By पं. नीलेश शर्मा
सूर्य की सत्ता, सिंहत्व, क्रांति, रचनात्मकता, नेतृत्व और दीर्घकालिक आत्म-प्रकाश का वैदिक कथानक

जब सूर्य सिंह राशि (120°-150°) में आसीन होता है तब ज्योतिषीय जगत के हर सूक्ष्म तंतु में आत्म-चेतना, विराटता और महानता के स्वर गूंज उठते हैं। यहां आत्मा सूर्य के केंद्र में बैठ जाती है,नेतृत्व, साहस, अदम्यता, आदर्शवाद, कला, सृजनशीलता, मनुष्यता का जागरण और राजसी गरिमा एक साथ खिल उठती है। यह सूर्य का मूल त्रिकोण, निजी राज्य और चरमगामी सृजन का क्षेत्र है, जहां आत्मा की सबसे उज्ज्वल चिंगारी सर्वोच्च प्रभाव, प्रेरणा और लोक-अधिकार के लिए उद्दीप्त होती है।
सिंह की राशि में सूर्य, मानो स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हो, अपने सर्वोच्च तेज, गर्व, आत्म-प्रतिष्ठा, कर्तृत्व और रचनात्मक नेतृत्व को प्रबलतर बनाता है। यह स्थान आत्मसम्मान, नेतृत्वकारी ठाट, शौर्य और निर्णायक क्षमता का प्रतीक है। यहां सूर्य की ऊर्जा शुभ कर्म, पुरुषार्थ, निष्कपटता, आत्मिक गरिमा और परिवार-समाज में आदर्श गुरु की भूमिका में बदल जाती है।
स्थिर अग्नि-यहाँ तेज, ऊष्मा, उमंग, धीरज और दृढ़ता संतुलन में रहते हैं। अग्नि तत्व के कारण इनमें आत्मा जैसी जीवनीशक्ति, श्रेष्ठ विचार, नूतन दृष्टि और निर्णायक प्रेरणा जागृत होती है।
स्वयं सूर्य; नेतृत्व, गौरव, इच्छाशक्ति, प्रभाव, सम्मान, आत्म-विश्वास और लक्ष्य का बेचैन अन्वेषण।
सिंह,न्यायप्रिय, अभिमानी, उदार, निडर, गंभीर खेलप्रिय, प्रतिष्ठा की आकांक्षा रखनेवाला। सूर्य का नेतृत्व-प्रतिमान; सम्मुख आकर प्रेरित करना, प्रेरणा देना, ‘राजा’ जैसा प्रस्तुत होना।
सिंह सूर्य जातक में जन्मजात नेतृत्व आभा होती है,वे जहां भी होते हैं, वहां सभा, समूह, परिवार या वर्ग में स्वाभाविक आकर्षण, नियंत्रण और आदर प्राप्त करते हैं। सहज करिश्मा, खुलेपन एवं निश्छल प्रेम से वे सबको प्रेरित करने की विलक्षणता रखते हैं।
उनका जीवन केवल अपने लिए नहीं बल्कि चिन्ह छोड़ जाने, सामाजिक/पारिवारिक मान्यता प्राप्त करने, श्रेष्ठता दर्शाने और ‘अपने होने’ की गूँज समाज/जीवन/पीढ़ी में फैलाने के लिए होता है। हर उपलब्धि (पेशा, खेल, कला, नेतृत्व, अध्यात्म) में छवि छोड़ना इनका मंत्र है।
मित्रो/परिवार की हर खुशी, समाज का हर उत्सव, आयोजन, चर्चा,सब में केंद्र-बिंदु बनना स्वभाव में शामिल है। टीम बनाने, लोगों को जोड़ने, समाज को प्रेरित करने, संवाद स्थापित करने, एकता का आवेग देने में ये निष्णात होते हैं।
अभिनय, मंच, चित्र, कविता, नेतृत्व, अद्वितीय प्रस्तुतिकरण,इनका जीवन सृजन, प्रेरणा, आविष्कार, प्रतियोगिता, प्रेरणाशक्ति और कलात्मक अभिव्यक्ति। स्थिति चाहे कोई हो, अपनी रचनाशीलता, आशा, आत्मबल और ‘नई दृष्टि’ से वे परिवेश को बदल सकते हैं।
खुद को ‘मूल’, ‘विशेष’ मानना; आचरण, पहनावा, आदर्श व संवाद-हर क्षेत्र में अलग चमक; दूसरों की नकल में नहीं बल्कि नवाचार और मूल्यों में श्रेष्ठता ढूंढ़ना।
हंसी, संवाद की चंचलता, परिवार/टीम/मित्रों में सकारात्मक ऊर्जा, जीवन के हर संघर्ष में खिलखिलाहट।
नेतृत्व की अभिलाषा कभी-कभी दूसरों पर नियंत्रण, दबाव या प्रतीक्षित मान्यता के बिना उदासी तक ले जाती है; बॉसी या अतिनाटकीय बनना।
आदर या सराहना यदि कम मिले, तो निराशा, आत्म-संशय, या रिश्तों में भारी असंतुलन।
कोई गलती स्वीकारना, नियंत्रण/परिस्थिति छोड़ना, अथवा दूसरों को श्रेय देना कठिन; अपनी उपलब्धियों को बढ़ाकर बताना।
मौलिक स्वाभिमान पर चोट लगे तो भावनाओं की बाढ़, सामाजिक संबंधों में मनोभेद।
सच्चा नेतृत्व और आत्म-सम्मान,इनके लिए धीरे-धीरे “साथ में चमकना” सीखना आवश्यक होता है, न केवल खुद राज करना।
माता-पिता या समाज के लिए गौरव, सितारों, अभिनय, गान, सृजन,बचपन से ही “Star Attention” पाने की प्रवृत्ति।
स्पर्धा, नेतृत्व, नवाचार, टीम में जगमगाहट; कई बार विद्रोही, कभी सुधार के वाहक बन जाते हैं।
परिपक्व नेतृत्व; दूसरों को आगे बढ़ाना सीखना; व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ प्रेरक विरासत और मार्गदर्शन।
राजसी चाल, मजबूत ग्रीवा, उन्नत भौं/आंखें, सुसज्जित, चमकीली केशराशि, प्रभावशाली हाथों का संयोजन।
गरिमामय शरीर, उठती आवाज़, आत्म-विश्वासी दृष्टि, लीडरशिप हावभाव; दृढ़ता।
घनी/स्वर्णिम जटाएँ, दिव्य मुस्कान, आकर्षक हावभाव, पारंपरिक गहनों का रुझान।
मुस्कान, चुंबकत्व, गर्म व्यवहार,कनिष्ठ व्यक्ति हो या भीड़, इन्हें केंद्रबिंदु मिल जाता है।
मित्रता: समर्पित, सुरक्षा देनेवाला, साहसी; मित्र मण्डली में सबसे सक्रिय, आयोजक; सामाजिक बातें, मेहमाननवाजी, केंद्र।
प्रेम: रोमांचक, आकर्षक, रचनात्मकता से भरपूर प्रेम; साथी से प्रोत्साहन, प्रशंसा, प्रतिस्पर्धा की चाह; परिजनों को ऊँचा उठाने की आदत।
विवाह: सम्मान और नियंत्रण की जरूरत, रिश्ते में खुलापन, प्रेरणा और सहयोग; अहम का द्वंद्व चुनौती।
परिवार: पालक की भूमिका, तेजस्विता की छाया; बच्चों, परिवार, माता/पिता में नेतृत्व और संरक्षण; आदर्शवाद के साथ कभी कठोरता।
प्रथम भाव: तेज, करिश्मा, जीवन-यात्रा का नायक; आत्मनोन्नति, लक्ष्यों में दृढ़ता; प्रशासन/नेतृत्व में गुण, रिश्तों में गर्व।
द्वितीय भाव: धन-राशि, परिवार-गौरव, वारिस, पीढ़ीगत संपत्ति, सांस्कृतिक/पारिवारिक नाम का संरक्षण।
तृतीय भाव: उत्कृष्ट संवादकला, बड़ी टीम या भाई-बहन; अभिव्यक्ति, पत्रकारीय नेतृत्व।
चतुर्थ भाव: भव्य घर, संपत्ति अभिरुचि, कलात्मक गृह-सज्जा, परिवार में नेतृत्व/अध्यक्षता।
पंचम भाव: प्रदर्शन-कला, नवाचार, शिक्षा में उत्कृष्टता; प्रेम, जोखिम-प्रियता, बच्चों में गर्व।
षष्ठ भाव: प्रतिस्पर्धा, सेवा-नेतृत्व; स्वास्थ्य,उच्च स्तरीय कार्य से थकावट, दिल और पीठ की संभावनाएं।
सप्तम भाव: राजसी विवाहिक चुनाव, प्रतिष्ठित साथी; रिश्ता करें तो 'सामना'-नियंत्रण, सामर्थ्य की लड़ाई।
अष्टम भाव: रहस्य, मनोवैज्ञानिक गहराई, परिवर्तनशीलता; छिपी विरासत/क्रिया।
नवम भाव: दर्शन, यात्रा, गुरु; आगे बढ़ने, समाज/विश्व में सकारात्मक छाप।
दशम भाव: सार्वजनिक जीवन, नीति, कला, शिक्षण; नेतृत्व में उत्कर्ष; विरोधियों का भी सम्मान अर्जित करना।
एकादश भाव: मित्र मंडली, सामाजिक आयोजनों में शीर्ष स्थान; उच्च-स्तरीय संपर्क।
द्वादश भाव: परिव्रजन, योग, बाहर की जगमगाहट में रचनात्मक प्रतिभा; आंतरिक प्रकाश आगे बढ़ाता है।
मघा: वंश, परंपरा, धर्म, नीति, नेतृत्व; पूर्वजों का सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी।
पूर्वा फाल्गुनी: सृजन, प्रेम-संगीत, कला, उत्सव, विलासिता, आयोजनों में निपुणता।
उत्तराफाल्गुनी: व्यवस्था, ईमानदारी, परोपकारिता, उदारता, वास्तविक प्रशंसा का संगम।
पेशा-कार्यक्षेत्र: प्रधानपद, उद्यमिता, कला, राजनीति, अभिनय-नृत्य, शिक्षण, अधिकारी, तमाम नेतृत्व/मार्गदर्शन की जगह।
कार्य संस्कृति: पदोन्नति, सम्मान, उद्देश्य, परिश्रम, रचना,सदा अस्तित्व-गौरव।
शक्ति: हृदय, मेरुदंड की क्षमता; शरीर और चेहरे पर ऊर्जस्विता।
जोखिम: अति श्रम, चिंता, जलन, पीठ, उदर, सिरदर्द; शरीर में तनाव।
निवारण: हनन अभ्यास, सूर्य स्नान, ध्यान, प्रकृति सान्निध्य; सृजनात्मक्ता (कला/संगीत)।
आहार: संतुलित धूप, पीले फल, पोषक अनाज; स्वाद-अनुशासन।
मंत्र/सूर्य अर्घ्य: गायत्री/सूर्य मंत्र, रविवार प्रातः जल-दान, आभार-साधना।
रत्न: माणिक्य (सूर्य की स्थिति अनुरूप)।
विशेष साधना: रचनात्मकता, सेवा, शिक्षा, टीम भावना से समाज-संपन्नि।
दान: कला, शिक्षा, बाल-कल्याण, संस्कार-निर्माण।
विरासत: आधुनिक/सितारों का निर्माण, विचार-संस्कृति/नेतृत्व में परिवर्तनकर्ता।
छाया: आदर-सम्मान न मिले तो आत्मकेंद्रितता, ऊब, या संवादहीनता।
पारिवारिकता: मूल्य/परंपरा का संतुलित अनुभव-नेतृत्व-भावना को विनम्रता, साझेदारी से पोषण देना।
प्रेरणा और नेतृत्व के गौरव पर खड़ा सिंह सूर्य समाज, परिवार और आत्मा,तीनों के लिए अमर प्रेरणा, करुणा और रचनात्मक जगमगाहट की ज्वाला जगाता है।
1. सिंह सूर्य का सर्वोच्च सार और सबसे अनूठी शक्ति क्या हैं?
नेतृत्व, सृजन, विद्या, आत्मविश्वास, प्रेरणा, आदर्शवाद, कलात्मक प्रतिभा, उदारता, आंतरिक गरिमा।
2. कौन-कौन से पेशे, समाज या उद्देश्य सिंह सूर्य का विस्तार देते हैं?
प्रधानपद, शिक्षा, अभिनय, कला, राजनीति, उद्यमिता, अधिकारी, खेल, संगठन, प्रेरक संगठन, सांस्कृतिक ऊर्जा।
3. स्वास्थ्य, ऊर्जा और आदतों के लिए सर्वोत्तम जीवनशैली क्या है?
व्यायाम, योग, सूर्य अर्घ्य, कला/संगीत, परिवार/मित्रों से संवाद, सम्यक विश्राम, खुलेपन-खुशी।
4. संबंध, मित्रता, विवाह, परिवार की श्रेष्ठ ऊर्जा कैसे पाईं?
आदर, खुलापन, प्रेरक संवाद, साथ में हर्ष, रोमांच, सम्मान, साझीदारियों में संतुलन, अहंकार संयम।
5. कौन-कौन से उपाय, साधन, रत्न सिंह सूर्य को संपूर्ण शक्ति व संतुलन देते हैं?
माणिक्य, सूर्य मंत्र, साधना, जल अर्पण, रचनात्मक कार्य, मौन-अंतर्दर्शन, सेवा।
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशिअनुभव: 25
इनसे पूछें: करियर, पारिवारिक मामले, विवाह
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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