By पं. अमिताभ शर्मा
स्वाति - स्वतंत्रता, अनुकूलन, नवाचार, गहन सोच, समाज-निर्माण, व्यवहार और जीवन की सच्ची संकल्पना

स्वाति नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के सत्ताईस नक्षत्रों में पंद्रहवां है, जो पूरी तरह से तुला राशि के 6°40' से 20°00' तक विस्तृत है। यह नक्षत्र अपने भीतर स्वतंत्रता, बदलाव, जिजीविषा और सहज संतुलन का संदेश समाहित करता है। इसके अधिपति वायु (पवनदेव) हैं, जिनके प्रभाव से जीवन में गति, अनुकूलन, आत्म-विश्वास और नई परिस्थितियों के साथ स्वयं को ढालने की अद्भुत क्षमता मिलती है। अकेला तिनका, जो प्रबल हवा में झुकता है पर टूटता नहीं, स्वाति जातकों की लचीलापन और समर्पण की शक्ति का सबसे सुंदर प्रतीक है।
प्रत्येक नक्षत्र चार भागों (पद) में बंटा हुआ होता है और हर पद का संबंध किसी एक नवांश और ध्रुवीय ग्रह शक्ति से जुड़ा है। पदों के भेद से जातक के स्वभाव, बौद्धिक रुझान, संबंध, करियर और जीवन के बदलावों में विशिष्टता आती है। स्वाति के हर पद की चर्चा में हम न केवल ज्योतिषीय दृष्टि बल्कि मनोविज्ञान, संबंध, शिक्षा और जीवन के व्यवहारिक पक्ष को भी प्रमुखता से उजागर करेंगे।
नवांश: धनु (स्वामी: बृहस्पति)
प्रमुख गुण: तीव्र स्वतंत्रता, अन्वेषण, खोज, आत्मबल
मनोवैज्ञानिक व जीवन पक्ष:
यह पद स्वाति के वायु तत्व को धनु के उत्साह और वैचारिक साहस से जोड़ता है। ऐसे जातक चुनौती स्वीकार करने में आनंद लेते हैं और अपने जीवन में बार-बार नया करने की चाहत रखते हैं। चाहे शिक्षा हो, करियर, यात्रा या व्यक्तिगत रिश्तेइनका रुझान सबमें आगे बढ़ने, जोखिम उठाने और अपने लिए नवीन मार्ग बनाने का रहता है।
सबक:
बढ़ती प्रवृत्ति को समझदारी, धैर्य और यथार्थ से संतुलित करना। दूसरों से सलाह व समर्थन लेकर सामंजस्य बिठाना।
नवांश: मकर (स्वामी: शनि)
प्रमुख गुण: कूटनीति, संतुलन, जिम्मेदारी, सामाजिक सहयोग
मनोवैज्ञानिक व जीवन पक्ष:
यह पद अत्यधिक आकर्षकता, सामाजिकता और व्यवहार कुशलता से युक्त है। जातक संवाद, रिश्ते और सौंदर्य-बोध के क्षेत्र में सिद्धहस्त होते हैं। ये परिवार, मित्र-मंडली, संस्था या कार्यालय, हर जगह संयोजन और सामंजस्य का केंद्र बनते हैं। असीम धैर्य, अनुशासन और सौम्यता इनके सद्गुण हैं।
सबक:
आत्मसम्मान, सीमाएँ और ठोस उद्देश्य बनाना। दूसरों की चाहत के आगे अपनी इच्छाओं की कद्र करना।
नवांश: कुम्भ (स्वामी: शनि)
प्रमुख गुण: मौलिकता, बौद्धिकता, दर्शन, विचारशीलता
मनोवैज्ञानिक व जीवन पक्ष:
इस पद के स्वाति जातक विश्लेषणशील, रिसर्च-प्रवृत्त, हमेशा नए विचारों, तकनीकी या सामाजिक बदलाव की ओर आकर्षित रहते हैं। ये लोग केवल सूचना तक सीमित नहीं रहतेइनमें विषयों को गहराई से समझना, उनको जीवन में जोड़ना और समाज में बड़े बदलाव लाना भी शामिल है।
सबक:
सिर्फ सोच नहीं, व्यावहार में पारंगत होना; इमोशनल बौंडिंग व आत्म-विश्वास बढ़ाना।
नवांश: मीन (स्वामी: बृहस्पति)
प्रमुख गुण: संकल्प, अनुशासन, कल्याणकारी दृष्टि, गहराई
मनोवैज्ञानिक व जीवन पक्ष:
इस पद के जातक संवेदनशीलता, रचनात्मकता और अनुशासित प्रयास का मेल रखते हैं। इनमें व्यावहारिकता के साथ-साथ करुणा, आध्यात्मिक झुकाव और स्थायी उपलब्धि की तीव्र इच्छा होती है। ये हर कर्म, व्यवसाय या संबंध को पूर्णता से निभाने वाले, जिम्मेदार और परिवार या समुदाय में एक मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।
सबक:
लक्ष्य और उपलब्धियों के साथ आत्मिक विकास और विश्राम का महत्व भी समझना।
इन चार पदों को देखने पर स्पष्ट होता है कि स्वाति जातकों में
हर स्वाति जातक का जीवन एक अनूठा संतुलन हैअपने भीतर स्वतंत्र आत्मबल, सामाजिक सहयोग, विचारशीलता और स्थिर उपलब्धि का मेल लिए हुए। ये हवा की तरह हर नई दिशा में बह सकने की शक्ति तो रखते ही हैं, साथ ही गहरी जड़ें जमा कर समाज, परिवार और खुद को लगातार समृद्ध भी करते हैं।
प्रत्येक पद एक अलग नवांश, ग्रह ऊर्जा और मनोवैज्ञानिक स्वरूप दर्शाता हैपहला पद साहस; दूसरा, संतुलन; तीसरा, विचारशीलता; और चौथा, अनुशासन का प्रतीक है।
शोध, शिक्षा, डिजाइन, मीडिया, कानून, प्रशासन, विज्ञान, सेवा, सलाह, तकनीकहर पद के अनुसार भिन्न-भिन्न सम्मानजनक करियर पथ मिलते हैं।
प्रथम पद वाले नेतृत्व में; द्वितीय, संबंध और समन्वय में; तृतीय, सलाह व नवाचार में; और चतुर्थ, स्थायित्व व परामर्श में अग्रणी होते हैं।
वायु तत्व का संतुलन, प्राणायाम, सुबह सूर्य-अभिनंदन, नियमित स्वयं के मूल्यांकन व चेतना विस्तार से हर पद को लाभ मिलता है।
पहला पद सबसे अधिक स्वतंत्र, साहसी और पथ-प्रदर्शक है, पर सभी पदों में लचीलापन, स्वतंत्रता और अनुकरणीय सोच का स्तर अलग-अलग है।
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