By पं. सुव्रत शर्मा
मंगल कैसे वृश्चिक की गहन इच्छाशक्ति, रणनीति और भावनात्मक ऊर्जा को संचालित करता है

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए उनका स्वामी ग्रह मंगल केवल साहस या क्रोध का संकेत नहीं बल्कि अस्तित्व की गहराई में धड़कती वह शक्ति है जो भीतर से जीवन की दिशा बदल सकती है। मेष राशि में यह मंगल अग्नि तत्व के साथ खुलकर प्रकट होता है, जबकि वृश्चिक में यही ऊर्जा जल तत्व के साथ मिलकर भीतर छिपी, गंभीर और रहस्यमय शक्ति का रूप ले लेती है। वृश्चिक राशि के लोग ऊपर से शांत दिख सकते हैं, पर उनके भीतर भावनाओं और इच्छाशक्ति का ऐसा लावा बहता है जो सही समय पर फूटकर सब कुछ बदल देने की क्षमता रखता है।
यदि किसी की राशि वृश्चिक हो, तो वह मंगल की उस ऊर्जा का प्रतिनिधि होता है जो अदृश्य रहकर काम करती है। यहाँ मंगल केवल सामने खड़े होकर युद्ध करने वाला सैनिक नहीं बल्कि हर चाल को सोच समझकर चलने वाला रणनीतिक योद्धा बन जाता है। यही कारण है कि वृश्चिक जातक को सतही स्तर पर समझना लगभग असंभव होता है। उनकी आँखें, मौन और प्रतिक्रिया सब भीतर की गहराई से संचालित होते हैं।
वृश्चिक राशि को स्थिर जल कहा गया है और मंगल अग्नि का कारक माना जाता है। स्थिर जल का अर्थ है गहराई और मौन, जिसमें ऊपर से हलचल कम और भीतर से बहाव प्रबल होता है।
कालपुरुष कुंडली में वृश्चिक आठवें भाव का प्रतिनिधित्व करती है। आठवाँ भाव परिवर्तन, छिपी हुई बातें, गुप्त धन, आयु, गहन शोध, संकट और पुनर्जन्म से जुड़ा होता है। जब इस भाव का अधिपति मंगल हो, तो वृश्चिक जातक का जीवन साधारण नहीं रह जाता। वे ऐसे अनुभवों से गुजरते हैं जो उन्हें सतह से उठाकर गहराई की ओर ले जाते हैं।
यहाँ मंगल की अग्नि पानी के नीचे छिपी रहती है। यह आग खुली ज्वाला की तरह नहीं बल्कि धरती के भीतर बहते लावा की तरह काम करती है। बाहर से व्यक्ति संयमित, नियंत्रित और शांत दिख सकता है, पर अवसर आने पर वही ऊर्जा विस्फोटक रूप से दिशा बदल सकती है।
| स्तर | वृश्चिक राशि | मंगल स्वामी ग्रह |
|---|---|---|
| प्रकृति | स्थिर जल | तीव्रता, साहस, रणनीति |
| भाव | आठवाँ भाव | परिवर्तन, रहस्य, शोध |
भारतीय ज्योतिष में मंगल को भूमिपुत्र कहा जाता है। सामान्य रूप से यह भूमि, शक्ति और युद्ध से जुड़ा है, पर वृश्चिक में इसके प्रतीकों की व्याख्या और गहरी हो जाती है।
मंगल का रक्तवर्ण केवल क्रोध का संकेत नहीं बल्कि गहन जुनून और संकल्प की ओर संकेत करता है। वृश्चिक जातक जहाँ भी अपना ध्यान लगाते हैं, वहाँ आधे मन से नहीं, पूरे मन प्राण से उतरते हैं। उनकी एकाग्रता विचलित करना आसान नहीं होता।
त्रिशूल और तलवार जैसे प्रतीक उनके भीतर की तीखी दृष्टि और सूक्ष्म काटने वाली बुद्धि को दर्शाते हैं। वे व्यर्थ की बातों में समय नष्ट करना पसंद नहीं करते। उनके निर्णय सीधे मूल बिंदु की ओर जाते हैं। समस्या की जड़ पर वार करना, कारण तक पहुँचने के लिए परत दर परत खोलना, यह उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति बन सकता है।
कवच का संकेत बताता है कि वृश्चिक में मंगल अधिक रक्षात्मक रूप लेता है। वृश्चिक जातक अपनी भावनाओं को गहरे कवच के भीतर छिपाकर रखते हैं। विश्वास करने में समय लेते हैं। एक बार भरोसा कर लें, तो बेहद निष्ठावान हो जाते हैं, पर यदि विश्वास टूट जाए, तो दूरी भी उतनी ही गहरी हो जाती है।
मंगल के स्वामित्व से वृश्चिक राशि के भीतर तीन मुख्य गुण अत्यंत प्रबल हो जाते हैं।
पहला गुण अदम्य इच्छाशक्ति है। वृश्चिक जातक आसानी से हार नहीं मानते। जीवन में चाहे कितने भी झटके आएँ, वे भीतर ही भीतर शक्ति जुटाकर फिर खड़े हो जाते हैं। कई बार उनका जीवन फीनिक्स पक्षी की तरह प्रतीत होता है, जो राख से भी पुनर्जन्म ले लेता है।
दूसरा गुण जासूसी जैसी बुद्धि है। वृश्चिक जातक को चीजें केवल वैसी नहीं दिखतीं जैसी ऊपर से दिखाई देती हैं। वे स्वभाव से ही गहराई में झाँकते हैं। बातों के बीच छिपी बात, चेहरे के पीछे छिपा भाव और व्यवहार के पीछे छिपी मंशा को महसूस करने की क्षमता उनमें स्वाभाविक होती है। उनकी अंतर्दृष्टि कई बार इतनी सटीक हो सकती है कि वे बिना किसी प्रमाण के भी सही दिशा का अनुमान लगा लें।
तीसरा गुण निष्ठा और प्रतिशोध की तीव्र भावना है। वे जितने सच्चे और समर्पित मित्र होते हैं, उतने ही खतरनाक शत्रु साबित हो सकते हैं। मंगल उन्हें न्याय का गहरा भाव देता है। वे न उपकार जल्दी भूलते हैं, न अपमान। अच्छा किया हो तो दिल से याद रखते हैं और यदि चोट लगी हो तो उसे भीतर लिखकर रखते हैं, जब तक कि भीतर कोई समाधान न हो जाए।
वृश्चिक में मंगल मेष की तरह मुखर नहीं होता।
यहाँ उसकी सबसे बड़ी ताकत मौन है। वृश्चिक जातक अपनी योजना, लक्ष्य और भीतर की हलचल के बारे में बहुत कम लोगों से बात करते हैं। वे तब तक कुछ ज़ाहिर नहीं करते, जब तक उन्हें स्वयं पूरा भरोसा न हो जाए कि अब समय सही है। यह मौन उन्हें सामान्य भीड़ से अलग खड़ा करता है।
वे परिस्थितियों को सामने से नहीं बल्कि पर्दे के पीछे से नियंत्रित करना पसंद करते हैं। नेतृत्व की भावना उनमें होती है, पर यह दिखावे वाला नेतृत्व नहीं होता। वे सामने आने के बजाय रणनीति बनाने और सही जगह पर सही क्षण पर कदम रखने में विश्वास रखते हैं।
उनकी असली शक्ति उनकी सहनशीलता में छिपी होती है। वे दर्द, असफलता और अपमान को भीतर गहराई तक महसूस कर सकते हैं, पर उस अनुभव को भीतर पचाकर शक्ति में बदलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
वृश्चिक राशि के साथ गुप्तता और रहस्य का संबंध स्वाभाविक रूप से जुड़ा है।
आठवाँ भाव रहस्यों, गहराई और छिपी हुई बातों का भाव है। वृश्चिक जातक की मनोसंरचना ही ऐसी बनती है कि वे खुले में सब कुछ बाँटने के बजाय भीतर ही भीतर अनुभव करते और समझते हैं। उन्हें अक्सर साधारण बातचीत या सतही मेलजोल में गहरी रुचि नहीं रहती।
वे संकट की घड़ी में सबसे अधिक जागृत महसूस करते हैं। जहाँ दूसरों को डर लगता है, वहीं वृश्चिक जातक की चेतना और तेज हो जाती है। सामान्य, सपाट और बिना गहराई वाला जीवन उन्हें जल्दी ऊबा सकता है, जबकि चुनौतियाँ, उलझन और परिवर्तन उन्हें भीतर से सक्रिय कर देते हैं।
वृश्चिक स्थिर जल है। इस प्रतीक को समझना उनकी प्रकृति को समझने की कुंजी है।
ऊपर से शांत झील की तरह दिखने वाला यह जल भीतर कहीं किसी ज्वालामुखी को छुपाए हुए होता है। वृश्चिक जातक भी बाहर से संयमित, स्थिर और कभी कभी ठंडे दिख सकते हैं, पर भीतर इच्छाओं, सपनों, पीड़ा और संकल्प का ताप बहुत प्रबल होता है।
जब वे किसी पर वार करते हैं, चाहे वह निर्णय हो, बात हो या कोई कदम, तो वह प्रायः सुनियोजित होता है। वे आवेश में आकर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय भीतर से इंतजार करते हैं, सही समय चुनते हैं और फिर अपनी पूरी शक्ति के साथ कदम उठाते हैं।
जहाँ मंगल शक्ति, साहस और संकल्प देता है, वहीं उसका छाया पक्ष अति और कठोरता की ओर भी धकेल सकता है।
वृश्चिक जातक के लिए बहुत बार स्थितियाँ सब या कुछ नहीं जैसी हो जाती हैं। वे आधे मन से किसी संबंध, कार्य या संकल्प में नहीं उतर पाते। यह प्रवृत्ति उन्हें गहरे समर्पण तक ले जाती है, पर यदि दिशा न मिले, तो वही तीव्रता ईर्ष्या, हठ, नियंत्रण की चाह या आत्म विनाश की ओर भी मोड़ सकती है।
उनके लिए आवश्यक है कि अपनी तीव्र ऊर्जा को नफरत या बदले की आग में झोंकने के बजाय निर्माण, साधना, सेवा या किसी सार्थक लक्ष्य में लगाया जाए। जब उनकी ज्वाला सृजनात्मक दिशा पाती है, तो वे असाधारण उपलब्धियों तक पहुँच सकते हैं।
शरीर के स्तर पर वृश्चिक राशि प्रजनन अंगों, उत्सर्जन तंत्र और गहरे स्तर की प्राण शक्ति से जुड़ी है।
जिस प्रकार यह क्षेत्र शरीर की जीवन ऊर्जा और शुद्धिकरण की प्रक्रिया को संभालता है, उसी प्रकार वृश्चिक जातक की भावनात्मक और मानसिक ऊर्जा भी गहरे स्तर पर काम करती है। उनकी प्राणशक्ति सामान्य से अधिक हो सकती है, पर यही शक्ति भावनाओं के दमन की स्थिति में शरीर पर दबाव भी डाल सकती है।
यदि वे अपनी भावनाओं को लगातार दबाते रहें, बात न करें, रो न सकें या किसी सुरक्षित माध्यम से उन्हें बाहर न निकालें, तो इसका असर शारीरिक सेहत पर दिखाई दे सकता है। उनके लिए अपनी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना, लिखना, साधना, कला या भरोसेमंद व्यक्ति से संवाद करना बहुत बड़ी चिकित्सा साबित हो सकता है।
संस्कृत में मंगल का अर्थ कल्याण करने वाला है। वृश्चिक में यह कल्याण सीधे सरल रूप में नहीं बल्कि कभी कभी भीषण रूप से प्रकट होता है।
यह ऊर्जा पुरानी, जड़ और असत्य व्यवस्था को तोड़कर ही नया निर्माण करना चाहती है। वृश्चिक जातक के जीवन में कई बार ऐसे चरण आते हैं जहाँ कोई पुराना संबंध, कार्य, पहचान या जीवन शैली अचानक टूट जाती है। उस समय यह अनुभव कठिन और डरावना लग सकता है, पर बाद में वही चरण उनके लिए गहरे परिवर्तन और नए जीवन का मार्ग खोलता है।
वे झूठ, ढोंग और बनावट को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते। भीतर से उनकी ऊर्जा ऐसे वातावरण को भस्म कर देती है जिसमें सत्य, पारदर्शिता और ईमानदारी न हो।
मंगल की तीखी दृष्टि को वेधन शक्ति कहा गया है। वृश्चिक राशिगत मंगल इस दृष्टि को और गहरा बना देता है।
वृश्चिक जातक किसी की आँखों में देखकर उसकी सच्चाई या झूठ का आभास कर सकते हैं। उनकी दृष्टि सामने वाले को भीतर तक देखती हुई प्रतीत होती है। कई लोग इस कारण उनके सामने स्वयं को नकाब के साथ प्रस्तुत नहीं कर पाते।
मंगल शरीर में माँसपेशियों और शक्ति का कारक है। वृश्चिक में यह शक्ति केवल शारीरिक बल की तरह नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता और लचीलेपन के रूप में दिखती है। वे कठिन परिस्थितियों में टूटने के बजाय भीतर से और मजबूत हो जाते हैं।
वृश्चिक का प्रतीक बिच्छू है। बिच्छू शांत दिखाई देता है, पर उसकी पूँछ में छिपा डंक बड़े से बड़े शत्रु को भी घायल कर सकता है।
वृश्चिक जातक व्यर्थ की लड़ाई नहीं लड़ते। वे झगड़ा करने के लिए झगड़ा करने वाले नहीं होते। वे बहुत बार चुप रहते हैं, देखते हैं, समझते हैं और केवल तब प्रतिक्रिया देते हैं जब उन्हें लगता है कि अब सीमा पार हो चुकी है।
उनका प्रतिशोध प्रायः केवल शारीरिक स्तर पर नहीं बल्कि मानसिक और रणनीतिक स्तर पर होता है। वे सामने से टकराने के बजाय परिस्थिति को इस तरह मोड़ते हैं कि अन्याय करने वाले को अपने कर्मों का फल मिल जाए।
मंगल भूमिपुत्र है और वृश्चिक आठवें भाव के रूप में धरती के नीचे की गहराई का संकेत देता है।
वृश्चिक जातक सतही लोगों और बातों से जल्दी ऊब जाते हैं। उन्हें उन लोगों के साथ बैठना अधिक अच्छा लगता है, जो सच्चाई से बात कर सकें, गहराई में उतर सकें और कठिन प्रश्नों से भागें नहीं। वे भावनाओं की गहराई में गोताखोरी करने में सक्षम होते हैं।
यह गुण उन्हें दो तरह से उपयोगी बना सकता है। एक तरफ वे दूसरों की छिपी हुई प्रतिभा, क्षमता और संभावनाओं को पहचान सकते हैं। दूसरी ओर यदि दिशा न मिले, तो वे लोगों के काले राज, कमजोरियाँ और घाव भी जल्दी पकड़ लेते हैं। किस दिशा में इस सूझ को प्रयोग करना है, यह उनकी सजगता पर निर्भर करता है।
आठवाँ भाव और मंगल दोनों मूल ऊर्जा से जुड़े हैं। यह ऊर्जा सृजन, आकर्षण, इच्छा और शक्ति का आधार है।
वृश्चिक जातक के भीतर सृजन और विनाश दोनों की चाबी होती है। यदि यह ऊर्जा दिशा पाए, तो साधना, गहन अध्ययन, शोध, चिकित्सा, परामर्श, लेखन या किसी बड़े उद्देश्य में उनके भीतर का जुनून अद्भुत परिणाम दे सकता है। यदि यह ऊर्जा बिना दिशा के रह जाए, तो वही शक्ति क्रोध, नियंत्रण, आत्म संदेह या आत्म विनाश में बदल सकती है।
उनके लिए अपने जुनून को किसी अर्थपूर्ण लक्ष्य, सेवा या साधना में लगाना केवल विकल्प नहीं, आवश्यकता बन जाता है। जब उनका जीवन किसी मिशन से जुड़ता है, तो उनकी तीव्रता उन्हें भीतर से खा जाने के बजाय आगे बढ़ाकर औरों के लिए भी प्रकाश बन जाती है।
मेष में मंगल ढोल पीटता हुआ आगे बढ़ता है। वृश्चिक में वही मंगल मौन व्रत धारण कर लेता है।
वृश्चिक जातक अपनी जीत का बड़ा शोर नहीं करते। लक्ष्य हासिल होने के बाद भी वे भीतर से अगली चुनौती, अगले कार्य और अगले स्तर की तैयारी में लग जाते हैं। उन्हें अत्यधिक शोरगुल, भीड़भाड़ या लगातार सामाजिक थकान के बाद एकांत की गहरी ज़रूरत महसूस हो सकती है।
उनके भीतर अधिवृक्क ग्रंथियों की ऊर्जा बहुत सक्रिय रहती है। तनाव, संकट या संघर्ष उन्हें भीतर से तुरंत सक्रिय कर देता है, पर उसी के बाद उन्हें शांति, एकांत और भीतर लौटने का समय चाहिए होता है, ताकि उनकी ऊर्जा संतुलित रह सके।
वृश्चिक और मंगल का मेल व्यक्ति को गहराई, साहस, अद्भुत सहनशीलता और सत्य की तीखी दृष्टि देता है। साथ ही यह अति, प्रतिशोध, आत्मदमन और आत्म विनाश जैसी चुनौतियाँ भी ला सकता है।
वृश्चिक जातक के लिए संतुलित मार्ग में कुछ बातें विशेष सहायक हो सकती हैं।
क्या हर वृश्चिक राशि वाला बहुत रहस्यमय होता है?
ज्यादातर वृश्चिक जातक स्वभाव से गहरे और कम बोलने वाले होते हैं, पर उनकी रहस्यमयता कितनी दिखेगी यह पूरी कुंडली और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
क्या वृश्चिक राशि वाले बदला लेने वाले होते हैं?
अन्याय और धोखे को वे आसानी से भूल नहीं पाते। यदि उनकी ऊर्जा को समझ और क्षमा की दिशा मिले, तो वही शक्ति उन्हें बेहद परिपक्व और संवेदनशील बना सकती है।
क्या वृश्चिक जातक हमेशा संकट भरी स्थितियों में ही अच्छे से काम करते हैं?
संकट उन्हें जागृत कर देता है, इसलिए वे कठिन समय में बहुत मजबूत दिखते हैं। फिर भी सजग अभ्यास से वे सामान्य समय में भी अपनी शक्ति को कोमल और स्थिर तरीके से जीना सीख सकते हैं।
क्या वृश्चिक राशि वालों के लिए एकांत ज़रूरी है?
हाँ, अधिकांश वृश्चिक जातकों के लिए अकेले में समय बिताना, आत्म चिंतन करना और ऊर्जा को पुनर्संतुलित करना मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक होता है।
क्या वृश्चिक राशि वाले केवल कठोर और तीव्र होते हैं, या कोमल भी हो सकते हैं?
उनकी बाहरी तीव्रता के भीतर बहुत गहरी कोमलता होती है। जब वे किसी पर भरोसा करते हैं, तो अत्यंत संरक्षक, समर्पित और भावनात्मक रूप से सच्चे साथी साबित हो सकते हैं।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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