वृषभ राशि की माँ और ममता का कर्माधारित सिद्धांत

By अपर्णा पाटनी

जानिए उच्च के चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र का रहस्य

वृषभ राशि की माँ और ममता का कर्माधारित सिद्धांत

सामग्री तालिका

वैदिक ज्योतिष और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के अगाध सिद्धांतों के अनुसार वृषभ राशि चक्र की दूसरी राशि है। जब इस राशि के परम अनुशासित, अचल और अत्यंत पोषक तत्वों का मिलन मातृत्व की पावन चेतना से होता है तो सृष्टि में एक ऐसी माँ का प्राकट्य होता है जिसका प्रेम सतही भावुकता से कोसों दूर, पूरी तरह से व्यावहारिक, निश्छल और ठोस होता है। वृषभ राशि की माँ को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है क्योंकि उनका व्यक्तित्व एक खामोश तपस्या की भांति होता है। वे ऊपर से अत्यंत सौम्य, शांत और अचल दिखाई दे सकती हैं, परंतु उनके भीतर कर्माधारित स्थिरता और वात्सल्य का वह अथाह भंडार छिपा होता है जो बच्चे के संपूर्ण जीवन को एक सुदृढ़ और अभेद्य आधार प्रदान करता है।

यह अनूठी कर्माधारित व्यवस्था जातक को एक अत्यंत परिष्कृत, तार्किक और यथार्थवादी आंतरिक चेतना प्रदान करती है जो उसे बच्चे के संपूर्ण जीवन को एक वटवृक्ष की भांति सींचने में सहायता करती है। वृषभ राशि की माँ का प्यार केवल हवा-हवाई वादों या शब्दों के मायाजाल में नहीं झलकता बल्कि वह कर्मों की एक निपुण साधिका होती है। बच्चे के उत्तम पोषण से लेकर उसके सुरक्षित भविष्य की ठोस आधारशिला तक, उसकी व्यावहारिक दृष्टि से कुछ भी अछूता नहीं रहता है। कालपुरुष कुंडली के द्वितीय भाव की यह जाग्रत ऊर्जा जातक को वह अलौकिक दृष्टिकोण प्रदान करती है जिससे वह बच्चे को केवल जन्म नहीं देती है बल्कि उसे इस सृष्टि का सबसे सुदृढ़, सभ्य और व्यावहारिक इंसान अर्थात धैर्य की एक अधिष्ठात्री शिल्पी बनाती है।

ज्योतिषीय आयाम वृष माँ का व्यावहारिक स्वरूप मातृत्व चेतना का आध्यात्मिक संबंध
अधिपति ग्रह और मुख्य तत्व शुक्र ग्रह का ऐश्वर्य, कलात्मकता और पृथ्वी तत्व की अचल स्थिरता निष्काम कर्मयोग का संचार, सूक्ष्म पोषण और कड़े नैतिक मूल्य
प्रतीक चिन्ह और सूक्ष्म स्वरूप अपने शावकों की रक्षा हेतु किसी भी हद तक जाने वाला वनराज बैल मर्मभेदी शांत दृष्टि और स्वाभिमान का अभेद्य सुरक्षा कवच
मूल चेतना और शारीरिक संबंध कालपुरुष कुंडली का द्वितीय भाव, मुख मंडल, वाणी और भोजन चेतना अदृश्य सुदृढ़ रीढ़, स्पर्श चिकित्सा का हुनर और सूक्ष्म अवलोकन
कर्माधारित गुण और आत्मशुद्धि कृत्तिका नक्षत्र की दिव्य अग्नि, रोहिणी का वात्सल्य और मृगशिरा की खोज संकुचित अहंकार का विसर्जन और मौन तपस्या के माध्यम से चरित्र निर्माण

वृषभ राशि की माँ का नैसर्गिक स्वभाव और उच्च के चंद्रमा की पराकाष्ठा

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार वृषभ एक स्थिर और पृथ्वी तत्व प्रधान राशि है जिसके मुख्य अधिपति ग्रह सौंदर्य, ऐश्वर्य और कला के प्रदाता ग्रह शुक्र देव माने गए हैं। शुक्र देव की दिव्य उपस्थिति के कारण वृषभ राशि की माँ के भीतर एक अद्भुत सलीका, शिष्टाचार और उत्कृष्ट सूक्ष्म प्रबंधन जन्मजात रूप से कूट-कूटकर भरा होता है। वह बच्चे को जीवन के सर्वश्रेष्ठ साधन और विलासिता प्रदान करने के साथ-साथ एक कड़े और व्यावहारिक अनुशासन का अद्भुत मिश्रण देती है। पृथ्वी तत्व की प्रचुरता के कारण वह कभी भी काल्पनिक हवा-हवाई महलों में निवास नहीं करती है बल्कि पूरी तरह यथार्थ और धरातल की कड़वी सच्चाई की बुनियादी ज़मीन तैयार करके बच्चे के चरित्र की जड़ें मजबूत करती है।

ज्योतिष का एक अत्यंत गूढ़ और वैज्ञानिक सच यह है कि मन और मातृत्व का मुख्य कारक ग्रह चंद्रमा वृषभ राशि में हमेशा उच्च का माना जाता है। यही कारण है कि वृषभ राशि की माँ को शास्त्रों में ममता और वात्सल्य की पूर्णता की प्रतिमूर्ति माना गया है। माँ के जितने भी सर्वोत्तम दैवीय गुण हो सकते हैं जैसे अटूट क्षमा, असीम धैर्य, शीतलता और निरंतर पोषण का भाव, वे वृषभ माँ में अपने सर्वोच्च शिखर पर विद्यमान होते हैं। वह जातक के सबसे कटु व्यवहार को भी अमृत की भांति चुपचाप पी जाती है और कड़े संघर्षों के मध्य भी उसके सम्मुख एक अचल बरगद की भांति खड़ी रहती है। वह अराजकता और अस्थिरता से अत्यधिक नफरत करती है। बच्चे के जीवन में एक ठोस वित्तीय और मानसिक सुरक्षा स्थापित करना ही उसकी दृष्टि में बच्चे का सबसे बड़ा सुरक्षा का कवच होता है।

व्यावहारिक जीवन के कड़े मोड़ और वृष माँ का दिव्य कर्माधारित निर्णय

जब परिवार या गृहस्थ जीवन पर अचानक कोई भयंकर आर्थिक संकट आ जाए

व्यावहारिक जीवन में जब कड़े कर्माधारित लेख के प्रभाव से घर में कोई भयंकर आर्थिक संकट, धन का अभाव अथवा कड़े अवरोध अचानक उत्पन्न हो जाते हैं तो वृषभ राशि की माँ अपनी अद्भुत संसाधनशीलता की गुरु बनकर सामने आती है। बच्चा अपने व्यावहारिक जीवन में कभी यह जान ही नहीं पाता कि उसका परिवार किस भारी तंगी से गुजर रहा है। वह अपनी फटी हुई साड़ी को स्वयं सलीके से धारण कर लेगी, अपनी छोटी-छोटी खुशियों और आवश्यकताओं को सालों तक सहर्ष टाल देगी, परंतु बच्चे के उत्तम दूध, फल, शिक्षा और उसकी आवश्यक ज़रूरतों में कभी कोई कड़ाई या कमी नहीं आने देती है।

वह भारी अभावों के मध्य भी बच्चे को आत्म-सम्मान और संपूर्ण प्रभाव के साथ जीना सिखाती है। उसका यह कड़ा त्याग इतना अधिक मौन और गरिमापूर्ण होता है कि वह अपनी कुर्बानियों का कभी कोई शोर नहीं मचाती है। वह संपत्ति के संचय के साथ-साथ बच्चे के भीतर उच्च मानवीय संस्कारों का संचय करने में विश्वास रखती है। वह अभाव की कड़वी परछाईं को भी बच्चे की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही अपनी अचल बचत के बल पर पूरी तरह नष्ट कर देती है जो जातक को भविष्य के संकटों से सुरक्षित रखता है।

जब बच्चा संगति के दोष के कारण अपने सन्मार्ग और मूल्यों से भटकने लगे

यदि बच्चा किशोरावस्था के नैसर्गिक भटकाव में फंसकर अथवा किसी गलत संगति के प्रभाव में आकर जीवन में अपने नैतिक मूल्यों और कड़े संस्कारों से भटकने का प्रयास करता है तो वृषभ राशि की माँ घर में कोई व्यर्थ का चिल्लाने का ड्रामा या भावनात्मक विलाप नहीं करती है। वह बच्चे को अत्यंत गंभीरता के साथ अपने सम्मुख बिठाती है और उसे उसकी पारिवारिक जड़ों, कुल की मान-मर्यादा और कड़े नैतिक मूल्यों की याद दिलाती है।

उसका स्थिर स्वभाव और उसकी वैचारिक दृढ़ता बच्चे को किसी भी प्रकार के गर्त या पतन में गिरने से पहले ही एक सुदृढ़ एंकर की भांति थाम लेती है। वह अपने प्यार के अंधेपन में कभी भी बच्चे के दोषों को बढ़ावा नहीं देती बल्कि उसे समाज के सम्मुख कभी भी सस्ता या अमर्यादित बनते नहीं देख सकती है। उसका यह कड़ा और अचल रुख बच्चे को पुनः अपनी वास्तविक और सही ज़मीन पर वापस खींच लाता है जिससे जातक का भविष्य सदा के लिए निष्कंटक हो जाता है।

जब संपूर्ण संसार अथवा बाहरी दुनिया बच्चे को पूरी तरह रिजेक्ट कर दे

जब कभी कड़े समय के प्रभाव से पूरा समाज, मित्र अथवा बाहरी दुनिया बच्चे की योग्यता पर कड़ा संदेह व्यक्त करते हैं या उसे पूरी तरह रिजेक्ट कर देते हैं तब वृषभ राशि की माँ के भीतर छिपा हुआ वह अचल सुरक्षात्मक कवच साक्षात प्रकट हो जाता है। वह पूरे ब्रह्मांड के सम्मुख अपने बच्चे के पीछे हिमालय पर्वत की भांति पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी हो जाती है। वह बच्चे से केवल इतना ही कहती है कि तुम बिना किसी भय के अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ो, मैं तुम्हारे पीछे एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ी हूँ।

वृषभ राशि का प्रतीक चिन्ह स्वयं बैल है जो इस सृष्टि में अपार शक्ति, अदम्य सहनशीलता और सुरक्षा के मामले में सबसे सुदृढ़ माना जाता है। माँ का यही अटूट विश्वास और उसकी अचल उपस्थिति बच्चे के भीतर छिपे अनाम भय को क्षणभर में जलाकर भस्म कर देती है जिससे जातक प्रत्येक बड़ी असफलता के पश्चात दुगुनी भव्यता के साथ पुनः उठ खड़ा होने का आत्मबल प्राप्त कर लेता है।

जब बच्चा भयंकर मानसिक तनाव, अवसाद अथवा शारीरिक व्याधि से घिर जाए

यदि बच्चा किसी गंभीर शारीरिक कष्ट, दुर्घटना अथवा अत्यधिक मानसिक तनाव की चपेट में आ जाता है जहां उसका मन पूरी तरह अशांत हो जाता है तब वृषभ राशि की माँ साक्षात हीलिंग की देवी के रूप में स्थापित हो जाती है। वह किसी प्रकार की हवाई बातें करने के बजाय अत्यंत व्यावहारिक स्पर्श चिकित्सा और घरेलू औषधियों का सहारा लेती है।

वह बच्चे को अपनी पावन गोद में सुलाकर उसके मस्तक को सहलाती है और उसकी संपूर्ण मानसिक बेचैनी व नकारात्मक तरंगों को अपने भीतर पूरी तरह सोख लेती है। उच्च का चंद्रमा उसे मानसिक शांति और हीलिंग की वह सर्वोच्च पराकाष्ठा प्रदान करता है जिससे जातक केवल उसकी भौतिक उपस्थिति मात्र से ही स्वयं को पूरी तरह सुरक्षित और तनावमुक्त महसूस करने लगता है। उसकी साड़ी की परिचित खुशबू और उसके हाथों की कोमलता बच्चे के नर्वस सिस्टम के लिए दुनिया के सबसे बड़े शॉक एब्जॉर्बर की भांति कार्य करती है।

जब बच्चा अपने जीवन की पहली बड़ी सफलता की सीढ़ी पर पैर रखे

जब बच्चा अपने कठिन परिश्रम के बल पर अपने जीवन की पहली बड़ी सफलता प्राप्त करता है या कोई बड़ा पुरस्कार लेकर अत्यंत उत्साह के साथ घर लौटता है तो वृषभ राशि की माँ बहुत बड़ा शोर या दिखावे का जश्न नहीं मनाती है। उसकी प्रसन्नता अत्यंत शांत, गंभीर और गरिमापूर्ण होती है। वह सबसे पहले बच्चे के लिए उसका सबसे पसंदीदा मिष्ठान और पकवान अपने हाथों से बनाती है जो उसके मौन वात्सल्य का साक्षात प्रकटीकरण होता है।

इसके पश्चात वह एक कुशल मार्गदर्शिका की भांति बच्चे को उस तात्कालिक सफलता के मद में डूबने से रोकती है और उसे उस सफलता को जीवन में स्थायी करने के लिए सही निवेश तथा कड़े परिश्रम को जारी रखने की व्यावहारिक सलाह देती है। शुक्र देव की कलात्मकता और पृथ्वी तत्व का यथार्थवादी संतुलन जातक को हमेशा जमीन से जुड़े रहने की सर्वोपरि सीख देता है जिससे उसका राजयोग लंबे समय तक स्थिर बना रहता है।

अन्नपूर्णा का पावन स्वरूप और इंद्रियों का दिव्य वात्सल्य

वैदिक ज्योतिष के कड़े सिद्धांतों के अनुसार वृषभ राशि को कालपुरुष कुंडली के द्वितीय भाव का स्वामित्व प्राप्त है जो मुख्य रूप से मुख मंडल, वाणी, कुटुंब और भोजन चेतना को पूरी तरह नियंत्रित करता है। यही कारण है कि वृषभ राशि की माँ को शास्त्रों में साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है। वृषभ माँ के लिए प्रेम का अर्थ केवल हवा-हवाई बातें करना नहीं बल्कि बच्चे की पूर्ण तृप्ति और उसकी वास्तविक सेवा करना होता है। जब जातक व्यावहारिक संसार की भागदौड़ से पूरी तरह थककर घर वापस लौटता है, तो वह बिना कोई तीक्ष्ण सवाल किए चुपचाप उसके सम्मुख भोजन की थाली सजाकर रख देती है।

उस भोजन का दिव्य स्वाद ही उसकी माँ का सर्वोपरि आशीर्वाद होता है। शुक्र देव के प्रभाव स्वरूप वृषभ माँ का प्यार इंद्रियों के वात्सल्य से पूरी तरह जुड़ा होता है। उसके हाथ के बने भोजन का स्वाद, उसकी वाणी की गंभीरता और उसका स्नेहपूर्ण स्पर्श बच्चे के अवचेतन मन में सुरक्षा की एक ऐसी गहरी अनुभूति उत्पन्न कर देते हैं जो जातक को बड़े से बड़े मानसिक अवसाद और डिप्रेशन से सदा के लिए सुरक्षित रखती है। जब आप जीवन के कड़े थपेड़ों से विचलित होते हैं तब माँ के हाथ के भोजन की वह स्मृति आपकी रूह को परम शांति प्रदान करती है।

मौन तपस्या का वटवृक्ष और अचल कर्माधारित त्याग

कर्क राशि की माँ जहाँ समुद्र की लहरों की भांति अत्यधिक भावुक होकर निरंतर घटती-बढ़ती रहती है, वहीं वृषभ राशि की माँ उस अचल वटवृक्ष की भांति है जो दशकों तक एक ही स्थान पर पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा रहकर संपूर्ण परिवार को अपनी शीतल छाया प्रदान करता है। वृषभ माँ की ममता में कभी कोई कृत्रिम बदलाव या मूड स्विंग्स देखने को नहीं मिलते हैं। जातक जीवन में कितनी भी कड़वी गलतियां क्यों न करे या कितने भी वर्ष बीत जाएं, वह जब भी अपने घर की चौखट पर वापस लौटेगा, उसे अपनी माँ उसी अचल स्थिरता और अगाध वात्सल्य के साथ वहीं खड़ी मिलेगी।

वह पूरे कुटुंब की वह अदृश्य धुरी है जिसके इर्द-गिर्द सबकी खुशियां पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। वह स्वयं को पूरी तरह एक पत्थर की नींव बना लेती है ताकि घर की इमारत पर कभी कोई आंच न आने पाए। उसका संपूर्ण जीवन एक परम सात्विक निष्काम कर्मयोग की भांति होता है। उसने अपने बच्चे के सुरक्षित कल के निर्माण के लिए अपनी संपूर्ण व्यक्तिगत आकांक्षाओं, अपनी आज़ादी और अपनी पूरी दुनिया को एक रसोई और एक कक्ष की सीमाओं में पूरी तरह खामोशी से समेट लिया है, जिसका अहसान वह बच्चे पर कभी नहीं जताती है।

वृषभ राशि की माँ की छिपी हुई कड़वी छाया और सुधार के मुख्य क्षेत्र

प्रत्येक ब्रह्मांडीय ऊर्जा के दो मुख्य पहलू होते हैं और वृषभ राशि की माताओं के भीतर भी एक ऐसा गुप्त कड़ा अंधेरा छिपा होता है जिसे सुधारना उनके और उनके बच्चे के भविष्य के लिए परम आवश्यक माना जाता है। वृषभ माँ की सबसे बड़ी चुनौती उनका अत्यधिक जिद्दीपन और बदलाव का कड़ा विरोध करना माना जाता है। वह अपने स्थापित कड़े सिद्धांतों और पुरानी रीतियों को लेकर इतनी अधिक अडिग हो जाती है कि वह जाने-अनजाने बच्चे के नवीन तार्किक विचारों और आधुनिक दृष्टिकोण को स्वीकार करने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती है जिससे उनके मध्य एक अदृश्य वैचारिक कड़ापन उत्पन्न हो जाता है।

इसके अतिरिक्त उनके भीतर पजेसिवनेस की एक बहुत बड़ी कमजोरी पाई जाती है जिसके प्रभाव से वे बच्चे को अपनी एक संकुचित अचल संपत्ति समझने लगती हैं। बच्चे के जीवन में जब कोई नया व्यक्ति प्रवेश करता है या वह अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग करता है, तो वे अवचेतन मन में एक अज्ञात असुरक्षा का अनुभव करने लगती हैं जो बच्चे के विकास को बाधित कर देता है। वे कभी-कभी भावनाओं के सूक्ष्म आयाम से अधिक भौतिक सुख-सुविधाओं और संचय को ही सर्वोपरि मान लेती हैं। उनके भीतर क्रोध का संचय करने की एक अत्यंत भयंकर प्रवृत्ति होती है; वे छोटी-छोटी कड़वी बातों को भूलती नहीं हैं बल्कि उन्हें मन की गहराइयों में दबाकर रखती हैं जो समय आने पर एक प्रलयंकारी ज्वालामुखी की भांति अचानक फटता है और बच्चे के कोमल मन को झुलसा देता है। उन्हें यह आध्यात्मिक सत्य समझना होगा कि वटवृक्ष का वास्तविक धर्म केवल अपनी छाया में जकड़कर रखना नहीं है बल्कि पौधे को स्वतंत्र रूप से फलने-फूलने का मुक्त आकाश प्रदान करना भी है।

वृषभ राशि की माताओं के लिए विशेष कर्माधारित आत्म-सुधार तालिका

जीवन का सूक्ष्म पहलू वृष माँ के कड़े अवरोध ज्योतिषीय सुधार और कर्माधारित उपाय
वैचारिक लचीलापन अत्यधिक जिद्दीपन के कारण बच्चे के नए और आधुनिक विचारों को पूरी तरह नकार देना स्वभाव में लचीलापन लाएं; बच्चे को अपने सांचे में ढालने के बजाय उसे उसकी स्वतंत्र शक्ल लेने की आजादी दें
भावनात्मक अभिव्यक्ति केवल कर्म के माध्यम से पोषण करना और स्नेह के कोमल शब्दों व आलिंगन को व्यक्त न करना केवल पेट भरना प्यार नहीं है; बच्चे को समय-समय पर गले लगाकर शब्दों से अपनी कोमलता का अहसास भी अवश्य कराएं
पजेसिवनेस और स्पेस बच्चे को अपनी व्यक्तिगत संपत्ति मानकर उसके जीवन की स्वतंत्रता को संकुचित करना बच्चे को आत्मनिर्भर बनने दें; उसे अपनी परछाईं बनाने के स्थान पर उसका मुक्त आकाश बनने का प्रयास करें
क्रोध का संचय कड़वी बातों को मन में दबाकर रखना और अचानक प्रचंड ज्वालामुखी की भांति उग्र हो जाना अपने भीतर के इस संचित आवेग को दूर करने के लिए नियमित रूप से भगवान शिव की उपासना और मौन का सहारा लें

FAQ

वैदिक ज्योतिष में वृषभ राशि की माँ को धैर्य की अधिष्ठात्री क्यों कहा गया है

वृषभ राशि एक स्थिर और पृथ्वी तत्व प्रधान राशि है जो जातक को अदम्य सहनशीलता और चट्टान जैसी मजबूती प्रदान करती है। वृषभ राशि की माँ अपने बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए बड़ी से बड़ी कड़वी विपदाओं को भी अत्यंत शांत भाव से सहकर पूरे परिवार को एक सुदृढ़ आधार देती है।

क्या वृषभ माँ के हाथ के भोजन का बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य से कोई संबंध होता है

हाँ वृषभ राशि कालपुरुष कुंडली का द्वितीय भाव है जो भोजन चेतना का केंद्र है। उच्च के चंद्रमा के प्रभाव स्वरूप वृषभ माँ जब भोजन तैयार करती है तो वह अपनी सकारात्मक प्राण ऊर्जा उसमें स्थानांतरित कर देती है जो बच्चे के नर्वस सिस्टम को शांत करके उसे अवसाद से बचाती है।

रोहिणी नक्षत्र की वृष माँ अपने बच्चे को किस प्रकार प्रभावित करती है

रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि की असली आत्मा माना गया है जिसके देवता स्वयं प्रजापति ब्रह्मा हैं और जहां चंद्रमा उच्च का होता है। इस नक्षत्र के प्रभाव स्वरूप माँ का वात्सल्य अपनी चरम सीमा पर होता है और वह अपने बच्चे से बिना किसी सांसारिक शर्त के अगाध और निश्छल प्रेम करती है।

क्या वृषभ राशि की माँ अपने बच्चे के बचपन की यादों को सहेज कर रखती है

हाँ वृषभ राशि में संचय और यादों का एक अत्यंत पवित्र कोना होता है। वह अपने बच्चे के बचपन का पहला स्वेटर, उसकी पहली टूटी हुई पेंसिल और प्रत्येक उस कागज को अपनी यादों की तिजोरी में अत्यंत पवित्रता से संभालकर सुरक्षित रखती है क्योंकि वही उसकी पूरी दुनिया की सबसे बड़ी कमाई होती है।

कृत्तिका नक्षत्र की वृष माँ अपने बच्चे की कमियों को कैसे दूर करती है

कृत्तिका नक्षत्र के अधिपति देवता स्वयं अग्नि देव हैं जो शुद्धिकरण और तेज के मुख्य प्रतीक हैं। इस नक्षत्र के प्रभाव स्वरूप वृष माँ का स्वभाव अत्यंत अनुशासित होता है जो बच्चे के भीतर छिपे आलस्य और कड़े विकारों को अपनी शिक्षा की आग से जलाकर उसे कुंदन बना देती है।

अचल स्थिरता, अदम्य धैर्य और परम पोषण के सर्वोपरि प्रतीक महादेव और माता लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में स्थापित वृषभ राशि की माँ यह भलीभांति जानती है कि उसकी ममता केवल शब्दों का पाखंड नहीं बल्कि बच्चे के सुंदर भविष्य का निर्माण करने वाली एक अत्यंत पवित्र कर्माधारित जिम्मेदारी है। वह स्वयं को पूरी तरह मिट्टी में मिला देती है ताकि उसका पौधा इस संसार में एक विशाल और फलदार वृक्ष बनकर मस्तक ऊंचा कर सके। आपका यह कड़ा त्याग, आपकी यह मौन तपस्या और आपका यह अचल ठहराव इस ब्रह्मांड के इतिहास में एक अत्यंत पावन अनुष्ठान है, इसलिए स्वयं को कभी भी किसी संकुचित सीमा में हारा हुआ महसूस न होने दें। अपने भीतर छिपे उस उच्च के चंद्रमा के वात्सल्य और पृथ्वी तत्व के यथार्थवादी आचरण को पहचानिए तथा अपने अभेद्य सुरक्षा कवच के साये में रहकर निरंतर अपने बच्चे की रगों में स्थिरता, संस्कार और आरोग्यता का परम प्रकाश फैलाती रहिए।

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लेखक

अपर्णा पाटनी

अपर्णा पाटनी (63)


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