By पं. नीलेश शर्मा
निरृति, केतु व नवजीवन, ब्रह्मांडीय विघटन और जड़ों की खोज का सार

वैदिक ज्योतिष के दिव्य मंडल में मूल नक्षत्र अद्वितीय गहराई, अपरिहार्य परिवर्तन और दार्शनिक रहस्य का द्वार खोलता है। धनु राशि के ०°००' से १३°२०' के विस्तार में यह नक्षत्र अंतरतम जड़ों तक विषाद व शोध की अंतिम यात्रा है। इसका अधिपति केतु-रहस्यवादी, गूढ़ और माया से परे-है, तो अधिदेवता निरृति-मृत्यु, विघटन व असत्य का निवारण करने वाली देवी-हैं। प्रतीक गांठ लगी जड़ें हैं जो अस्तित्व, संबंध, मन और ब्रह्मांड के सबसे छिपे हुए सार तक जाने की बेचैनी को दर्शाती हैं।
मूल नक्षत्र को 'जड़-मुक्ति' या 'मूल-ग्रहण' का नक्षत्र कहा जाता है क्योंकि यह केवल नए फल की चाह में नहीं बल्कि आधारहीन पुरानी जड़ों को उखाड़ने में भी विश्वास रखता है। इसका तेज, भीषण और परिवर्तनकारी है।
| तत्व | वर्णन |
|---|---|
| शासक ग्रह | केतु-मुक्ति, अतीत, अनुपम अन्तर्दृष्टि, अनासक्ति |
| राशि | धनु-दर्शन, ऊँचा आदर्श, अनंत गूढ़ता, बड़ा लक्ष्य |
| अधिदेवता | निरृति-विघटन, मृत्यु, गहन शुद्धि, गुप्त विप्लव |
| प्रतीक | गाँठ लगी जड़ें-नींव, मूल, स्व, छिपी परंपराएँ |
| शक्ति | विघटन, उखाड़ना, मृत-ध्यात्व के पुनर्नवा का स्रोत |
| प्रेरणा | अर्थ-सुरक्षा, धरातल, भौतिक आधार, संचित निधि |
| योनि | नर कुत्ता-रक्षक, तीक्ष्ण, सतर्क, अडिग |
| गुण | तामसिक-अंधकार, विध्वंस और वहाँ से पुनर्जन्म |
मूल जातक केवल सतही समाधान पर कभी नहीं ठहरते। वे निरंतर सर्वाधिक गहरे कर्म, संबंध, अनुशासन, संस्कृति व आनुवांशिकता की परतें हटाते हैं ताकि सच्चा विकास, जागरण और स्वतंत्रता मिल सके। यह नक्षत्र निजी और सामाजिक जीवन में हर रुकी, जड़, नकारात्मक व्यवस्था को तोड़, निर्माण और उत्थान की लहरें जगाता है।
निरृति की सत्ता संहार को नकारात्मक नहीं बल्कि श्रेष्ठ बदलाव की आवश्यक प्रक्रिया मानती है। वह कायाकल्प के लिए अनिवार्य विघटन का आशीर्वाद है।
निरृति की सत्ता के साथ जन्मा मूल जातक अक्सर ऐसे समय या घर में आता है, जहाँ जड़ता, पारिवारिक बंधन, संस्कार या बाहरी सुरक्षा टूटकर नवजीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।
जड़ों का गुच्छा केवल जमीन में गहराई या वंश का प्रतीक नहीं है।
मूल नक्षत्र व्यक्ति बारीकी से पहचानता है कि किस 'जड़-मूल' को काटना अनिवार्य है अन्यथा वृक्ष मर जाएगा।
मूल की ज्योतिषीय 'शक्ति' विनाश या उखाड़ फेंकने की है-but this force is neither simply destructive nor random.
मूल के जातक में वे शुद्धि-जनक, युगांतकारी घटनाएं आती हैं-जो दूसरों को तोड़ सकती हैं मगर इन्हें गहन आंतरिक जागरण देते हैं।
धनु राशि का बृहस्पतिज गण, उच्च नैतिकता, बड़े आदर्श और तीव्र उत्सुकता सीधा केतु के रहस्य, गूढ़ता और कर्मबोध से मिलता है।
धनु के पहले पाद में आने के कारण, मूल जातक 'सत्य के पथ' से नीचे जमीन में गहराई तक उतरते हैं और समस्याओं के आधार तक पहुँचते हैं-जहाँ से अकेले वे ही ठीक समाधान निकाल सकते हैं।
मूल जातक समाज, धर्म या परिवार में अनुकूलता नहीं बल्कि सच्चाई और शुद्धि के लिए बाधाओं को यथास्थान तोड़ते हैं।
मूल नक्षत्र के लोगों की चेतना मूल रूप से आध्यात्मिक होती है-
मूल नक्षत्र कठिन, विद्रोही, लेकिन सर्वोच्च रूप से स्वच्छंद, सत्यनिष्ठ और स्व-निर्मित होता है। इनका जीवन कभी भी सपाट, सधा हुआ नहीं-बल्कि हर दस-बीस साल में पूरी तरह नया-कभी टूटन, कभी बिगाड़, तो कभी असाधारण उत्कर्ष।
घरेलू या आंतरिक स्तर पर अवरोध, भ्रम या मनोविकार को जड़ से नष्ट करने के बाद-देवदारु-सा मजबूत, अध्ययनशील और शांत हो जाते हैं। पुरानी मित्रता, घर, या कैरियर में पूर्ण बदलाव संभव; पर आत्मिक असंतोष, ऊब या सच्चाई की बेचैनी उन्हें हमेशा आगे बढ़ाए रखती है।
मूल नक्षत्र सृष्टि के मर्मस्थल, गूढ़ दर्शन, विघटन और शुद्धि का परम नक्षत्र है। ये लोग अपने जीवन, संबंधों और आसपास हर पुरानी, जड़ा-बद्ध, झूठी संरचना को तोड़कर हिम्मत, श्रम, विश्लेषण, गहन खोज और आत्म-नवाचार से नया खड़ा करते हैं। निरृति की सत्ता, केतु के रहस्य और धनु के उच्च आदर्श इन्हें बार-बार शून्य से शिखर तक, अंधकार से प्रकाश तक ले जाते हैं।
गाँठ लगी जड़ की तरह, जब तक हर समस्या, बीमारी, रिश्ते या मन की जड़ध्वनि न बदल जाए तब तक मूल जातक पूरे रूपांतरण, स्वतंत्रता या शांति नहीं पाते। यही है उनका मार्ग-अनगिनत संघर्ष, सत्य की खोज, धीरज और सतत आत्म-विकास।
प्रश्न 1: मूल नक्षत्र की सबसे खास आध्यात्मिक शक्ति क्या है?
उत्तर: असत्य, जड़ता और बाहर-बाहर की सतह से गहराई में जाकर वास्तविक जड़ को उजागर करना व उसको नष्ट करना।
प्रश्न 2: निरृति की सत्ता क्यों आवश्यक है?
उत्तर: क्योंकि जड़ता, रोग, मनोविकार, या सामाजिक बंधन के मिटने से ही नया जीवन, परिवर्तन और जागरण संभव है।
प्रश्न 3: मूल जातकों के संबधों और करियर का सबसे शक्तिशाली पक्ष क्या होता है?
उत्तर: गहराई, असाधारण शोध, परिवर्तन लाना और जटिल समस्याओं का मूल निकाल देना।
प्रश्न 4: क्या मूल जातक के लिए जीवन में बार-बार बड़ा बदलाव सामान्य है?
उत्तर: हाँ; ये जातक लगातार परिवर्तन, चुनौतियों व नूतन उत्साह से जीवन का निर्माण करते हैं तब ही शांति व संतुलन पाते हैं।
प्रश्न 5: मूल जातकों के लिए स्वास्थ्य व मानसिक शांति का सर्वोत्तम उपाय क्या है?
उत्तर: वायु दोष के संतुलन, योग, ब्रेथवर्क, आयुर्वेद, मनोविज्ञान और ध्यान का स्थायी अभ्यास।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 25
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इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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