वृश्चिक राशि की माँ और ममता का अभेद्य सिद्धांत

By पं. अभिषेक शर्मा

जानिए अष्टम भाव और अनुराधा नक्षत्र का रहस्य

वृश्चिक राशि की माँ और ममता का अभेद्य सिद्धांत

सामग्री तालिका

वैदिक ज्योतिष और खगोलीय ऊर्जा के अगाध सिद्धांतों के अनुसार वृश्चिक राशि चक्र की आठवीं राशि है। जब इस राशि के अत्यंत गूढ़, कड़े और तीव्र सुरक्षात्मक तत्वों का मिलन मातृत्व की पावन चेतना से होता है तो एक ऐसी माँ का प्राकट्य होता है जिसका प्रेम सतही प्रदर्शन से कोसों दूर, पूरी तरह से अलौकिक और सीमाहीन होता है। वृश्चिक राशि की माँ को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है क्योंकि उनका व्यक्तित्व किसी अभेद्य किले की भांति होता है। वह ऊपर से अत्यंत शांत, गंभीर और चट्टान की तरह मज़बूत दिखाई देती है, परंतु उनके भीतर ममता, वात्सल्य और तीव्र संवेदनाओं का वह अगाध महासागर छिपा होता है जिसकी गहराई का छोर पाना संसार की किसी भी तार्किक बुद्धि के लिए पूर्णतः असंभव है।

यह अनूठी कर्माधारित व्यवस्था जातक को एक अत्यंत परिष्कृत, ग्रहणशील और सूक्ष्म आंतरिक चेतना प्रदान करती है जो उसे बच्चे के संपूर्ण जीवन की परम संरक्षिका बनाने में सहायता करती है। वृश्चिक माँ अपने बच्चे को केवल सामान्य रूप से पालती नहीं है बल्कि उसे चरित्र से एक कुशल सर्वाइवर अर्थात प्रत्येक कड़े संघर्ष से बाहर निकलने वाला अजेय योद्धा बनाती है। कालपुरुष कुंडली के अष्टम भाव की यह जाग्रत ऊर्जा जातक को वह अलौकिक दृष्टिकोण प्रदान करती है जिससे वह बच्चे के केवल भौतिक सुखों की ही चिंता नहीं करती बल्कि उसकी आत्मा और आंतरिक चरित्र को वज्र की तरह सुदृढ़ बनाना अपना सर्वोपरि धर्म मानती है।

ज्योतिषीय आयाम वृश्चिक माँ का व्यावहारिक स्वरूप मातृत्व चेतना का आध्यात्मिक संबंध
अधिपति ग्रह और मुख्य तत्व उग्र मंगल का अदम्य साहस, केतु का वैराग्य और जल तत्व की गहन संवेदनशीलता बौद्धिक एवं आत्मिक ममता का संचार और गुप्त शत्रुओं से अभेद्य सुरक्षा
प्रतीक चिन्ह और सूक्ष्म स्वरूप अपने कड़े कवच के भीतर पूर्णतः सुरक्षित रहने वाला वनराज बिच्छू मर्मभेदी बाज जैसी तीक्ष्ण दृष्टि और सुरक्षा चक्र का निर्माण
मूल चेतना और शारीरिक संबंध कालपुरुष कुंडली का अष्टम भाव, छिपे हुए अगाध रहस्य और तीव्र अंतर्ज्ञान यादों की अत्यंत सुरक्षित अलमारी और प्राण ऊर्जा द्वारा मानसिक हीलिंग
कर्माधारित गुण और आत्मशुद्धि विशाखा की उच्च महत्वाकांक्षा, अनुराधा का मित्र भाव और ज्येष्ठा की संप्रभुता संकुचित अहंकार का विसर्जन और मौन तपस्या के माध्यम से पुनरुत्थान
## वृश्चिक राशि की माँ का नैसर्गिक स्वभाव और अदृश्य गर्भनाल का रहस्य

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार वृश्चिक एक स्थिर और जल तत्व प्रधान राशि है जिसके मुख्य अधिपति ग्रह साहस और पराक्रम के देवता मंगल देव माने गए हैं तथा सह-स्वामी केतु देव माने जाते हैं। मंगल देव की दिव्य उपस्थिति के कारण वृश्चिक राशि की माँ के भीतर एक जन्मजात निडरता, क्षत्रिय गुण और अदम्य सुरक्षात्मक शक्ति विद्यमान होती है। वह अपने बच्चे की रक्षा के लिए संपूर्ण संसार से अकेले टकरा जाने का साहस रखती है। केतु का सूक्ष्म प्रभाव उसे एक अत्यंत जाग्रत आध्यात्मिक चेतना प्रदान करता है जिससे वह बच्चे के भौतिक आचरण के पीछे छिपी उसकी मूल आत्मा को संवारने में निरंतर संलग्न रहती है।

जल तत्व की प्रचुरता के कारण वृश्चिक माँ के पास एक अद्भुत और अत्यंत तीव्र सहज बोध अर्थात अंतर्ज्ञान होता है। ज्योतिषीय शोधों के अनुसार यह माना जाता है कि वृश्चिक माँ की अपने बच्चे के साथ जुड़ी अदृश्य गर्भनाल जीवन में कभी नहीं कटती है जिसे ऋणानुबंध का कड़ा कर्माधारित बंधन कहा जाता है। बच्चा संसार के किसी भी कोने में हो और वह अपनी कड़वी परिस्थितियों को छुपाने का कितना भी प्रयास क्यों न करे, वृश्चिक माँ केवल उसकी वाणी के कंपन अथवा मानसिक तरंगों से यह तुरंत भांप लेती है कि उसका बच्चा किसी घोर संकट या गहरी मानसिक अशांति से गुजर रहा है। उसकी मर्मभेदी दृष्टि बाज की भांति तीक्ष्ण होती है जिससे वह बच्चे के अंतर्मन की प्रत्येक हलचल को बिना कहे पूरी सटीकता से पढ़ लेती है।

व्यावहारिक जीवन के कड़े मोड़ और वृश्चिक माँ का दिव्य कर्माधारित निर्णय

जब बच्चा समाज अथवा विद्यालय में किसी अन्याय या बुली का शिकार हो जाए

व्यावहारिक जीवन में जब विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं और बच्चा समाज की रूढ़िवादिता, कार्यस्थल अथवा विद्यालय में किसी प्रकार के कड़े अन्याय या बुली का शिकार होकर अत्यंत भयभीत हो जाता है तब वृश्चिक राशि की माँ मूक दर्शक बनकर कभी नहीं बैठती है। वह साक्षात काली का रूप धारण करके पूरी कड़ाई के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़ी हो जाती है। वह उस समय यह तनिक भी नहीं देखती कि सामने खड़ा व्यक्ति समाज में कितना रसूखदार अथवा कड़े प्रभाव वाला है।

वह अपने बच्चे के सम्मुख एक अभेद्य वज्र बनकर खड़ी हो जाती है और तब तक शांत नहीं होती जब तक कि बच्चे को उसका पूर्ण सम्मान और न्याय प्राप्त नहीं हो जाता है। वह बच्चे को असहाय होकर रोना नहीं सिखाती बल्कि पलटकर कर्माधारित नियमों के भीतर अपनी रक्षा स्वयं करना सिखाती है। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार यह अद्भुत गुण मंगल देव के परम पराक्रम से संचालित होता है जो उसकी सुरक्षा प्रणाली को कभी भी पैसिव नहीं रहने देता बल्कि हमेशा एक अत्यंत जाग्रत और एक्टिव सुरक्षा कवच में परिवर्तित रखता है।

जब बच्चा संगति के दोष के कारण कोई बड़ी भूल करके उसे छुपाने का प्रयास करे

जब कभी कोई बच्चा सांसारिक आकर्षणों में फंसकर कोई बहुत बड़ी कड़वी गलती अथवा अपराध कर बैठता है और भयवश अपनी माँ के सम्मुख असत्य भाषण का सहारा लेता है तो वृश्चिक राशि की माँ के सम्मुख उसका कोई भी पाखंड टिक नहीं पाता है। वृश्चिक माँ की एक्स-रे जैसी तीक्ष्ण नज़रें बच्चे के भीतर छिपे अज्ञात डर और झूठ को क्षणभर में पकड़ लेती हैं। वह उस समय बच्चे की सबसे कठोर और निष्पक्ष आलोचक बनकर उसके सम्मुख खड़ी होती है।

वह बच्चे की गलतियों पर अत्यधिक क्रोध प्रकट करती है, उसे कड़े अनुशासन का पाठ पढ़ाती है परंतु वह कभी भी बच्चे से घृणा करके उसे बीच मझधार में अकेला नहीं छोड़ती है। वह बच्चे के उस कड़वे और भयंकर अंधकार को पूरी तरह स्वीकार करती है और उसे उस दलदल से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्वयं उस संकट में उतर जाती है। वह अपने प्यार के अंधेपन में कभी भी बच्चे के दोषों को बढ़ावा नहीं देती बल्कि एक कुशल रूहानी सर्जन की भांति कड़े निर्णय लेकर उसके चरित्र की गहरी शल्य चिकित्सा करती है जिससे जातक का भविष्य सदा के लिए निष्कंटक हो जाता है।

जब बच्चा करियर, व्यापार अथवा जीवन की बड़ी परीक्षा में पूरी तरह असफल हो जाए

यदि बच्चा अपने जीवन के किसी अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य, व्यापार अथवा कड़े परिश्रम के पश्चात भी किसी बड़ी परीक्षा में पूरी तरह असफल होकर हताशा के घोर कुएं में गिर जाता है तो वृश्चिक राशि की माँ उसे किसी प्रकार का झूठा या कृत्रिम दिलासा कभी नहीं देती है। वह बच्चे की आँखों में आँखें डालकर अत्यंत गंभीरता से कहती है कि तुम अपने इस पराजय के दुःख को पूरी तरह रोकर बाहर निकाल लो परंतु यह बात हमेशा याद रखना कि कल सुबह की पहली किरण के साथ तुम्हें पुनः दुगुने वेग से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार होना है।

वह बच्चे के भीतर छिपे हुए उस अजेय सर्वाइवर को जागृत करती है जो कभी हार मानना जानता ही नहीं है। वृश्चिक राशि का एक गुप्त और अत्यंत जाग्रत प्रतीक चिन्ह फीनिक्स पक्षी माना जाता है जो संपूर्ण विनाश के पश्चात भी अपनी ही राख से पुनः एक अत्यंत भव्य रूप में जीवित होने का सामर्थ्य रखता है। माँ का यही कड़ा और प्रेरणादायी दृष्टिकोण बच्चे को जीवन की प्रत्येक बड़ी असफलता को एक रोमांचक सबक में बदलने का आत्मबल प्रदान करता है।

जब परिवार या गृहस्थ जीवन पर अचानक कोई घोर विपत्ति आ जाए

जब भाग्यवश पूरे परिवार पर कोई भयंकर संकट, पिता का आकस्मिक अभाव अथवा कोई बहुत बड़ा कड़ा आर्थिक अवरोध अचानक उत्पन्न हो जाता है और संपूर्ण गृहस्थ जीवन बिखरने की कगार पर पहुंच जाता है तब वृश्चिक राशि की माँ अपने संपूर्ण आंसुओं को चुपचाप पी जाती है। वह अपनी समस्त व्यक्तिगत इच्छाओं, सुखों और आवश्यकताओं को अत्यंत खामोशी से दफन कर देती है परंतु बच्चे को कभी भी उस घोर दरिद्रता अथवा मानसिक कमजोरी का आभास तक नहीं होने देती है।

कुंभ राशि की माँ जहाँ तार्किक योजनाओं पर अधिक केंद्रित होती है वहीं वृश्चिक राशि की माँ अपनी असीम सहनशीलता और मूक तपस्या के बल पर पूरे घर का एक सुदृढ़ स्तंभ बनकर खड़ी हो जाती है। वह स्वयं रूखा-सूखा भोजन ग्रहण कर लेगी परंतु बच्चे के सुरक्षित भविष्य और उसकी शिक्षा की आवश्यकताओं में कभी कोई कमी नहीं आने देती है। उसका यह त्याग इतना अधिक गुप्त और पवित्र होता है कि बच्चे को कई वर्षों के पश्चात यह अहसास होता है कि उसकी माँ ने उसे मखमल का सुख देने के लिए स्वयं का संपूर्ण जीवन किस प्रकार न्योछावर कर दिया था।

जब बच्चा अपनी उच्च प्रगति के लिए माँ की मर्जी के खिलाफ दूर जाने का निर्णय करे

जब बच्चा अपनी उच्च शिक्षा, करियर अथवा स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए माँ के अत्यधिक सुरक्षात्मक आवरण और उसकी मर्जी के विरुद्ध जाकर किसी सुदूर देश या अनजान शहर में बसने का कड़ा निर्णय लेता है तब वृश्चिक माँ के भीतर एक अत्यंत भयंकर आंतरिक युद्ध प्रारंभ हो जाता है। स्थिर राशि होने के कारण वह बच्चे के प्रति अत्यधिक पजेसिव अर्थात सुरक्षात्मक जुड़ाव महसूस करती है जिसके प्रभाव से वह बाहर से अत्यंत कठोर दिखाई दे सकती है और शायद ठीक से विदा भी न करे।

परंतु जैसे ही बच्चा उसकी आंखों से ओझल होता है, वह बंद कमरों के एकांत में बैठकर घंटों अश्रु बहाती है। उसकी ममता अत्यंत निजी और अंतर्मुखी होती है जो समाज के सामने कभी रोना पसंद नहीं करती है। केतु का प्रभाव उसे वैराग्य की ओर खींचता है जबकि जल तत्व उसे मोह के बंधन में जकड़ना चाहता है। इस कड़े अंतर्द्वंद्व के बीच वह चुपचाप बच्चे के बैग में उसकी सबसे प्रिय खाद्य वस्तु और अपनी जीवनभर की प्रार्थनाओं का सुरक्षा कवच छिपाकर रख देती है जो बच्चे की प्रत्येक मार्ग पर रक्षा करता है।

नक्षत्रों का सूक्ष्म कर्माधारित प्रभाव और मातृत्व का अलौकिक स्वरूप

वैदिक ज्योतिष के सूक्ष्म सिद्धांतों के अनुसार वृश्चिक राशि के भीतर आने वाले तीनों नक्षत्र माँ के व्यावहारिक आचरण को एक अत्यंत विशिष्ट और कड़ा स्वरूप प्रदान करते हैं जो उनके मातृत्व की दिशा तय करता है:

विषाखा नक्षत्र की जननी

विशाखा नक्षत्र के अंतर्गत आने वाली वृश्चिक माँ अत्यंत महत्वाकांक्षी, दूरदर्शी और कड़े सिद्धांतों वाली होती है। इसके अधिपति देवता इंद्राग्नि माने गए हैं जो जीवन में सर्वोच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने और निरंतर विजय प्राप्त करने की प्रचंड ऊर्जा को प्रदर्शित करते हैं। यह माँ अपने बच्चे के भीतर बचपन से ही एक चक्रवर्ती सम्राट बनने की तीव्र इच्छाशक्ति फूंक देती है और उसे कभी भी सामान्य स्तर पर रुकने की अनुमति नहीं देती है।

अनुराधा नक्षत्र की जननी

अनुराधा नक्षत्र के प्रभाव से युक्त वृश्चिक राशि की माँ इस संपूर्ण राशि चक्र की सबसे कोमल, दयालु और आध्यात्मिक माता मानी जाती है। इसके अधिपति देवता स्वयं मित्र देव हैं जो सात्विक मित्रता, अगाध करुणा और निश्छल प्रेम का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह माँ अपने बच्चे के सम्मुख एक कड़क अभिभावक के बजाय उसकी सबसे प्रिय सखी बनकर खड़ी होती है जिससे बच्चा अपने अंतर्मन का बड़े से बड़ा कड़वा रहस्य भी बिना किसी संकोच के सहर्ष साझा कर देता है। वह पाताल की गहराइयों से भी बच्चे को खींच लाने का सामर्थ्य रखती है।

ज्येष्ठा नक्षत्र की जननी

ज्येष्ठा नक्षत्र के अंतर्गत आने वाली वृश्चिक माँ अपने परिवार और गृहस्थ जीवन की साक्षात सर्वोच्च शासिका अर्थात मैट्रीआर्क मानी जाती है। इसके अधिपति देवता स्वर्ग के राजा इंद्र देव हैं जो संप्रभु सत्ता, असीम प्रशासनिक शक्ति और मान-प्रतिष्ठा के सर्वोपरि नियंत्रक हैं। यह माँ पूरे घर के अनुशासन को अपने कड़े नियंत्रण में रखती है और अपने बच्चे की सामाजिक प्रतिष्ठा, उच्च पद और मान-सम्मान की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक जाने का दृढ़ संकल्प रखती है।

वृश्चिक राशि की माँ की छिपी हुई कड़वी छाया और सुधार के मुख्य क्षेत्र

प्रत्येक ब्रह्मांडीय ऊर्जा के दो मुख्य पहलू होते हैं और वृश्चिक राशि की माताओं के भीतर भी एक ऐसा गुप्त कड़ा अंधेरा छिपा होता है जिसे सुधारना उनके और उनके बच्चे के भविष्य के लिए परम आवश्यक माना जाता है। वृश्चिक माँ की सबसे बड़ी चुनौती उनका अत्यधिक नियंत्रणकारी स्वभाव और पजेसिवनेस माना जाता है। वह अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर इतनी अधिक व्याकुल रहती है कि वह जाने-अनजाने उसके जीवन के प्रत्येक छोटे-बड़े फैसले को स्वयं नियंत्रित करना चाहती है जिससे बच्चे की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उसकी स्वयं की निर्णय क्षमता पूरी तरह कुंठित होने लगती है।

इसके अतिरिक्त मंगल के उग्र प्रभाव के कारण गुस्से के तीव्र वेग में उनकी वाणी अत्यंत कठोर और मर्मभेदी हो जाती है। वे आवेश में आकर ऐसे कड़वे शब्द बोल देती हैं जो बच्चे के संवेदनशील मन को भीतर तक बुरी तरह झुलसा देते हैं और उनके मध्य एक अदृश्य वैचारिक दूरी का निर्माण कर देते हैं। उनका स्वभाव अत्यंत रहस्यमयी और अविश्वासी होता है; वे बाहरी समाज के लोगों पर बहुत जल्दी भरोसा नहीं करती हैं जिससे बच्चे की सोशल लाइफ अर्थात सामाजिक दायरा बुरी तरह प्रभावित होता है। मकर राशि की माँ जहाँ भविष्य के आर्थिक संचय को लेकर चिंतित रहती है वहीं वृश्चिक राशि की माँ बच्चे के किसी अन्य व्यक्ति के प्रति झुकाव को देखकर भीतर ही भीतर एक अज्ञात असुरक्षा और ईर्ष्या का अनुभव करने लगती है। उन्हें यह कड़ा आध्यात्मिक सत्य समझना होगा कि ममता का वास्तविक अर्थ बच्चे को मोह के बंधनों में जकड़कर रखना नहीं है बल्कि उसे एक स्वतंत्र और निडर जीव बनाना है।

वृश्चिक राशि की माताओं के लिए विशेष कर्माधारित आत्म-सुधार तालिका

जीवन का सूक्ष्म पहलू वृश्चिक माँ के कड़े अवरोध ज्योतिषीय सुधार और कर्माधारित उपाय
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्पेस बच्चे के जीवन के प्रत्येक छोटे-बड़े निर्णय को स्वयं कड़ाई से नियंत्रित करना अपनी मुट्ठी को थोड़ा ढीला छोड़ना सीखें, याद रखें कि आप बच्चे की ढाल हैं उसकी बेड़ियां नहीं
वाणी का अनुशासन अत्यधिक क्रोध के आवेश में आकर मर्मभेदी और कड़वे शब्दों का प्रहार करना मंगल की इस प्रचंड ऊर्जा को शांत करने हेतु वाणी में मधुरता लाएं और नियमित प्राणायाम का सहारा लें
भावनात्मक अभिव्यक्ति अपने दुखों और आंतरिक कोमलता को रहस्यमयी चुप्पी के पीछे पूरी तरह छिपाए रखना बच्चे के सम्मुख कभी-कभी अपनी कोमल भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें, प्रेम को प्रदर्शित करना कमजोरी नहीं है
सामाजिक दृष्टिकोण और विश्वास बाहरी दुनिया के लोगों पर अत्यधिक कड़ा संदेह करना और सामाजिक दूरी बनाना अपने अविश्वास की भावना पर नियंत्रण रखें ताकि बच्चे का सामाजिक और मानसिक विकास पूरी तरह अवरुद्ध न हो
## FAQ

वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि की माँ के अंतर्ज्ञान को इतना शक्तिशाली क्यों माना गया है

वृश्चिक राशि कालपुरुष कुंडली का अष्टम भाव है जो रहस्यों और छिपी हुई शक्तियों का केंद्र है तथा इसका तत्व जल है। इस दुर्लभ संयोजन के कारण वृश्चिक राशि की माँ के पास एक अद्भुत छठी इंद्रिय होती है जिससे वह बच्चे के संकट को दूर बैठे ही तुरंत भांप लेती है।

क्या वृश्चिक राशि की माँ के पास कोई विशेष हीलिंग पावर होती है

हाँ वृश्चिक राशि की माँ का अपने बच्चे के साथ एक अत्यंत गहरा कर्माधारित ऋणानुबंध का बंधन होता है। जब उसका बच्चा अत्यधिक मानसिक तनाव या डिप्रेशन में होता है तो वृश्चिक माँ शांत रहकर अपनी प्राण ऊर्जा से उसके समस्त मानसिक विकारों को स्वतः ही सोख लेती है।

क्रोध के समय वृश्चिक राशि की माँ को किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए

क्रोध के समय वृश्चिक राशि की माँ का मंगल तत्व अत्यधिक उग्र हो जाता है जिससे उनकी वाणी विषैली बन सकती है। उन्हें कड़े तर्कों के स्थान पर बच्चे के सम्मुख अपने अनुराधा नक्षत्र के मित्र भाव को प्रकट करना चाहिए ताकि बच्चा भयभीत होकर उनसे दूर न भागे।

क्या वृश्चिक राशि की माँ अपने बच्चे के बचपन की यादों को संजोकर रखती है

हाँ वृश्चिक राशि में संचय और अगाध प्रेम का एक गुप्त कोना होता है। वह अपने बच्चे के बचपन की पुरानी छोटी-छोटी चीज़ें जैसे पहला जूता या कोई टूटा हुआ खिलौना अपनी अलमारी के किसी अत्यंत गुप्त कोने में सालों तक छिपाकर सुरक्षित रखती है क्योंकि उन लम्हों में वह ईश्वर को महसूस करती है।

विपत्ति के समय फीनिक्स पक्षी का प्रतीक चिन्ह वृश्चिक माँ को कैसे प्रदर्शित करता है

फीनिक्स पक्षी अपनी ही राख से पुनः अत्यंत भव्य रूप में जीवित होने की क्षमता रखता है। ठीक इसी प्रकार जब मकर या अन्य राशियां संकट में योजनाएं बनाती हैं तब वृश्चिक माँ बच्चे के संपूर्ण विनाश या विफलता के पश्चात भी उसके भीतर पुनः खड़े होने की अदम्य आग फूंक देती है।

साहस की प्रखरता, अचल मर्यादा और अभेद्य सुरक्षा कवच के सर्वोपरि प्रतीक महादेव और माता केतु के आशीर्वाद के रूप में स्थापित वृश्चिक राशि की माँ यह भलीभांति जानती है कि उसका गुस्सा वास्तव में कोई घृणा नहीं बल्कि बच्चे की सुरक्षा का एक अत्यंत सुदृढ़ आवरण है। आपकी यह खामोशी और आपकी यह मौन तपस्या इस सृष्टि के इतिहास में एक अत्यंत पवित्र साधना है, इसलिए स्वयं को कभी भी अकेला या हारा हुआ महसूस न होने दें। अपने भीतर छिपे उस अनुराधा नक्षत्र के निश्छल प्रेम और मंगल देव के अदम्य पराक्रम को पहचानिए तथा अपने अभेद्य सुरक्षा कवच के साये में रहकर निरंतर अपने बच्चे की रगों में एक सर्वाइवर की अजेय शक्ति और सत्य का परम प्रकाश फैलाती रहिए।

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लेखक

पं. अभिषेक शर्मा

पं. अभिषेक शर्मा (63)


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