गुरु शुक्र तारा डूबने पर विवाह वर्जन

By पं. नीलेश शर्मा

जानिए जन्म कुंडली में गुरु और शुक्र के अस्त होने का वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य और विवाह संस्कार रोकने का सच

गुरु शुक्र अस्त विवाह वर्जन ग्रह शुद्धि और उपाय जानिए

सनातन धर्म की पावन वैचारिक चेतना और वैदिक ज्योतिष के विशाल वांग्मय में नवग्रहों की गतियों और कुंडली के विशिष्ट भाव संरेखणों को मानव जीवन के कर्मायन का साक्षात आधार माना गया है। भचक्र के समस्त ज्योतिषीय विन्यासों और उच्च आध्यात्मिक साधनाओं का अंतिम लक्ष्य भी मनुष्य के मस्तिष्क को भ्रम, प्रमाद और क्षणभंगुर सांसारिक मोह के चक्रव्यूह से मुक्त करके उसे परम आत्मिक स्थिरता प्रदान करना है। ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार विवाह के पावन मुहूर्त निर्धारण में गुरु मौढ्य अर्थात गुरु का तारा डूबना और शुक्र मौढ्य अर्थात शुक्र का तारा डूबना सबसे बड़ा निषेध और कड़ा कर्मात्मक अवरोध माना गया है। देवगुरु बृहस्पति जहाँ विवाह की आंतरिक पवित्रता, शुचिता, नैतिकता और अखंड सौभाग्य के परम कारक हैं, वहीं भृगु नंदन शुक्र देव आपसी आकर्षण, संवेगात्मक आरोग्यता और संपूर्ण भौतिक सुखों के स्वामी स्वीकार किए गए हैं। जब ये दोनों महान नैसर्गिक शुभ ग्रह सूर्य देव के प्रचंड तेज से पूरी तरह परास्त होकर आकाशमंडल में अस्त या मलीन हो जाते हैं, तो उस विशिष्ट कालखंड में संपन्न किया गया विवाह पूरी तरह से दैवीय आशीर्वाद विहीन माना जाता है। यह विस्तृत लेख इसी कड़े कर्मायन को गहराई से समझाएगा कि गृहस्थी के इन दो मुख्य आधारभूत स्तंभों के निर्बल होने पर फेरे लेना क्यों पूरी तरह वर्जित है और इस सोए हुए समय में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में किस तरह की संवेगात्मक कड़वाहट, संवादहीनता और कंगाली का साक्षात सामना करना पड़ सकता है ताकि जातक मानसिक रूप से मजबूत होकर सही समय पर श्रेष्ठ निर्णय ले सकें।

तारा डूबने की अवधि का स्वरूप और भाव परिशोधन का सूक्ष्म ज्योतिषीय मापदंड

इस महत्वपूर्ण खगोलीय अवस्था, दोनों परम शुभ ग्रहों के लुप्त तेज और चेतना पर पड़ने वाले कार्मिक प्रभावों की प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना प्रत्येक निष्ठावान सात्विक साधक के लिए अनिवार्य है। नीचे दी गई तालिका में गुरु और शुक्र देव के अस्त होने के मुख्य मापदंडों, दांपत्य जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों और अनुशंसित सात्विक व्यवस्थाओं का एक स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया गया है।

मुख्य खगोलीय मापदंड गोचर मंडल में ग्रहों का विशिष्ट संरेखण स्वरूप चेतना पर होने वाला मूल व्यावहारिक प्रभाव अनुशंसित वैदिक अनुष्ठान एवं नियम
गुरु मौढ्य विन्यास बृहस्पति का सूर्य देव के अत्यधिक समीप आकर छिपना विवेक का सर्वथा लोप, भाग्य की मंदता और संताप इस पावन अवधि में विवाह संस्कार को टालना
शुक्र मौढ्य विन्यास शुक्र देव का प्रखर सौर रश्मियों द्वारा मलीन होना आकर्षण विहीनता, यांत्रिक शुष्कता और कोलाहल लक्ष्मी नारायण की संयुक्त सात्विक उपासना
संयुक्त कर्माशय शोधन दोनों गृहस्थ स्तंभों का साक्षात दृश्य चेतना खोना समझौतों की बैसाखी पर वैवाहिक जीवन का चलना प्रत्येक सोमवार को शिव लिंग पर जल का अर्पण
दशा गोचर समन्वय संचित प्रारब्ध के कड़े ऋणों का अचानक जाग्रत होना मन के भीतर अज्ञात संशयों और भयों का उदय हनुमान चालीसा का अखंड पाठ और सांध्य दीप

पहली नज़र के सम्मोहन का भ्रम और निर्बल स्तंभों का कठोर व्यावहारिक यथार्थ

लौकिक संसार में अज्ञानता वश मनुष्य अक्सर जिस क्षणभंगुर चकाचौंध या तात्कालिक आकर्षण को सच्चा प्रेम समझ बैठता है, इन दो मुख्य सितारों का अस्त स्वरूप उसकी वास्तविकता को स्वतः ही सिद्ध कर देता है।

  • शुक्र देव जातक को केवल शुरुआती शारीरिक सम्मोहन, काव्यात्मक अभिव्यक्ति और राजसी चकाचौंध प्रदान कर सकते हैं परंतु संबंध का समय और स्थायित्व केवल गुरु का विवेक तय करता है।
  • जब यह दोनों ग्रह गोचर मंडल में अपनी दृश्य चेतना खो देते हैं तो जातक के भीतर की काल्पनिक प्रवृत्तियां और संवेगात्मक पागलपन अचानक बहुत अधिक तीव्र हो जाता है।
  • इसके प्रभाव से विवाह संपन्न होने के पश्चात दोनों मित्रों के बीच अचानक एक अजीब सा रूखापन, उपेक्षा और अगाध संवादहीनता का कड़वा वातावरण निर्मित होने लगता है।
  • वैचारिक कोलाहल की यह स्थिति मनुष्य के अवचेतन मन में दबे हुए पुराने जन्मों के कड़े प्रारब्ध और संचित कर्माशय को परीक्षा की घड़ी में लाकर खड़ा कर देती है जिससे जीव अंदर से पूरी तरह टूट जाता है।

अधैर्य की यह भावना आपके उत्कृष्ट विवेक को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है इसलिए जब भी पंचांग में इन दोनों तारों के डूबे होने का पुण्यकाल चल रहा हो तो तत्काल कोई आवेगी निर्णय लेने के स्थान पर मौन रहकर आत्मनिरीक्षण करना ही सर्वोच्च बुद्धिमत्ता सिद्ध होगी।

जब समझौतों की धारणाएं बिखरती हैं और शुभ गोचर से चमकता है दांपत्य भाग्य

महर्षि पराशर के सिद्धांतों के अनुसार कुंडली के ग्रह केवल भौतिक सुख या विलासिता देने वाले माध्यम नहीं हैं बल्कि वे चेतना के धरातल पर आत्मा को आत्मनिर्भर बनाने वाले परम शिक्षक हैं।

जो विवाह संबंध केवल बाहरी सुंदरता या तात्कालिक भौतिक स्वार्थों की बुनियाद पर ईश्वर की सुप्त अवस्था में खड़े किए जाते हैं, वे समय के कड़े कार्मिक परीक्षणों को तनिक भी सहन नहीं कर पाते हैं। बातचीत का अंतिम क्षणों में अचानक टूट जाना या विवाह के पश्चात निरंतर कंगाली व कलह का होना जातक के झूठे अहंकार को समूल नष्ट करने का साक्षात ब्रह्मांडीय माध्यम बनता है जिससे युवा वर्ग छुप छुप कर रोने के लिए विवश हो जाता है। परंतु विक्षोभ की यह कड़वी दवा वास्तव में जीवात्मा को यह महान पाठ पढ़ाती है कि संसार का कोई भी बाहरी संबंध आपके आंतरिक संतोष की परम प्यास को शांत नहीं कर सकता है। जब मनुष्य दूसरों से अत्यधिक संवेगात्मक अपेक्षाएं रखना बंद कर देता है तो उसके भीतर एक अलौकिक वैराग्य और अद्भुत आत्मनियंत्रण का जन्म होता है। इसके विपरीत जब ये दोनों सितारे पुनः उदित होते हैं और गोचर मंडल में देवगुरु बृहस्पति का संयुक्त आशीर्वाद सप्तम भाव पर क्रियाशील होता है, तो कमजोर रिश्ते भी सोने की तरह तपकर निखरते हैं।

सही निर्णय लेने की दिव्य प्रेरणा और आंतरिक आत्मनिर्भरता का उदय

इस संवेदनशील और सुंदर कार्मिक संरेखण की वेला में प्रकृति जातक को अपने जीवन के संबंध में अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक निर्णय लेने की परम प्रेरणा प्रदान करती है।

  • जो जातक इस समय अपनीं तीव्र मानसिक ऊर्जा को व्यर्थ के कोलाहल और कुतर्कों में नष्ट करने के स्थान पर कठिन परिश्रम और ध्यान में लगा देते हैं उनका भाग्य स्वतः ही उदय होता है।
  • यह समय किसी भी प्रकार के घमंड, राजसी अकड़ या काल चक्र के प्रति अंधविश्वास रखने का समूल परित्याग करने का सर्वोपरि कालखंड माना गया है।
  • एक कड़े आत्म अनुशासन का पालन करना और अपनी चेतना को स्वधर्म के प्रति समर्पित करना ही इस कालखंड की सबसे बड़ी और सच्ची पूजा है।
  • जब मनुष्य अपने झूठे वैचारिक मुखौटों का विसर्जन करके यथार्थ को स्वीकार कर लेता है, तो संपूर्ण ब्रह्मांड उसके वैवाहिक सुख के लिए तत्क्षण सक्रिय हो जाता है।

इस प्रकार यह अनुकूल खगोलीय ऊर्जा वास्तव में जीव के अंतःकरण का परिमार्जन करके उसे आने वाले उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह परिपक्व और व्यावहारिक रूप से सुदृढ़ बना देती है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सुखी रहें।

ग्रह जनित संताप को शांत करने के अचूक ज्योतिषीय उपाय

ब्रह्मांडीय समय चक्र में गुरु और शुक्र के अस्त होने से उत्पन्न होने वाली मारक ऊर्जा को संतुलित करने और जीवन में वैवाहिक सुख व मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में कुछ अत्यंत गोपनीय उपाय वर्णित हैं।

  • भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त पूजन क्योंकि देवाधिदेव महादेव और साक्षात जगत जननी पार्वती संपूर्ण चराचर ब्रह्मांड के आदि दांपत्य स्वरूप हैं इसलिए प्रत्येक सोमवार को शिव लिंग पर जल अर्पित करना सर्वोत्तम उपाय है।
  • हनुमान चालीसा का अखंड पाठ नित्य सायंकाल के समय चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करके हनुमान चालीसा का पाठ करना समस्त मानसिक संतापों और अज्ञात भयों को समूल नष्ट कर देता है।
  • समाज के वंचित वर्ग की मूक सेवा प्रत्येक गुरुवार को निर्धन ब्राह्मणों को सात्विक पीले अन्न का दान करें तथा प्रत्येक शुक्रवार को छोटी कन्याओं को गुप्त रूप से सफेद मिठाई या वस्त्र अर्पित करें।
  • चांदी के पात्र का नियमित प्रयोग स्वभाव में शीतल भाव बनाए रखने और वाणी को मधुर रखने के लिए प्रतिदिन चांदी के गिलास में शीतल जल पीने का नियम बनाए रखें।
  • रंगों का अत्यंत संस्कृतायन चयन इस अवधि में अत्यधिक गहरे काले या चटक तामसिक रंगों के प्रयोग से पूरी तरह बचें और मन की सात्विक शांति के लिए हल्के पीले, सफेद या पेस्टल रंगों का उपयोग करें।

अंतःकरण के धरातल पर परम संतोष की पुनर्स्थापना

बृहस्पति और शुक्र का यह गोचर विन्यास वास्तव में किसी जीव के समूल विनाश या वैवाहिक सुखों की मानसिक प्रताड़ना के लिए सक्रिय नहीं होता है बल्कि वह तो हमारी अंतरात्मा के भीतर छिपे हुए धैर्य की परीक्षा लेने आता है।

जब मनुष्य अपने झूठे वैचारिक मुखौटों का विसर्जन करके यथार्थ को स्वीकार कर लेता है और चराचर ब्रह्मांड के न्याय विधान के सम्मुख पूरी तरह नतमस्तक हो जाता है तो शुभ रश्मियाँ उसके लिए परम आनंद का मार्ग प्रशस्त करने लगती हैं। यह कालखंड हमें यह परम शिक्षा प्रदान करता है कि जीवन के मानसिक तूफानों के बीच अपने अंतःकरण को शुद्ध रखते हुए भी स्थिर और अनुशासित बने रहना ही वास्तविक पुरुषार्थ है। अपनी इस आंतरिक चेतना को हमेशा जाग्रत रखिएगा क्योंकि ग्रहों की गतियां केवल आपके प्रारब्ध का परिमार्जन कर रही हैं ताकि आपको एक सर्वथा नए और सुदृढ़ स्वरूप में ढाला जा सके। वास्तविक सुख केवल बाहरी परिस्थितियों में नहीं बल्कि आंतरिक संतोष और आत्मिक शांति में ही समाहित है। जब हमारा विश्वास हमारे भयों से बड़ा हो जाता है तो संपूर्ण ब्रह्मांड हमारे कल्याण के लिए तत्क्षण सक्रिय हो जाता है ताकि जीव को परम शांति मिल सके।

सटीक कुंडली मिलान परिणाम पाएं

कुंडली मिलान

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नीलेश शर्मा

पं. नीलेश शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ