By पं. नीलेश शर्मा
प्रतीक, अधिदेवता, गुण, चार पाद, जीवन निर्देशन, करियर, स्वास्थ्य, संगति, साधना

विशाखा नक्षत्र, जो तुला राशि (20°00') से वृश्चिक राशि (3°20') तक व्याप्त है, वैदिक चंद्रचक्र का अत्यंत विचित्र, विविध और मर्यादित चंद्रमंडल है। “विशाखा” शब्द संस्कृत के "वि" (विभाजित) और "शाखा" (टहनी/शाखा) का मेल है-इसका असली अर्थ ही है 'विभाजित, फैल गई शाखाएँ'। यही जीवन में इसकी मुख्य प्रतीकात्मकता है-विभिन्न दिशाओं में क्षमताओं, इच्छाओं, हुनर और चेतना का विस्तार, जहां हर पाद अलग दिशा, अलग ऊर्जा और जीवन-पथ को दर्शाता है।
इन सभी प्रतीकों को मिलाकर देखा जाए तो विशाखा का मार्ग निरंतर दृढ़, अनुशासित साधना, सांसारिक और आध्यात्मिक उन्नयन और अद्भुत संतुलन का है।
विशाखा के अद्वितीय शासन का केंद्रबिंदु है इंद्र-अग्नि-इंद्र (शक्ति, विजय, नेतृत्व, यश) और अग्नि (आध्यात्मिक तेज, शुद्धि, जोश, तप) का अद्भुत संयोग। यही मणिभूत ऊर्जा जातकों को बड़े विचार, साहस, क्रियाशीलता और परिवर्तन के लिए प्रेरित करती है। गुरु ग्रह (बृहस्पति) विशाखा के संरक्षक हैं-यह जातकों में धर्म, ज्ञान, विस्तार, फलदार लक्ष्य और गूढ़ दर्शन का पौधरोपण करते हैं। तत्त्व अग्नि है, जो ऊर्जा, जुनून और आध्यात्मिक छलांग का प्रतीक है। गण राक्षस है, जिससे जातकों में गहन अंतर्बोध, निर्भीकता और भीतर से रक्षण करने की वृत्ति दृढ़ होती है। कफ दोष का प्रभाव शारीरिक दृढ़ता तो देता है पर आलस्य, पाचन या श्वसन-सम्बंधी सजगता अपेक्षित करता है।
विशाखा जातकों में तीक्ष्ण व तार्किक बुद्धि, श्रेष्ठ अभिव्यक्ति और सामाजिक संवाद की निराली योग्यता होती है। वे सत्य और धर्म के उपासक होते हैं, सामाजिक न्याय के लिए तत्पर रहते हैं और किसी भी अन्याय के विरुद्ध मुखर रहते हैं। पर कई बार यह न्यायप्रियता उनमे जिद या कठोरता का रूप ले लेती है। ऐसे जातक अमूमन रचनात्मक मंच, सामाजिक आंदोलन या ज्ञान-सेवा से प्रतिष्ठा का साधन चाहते हैं। उनका मन बेचैन, सोच गहन होती है-अति-विश्लेषण, कभी-कभी उलझन और बौद्धिक उदारता एकसाथ देखी जाती है। संबंधों में, ईर्ष्या अथवा सूक्ष्म निरूपण छाया डाल सकते हैं, जिससे परिवार या मित्रता में परीक्षा आ सकती है। दबाव में ये लोग बार-बार फैसलों में झूल सकते हैं, जिसे उनकी अनिर्णयता कहा जाता है।
गोरा रंग, साफ-सुथरा चेहरे का गठन, तेजस्वी, संतुलित शरीर और सहज कद-काठी। उनका व्यक्तित्व आंतरिक विश्वास और निश्चितता लिए होता है-लिंग या आयु-विशेष से स्वतंत्र, इनकी छवि आकर्षक और प्रौढ़ दिखती है।
इस पाद के जातक ऊर्जा, स्पष्टता, पुरातन सोच, आदर्शवाद और अथाह साहस के प्रतीक हैं। ये जीवन में सीधी राह पसंद करते हैं, प्रेम और आदर्श की रक्षा हेतु संघर्ष को तैयार रहते हैं। कभी-कभी इनका स्वभाव चिड़चिड़ा, परिवर्तन-रोधी या त्वरित क्रोध वाला हो सकता है, पर मूलत: ये सच्चे योद्धा होते हैं।
कलात्मकता, संवेदनशीलता, मानसिक आकर्षण और गहनता इस पाद के आदर्श गुण हैं। कला, सौंदर्य, मनोरंजन में रुचि; निजी भावनाओं को सार्वजनिक होने से बचाना; रोमांस में तीव्र, लेकिन निजी। इच्छा और व्यावहारिकता के बीच उलझन रह सकती है।
इस पाद में जिज्ञासा, विश्लेषण, आत्मनिर्भरता व मानसिक चुस्ती की विशेष छाप है। जातक व्यापार, शिक्षण, आध्यात्मिक साधना में अग्रणी होते हैं। संवादकला, गति और बदलाव के लिए इनकी योग्यता अद्वितीय रहती है।
दूसरों की मदद, पोषण, सहानुभूति, भावनात्मक तीव्रता व परोपकार की प्रवृत्ति इस पाद के विशेष गुण हैं। संपत्ति का संचय, ईर्ष्या, सांसारिक आकांक्षा और कभी-कभी स्वार्थ की छाया; फिर भी दूसरों के दुःख में सहभागी और रूपांतरण में सहायक।
विशाखा के चंद्रकाल में आरंभ किये कार्य-गहनों का निर्माण या दान, संपत्ति पंजीकरण, निर्माण, कानूनी या विवाद समाधान, सामाजिक स्थापना, विवाह, संतान अनुष्ठान, युद्ध या प्रतिस्पर्धा, धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान, आदि-सर्वोत्तम फल देते हैं।
विज्ञान, अनुसंधान, मीडिया, संवाद, सेना, प्रशासन, शिक्षा, पारमार्थिक चिकित्सा, मनोरंजन, ऊर्जा, न्याय-इन क्षेत्रों में विशाखा जातक अद्भुत प्रदर्शन करते हैं। कफ दोष के चलते श्वसन-पाचन, हाथ, स्तन, किडनी, अग्न्याशय, निचले पेट पर विशेष ध्यान दें। संतुलित आहार, नियमित अभ्यास और फेफड़ों के व्यायाम से स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
विशाखा जातकों में तीव्र काम ऊर्जा, मानसिक चंचलता और पूर्णता का उत्साह होता है। संबंधों में निदान, पूरकता और ऊर्जावान साझेदारी ज़रूरी है; नहीं तो संघर्ष व असंतोष आ सकता है। चित्रा, ज्येष्ठा, मूला के साथ श्रेष्ठ सामंजस्य; स्वाति के साथ विचार, लेकिन संबंधी ऊर्जा असंतुलन, अतिशयता या विरक्ति। संवाद व सामंजस्य जीवनभर जरूरी।
निर्बाध प्रयास, श्रेष्ठ उद्देश्य, रूपांतरण की स्वीकृति और विजय के लिए सतत साधना ही जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है। इंद्र-अग्नि की शक्ति नैतिकता, साहस, अभिनवता और साधना के लिए प्रेरित करती है। लक्ष्य, धैर्य, ईमानदारी और परिष्कृत कार्य-पद्धति से आत्मसिद्धि और विख्याति संभव है।
विशाखा नक्षत्र, अपनी शाखाओं जैसी विविधता और चार पादों के अद्भुत गुणों के साथ, साधना, शौर्य, संतुलन और आध्यात्मिक विकास की ओर उत्प्रेरित करता है। गुरु का ज्ञान, इंद्र-अग्नि की शक्ति और व्यपाना शक्ति जीवन में प्रवाह, संतुलन और दिव्यता देती है। विजय द्वार और कुम्हार का चाक सतत परिवर्तन और आत्म-प्रशिक्षण के प्रतीक हैं; इन्हीं के मार्ग से जातक अंतिम तल तक पहुंच सकते हैं।
चार पाद जातक के स्वभाव में कैसे अंतर लाते हैं?
हर पाद मंगल, शुक्र, बुध, चंद्र के अनुसार अलग मानसिकता, क्षमता, अनुशासन और जीवन-पथ देगा।
कौन-से कार्य विशाखा में शुभ माने जाते हैं?
गहनों का निर्माण, संपत्ति, मुकदमे, धार्मिक-सामाजिक अनुष्ठान, शिक्षा, युद्ध-सर्वोत्तम फलकारक हैं।
संबंध बनाते समय किस प्रकार का साथी श्रेष्ठ होता है?
मानसिक सम्यकता, कर्म-ऊर्जा मिलान और पूरक योनि सर्वश्रेष्ठ तालमेल लाते हैं।
स्वास्थ्य और दैनिक जीवनशैली में कहाँ सावधानी रखें?
कफ दोष, श्वसन-पाचन, व्यायाम, विशेष अंग-रक्षा, सकारात्मक व्यवहार, व्यवस्थित खानपान से स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
विशाखा की सिद्धि-शक्ति (व्यपाना) किस रूप में जीवन में प्रकट होती है?
लगातार परिश्रम, धैर्य, रूपांतरण और साधना से, उच्च लक्ष्य साधकर व्यक्ति पूर्णता व स्पन्दन प्राप्त करता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 25
इनसे पूछें: करियर, पारिवारिक मामले, विवाह
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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