धनिष्ठा नक्षत्र वाले धनवान कैसे बनें?

By पं. अभिषेक शर्मा

अष्ट वसु और शिव कृपा से हासिल करें रियल एस्टेट और संगीत में विजय

धनिष्ठा नक्षत्र करियर सफलता और मंगल वैदिक उपाय

अष्ट वसुओं का दिव्य स्पंदन और मंगल का भौतिक पराक्रम

वैदिक नक्षत्र मंडल के सत्ताईस नक्षत्रों में धनिष्ठा नक्षत्र को तेईसवां परम ऐश्वर्यशाली स्थान प्राप्त है जो मकर राशि के 23 अंश 20 कला से आरंभ होकर कुंभ राशि के 6 अंश 40 कला तक विस्तृत रहता है। कालपुरुष के विराट स्वरूप में यह नक्षत्र दोनों घुटनों के निचले भाग पिंडलियों और टखनों का प्रतिनिधित्व करता है जो संपूर्ण शरीर को गतिशील संतुलन और दृढ़ता प्रदान करने वाले मूल आधार हैं। धनिष्ठा शब्द का वास्तविक अर्थ सबसे अधिक धनवान परम समृद्ध अथवा सार्वभौमिक ऐश्वर्य का स्वामी होता है। इस पावन नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता आठों दिशाओं और प्राकृतिक तत्वों को संचालित करने वाले अष्ट वसु हैं जिन्हें सनातन वैदिक परंपरा में धरा अनल अनिल आप प्रत्युष प्रभास सोम और ध्रुव के नाम से जाना जाता है। इस नक्षत्र के ग्रह स्वामी अदम्य साहस पराक्रम भूमि और निर्माण ऊर्जा के अधिपति मंगल देव हैं जबकि राशि स्वामी कर्म न्याय और कठोर व्यवस्था के नियंत्रक शनि देव हैं। आकाश मंडल में चार तारों का यह दिव्य समूह भगवान शिव के पावन डमरू अथवा बांसुरी के रूप में दृष्टिगोचर होता है जो ब्रह्मांडीय नाद काल चक्र की निरंतर गति और भौतिक संपदा के चक्रीय प्रवाह का परिचायक है।

मकर राशि के स्वामी शनि देव का व्यावहारिक यथार्थ और कुंभ राशि की दूरदर्शी सामाजिक चेतना जब मंगल देव के प्रचंड पुरुषार्थ और अष्ट वसुओं के अगाध ऐश्वर्य से मिलती है तब एक अत्यंत वैभवशाली संगठित और अपराजेय ऊर्जा का प्राकट्य होता है। धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातकों को प्रकृति से ही संगीत की सूक्ष्म लय को पहचानने अचल संपत्तियों का विशाल साम्राज्य खड़ा करने और बड़े वित्तीय प्रवाह को नियंत्रित करने का अलौकिक वरदान मिलता है। यह जातक किसी भी क्षेत्र में शून्य से शुरुआत करके शिखर तक पहुंचने का अद्भुत सामर्थ्य रखते हैं। जब जन्मपत्रिका में मंगल शनि और गुरु शुभ भावों में विराजमान होते हैं तो जातक रियल एस्टेट निर्माण उद्योग संगीत वाद्य यंत्र निर्माण वाणिज्यिक बैंकिंग खेल जगत और विशाल वित्तीय निधियों के प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करते हैं। यह जातक समय के अनुशासन और संसाधनों के मूल्य को भलीभांति समझते हैं। इनकी अडिग कार्यशैली और व्यावहारिक सूझबूझ ही इन्हें कॉरपोरेट और व्यावसायिक जगत में एक अत्यंत धनी और प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाती है।

धनिष्ठा नक्षत्र के लिए प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र

व्यावसायिक एवं विशेषज्ञ क्षेत्रउपयुक्त उच्च पद और कार्यभारप्रमुख नियंत्रक ग्रहसफलता का मुख्य ज्योतिषीय आधार
रियल एस्टेट एवं भूमि विकासमुख्य रियल एस्टेट डेवलपर और निर्माण साम्राज्य प्रमुखमंगल एवं शनिभूमि पुत्र मंगल और मकर की संरचनात्मक ऊर्जा
शास्त्रीय एवं आधुनिक संगीतसंगीत निर्देशक ताल वाद्य विशेषज्ञ और वादकमंगल एवं शुक्रभगवान शिव के डमरू का नाद और प्राकृतिक लय
वाणिज्यिक बैंकिंग एवं फंड प्रबंधनमुख्य वित्तीय नियंत्रक और हेज फंड प्रबंधकमंगल एवं बुधबड़े वित्तीय लेन देन और पूंजी के प्रवाह का नियंत्रण
प्रतिस्पर्धी खेल एवं एथलेटिक्सअंतरराष्ट्रीय एथलीट खेल प्रशिक्षक और सैन्य अधिकारीमंगल एवं सूर्यपिंडलियों की शारीरिक मजबूती और अदम्य ऊर्जा
वाद्य यंत्र निर्माण एवं ध्वनि तकनीकमास्टर वाद्य निर्माता और साउंड प्रोडक्शन प्रमुखशनि एवं शुक्रधातुओं और काष्ठ को संगीत में ढालने की कला
धातु कर्म एवं भारी मशीनरीइस्पात उद्योगपति और भारी खनन संयंत्र निदेशकमंगल एवं शनिपृथ्वी के गर्भ से धातुओं को निकालकर संपदा बनाना

कार्यक्षेत्र में अत्यधिक भौतिकवाद और संवेदनहीनता से संकट

धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों का सबसे प्रमुख गुण अर्थात उनका धन संचय करने का कौशल ही कई बार उनके पेशेवर जीवन में गंभीर संकट और आंतरिक पतन का कारण बन जाता है। अष्ट वसुओं के अति भौतिक प्रभाव के कारण इन जातकों के भीतर धन वैभव और भौतिक वस्तुओं के संग्रह की एक अंधी तृष्णा जाग उठती है। जब कोई अधिकारी अथवा व्यापारी हर मानवीय संबंध को केवल लाभ और हानि के तराजू पर तौलने लगता है तो उसके भीतर से स्वाभाविक दया और संवेदनशीलता समाप्त होने लगती है। सहकर्मियों और अधीनस्थ कर्मचारियों की जायज परेशानियों की अनदेखी करना और काम के बदले केवल उत्पादन की मांग करना कार्यस्थल पर इनके विरुद्ध गहरा रोष उत्पन्न कर देता है।

इसके साथ ही धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों में अपनी धन संपदा और सामाजिक प्रतिष्ठा का सार्वजनिक दिखावा करने की घातक प्रवृत्ति जन्म ले लेती है। झूठी शान और अहंकार को संतुष्ट करने के लिए यह जातक विलासिता की वस्तुओं और दिखावटी आयोजनों में भारी फिजूलखर्ची करने लगते हैं जिससे इनकी संचित पूंजी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अपने निर्णयों के प्रति अत्यधिक कठोर होना और दूसरों के दृष्टिकोण को पूरी तरह नकार देना इन्हें पेशेवर दुनिया में एकाकी बना देता है। जब जन्मपत्रिका में मंगल अथवा शनि पर राहु या केतु का क्रूर प्रभाव होता है तो जातक त्वरित लाभ कमाने के लालच में अनैतिक व्यावसायिक मार्गों का चयन कर लेता है जिससे वर्षों की अर्जित साख पल भर में नष्ट हो जाती है और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।

अष्ट वसु और देवाधिदेव शिव की नित्य साधना विधि

मन की भौतिक तृष्णा को सात्विक विवेक में बदलने वाणी में मधुरता लाने और कार्यक्षेत्र में स्थायी धन संपदा की रक्षा करने के लिए अष्ट वसुओं और भगवान आशुतोष शिव की संयुक्त साधना सर्वोत्तम वैदिक उपाय है। भगवान शिव समस्त वसुओं के परम आराध्य और नाद ब्रह्म डमरू के स्वामी हैं जिनकी कृपा से जीवन का असंतुलन समाप्त होकर आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

  • प्रतिदिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करें और स्वच्छ लाल अथवा हल्के केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें।
  • अपने पूजा स्थान में उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और शुद्ध गाय के घी का एक मुखी दीपक प्रज्वलित करें।
  • शुद्ध तांबे के लोटे में ताजा जल भरें और उसमें थोड़ा सा कच्चा गाय का दूध अक्षत और श्वेत चंदन मिलाएं।
  • शिवलिंग पर इस पवित्र जल की मंद धारा समर्पित करते हुए नमः शिवाय मंत्र अथवा शिव पंचाक्षर स्तोत्र का शांत चित्त से स्मरण करें।
  • जलाभिषेक के उपरांत शिवलिंग पर भस्म और बिल्वपत्र अर्पित करें तथा भगवान शिव के डमरू स्वरूप नाद का ध्यान करें।
  • शुद्ध आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से अष्ट वसुओं के पावन मंत्र ॐ वसुभ्यो नमः अथवा धनिष्ठा नक्षत्र मंत्र ॐ धनिष्ठायै नमः का 108 बार जाप करें।
  • प्रत्येक मंगलवार के दिन शाम के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें जिससे मंगल ग्रह की क्रूरता शांत होकर सृजनात्मक शक्ति में बदल जाती है।
  • साधना के अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करें कि आपकी धन संपदा केवल आपके भोग के लिए नहीं बल्कि समाज के कल्याण और धर्म की रक्षा में लगे।
  • यह नियमित साधना जातक के चित्त से भौतिक लालच को मिटाकर उसके कर्मों में ऐसा अनुशासन भरती है जिससे व्यापार और करियर में निरंतर वृद्धि होती है।

तीन मुखी रुद्राक्ष और लाल मूंगा धारण करने की शास्त्रीय विधि

यदि रियल एस्टेट के सौदों में अचानक रुकावट आ रही हो अथवा धन संचय होने के स्थान पर फिजूलखर्ची में नष्ट हो रहा हो तो शास्त्रीय नियमों के अनुसार रुद्राक्ष अथवा प्रामाणिक रत्न धारण करना चाहिए।

  • तीन मुखी रुद्राक्ष धारण विधि: धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों के लिए साक्षात पावक अग्नि स्वरूप तीन मुखी रुद्राक्ष परम कल्याणकारी कवच माना गया है। यह रुद्राक्ष मंगल देव के समस्त दुष्प्रभावों को शांत करके जातक के भीतर की संवेदनहीनता को दूर करता है और कार्यकुशलता में संतुलन लाता है। शुक्ल पक्ष के किसी शुभ मंगलवार अथवा धनिष्ठा नक्षत्र के दिन प्रातः काल रुद्राक्ष को कच्चे गाय के दूध और गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात ॐ क्लीं नमः मंत्र का 108 बार जाप करके इसे तांबे के तार सोने अथवा लाल रेशमी धागे में पिरोकर गले में धारण करें। यह रुद्राक्ष धन संचय की क्षमता को सुदृढ़ करता है और फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाता है।
  • शुद्ध लाल मूंगा धारण विधि: यदि जन्मपत्रिका में मंगल ग्रह कारक होकर शुभ भाव में स्थित हो परंतु बलहीन हो तो 6 से 8 रत्ती का प्राकृतिक इटैलियन लाल मूंगा तांबे अथवा 22 कैरेट सोने की अंगूठी में जड़वाना चाहिए। शुक्ल पक्ष के मंगलवार को प्रातः काल सूर्योदय के समय मंगल के बीज मंत्र से 108 बार अभिमंत्रित करके इसे दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करें। रत्न धारण करने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से अपनी कुंडली के तत्वों का सूक्ष्म परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए।

कार्यक्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक संतुलन के अचूक वैदिक उपाय

दैनिक जीवन में सूक्ष्म व्यावहारिक नियमों और आध्यात्मिक आचरण का समावेश करने से धनिष्ठा नक्षत्र के जातक अपनी विपुल संपदा को सुरक्षित और स्थायी बना सकते हैं।

  • अपनी अर्जित आय और व्यापारिक लाभ का कम से कम दसवां हिस्सा किसी अनाथालय कुष्ठ आश्रम अथवा निर्धन रोगियों की चिकित्सा सहायता में नियमित रूप से दान करें।
  • प्रत्येक मंगलवार के दिन किसी प्राचीन शिव मंदिर में जाकर शुद्ध तांबे का बर्तन अथवा तांबे के सिक्के श्रद्धापूर्वक दान करें और गरीबों को भोजन कराएं।
  • कार्यस्थल पर अपने सहकर्मियों और कनिष्ठ कर्मचारियों के साथ बात करते समय कठोरता का त्याग करें और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनें।
  • अपने कार्यालय के कक्ष में दक्षिण दिशा की दीवार को पूरी तरह सुदृढ़ और स्वच्छ रखें तथा वहां किसी भी प्रकार की गंदगी या टूटे फूटे उपकरण न रहने दें।
  • दिखावे और अहंकार की संतुष्टि के लिए विलासिता पूर्ण आयोजनों पर अनावश्यक धन व्यय करने से बचें और धन का उपयोग स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में करें।
  • प्रतिदिन सुबह काम आरंभ करने से पूर्व कुछ क्षण के लिए मधुर वाद्य संगीत अथवा ओंकार की ध्वनि का शांत मन से श्रवण करें जिससे मानसिक तनाव दूर रहता है।

धनिष्ठा नक्षत्र के पेशेवरों के लिए आवश्यक आचरण संहिता

कार्यक्षेत्र में अवश्य अपनाएंइन प्रवृत्तियों से सर्वथा दूर रहें
अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार रखेंदूसरों की भावनाओं को नजरअंदाज करके केवल काम का दबाव न बनाएं
मंगलवार को तांबे का दान और शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंझूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के दिखावे में भारी फिजूलखर्ची न करें
अपनी संपत्ति का एक हिस्सा अनाथालयों और चिकित्सा में दान करेंकेवल भौतिक लाभ के लिए किसी के भरोसे के साथ खिलवाड़ न करें
कार्यस्थल पर संगीत और ध्वनि संतुलन का विशेष ध्यान रखेंअपने निर्णयों को दूसरों पर जबरन थोपकर कठोर रवैया न अपनाएं

नाद ब्रह्म और लोक कल्याण से शाश्वत समृद्धि

जब धनिष्ठा नक्षत्र का जातक अपनी असीम धन संचय क्षमता और पराक्रम को भौतिक लालच से मुक्त करके परोपकार और लोक सेवा के सांचे में ढाल लेता है तब उसका ऐश्वर्य अक्षय बन जाता है। भगवान शिव के डमरू का वास्तविक संदेश यही है कि संसार की संपूर्ण संपदा केवल एक चक्र है जो गतिमान रहकर ही पवित्र रहती है। अष्ट वसुओं का वास्तविक आशीष केवल तिजोरियां भरना नहीं बल्कि उस धन का उपयोग सृष्टि के पोषण और धर्म की रक्षा के लिए करना है। जब कोई रियल एस्टेट कारोबारी उद्योगपति अथवा संगीतकार अपनी कला और पूंजी को समाज के वंचित वर्ग के उत्थान में लगाता है तब उसे न केवल इस संसार में सर्वोच्च सम्मान और अटूट धन की प्राप्ति होती है बल्कि उसका नाम इतिहास में एक महान और अमर दानवीर के रूप में सदैव आदर से लिया जाता है।

FAQ

धनिष्ठा नक्षत्र की कमजोरी क्या है? धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों की मुख्य कमजोरी अत्यधिक भौतिकवादी होना दूसरों की भावनाओं के प्रति कठोर होना और दिखावे में भारी फिजूलखर्ची करना है।

अष्ट वसुओं का मंत्र क्या है? आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन ॐ वसुभ्यो नमः अथवा ॐ धनिष्ठायै नमः मंत्र का 108 बार जाप करना सर्वोत्तम उपाय है।

धनिष्ठा हेतु कौन सा रुद्राक्ष पहनें? धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों के लिए तीन मुखी नेपाली रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम होता है जो धन संचय क्षमता और कार्यकुशलता में संतुलन लाता है।

कार्यक्षेत्र में फिजूलखर्ची कैसे रोकें? झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के दिखावे से बचें और अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा अनाथालयों व चिकित्सा कार्यों में दान करने का नियम बनाएं।

मंगलवार को क्या दान करें? मंगलवार के दिन शिव मंदिर में तांबे का पात्र अथवा तांबे के सिक्के दान करने और गरीबों को भोजन कराने से मंगल की पीड़ा शांत होती है।

जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?

मेरा जन्म नक्षत्र

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. अभिषेक शर्मा

पं. अभिषेक शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ