By पं. अमिताभ शर्मा
स्वामी मंगल, चन्द्र नीच, जल तत्व, विशाखा अनुराधा ज्येष्ठा नक्षत्र, स्वास्थ्य संकेत, शुभ रत्न मूंगा और वृश्चिक का रूपांतरण स्वभाव

वृश्चिक राशि का नाम आते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि उभरती है जिसकी आँखों में गहराई, स्वभाव में तीव्रता और जीवन में लगातार रूपांतरण की कहानियाँ छिपी होती हैं। यह राशि उन लोगों की है जो भीतर से बहुत कुछ महसूस करते हैं, पर बाहर से अक्सर शांत और संयमित दिखाई देते हैं। जब कभी अपनी वृश्चिक राशि से जुड़ी बारीक जानकारी जैसे स्वामी ग्रह, नक्षत्र, शरीर के अंग या शुभ रत्न जानने की अचानक आवश्यकता पड़ जाए तब बिखरी हुई जानकारियों के बजाय एक ही स्थान पर संपूर्ण और विश्वसनीय डेटा मिल जाए तो समझना सरल हो जाता है। इसी उद्देश्य से वृश्चिक राशि से संबंधित यह संपूर्ण ज्योतिषीय विवरण एक सुव्यवस्थित रूप में संजोया गया है ताकि जब भी आवश्यकता हो, यह लेख एक संदर्भ पुस्तिका की तरह काम कर सके।
वृश्चिक राशि की पहली पहचान इसकी भेदी दृष्टि है। यह जातक सामने वाले व्यक्ति के हावभाव, आवाज़ और ऊर्जा से बहुत कुछ पढ़ लेते हैं। झूठ पकड़ने में इनकी क्षमता आश्चर्यजनक होती है, इसलिए इनके सामने किसी भी तरह का दिखावा ज़्यादा समय तक टिक नहीं पाता।
दूसरी विशेषता इनका चुपचाप सक्रिय स्वभाव है। बाहर से ये शांत, संयमित और सामान्य दिख सकते हैं, पर भीतर भावनाओं का एक गहन ज्वालामुखी सक्रिय रहता है। वृश्चिक जातक अक्सर गहरे पानी की तरह होते हैं, जहाँ सतह पर शांति और भीतर प्रबल वेग बहता है।
तीसरी विशेषता वफादारी है। अपने लोगों के लिए इनका समर्पण असाधारण होता है। ये अपने प्रियजनों के लिए हर सीमा तक जा सकते हैं। लेकिन यदि कोई विश्वास तोड़ दे या हृदय को गहरी चोट पहुँचा दे तो इन्हें भूलना और माफ करना बहुत कठिन होता है।
चौथी विशेषता परिवर्तन की क्षमता है। संकट के समय वृश्चिक राशि के जातक सबसे अधिक मजबूत होकर सामने आते हैं। इन्हें फीनिक्स की तरह माना जाता है जो राख से भी दोबारा उठ खड़े होने का साहस रखते हैं। जीवन में कितनी भी बड़ी गिरावट क्यों न आए, ये हर बार किसी नए रूप में स्वयं को पुनः खड़ा कर लेते हैं।
पाँचवीं विशेषता इनकी अत्यधिक गोपनीयता है। वृश्चिक जातक अपनी निजी दुनिया को बहुत सख्ती से सुरक्षित रखते हैं। इनके दिल के कुछ कोने ऐसे होते हैं जो शायद ही किसी के साथ साझा हों। इनके जीवन की असली कहानी अक्सर एक बंद किताब की तरह होती है जिसे चुनिंदा लोग ही थोड़ा बहुत पढ़ पाते हैं।
वृश्चिक राशि को भावनाओं का एक प्रकार का परमाणु रिएक्टर कहा जा सकता है। यहाँ चन्द्रमा नीच का होता है, इसलिए ये जातक भावनाएँ आसानी से बाहर नहीं बहाते। इन्हें अपने आँसू, क्रोध, दुख और प्रेम तक भीतर की गहराइयों में सोख लेने की आदत होती है। इनका सन्नाटा साधारण मौन नहीं, बहुत गहरा और अर्थपूर्ण मौन होता है।
इस राशि के लिए एक और विशेष बात यह है कि यहाँ मंगल का योद्धा स्वभाव और ब्राह्मण जाति का ज्ञानात्मक पक्ष एक साथ मिलता है। इस कारण इन्हें ज्ञानी योद्धा कहा जा सकता है। ये केवल युद्ध नहीं करते बल्कि अनुभव और समझ के साथ सही युद्ध चुनते हैं। इनके भीतर ऐसी क्षमता होती है कि ये जीवन के ज़हर जैसे अनुभवों को भी सीख और शक्ति में बदल सकते हैं।
वृश्चिक राशि बारह राशियों में आठवीं राशि है। आठवाँ स्थान आयु, मृत्यु, संकट, छिपे हुए धन और रहस्यमय परिवर्तन का कारक माना जाता है। इसी कारण इन जातकों में फीनिक्स की तरह राख से पुनर्जन्म लेने और हर संकट को एक नए रूपांतरण में बदल देने की अद्भुत क्षमता देखी जाती है।
वृश्चिक का संस्कृत नाम वृश्चिक ही है, जिसका अर्थ बिच्छू है। बिच्छू सतर्क, रक्षात्मक और अचानक प्रहार करने वाले स्वभाव का प्रतीक है। यह प्रतीक बताता है कि वृश्चिक जातक अपनी सीमाओं की रक्षा में बहुत सजग रहते हैं और यदि कोई सीमा लांघे तो अचानक और प्रभावशाली प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
इस राशि का चिह्न स्वयं बिच्छू है जो हमेशा सुरक्षा और हमले के लिए तैयार रहता है। यह प्रतीक उनके स्वभाव की गहराई, रक्षात्मक ऊर्जा और छिपी हुई शक्ति को दर्शाता है।
राशि क्रम में वृश्चिक आठवीं राशि है। यह आयु, मृत्यु, रहस्य, गुप्त धन और गहरे परिवर्तन से जुड़ी कही जाती है। कालपुरुष कुंडली में वृश्चिक वह स्थान है जहाँ जीवन के रहस्यों, गुप्त संसाधनों और संकटों के बीच टिकने की शक्ति निहित रहती है।
वृश्चिक राशि को शक्ति, रहस्य, परिवर्तन और गहन शोध की राशि माना जाता है। यह केवल बाहर दिखने वाली ताकत नहीं बल्कि भीतर की उस शक्ति का प्रतीक है जो गहरे घावों से भी सीखकर आगे बढ़ती है। वृश्चिक राशि के जातक केवल आक्रामक नहीं बल्कि ऐसे ट्रांसफॉर्मर होते हैं जो सत्य की तह तक जाने के लिए किसी भी गहराई तक उतरने का साहस रखते हैं।
वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल ऊर्जा, साहस, तीव्रता और संघर्ष क्षमता का प्रतीक माना जाता है। इस कारण वृश्चिक जातकों में लक्ष्य के प्रति जुनून, कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहने की क्षमता और चुनौतियों से डरने के बजाय उनका सामना करने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
स्वामी देवताओं में वृश्चिक राशि पर भगवान कार्तिकेय और हनुमान जी की कृपा मानी जाती है। कार्तिकेय युद्ध कौशल, रणनीति और आध्यात्मिक वीरता के देवता हैं, जबकि हनुमान जी अदम्य साहस, भक्ति और संरक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं। यह संयोजन वृश्चिक जातकों को बाहरी संघर्ष और भीतर की साधना दोनों में शक्ति प्रदान करता है।
तत्त्व के स्तर पर वृश्चिक राशि जल तत्व की है। यह जल सतही लहरों वाला नहीं बल्कि गहरे समुद्र जैसा है जिसमें नज़र से ओझल बहुत कुछ छिपा होता है। जल तत्व के कारण वृश्चिक जातकों की भावनाएँ अत्यंत गहरी होती हैं। ये सामान्यतया सरल शब्दों में अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करते बल्कि उनका अनुभव भीतर की गहराइयों में करते हैं।
स्वभाव की दृष्टि से वृश्चिक स्थिर राशि है। स्थिर स्वभाव का अर्थ है दृढ़ निश्चय, अडिगता और एक बार ठान लेने के बाद पीछे न हटने की प्रवृत्ति। वृश्चिक जातक किसी भी संबंध, लक्ष्य या विचार के प्रति जब समर्पित हो जाएँ, तो उन्हें बदलना आसान नहीं होता।
गुण के स्तर पर वृश्चिक राशि तमोगुण प्रधान मानी गई है। यहाँ तमोगुण का अर्थ केवल जड़ता नहीं बल्कि गहरे रहस्यों, संहारक शक्तियों और रूपांतरण की प्रक्रियाओं से जुड़ी ऊर्जा है। यह राशि जीवन के उन क्षेत्रों से भी काम करने की हिम्मत रखती है जहाँ अन्य लोग जाने से डरते हैं।
लिंग के रूप में वृश्चिक स्त्री राशि है। स्त्री ऊर्जा का अर्थ यहाँ कोमलता नहीं बल्कि अंतर्मुखी, ग्रहणशील और सुरक्षात्मक स्वभाव है। ये लोग अपने भीतर बहुत कुछ संजोकर रखते हैं और अपने अंतरतम तक केवल विश्वासपात्र लोगों को ही पहुँचने देते हैं।
जाति के रूप में वृश्चिक को ब्राह्मण वर्ग में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इन्हें शोध, गुप्त विद्याओं, ज्ञान की गहराई और आध्यात्मिक अध्ययन में स्वाभाविक रुचि रहती है। जो बात सामान्य दृष्टि से छिपी हो, वही इनके लिए आकर्षण का विषय बन जाती है।
दिशा के स्तर पर वृश्चिक राशि उत्तर दिशा से संबद्ध मानी जाती है। उत्तर दिशा अक्सर विकास, उन्नति और गहन खोज की दिशा मानी जाती है। इस कारण वृश्चिक जातक जीवन में ऊपर उठने के लिए गहरी मेहनत करने से नहीं डरते।
शरीर के अंगों में वृश्चिक राशि जननांग और उत्सर्जन तंत्र से जुड़ी है। यह क्षेत्र जीवन की प्रजनन शक्ति, पुनर्जनन और शरीर से विषाक्त तत्वों के निष्कासन का केंद्र है। इस कारण वृश्चिक राशि के प्रभाव में आने वाले अंगों की देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रकृति की दृष्टि से वृश्चिक की मूल प्रकृति कफ मानी जाती है। जल तत्व के कारण स्थिरता, गहराई और पकड़ की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। हालांकि मंगल के प्रभाव के कारण इसमें पित्त की तीव्रता भी छिपी रहती है, जो निर्णय की धार, क्रोध की तीव्रता और संघर्ष की क्षमता के रूप में दिखाई दे सकती है।
इन सभी बिंदुओं को एक नज़र में समझने के लिए यह सारणी उपयोगी रहेगी।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| स्वामी देवता | भगवान कार्तिकेय, हनुमान जी |
| तत्त्व | जल |
| स्वभाव | स्थिर |
| गुण | तमोगुणी |
| लिंग | स्त्री |
| जाति | ब्राह्मण |
| दिशा | उत्तर |
| शरीर का अंग | जननांग, उत्सर्जन तंत्र |
| प्रकृति | कफ प्रमुख, अंतर्निहित पित्त |
तकनीकी दृष्टि से वृश्चिक राशि शीर्षोदय है। शीर्षोदय राशियाँ सिर की ओर से उदय होने के कारण उच्च बौद्धिक क्षमता और रणनीतिक सोच से जुड़ी मानी जाती हैं। वृश्चिक जातक भी सामने से कम बोलकर भीतर गहराई से रणनीति बनाने की क्षमता रखते हैं।
शक्ति काल के रूप में वृश्चिक दिवा बली है। यानी दिन के समय इस राशि की शक्ति और प्रभाव अधिक प्रबल माने जाते हैं। दिन में लिये गए निर्णय, योजनाएँ और कार्य इन जातकों के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली हो सकते हैं।
वश्य वर्गीकरण के अनुसार वृश्चिक कीट वश्य राशि है। कीट वश्य का अर्थ है कि यह ऊर्जा रक्षात्मक, रहस्यमयी और अचानक प्रहार करने वाली होती है। परिस्थिति सामान्य लगे तो ये शांत रहते हैं, लेकिन जैसे ही इन्हें खतरा महसूस होता है, ये अचानक बहुत तीव्र प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
कद के स्तर पर वृश्चिक जातकों का कद प्रायः औसत माना जाता है, पर शरीर गठीला और मजबूत होता है। इनका व्यक्तित्व साधारण ऊँचाई के बावजूद प्रभावी और सशक्त दिखाई देता है।
शब्द की दृष्टि से वृश्चिक को मूक या नीरव श्रेणी में रखा गया है। ये लोग शब्दों से अधिक अपनी आँखों, चेहरे के भाव और उपस्थिति से बात करते हैं। कम बोलते हैं, लेकिन जब बोलते हैं तो शब्द सीधे दिल या दिमाग में उतर जाते हैं।
प्राणी श्रेणी में वृश्चिक बहुपद वर्ग में आता है। बहुपद का अर्थ है कई पैरों वाला प्राणी जो गहराई में जाकर छिपने और अपनी सुरक्षा करने की कला जानता है। प्रजनन क्षमता में यह राशि बहु प्रसव वाली, यानी उर्वर मानी गई है।
वृश्चिक राशि का विस्तार राशि चक्र में दो सौ दस डिग्री से दो सौ चालीस डिग्री तक माना जाता है। यह वह क्षेत्र है जहाँ सूर्य तुला के संतुलन से आगे बढ़कर गहराई, रहस्य और परिवर्तन के क्षेत्र में प्रवेश करता है।
वर्ण के रूप में वृश्चिक राशि स्वर्ण, गहरा लाल और कभी कभी पिंगल यानी भूरा पीला वर्ण से जुड़ी मानी गई है। ये रंग शक्ति, संचित ऊर्जा और गहरे आकर्षण का प्रतीक हैं।
उच्च ग्रह के रूप में वृश्चिक राशि में कोई ग्रह उच्च का नहीं होता। यह अपने आप में एक रोचक तथ्य है, जो संकेत देता है कि यहाँ ग्रहों को सामान्य से अलग प्रकार की चुनौतियों और अनुभवों से गुजरना पड़ता है।
नीच ग्रह के रूप में यहाँ चन्द्रमा नीच के होते हैं। चन्द्रमा मन, भावनाओं और सुरक्षा की भावना का कारक है। नीच स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि वृश्चिक जातक भावनाओं को खुले रूप में व्यक्त करने के बजाय भीतर दबा लेते हैं, जिसके कारण अंदर भावनात्मक तीव्रता बहुत बढ़ सकती है।
मंगल अपनी ही वृश्चिक राशि में शून्य से बारह डिग्री तक मूलत्रिकोण में माने जाते हैं। इस स्थिति में मंगल की शक्ति सुव्यवस्थित, लक्ष्य केंद्रित और प्रभावशाली रूप में फल देती है।
ग्रह मैत्री के स्तर पर वृश्चिक राशि के लिए मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्रमा और गुरु माने गए हैं। शत्रु ग्रह बुध और शुक्र हैं, जबकि तटस्थ ग्रह शनि हैं।
| खगोलीय बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विस्तार | 210° से 240° |
| वर्ण | स्वर्ण, गहरा लाल, पिंगल |
| उच्च ग्रह | कोई नहीं |
| नीच ग्रह | चन्द्रमा |
| मूलत्रिकोण | मंगल 0° से 12° |
| मित्र ग्रह | सूर्य, चन्द्रमा, गुरु |
| शत्रु ग्रह | बुध, शुक्र |
| तटस्थ ग्रह | शनि |
वृश्चिक राशि के भीतर तीन प्रमुख नक्षत्र आते हैं। सबसे पहले विशाखा नक्षत्र का एक पद वृश्चिक में आता है। उसके बाद अनुराधा नक्षत्र के चारों पद पूरे के पूरे वृश्चिक राशि में होते हैं। अंत में ज्येष्ठा नक्षत्र के चारों पद भी इसी राशि में स्थित रहते हैं। इस प्रकार वृश्चिक राशि में कुल नौ पद शामिल होते हैं।
नक्षत्र स्वामियों में विशाखा का स्वामी गुरु है, जो धैर्य, लक्ष्य साधना और विस्तार की ऊर्जा देता है। अनुराधा का स्वामी शनि है, जो अनुशासन, मित्रता, समर्पण और आध्यात्मिक सेवा का संकेत देता है। ज्येष्ठा का स्वामी बुध है, जो बुद्धि, संचार और रणनीतिक सोच से जुड़ा है।
नाम अक्षर के रूप में वृश्चिक राशि के लिए तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू माने जाते हैं। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम प्रायः वृश्चिक राशि या इसके नक्षत्रों से जुड़े माने जाते हैं।
| नक्षत्र | पद | नाम अक्षर | नक्षत्र स्वामी |
|---|---|---|---|
| विशाखा | 1 पद | तो | गुरु |
| अनुराधा | 4 पद | ना, नी, नू, ने | शनि |
| ज्येष्ठा | 4 पद | नो, या, यी, यू | बुध |
कालपुरुष के शरीर में वृश्चिक राशि बाह्य जननांग और गुदा मार्ग से जुड़ी मानी जाती है। यह क्षेत्र प्रजनन, उत्सर्जन और शरीर में जमा अवांछित पदार्थों के निष्कासन का केंद्र है। इस कारण इस राशि के जातकों के लिए इन अंगों की देखभाल अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
संवेदनशील अंगों में वृश्चिक राशि मूत्राशय, महिलाओं में गर्भाशय, बड़ी आंत और मलाशय पर विशेष प्रभाव डालती है। यदि जीवन में भावनात्मक दबाव अधिक हो या क्रोध और दुख भीतर ही भीतर दबते रहें तो इन हिस्सों में बेचैनी, सूजन या अन्य समस्याएँ उभर सकती हैं।
प्रकृति की दृष्टि से वृश्चिक जातक गहन, रहस्यमयी, साहसी, दृढ़, भावुक और वफादार होते हैं। ये लोग सामान्य बातचीत में हल्के फुल्के विषयों से जल्दी ऊब जाते हैं और ऐसे विषयों की ओर आकर्षित होते हैं जहाँ गहराई, सच्चाई और अर्थपूर्ण संवाद हो।
शारीरिक बनावट में वृश्चिक जातक प्रायः मजबूत, गठीले, चौड़े माथे, तीखी नाक और भेदी आँखों वाले होते हैं। इनकी आँखों में ऐसा आकर्षण और गहराई होती है कि लोग इनसे नज़रें हटाने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
दृष्टि के स्तर पर वृश्चिक राशि की ऊर्जा मेष, कर्क और मकर पर विशेष प्रभाव डालती है। यह प्रभाव संबंधों, भावनाओं, कर्म क्षेत्र और जिम्मेदारियों के बीच गहरी सीख और परिवर्तन की स्थितियाँ बना सकता है।
वृश्चिक राशि का जीवन दर्शन संक्षेप में “मैं परिवर्तन लाता हूँ” के भाव पर आधारित है। यह राशि जीवन में स्थिरता नहीं बल्कि अर्थपूर्ण रूपांतरण चाहती है। पुराने पैटर्न, झूठे संबंध और खोखली संरचनाओं को तोड़कर नए, सशक्त और प्रामाणिक जीवन की ओर बढ़ना इनका स्वभाविक मार्ग होता है।
निवास के रूप में वृश्चिक राशि गुप्त स्थानों से जुड़ी मानी जाती है। ऐसी जगहें जहाँ विषैले जीव हों, गहरे कुएँ, तहखाने, बंकर, प्रयोगशालाएँ, या ऐसी जगहें जहाँ गुप्त वस्तुएँ या दस्तावेज़ सुरक्षित रखे जाते हों, वृश्चिक ऊर्जा से संबंधित कही जाती हैं।
योगकारक ग्रह के रूप में वृश्चिक के लिए सूर्य और चन्द्रमा लाभकारी माने गए हैं। ये ग्रह सही स्थिति में हों तो आत्मविश्वास, मन की गहराई और भावनात्मक शक्ति को संतुलित करने में मदद करते हैं। मारक ग्रहों में शुक्र और बुध का नाम आता है, जो कुछ परिस्थितियों में संबंधों, धन या संवाद के क्षेत्र में चुनौतियाँ ला सकते हैं। बाधक भाव के रूप में नौवाँ भाव और उसका स्वामी चन्द्रमा वृश्चिक के लिए बाधक माने गए हैं, जो कभी कभी भाग्य, धर्म या गुरुजनों से जुड़ी परीक्षाएँ बना सकते हैं।
स्वर शक्ति के रूप में वृश्चिक राशि से मुख्य रूप से न और य ध्वनियाँ जुड़ी मानी जाती हैं। इन ध्वनियों में एक तरह की गहराई और दृढ़ता महसूस की जा सकती है। मंत्रोच्चारण या ध्यान में इन ध्वनियों की सूक्ष्म आवृत्ति वृश्चिक जातकों के लिए मनस्थिरता का माध्यम बन सकती है।
विशेष संज्ञाओं में वृश्चिक को कौरप्य, कीट, अलि, स्थिर, मूक और विषात्मक जैसे नामों से वर्णित किया गया है। ये सभी नाम इसके स्वभाव की अलग अलग परतों को दिखाते हैं। कीट और विषात्मक इसकी तीव्र ऊर्जा और रक्षात्मक प्रकृति का, जबकि स्थिर और मूक इसकी गहराई और मौन शक्ति का संकेत देते हैं।
आयुर्वेदिक संबंध में वृश्चिक राशि कफ पित्त प्रधान कही जाती है। जल तत्व के कारण कफ और मंगल के कारण पित्त दोनों का मिश्रण इसकी प्रकृति को प्रभावित करता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और भावनात्मक अभिव्यक्ति से यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिए सशक्त आधार बन सकता है।
रत्न के रूप में वृश्चिक राशिवालों के लिए मूंगा शुभ माना गया है। लाल मूंगा मंगल की ऊर्जा को संतुलित और प्रबल करने के लिए धारण किया जाता है। शुभ धातुओं में तांबा और सोना का नाम आता है, जो ऊर्जा, तेज और शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अंकों में 9, 1, 3 और 5 वृश्चिक राशि के लिए शुभ माने जाते हैं। शुभ रंगों में गहरा लाल, केसरिया, नारंगी और चमकदार पीला प्रमुख हैं। दान सामग्री के रूप में लाल वस्तुएँ जैसे मसूर की दाल, गुड़, तांबा, लाल कपड़ा, गेहूँ और लाल फूल वृश्चिक राशि की सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
वृश्चिक जातकों को ऐसा वातावरण बहुत पसंद होता है जहाँ एकांत और गोपनीयता बनी रहे। इन्हें भीड़ भरे शोरगुल की तुलना में अपना शांत कोना अधिक प्रिय होता है। यह ऐसा माहौल चाहते हैं जहाँ कोई उनकी निजता में अनचाहा दखल न दे सके।
इनके लिए शांत तीव्रता वाला वातावरण आदर्श होता है। शोर शराबे वाली जगह की बजाय इन्हें वह स्थान अधिक प्रिय है जहाँ शांति हो और वे अपने गहरे शोध, विचार या आंतरिक यात्रा में डूब सकें। हल्की रोशनी, कम शोर और सीमित लोगों की उपस्थिति इन्हें सहज बनाती है।
वृश्चिक जातक दिखावे से मुक्त माहौल पसंद करते हैं। इन्हें कृत्रिम मुस्कान, बनावटी व्यवहार और सतही बातचीत से स्पष्ट रूप से चिढ़ होती है। इनके आसपास जितने लोग हों, वे सच्चे, अर्थपूर्ण और भरोसेमंद होने चाहिए।
इनके मन को रहस्यमयी और गहरे रंगों वाला वातावरण सुकून देता है। घर या कार्यस्थल में गहरे लाल, नीले या बैंगनी जैसे रंग, कुछ प्राचीन वस्तुएँ या गहराई का एहसास दिलाने वाली सजावट इन्हें सहज लगती है।
वृश्चिक राशि उस स्थान पर सबसे अधिक सहज होती है जहाँ इन्हें पूर्ण नियंत्रण महसूस हो। ये चाहते हैं कि जिस जगह पर रह रहे हैं या काम कर रहे हैं उसकी बागडोर कम से कम भावनात्मक स्तर पर इनके हाथ में हो। इन्हें अपनी चीजों को अपनी मर्जी के हिसाब से व्यवस्थित रखने की स्वतंत्रता बहुत महत्त्वपूर्ण लगती है।
वृश्चिक राशि को रूपांतरण के नायक कहना उचित होगा। ये लोग संकट को अवसर में बदलने और फीनिक्स की तरह अपनी ही राख से दोबारा उठ खड़े होने की अद्वितीय शक्ति रखते हैं। इनके जीवन में जितनी गहरी चोटें आती हैं, उतनी ही गहरी जागृति भी संभव होती है।
इनकी अभेद्य गहराई इन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है। इनकी अंतर्दृष्टि एक्स रे की तरह होती है। ये शांत रहकर सत्य की उस गहराई तक पहुँच जाते हैं जहाँ सामान्य दृष्टि नहीं पहुँच पाती। इसलिए इनके सामने किसी संबंध, स्थिति या व्यक्ति की वास्तविकता अधिक समय तक छिपी नहीं रह पाती।
वृश्चिक जातकों में अटल संकल्प और वफादारी अद्वितीय होती है। एक बार किसी लक्ष्य, विचार या व्यक्ति के प्रति समर्पित हो जाने पर ये अंत तक साथ निभाने की ताकत रखते हैं। दर्द, संघर्ष और रहस्यमय अनुभवों के बीच भी इनकी आत्मा हार नहीं मानती बल्कि हर बार किसी नए रूप में और मजबूत होकर सामने आती है।
वृश्चिक राशि से जुड़े सामान्य प्रश्न
वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह कौन है और यह क्या संकेत देता है
वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है जो ऊर्जा, साहस और तीव्रता का कारक है और इसी कारण वृश्चिक जातक संघर्ष, निर्णय और रूपांतरण के समय असाधारण शक्ति दिखा सकते हैं।
वृश्चिक राशि किन शरीर अंगों और स्वास्थ्य क्षेत्रों से जुड़ी है
यह जननांग, उत्सर्जन तंत्र, मूत्राशय, महिलाओं में गर्भाशय, बड़ी आंत और मलाशय से जुड़ी है और भावनात्मक दबाव या दबी हुई संवेदनाओं की स्थिति में इन क्षेत्रों में थकान या रोग की प्रवृत्ति दिख सकती है।
वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र और नाम अक्षर आते हैं
विशाखा का एक पद, अनुराधा के चारों पद और ज्येष्ठा के चारों पद वृश्चिक राशि में आते हैं और नाम अक्षर तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू माने जाते हैं।
वृश्चिक राशि के लिए कौन से रत्न, रंग और अंक शुभ माने जाते हैं
मंगल के लिए मूंगा रत्न, गहरा लाल, केसरिया, नारंगी और चमकदार पीला रंग तथा 9, 1, 3 और 5 अंक वृश्चिक राशि के लिए शुभ माने जाते हैं।
वृश्चिक राशि का मूल जीवन दर्शन क्या माना जा सकता है
वृश्चिक राशि का जीवन दर्शन “मैं परिवर्तन लाता हूँ” के भाव पर आधारित है जहाँ संकट, रहस्य और गहरे अनुभवों के माध्यम से आत्मिक शक्ति, वफादारी और रूपांतरण की यात्रा निरंतर चलती रहती है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 32
इनसे पूछें: विवाह, करियर, व्यापार, स्वास्थ्य
इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
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