By पं. संजीव शर्मा
अंतर्निहित शक्तियों, मूल सत्य और जीवन परिवर्तन की दिव्य ऊर्जा

मूल नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के सबसे तीव्र, रहस्यमय लगने वाले और अक्सर गलत समझे जाने वाले नक्षत्रों में गिना जाता है। इस नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी निरृति हैं, जिन्हें विघटन, अव्यवस्था, हानि और भीतर से रूपांतरण की शक्ति के रूप में जाना जाता है। ज्यादातर देवता जहां संरक्षण, पोषण या विस्तार से जुड़े होते हैं, वहीं निरृति उस ऊर्जा का प्रतीक हैं जो समाप्ति, टूटन और बिखराव के माध्यम से जीवन को नए सत्य की ओर ले जाती है।
मूल शब्द का अर्थ ही जड़ है। यही कारण है कि मूल नक्षत्र सतही सच्चाइयों से काम नहीं चलाता। यह गहराई में उतरता है, जड़ों तक पहुंचकर कमजोर या असत्य आधार को उखाड़ता है और जीवन के सामने वह सब प्रकट कर देता है जो अब विकास के मार्ग में बाधा बन चुका होता है।
वैदिक दृष्टि में निरृति को कोई दुष्ट या केवल विनाशकारी शक्ति नहीं माना गया। बल्कि उन्हें उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के रूप में समझा गया है जो क्षय, टूटन और आवश्यक अंत के माध्यम से संतुलन को बनाए रखती है।
निरृति का क्षेत्र कई महत्वपूर्ण पक्षों को समेटे हुए है।
वास्तु में निरृति का संबंध नैऋत्य दिशा से जोड़ा जाता है, जिसे अस्थिरता, क्षय और कर्मात्मक शुद्धि का क्षेत्र माना जाता है। यानी जहां पुराने कर्मों के परिणाम सामने आते हैं और टूटन के माध्यम से नई जागरूकता जन्म लेती है।
मूल नक्षत्र का स्वभाव ही है जड़ों तक पहुंचना। यहां केवल बाहरी रूप या दिखावा टिक नहीं पाता। जो कुछ भी कमजोर, असत्य या अस्थिर हो, वह मूल की ऊर्जा में ज्यादा समय छिपा नहीं रह सकता।
देवी निरृति मूल जातकों को कुछ विशेष गुण और प्रवृत्तियां देती हैं।
मूल नक्षत्र सुधार का नहीं, उखाड़ कर नया लगाने का नक्षत्र है। यह जो भी करता है, जड़ से करता है, चाहे वह बदलाव हो, निर्णय हो या जीवन का नया अध्याय।
निरृति के अधीन होने के कारण मूल नक्षत्र को कई लोग केवल विनाश या हानि से जोड़ देते हैं, जबकि इस विनाश की प्रकृति दंड से अधिक तैयारी की है। यहां जो टूटता है, वह आगे के विकास के लिए जरूरी जगह बनाता है।
मूल नक्षत्र से जुड़े लोगों के जीवन में अक्सर कुछ अनुभव दिखाई दे सकते हैं।
ये घटनाएं मूल जातक को मजबूर करती हैं कि वह अपने जीवन, रिश्तों और मान्यताओं को जड़ से देखकर समझे। जो सच में उसके विकास के लिए आवश्यक नहीं, वह धीरे धीरे या अचानक टूटने लगता है।
आध्यात्मिक रूप से देवी निरृति अनासक्ति की शिक्षा देती हैं। वे उन सहारों को हटा देती हैं जिन पर व्यक्ति केवल आदत, डर या भ्रम के कारण टिके रहता है।
उनके गहरे संदेश कुछ इस प्रकार समझे जा सकते हैं।
मूल नक्षत्र के जातकों के लिए अक्सर यह प्रक्रिया विकल्प नहीं बल्कि मजबूरी जैसी बन जाती है। परिस्थितियां उन्हें बार बार इस ओर धकेलती हैं कि वे अपनी पकड़ ढीली करें और सत्य के साथ खड़े होना सीखें, चाहे वह कितना भी असुविधाजनक क्यों न लगे।
निरृति की ऊर्जा मूल जातकों के भीतर बहुत तीव्र मानसिक और भावनात्मक गहराई पैदा करती है।
बाहरी रूप से ये लोग कभी कभी कठोर, सीधे या अधिक स्पष्ट लग सकते हैं। इसका कारण यह नहीं कि इनमें संवेदना नहीं बल्कि यह कि ये झूठे सुकून से अधिक कड़े सत्य को महत्व देते हैं।
यदि निरृति की ऊर्जा संतुलित न रहे या जीवन में सहारा, जागरूकता और साधना की कमी हो, तो मूल नक्षत्र में कुछ कठिन प्रवृत्तियां उभर सकती हैं।
इसीलिए मूल जातकों के लिए ज़मीन से जुड़े रहना, शरीर और मन को स्थिर रखने वाली साधना, नियमितता और किसी उच्च मूल्य से जुड़ाव बहुत जरूरी माना जाता है। वरना विघटन की ऊर्जा भीतर ही भीतर उन्हें थका सकती है।
देवी निरृति का एक बड़ा वरदान निर्भीकता है। मूल नक्षत्र के लोग अंत, मृत्यु, गिरावट या ढह जाने के विचार से उतने भयभीत नहीं रहते, जितना कई अन्य लोग हो सकते हैं।
ये लोग प्रायः सक्षम होते हैं कि
इसी गुण के कारण मूल नक्षत्र से जुड़े लोग सच्चाई को पकड़ने वाले चिकित्सक, गहराई से खोज करने वाले शोधकर्ता, मनोवैज्ञानिक, ज्योतिषी, आध्यात्मिक मार्गदर्शक या ऐसे साधक बन सकते हैं, जो लोगों की छिपी पीड़ा तक पहुंचकर उसे उजागर करने की हिम्मत रखते हैं।
मूल नक्षत्र को बहुत गहरा कर्मात्मक नक्षत्र माना जाता है। देवी निरृति के प्रभाव से यहां
जैसे संकेत दिख सकते हैं।
कई मूल जातक ऐसे परिवारों में जन्म लेते हैं जहां उन्हें पुराने पैटर्न, पीढ़ियों से चली आ रही आदतों या कर्म चक्रों को तोड़ने की भूमिका निभानी होती है। वे केवल उसी कहानी को दोहराने नहीं आए बल्कि जहां झूठा या अस्वस्थ ढांचा हो, वहां उसे समाप्त कर नए सत्य की नींव रखने के लिए आए होते हैं।
देवी निरृति का केंद्र संदेश कठोर है, पर भीतर से बहुत स्पष्ट है।
“जो सत्य है, वही अंततः टिकेगा।”
मूल नक्षत्र यही सिखाता है कि जब जीवन में विघटन, हानि या गिरावट आए तो केवल उसे शाप न समझा जाए। कभी कभी वही प्रक्रिया भ्रम को हटाकर असली धरातल दिखाती है। जब झूठे सहारे टूटते हैं तब भीतर की सच्ची ताकत सामने आ सकती है।
निरृति की कृपा से मूल जातक
बनने की क्षमता रखते हैं। उनकी राह कई बार अकेली, कठोर और चुनौतीपूर्ण दिख सकती है, पर जब वे अपनी ऊर्जा को समझ लेते हैं तब वही राह अत्यंत अर्थपूर्ण, जागरूक और गहरी आध्यात्मिक पूर्ति देने वाली बन जाती है।
सामान्य प्रश्न
क्या मूल नक्षत्र हमेशा अशुभ या डरावना माना जाना चाहिए
नहीं। मूल नक्षत्र अशुभ नहीं बल्कि गहरा रूपांतरण कराने वाला नक्षत्र है। यह कमजोर, झूठे या अस्थिर ढांचे को हटाकर जीवन को जड़ से मजबूत बनाने की दिशा देता है।
क्या मूल नक्षत्र वालों के जीवन में हानि अधिक होती है
जीवन में अचानक बदलाव, टूटन या हानि के अनुभव हो सकते हैं, पर यदि इन्हें सीख और नए आरंभ के अवसर के रूप में देखा जाए तो यही अनुभव गहरी मजबूती और जागरूकता दे सकते हैं।
मूल नक्षत्र वाले रिश्तों में कैसे होते हैं
ये भावनात्मक रूप से गहरे होते हैं, पर दिखावे से दूर रहते हैं। झूठे या औपचारिक संबंध इन्हें थका सकते हैं, जबकि सच्चे, ईमानदार और पारदर्शी रिश्तों में ये पूरी निष्ठा से जुड़े रहते हैं।
क्या मूल नक्षत्र में आध्यात्मिक रुचि स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है
अक्सर हाँ। गहरी खोज, सत्य की तलाश, कर्म और जीवन के अर्थ पर प्रश्न इन जातकों के भीतर जल्दी उठ सकते हैं। कठिन अनुभव इन्हें भीतर की यात्रा की ओर और तेजी से धकेल सकते हैं।
क्या हर मूल जातक को देवी निरृति की विशेष पूजा करना जरूरी है
यह अनिवार्य नहीं है। जो स्वयं को मूल की ऊर्जा से जुड़ा महसूस करता है, वह जीवन में सच को प्राथमिकता देकर, झूठे सहारों को छोड़कर और जागरूकता के साथ परिवर्तन स्वीकार करके ही निरृति के संदेश को जी सकता है। यही उनके प्रति सच्चे सम्मान का रूप है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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