मेष त्रिकोण: एक राशि, तीन अलग व्यक्तित्व

By पं. सुव्रत शर्मा

मेष राशि के अंदर तीन नक्षत्र और उनकी अनूठी मानसिकता

मेष त्रिकोण – तीन नक्षत्र, तीन व्यक्तित्व

सामग्री तालिका

मेष राशि को अक्सर सिर्फ बहादुर, तेज और आग से भरी राशि के रूप में बताया जाता है, लेकिन पूरा सच इससे कहीं अधिक गहरा है। हर मेष जातक एक जैसा व्यवहार क्यों नहीं करता, यही प्रश्न इस चर्चा की असली शुरुआत बनता है। कुछ मेष जातक अत्यंत संवेदनशील होते हैं, कुछ असाधारण रूप से आक्रामक और कुछ आश्चर्यजनक रूप से संयमी। इसका रहस्य मेष राशि में स्थित तीन नक्षत्रों की संरचना, उनके स्वामी ग्रहों और उनकी सूक्ष्म ऊर्जाओं में छिपा है।

मेष राशि 0 डिग्री से 30 डिग्री तक फैली रहती है और इसी दायरे में अश्विनी, भरणी और कृतिका नक्षत्र अपने विशेष गुणों के साथ सक्रिय रहते हैं। इन नक्षत्रों की डिग्री, प्रतिशत प्रभाव, देवता, प्रतीक और गुण मिलकर यह तय करते हैं कि कोई मेष जातक तेजतर्रार चिकित्सक बनेगा, संघर्षशील व्यवसायी बनेगा या अनुशासनप्रिय प्रशासक।


मेष राशि के तीन नक्षत्रों का डिग्री आधारित विस्तार

ज्योतिषीय दृष्टि से सबसे पहले डिग्री समझना आवश्यक है, क्योंकि जन्मकुंडली में चंद्रमा की सटीक स्थिति से ही पता चलता है कि व्यक्ति किस नक्षत्र के प्रभाव में जन्मा है।

अश्विनी नक्षत्र
विस्तार: 0 डिग्री से 13 डिग्री 20 मिनट
नक्षत्र स्वामी: केतु
मूल ऊर्जा: वेग, तेज निर्णय, नई शुरुआत, उपचार की क्षमता

भरणी नक्षत्र
विस्तार: 13 डिग्री 20 मिनट से 26 डिग्री 40 मिनट
नक्षत्र स्वामी: शुक्र
मूल ऊर्जा: संघर्ष, सहनशीलता, सृजन, गहन अनुभव

कृतिका नक्षत्र (केवल प्रथम चरण मेष में)
विस्तार: 26 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री 00 मिनट
नक्षत्र स्वामी: सूर्य
मूल ऊर्जा: शुद्धिकरण, तेज, नेतृत्व, स्पष्टता

मेष राशि के पूरे 30 डिग्री में अश्विनी और भरणी का प्रभाव लगभग 44.4 प्रतिशत - 44.4 प्रतिशत तक फैला रहता है, जबकि कृतिका का केवल 11.2 प्रतिशत भाग मेष में आता है। इसका अर्थ है कि अधिकतर मेष जातक या तो अश्विनी प्रधान होंगे या भरणी प्रधान, जबकि कृतिका प्रधान लोग संख्यात्मक रूप से कम होंगे, पर प्रभाव में बहुत तेज दिखाई देंगे।

इसी गणित के कारण एक मेष जातक चिकित्सक बनकर लोगों को ठीक करता है, दूसरा कलाकार बनकर भावनाओं को रूप देता है और तीसरा कठोर प्रशासनिक अधिकारी बनकर व्यवस्था को नियंत्रित करता है।


प्रतीक, देवता और पशु आत्मा: नक्षत्रों की जड़ ऊर्जा

प्रत्येक नक्षत्र के प्रतीक और देवता उसके मूल स्वभाव को समझने की चाबी होते हैं। यह संयोजन भीतर छिपी प्रवृत्तियों को बड़ी साफ़ी से सामने लाता है।

विशेषता अश्विनी भरणी कृतिका (प्रथम चरण)
प्रतीक घोड़े का सिर योनि उस्तरा या कुल्हाड़ी
देवता अश्विनी कुमार, देवताओं के वैद्य यमराज, धर्म और न्याय के देवता अग्नि, पवित्रता और ऊर्जा
पशु आत्मा नर घोड़ा, स्वतंत्रता गज या हाथी, धैर्य और भार सहना मेढ़ा या बकरा, दृढ़ संकल्प
स्वभाव बिजली जैसा तेज, चंचल गंभीर, सहनशील, कभी चरमपंथी स्पष्टवादी, नेतृत्वकारी, क्रोधी
नक्षत्र स्वामी केतु, अचानक परिवर्तन शुक्र, कला और भोग सूर्य, सत्ता और अनुशासन
प्राणी गुण अश्व, स्वतंत्रता प्रेमी गज, जिम्मेदारियों का बोझ मेढ़ा, अड़ियल और साहसी
योनि अश्व, गतिशील गज, राजसी मेढ़ा, जुझारू
गण देव, निस्वार्थ मनुष्य, कर्म प्रधान राक्षस, तार्किक और कठोर

अश्विनी का घोड़े जैसा प्रतीक निरंतर गति और स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है। भरणी की योनि सृजन, जन्म और पुनर्जन्म का संकेत देती है। कृतिका का उस्तरा या कुल्हाड़ी हर प्रकार के छेदन और अनावश्यक को काटकर अलग करने की प्रक्रिया को दिखाता है। यही वजह है कि कृतिका जातक अक्सर कटु वाणी से लोगों को सच का सामना करा देते हैं।


कृतिका का अकेला चरण: दो राशियों के बीच खड़े लोग

अश्विनी और भरणी के सारे चारों चरण मेष राशि के भीतर ही आते हैं, इसलिए इन दोनों नक्षत्रों के जातक शुद्ध रूप से मेष स्वभाव की अग्नि, जल्दबाज़ी और पहल करने वाले गुण लेकर जन्म लेते हैं।

कृतिका नक्षत्र का केवल पहला चरण मेष में होता है, जबकि बाकी तीन चरण वृषभ राशि में चले जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कृतिका नक्षत्र वाला मेष जातक अंदर से दो दुनियाओं के बीच खड़ा महसूस कर सकता है। उसमें मेष की तीव्र अग्नि भी रहती है और वृषभ की ओर बढ़ने वाली स्थिरता की झलक भी दिखने लगती है। ऐसे लोग अक्सर अपेक्षाकृत अधिक परिपक्व और विचारशील माने जाते हैं, क्योंकि वे जल्दबाज़ी और स्थिरता दोनों का स्वाद चख चुके होते हैं।


करियर में कौन सा नक्षत्र किस दिशा में ले जाता है?

जीवन के कर्मक्षेत्र में नक्षत्र की भूमिका अत्यंत व्यावहारिक रूप से सामने आती है। एक ही मेष राशि के अंदर तीन बिल्कुल अलग करियर रुझान दिखाई दे सकते हैं।

अश्विनी नक्षत्र और करियर

अश्विनी नक्षत्र के लोग तेज, सक्रिय और जोखिम लेने में आगे रहते हैं। ऐसे जातक अक्सर इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं

  • चिकित्सा, विशेषकर सर्जरी
  • स्पोर्ट्स, एथलीट, कोच, फिटनेस संबंधित कार्य
  • ट्रैवल, पायलट, तेज निर्णय वाली सेवाएँ
  • आपातकालीन सेवाएँ, जहाँ तुरन्त निर्णय लेना पड़ता है

इनकी विशेषता यह होती है कि ये काम को जल्दी शुरू करते हैं और तेज रफ्तार से आगे बढ़ते हैं। अगर सही दिशा और अनुशासन मिल जाए तो ये असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं। अगर अनुशासन की कमी हो तो इनके जीवन में कई अधूरे प्रोजेक्ट और अचानक बदलाव जैसे अनुभव दिखाई देते हैं।

भरणी नक्षत्र और करियर

भरणी नक्षत्र शुक्र द्वारा शासित होने के कारण सौंदर्य, रचनात्मकता और संसाधनों से जुड़ा हुआ है। यहाँ से जुड़े मेष जातक अक्सर इन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं

  • व्यापार और उद्यमिता
  • कला, अभिनय, सिनेमा, मनोरंजन उद्योग
  • कानून, न्याय से जुड़े कार्य
  • ऐसा काम जहाँ लंबे समय तक बोझ, जिम्मेदारी और संघर्ष बना रहता है

भरणी जातक भीतर से बहुत गहरा सहनशील स्वभाव रखते हैं। वे कई बार जीवन में शून्य से शुरुआत कर अपनी मेहनत से साम्राज्य खड़ा करते हैं। उनके जीवन का बड़ा सत्य यह होता है कि एक बार किसी मृत्यु तुल्य कष्ट या भारी नुकसान के बाद वे भीतर से पूरी तरह बदल जाते हैं और वही मोड़ उनका असली उन्नति बिंदु बन जाता है।

कृतिका नक्षत्र और करियर

कृतिका नक्षत्र अग्नि और सूर्य के प्रभाव में चलता है, इसलिए यहाँ जन्मे मेष जातक

  • सरकारी सेवाएँ
  • सेना, पुलिस, सुरक्षा और रक्षा
  • प्रशासन, प्रबंधन, नेतृत्वकारी पद
  • वह क्षेत्र जहाँ निर्णय कठोर, निष्पक्ष और त्वरित लेने पड़ते हैं

इन लोगों की वाणी में स्वाभाविक तेज और अधिकार झलकता है। वे गलत बातों को काटकर अलग कर देना अपना धर्म मानते हैं। यदि आत्मसंयम हो तो ये समाज के लिए एक मजबूत स्तंभ बनते हैं, यदि अहंकार हावी हो जाए तो उनके निर्णय अत्यधिक कठोर भी महसूस हो सकते हैं।


प्रेम, परिवार और भावनाओं पर नक्षत्रों का प्रभाव

अश्विनी नक्षत्र और प्रेम

अश्विनी जातक प्रेम में अत्यंत उत्साही होते हैं। इन्हें रिश्ते में रोमांच और नयापन पसंद रहता है। ये जल्दी जुड़ जाते हैं, लेकिन उतनी ही तेजी से ऊब भी सकते हैं। इन्हें

  • संबंध में पर्याप्त स्पेस चाहिए
  • अत्यधिक बंधन या नियंत्रण बिल्कुल पसंद नहीं
  • साथी के साथ यात्रा, नए अनुभव, साहसिक गतिविधियाँ पसंद

कभी-कभी इनकी तेज़ रफ्तार साथी की भावनाओं को समझने में बाधा बन सकती है, इसलिए भावनात्मक संवेदनशीलता सीखना इनके लिए महत्वपूर्ण होता है।

भरणी नक्षत्र और प्रेम

भरणी का प्रेम बहुत गहरा, कर्मिक और कभी-कभी अत्यधिक अधिकार वाला होता है।

  • ये बेहद वफादार होते हैं
  • अपने साथी के लिए बहुत कुछ सहन कर लेते हैं
  • भीतर से डर होता है कि जिसे प्रेम दिया है, वह खो न जाए

यदि इन्हें विश्वासघात महसूस हो तो ये यम की तरह कठोर हो सकते हैं। इन्हें संतुलन सीखना आवश्यक है, ताकि प्रेम को बोझ या नियंत्रण में न बदल दें।

कृतिका नक्षत्र और प्रेम

कृतिका जातक अपने परिवार और अपने प्रियजनों के लिए बहुत रक्षात्मक होते हैं।

  • इन्हें संबंध में सम्मान अत्यंत आवश्यक लगता है
  • ये प्रेम से अधिक आत्मसम्मान पर ध्यान देते हैं
  • स्वभाव कभी-कभी रूखा या अत्यधिक सीधा लग सकता है

अगर इन्हें सम्मान और स्पष्ट संवाद मिले तो ये लंबे समय तक टिकाऊ और संरक्षक साथी बनते हैं। यदि इन्हें झूठ, दिखावा या कपट दिख जाए तो ये बिना हिचक रिश्ते को काटकर अलग कर भी सकते हैं।


मानसिक शक्ति, धन और प्रतिष्ठा में नक्षत्रों का प्रतिशत आधारित प्रभाव

मेष राशि में अलग-अलग जीवन क्षेत्रों पर नक्षत्रों का अलग प्रतिशत प्रभाव माना जाता है, जो समझने पर पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है।

1. मानसिक शक्ति और स्वभाव - अश्विनी नक्षत्र लगभग 80 प्रतिशत तक प्रभावशाली माना जाता है।

  • सोच बहुत तेज
  • समस्याओं का समाधान तुरंत
  • धैर्य में अक्सर कमी
  • कई अश्विनी जातकों में नींद में चलने या अत्यधिक स्वप्न देखने की प्रवृत्ति भी देखी गई है

2. धन और भौतिक सुख - भरणी नक्षत्र लगभग 90 प्रतिशत तक प्रभाव दिखाता है।

  • पैसा, विलासिता, संसाधन जुटाने की अटूट इच्छा
  • तब तक चैन नहीं, जब तक अपनी मेहनत से अपना साम्राज्य न बना लें
  • जीवन में एक बड़ा घाटा या झटका, जिसके बाद भाग्य खुलता है

3. सामाजिक प्रतिष्ठा और क्रोध - कृतिका नक्षत्र लगभग 70 प्रतिशत तक प्रभाव डालता है।

  • समाज में मजबूत छवि
  • वाणी का प्रभाव गहरा
  • गुस्सा तीखा, लेकिन अक्सर अनुशासन के लिए

अश्विनी का गुस्सा तेज़ और क्षणिक होता है, भरणी का गुस्सा भीतर गहरा बैठ जाता है, जबकि कृतिका का गुस्सा सिद्धांत और अनुशासन को बचाने के लिए सामने आता है।


स्वास्थ्य, शरीर और नक्षत्रों का संबंध

नक्षत्रों का असर केवल स्वभाव तक सीमित नहीं रहता बल्कि शरीर के अलग हिस्सों पर भी अलग प्रकार से दिखाई देता है।

अश्विनी नक्षत्र
घुटनों और पैरों के ऊपरी हिस्से से जुड़ा माना जाता है।

  • यदि ये शारीरिक रूप से सक्रिय न रहें तो मानसिक तनाव बढ़ सकता है
  • तेज ऊर्जा को सही दिशा में न लगाया जाए तो बेचैनी बढ़ती है

भरणी नक्षत्र
सिर के अंदरूनी हिस्सों और आंखों पर प्रभाव दिखा सकता है।

  • इन्हें मानसिक शांति पाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है
  • अधिक चिंता या भावनात्मक दबाव सिरदर्द या थकान का कारण बन सकता है

कृतिका नक्षत्र
कूल्हों, कमर के ऊपरी हिस्से और पाचन से जुड़ा माना जाता है।

  • पाचन शक्ति तीव्र
  • पित्त दोष की संभावना अधिक
  • अधिक क्रोध या तनाव पाचन विकार बढ़ा सकता है

सूक्ष्म भेद: तत्व, दृष्टि, शक्ति और उपाय

जब नक्षत्रों के बीच बहुत सूक्ष्म अंतर समझना हो तो तत्व, दृष्टि और शक्ति की तुलना अत्यंत उपयोगी होती है।

सूक्ष्म भेद अश्विनी भरणी कृतिका
मुख्य तत्व वायु युक्त अग्नि, तीव्रता पृथ्वी युक्त अग्नि, धैर्य शुद्ध अग्नि, निरंतर ज्वाला
दृष्टि भविष्यवादी, आगे देखने वाली यथार्थवादी, वर्तमान पर केंद्रित विश्लेषणात्मक, सूक्ष्म निरीक्षण
शक्ति (शक्ति) शीघ्रत्व शक्ति, तुरंत राहत देने वाली अपभरणी शक्ति, हटाने और साफ करने की शक्ति दाहन शक्ति, नष्ट कर शुद्ध करने की शक्ति
उपाय/पेड़ कुचला, विष को संभालने की क्षमता आंवला, पोषण और शुद्धि गूलर, स्थिरता और गहराई

अश्विनी की शीघ्रत्व शक्ति अचानक राहत और तेज़ समाधान देती है, भरणी की अपभरणी शक्ति अनचाहे बोझ और पुरानी चीजों को हटाने की क्षमता देती है, जबकि कृतिका की दाहन शक्ति बुराई, कमजोरी और असत्य को जलाकर समाप्त करने की ताकत देती है।


पुरुषार्थ का अंतर: जीवन का मुख्य लक्ष्य किसका क्या है

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को जीवन के चार पुरुषार्थ माना जाता है। मेष राशि के इन तीन नक्षत्रों में से हर एक का अपना प्रमुख पुरुषार्थ रहता है।

अश्विनी - धर्म प्रधान
इनका मुख्य लक्ष्य सही कार्य करना, मर्यादा को बनाए रखना और दूसरों की सहायता करना होता है। ये आदर्शवादी और कर्तव्यपरायण होते हैं।

भरणी - अर्थ प्रधान
संसाधन जुटाना, संपत्ति बनाना, स्थिरता और सुरक्षा इनका मुख्य फोकस होता है। ये परिश्रम से भौतिक स्तर पर मजबूत नींव बनाना चाहते हैं।

कृतिका - काम प्रधान
इच्छाओं की पूर्ति, समाज में विशिष्ट पहचान और प्रभावशाली स्थान प्राप्त करना इनका मुख्य उद्देश्य रहता है। ये अपनी तेज ऊर्जा से कोई न कोई मजबूत छाप छोड़ना चाहते हैं।

यही कारण है कि तीनों एक ही राशि के होते हुए भी जीवन के लक्ष्य, संघर्ष और उपलब्धियाँ अलग-अलग दिखाई देती हैं।


नक्षत्रों की छाया प्रवृत्तियाँ: डार्क साइड को कैसे पहचाने

जहाँ प्रकाश होता है वहाँ छाया भी होती है। मेष राशि के हर नक्षत्र की कुछ छाया प्रवृत्तियाँ भी होती हैं, जो यदि संभाली न जाएँ तो व्यक्ति को और उसके आसपास के लोगों को तकलीफ दे सकती हैं।

अश्विनी नक्षत्र की छाया: अधूरापन और स्वार्थ

  • अत्यधिक उतावलापन, काम तेजी से शुरू करना और अधूरा छोड़ देना
  • दूसरों की भावनाओं पर ध्यान न देने की प्रवृत्ति
  • अकेले छूट जाने या पीछे रह जाने का गहरा डर
  • आत्मविश्वास का अहंकार में बदल जाना

यदि अश्विनी जातक धैर्य और निरंतरता सीख लें तो इनका वही वेग बड़ी उपलब्धियाँ दिला सकता है, जो अन्यथा अधूरे प्रयासों में बंट जाता है।

भरणी नक्षत्र की छाया: अतिवाद और क्रूरता

  • जीवन के हर क्षेत्र में सब कुछ या कुछ नहीं वाली जिद
  • अंदर गहरी ईर्ष्या और भावनात्मक बोझ
  • शुक्र के प्रभाव से भोग और विलासिता के प्रति अति आकर्षण
  • दुखी होने पर दूसरों को दोष देना और अपने को पीड़ित मान लेना

भरणी जातकों के लिए संतुलन, क्षमा और आत्मस्वीकृति बहुत महत्वपूर्ण साधन बन जाते हैं। इन्हें सीखना होता है कि हर संघर्ष को अंदर बंद करके रखना ही शक्ति नहीं होता।

कृतिका नक्षत्र की छाया: विध्वंसक वाणी और अकेलापन

  • अग्नि जैसी वाणी, जो सामने वाले के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचा सकती है
  • धीमे, कमजोर या असंगत लोगों के प्रति असहिष्णुता
  • स्वयं को अत्यधिक शुद्ध मानने की प्रवृत्ति
  • दूसरों को सुधारने के नाम पर तानाशाही जैसा व्यवहार

कृतिका जातकों के लिए संयमित वाणी, करुणा और धैर्य का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। अगर वे अपनी भाषा में कोमलता जोड़ लें तो उनकी तेज बुद्धि और स्पष्टता समाज के लिए बहुत बड़ा वरदान बन सकती है।


परिवार, अकेलापन और अंदरूनी डर

अश्विनी जातक बाहर से बहुत निडर और उत्साही दिखते हैं, लेकिन भीतर कहीं अकेले छूट जाने का भय उन्हें और तेज़ी से भागने पर मजबूर करता है। भरणी जातक अक्सर परिवार या कुल के कर्मों का बोझ उठाते हुए महसूस कर सकते हैं, मानो उन्हें ऐसी गलतियों की कीमत चुकानी पड़ रही हो जो उन्होंने की ही नहीं।

कृतिका जातक मेष राशि के होते हुए भी भीड़ में अकेले रहना पसंद करते हैं। उनका तेज़ इतना प्रखर होता है कि लोग उनसे बात करने से पहले दो बार सोचते हैं। इससे कभी-कभी वे खुद भी समाज से अलग-थलग महसूस कर सकते हैं, जबकि अंदर से वे भी स्वीकार और प्यार ही चाहते हैं।


मेष जातक अपने नक्षत्र को समझकर क्या लाभ पा सकते हैं?

मेष राशि का नाम जान लेना केवल पहला कदम है। असली परिवर्तन तब शुरू होता है जब व्यक्ति अपने नक्षत्र की ताकत, कमजोरियाँ, छाया और प्रकाश दोनों को पहचान लेता है।

  • अश्विनी जातक यदि धैर्य, निरंतरता और भावनात्मक संवेदनशीलता जोड़ लें तो उनकी हीलिंग पावर और तेज बुद्धि लोगों के लिए राहत बन सकती है।
  • भरणी जातक यदि संतुलन, क्षमा और स्वस्थ सीमाएँ सीख लें तो उनका संघर्ष उन्हें भीतर से बहुत मजबूत और करुणामय बना सकता है।
  • कृतिका जातक यदि वाणी में कोमलता और दृष्टि में लचीलेपन को स्थान दें तो उनकी नेतृत्व क्षमता समाज को दिशा दे सकती है, डर नहीं।

मेष राशि की असली शक्ति तभी जागृत होती है जब जातक अपने नक्षत्र की आग को पहचान कर उसे सही दिशा देता है, न कि उसे खुद पर हावी होने देता है।


मेष नक्षत्रों से जुड़े सामान्य प्रश्न

अश्विनी नक्षत्र वाले मेष जातक करियर में किन क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं?
अश्विनी नक्षत्र वाले मेष जातक तेज निर्णय, जोखिम और सेवा से जुड़े क्षेत्रों में अच्छा करते हैं। चिकित्सा, आपातकालीन सेवाएँ, खेल, तेज गतिशील कार्य और नई शुरुआत वाले क्षेत्रों में इन्हें स्वाभाविक बढ़त मिलती है।

भरणी नक्षत्र के जातकों का प्रेम जीवन कैसा होता है?
भरणी जातकों का प्रेम गहरा, भावनात्मक और कर्मिक प्रकृति का होता है। ये अत्यंत वफादार रहते हैं और अपने साथी के लिए बहुत कुछ सह सकते हैं, लेकिन विश्वासघात की स्थिति में इनकी प्रतिक्रिया अत्यधिक कठोर हो सकती है।

कृतिका नक्षत्र वाले मेष जातक कितने परिपक्व माने जाते हैं?
कृतिका नक्षत्र के केवल एक चरण के मेष में होने के कारण ये लोग अग्नि और स्थिरता दोनों की ऊर्जा को महसूस करते हैं। इस कारण इन्हें अपेक्षाकृत अधिक परिपक्व, जिम्मेदार और नेतृत्वकारी माना जाता है, हालांकि इनकी वाणी और निर्णय कभी-कभी बहुत तीखे हो सकते हैं।

नक्षत्रों का स्वास्थ्य और शरीर पर क्या प्रभाव देखने को मिलता है?
अश्विनी नक्षत्र पैरों और घुटनों से, भरणी नक्षत्र सिर और आंखों से और कृतिका नक्षत्र कूल्हों, कमर और पाचन शक्ति से जुड़ा माना जाता है। इनके अनुसार तनाव, जीवनशैली और भावनात्मक दबाव अलग-अलग प्रकार की शारीरिक समस्याएँ सामने ला सकते हैं।

किस नक्षत्र के जातक का गुस्सा सबसे ज्यादा देर तक रहता है और क्यों?
भरणी नक्षत्र के जातकों का गुस्सा सबसे गहरा और लंबे समय तक रहने वाला माना जाता है, क्योंकि वे भावनाओं को भीतर जमा कर रखते हैं। अश्विनी का गुस्सा जल्दी आता है और चला जाता है, कृतिका का गुस्सा सिद्धांत और अनुशासन के लिए सामने आता है, जबकि भरणी अंदरूनी चोट को देर तक पकड़े रख सकती है।

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लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

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