By अपर्णा पाटनी
धनु राशि के सभी ग्रह, नक्षत्र और शुभ रंगों की जानकारी

धनु राशि का नाम आते ही एक ऐसे धनुर्धारी की छवि सामने आती है जिसका निशाना आकाश की ओर लगा होता है। शरीर का निचला भाग घोड़े जैसा और ऊपरी हिस्सा मनुष्य जैसा दिखाया जाता है। यह चित्र ही बता देता है कि धनु राशि के जातक केवल ज़मीन तक सीमित नहीं रहते बल्कि विचार, ज्ञान और जीवन दृष्टि के स्तर पर बहुत दूर तक देखने की क्षमता रखते हैं। इनका जीवन केवल आराम और सुविधा तक सीमित नहीं रहता बल्कि लगातार खोज, सीखने और विस्तार की यात्रा बन जाता है।
कई बार अचानक यह जानने की ज़रूरत पड़ती है कि धनु राशि का स्वामी ग्रह कौन है, कौन से नक्षत्र इस राशि में आते हैं, शरीर के किन अंगों पर इसका प्रभाव रहता है या धनु राशि के लिए कौन से रंग और रत्न शुभ माने जाते हैं। ऐसे समय पर बिखरी जानकारियों के बजाय यदि सब कुछ एक ही स्थान पर मिले तो समझना आसान हो जाता है। यही कारण है कि धनु राशि से जुड़े इस संपूर्ण ज्योतिषीय डेटा को एक ही लेख में क्रमबद्ध करके रखा गया है ताकि जब भी धनु राशि की कोई बारीक जानकारी चाहिए हो, यहाँ से तुरंत देखी जा सके।
धनु राशि की सबसे पहली पहचान इसका अटूट आशावाद है। ये जातक हर स्थिति में किसी न किसी रूप में सकारात्मक पक्ष ढूंढ ही लेते हैं। इनके लिए भाग्य केवल एक शब्द नहीं बल्कि एक जीवंत अनुभव है। गिरने के बाद भी ये मानते हैं कि आगे कुछ अच्छा ही होने वाला है।
दूसरी विशेषता इनकी सत्यप्रियता और स्पष्टवादिता है। इन्हें झूठ, बनावट और गोलमोल बात पसंद नहीं होती। अपनी बात सीधे शब्दों में और साफ तरीके से कहना इनकी आदत होती है। कभी कभी यह स्पष्टता दूसरों को कठोर भी लग सकती है, पर इनके इरादे प्रायः सच्चे होते हैं।
तीसरी विशेषता इनका स्वतंत्रता प्रेम है। धनु जातक मानसिक या शारीरिक किसी भी प्रकार के बंधन को पसंद नहीं करते। इन्हें नई जगहों की यात्रा, नए लोगों से मिलना और नए विचारों की खोज करना बहुत अच्छा लगता है। इन्हें खुले आसमान, लंबी यात्राएँ और सीख से भरे अनुभव आकर्षित करते हैं।
चौथी विशेषता इनका उच्च लक्ष्य है। धनुर्धारी के प्रतीक की तरह इनकी नज़र हमेशा ऊँचाई पर होती है। ये छोटी छोटी बातों और संकीर्ण सोच में समय बर्बाद करना पसंद नहीं करते। इनके लिए अध्ययन, दर्शन, बड़े सपने और दीर्घकालिक योजनाएँ अधिक महत्त्वपूर्ण होती हैं।
पाँचवीं विशेषता इनका ज्ञान के प्रसारक होना है। यह राशि बृहस्पति की है, जो गुरु भी कहलाते हैं। धनु जातक जीवन भर सीखते रहते हैं और समय के साथ स्वयं भी मार्गदर्शक की भूमिका में आ जाते हैं। इनके पास जो भी ज्ञान, अनुभव और दृष्टि होती है, उसे ये दूसरों के साथ बाँटने में संकोच नहीं करते।
धनु राशि का प्रतीक आधा मानव और आधा पशु है। यह दोहरी प्रकृति दिखाता है। एक ओर इनके भीतर पाशविक ऊर्जा, इच्छाएँ और स्वाभाविक प्रवृत्तियाँ रहती हैं। दूसरी ओर विवेक, ज्ञान और ऊँचे आदर्श भी मजबूत रहते हैं। इन दोनों के बीच जीवन भर एक प्रकार का आंतरिक द्वंद्व चलता रहता है, जिसे संभालना ही इनके आध्यात्मिक विकास का रास्ता बन जाता है।
धनु राशि का प्रारंभ मूल नक्षत्र से होता है। मूल का संबंध उस केंद्र से है जिसे आकाशगंगा का आधार बिंदु माना जाता है। यह संकेत देता है कि धनु राशि में एक ऐसी शक्तिशाली क्षमता छिपी होती है जो सब कुछ टूट जाने के बाद भी शून्य से नया निर्माण कर सकती है। जैसे कोई व्यक्ति पुराने ढाँचे को पूरी तरह गिराकर उसी जगह पर एक नया, अर्थपूर्ण और सशक्त जीवन खड़ा करे।
धनु को कालपुरुष कुंडली की भाग्य राशि भी कहा जाता है। जब जीवन में सब रास्ते बंद दिखाई दें तब अक्सर किसी अनदेखे मार्ग से सहायता मिलती हुई महसूस होती है। इसे धनु राशि के लिए एक प्रकार का दैवीय सुरक्षा चक्र भी माना जा सकता है, जहाँ ईमानदार प्रयास और सच्चे इरादों के साथ चलते हुए अचानक किसी छुपे द्वार के खुलने जैसा अनुभव हो जाता है।
धनु का संस्कृत नाम धनु ही है, जिसका अर्थ धनुष है। यह धनुष केवल युद्ध का साधन नहीं बल्कि लक्ष्य, दिशा और एकाग्रता का प्रतीक भी है। धनु राशि के जातक अक्सर अपने जीवन में किसी उच्च उद्देश्य की तलाश में रहते हैं।
इस राशि का चिह्न धनुर्धारी है। शरीर का निचला भाग घोड़ा और ऊपर का हिस्सा मनुष्य का, जो आकाश की ओर निशाना साधे हुए है। घोड़े का हिस्सा उत्साह, गति और स्वाभाविक उर्जा का प्रतीक है, जबकि मनुष्य का हिस्सा ज्ञान, विवेक और निर्णय क्षमता का संकेत देता है।
राशि क्रम में धनु नौवीं राशि है। यह घर जन्म कुंडली में धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा और गुरु अनुग्रह का भाव माना जाता है। कालपुरुष कुंडली में धनु वही स्थान है जहाँ जीवन में भाग्य, आशीर्वाद, दीर्घ यात्राएँ और आध्यात्मिक खोज एक साथ जुड़े रहते हैं।
धनु राशि को धर्म, न्याय, उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक यात्रा की राशि कहा जाता है। धनु जातक केवल आशावादी नहीं होते बल्कि ऐसे सत्य अन्वेषक माने जाते हैं जो अपने ज्ञान के प्रकाश से अंधकार को दूर करने की कोशिश करते हैं।
धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है। बृहस्पति ज्ञान, जीव, सौभाग्य, धर्म और विस्तार का कारक है। इस ग्रह के प्रभाव से धनु जातक उदार, अध्ययनशील, मार्गदर्शक प्रकृति के और ईमानदार दिखाई देते हैं। ये अक्सर दूसरों की सहायता और मार्गदर्शन में प्रसन्नता महसूस करते हैं।
स्वामी देवताओं में धनु राशि पर भगवान विष्णु और दक्ष प्रजापति की कृपा मानी जाती है। विष्णु संरक्षण, संतुलन और पालन के देवता हैं, जबकि दक्ष प्रजापति सृष्टि क्रम और व्यवस्था से जुड़े हैं। यह संयोजन बताता है कि धनु जातक व्यवस्था, न्याय और संरक्षण की भावना के साथ जीवन चलते हैं।
तत्त्व की दृष्टि से धनु राशि अग्नि तत्व की है। यह अग्नि केवल ताप देने वाली नहीं बल्कि सात्विक अग्नि है जो प्रकाश, ज्ञान और शुद्धि से जुड़ी है। इस कारण धनु जातक भीतर से तेजस्वी, ऊर्जावान और प्रेरक स्वभाव के होते हैं।
स्वभाव के स्तर पर धनु द्विस्वभाव राशि है। इसका अर्थ है कि यह राशि बदलती परिस्थितियों में स्वयं को लचीले ढंग से ढाल सकती है। एक ओर स्थिरता के गुण, दूसरी ओर परिवर्तन के प्रति खुलापन। इसलिए धनु जातक एक ही समय में कई दिशाओं में सीखने और काम करने की क्षमता रख सकते हैं।
गुण के स्तर पर धनु सात्विक राशि मानी गई है। सात्विकता का अर्थ शुद्धता, सत्य, परोपकार और उच्च आदर्श की ओर झुकाव से है। धनु जातक प्रायः न्यायप्रिय, ईमानदार और ऊँची सोच वाले होते हैं। इनकी ऊर्जा केवल अपने लिए नहीं बल्कि समाज और बड़े उद्देश्य के लिए भी सक्रिय रहती है।
लिंग के रूप में धनु पुरुष राशि है। इसमें सक्रियता, पहल करने की शक्ति, बहिर्मुखी स्वभाव और ऊर्जावान जीवन दृष्टि स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है। जाति की दृष्टि से धनु को क्षत्रिय जैसे गुणों वाला माना गया है। धर्म की रक्षा, न्याय स्थापित करना और नेतृत्व की भूमिका निभाना इस राशि के स्वभाव में शामिल रहता है।
दिशा के स्तर पर धनु राशि पूर्व दिशा की अधिपति मानी जाती है। पूर्व दिशा उदय, नई शुरुआत और आशा का प्रतीक है। उसी प्रकार धनु जातक भी नए विचारों, अवसरों और यात्राओं के माध्यम से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं।
शरीर के अंगों में धनु राशि जांघों और कूल्हों से जुड़ी है। यह हिस्सा शरीर के संतुलन, गति और आगे बढ़ने की क्षमता का आधार है। जीवन में किसी लक्ष्य की ओर लंबी यात्रा की शुरुआत भी इन्हीं अंगों की मजबूती पर टिकी होती है।
प्रकृति की दृष्टि से धनु राशि को पित्त प्रधान माना गया है। अग्नि तत्त्व के कारण पित्त की ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। यह तेज पाचन, तेज निर्णय क्षमता और कभी कभी जल्दी क्रोध की प्रवृत्ति के रूप में दिख सकती है। उचित संतुलन के साथ यह ऊर्जा व्यक्ति को अत्यंत सक्रिय और कर्मठ बना सकती है।
इन सभी बिंदुओं को एक स्थान पर देखने के लिए यह सारणी उपयोगी रहेगी।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बृहस्पति |
| स्वामी देवता | विष्णु, दक्ष प्रजापति |
| तत्त्व | अग्नि |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| गुण | सात्विक |
| लिंग | पुरुष |
| जाति | क्षत्रिय समान |
| दिशा | पूर्व |
| शरीर का अंग | जांघें, कूल्हे |
| प्रकृति | पित्त प्रधान |
धनु राशि पृष्ठोदय मानी जाती है। पृष्ठोदय का अर्थ है कि यह राशि पीछे की ओर से उदय होती है। इस संकेत को गहरे अर्थ में देखें तो धनु जातक कई बार ऐसे अनुभव करते हैं जहाँ परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता, पर समय के साथ पीछे से समर्थन मिलता है और स्थितियाँ उनके पक्ष में मुड़ने लगती हैं।
शक्ति काल के स्तर पर धनु रात्रि बली है। रात के समय इस राशि की शक्ति अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। शांत वातावरण, गहन चिंतन और आध्यात्मिक अभ्यास धनु जातकों के लिए रात में विशेष फलदायी हो सकते हैं।
वश्य वर्गीकरण में धनु राशि का स्वभाव थोड़ा विशेष है, क्योंकि यह द्विपद और चतुष्पद दोनों श्रेणियों से जुड़ी है। पूर्वार्द्ध मनुष्य यानी द्विपद और उत्तरार्द्ध पशु यानी चतुष्पद। यह मिश्रण बुद्धि और शारीरिक क्षमता दोनों के संगम को दर्शाता है।
कद के स्तर पर धनु जातकों का कद प्रायः लंबा और प्रभावशाली माना जाता है। इनका व्यक्तित्व खुला, आत्मविश्वासी और सहज आकर्षक होता है। चलते समय एक प्रकार की स्वाभाविक लय और ऊर्जा इनके हावभाव में दिखती है।
शब्द की दृष्टि से धनु को अल्प शब्द वाली राशि कहा गया है। ये लोग अनावश्यक बातों में नहीं उलझते। कम शब्दों में, सरल भाषा में और स्पष्ट ढंग से अपने विचार रख देते हैं। जहाँ ज़रूरत हो वहाँ हँसमुख और हल्का वातावरण भी बना लेते हैं।
प्राणी श्रेणी में धनु को अर्द्ध मानव, अर्द्ध पशु बताया गया है। यह उच्च बुद्धि, दार्शनिक दृष्टि और अदम्य शारीरिक शक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। प्रजनन क्षमता के स्तर पर धनु को मध्यम कहा गया है।
धनु राशि का विस्तार राशि चक्र में दो सौ चालीस डिग्री से दो सौ सत्तर डिग्री तक माना जाता है। यह वह हिस्सा है जहाँ सूर्य वृश्चिक की गहराइयों से निकलकर खुले आसमान और विस्तृत क्षितिज की ओर बढ़ता है।
वर्ण के रूप में धनु राशि का रंग स्वर्ण और पीला बताया गया है। यह रंग प्रकाश, ज्ञान, आशावाद और गर्माहट का प्रतीक है। ऐसे रंग धनु जातकों के स्वभाव से स्वाभाविक रूप से मेल खाते हैं।
धनु राशि में कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं माना गया। यह विशेषता बताती है कि यहाँ ग्रहों को अति की स्थिति के बिना संतुलित रूप में फल देने का अवसर मिलता है।
बृहस्पति अपनी ही धनु राशि में शून्य से तेरह डिग्री तक मूलत्रिकोण में स्थित माने जाते हैं। इस स्थिति में बृहस्पति की शक्ति अपने सबसे स्थिर और उपयोगी रूप में फल देती है। धर्म, ज्ञान, गुरु आशीर्वाद और भाग्य से जुड़े अनुभव प्रबल हो सकते हैं।
ग्रह मैत्री के स्तर पर धनु राशि के लिए मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्रमा और मंगल माने गए हैं। शत्रु ग्रह शुक्र और बुध हैं, जबकि तटस्थ ग्रह शनि हैं।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 240° से 270° |
| वर्ण | स्वर्ण, पीला |
| उच्च ग्रह | कोई नहीं |
| नीच ग्रह | कोई नहीं |
| मूलत्रिकोण | बृहस्पति 0° से 13° |
| मित्र ग्रह | सूर्य, चन्द्रमा, मंगल |
| शत्रु ग्रह | शुक्र, बुध |
| तटस्थ ग्रह | शनि |
धनु राशि के भीतर तीन मुख्य नक्षत्र आते हैं। सबसे पहले मूल नक्षत्र के चारों पद धनु राशि में स्थित हैं। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के भी चारों पद इसी राशि में आते हैं। अंत में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का पहला पद धनु में स्थित होता है। इस प्रकार धनु राशि में कुल नौ पद शामिल होते हैं।
नक्षत्र स्वामियों में मूल का स्वामी केतु है। यह जड़ों तक पहुँचने, मूल कारण खोजने और गहरे आध्यात्मिक रूपांतरण की शक्ति देता है। पूर्वाषाढ़ा का स्वामी शुक्र है, जो सौंदर्य, प्रेम और स्थायी विजय का संकेतक है। उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है, जो स्थिर सफलता, प्रतिष्ठा और दीर्घकालिक उपलब्धियों से जुड़ा है।
नाम अक्षरों के रूप में धनु राशि के लिए ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे माने गए हैं। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम अक्सर धनु राशि या इसके नक्षत्रों से जुड़े माने जाते हैं।
| नक्षत्र | पद | नाम अक्षर | नक्षत्र स्वामी |
|---|---|---|---|
| मूल | 4 पद | ये, यो | केतु |
| पूर्वाषाढ़ा | 4 पद | भा, भी, भू, धा | शुक्र |
| उत्तराषाढ़ा | 1 पद | फा, ढा, भे समूह से संबंधित | सूर्य |
कालपुरुष के शरीर में धनु राशि नितम्ब, जांघों और धमनी प्रणाली से जुड़ी मानी जाती है। यह वह हिस्सा है जहाँ से शरीर को गति, संतुलन और रक्त का सशक्त प्रवाह मिलता है। इस क्षेत्र की मजबूती व्यक्ति की जीवन यात्रा की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
संवेदनशील अंगों में धनु राशि विशेष रूप से लीवर, कूल्हों और धमनियों पर प्रभाव डालती है। पित्त प्रधान प्रकृति के कारण यदि जीवनशैली असंतुलित हो, अत्यधिक तनाव या अनियमित खानपान हो तो लीवर और रक्त संचार प्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है।
प्रकृति के स्तर पर धनु जातक साहसी, जिज्ञासु, आशावादी, स्वतंत्र, ईमानदार और दार्शनिक स्वभाव के होते हैं। इन्हें खुले विचारों की चर्चा, नए अनुभव और सीखने का अवसर बहुत प्रेरित करता है।
शारीरिक बनावट में धनु जातकों का कद प्रायः लंबा, चेहरा खिला हुआ, आँखें बड़ी और व्यक्तित्व अक्सर हँसमुख दिखाई देता है। इनका स्वभाव खुला और मिलनसार होता है, इसलिए लोग इनके पास सहजता से आकर बात कर लेते हैं।
विशेष दृष्टि के स्तर पर धनु राशि की ऊर्जा मिथुन, कन्या और मीन पर प्रभाव डालती है। इससे संचार, कार्य जीवन, सेवाभाव, रिश्तों और आध्यात्मिकता के क्षेत्रों में विशेष अनुभव और सीख की स्थितियाँ बन सकती हैं।
धनु राशि का जीवन दर्शन संक्षेप में “मैं समझता हूँ” के भाव से समझा जा सकता है। ये लोग केवल मान लेने से संतुष्ट नहीं होते बल्कि समझने की कोशिश करते हैं। जीवन, धर्म, नैतिकता, न्याय और भाग्य जैसे विषय इनके लिए गंभीर चिंतन का केंद्र बन जाते हैं।
निवास के रूप में धनु राशि मंदिरों, राजभवनों, युद्ध के मैदानों, अश्वशालाओं और न्यायालयों जैसे स्थानों से संबंधित मानी जाती है। जहाँ धर्म, शासन, नीति, युद्ध रणनीति और न्याय से जुड़ी गतिविधियाँ चलती हों, वहाँ धनु की ऊर्जा सक्रिय पायी जाती है।
योगकारक ग्रहों में धनु राशि के लिए सूर्य और मंगल विशेष रूप से लाभकारी माने गए हैं। सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा देता है, जबकि मंगल ऊर्जा, साहस और कार्य क्षमता को मजबूत करता है। मारक ग्रहों में बुध और शुक्र का नाम आता है, जो कभी कभी संवाद, संबंधों और आर्थिक मामलों में चुनौती पैदा कर सकते हैं। बाधक स्थान के रूप में सातवाँ भाव यानी मिथुन और उसका स्वामी बुध धनु के लिए बाधक माने गए हैं, जो साझेदारी, विवाह और समझौतों के क्षेत्र में परीक्षाएँ ला सकते हैं।
स्वर शक्ति के स्तर पर धनु राशि से मुख्यतः य, भ और ध ध्वनियाँ जुड़ी मानी जाती हैं। इन ध्वनियों में उत्साह, ऊर्जा और गहराई का एक अनोखा मिश्रण महसूस किया जा सकता है।
विशेष संज्ञाओं में धनु को चापि, धन्वी और शसन जैसे नामों से भी संबोधित किया गया है। चापि और धन्वी धनुष से जुड़े हैं, जो लक्ष्य साधना और युद्ध कौशल का संकेत हैं, जबकि शसन शासन, व्यवस्था और अनुशासन की ओर इशारा करता है।
आयुर्वेदिक संबंध में धनु राशि का गहरा संबंध मेटाबॉलिज्म और शरीर में वसा के संचय से माना जाता है। सक्रिय जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम इनके स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहते हैं।
रत्न के रूप में धनु राशि के लिए पुखराज शुभ माना जाता है। पीला पुखराज बृहस्पति की ऊर्जा को संतुलित और प्रबल करने के लिए धारण किया जाता है। शुभ धातु के रूप में सोना धनु के लिए उपयुक्त माना गया है, जो तेज, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है।
अंकों में 3, 1 और 9 धनु राशि के लिए शुभ माने जाते हैं। शुभ रंगों में पीला, केसरिया और सुनहरा प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें और केसर धनु जातकों के लिए शुभ फलदायी माने जाते हैं।
धनु जातकों को ऐसा वातावरण पसंद आता है जहाँ खुलापन और आज़ादी हो। बड़ी खिड़कियों, ताजी हवा और विस्तृत दृश्य वाला घर या कार्यस्थल इन्हें बहुत सुकून देता है। बंद कमरे, भारी परदे और घुटन भरा माहौल इनके उत्साह को कम कर सकता है।
इन्हें अपना एक ज्ञान का कोना भी बहुत प्रिय होता है। किताबों से भरी अलमारी, यात्रा की यादों से सजी दीवारें और नक्शों या डायरी से भरा एक छोटा सा स्पेस, जहाँ बैठकर ये अगली सीख या अगली यात्रा की योजना बना सकें।
धनु जातक बौद्धिक अखाड़ा जैसे वातावरण में भी खूब खिलते हैं। इन्हें ऐसे लोगों की संगत पसंद आती है जो छोटी बातों पर झगड़ने के बजाय बड़े विचारों, दर्शन, धर्म, राजनीति या भविष्य की दिशा पर चर्चा कर सकें। सार्थक और ऊँचे स्तर की बातचीत इनके मन को पोषण देती है।
इनके लिए आदर्श स्थान वह भी है जो हाई एनर्जी ज़ोन जैसा हो। जहाँ सुस्ती, निराशा और लगातार शिकायत की ऊर्जा कम से कम हो। उत्साह, हँसी, नए काम की योजना और सकारात्मक दृष्टि वाला माहौल धनु राशि के लिए सबसे अधिक अनुकूल माना जा सकता है।
धनु राशि का एक गहरा रहस्य यह है कि इनका वास्तविक भाग्य कई बार तब जागता है जब पुराने ढाँचे पूरी तरह टूट चुके हों। कई धनु जातक जीवन में किसी समय ऐसा चरण देखते हैं जहाँ सब कुछ बिखरा हुआ लगता है, पर उसी विनाश के बाद एक नया और सशक्त उदय शुरू होता है।
इनका सबसे प्रबल हथियार इनकी अंतरदृष्टि है। धनु जातक जब पूरी तरह मौन रहते हैं, बाहर से कुछ विशेष नहीं बोलते तब भी इनके भीतर एक प्रकार का अदृश्य बाण भविष्य की ओर छूट चुका होता है। इनका संकल्प धीरे धीरे परिस्थितियों को उसी दिशा में मोड़ने लगता है।
धनु जातकों को कई बार अपने समय से आगे वाला व्यक्ति भी कहा जा सकता है। ये शारीरिक रूप से भले वर्तमान में हों, लेकिन मानसिक रूप से कई वर्ष आगे की योजनाएँ सोच रहे होते हैं। इनकी सोच का दायरा विस्तृत होता है और यही इन्हें जीवन में बार बार नए क्षितिज की ओर ले जाता है।
धनु राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
धनु राशि का स्वामी ग्रह कौन है और इसका क्या प्रभाव होता है
धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति है, जो ज्ञान, धर्म और सौभाग्य का कारक है, इसलिए धनु जातक स्वभाव से आशावादी, दार्शनिक और मार्गदर्शक प्रवृत्ति के होते हैं।
धनु राशि किन शरीर अंगों और स्वास्थ्य संकेतों से जुड़ी है
यह नितम्ब, जांघों, कूल्हों और धमनी प्रणाली से जुड़ी है और पित्त प्रधान प्रकृति के कारण लीवर तथा रक्त संचार पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
धनु राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर आते हैं
मूल के चारों पद, पूर्वाषाढ़ा के चारों पद और उत्तराषाढ़ा का पहला पद धनु राशि में आते हैं और नाम अक्षर ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे माने जाते हैं।
धनु राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ माने जाते हैं
बृहस्पति के लिए पुखराज रत्न, पीला, केसरिया और सुनहरा रंग तथा 3, 1 और 9 अंक धनु राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
धनु राशि का जीवन दर्शन किस वाक्य में समझा जा सकता है
धनु राशि का जीवन दर्शन “मैं समझता हूँ” के भाव पर आधारित है, जहाँ ज्ञान, धर्म, उच्च विचार, यात्रा और आशावादी दृष्टि जीवन के केंद्र में रहते हैं।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशिअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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