता हैं इसलिए विष्णु की उपासना अत्यंत लाभकारी है। गुरुवार को विष्णु भगवान की विशेष पूजा करनी चाहिए। तुलसी के पत्ते अर्पित करना शुभ है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। नारायण मंत्र ॐ नमो नारायणाय का जाप करना चाहिए। गुरुवार का व्रत रखना और पीले वस्त्र धारण करना फलदायी है।
केले के वृक्ष को बृहस्पति का पवित्र वृक्ष माना जाता है। गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। केले के वृक्ष पर जल चढ़ाना और हल्दी का तिलक लगाना शुभ है। केले के वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए। केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना लाभकारी है। केले का दान करना भी शुभफलदायी है।
गुरुवार को पीले रंग की वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभफलदायी है। पीले वस्त्र, हल्दी, चना दाल, पीली मिठाई और पीले फूलों का दान करना चाहिए। गरीब ब्राह्मणों को पीले वस्त्र दान करने से विशेष लाभ होता है। सोने का दान करना भी बृहस्पति को प्रसन्न करता है परंतु यह महंगा उपाय है। यदि संभव हो तो पीले सफायर या पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।
घर की दिशा और वास्तु का बृहस्पति पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
यदि घर का मुख पश्चिम या उत्तर दिशा में हो तो सर्वोत्तम है। पश्चिम मुखी घर बृहस्पति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा धन और समृद्धि की दिशा है। यदि घर दक्षिण या पूर्व मुखी हो तो वास्तु दोष निवारण के उपाय करने चाहिए। घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का चिह्न लगाना शुभ है।
घर में जल टंकी को उत्तर पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में रखना चाहिए। यह दिशा बृहस्पति की दिशा है। ईशान कोण में जल का भंडारण शुभफलदायी होता है। इस दिशा में जल टंकी रखने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है। जल सदैव स्वच्छ और शुद्ध रखना चाहिए। जल टंकी के पास पीपल का पौधा लगाना शुभ है।
यदि बृहस्पति अत्यंत खराब हो या शीघ्र सुधार की आवश्यकता हो तो घर के उत्तर दिशा में पीपल का वृक्ष लगाना चाहिए। यह अत्यंत शक्तिशाली उपाय है। पीपल के वृक्ष की नियमित देखभाल करनी चाहिए। वृक्ष लगाते समय विधिवत पूजन करना चाहिए। पीपल के वृक्ष को कभी काटना नहीं चाहिए। इसकी पूजा करते रहना चाहिए।
घर में पूजा स्थल की स्वच्छता रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। मंदिरों और पवित्र स्थानों की सफाई में भाग लेना शुभ है। घर को अव्यवस्थित नहीं रखना चाहिए। अनावश्यक सामान घर से निकाल देना चाहिए। सकारात्मक ऊर्जा के लिए घर में सुगंधित धूप जलानी चाहिए।
लाल किताब में मीन राशि के लिए कुछ अनूठे और विशिष्ट उपाय बताए गए हैं।
अपने बनियान या कमीज के सामने की ओर लाल स्वस्तिक का चिह्न बनाना, रंगना या उभारना अत्यंत शुभफलदायी है। स्वस्तिक मंगल और समृद्धि का प्रतीक है। लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है। यह उपाय नियमित रूप से करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। स्वस्तिक का आकार स्पष्ट और सुंदर होना चाहिए।
किसी के सामने स्नान नहीं करना चाहिए। एकांत में स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के समय पूर्ण गोपनीयता रखनी चाहिए। यह उपाय व्यक्तिगत गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा है। सार्वजनिक स्थानों पर स्नान करने से बचना चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
यदि सिर मुंडवाते हैं तो हमेशा चोटी रखनी चाहिए। चोटी सिर के पीछे की ओर बाल का एक छोटा और लंबा गुच्छा होता है जो अनेक भारतीय धार्मिक अनुष्ठानों का सामान्य भाग है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक है। पूर्णतः गंजा होना शुभ नहीं माना जाता। केशों की उचित देखभाल करनी चाहिए।
मंदिर में वस्त्र दान करना या चढ़ाना अत्यंत शुभ है। खाने की वस्तुओं को प्रसाद के रूप में चढ़ाने से बचना चाहिए। वस्त्र दान अधिक लाभकारी है। पीले रंग के वस्त्र दान करना विशेष फलदायी है। गरीबों और जरूरतमंदों को वस्त्र देना भी शुभ है। पुराने वस्त्रों को दान करना कल्याणकारी होता है।
घर में तुलसी का पौधा नहीं रखना चाहिए। यह मीन राशि के लिए विशेष सलाह है। हालांकि तुलसी पवित्र मानी जाती है परंतु लाल किताब के अनुसार मीन राशि वालों के लिए यह उपयुक्त नहीं है। यदि पहले से है तो उसे किसी मंदिर में दान कर देना चाहिए। तुलसी की पूजा बाहर मंदिरों में करनी चाहिए।
बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है।
गुरुवार को बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। हल्दी, चना दाल, पीले वस्त्र, पीली मिठाई, केला, किताबें और धार्मिक ग्रंथों का दान करना शुभ है। गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री दान करना विशेष फलदायी है। ब्राह्मणों को दान देना बृहस्पति को प्रसन्न करता है। सोना या पीला सफायर दान करना भी शुभ है परंतु अपनी क्षमता के अनुसार ही दान करें।
दैनिक वेतन भोगी मजदूरों की सहायता करना अत्यंत शुभफलदायी है। इन्हें भोजन कराना या धन देना लाभकारी है। मजदूरों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। इनका शोषण नहीं करना चाहिए। उचित वेतन देना और समय पर भुगतान करना आवश्यक है। इनकी कठिनाइयों को समझना और सहायता करना बृहस्पति को प्रसन्न करता है।
मुर्गियों को अन्न खिलाना शुभफलदायी है। नियमित रूप से मुर्गियों या अन्य पक्षियों को दाना डालना चाहिए। पक्षियों के लिए पानी का प्रबंध करना चाहिए। गुरुवार को विशेष रूप से पक्षियों को खिलाना लाभकारी है। गेहूं और चना मुर्गियों को खिलाने के लिए उपयुक्त हैं।
कौवों को बिस्कुट खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रतिदिन प्रातःकाल कौवों को बिस्कुट या रोटी देनी चाहिए। कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है। इन्हें भोजन देने से पितृ दोष भी दूर होता है। कौवों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। इन्हें भगाना नहीं चाहिए।
सामाजिक व्यवहार और संबंधों का बृहस्पति पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
अतिथियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना अत्यंत आवश्यक है। अतिथि देवो भव का सिद्धांत अपनाना चाहिए। घर आए अतिथियों का स्वागत सत्कार करना चाहिए। उन्हें भोजन कराना और आराम प्रदान करना शुभ है। अतिथियों को सम्मान से विदा करना चाहिए। अतिथि सेवा से बृहस्पति अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
अपने पुत्र और भतीजे के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहिए। इनसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। इनकी शिक्षा और विकास में रुचि लेनी चाहिए। इनके साथ समय बिताना और मार्गदर्शन देना शुभ है। परिवार में सद्भाव बनाए रखना बृहस्पति को प्रसन्न करता है।
| क्षेत्र | लाभ |
|---|---|
| व्यवसाय | पत्नी की सलाह लेना लाभकारी |
| निर्णय | पत्नी के विचार महत्वपूर्ण |
| निवेश | पत्नी की राय से सफलता |
| संबंध | वैवाहिक सद्भाव |
यदि व्यवसाय में हैं तो पत्नी की सलाह लेना लाभकारी है। महत्वपूर्ण निर्णयों में पत्नी के विचार पूछना चाहिए। पत्नी का सम्मान करना और उसकी बात सुनना बृहस्पति को प्रसन्न करता है। वैवाहिक जीवन में सद्भाव बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
लाल किताब में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं जो अत्यंत प्रभावशाली हैं।
सोने को पीले रंग के कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए। यह उपाय धन वृद्धि के लिए विशेष फलदायी है। पीला रंग बृहस्पति का रंग है। सोना सूर्य का धातु है। दोनों का संयोग शुभ फल देता है। सोने के आभूषण पीले कपड़े में रखकर तिजोरी में रखने चाहिए। गुरुवार को इस उपाय को करना विशेष लाभकारी है।
घर के सामने कभी गड्ढा नहीं होना चाहिए। यदि है तो उसे भरवा देना चाहिए। घर के सामने गड्ढा वास्तु दोष है और यह बृहस्पति को कमजोर करता है। समतल भूमि शुभफलदायी है। घर के आसपास स्वच्छता रखनी चाहिए। पानी का भराव नहीं होना चाहिए।
नियमित रूप से किसी धार्मिक स्थान पर जाकर पूजा करनी चाहिए। मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च या किसी भी धार्मिक स्थान पर जाकर प्रार्थना करना शुभ है। तीर्थ यात्रा करना अत्यंत फलदायी है। वाराणसी, बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम और द्वारका जैसे पवित्र स्थानों की यात्रा करनी चाहिए। धार्मिक स्थलों पर दान करना भी शुभ है।
अपने भाग्य और स्वयं पर सदैव विश्वास रखें। किसी से दान स्वीकार नहीं करना चाहिए। यह मीन राशि के लिए विशेष सलाह है। आत्मनिर्भर रहना और अपने परिश्रम से जीना शुभ है। दूसरों की दया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। स्वाभिमान बनाए रखना आवश्यक है।
गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित है और इस दिन किए गए उपाय विशेष फलदायी होते हैं।
गुरुवार को व्रत रखना अत्यंत शुभफलदायी है। इस दिन केवल एक समय भोजन करना चाहिए। पीले रंग का भोजन करना शुभ है। चने की दाल, पीली मिठाई, केला और हल्दी युक्त भोजन लेना चाहिए। व्रत में नमक का त्याग करना और भी अधिक लाभकारी है। सायंकाल विष्णु भगवान की आरती करनी चाहिए।
गुरुवार को केले का विशेष महत्व है। इस दिन केले का सेवन करना शुभ है। केले को भोग लगाना चाहिए। केले का दान करना लाभकारी है। केले के पत्ते पर भोजन करना पवित्र माना जाता है। केले के फूल और फल दोनों का उपयोग पूजा में किया जा सकता है।
गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र पहनना चाहिए। स्त्रियां पीली साड़ी पहन सकती हैं। पुरुष पीला कुर्ता या शर्ट पहन सकते हैं। पीले रंग के आभूषण धारण करना शुभ है। सोने के आभूषण विशेष रूप से लाभकारी हैं। पीली पगड़ी या स्कार्फ भी पहन सकते हैं।
बृहस्पति से संबंधित आहार और जीवनशैली का पालन करने से ग्रह दोष कम होते हैं।
शुद्ध और सात्विक भोजन करना बृहस्पति को प्रसन्न करता है। मांस और मदिरा से पूर्ण परहेज करना चाहिए। लहसुन और प्याज से भी बचना चाहिए। ताजा और घर का बना भोजन करना चाहिए। फल और सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। दूध और दूध से बने पदार्थ लाभकारी हैं। घी का सेवन शुभ है।
| खाद्य पदार्थ | लाभ |
|---|---|
| चने की दाल | बृहस्पति को प्रसन्न करना |
| हल्दी | स्वास्थ्य और शुद्धि |
| केला | ऊर्जा और पोषण |
| बेसन | पाचन और पोषण |
| पीली मिठाई | मिठास और समृद्धि |
गुरुवार को विशेष रूप से पीली वस्तुओं का सेवन करना चाहिए। चने की दाल की खिचड़ी बनाना और खाना शुभ है। हल्दी का भोजन में उपयोग करना चाहिए। पीली मिठाई जैसे बूंदी के लड्डू या मोतीचूर के लड्डू खाना लाभकारी है।
नियमित दिनचर्या बनाना और उसका पालन करना चाहिए। प्रातःकाल जल्दी उठना शुभ है। स्नान करके पूजा करनी चाहिए। नियमित व्यायाम और योग करना चाहिए। समय का सदुपयोग करना चाहिए। आलस्य से बचना चाहिए। रात्रि में जल्दी सोना चाहिए।
लाल किताब के उपाय कितने दिन करने चाहिए
लाल किताब के अधिकांश उपाय नियमित और निरंतर करने चाहिए। कुछ उपाय इक्कीस दिन, चालीस दिन या एक सौ आठ दिन तक करने से विशेष फल मिलता है। गुरुवार के उपाय हर गुरुवार को करते रहना चाहिए।
बृहस्पति को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है
बृहस्पति को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय सत्य बोलना, गुरु और पिता का सम्मान करना और गुरुवार को पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाना है। नियमित रूप से विष्णु भगवान का स्मरण करना भी अत्यंत लाभकारी है।
क्या पुखराज रत्न धारण करना सुरक्षित है
पुखराज रत्न धारण करने से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। यदि बृहस्पति शुभ स्थिति में हो तो पुखराज धारण करना लाभकारी है। गुरुवार को शुभ मुहूर्त में पुखराज धारण करना चाहिए।
मीन राशि में तुलसी का पौधा क्यों नहीं रखना चाहिए
लाल किताब के अनुसार मीन राशि के जातकों के लिए तुलसी का पौधा घर में रखना उपयुक्त नहीं है। यह इस राशि की विशेष संरचना से जुड़ा है। तुलसी की पूजा बाहर मंदिरों में करनी चाहिए।
बृहस्पति की कमजोरी के मुख्य लक्षण क्या हैं
शिक्षा में बाधा, धन की हानि, सोना खोना, पिता से संबंध खराब होना, धार्मिक विश्वास में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं बृहस्पति की कमजोरी के मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों को देखकर उपाय आरंभ करने चाहिए।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
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