By पं. नरेंद्र शर्मा
एक रहस्यमयी देवी के राजसी व्यक्तित्व और उसके महान त्याग को ज्योतिषीय नजरिए से गहराई से समझें

जब विधाता ने इस पूरी सृष्टि को रच दिया तो उसने देखा कि सब कुछ बहुत प्रत्यक्ष है और बहुत सतही है। जीवन में गहराइयाँ और रहस्य अभी भी गायब थे। तब ईशवर ने ब्रह्मांड के सबसे गुप्त और गहरे छोर से एक अत्यंत तीव्र और चुंबकीय ऊर्जा को समेटा और उसे एक इंसानी रूप दिया। उसे हम वृश्चिक राशि की स्त्री कहते हैं।
वृश्चिक राशि की महिला कोई साधारण नदी नहीं है जिसे कोई भी आसानी से पार कर ले। वह तो महासागर की वो अंतहीन गहराई है जहाँ अनमोल मोती भी छिपे हैं और भयंकर बवंडर भी। वह इस संसार की सबसे बड़ी पहेली है। उसकी आँखें इतनी सम्मोहक और गहरी होती हैं कि वे बिना एक शब्द बोले आपके दिल के पार देख सकती हैं। वह पाखंड और झूठ को एक पल में भस्म करने की शक्ति रखती है। दुनिया उसे अक्सर कठोर या रहस्यमयी समझकर डर सकती है लेकिन सच यह है कि उस शांत और गंभीर चेहरे के पीछे वफादारी का महासागर और प्रेम की पराकाष्ठा छिपी होती है। वह कभी माँगकर सम्मान नहीं लेती बल्कि उसका खामोश प्रभामंडल ही लोगों को उसके आगे झुकने पर मजबूर कर देता है।
भारतीय वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि चक्र की आठवीं राशि है। इसका स्वामी साहस और ऊर्जा का कारक ग्रह मंगल है। इस राशि का मुख्य तत्व जल है जो भावनाओं की चरम सीमा और गहराई को दर्शाता है। यह राशि स्वभाव से स्थिर है जो इनके अडिग संकल्प और दृढ़ता को बयां करती है।
वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
मंगल की अग्नि और जल का मिलन ज्योतिष का सबसे विस्मयकारी विरोधाभास है। वृश्चिक जल तत्व की राशि है लेकिन इसका स्वामी अग्निपुत्र मंगल है। इसी वजह से वृश्चिक महिला के भीतर उबलता हुआ पानी या दहकती हुई बर्फ जैसी ऊर्जा होती है। वह बाहर से बर्फ की तरह शांत और ठंडी दिख सकती है लेकिन उसके भीतर भावनाओं और संकल्प का एक ज्वालामुखी धधक रहा होता है। एक बार जब वृश्चिक महिला किसी लक्ष्य या किसी इंसान को अपना मान लेती है तो वह पूरी तरह स्थिर हो जाती है। उसे अपने मार्ग से डिगाना यमराज के लिए भी असंभव है। वह जीवन के सबसे भयानक दुखों को चुपचाप पी जाती है लेकिन कभी हार नहीं मानती। इस राशि का प्रतीक चिह्न बिच्छू है। बिच्छू कभी किसी पर बेवजह हमला नहीं करता वह शांत कोने में रहता है। लेकिन अगर कोई उसकी सीमा को लांघने की कोशिश करे तो उसका एक डंक सामने वाले के अहंकार को हमेशा के लिए दफन कर देता है।
वृश्चिक राशि की स्त्री के भीतर जो एक अलौकिक शक्ति और सम्मोहन दिखता है उसका वास्तविक रहस्य उन तीन नक्षत्रों की ऊर्जा में छिपा है जो उनकी आत्मा को गढ़ते हैं। ये नक्षत्र उसके भीतर अलग अलग गुणों का संचार करते हैं।
वृश्चिक राशि का एक बड़ा हिस्सा अनुराधा नक्षत्र से संचालित होता है जिसके स्वामी शनि देव हैं और इसके देवता मित्र हैं। यह नक्षत्र वृश्चिक महिला को एक संत जैसी गहराई देता है। वह जिससे भी प्यार करती है पूरी आत्मा से करती है। उसके भीतर अपनों के लिए त्याग करने की एक असीम क्षमता होती है। शनि का यह प्रभाव उसे बेहद अनुशासित और वफादार बनाता है।
इस नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता देवराज इंद्र हैं। ज्येष्ठा का अर्थ ही होता है सबसे बड़ी या सबसे श्रेष्ठ। यह नक्षत्र वृश्चिक महिला को एक ऐसा तीक्ष्ण दिमाग और प्रशासनिक क्षमता देता है कि वह किसी भी परिवार या संस्था की रीढ़ की हड्डी बन जाती है। वह स्वभाव से एक महारानी की तरह होती है और उसे कोई दबा नहीं सकता। उसकी बुद्धिमत्ता इतनी गहरी होती है कि वह पुरुषों के बड़े से बड़े साम्राज्य को भी अपनी मूक कूटनीति से संचालित कर सकती है।
वृश्चिक राशि का आरंभ विशाखा नक्षत्र के अंतिम चरण से होता है जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। यह नक्षत्र वृश्चिक महिला को एक महान दूरदर्शिता और धार्मिक चेतना देता है। वह साधारण जीवन जीने के लिए पैदा नहीं हुई है बल्कि उसके जीवन का एक बड़ा उद्देश्य होता है। गुरु का यह प्रभाव उसे अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक ऐसी दीवानगी देता है कि वह रास्ते में आने वाले पत्थरों को भी पीसकर रास्ता बना लेती है।
वृश्चिक राशि की स्त्री का व्यक्तित्व कई परतों से मिलकर बना है। उसकी हर एक परत में एक गहराई और एक कहानी छुपी होती है जिसे केवल वही समझ सकता है जो उसे करीब से जानता हो। यहाँ उसके व्यक्तित्व के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पहलू दिए गए हैं।
जब वह माँ बनती है तो वह अपने बच्चों को लाड प्यार तो बहुत करती है लेकिन वह उन्हें कमजोर नहीं बनाती। वह अपने बच्चों को जीवन की हर कड़वी सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार करती है। वह बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी सिंहनी की तरह खड़ी रहती है। उसके बच्चे कभी डरपोक नहीं हो सकते क्योंकि वह उनके भीतर बचपन से ही निडरता और वफादारी के बीज बो देती है। वह अपने बच्चों की सबसे बड़ी मार्गदर्शक और रक्षक होती है।
यदि किसी पुरुष के जीवन में वृश्चिक राशि की स्त्री पत्नी या प्रेमिका के रूप में आ जाए तो समझो उसने अपनी जिंदगी की सबसे पवित्र अग्निपरीक्षा दे दी है। वृश्चिक महिला का प्रेम सतही नहीं होता बल्कि उसकी आत्मा आपके साथ जुड़ती है। वह आपके बुरे से बुरे वक्त में जब पूरी दुनिया आपका साथ छोड़ देगी तब भी वह आपके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी। वह आपकी गरीबी और बीमारी या दुखों में अपनी वफादारी कभी नहीं बदलेगी। लेकिन बदले में वह आपसे भी शत प्रतिशत वफादारी और सम्मान मांगती है। उसके प्रेम में छल या धोखे की कोई जगह नहीं होती।
हर राशि की तरह वृश्चिक राशि की स्त्री के भीतर भी प्रकाश और अंधकार का अपना एक संतुलन होता है। वैदिक ज्योतिष यह मानता है कि जो गुण हमारी सबसे बड़ी ताकत होते हैं वे ही अनियंत्रित होने पर हमारी कमजोरी भी बन जाते हैं।
ब्रह्मांड की इस महान ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए वृश्चिक राशि की स्त्री को कुछ आध्यात्मिक और व्यावहारिक नियमों का पालन करना चाहिए। इन नियमों से उनका जीवन और अधिक सुखमय हो सकता है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से आपकी राशि के स्वामी मंगल देव हैं। जीवन के मानसिक तनाव को कम करने और अपनी ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए रोज सुबह या हर मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें। हनुमान जी की भक्ति आपको अजेय बनाएगी। गहरा लाल और मैरून रंग आपके लिए बेहद शुभ और ऊर्जादायक हैं जो आपके भीतर के मंगल तत्व को सकारात्मक रखते हैं। बहुत ज्यादा हल्के या बेजान रंगों के अत्यधिक प्रयोग से बचें क्योंकि ये आपकी ऊर्जा को धीमा कर सकते हैं। रात को तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें और सुबह उठकर उसे पिएं। यह आपके स्वास्थ्य और मंगल ग्रह की शांति के लिए अद्भुत काम करेगा।
व्यावहारिक दृष्टिकोण से अतीत को विदा करना सीखें। हर इंसान आपकी तरह वफादार या गहरा नहीं हो सकता। जिन लोगों ने आपके साथ गलत किया उन्हें कर्म के न्याय पर छोड़कर अपने दिमाग से उनके विचारों को मुक्त करें। अतीत के घावों को कुरेदना बंद करें। विश्वास का दायरा थोड़ा बढ़ाएं और हर इंसान धोखेबाज नहीं होता। अपने अत्यधिक शंकालु स्वभाव पर थोड़ा नियंत्रण रखें अन्यथा आप अपनों को ही खुद से दूर कर देंगी। लोगों को संभलने का मौका दें। अपनी भावनाओं को वेंटिलेट करें और सब कुछ अपने भीतर दबाकर न रखें। कभी कभी अपने किसी बहुत करीबी इंसान के सामने रो लेना या अपने दिल की बात कह देना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान होगा।
यदि आपके जीवन में कोई वृश्चिक राशि की महिला है तो आज अपने अहंकार और व्यस्तताओं को अलग रखकर दो मिनट ठहरकर उनके वजूद को देखना। आप उन्हें हमेशा शांत और गंभीर देखते हैं। आप सोचते हैं कि वह तो बहुत मजबूत है और उसे किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। लेकिन कभी उसकी उन गहरी और शांत आँखों में झांक कर देखना जो दिनभर दुनिया से लड़ने के बाद रात के सन्नाटे में सिर्फ यह चाहती हैं कि कोई आकर बिना किसी शर्त के उन्हें गले से लगा ले। कोई आकर कहे कि तुम बहुत दिनों से इस पूरे परिवार का बोझ अकेले उठा रही हो और आज अपनी तलवार नीचे रख दो।
वह आपसे आपके पैसे या आपके महंगे तोहफे नहीं मांगती। वह खुद अपने दम पर अपनी दुनिया खड़ी करने का हौसला रखती है। उसे सिर्फ आपकी आँखों में अपने लिए वो अटूट निष्ठा और वो वफादारी देखना है जिसके लिए वह अपनी पूरी जिंदगी आपके कदमों में न्योछावर कर सके। वृश्चिक राशि की महिला का सब्र और उसकी सहने की क्षमता असीम होती है। वह रिश्ते की पवित्रता को बचाने के लिए आपकी हजार गलतियाँ और आपका बुरा व्यवहार भी सह लेगी। वह आपके साथ नर्क के दरवाजे तक जाने को तैयार हो जाएगी बशर्ते आपका हाथ उसके हाथ में हो। लेकिन जिस दिन उसका विवेक और उसकी आत्मा यह फैसला कर लेती है कि अब इस रिश्ते में उसकी वफादारी का सौदा हो रहा है उस दिन उसके भीतर का प्रेम हमेशा के लिए मर जाता है।
वह न तो चिल्लाएगी और न रोएगी। वह बहुत खामोशी से अपना पल्लू समेटेगी और आपकी जिंदगी की दहलीज को पार कर जाएगी। उसका वो जाना इतना अंतिम और मुकम्मल होता है कि उसके बाद आप अपनी पूरी दौलत और अपने आंसुओं के समंदर या अपनी जान भी दांव पर लगा दें तो भी आप उस पवित्र और चुंबकीय रूह को अपनी जिंदगी में दोबारा वापस नहीं ला पाएंगे। उसकी दुनिया से आपकी परछाई हमेशा के लिए मिट जाएगी।
वृश्चिक राशि की देवियों तुम इस संसार की वो जागृत चेतना हो जिसके बिना प्रेम की पराकाष्ठा और संकल्प की शक्ति अधूरी है। अपनी इस रहस्यमयी गहराई और इस बेमिसाल वफादारी पर हमेशा गर्व करना क्योंकि तुम्हारे होने से ही इस दुनिया में सच्ची निष्ठा और साहस का अस्तित्व जिंदा है।
वृश्चिक राशि की महिला का स्वामी ग्रह कौन सा है?
वृश्चिक राशि की महिला का स्वामी ग्रह मंगल देव हैं जो साहस ऊर्जा और शौर्य के साक्षात प्रतीक हैं।
वृश्चिक राशि की स्त्री प्रेम में कैसी होती है?
वह प्रेम में बेहद वफादार और गहरी होती है और अपने साथी की जिंदगी को पूरी तरह समर्पित कर देती है।
वृश्चिक राशि की महिलाओं को शक क्यों होता है?
जल तत्व और गहरे स्वभाव के कारण ये लोगों पर बहुत आसानी से विश्वास नहीं कर पातीं जिससे शक पैदा होता है।
वृश्चिक राशि की महिला के लिए सबसे शुभ रंग कौन से हैं?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार उनके लिए गहरा लाल मैरून और केसरिया रंग सबसे अधिक भाग्यशाली और ऊर्जादायक माने जाते हैं।
वृश्चिक राशि की स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी अजेय सहनशीलता और अगाध वफादारी है जो मुश्किल वक्त में काम आती है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
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