By पं. सुव्रत शर्मा
मैत्री, संतुलन और श्रेष्ठता का प्रतीक अनुराधा नक्षत्र

सुदूर अंतरिक्ष की गहराइयों में अनुराधा नक्षत्र ज्योतिष जगत में संतुलन, सामंजस्य और सम्मान का अद्वितीय प्रकाश बिखेरता है। यह वृश्चिक राशि के मध्य सुसज्जित है, जिसका अधिपति ग्रह शनि है, जो स्थिरता व अनुशासन का प्रतिरूप है। अनुराधा नक्षत्र का स्वरूप दिव्यता से युक्त है, इसका विभाजन तीन तारों (बीटा, डेल्टा, पाई स्कॉर्पियस) के समुच्चय में होता है, जो रात्रि के आकाश में एक रेखा में अंतारेस तारे के ऊपर प्रकट होते हैं।
भगवान मित्र के अधीन, अनुराधा नक्षत्र सामाजिकता, हर्ष, ऊर्जा और संतुलन का पोषक है। यह नक्षत्र विरोधाभासी शक्तियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का अद्वितीय योग देता है, जीवन की जटिलताओं को प्रसन्नता तथा गूढ़ दृष्टि से देखने का सामर्थ्य प्रदान करता है। इसके प्रभाव से जातक विभिन्न परिस्थितियों में संवाद के नए सूत्र बनाते हैं, कठिन परिस्थितियों में भी सौहार्द्र की नींव रखते हैं।
अनुराधा नक्षत्र का विस्तार स्कॉर्पियोन तारामंडल में है, जिसका मूल भाग संयोजन, मैत्री और आध्यात्मिक ऊँचाई है। यह नक्षत्र विशाखा से गहरा संबंध रखता है, जिससे दोनों की ऊर्जा समान दिशा में प्रवाहित होकर जीवन में संतुलन का निर्माण करती है। इसके प्रभाव को समझने के लिए प्राचीन भारतीय ऋषियों एवं वेदों में इसके नाम, चिन्ह और फल को अत्यंत महत्ता दी गई है।
"अनुराधा" का तात्पर्य है, राधा के बाद आने वाला। इसकी ऊर्जा विशाखा नक्षत्र से विलीन होकर जीवन के हरेक पहलू को सौहार्द्र और संतुलन देती है। इसका उल्लेख विभिन्न ग्रंथों व पुराणों में पवित्रता और मेल के प्रतीक के रूप में मिलता है।
नक्षत्र के तीनों तारे, बीटा, डेल्टा एवं पाई, ऊर्जा, निरंतरता और आस्था के संकेत देते हैं। इसका संबंध हनुमान से भी है, जो केतु के शासक देवता हैं; नक्षत्र की उग्रता और धैर्य का सम्मिलन इसी में प्रकट होता है।
अनुराधा नक्षत्र के पुरुष जातकों में आकर्षक मुखमंडल, चमकदार नेत्र और चिकना शरीर होता है। किसी-किसी जातक में ग्रहों की प्रतिकूलता अधिक हो तो कठोरता भी मुखरित हो सकती है। वे अत्यंत निपुणता से कठिन परिस्थितियों का समधान करते हैं, किन्तु उनके मन में एक गहन अशांति प्रवाहित होती रहती है। समाज में इन्हें संगठित कार्यों में नेतृत्व देने की योग्यता प्राप्त होती है, सदा नवीन संभावनाओं की खोज में प्रवृत्त रहते हैं। इनमें गूढ़ विचारशीलता, चतुराई और परिपक्वता होती है।
जीवन का आरंभिक काल, 17 से 48 वर्ष तक, संघर्षों से परिपूर्ण रहता है, अनापेक्षित चुनौतियाँ, पारिवारिक विवाद और आर्थिक बाधाएँ उनका पथ रोकती हैं। किन्तु, ये जातक कठोर परिश्रम और धैर्य से जीवन में आगे बढ़ते हैं। 48 वर्ष के पश्चात् नवीन बदलाव, सुख और स्थिरता प्राप्त होती है।
व्यापार क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना, प्रशासनिक पदों पर बैठना और निपुणता से उच्चाधिकारी को संतुष्ट करना उनका सहज गुण है। इनमें संगठनात्मक कौशल, जनसंपर्क व लचीलापन होता है। ये अन्य जातकों की अपेक्षा अधिक परिश्रमशील व कृतज्ञ होते हैं।
पिता-माता के सुख में न्यूनता का भाव रहता है, कई बार पिता से मतभेद अथवा दूरी की संभावना रहती है। जन्मस्थली से दूर जाकर जीवन को स्थिरता मिलती है। दाम्पत्य जीवन सम्मानजनक, माधुर्यपूर्ण रहता है; पत्नी सभी सद्गृहिणी गुणों से संपन्न होती है। संतानें वंश का नाम ऊँचा करती हैं, माता-पिता के समाज में भी भव्य स्थान प्राप्त करती हैं।
स्वास्थ्य सामान्यतः अच्छा, किन्तु अस्थमा, दंत रोग, कफ, सर्दी, गले की शिकायतें, विशेष रूप से आलस्य या औषधि सेवन में ध्यान न रखने पर स्वास्थ्य जल्दी बिगड़ जाता है। योग और प्राणायाम से राहत मिल सकती है।
इनका मुखमंडल बालसुलभ, निश्छल एवं आकर्षक होता है। बारीक, सुंदर कटि, पुरुषों को सहज ही लुभाती है। वे सरल, स्वच्छ मन और गर्व से रहित जीवन जीती हैं। सेवाभावी, सामाजिक कार्यों में सक्रिय और कभी-कभी राजनीति में भी अपना प्रभाव छोड़ने वाली होती हैं। इन्हें मित्रों के संरक्षण और नेतृत्व का सम्मान मिलता है।
अनुराधा की महिलाएँ संगीत, नृत्य और ललित कला में उत्कृष्ट होती हैं, कई विख्यात कलाकार इसी नक्षत्र से जन्म लेते हैं। उच्च शिक्षा, संगीत, नृत्य कृतित्व, मंच और साहित्य में अविस्मरणीय स्थान प्राप्त कर सकती हैं।
पति के प्रति निष्कपट और गहन प्रेम, धार्मिक विधि-विधान और मान्यताओं का पालन करती हैं। संतान की पालन-पोषण में आदर्श मां बनती हैं, ससुराल पक्ष से भी सम्मान मिलता है। पारिवारिक संबंध सुदृढ़ और मधुर रहते हैं।
ब्राह्मण महिलाओं में विशेष रूप से मासिक धर्म की अनियमितता, रक्त प्रवाह में बाधा, सिरदर्द, नासिका संबंधी शिकायतें रहती हैं। समयानुसार ध्यान देने से स्वस्थ्य रहता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अर्थ | विद्युत का झलक, सफलता |
| प्रतीक | कमल पुष्प, दण्ड, मेड़, द्वार, उर्वरक फलक |
| अधिपति देवता | मित्र, हनुमान |
| नियंत्रक ग्रह | शनि |
| राशि | वृश्चिक |
| जन्तु | मृगी अथवा हरिणी |
| पक्षी | बुलबुल |
| वृक्ष | बकुल |
| शुभ अंक | 17 |
| तत्व | अग्नि |
| प्रकृति | मृदु |
| गुण | तामसिक |
| अक्षर | न, नि, नु, ने |
| रत्न | नीला नीलम |
| शरीर - वराहमिहिर | हृदय, स्तन |
| शरीर - पराशर | कटि |
जीवन की कठिनाई में भी जैसे कमल पुष्प खिलता है वैसे ही अनुराधा नक्षत्र के जातक विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलन, मित्रता तथा उत्कृष्टता की ऊर्जा बिखेरते हैं। विश्व में मैत्री, करुणा और समाज कल्याण का चरम अनुराधा नक्षत्र से जुड़ा है।
अनुराधा नक्षत्र के जातकों के लिए योग, ध्यान और अध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढ़ना सरल रहता है। इन्हें जीवन में परिश्रम, धैर्य, आत्मविश्वास और अपने कार्य व परिणाम के प्रति समर्पित रहना चाहिए। इनके लिए रक्ताभ भूरा रंग और बकुल वृक्ष का विशेष महत्व है। परिवार और व्यवसाय की अपेक्षाओं के बीच संतुलन साधना उनका मुख्य गुण है।
सामाजिक, व्यापारिक, या पारिवारिक कार्य आरंभ करने के लिए अनुराधा नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में विशेष सफलता मिलती है। नव निर्माण, गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार व निवेश, इनकी सिद्धि के लिए अनुराधा नक्षत्र अत्यंत मंगलकारी है। नक्षत्र के शुभ समयों में पूजा, अनुष्ठान, हवन, या दान, सर्वोत्तम फल दिलाते हैं।
प्रश्न 1: अनुराधा नक्षत्र के अधिपति ग्रह कौन हैं और उनका प्रभाव क्या है?
उत्तर: अनुराधा नक्षत्र के अधिपति ग्रह शनि हैं, जो स्थिरता, अनुशासन और गहनता का आह्वान करते हैं।
प्रश्न 2: अनुराधा नक्षत्र का मुख्य प्रतीक क्या है तथा उसका क्या अर्थ है?
उत्तर: कमल पुष्प इसका मुख्य प्रतीक है, जो विपरीतता में खिलकर सौंदर्य व शांति की ओर बढ़ता है।
प्रश्न 3: अनुराधा नक्षत्र के पुरुष जातकों का पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन कैसा रहता है?
उत्तर: पिता-माता के पक्ष से सुख कम, किन्तु दाम्पत्य जीवन पूर्णतः मधुर व संतोषजनक रहता है, संतानें सफलता प्राप्त करती हैं।
प्रश्न 4: अनुराधा नक्षत्र की महिला जातिकाएँ किस क्षेत्र में अद्वितीय होती हैं?
उत्तर: वे संगीत, नृत्य एवं अन्य ललित कलाओं में योग्यता प्राप्त करती हैं, उच्च शिक्षा में भी विशिष्ट स्थान बनाती हैं।
प्रश्न 5: अनुराधा नक्षत्र का पवित्र वृक्ष तथा शुभ रंग कौन से हैं?
उत्तर: अनुराधा नक्षत्र का पवित्र वृक्ष बकुल है; शुभ रंग रक्ताभ भूरा है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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