By पं. नीलेश शर्मा
ज़िंदगी के उस अभेद्य किले का सम्पूर्ण वैदिक रहस्य जिसे तूफ़ान भी नहीं हिला सकता

वैदिक ज्योतिष के दिव्य आकाश मंडल में जब दो परम स्थिर और समर्पित धरातल एक दूसरे के साथ एकाकार होते हैं तब काल के चक्र पर एक ऐसा अभेद्य दुर्ग निर्मित होता है जिसे समय का कोई भी भीषण तूफान हिला नहीं सकता। कालपुरुष के संपूर्ण ब्रह्मांडीय चक्र में द्वितीय भाव की स्वामिनी वृषभ राशि का साक्षात्कार जब दशम भाव के अधिपति मकर राशि से होता है तब भौतिक संपदा और सर्वोच्च कर्मफल का एक अत्यंत पावन और भव्य संगम घटित होता है। वृषभ राशि पर दैत्यगुरु शुक्र देव का आधिपत्य है जो प्रेम, सौंदर्य, भौतिक ऐश्वर्य, कला, अगाध धैर्य, निष्ठा और स्थिरता के साक्षात अधिष्ठाता हैं। दूसरी ओर मकर राशि के स्वामी कर्मफलदाता न्यायाधीश शनि देव हैं जो अटूट अनुशासन, निरंतर श्रम, समय, मर्यादा, सत्ता, दृढ़ता और सामाजिक प्रतिष्ठा के नैसर्गिक कारक माने जाते हैं। कालपुरुष की पत्रिका में दूसरा भाव संचित धन, कुटुंब, कुल की मर्यादा, वाणी और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता है जबकि दसवां भाव आजीविका, कर्म, राज्य सत्ता, उच्च पद और सामाजिक उत्तरदायित्व का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। जब एक स्थिर धरणीधर अपने स्नेह और धैर्य से सुरक्षा का अटूट आधार बनाता है और दूसरा पक्ष उस आधार पर एक विशाल साम्राज्य खड़ा करने का संकल्प लेता है तब जीवन में सफलता और शांति की नई परिभाषा गढ़ी जाती है। यह संयोग किसी क्षणिक शारीरिक आकर्षण अथवा खोखले वादों का परिणाम नहीं है अपितु यह दो कर्मयोगी आत्माओं का वह पावन मिलन है जो अपनी निष्ठा, परिश्रम और त्याग से सांसारिक जीवन को स्वर्ग के समान प्रतिष्ठित कर देता है।
| ज्योतिषीय आयाम | वृषभ राशि | मकर राशि | युति का संयुक्त प्रभाव |
|---|---|---|---|
| मूल तत्व | स्थिर पृथ्वी तत्व | चर पृथ्वी तत्व | ठोस धरातल और निरंतर कर्म का परम कल्याणकारी समन्वय |
| स्वामी ग्रह | शुक्र देव | शनि देव | मित्र ग्रहों का परस्पर व्यावहारिक, कलात्मक और आर्थिक संगम |
| मूल स्वभाव | स्थिर संज्ञक | चर संज्ञक | अटूट ठहराव और निरंतर प्रगति का संतुलित सामंजस्य |
| ज्योतिषीय स्थिति | द्वितीय भाव | दशम भाव | नवम पंचम संबंध से निर्मित पावन त्रिकोण राजयोग |
| कारक मान | संचय और सुख | कर्म और मर्यादा | अकूत भौतिक संपदा और अक्षुण्ण सामाजिक साम्राज्य का निर्माण |
| गुण मिलान अंक | दस अंक दस में से | दस अंक दस में से | निष्ठा, सम्मान और अटूट विश्वास की अमर चट्टान |
वैदिक सिद्धांतों के अनुसार वृषभ और मकर दोनों ही पृथ्वी तत्व की प्रधान राशियां हैं जिसके कारण दोनों का दृष्टिकोण, जीवन दर्शन, संस्कार और भौतिक प्राथमिकताएं एक ही दिशा में गतिमान होती हैं। इसके अतिरिक्त दोनों राशियों के मध्य परस्पर नवम पंचम का संबंध बनता है जिसे ज्योतिष शास्त्र में सर्वश्रेष्ठ त्रिकोण राजयोग की संज्ञा दी गई है। नवम पंचम का संबंध पूर्वजन्मों के संचित पुण्यों, स्वाभाविक सहानुभूति, भाग्य की वृद्धि और सहज मानसिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। वृषभ राशि स्थिर पृथ्वी है जिसका मुख्य ध्येय जीवन में स्थिरता स्थापित करना, संपत्ति संजोना और परिवार को निश्चिंत सुरक्षा प्रदान करना है। मकर राशि चर पृथ्वी है जिसका उद्देश्य उस सुरक्षा को समाज के सर्वोच्च मंच पर ले जाकर सत्ता, यश और विशाल साम्राज्य का रूप देना है। शुक्र और शनि के मध्य नैसर्गिक मित्रता का पावन सूत्र विद्यमान है जिसके कारण इस संबंध में कभी भी छिछलापन, अविश्वास अथवा अहम् का दुर्भावनापूर्ण टकराव देखने को नहीं मिलता। दोनों ही साथी एक दूसरे की मौन भाषा को पढ़ने में सक्षम होते हैं और बिना कुछ बोले ही साथी के श्रम, थकान और संकल्प को अपनी आत्मा से समझ लेते हैं।
इस अत्यंत सुदृढ़ और आदर्श संबंध की सबसे बड़ी कमजोरी इसका अत्यधिक व्यावहारिक, योजनाबद्ध और कामकाजी हो जाना है। वृषभ और मकर दोनों ही जीवन के भौतिक लक्ष्यों, धन संचय, भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर इतने गंभीर हो जाते हैं कि वे भूल जाते हैं कि जीवन केवल कर्तव्यों की एक सूची नहीं है। मकर राशि का जातक अपने कर्म क्षेत्र में चौबीसों घंटे लीन रहने का आदी होता है और वृषभ जातक घर की व्यवस्था और संपत्तियों के प्रबंधन में उलझा रहता है। इस निरंतर भागदौड़ और अत्यधिक गंभीरता के कारण कई बार इनके दांपत्य जीवन से कोमल रोमांस, बच्चों जैसी निश्छल मासूमियत और सहज हास्य पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
जब जीवन केवल हिसाब किताब, सामाजिक मर्यादाओं और जिम्मेदारियों का कारागार बन जाता है तब घर में एक नीरस और औपचारिक वातावरण जन्म ले लेता है। दोनों साथी एक ही छत के नीचे रहते हुए भी दो कुशल सहयोगियों अथवा व्यापारिक साझीदारों की भांति व्यवहार करने लगते हैं जहाँ दिल की कोमल भावनाओं के प्रकटीकरण के लिए कोई समय शेष नहीं बचता। इसके अतिरिक्त वृषभ का स्वाभाविक हठ और मकर का भावनात्मक रूखापन कभी कभी छोटी सी असहमति को भी लंबे समय तक खिंचने वाला मौन बना देते हैं। यदि दोनों ने समय रहते काम और जिम्मेदारियों से फुर्सत निकालकर बेमकसद हंसना, यात्राएं करना और एक दूसरे की बाहों में विश्राम पाना नहीं सीखा तो यह विशाल किला भीतर से भावशून्य और ठंडा हो सकता है।
वृषभ राशि के अंतर्गत कृतिका के अंतिम तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं जबकि मकर राशि उत्तराषाढ़ा के अंतिम तीन चरणों, श्रवण के चारों चरणों और धनिष्ठा के प्रथम दो चरणों से मिलकर बनती है। जब वृषभ राशि का जातक रोहिणी नक्षत्र का हो जिसके स्वामी चंद्र देव हैं और मकर राशि का जातक श्रवण नक्षत्र का हो जिसके स्वामी भी चंद्र देव हैं तब दोनों के मध्य मानसिक, भावनात्मक और पारिवारिक तालमेल अद्वितीय ऊंचाइयों को छू लेता है। चंद्रमा का यह दोहरा सात्विक प्रभाव घर में असीम शांति, वात्सल्य और सुखद आत्मीयता का संचार करता है जिससे रिश्ते की नीरसता स्वतः मिट जाती है।
यदि वृषभ जातक कृतिका नक्षत्र का हो जिसके स्वामी भगवान सूर्य हैं और मकर जातक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का हो जिसके स्वामी भी सूर्य नारायण हैं तब प्रशासनिक दक्षता, सत्यनिष्ठा, धर्म और सामाजिक मान प्रतिष्ठा की दृष्टि से यह जोड़ी अपराजेय बन जाती है। वहीं यदि वृषभ जातक मृगशिरा नक्षत्र का हो जिसके स्वामी मंगल हैं और मकर जातक धनिष्ठा नक्षत्र का हो जिसके स्वामी भी मंगल देव हैं तब दोनों के भीतर अदम्य साहस, धन अर्जन की भूख और संपत्ति निर्माण की अद्भुत शक्ति होती है जिससे दोनों मिलकर विशाल उद्योगों और व्यापारिक साम्राज्यों का संचालन करने में समर्थ होते हैं।
भौतिक संसार के प्रबंधन में यह जोड़ी संपूर्ण ब्रह्मांड की सबसे सफल, व्यवस्थित और धनी जोड़ियों में अग्रगण्य मानी जाती है। वृषभ जातक धन के संरक्षण, स्वर्ण, भूमि, भवन और सुरक्षित निवेशों के निर्माण में अद्वितीय दक्षता रखता है और किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची से बचता है। मकर जातक उस संचित धन को अपनी दूरगामी व्यावसायिक सोच, औद्योगिक उपक्रमों, दीर्घकालिक परियोजनाओं और सामाजिक प्रभाव के माध्यम से कई गुना बढ़ाने की महारत रखता है।
गृहस्थी के सुचारू संचालन के लिए दोनों को केवल एक बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि वे अपने घर को किसी कॉर्पोरेट कार्यालय में परिवर्तित न होने दें। वृषभ को चाहिए कि वह मकर को समय समय पर कार्य के अत्यधिक तनाव से बाहर खींचे और उसे घर के सुकून का आनंद लेने के लिए प्रेरित करे। मकर को चाहिए कि वह वृषभ के सौंदर्यबोध और आराम के प्रति प्रेम का सम्मान करे तथा अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर जीवनसाथी को समर्पित करे। जब दोनों साथी काम के भारी बोझ को चौखट के बाहर छोड़कर घर में प्रवेश करते हैं तब उनका आशियाना सुख, शांति, समृद्धि और संतोष का एक ऐसा पावन तीर्थ बन जाता है जहाँ कोई भी अभाव कभी कदम नहीं रख सकता।
यदि अत्यधिक व्यस्तता और व्यावहारिक रूखेपन के कारण दांपत्य जीवन में नीरसता आने लगे तो शास्त्रों में कुछ परम कल्याणकारी आध्यात्मिक उपायों का निर्देश दिया गया है।
वृषभ और मकर का यह दांपत्य संबंध किसी साधारण लौकिक मिलन का नाम नहीं है अपितु यह जिंदगी का वो अभेद्य किला है जिसे वक्त का कोई भी तूफान हिलाने का सामर्थ्य नहीं रखता। इस रिश्ते को संसार की किसी औपचारिक दुआ की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह निष्ठा, सम्मान, मौन त्याग और अटूट विश्वास की उस पावन चट्टान पर टिका है जो बुढ़ापे तक मुस्कुराती रहती है। मकर को यह स्मरण रखना होगा कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर केवल जीती गई उपाधियां और बैंक खाते काम नहीं आते, जीवनसाथी के साथ बिताए गए प्रेम के दो पल ही सच्ची पूंजी होते हैं। वृषभ को यह समझना होगा कि मकर का कठोर परिश्रम केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की एक मौन तपस्या है। जब दोनों साथी अपनी व्यावहारिक जिम्मेदारियों के बीच से थोड़ा सा समय चुराकर बेमकसद हंसना, हाथ थामकर घूमना और एक दूसरे की आंखों में झांकना सीख लेते हैं तब उनका यह दांपत्य जीवन धरती पर शाश्वत प्रेम और सफलता की सबसे अमर गाथा बन जाता है।
क्या वृषभ और मकर की शादी ज्योतिष शास्त्र में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है?
हाँ, वैदिक ज्योतिष में नवम पंचम त्रिकोण संबंध और पृथ्वी तत्व का परम मिलन होने के कारण इसे दस अंक वाली सबसे मजबूत और आदर्श जोड़ी माना गया है।
वृषभ और मकर के बीच सबसे बड़ी कमजोरी क्या उभरती है?
जिंदगी का अत्यधिक व्यावहारिक और कामकाजी हो जाना तथा दोनों के बीच से कोमल रोमांस, सहज हास्य और बच्चों जैसी मासूमियत का गायब हो जाना सबसे बड़ी कमजोरी बनती है।
क्या यह जोड़ी मिलकर बहुत बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर सकती है?
निसंदेह, वृषभ की धन संचय की योग्यता और मकर की महत्वाकांक्षी दूरदर्शिता मिलकर समाज में अकूत संपत्ति, भूमि और अजेय सल्तनत का निर्माण करती हैं।
इस रिश्ते में नीरसता को दूर करने के लिए कौन सा उपाय करना चाहिए?
काम से फुर्सत निकालकर साथ में यात्राएं करना, शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करना और शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाना रिश्ते में ताजगी बनाए रखता है।
वृषभ और मकर का दांपत्य जीवन वृद्धावस्था में कैसा रहता है?
इनका दांपत्य जीवन निष्ठा और आपसी सम्मान की ऐसी मजबूत नींव पर टिका होता है कि वृद्धावस्था तक पहुँचते पहुँचते इनका प्यार और विश्वास और अधिक मुस्कुराता रहता है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशिअनुभव: 20
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