By अपर्णा पाटनी
ज्ञान, करुणा और जीवन यात्रा के सौम्य समापन का ज्योतिषीय विश्लेषण

रेवती, चन्द्र मण्डल का 27वाँ और अंतिम नक्षत्र, मीन राशि के 16°40′ से 30°00′ तक फैला है। इसका स्वामी बुध है और अधिदेवता भगवान विष्णु हैं, जो पोषण, ज्ञान, करुणा और जीवन यात्रा के सौम्य समापन की ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसे मछली और कभी-कभी ढोल की निशानी से दर्शाया जाता है, जो सुरक्षित पारगमन, सीखने और जीवन की चाल को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाते हैं। पुषाण इस नक्षत्र की मार्गदर्शक ऊर्जा हैं, जो यात्रियों, समुदायों और आत्माओं के रक्षक हैं।
रेवती का पूर्ण प्रभाव मीन राशि में बुध की सूक्ष्मता और शास्त्रीय गुरु की अनंत बुद्धिमत्ता के संगम से उत्पन्न होता है। इसका स्वभाव कल्याणकारी और संवादात्मक आध्यात्मिकता प्रदान करता है।
रेवती नक्षत्र के जातक सरल, सहज और सौम्य होते हैं। उनकी वाणी कोमल और व्यवहार मृदु होता है। ये करुणा और संयम के साथ सामाजिक वातावरण में शांति का संचार करते हैं। लगभग सभी जातकों के चेहरे में संतुलित सौंदर्य और एक धनुषाकार मुस्कान होती है, जो उनकी मृदुलता का परिचायक है।
विशेषताएँ:
परिष्कार:
नई शुरुआत, विवाह, संतान की प्राप्ति, यात्रा प्रारंभ और आवश्यक वस्तुओं की खरीद जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में रेवती अत्यंत शुभ रहता है। यह नक्षत्र जीवन की सीमाओं और नई शुरुआत के द्वार पर प्रकाश डालता है।
प्रमुख दोष: कफ प्रधान।
स्वास्थ्य संबंधी संभावित समस्याएँ: अपचन, भोजन में उतार-चढ़ाव, सुस्ती, कर्ण और दन्त रोग, तथा पूँछ या पैर में बार-बार असुविधा।
आयुर्वेदिक सलाह:
ज्ञानेन्द्रिय, कला और मानवीय सेवा की अभिव्यक्ति में निपुण। इनका संज्ञान अंतर्ज्ञान पर आधारित होता है, जिसे विधिपूर्वक सत्यापित किया जाता है।
प्रमुख क्षेत्र:
लिंग अनुसार झुकाव:
पारिवारिक स्थिति: प्रारंभिक परिवार से अपेक्षाकृत सीमित लाभ, लेकिन विवाह में स्थिरता और प्रेम।
संबंध शैली: प्रेम पवित्र, कोमल, गहन; सम्मान और निष्ठा अविभाज्य।
वित्तीय स्थिति: पचास वर्ष के बाद स्थिरता और समृद्धि।
संगत:
संघर्ष:
दैनिक:
साप्ताहिक:
रेवती ज्ञान को करुणा में, यात्राओं को अंतर्द्वार में परिवर्तित करता है। यह संकटों को सामाधान में, प्रेम को मुक्तिदायक शक्ति में बदलता है। इसकी सर्वोच्च शिक्षा है सौम्यता के द्वारा नेतृत्व और मृदुलता के द्वारा संरक्षण, हर राह को प्रकाशमय बनाना।
प्रश्न 1: रेवती नक्षत्र का मुख्य प्रतीक क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य प्रतीक मछली और ढोल है, जो जीवन की यात्रा में सुरक्षित पारगमन और समय के चक्र को दर्शाते हैं।
प्रश्न 2: रेवती नक्षत्र का स्वामी और अधिदेवता कौन हैं?
उत्तर: बुध इसके स्वामी हैं और भगवान विष्णु व पुषाण इसके अधिदेवता हैं।
प्रश्न 3: रेवती नक्षत्र के जातकों को स्वास्थ्य के लिए क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर: कफ दोष के कारण हल्का और गरम भोजन, नियमित व्यायाम तथा मंत्र और श्वास नियंत्रण इनके लिए आवश्यक हैं।
प्रश्न 4: इस नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए कौन से रंग, दिन और रत्न शुभ माने जाते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के भूरे रंग, शनिवार और गुरुवार दिन, तथा हीरा रत्न शुभ माने जाते हैं।
प्रश्न 5: रेवती जातकों के लिए किस प्रकार के संबंध और सामाजिक व्यवहार उपयुक्त होते हैं?
उत्तर: ये सौम्य, संवेदनशील और समर्पित संबंध पसंद करते हैं; ईर्ष्या और अस्थिरता से बचना चाहिए।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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