By अपर्णा पाटनी
हस्त नक्षत्र का विस्तृत अध्ययन, जिसमें चारों पादों के गुण, स्वभाव और चुनौतियाँ विस्तार से बताए गए हैं

हस्त नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में तेरहवां स्थान रखता है। यह कन्या राशि में 10 अंश 0 कला से लेकर 23 अंश 20 कला तक फैला है। "हस्त" शब्द का अर्थ है "हाथ", जो न केवल शारीरिक शक्ति बल्कि मानसिक और आत्मिक सर्जनशीलता का भी प्रतीक है। हस्त नक्षत्र की प्रकृति में आज्ञाकारिता, कर्मठता और गहन शिल्प कौशल का समावेश है। यह नक्षत्र हर प्रकार के जीवन कर्म में कुशलता और नियंत्रण दर्शाता है - शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक।
हस्त का अधिदेवता सवितृ माने जाते हैं, जो सूर्य के तेजस्वी और सृजनशील रूप हैं। इस कारण, हस्त जातकों के भीतर अद्भुत ऊर्जा, आशावादिता, सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार की क्षमता विकसित होती है।
चंद्रमा इसका स्वामी ग्रह है, जिससे जातक में भावनात्मक लचीलापन, मनोवैज्ञानिक समझ, संवेदनशीलता, तेजी और परिवर्तनशीलता आ जाती है। इसी वजह से, हस्त जातक सामाजिक, कल्पनाशील, व्यवहारशील एवं लचीले होते हैं।
इन गुणों का मिश्रण हस्त जातकों को समाज में आकर्षण, सम्मान, सहयोग और समर्थन दिलाता है - वे जहाँ रहते हैं, वहाँ के माहौल को सकारात्मक बना देते हैं।
इस नक्षत्र का व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और गुणों को जीवन में आगे बढ़ाने के लिए उपयोग करता है। वे मन, वचन और कर्म - तीनों में सामंजस्य रखते हैं। चाहे विज्ञान, संस्कृति, नीति, कुशलता मांगने वाला कोई भी क्षेत्र हो, हस्त जातक उसमें अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं।
इनके हाथ हर दौर में समाज और परिवार के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देते हैं।
हस्त जातक के आसपास अक्सर लोग रहना पसंद करते हैं। ये दूसरों के दर्द समझने, मनोबल बढ़ाने और हौसला देने में कुशल होते हैं। परिवार में संतुलन बनाए रखने, बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर ध्यान, बुजुर्गों का सम्मान और समाज के लिए समय निकालना - ये इनकी आदतों में शामिल है।
सामाजिक आयोजनों, पर्व-त्योहारों या मित्र-मंडली में ये मुख्य आकर्षण का केन्द्र होते हैं। आलोचना सहने की प्रवृत्ति इनमें होती है, परंतु कभी-कभी अत्यधिक मान-सम्मान या पूर्णता की चाह इनके मन में असंतोष ला सकती है।
हर नक्षत्र के पाद उसके मूल भाव को जातक में विविध रूपों में प्रकट करते हैं:
| पाद | डिग्री (कन्या) | स्वभाव | श्रेष्ठ गुण | कमजोरी | उपयुक्त करियर |
|---|---|---|---|---|---|
| पहला | 10°00′ -13°20′ | तार्किक, विश्लेषक | तेज बुद्धि, प्रशासन, गणना | आलोचना, तनाव | रिसर्च, साइंस, टेक, अकाउंटिंग |
| दूसरा | 13°20′ -16°40′ | सामाजिक, कूटनीतिक | संवाद, सम्मोहन, अद्भुत वाणी | निर्णयहीनता, आत्मसमर्पण | मीडिया, कला, लीडरशिप |
| तीसरा | 16°40′ -20°00′ | कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित | धैर्य, उत्तरदायित्व | अधिक गंभीरता, अभिव्यक्ति की कमी | हेल्थकेयर, प्रशासन, शिक्षण, प्रबंधन |
| चौथा | 20°00′ -23°20′ | करुणाशील, अंतर्ज्ञानी | अंतर्ज्ञान, रचनात्मकता | भावुकता, संवेदनशीलता, जल्दी आहत | लिखना, काउंसलिंग, सेवा, अध्यात्म |
विशेषकर चौथे पाद में जातक ध्यान, साधना, दान और सेवा के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। गायत्री मंत्र, सूर्य उपासना, सवितृ की आराधना, गुरुओं की सेवा, गाय-दान, जल-दान और अन्य दान -इन सबका जीवन में लाभ होता है।
इनका प्रतीक ही खुला हाथ है - स्पष्ट संकेत कि भाग्य, कर्म, निर्णय, सृजन - सबका स्वामी खुद व्यक्ति है।
ये लोग जीवन में क्रियात्मकता रखते हैं, बाधाओं को चुनौती मानते हैं, समाधान निकालते हैं और सामाजिक व पारिवारिक वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं।
1. हस्त नक्षत्र के हर पाद में सबसे प्रबल कौन-से गुण होते हैं?
पहला -तार्किकता, दूसरा -कूटनीति, तीसरा -जिम्मेदारी, चौथा -संवेदनशीलता व कल्पनाशीलता।
2. क्या हस्त जातक केवल विज्ञान या तकनीकी क्षेत्रों में ही सफल होते हैं?
नहीं, वे मीडिया, कला, चिकित्सा, सामाजिक सेवा, प्रशासन, शिक्षा, काउंसलिंग, थेरेपी, लेखन, योग, हीलिंग, क्राफ्ट आदि में भी आगे बढ़ सकते हैं।
3. अधिदेवता का क्या प्रभाव है?
सवितृ की आराधना से बुद्धिचातुर्य, आंतरिक तेज और सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ती है।
4. स्वास्थ्य के मुख्य जोखिम क्या हैं और उनका उपाय?
तनाव, पाचन, तंत्रिका या त्वचा से संबंधित हल्की समस्याएँ हो सकती हैं; योग, ध्यान, सूर्य प्रणाम व आयुर्वेदिक आहार लाभकारी हैं।
5. क्या हस्त जातक अपने भाग्य के निर्माता बन सकते हैं?
हाँ, वे कर्म, समझ, कौशल और अपने हाथ के प्रयोग से जीवन का नया अधाय बनाते हैं।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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