By पं. नरेंद्र शर्मा
मीन राशि के ग्रह, नक्षत्र, अंग और शुभ रत्नों की जानकारी

मीन राशि का नाम आते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि बनती है जो बाहर से बहुत शांत दिखता है, लेकिन भीतर अनगिनत दुनिया, भावनाएँ और अनुभूतियाँ बहती रहती हैं। जैसे सागर की लहरें ऊपर से सरल लगती हैं, पर उसकी गहराई में अनंत जीवन और रहस्य छिपे रहते हैं, वैसा ही मीन जातक अक्सर दिखाई देते हैं। इन्हें समझने के लिए केवल आँखों से देखना पर्याप्त नहीं होता, इनके हृदय की धड़कन और मौन को महसूस करना पड़ता है।
कई बार अचानक यह जानने की आवश्यकता पड़ती है कि मीन राशि का स्वामी ग्रह कौन है, कौन से नक्षत्र इसमें आते हैं, शरीर के किन अंगों पर इसका विशेष प्रभाव रहता है या मीन राशि के लिए कौन सा रत्न शुभ माना जाता है। ऐसे समय पर अलग अलग स्रोतों में खोज करने की बजाय यदि मीन राशि का संपूर्ण ज्योतिषीय डेटा एक ही स्थान पर व्यवस्थित मिल जाए तो समझना सरल हो जाता है। यह लेख उसी उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि जब भी मीन राशि से जुड़ी कोई सूक्ष्म या तकनीकी जानकारी चाहिए हो, इसे सीधे यहाँ से देखा जा सके।
मीन राशि को पूर्णता का प्रतीक कहा जाता है। इस राशि में बाकी सभी 11 राशियों का अनुभव किसी न किसी रूप में समाहित होता है। इसीलिए मीन जातक बहुत गहराई से महसूस करने वाले, सहानुभूति से भरे और जीवन के विविध अनुभवों को समझने वाले माने जाते हैं। इन्हें देखा जाए तो यह एक प्रकार की पूर्ण आत्मा की ऊर्जा है, जो हर भाव को स्वीकार करना जानती है।
इस राशि में ईश्वरीय प्रेम की भी विशेष बात है। यहाँ शुक्र परम उच्च के माने जाते हैं, क्योंकि मीन में प्रेम केवल आकर्षण तक सीमित नहीं रहता। यह प्रेम धीरे धीरे आध्यात्मिक भक्ति, समर्पण और निस्वार्थ करुणा में बदल जाता है। मीन जातक के प्रेम में किसी को बचाने, सहारा देने और भीतर से उठाने की क्षमता दिखाई देती है।
मीन राशि अक्सर तर्क से परे काम करती है। जहाँ पर बुध की बुद्धि, गणित और तर्क की सीमाएँ समाप्त होती हैं, वहीं से मीन की दिव्य दृष्टि और पूर्वाभास शुरू होता है। कई बार इन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के पहले से आभास हो जाता है कि कोई स्थिति कैसी होने वाली है। यह क्षमता इन्हें भीतर से मार्गदर्शन देने लगती है।
मीन कालपुरुष का पैर है। पैर वह हिस्सा है जो पूरे शरीर का भार उठाता है। उसी तरह मीन राशि में संसार के दुखों का बोझ उठाने, उसे समझने और अपने तरीके से उसे हल्का करने की शक्ति होती है। ये लोग अक्सर दूसरों की पीड़ा सुनकर अंदर तक प्रभावित हो जाते हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार सहारा देने की कोशिश करते हैं।
मीन को दो लोकों का स्वामी भी कहा जा सकता है। मीन जातक एक साथ इस भौतिक जगत और सूक्ष्म आध्यात्मिक लोक दोनों में जीने की क्षमता रखते हैं। एक ओर यह दुनिया के कार्य, रिश्ते और जिम्मेदारियाँ निभाते हैं, तो दूसरी ओर भीतर किसी अदृश्य दुनिया से लगातार संवाद भी चलता रहता है।
मीन राशि को कालपुरुष की बंद आँखों से जोड़ा जाता है। यह ईश्वर की निद्रा या गहरे ध्यान की अवस्था का संकेत है। इसका अर्थ यह है कि मीन जातक दुनिया को केवल खुली आँखों से नहीं देखते बल्कि अपनी अंतरात्मा की बंद आँखों से भी देखते हैं। यह दृष्टि बाहरी चमक दमक से आगे बढ़कर सीधे सच्चाई के करीब पहुँच जाती है।
राशि चक्र में मीन राशि शून्य की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। जैसे गणित में शून्य के बिना कोई गणना पूर्ण नहीं होती, वैसे ही जीवन के चक्र में भी मीन की ऊर्जा के बिना यात्रा अधूरी रहती है। यह वह मौन स्थान है जहाँ सब कुछ समाप्त होता हुआ भी लगता है और वहीं से एक नए आरंभ की संभावना भी चुपचाप जन्म ले रही होती है।
मीन जातक को एकांत का सम्राट भी कहा जा सकता है। भीड़ के बीच ये प्रायः थक जाते हैं, लेकिन अकेले अपने भीतर की दुनिया में ये सबसे अधिक शक्तिशाली महसूस करते हैं। उनके लिए एकांत कोई कमी नहीं बल्कि एक प्रकार का तपोवन होता है जहाँ वे स्वयं से और ईश्वर से गहरा संवाद कर पाते हैं।
मीन का संस्कृत नाम मीन ही है, जिसका अर्थ मछली है। मछली जल में स्वतंत्रता से तैरती है और पानी के प्रवाह के साथ सहज रूप से चलती रहती है। यह प्रतीक मीन जातक की संवेदनशील, लचीली और भावप्रवण प्रकृति को दर्शाता है।
मीन राशि का चिह्न विपरीत दिशाओं में तैरती दो मछलियाँ हैं। यह आत्मा और माया के द्वंद्व को दर्शाता है। एक मछली आध्यात्मिक उन्मुक्ति की ओर बढ़ती है, दूसरी सांसारिक जिम्मेदारियों और मोह की ओर खिंचती है। यही द्वंद्व मीन जातक के भीतर अक्सर देखा जा सकता है।
राशि क्रम में मीन बारहवीं राशि है। यह मोक्ष, अंतर्ज्ञान, करुणा और अनंत से जुड़ी मानी जाती है। कालपुरुष कुंडली में मीन वह स्थान है जो आध्यात्मिक उत्थान, विसर्जन और ईश्वरीय कृपा का आधार है। यह अंतर्मन की गहराई और ब्रह्मांडीय चेतना के मिलन की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है।
मीन राशि के जातक केवल स्वप्न देखने वाले नहीं होते। इन में निस्वार्थ करुणा और असीम अंतर्ज्ञान की शक्ति होती है। यह मानवता के सबसे गहरे दुखों को भीतर से महसूस करके उन्हें शांत करने की क्षमता रखते हैं, भले ही अक्सर चुपचाप और बिना शोर के।
मीन राशि को सबसे अधिक सुकून जल के सानिध्य में मिलता है। नदी का किनारा, समुद्र तट या किसी झील का शांत जल इनकी प्राण ऊर्जा को पुनर्जीवित कर देता है। बहता हुआ जल इनके भीतर की भावनाओं को भी संचालित और संतुलित करने में मदद करता है।
इनके लिए एकांत का तपोवन बहुत आवश्यक होता है। घर का कोई शांत कोना, छोटा कमरा, पूजा स्थल या ध्यान के लिए बना स्पेस जहाँ बाहरी शोर थमकर अंतर्मन की आवाज़ सुनी जा सके, इन्हें भीतर से मजबूत बनाता है।
मीन जातक को कलात्मक शुचिता वाला माहौल भी पसंद आता है। जहाँ सौंदर्य, कला, संगीत, सुगंध और आध्यात्मिकता का हल्का स्पर्श हो। ऐसा वातावरण इन्हें मानसिक पूर्णता देता है और उनकी रचनात्मक ऊर्जा को जागृत करता है।
इनके लिए मौन की शक्ति भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। इन्हें ऐसे स्थान पसंद होते हैं जहाँ शब्द कम, पर सकारात्मक ऊर्जा अधिक हो। जहाँ बैठे बैठे होने से ही मन शांत हो जाए और भीतर प्रार्थना जैसी भावना जागृत होने लगे।
इसके साथ साथ अनंत आकाश वाला खुला स्थान भी मीन राशि को गहराई से आकर्षित करता है। कोई छत, बालकनी या ऊँचा स्थान जहाँ से आकाश और दूर तक फैलती क्षितिज की रेखाएँ दिखें, इनकी दिव्य कल्पनाओं को सांसारिक सीमाओं से मुक्त महसूस कराती हैं।
मीन राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। बृहस्पति ज्ञान, धर्म, विस्तार और कृपा के कारक माने जाते हैं। इस कारण मीन जातक आध्यात्मिक रुचि, मार्गदर्शन, विश्वास और दिव्य कृपा के अनुभव के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित रहते हैं।
स्वामी देवताओं में मीन राशि पर विशेष रूप से भगवान विष्णु और वरुण की कृपा मानी जाती है। विष्णु संरक्षण, पालन और संतुलन के देवता हैं। वरुण जल देवता हैं, जो अनंत जल राशि, गहराई और अदृश्य लोकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह संयोजन मीन जातक की करुणा, रक्षा की भावना और गहराई से जुड़ा हुआ है।
तत्त्व की दृष्टि से मीन जल तत्व की राशि है। जल का स्वभाव प्रवाह, गहराई, भावनात्मकता और समावेश से जुड़ा हुआ है। मीन जातक भी अपने आसपास के वातावरण और लोगों की भावनाओं को गहराई से सोख लेते हैं। इनके भीतर अनंत और अथाह ऊर्जा का स्रोत छिपा रहता है।
स्वभाव के स्तर पर मीन द्विस्वभाव राशि है। यह लचीलापन, समायोजन और दोनों दिशाओं के बीच संतुलन साधने की क्षमता को दर्शाती है। इसी कारण मीन जातक परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की अद्भुत क्षमता रखते हैं, हालांकि कभी कभी निर्णय में उलझ भी सकते हैं।
गुण की दृष्टि से मीन सत्त्वगुणी मानी जाती है। सत्त्व का संबंध शुद्धता, ज्ञान, आस्था और ऊँची सोच से है। इस कारण मीन जातक के भीतर आध्यात्मिकता, सद्भावना और निस्वार्थ सेवा का बीज स्वाभाविक रूप से उपस्थित रहता है।
लिंग के रूप में मीन स्त्री राशि है। यह ग्रहणशील, कोमल और संवेदनशील ऊर्जा का संकेत है। जाति की दृष्टि से मीन को ब्राह्मण समान माना गया है, जो आध्यात्मिक, ज्ञानशील और मार्गदर्शक भूमिका में सहज महसूस करते हैं।
दिशा के रूप में मीन राशि उत्तर दिशा से जुड़ी है। उत्तर दिशा को स्थिरता, ध्रुव तारा, मार्गदर्शन और उच्च ध्येय की दिशा माना जाता है। यह संकेत देता है कि मीन जातक के भीतर किसी ऊँचे आदर्श की ओर आगे बढ़ने की आंतरिक प्रेरणा रहती है।
शरीर के अंगों में मीन राशि पैरों और तलवों से संबंधित है। पैर वह हिस्सा है जो व्यक्ति को आगे बढ़ाता है, यात्रा कराता है और खड़ा रहने की सामर्थ्य देता है। मीन की ऊर्जा जीवन यात्रा के अंतिम चरणों और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का प्रतीक भी है।
प्रकृति की दृष्टि से मीन राशि कफ प्रधान कही गई है। कफ शीतलता, स्थिरता, तरलता, सूजन और भारीपन से जुड़ा होता है। असंतुलन की स्थिति में आलस्य, सूजन, सर्दी और शरीर में भारीपन जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।
इन सभी बातों को संक्षेप में देखने के लिए यह सारणी उपयोगी है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बृहस्पति |
| स्वामी देवता | विष्णु, वरुण |
| तत्त्व | जल |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| गुण | सत्त्वगुणी |
| लिंग | स्त्री |
| जाति | ब्राह्मण समान |
| दिशा | उत्तर |
| शरीर का अंग | पैर, तलवे |
| प्रकृति | कफ प्रधान |
मीन राशि उभयोदय है। उभयोदय का अर्थ है कि यह दोनों ओर से उदय होने वाली राशि है। इसका गहरा संकेत यह है कि मीन जातक जीवन के सुख और वैराग्य, दोनों ध्रुवों को एक साथ समझने का सामर्थ्य रखते हैं। इन्हें संसार भी खींचता है और ईश्वर भी और ये दोनों के बीच संतुलन साधने की यात्रा पर होते हैं।
शक्ति काल के स्तर पर मीन रात्रि बली है। रात के समय इसकी ऊर्जा अधिक सक्रिय और गहरी मानी जाती है। कई मीन जातक रात में अधिक सृजनशील, भावुक या आध्यात्मिक रूप से जाग्रत महसूस करते हैं।
वश्य वर्गीकरण में मीन जलचर श्रेणी में आती है। इसका अर्थ है कि यह राशि भावनाओं, संवेदनाओं और अंतर्ज्ञान के प्रवाह में काम करने वाली है। मीन जातक परिस्थितियों की सतह से अधिक उनकी भावनात्मक गहराई पर ध्यान देते हैं।
कद की दृष्टि से मीन जातकों का कद प्रायः ह्रस्व या अपेक्षाकृत छोटा माना गया है, हालांकि यह सार्वभौमिक नियम नहीं। इनके शरीर में नरमी और लचीलेपन का भाव अक्सर देखा जा सकता है।
शब्द की दृष्टि से मीन की आवाज़ अक्सर मृदु और शांत होती है। ये ऊँची आवाज़ में या कठोर शब्दों में बात करने से बचते हैं। इनके शब्दों में करुणा, संवेदना और एक तरह की मुलायम लय महसूस की जा सकती है।
प्राणी श्रेणी में मीन जलचर वर्ग की राशि है। प्रजनन क्षमता के स्तर पर इसे बहुप्रज यानी अधिक प्रजनन क्षमता वाली राशि माना जाता है।
मीन राशि का विस्तार राशि चक्र में तीन सौ तीस डिग्री से तीन सौ साठ डिग्री तक माना जाता है। यह वह अंतिम खंड है जहाँ सारे अनुभव, यात्राएँ और परीक्षाएँ समापन की ओर बढ़ती हैं और एक नए आरंभ की तैयारी भी साथ साथ चलती है।
वर्ण के रूप में मीन राशि का रंग श्वेत और मछली जैसा सिलवरी या सफेद माना गया है। यह रंग पवित्रता, कोमलता, संवेदनशीलता और आध्यात्मिक प्रकाश का प्रतीक हैं।
मीन में शुक्र उच्च के माने जाते हैं। यहाँ प्रेम, सुंदरता, कला और सौंदर्यबोध अपना सबसे शुद्ध और आध्यात्मिक रूप ले लेते हैं। इस राशि में प्रेम प्रायः भक्ति, त्याग और सेवा के रूप में प्रकट होता है।
इसी राशि में बुध नीच के माने जाते हैं। नीचता का अर्थ यह नहीं कि बुध की ऊर्जा बेकार हो जाती है बल्कि यह कि शुद्ध तर्क, विश्लेषण और सूखी बुद्धि यहाँ उतनी सहजता से फलदायी नहीं रहती। यहाँ अंतर्ज्ञान और विश्वास की भूमिका अधिक होती है।
मीन में किसी भी ग्रह का मूलत्रिकोण नहीं है, क्योंकि बृहस्पति का मूलत्रिकोण धनु में माना जाता है। ग्रह मैत्री की दृष्टि से मीन के स्वामी गुरु के लिए मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्रमा और मंगल हैं। शत्रु ग्रह बुध और शुक्र हैं, जबकि तटस्थ ग्रह के रूप में शनि आता है।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 330° से 360° |
| वर्ण | श्वेत, सिलवरी |
| उच्च ग्रह | शुक्र |
| नीच ग्रह | बुध |
| मूलत्रिकोण | कोई नहीं |
| मित्र ग्रह | सूर्य, चन्द्रमा, मंगल |
| शत्रु ग्रह | बुध, शुक्र |
| तटस्थ ग्रह | शनि |
मीन राशि के भीतर तीन प्रमुख नक्षत्रों के पद आते हैं। सबसे पहले पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का अंतिम पद मीन राशि में स्थित होता है। इसके बाद उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के चारों पद पूरी तरह मीन में हैं। अंत में रेवती नक्षत्र के चारों पद भी इसी राशि में आते हैं। इस प्रकार मीन राशि में कुल नौ पद शामिल होते हैं।
नक्षत्र स्वामियों में पूर्वभाद्रपद का स्वामी बृहस्पति है। यह उच्च ज्ञान, वैराग्य, गहन आध्यात्मिकता और तपस्या की ओर संकेत करता है। उत्तरभाद्रपद का स्वामी शनि है, जो गहरी स्थिरता, धैर्य, रहस्य और भीतर की साधना का प्रतिनिधि है। रेवती का स्वामी बुध है, जो यात्राओं, मार्गदर्शन, कोमल अभिव्यक्ति और रक्षा की ऊर्जा से जुड़ा हुआ है।
नाम अक्षरों के रूप में मीन राशि के लिए दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची माने गए हैं। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम सामान्यतया मीन राशि या इसके नक्षत्रों से संबंधित माने जाते हैं।
| नक्षत्र | पद | नाम अक्षर | नक्षत्र स्वामी |
|---|---|---|---|
| पूर्वभाद्रपद | 1 पद | दी, दू | बृहस्पति |
| उत्तरभाद्रपद | 4 पद | थ, झ, ञ, दे | शनि |
| रेवती | 4 पद | दो, चा, ची | बुध |
कालपुरुष के शरीर में मीन राशि पैरों से संबंधित मानी जाती है। पैर पूरे शरीर का भार उठाते हैं और दिशा तय करने में मदद करते हैं। जीवन की यात्रा के अंतिम चरणों और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का संकेत भी इसी भाग से जुड़ा है।
संवेदनशील अंगों में मीन राशि का संबंध लसीका प्रणाली, आँखों, नींद और पैरों से माना जाता है। लसीका तंत्र शरीर के तरल संतुलन, सूजन और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा होता है। अधिक भावनात्मक बोझ, तनाव या असंतुलित जीवनशैली की स्थिति में सूजन, थकान, आँखों में heaviness या नींद के पैटर्न में बदलाव दिख सकते हैं।
प्रकृति के स्तर पर मीन जातक प्रायः भावुक, दयालु, कल्पनाशील और अंदर से थोड़े रहस्यमयी होते हैं। इनके लिए कल्पना, संगीत, कला और आध्यात्मिकता जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
शारीरिक बनावट में मीन जातकों का शरीर अक्सर मांसल, आँखें बड़ी और चमकदार और चेहरा सौम्य दिखाई देता है। इनके चेहरे पर कोमलता और आँखों में गहरी संवेदना साफ देखी जा सकती है।
मीन राशि की विशेष दृष्टि कन्या पर पूर्ण सातवीं दृष्टि के रूप में पड़ती है। कन्या व्यावहारिकता, विश्लेषण और सेवा से जुड़ी राशि है। इस प्रकार मीन की गहरी करुणा और कन्या की व्यावहारिक सेवा के बीच एक अदृश्य संबंध बना रहता है। कई बार यह संतुलन जीवन में सीख के रूप में सामने आता है।
मीन राशि का जीवन दर्शन “मैं विश्वास करता हूँ” के भाव पर आधारित है। इनके लिए विश्वास केवल किसी सिद्धांत को मान लेना नहीं बल्कि भीतर से अनुभव करके उसे स्वीकार करना होता है। ये भगवान, जीवन, प्रेम और करुणा पर गहरे स्तर पर भरोसा करना सीखते हैं।
निवास के रूप में मीन राशि का संबंध समुद्र, पवित्र नदियाँ, मंदिर, तीर्थ और एकांत स्थानों से माना जाता है। जहाँ शांति, प्रार्थना, ध्यान या जागरण का वातावरण हो, वहाँ मीन ऊर्जा आसानी से सक्रिय हो जाती है।
योगकारक ग्रहों में मीन राशि के लिए चन्द्रमा और मंगल विशेष रूप से शुभ माने गए हैं। चन्द्रमा इनके भावनात्मक जीवन, कल्पना और संवेदना को पोषण देता है। मंगल इन्हें साहस, रक्षा की भावना और कर्मशीलता प्रदान करता है।
मारक ग्रहों में शनि, सूर्य और बुध आते हैं, जो कुछ स्थितियों में कठिन परीक्षाएँ, जिम्मेदारियों का दबाव या मानसिक द्वंद्व create कर सकते हैं। बाधक भाव के रूप में सातवाँ भाव यानी कन्या और उसका स्वामी बुध मीन के लिए बाधक माने जाते हैं, जो संबंधों, साझेदारी और निर्णय में चुनौतियाँ ला सकते हैं।
स्वर शक्ति के स्तर पर मीन राशि से द, थ और च ध्वनियाँ जुड़ी मानी जाती हैं। इन ध्वनियों में कोमलता के साथ एक सूक्ष्म गहराई सुनाई देती है।
विशेष संज्ञाओं में मीन को अन्त्य कहा गया है, जिसका अर्थ है अंतिम राशि। यह अंत और आरंभ के बीच के उस सूक्ष्म पुल का प्रतीक है जहाँ से नया चक्र तय होता है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से मीन राशि का गहरा संबंध शीतलता और तरलता के संतुलन से है। शरीर में fluids का संचलन, सूजन, शीत प्रकृति और पानी से संबंधित तत्वों के प्रबंधन पर मीन ऊर्जा की छाया देखी जा सकती है।
रत्न के रूप में मीन राशि के लिए पुखराज शुभ माना जाता है, जो बृहस्पति की ऊर्जा को संतुलित और सशक्त करने के लिए धारण किया जाता है। शुभ धातु के रूप में सोना मीन के लिए अनुकूल माना गया है, जो दिव्यता, उज्ज्वलता और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक है।
अंकों में 3, 7 और 9 मीन राशि के लिए शुभ माने जाते हैं। शुभ रंगों में पीला, केसरिया और सफेद प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में हल्दी, चने की दाल, शहद और पीले वस्त्र मीन जातकों के लिए उन्नति और आध्यात्मिक संतुलन से जुड़े उपायों के रूप में देखे जाते हैं।
मीन राशि को मत्स्य शक्ति से भी जोड़ा जाता है। यह भगवान विष्णु के प्रथम अवतार की वह ऊर्जा है जो महाविनाश के बीच भी सत्य और ज्ञान की रक्षा करती है। इसी भाव से मीन जातक भी उथल पुथल भरी परिस्थितियों में भीतर की सच्चाई को संभालकर रखते हैं।
उभयोदय होने के कारण मीन वह अकेली राशि है जो दोनों ओर से उदय होती है। इस अर्थ में यह संसार के सुख और वैराग्य, दोनों की गहराई को साथ लेकर चलने वाली एक प्रकार की राजर्षि ऊर्जा का संकेत है। ये लोग सांसारिक कार्यों में भी रहते हैं और भीतर वैराग्य के पथ पर भी अग्रसर होते हैं।
चूँकि मीन बारहवीं राशि है, इसे सृष्टि का ब्लूप्रिंट भी कहा जा सकता है। यह केवल अंत नहीं बल्कि वह सूक्ष्म बीज है जो यह तय करता है कि अगली नई शुरुआत, अर्थात मेष, का स्वरूप कैसा होगा। मीन की मौन प्रार्थनाएँ, कल्पनाएँ और निर्णय भविष्य की दिशा पर गहरा प्रभाव छोड़ सकते हैं।
मीन राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
मीन राशि का स्वामी ग्रह कौन है और यह क्या प्रभाव देता है
मीन राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है, जो ज्ञान, धर्म, विस्तार और कृपा का कारक है, इसलिए मीन जातक आध्यात्मिक, करुणामय और मार्गदर्शक प्रकृति वाले होते हैं।
मीन राशि शरीर के किन अंगों और स्वास्थ्य संकेतों से जुड़ी है
यह पैर, तलवे, लसीका प्रणाली, आँखों और नींद से संबंधित है और कफ प्रधान प्रकृति के कारण सूजन, भारीपन और तरल संतुलन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
मीन राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर शामिल हैं
पूर्वभाद्रपद का अंतिम पद, उत्तरभाद्रपद के चारों पद और रेवती के चारों पद मीन राशि में आते हैं और नाम अक्षर दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची माने जाते हैं।
मीन राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ माने जाते हैं
बृहस्पति के लिए पुखराज रत्न, पीला, केसरिया और सफेद रंग तथा 3, 7 और 9 अंक मीन राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
मीन राशि का जीवन दर्शन किस भाव पर आधारित माना जा सकता है
मीन राशि का जीवन दर्शन “मैं विश्वास करता हूँ” के भाव पर आधारित है, जहाँ विश्वास, करुणा, भक्ति और मोक्ष की दिशा में चलना जीवन का मुख्य आधार बन जाता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 20
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, करियर
इनके क्लाइंट: पंज., हरि., दि.
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