By पं. सुव्रत शर्मा
राशि स्वामी मित्रता का प्रभाव

कुंडली मिलान में भकूट दोष को 7 अंक दिए गए हैं और इसका सीधा संबंध पति पत्नी के बीच के मानसिक और भावनात्मक तालमेल से है। जब दोनों की राशियों के बीच 2, 12, 5, 9 या 6, 8 का संबंध बनता है, तो भकूट दोष का निर्माण होता है। यह दोष केवल कुंडली का कोई तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह दो इंसानों के बीच विचारों के उस मौन टकराव को दिखाता है जो धीरे धीरे एक ही छत के नीचे रहते हुए भी मीलों की दूरियां पैदा कर देता है।
भकूट दोष का अर्थ है कि दो व्यक्ति भौतिक रूप से साथ रहते हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से एक दूसरे से दूर होते हैं। उनकी बातें तो होती हैं, पर उन बातों में गहराई नहीं होती। उनका प्रेम तो होता है, पर उस प्रेम में एक अजीब सी कड़वाहट रहती है। यह लेख उन सभी जोड़ों के लिए है जो इस अदृश्य दीवार को महसूस करते हैं और इसका हल ढूंढना चाहते हैं।
| प्रकार | राशि संबंध | प्रभाव |
|---|---|---|
| द्वि द्वादश | 2, 12 का संबंध | आर्थिक तंगी और असंतुलन |
| नव पंचम | 5, 9 का संबंध | कभी शुभ कभी अशुभ प्रभाव |
| षडाष्टक | 6, 8 का संबंध | मानसिक तनाव और संघर्ष |
भकूट दोष का संबंध दोनों की राशियों की आपसी दूरी से है। ज्योतिष शास्त्र में यह देखा जाता है कि एक कुंडली की राशि दूसरी कुंडली की राशि से किस स्थान पर है। यदि यह दूरी 2, 12, 5, 9 या 6, 8 है, तो भकूट दोष की संभावना मानी जाती है।
द्वि द्वादश दोष आर्थिक तंगी और असंतुलन का संकेत देता है। इस स्थिति में दंपति को धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नव पंचम दोष कभी शुभ कभी अशुभ प्रभाव देता है। यह स्थिति अस्थिरता लाती है। षडाष्टक दोष सबसे गंभीर माना जाता है क्योंकि यह मानसिक तनाव और संघर्ष का संकेत देता है।
| संबंध | नाम | तीव्रता |
|---|---|---|
| 2, 12 | द्वि द्वादश | मध्यम से गंभीर |
| 5, 9 | नव पंचम | परिवर्तनशील प्रकृति |
| 6, 8 | षडाष्टक | अत्यंत गंभीर |
भकूट दोष हमेशा खतरनाक नहीं होता। इसकी तीव्रता कई कारकों पर निर्भर करती है। यदि दोनों की राशियों के स्वामी आपस में शत्रु हैं, तो भकूट दोष का प्रभाव अत्यंत गंभीर होता है। ऐसे जोड़ों के बीच मतभेद गहरे होते हैं और समाधान कठिन होता है।
यदि सप्तम भाव कमजोर है और उसमें पाप ग्रह हैं, तो भकूट दोष का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसे विवाहों में तलाक या अलगाव की संभावना बढ़ जाती है। यदि मंगल दोष भी उपस्थित है, तो स्थिति और भी जटिल हो जाती है।
भकूट दोष का प्रभाव शून्य हो जाता है जब राशि स्वामियों की मित्रता होती है। यदि दोनों की राशियों के स्वामी आपस में मित्र हैं, तो भकूट दोष का प्रभाव नगण्य हो जाता है। ऐसे जोड़ों के बीच मतभेद तो होते हैं, लेकिन वे उन्हें सहजता से सुलझा लेते हैं।
यदि सप्तम भाव मजबूत है और उसमें शुभ ग्रह हैं, तो भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है। ऐसे विवाहों में पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ बनी रहती है। यदि गुरु या शुक्र की शुभ दृष्टि है, तो दोष का प्रभाव और भी कम हो जाता है।
राशि स्वामियों की मित्रता भकूट दोष के प्रभाव को निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। सूर्य, गुरु और मंगल आपस में मित्र माने जाते हैं। शनि, बुध और शुक्र के अपने आपसी संबंध होते हैं।
यदि एक कुंडली का चंद्रमा मिथुन में है और दूसरी का तुला में, तो दोनों के स्वामी बुध और शुक्र हैं जो आपस में मित्र हैं। ऐसे में भकूट दोष का प्रभाव नगण्य हो जाता है। यदि एक का चंद्रमा मेष में है और दूसरी का सिंह में, तो दोनों के स्वामी सूर्य और मंगल हैं जो मित्र हैं।
| ग्रह | मित्र ग्रह | शत्रु ग्रह |
|---|---|---|
| सूर्य | गुरु, मंगल | शनि, शुक्र |
| चंद्रमा | सूर्य, शुक्र | शनि, राहु |
| मंगल | सूर्य, गुरु | शनि, बुध |
| बुध | शुक्र, शनि | चंद्रमा |
| गुरु | सूर्य, चंद्रमा, मंगल | शनि, बुध |
| शुक्र | बुध, शनि | सूर्य, चंद्रमा |
| शनि | बुध, शुक्र | सूर्य, चंद्रमा, मंगल |
भकूट दोष का सबसे गहरा प्रभाव भावनात्मक तालमेल पर पड़ता है। जब दो व्यक्ति भावनात्मक रूप से असंगत होते हैं, तो वे एक दूसरे की भावनाओं को नहीं समझ पाते। उनकी बातें एक दूसरे तक नहीं पहुंचतीं।
भावनात्मक तालमेल का अर्थ है कि दोनों व्यक्ति एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं और उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। जब यह तालमेल होता है, तो भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
यदि भकूट दोष है और कोई परिहार नहीं है, तो भी निराश नहीं होना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में कई उपाय बताए गए हैं जो भकूट दोष के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
पहला उपाय यह है कि भकूट दोष वाले जोड़े को नवग्रह शांति पूजा करानी चाहिए। दूसरा उपाय यह है कि गुरुवार और शुक्रवार को व्रत करना चाहिए। तीसरा उपाय यह है कि गुरु और शुक्र की नियमित पूजा करनी चाहिए।
क्या भकूट दोष होने पर विवाह नहीं करना चाहिए
नहीं, राशि स्वामी मित्र हों और अन्य कारक अनुकूल हों तो विवाह संभव है।
भकूट दोष के कितने प्रकार हैं
भकूट दोष के तीन मुख्य प्रकार हैं, द्वि द्वादश, नव पंचम और षडाष्टक।
क्या भकूट दोष स्वतः समाप्त हो सकता है
हाँ, राशि स्वामियों की मित्रता और अन्य अनुकूल योगों से दोष का प्रभाव कम होता है।
भकूट दोष का सबसे गंभीर प्रकार कौन सा है
षडाष्टक दोष सबसे गंभीर माना जाता है क्योंकि यह मानसिक तनाव और संघर्ष देता है।
क्या उपायों से भकूट दोष कम होता है
हाँ, उपायों और पूजा से भकूट दोष का प्रभाव कम किया जा सकता है।
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