By पं. अभिषेक शर्मा
अपः देवी का आश्रय और शुक्र का सौंदर्यदायी प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र बीसवां स्थान रखता है और इसका विस्तार धनु राशि के अंतर्गत 13°20′ से 26°40′ अंश तक रहता है। यह नक्षत्र संपूर्ण रूप से धनु राशि में स्थित है और इसे अपराजेय नक्षत्र कहा गया है। इसका अर्थ है - वह शक्ति जिसे पराजित नहीं किया जा सकता। इस नक्षत्र की ऊर्जा जातकों को साहस, आशा, उत्साह और आत्मविश्वास प्रदान करती है। पूर्वाषाढ़ा के जातक जीवन में अपराजेय आत्मा के धनी, कलात्मक कौशल से सम्पन्न और बौद्धिक गहराई से युक्त होते हैं। इनकी प्रतिभा और आकर्षक व्यक्तित्व दूसरों को प्रभावित करते हैं और इनके द्वारा प्रदर्शित आभामय करिश्मे से लोग प्रेरणा ग्रहण करते हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का महत्व इसके प्रतीकों और अधिदेवता से स्पष्ट होता है।
गजरदंत (हाथी का दांत) : गजरदंत शक्ति, वैभव और विजय का प्रतीक है। हाथी का दांत किसी भी कठिन अवरोध को भेदकर मार्ग निर्मित करता है। उसी तरह इस नक्षत्र के जातक भी जीवन में बाधाओं को साहस और दृढ़निश्चय के साथ पार करते हैं। इनमें ऐसी मानसिक और शारीरिक शक्ति होती है, जिससे यह अपने प्रतिद्वंद्वियों पर श्रेष्ठता प्राप्त कर लेते हैं। यह प्रतीक उनकी अपराजेयता, गौरव और नेतृत्व की क्षमता की पहचान कराता है।
हाथ का पंखा : पंखा प्राचीन काल में राजाओं और रईसों की प्रतिष्ठा और विलासिता का प्रतीक था। यह संकेत करता है कि जातक जीवन में अपनी आभा, उत्साह और ऊर्जा को निरंतर बनाए रखते हैं। पंखा केवल ठंडक का साधन नहीं बल्कि उत्साह और आत्मिक ऊर्जा को जीवित रखने का प्रतीक है। यह उनके refined व्यवहार और दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता का द्योतक भी है। इनके संपर्क से वातावरण में शील, सौंदर्य और आकर्षण उपस्थित हो जाता है।
सुप (धान फटकने की टोकरी) : कृषि में सुप का उपयोग अच्छे अन्न को भूसी से अलग करने के लिए किया जाता है। यह विवेक और प्राथमिकता निर्धारण का प्रतीक है। जिस प्रकार सुप सही और गलत को अलग करता है, वैसे ही ये जातक अपने जीवन में उचित-अनुचित का भान रखते हैं। ये व्यर्थ बातों को छोड़कर सार्थक विषय पर ध्यान लगाना जानते हैं। इनके निर्णय दूरदर्शिता से परिपूर्ण होते हैं और ये हमेशा उचित चीज को ही अपनाते हैं।
इन सभी प्रतीकों का सामूहिक संदेश है, निरंतर ऊर्जा, सजगता, परिष्कृत स्वाद, विवेक और दृढ़ उत्साह। धनु राशि के धनुष-बाण प्रतीक इनके व्यक्तित्व में असीमित सहनशीलता और अटल लक्ष्य साधक प्रवृत्ति को और प्रकट करते हैं।
पूर्वाषाढ़ा की अधिदेवता हैं अपः देवी, जो जल की शक्ति और वरुण देव की पत्नी मानी जाती हैं। वे शुद्धिकरण, संपन्नता, भावनात्मक प्रवाह और रहस्यमय सौंदर्य की प्रतीक हैं। अपः का आशीर्वाद नक्षत्र जातकों को वाकपटुता, भावनाओं की गहराई, धैर्य, कलात्मकता, करिश्माई आकर्षण और रहस्यपूर्ण आभा प्रदान करता है।
इस नक्षत्र का ग्रह स्वामी है शुक्र। शुक्र कला, सौंदर्य, विलासिता, संगीत, शिल्प, प्रेम और संवेदनशीलता का ग्रह है। शुक्र के प्रभाव से जातकों में सौंदर्यबोध, कलात्मकता का उत्कर्ष, प्रेममय हृदय और भौतिक व आध्यात्मिक दोनों प्रकार की वृद्धि होती है।
| अनुकूल नक्षत्र | संबंधों का स्वरूप | गुण मिलान (%) |
|---|---|---|
| अश्विनी | प्रबल उत्साह और ऊर्जा | 75 |
| आर्द्रा | रचनात्मक और प्रेरणादायक संबंध | 77 |
| उत्तराषाढ़ा | सहयोगी और आध्यात्मिक विकास | 77 |
| अनुराधा | भावनात्मक और आध्यात्मिक सामंजस्य | 75+ |
| चित्रा | रचनात्मक परंतु चुनौतीपूर्ण | 36 |
| रोहिणी | केवल आकर्षण, भावनात्मक असमानता | 48 |
| धनिष्ठा | प्रबल संबंध, किंतु असंतुलन की संभावना | 26 |
| कृत्तिका | स्वभाव विरोधी, कठिन संगति | 25 |
| विशेषता | विस्तृत विवरण |
|---|---|
| नक्षत्र क्रमांक | 20 |
| राशि | धनु |
| अधिदेवता | अपः देवी (जल शक्ति) |
| ग्रह स्वामी | शुक्र |
| लिंग | स्त्री |
| दोष | पित्त |
| गुण | राजसिक |
| तत्व | वायु |
| प्रतीक | गजरदंत, पंखा, सुप |
| पशु प्रतीक | नर वानर |
| पक्षी | तीतर (फ्रैंकोलिन) |
| वृक्ष | नेतर |
| शुभ रंग | क्रीम |
| शुभ रत्न | हीरा, श्वेत पुखराज |
| शुभ अंक | 3, 6 |
| शुभ दिन | रविवार, मंगलवार, बुधवार |
| नामाक्षर | बु, द, भ, ध |
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र यह शिक्षा देता है कि आत्मबल और इच्छाशक्ति के माध्यम से किसी भी कठिनाई को जीता जा सकता है। धनुष-बाण की तरह इनका लक्ष्य सटीक और दृढ़ होता है। शक्ति और परिष्कार दोनों इनके व्यक्तित्व में समान रूप से विद्यमान रहते हैं। महत्वाकांक्षा और करुणा का सामंजस्य इन्हें समाज में प्रेरणादायक बनाता है। ये जातक जीवन की कठिनाइयों को अवसर और सीढ़ी बनाकर सफलता प्राप्त करते हैं और अपने धैर्य, कला, ज्ञान और आकर्षण से अमर गौरव अर्जित करते हैं।
प्रश्न 1: पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में स्थित है और इसका विस्तार कितना है?
उत्तर: यह धनु राशि में पूरी तरह स्थित है और 13°20′ से 26°40′ अंश तक फैला हुआ है।
प्रश्न 2: पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अधिदेव और ग्रहस्वामी कौन हैं?
उत्तर: इसकी अधिदेवता अपः देवी हैं जो जल तत्व और शुद्धिकरण की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। ग्रह स्वामी शुक्र है, जो कला, सौंदर्य और विलासिता का कारक है।
प्रश्न 3: इस नक्षत्र में जन्मे जातकों के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: इनमें आकर्षण, वाकपटुता, तार्किक शक्ति, कलात्मकता, साहसिक स्वभाव, करुणा और भौतिक-आध्यात्मिक संतुलन देखने को मिलता है।
प्रश्न 4: पूर्वाषाढ़ा जातकों के लिए करियर के कौन-कौन से क्षेत्र अधिक उपयुक्त माने जाते हैं?
उत्तर: इन्हें विपणन, जनसंपर्क, चिकित्सा, कला (संगीत, लेखन, अभिनय, नृत्य), शिक्षा, दर्शन और उद्यमिता में अद्वितीय सफलता मिलती है।
प्रश्न 5: पूर्वाषाढ़ा जातकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख समस्याएँ और उपाय क्या हैं?
उत्तर: इनमें पित्त दोष प्रधान होता है, जिससे अम्लपित्त और तनाव से जुड़े रोग हो सकते हैं। इन्हें योग, ध्यान, संतुलित आहार और हीरा या श्वेत पुखराज रत्न पहनना लाभकारी होता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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