By पं. अभिषेक शर्मा
पृथ्वी तत्व की राशियों की विशेषताएं, गुण और ज्योतिषीय उपाय

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर तैयार किया गया है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए अपनी जन्म कुंडली देखें या किसी ज्योतिषी से परामर्श लें। चंद्र राशि वह राशि होती है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा स्थित होता है और यह आपके मन और भावनाओं को नियंत्रित करती है।
ज्योतिष शास्त्र में पृथ्वी तत्व की राशियों का विशेष महत्व है। शरीर के पांच तत्वों के आधार पर राशियों का विभाजन किया गया है और पृथ्वी इन तत्वों में से एक प्रमुख तत्व है। पृथ्वी तत्व की तीन राशियां हैं जो वृषभ, कन्या और मकर के नाम से जानी जाती हैं। इन तीनों राशियों के साथ बुध ग्रह का गहरा संबंध होता है जो बुद्धिमत्ता और संचार का प्रतीक है। ये राशियां धनवान, वाक्पटु और सुंदर मानी जाती हैं। पृथ्वी तत्व की ये राशियां व्यावहारिकता, स्थिरता और भौतिक सफलता के लिए प्रसिद्ध हैं। इन राशियों के जातक जमीन से जुड़े होते हैं और वास्तविकता में विश्वास रखते हैं। पृथ्वी तत्व की इन तीनों राशियों की अपनी विशिष्ट पहचान और गुण होते हैं जो उन्हें अन्य राशियों से अलग बनाते हैं।
पृथ्वी तत्व ज्योतिष शास्त्र में पांच मूल तत्वों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। पंचतत्व सिद्धांत के अनुसार शरीर और ब्रह्मांड का निर्माण पांच तत्वों से हुआ है जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश हैं। इन तत्वों के आधार पर बारह राशियों को विभाजित किया गया है। पृथ्वी तत्व स्थिरता, व्यावहारिकता और भौतिक सफलता का प्रतीक है। यह तत्व ठोसता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। पृथ्वी तत्व से जुड़ी राशियां यथार्थवादी और जमीनी सोच वाली होती हैं। ये राशियां भौतिक संसार से गहरा संबंध रखती हैं और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाती हैं। पृथ्वी तत्व की राशियों के जातक धैर्यवान, मेहनती और लक्ष्य केंद्रित होते हैं। वे अपने कार्यों में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखते हैं।
| तत्व | राशियां | मुख्य गुण |
|---|---|---|
| पृथ्वी | वृषभ, कन्या, मकर | स्थिरता, व्यावहारिकता, भौतिक सफलता |
| जल | कर्क, वृश्चिक, मीन | भावनात्मकता, संवेदनशीलता, अंतर्ज्ञान |
| अग्नि | मेष, सिंह, धनु | उत्साह, ऊर्जा, साहस |
| वायु | मिथुन, तुला, कुंभ | बुद्धिमत्ता, संचार, स्वतंत्रता |
शरीर के पांच तत्वों के आधार पर राशियों का वर्गीकरण ज्योतिष का आधारभूत सिद्धांत है। प्रत्येक तत्व तीन राशियों को नियंत्रित करता है। पृथ्वी तत्व वृषभ, कन्या और मकर राशियों को प्रभावित करता है। जल तत्व कर्क, वृश्चिक और मीन राशियों का स्वामी है। अग्नि तत्व मेष, सिंह और धनु राशियों को नियंत्रित करता है। वायु तत्व मिथुन, तुला और कुंभ राशियों पर शासन करता है। प्रत्येक तत्व अपनी राशियों को विशिष्ट गुण और व्यक्तित्व प्रदान करता है। पृथ्वी तत्व अपनी राशियों को स्थिरता और व्यावहारिकता देता है।
पृथ्वी तत्व से जुड़ी राशियां ठोस और स्थिर प्रकृति की होती हैं। ये राशियां यथार्थवादी दृष्टिकोण रखती हैं और कल्पना से अधिक वास्तविकता में विश्वास करती हैं। भौतिक संसार से गहरा जुड़ाव इन राशियों की पहचान है। धन, संपत्ति और भौतिक सुख इनके लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पृथ्वी तत्व की राशियां अत्यधिक मेहनती और परिश्रमी होती हैं। लक्ष्य प्राप्ति के लिए धैर्यपूर्वक प्रयास करना इनका स्वभाव है। विश्वसनीयता और जिम्मेदारी इन राशियों के मुख्य गुण हैं। व्यावहारिक सोच और तार्किक निर्णय लेना इन्हें पसंद है। स्थिरता और सुरक्षा इनकी प्राथमिकता होती है। परिवर्तन से अधिक निरंतरता को महत्व देते हैं।
तीनों पृथ्वी तत्व की राशियों के साथ बुध ग्रह का विशेष संबंध होता है। बुध ग्रह बुद्धिमत्ता, संचार और वाणी का कारक है। वृषभ राशि में बुध का प्रभाव व्यक्ति को वाक्पटु बनाता है। कन्या राशि में बुध स्वामी ग्रह है जो अत्यधिक शक्तिशाली होता है। मकर राशि में बुध व्यक्ति को चतुर और बुद्धिमान बनाता है। बुध का प्रभाव इन राशियों को विश्लेषणात्मक और तर्कशील बनाता है। संचार कौशल और भाषा में दक्षता बुध की देन है। व्यापार और वाणिज्य में सफलता बुध के कारण मिलती है। बुध की कृपा से ये राशियां धनवान और समृद्ध होती हैं। बुद्धिमत्ता और चतुराई इन राशियों की विशेषता है।
वृषभ राशि पृथ्वी तत्व की प्रथम और अत्यंत महत्वपूर्ण राशि है। यह राशि स्थिर प्रकृति की होती है और इसकी पहचान दृढ़ता और स्थिरता से होती है। वृषभ राशि का प्रतीक चिन्ह बैल है जो शक्ति और धैर्य का प्रतीक है। यह राशि भौतिक सुख और विलासिता से प्रेम करती है। प्रकृति और सौंदर्य के प्रति गहरा लगाव इस राशि की विशेषता है। वृषभ राशि के जातक कला और संगीत में रुचि रखते हैं। भोजन और आराम को महत्व देना इनका स्वभाव है। धन संचय और संपत्ति निर्माण में ये सिद्धहस्त होते हैं। वृषभ राशि की सबसे बड़ी शक्ति इनकी दृढ़ता और निष्ठा है। एक बार निश्चय कर लेने के बाद अपने लक्ष्य से नहीं हटते। परंपरा और स्थिरता को महत्व देना इनकी प्रकृति है।
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है जो सौंदर्य, प्रेम और विलासिता का कारक है। शुक्र का प्रभाव वृषभ राशि के जातकों को कलात्मक और सौंदर्य प्रेमी बनाता है। इस राशि में चंद्रमा अत्यधिक शक्तिशाली होता है और उच्च का माना जाता है। चंद्रमा की शक्ति से वृषभ राशि के जातक भावुक और संवेदनशील होते हैं। बुध ग्रह वृषभ राशि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बुध का प्रभाव इन्हें वाक्पटु और बुद्धिमान बनाता है। शुक्र और चंद्रमा का संयुक्त प्रभाव वृषभ राशि को विशेष बनाता है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति जातक को समृद्ध और सफल बनाती है। वृषभ राशि में स्थित ग्रह व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं।
वृषभ राशि को सौंदर्य की राशि माना जाता है। इस राशि के जातक शारीरिक रूप से आकर्षक होते हैं। साहस इनका प्रमुख गुण है और किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार रहते हैं। आत्मविश्वास इनके व्यक्तित्व की विशेषता है। धनवान बनने की क्षमता इस राशि में स्वाभाविक रूप से होती है। संपत्ति और धन का संचय करना इन्हें पसंद है। कला, संगीत और सौंदर्य में गहरी रुचि होती है। जीवन के भौतिक पहलुओं को महत्व देते हैं।
वृषभ राशि की सबसे बड़ी कमजोरी जिद और हठधर्मिता है। एक बार किसी बात पर अड़ जाएं तो पीछे हटना मुश्किल होता है। लचीलेपन की कमी समस्याएं पैदा कर सकती है। क्रोधी स्वभाव भी इस राशि की कमजोरी है। छोटी बातों पर भी जल्दी क्रोधित हो जाते हैं। हालांकि क्रोध जल्दी शांत भी हो जाता है। जिद और क्रोध संबंधों में समस्या बना सकते हैं। परिवर्तन को स्वीकार करने में कठिनाई होती है। अपनी आदतों और विचारों पर अटल रहना चाहते हैं। भौतिकता की अति भी नुकसानदायक हो सकती है। आलस्य की प्रवृत्ति कभी कभी दिखाई देती है।
वृषभ राशि के जातकों को चिकित्सक या ज्योतिषी से परामर्श लेकर पन्ना रत्न धारण करना चाहिए। पन्ना बुध ग्रह का रत्न है जो बुद्धिमत्ता और संचार में सुधार लाता है। भगवान शिव की पूजा वृषभ राशि के जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। नियमित रूप से शिव मंदिर में दर्शन करना चाहिए। सोमवार के दिन व्रत और शिव पूजा करना शुभ होता है। शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप लाभकारी है। रुद्राभिषेक करवाना विशेष फलदायी होता है। सफेद वस्त्र धारण करना और सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए। शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करना धन वृद्धि के लिए उत्तम है। दूध और दही का दान करना शुभ फल देता है।
कन्या राशि पृथ्वी तत्व की दूसरी और सबसे बड़ी राशि मानी जाती है। यह राशि पृथ्वी तत्व का पूर्ण प्रतिनिधित्व करती है और इसके सभी गुणों को धारण करती है। कन्या राशि का प्रतीक चिन्ह कुंवारी कन्या है जो शुद्धता और पूर्णता का प्रतीक है। यह राशि विश्लेषणात्मक सोच और विस्तार पर ध्यान देने के लिए प्रसिद्ध है। कन्या राशि के जातक अत्यधिक व्यवस्थित और अनुशासित होते हैं। सफाई और व्यवस्थितता इनकी पहचान है। बुद्धिमत्ता और तर्कशक्ति इस राशि के मुख्य गुण हैं। सेवा भाव और दूसरों की सहायता करने की इच्छा स्वाभाविक होती है। पूर्णतावाद की खोज इनकी विशेषता है। हर काम को उत्कृष्टता के साथ करना चाहते हैं। स्वास्थ्य और पोषण के प्रति सजग रहते हैं।
कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह है जो इस राशि में अपनी पूर्ण शक्ति में होता है। बुध की स्वराशि होने के कारण कन्या राशि में बुध अत्यधिक प्रभावशाली होता है। बुध का प्रभाव इस राशि के जातकों को असाधारण बुद्धिमान बनाता है। विश्लेषणात्मक क्षमता और तार्किक सोच बुध की देन है। संचार कौशल में उत्कृष्टता बुध के कारण मिलती है। लेखन और वाणी में दक्षता स्वाभाविक होती है। बुध का प्रभाव व्यापार और वाणिज्य में सफलता दिलाता है। गणितीय और वैज्ञानिक सोच बुध की विशेषता है। कन्या राशि पृथ्वी तत्व की सबसे बुद्धिमान राशि मानी जाती है। बुध की पूर्ण कृपा से यह राशि विशिष्ट गुणों से संपन्न होती है।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| चतुराई | बुद्धिमत्ता और चालाकी से काम करना |
| वाक्पटुता | बोलने और संचार में उत्कृष्टता |
| प्रबंधन | संगठन और व्यवस्था में दक्षता |
| धन भाग्य | आर्थिक मामलों में सौभाग्यशाली |
| विश्लेषण | गहन विश्लेषणात्मक क्षमता |
| पूर्णतावाद | हर काम में उत्कृष्टता की खोज |
कन्या राशि के जातकों में चतुराई और चालाकी का गुण होता है। ये परिस्थितियों को समझकर बुद्धिमानी से काम करते हैं। वाक्पटुता इस राशि की विशेष पहचान है। संचार और अभिव्यक्ति में ये उत्कृष्ट होते हैं। प्रबंधन कौशल इनका मजबूत पक्ष है। संगठन और व्यवस्था बनाए रखने में सिद्धहस्त होते हैं। धन के मामले में अत्यधिक भाग्यशाली होते हैं। आर्थिक सफलता इन्हें आसानी से मिलती है। धन संचय की कला स्वाभाविक रूप से होती है। विश्लेषणात्मक सोच हर निर्णय में दिखाई देती है।
कन्या राशि की सबसे बड़ी कमजोरी स्वार्थ और आत्मकेंद्रित होना है। अपने हित को सर्वोपरि रखने की प्रवृत्ति होती है। दूसरों के बारे में सोचने से पहले अपना फायदा देखते हैं। यह स्वभाव संबंधों में समस्या पैदा कर सकता है। अत्यधिक आलोचनात्मक होना भी एक कमजोरी है। छोटी छोटी बातों में भी कमियां खोजने की प्रवृत्ति होती है। पूर्णतावाद की अति समस्याजनक हो सकती है। असंभव मानकों की अपेक्षा रखना तनाव पैदा करता है। चिंता और तनाव की प्रवृत्ति अधिक होती है। स्वास्थ्य को लेकर अति चिंतित रहते हैं। लचीलेपन की कमी कभी कभी दिखाई देती है।
कन्या राशि के जातकों को सलाह लेकर नीलम या हीरा धारण करना चाहिए। नीलम शनि का रत्न है और हीरा शुक्र का रत्न है। दोनों रत्न विशेष परिस्थितियों में लाभकारी होते हैं। गायत्री मंत्र का जाप कन्या राशि के जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। प्रातःकाल सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है। माता गायत्री की पूजा करना शुभ है। बुधवार के दिन विशेष पूजा और मंत्र जाप करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र धारण करना और हरी वस्तुओं का दान करना लाभकारी है। विद्यार्थियों की सहायता करना और शिक्षा दान देना पुण्यकारी है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा समृद्धि देती है।
मकर राशि पृथ्वी तत्व की तीसरी और अंतिम राशि है। यह राशि महत्वाकांक्षा और सफलता के लिए प्रसिद्ध है। मकर राशि का प्रतीक चिन्ह मकर या बकरा है जो पर्वत पर चढ़ने का प्रतीक है। यह राशि उच्च लक्ष्यों और उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व करती है। मकर राशि के जातक अत्यधिक महत्वाकांक्षी और लक्ष्य केंद्रित होते हैं। कड़ी मेहनत और अनुशासन इनकी पहचान है। सफलता की सीढ़ी धीरे धीरे चढ़ना इनका स्वभाव है। धैर्य और दृढ़ संकल्प से काम करते हैं। करियर और पेशेवर सफलता इनकी प्राथमिकता होती है। जिम्मेदारी और कर्तव्य को गंभीरता से लेते हैं। परंपरा और अनुशासन को महत्व देना इनकी प्रकृति है। समय के साथ ये अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ बन जाते हैं।
मकर राशि का स्वामी शनि ग्रह है जो कर्म और न्याय का कारक है। शनि का प्रभाव मकर राशि के जातकों को अनुशासित और मेहनती बनाता है। शनि की कृपा से धीरे धीरे लेकिन निश्चित सफलता मिलती है। मकर राशि में बुध व्यक्ति को बुद्धिमान और चतुर बनाता है। बुध का प्रभाव विश्लेषणात्मक क्षमता और तार्किक सोच देता है। शनि और बुध का संयुक्त प्रभाव अत्यंत शक्तिशाली होता है। बुद्धिमत्ता और अनुशासन का संयोजन सफलता की गारंटी देता है। मकर राशि में बुध व्यावहारिक बुद्धि प्रदान करता है। व्यापार और प्रबंधन में सफलता बुध के कारण मिलती है। शनि की मेहनत और बुध की बुद्धि से जातक उन्नति करते हैं।
मकर राशि व्यक्ति को चतुर और चालाक बनाती है। परिस्थितियों का लाभ उठाना इन्हें आता है। अवसरवादी होते हुए भी व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हैं। धनवान बनने की प्रबल इच्छा और क्षमता होती है। कड़ी मेहनत से धन और संपत्ति अर्जित करते हैं। अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना इनका लक्ष्य होता है। गहन अध्ययन और अनुभव से ज्ञान प्राप्त करते हैं। महत्वाकांक्षा इन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। हर लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प होता है।
मकर राशि की सबसे बड़ी कमजोरी अहंकार और घमंड है। सफलता मिलने पर अहंकार आ सकता है। अपनी उपलब्धियों पर घमंड करने की प्रवृत्ति होती है। यह स्वभाव संबंधों में समस्या पैदा करता है। दूसरों को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति हो सकती है। अत्यधिक महत्वाकांक्षा भी नुकसानदायक हो सकती है। सफलता के लिए नैतिकता की अनदेखी कर सकते हैं। भावनाओं की कमी दिखाई दे सकती है। व्यावहारिकता की अति संवेदनशीलता को कम करती है। कठोर और निर्दयी प्रतीत हो सकते हैं। परिवार और रिश्तों को नजरअंदाज कर सकते हैं। कार्य और जीवन में असंतुलन हो सकता है।
मकर राशि के जातकों को सलाह लेकर पन्ना रत्न धारण करना चाहिए। पन्ना बुध का रत्न है जो बुद्धिमत्ता बढ़ाता है। सूर्य की पूजा मकर राशि के जातकों के लिए अत्यंत फलदायी है। प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करना नियमित रूप से करना चाहिए। सूर्य मंत्र का जाप लाभकारी होता है। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ विशेष शुभ है। रविवार के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा करनी चाहिए। लाल रंग के वस्त्र धारण करना और लाल वस्तुओं का दान करना चाहिए। गेहूं और गुड़ का दान रविवार को करना शुभ है। शनिवार को शनि देव की पूजा भी आवश्यक है। तेल का दान करना और गरीबों की सेवा करना पुण्यकारी है। हनुमान चालीसा का पाठ शक्ति और साहस देता है।
तीनों पृथ्वी तत्व की राशियां अपने आप में विशिष्ट और अलग हैं। वृषभ राशि सौंदर्य और विलासिता से जुड़ी है। यह राशि भौतिक सुख और आराम को महत्व देती है। शुक्र का प्रभाव इसे कलात्मक और सौंदर्यप्रिय बनाता है। कन्या राशि बुद्धिमत्ता और विश्लेषण से संबंधित है। यह राशि पूर्णतावाद और व्यवस्था की खोज करती है। बुध का पूर्ण प्रभाव इसे अत्यधिक बुद्धिमान बनाता है। मकर राशि महत्वाकांक्षा और सफलता से जुड़ी है। यह राशि उच्च लक्ष्यों और उपलब्धियों को महत्व देती है। शनि का प्रभाव इसे अनुशासित और मेहनती बनाता है। तीनों राशियों में व्यावहारिकता और स्थिरता समान है।
| विशेषता | वृषभ | कन्या | मकर |
|---|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | शुक्र | बुध | शनि |
| मुख्य गुण | सौंदर्य, स्थिरता | बुद्धिमत्ता, विश्लेषण | महत्वाकांक्षा, अनुशासन |
| शक्ति | धन, साहस | चतुराई, प्रबंधन | विशेषज्ञता, सफलता |
| कमजोरी | जिद, क्रोध | स्वार्थ | अहंकार |
| उपयुक्त रत्न | पन्ना | नीलम, हीरा | पन्ना |
| पूजा | भगवान शिव | गायत्री मंत्र | सूर्य देव |
वृषभ राशि शुक्र के स्वामित्व में सौंदर्य और स्थिरता का प्रतीक है। इसकी मुख्य शक्ति धन और साहस है लेकिन जिद और क्रोध इसकी कमजोरी है। कन्या राशि बुध के स्वामित्व में बुद्धिमत्ता और विश्लेषण को दर्शाती है। चतुराई और प्रबंधन इसकी ताकत है जबकि स्वार्थ इसकी कमजोरी है। मकर राशि शनि के स्वामित्व में महत्वाकांक्षा और अनुशासन का प्रतीक है। विशेषज्ञता और सफलता इसकी शक्ति है लेकिन अहंकार इसकी कमजोरी है।
तीनों पृथ्वी राशियों में कुछ समान गुण होते हैं। व्यावहारिक दृष्टिकोण और यथार्थवादी सोच सभी में होती है। धन और भौतिक सफलता के प्रति रुचि समान है। स्थिरता और विश्वसनीयता तीनों की पहचान है। मेहनत और परिश्रम से काम करना सभी का स्वभाव है। लक्ष्य केंद्रित होना और दृढ़ संकल्प सामान्य गुण हैं। बुध ग्रह का प्रभाव तीनों पर होता है। परंतु प्रत्येक राशि की अपनी विशिष्टता है। वृषभ सौंदर्य को, कन्या बुद्धि को और मकर सफलता को प्राथमिकता देती है। स्वामी ग्रह के अनुसार व्यक्तित्व भिन्न होता है। प्रत्येक राशि की अपनी शक्तियां और कमजोरियां हैं।
पृथ्वी तत्व की तीनों राशियों के जातकों को अपनी शक्तियों का सदुपयोग करना चाहिए। व्यावहारिक दृष्टिकोण और मेहनत से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। अपनी कमजोरियों को पहचानना और उन पर काम करना आवश्यक है। जिद, स्वार्थ और अहंकार से बचना चाहिए। संबंधों में लचीलापन और समझ बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता का संतुलन बनाना चाहिए। ज्योतिषीय उपायों का पालन करना लाभकारी होता है। रत्न धारण करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। नियमित पूजा और मंत्र जाप करना शुभ है। दान और सेवा से पुण्य अर्जित होता है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।
पृथ्वी राशियों के जातकों में सफल होने की सभी क्षमताएं होती हैं। व्यावहारिक दृष्टिकोण और मेहनत से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। धैर्य और दृढ़ संकल्प से काम करना आवश्यक है। बुद्धिमत्ता और विश्लेषण क्षमता का विकास करना चाहिए। संबंधों में संवेदनशीलता और समझ बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भौतिक सफलता के साथ आध्यात्मिक विकास भी आवश्यक है।
पृथ्वी तत्व की तीनों राशियां वृषभ, कन्या और मकर अपनी विशिष्टताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। ये राशियां धनवान, वाक्पटु और सुंदर मानी जाती हैं। बुध ग्रह का इन तीनों राशियों के साथ विशेष संबंध है। वृषभ राशि सौंदर्य और स्थिरता का प्रतीक है। कन्या राशि बुद्धिमत्ता और विश्लेषण की पहचान है। मकर राशि महत्वाकांक्षा और सफलता का प्रतिनिधित्व करती है। प्रत्येक राशि की अपनी शक्तियां और कमजोरियां हैं। ज्योतिषीय उपायों से इन कमजोरियों को दूर किया जा सकता है। पृथ्वी तत्व की राशियां व्यावहारिकता और भौतिक सफलता के लिए जानी जाती हैं।
1. पृथ्वी तत्व की राशियां कौन सी हैं?
पृथ्वी तत्व की तीन राशियां हैं जो वृषभ, कन्या और मकर हैं। ये राशियां स्थिरता, व्यावहारिकता और भौतिक सफलता के लिए प्रसिद्ध हैं।
2. पृथ्वी राशियों के साथ बुध का क्या संबंध है?
बुध ग्रह तीनों पृथ्वी राशियों के साथ विशेष संबंध रखता है। कन्या का स्वामी बुध है और वृषभ तथा मकर में भी बुध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. वृषभ राशि की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
वृषभ राशि की सबसे बड़ी कमजोरी जिद और क्रोधी स्वभाव है। हठधर्मिता और लचीलेपन की कमी समस्याएं पैदा कर सकती है।
4. कन्या राशि के जातक किन क्षेत्रों में सफल होते हैं?
कन्या राशि के जातक प्रबंधन, लेखन, विश्लेषण, व्यापार और वाणिज्य में अत्यधिक सफल होते हैं। बुद्धिमत्ता और चतुराई इनकी विशेषता है।
5. मकर राशि के लिए कौन सा उपाय सबसे फलदायी है?
मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य की पूजा सबसे फलदायी है। प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करना और सूर्य मंत्र का जाप लाभकारी है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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