By पं. अमिताभ शर्मा
अग्नि देव और सूर्य कृपा से हासिल करें प्रशासन और सेना में सर्वोच्च विजय

वैदिक नक्षत्र मंडल में कृतिका नक्षत्र को तीसरा पावन स्थान प्राप्त है जो मेष राशि के 26 अंश 40 कला से आरंभ होकर वृषभ राशि के 10 अंश तक विस्तृत रहता है। कालपुरुष के चक्र में यह नक्षत्र मस्तक के अंतिम भाग और मुख मंडल के प्रारंभिक भाग का नियंत्रण करता है। कृतिका नक्षत्र के अधिष्ठाता साक्षात यज्ञ पुरुष अग्नि देव हैं और इसका अधिपति ग्रह नवग्रहों का राजा सूर्य देव है। इस नक्षत्र का वैदिक प्रतीक चिन्ह उस्तरा तीक्ष्ण छुरी अथवा प्रज्वलित अग्नि की ज्वाला है जो किसी भी अवांछित तत्व को काटकर शुद्ध करने और भस्म करने की प्रचंड सामर्थ्य को प्रकट करता है। मेष राशि का उग्र मंगल और वृषभ राशि का सौंदर्यप्रिय शुक्र जब सूर्य के आत्मबल और अग्नि देव के तेज से मिलते हैं तब एक अत्यंत प्रखर तेजस्वी और निर्भीक ऊर्जा का जन्म होता है।
इस नक्षत्र में जन्मे जातकों में जन्मजात नेतृत्व शौर्य और सत्य को स्थापित करने की दृढ़ इच्छाशक्ति होती है। कृतिका की अग्नि केवल विनाशकारी नहीं होती बल्कि यह स्वर्ण को तपाकर कुंदन बनाने वाली शोधक अग्नि है। जब जन्मपत्रिका में सूर्य मंगल और गुरु शुभ स्थिति में होते हैं तो जातक उच्च प्रशासनिक व्यवस्था सेना रक्षा तंत्र पाक कला और धातु उद्योग में सर्वोच्च शिखर को छूते हैं। यह जातक किसी भी प्रकार के आलस्य ढिलाई अथवा छल प्रपंच को लेशमात्र भी सहन नहीं करते। इनके व्यक्तित्व में एक प्राकृतिक दबदबा और चुंबकीय आकर्षण होता है जो मातहतों को अनुशासन में बांधे रखता है और कठिन से कठिन प्रशासनिक अभियानों को सफलतापूर्वक पूर्ण कराता है।
| व्यावसायिक एवं विशेषज्ञ क्षेत्र | उपयुक्त उच्च पद और कार्यभार | प्रमुख नियंत्रक ग्रह | सफलता का मुख्य ज्योतिषीय आधार |
|---|---|---|---|
| प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाएं | जिला मजिस्ट्रेट संभागीय आयुक्त और प्रशासनिक अधिकारी | सूर्य एवं मंगल | त्वरित न्याय और व्यवस्था को नियंत्रित करने का तेज |
| रक्षा सेना एवं सुरक्षा बल | सैन्य कमांडर तोपखाना विशेषज्ञ और विशेष सुरक्षा अधिकारी | सूर्य एवं केतु | आग्नेयास्त्रों का संचालन और अदम्य निर्भीकता |
| पाक कला एवं अंतरराष्ट्रीय शेफ | मुख्य कार्यकारी शेफ और लक्जरी रेस्तरां संचालक | अग्नि देव एवं शुक्र | अग्नि के रूपांतरण का ज्ञान और कलात्मक सुरुचि |
| धातु कर्म एवं भारी उद्योग | इस्पात संयंत्र निदेशक और धातु शोधन वैज्ञानिक | सूर्य एवं शनि | धातुओं को पिघलाने और ढालने की आंतरिक समझ |
| स्वर्ण आभूषण एवं रत्न उद्योग | मुख्य स्वर्णकार आभूषण डिजाइनर और रत्न परीक्षक | सूर्य एवं बुध | अग्नि द्वारा धातु शोधन और सूक्ष्म कलात्मक दृष्टि |
| ऊर्जा एवं अग्नि सुरक्षा तंत्र | ऊर्जा मंत्रालय सलाहकार और अग्नि सुरक्षा प्रमुख | सूर्य एवं मंगल | ऊर्जा स्रोतों का प्रबंधन और संकट में त्वरित कार्रवाई |
कृतिका नक्षत्र के जातकों की सबसे तीक्ष्ण तलवार अर्थात उनकी वाणी और तीखा विश्लेषण ही कई बार उनके पेशेवर जीवन में भयंकर विष घोल देता है। कृतिका का प्रतीक चिन्ह क्षुर अर्थात उस्तरा है जिसका स्वभाव काटना और चीरना है। जब यह जातक कार्यस्थल पर किसी सहकर्मी अथवा अधीनस्थ की गलती देखते हैं तो वे बिना किसी सहानुभूति के अत्यंत कठोर तीखे और चुभने वाले शब्दों का प्रयोग करते हैं। इनकी विनाशकारी आलोचना सहकर्मियों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाती है जिससे कार्यालय के भीतर इनके गुप्त विरोधियों का एक बड़ा समूह तैयार हो जाता है।
इसके साथ ही अग्नि तत्व की अधिकता के कारण इन जातकों में क्षणिक क्रोध का विस्फोट बहुत तीव्र होता है। जब कोई कार्य इनके उच्च मानकों के अनुरूप नहीं होता तो वे अपना आपा खो बैठते हैं जिससे उच्च प्रबंधन की दृष्टि में इनकी छवि एक असंतुलित और क्रोधी अधिकारी के रूप में बनने लगती है। जब कुंडली में सूर्य पर शनि या राहु की दृष्टि होती है तो जातक दूसरों के अच्छे सुझावों को भी तुच्छ समझकर खारिज कर देता है। अपने अहम और कटु वचनों के कारण जातक कई बार पदोन्नति के निकट पहुंचकर भी प्रशासनिक जांच अथवा षड्यंत्र का शिकार हो जाता है।
अपने भीतर की विध्वंसक अग्नि को सृजनात्मक ऊर्जा में बदलने और कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों की कृपा प्राप्त करने के लिए देवसेनापति भगवान कार्तिकेय और साक्षात अग्नि देव की नित्य आराधना सर्वोत्तम वैदिक उपाय है। भगवान कार्तिकेय का पालन पोषण कृतिका नक्षत्र की छह मातृ देवियों ने किया था इसलिए इनकी उपासना से कृतिका के समस्त दोष शांत हो जाते हैं।
यदि प्रशासनिक परीक्षाओं में बार बार असफलता मिल रही हो अथवा उच्च पद पर पहुंचने के बाद सहकर्मियों के षड्यंत्र से पद प्रतिष्ठा पर संकट मंडरा रहा हो तो शास्त्रीय विधि से रुद्राक्ष अथवा रत्न धारण करना चाहिए।
दैनिक जीवन में सूक्ष्म वैदिक नियमों और सात्विक दिनचर्या का पालन करने से सूर्य का उग्र प्रभाव शांत होता है और पेशेवर जीवन में अपार मान सम्मान प्राप्त होता है।
| कार्यक्षेत्र में अवश्य अपनाएं | इन प्रवृत्तियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| सहकर्मियों की कमियों को अकेले में प्रेमपूर्वक समझाएं | सार्वजनिक बैठकों में किसी के स्वाभिमान को आहत करने वाले कटाक्ष न करें |
| प्रतिदिन नियमित रूप से सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करें | अत्यधिक क्रोध अथवा आवेश में आकर कोई भी आधिकारिक आदेश जारी न करें |
| रविवार के दिन तांबे के पात्र से जल अर्घ्य समर्पित करें | दूसरों के व्यक्तिगत जीवन और कार्यशैली पर व्यर्थ की टीका टिप्पणी से बचें |
| कनिष्ठ कर्मचारियों के अच्छे कार्यों की खुलकर सराहना करें | केवल अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए अनर्गल कुतर्क न करें |
जब कृतिका नक्षत्र का जातक अपनी प्रचंड अग्नि को क्रोध और विनाशकारी आलोचना से मुक्त करके न्याय अनुशासन और लोक कल्याण के मार्ग पर लगाता है तो वह युगप्रवर्तक सिद्ध होता है। अग्नि देव का वास्तविक गुण केवल जलाना नहीं बल्कि संसार को प्रकाश देना और अपवित्रता को शुद्ध करना है। जब कोई प्रशासक अथवा विशेषज्ञ अपनी कटु वाणी पर नियंत्रण रखकर अपने ज्ञान का उपयोग दूसरों के निर्माण के लिए करता है तब उसे न केवल शासन और संगठन में सर्वोच्च पद प्राप्त होता है बल्कि उसका नाम एक निष्पक्ष न्यायप्रिय और महान नेता के रूप में इतिहास में सदैव आदर से लिया जाता है।
कृतिका नक्षत्र के जातकों की कार्यक्षेत्र में सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? कृतिका नक्षत्र के जातकों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी तीखी वाणी अत्यधिक क्रोध और सहकर्मियों की विनाशकारी आलोचना करने की आदत है।
कृतिका नक्षत्र को शांत और बली करने के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए? मानसिक शांति और प्रशासनिक सफलता के लिए प्रतिदिन ॐ अग्नये नमः अथवा सूर्य गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
कृतिका नक्षत्र के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना सबसे उत्तम है? कृतिका नक्षत्र के लिए बारह मुखी अथवा एक मुखी नेपाली रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम है जो निर्णय क्षमता को प्रखर बनाता है।
कार्यस्थल पर क्रोध और तीखी वाणी को शांत करने के लिए क्या करें? प्रतिदिन तांबे के पात्र से जल पिएं और प्रतिक्रिया देने से पूर्व मौन रहकर गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।
रविवार के दिन कृतिका नक्षत्र वालों को क्या दान करना चाहिए? रविवार के दिन तांबे के बर्तन गेहूं गुड़ अथवा लाल वस्त्र का दान करने से सूर्य का अनिष्ट प्रभाव शांत होता है और मान सम्मान बढ़ता है।
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