By पं. सुव्रत शर्मा
स्वाति नक्षत्र में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु का गहन विश्लेषण

स्वाति नक्षत्र, जो वैदिक ज्योतिष का पंद्रहवाँ नक्षत्र है, तुला राशि के 6°40′ से 20°00′ तक व्याप्त रहता है। इस नक्षत्र के स्वामी हैं रहस्यमयी राहु-छाया ग्रह-जबकि इसके अधिदेवता वायु देव यानी पवन और प्राण के उद्गम हैं। हवा में झुकती कोमल टहनी का प्रतीक स्वाति का चरित्र-लचीलापन, स्वतंत्रता और स्वायत्तता-अद्वितीय बनाता है। किंतु स्वाति का असली सामर्थ्य तब प्रकट होता है जब इसमें स्थित हर ग्रह अपनी शक्ति, रंग और अनुभूति का अनूठा सम्मिलन जोड़ता है।
इसलिए जब कोई भी ग्रह स्वाति में प्रवेश करता है, उसकी शक्ति राहु और वायु के गुणों से बदलती, फैलती या बिखरती है।
जब सूर्य की प्रखर रश्मियाँ स्वाति में आती हैं, जातक के भीतर स्वतंत्रता की प्रबल कामना, आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व का जोश देखा जाता है। वे अधीनस्थता एकदम नहीं पसंद करते और जीवन में अपना रास्ता स्वयं बनाते हैं। इनके विचार अक्सर परंपरा से हटकर होते हैं, जिससे कभी-कभी वे प्रभुता के साथ संघर्ष में पड़ सकते हैं।
यहाँ चंद्रमा परिवर्तनशील, आकर्षक और संवादप्रिय बनाता है। स्वाति का चंद्र जातक सामाजिक, भावनात्मक रूप से लचीला व अनुकूलनीय बनता है। वे नये अनुभव, अलग देश-प्रदेश और विविधता की चाह रखते हैं। कभी-कभी अत्यधिक अस्थिरता, या निर्णायकता की कमी आ सकती है।
मंगल की योद्धा-ऊर्जा जब स्वाति के वायु तत्व से मिलती है, साहसी अन्वेषक, खिलाड़ी, उद्यमी या आंदोलनकारी बनती है। यह ऊर्जा कभी-कभी असावधानी, अति-साहस और त्वरित क्रोध में बदल सकती है।
स्वाति में बुध संवाद, वार्ता और व्यापार में श्रेष्ठ बनाता है। ऐसी कुंडली के जातक बुद्धिमान, त्वरित प्रतिक्रिया वाले, अनूठे विचारक और प्रिय वक्ता बनते हैं। राहु यहाँ बुध को अत्याधुनिक, थोड़ा नया और कभी-कभी चालाक बना सकता है।
गुरु जब स्वाति में होता है तब जातक न्यायप्रिय, आदर्शवादी, मार्गदर्शक और शिक्षक सरीखा बनता है। धर्म-दायित्व और दूसरों के लिए ज्ञान साझा करना इसका मुख्य उद्देश्य बनता है। राहु की उपस्थिति कभी-कभी इन्हें नैतिक द्वंद्व या अस्थिर आस्था में उलझा सकती है।
तुला का स्वामी शुक्र जब स्वाति में होता है, तो जातक आकर्षक व्यक्तित्व, कलात्मक क्षमता, सामाजिक कुशलता, सुंदरता से युक्त बनता है। ऐसे लोग अक्सर कलाकार, डिजाइनर, मनोरंजनकर्ता अथवा कूटनीतिक होते हैं, लेकिन कभी-कभी रिश्तों में अस्थिरता या सुख-सामग्री की अति हो सकती है।
शनि यहाँ राहु की उग्रता को संयम और अनुशासन से बांधता है। जातक दीर्घकालिक संघर्ष, समाज सुधार, NGO या प्रशासनिक क्षेत्रों में नेतृत्व करते हैं। कभी-कभी आत्मीय स्वतंत्रता की कमी या आंतरिक तनाव का अनुभव करते हैं।
स्वाति का स्वामी राहु जब यहाँ होता है तब जातक विशाल दृष्टि, नवीनता, शोधप्रियता और अनूठे विचार के धनी होते हैं। वे बार-बार नए क्षेत्रों में प्रयास, विदेशी संपर्क, नवाचार और अप्रत्याशित सफलता की ओर बढ़ते हैं। थोड़ा बिखराव, अस्थिरता या भ्रम कठिनाई ला सकते हैं।
केतु की उपस्थिति स्वाति में जातक को आध्यात्मिक, शोधमूलक, औषधि या गूढ़ विषयों का साधक बना देती है। जीवन की वास्तविकता से थोड़ा विरक्त, कभी उदासीन अथवा भौतिक जीवन में रुचि कम।
तीनों की सम्मिलित शक्ति-राहु (अप्रचलित महत्वाकांक्षा), शुक्र (कला और विनय), वायु (गतिशीलता, अनुकूलन)-स्वाति जातकों को वैश्विक, स्वतंत्र और नवरचनात्मक बनाती है।
स्वाति नक्षत्र वह आकाश है, जहाँ वायु देव की स्वतंत्रता, राहु का अनोखापन और शुक्र की कूटनीति मिलकर अनूठी नियति गढ़ते हैं। यहाँ ग्रहों का हर प्रभाव अद्वितीय स्वतंत्रता, अनुकूलन और वैश्विक दृष्टि जगाता है। लेकिन यह हवा, यदि नियंत्रित न रहे, तो बिखराव और असंतुलन भी ला सकती है। अतः स्वयं को अनुशासन से बांधें, दिशा रखें और वायु के झोंकों पर सवार हो नयी ऊँचाइयों तक पहुंचें।
क्या हर ग्रह स्वाति में समान प्रभाव डालता है?
नहीं, हर ग्रह के जाने से अलग गुण, ऊर्जा और व्यक्तित्व में रंग आता है।
स्वाति में राहु या केतु हो तो क्या करें?
जप, प्राणायाम, देवी दुर्गा की आराधना, वायु के मंत्र विशेष लाभकारी हैं।
क्या स्वाति जातक सदैव प्रवासी या स्वतंत्र होते हैं?
अक्सर हाँ-विदेश प्रस्थान, स्वतंत्र करियर, या अलग कार्य-क्षेत्र इनके जीवन का रंग है।
क्या स्वाति में ग्रह योग करियर या संबंधों में अस्थिरता लाते हैं?
कुछ हालात में, विशेषकर राहु, मंगल, चंद्र या शुक्र की दशा में अस्थिरता आ सकती है-उपाय एवं अनुशासन अनुपम है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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