हनुमान मंगल शनि दोष निवारण

By पं. अभिषेक शर्मा

चालीसा सुंदरकांड से रक्त ऊर्जा और साढ़ेसाती शांति

हनुमान मंगल शनि दोष चालीसा सुंदरकांड उपाय

मंगलवार शनिवार समय और साधना सार

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह रक्त ऊर्जा साहस भूमि और संघर्ष का कारक माना जाता है। शनि ग्रह कर्म समय अनुशासन और विलंब का कारक है। जब कुंडली में मंगल दोष होता है तो विवाह में बाधा भूमि विवाद रक्त विकार या अत्यधिक क्रोध दिखाई दे सकता है। जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है तो मानसिक थकान आर्थिक संकट और देरी अनुभव हो सकती है। इन दोनों ग्रहों के संयुक्त प्रभाव में हनुमान जी की उपासना पारंपरिक रूप से अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं। उनमें मंगल का असीम पराक्रम और सूर्य का ज्ञान समाहित है। इसीलिए मंगल और शनि दोनों से जुड़ी समस्याओं में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ एक अभेद्य रक्षा कवच बनाता है। गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य चिकित्सक की सहायता आवश्यक है।

विवरणविशेष जानकारी
प्रधान दिनमंगलवार और शनिवार
उपयुक्त समयप्रातः स्नान के बाद या सूर्यास्त के बाद
मुख्य ग्रहमंगल और शनि
मुख्य देवतामहाबली हनुमान
मुख्य पाठहनुमान चालीसा और सुंदरकांड
मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
सहायक मंत्रॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
विशेष अर्पणसिंदूर चमेली का तेल लाल पुष्प
मुख्य दानलाल मसूर गुड़ चना और केला
मूल नियमसत्य वाणी साहस और सेवा

मंगलवार और शनिवार की साधना का पहला कदम यह है कि भय को श्रद्धा में बदला जाए। प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो लाल या केसरिया वस्त्र रखें। हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों तेल या चमेली के तेल का दीप जलाएँ। सिंदूर अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। समय हो तो सुंदरकांड का पाठ करें।

नित्य साधना की यह क्रमबद्ध रूपरेखा घर में सहजता से निभाई जा सकती है।

  • प्रातः स्नान कर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
  • हनुमान जी को सिंदूर चमेली का तेल और लाल पुष्प अर्पित करें
  • पहले ॐ हं हनुमते नमः का 108 बार जप करें
  • हनुमान चालीसा का 1 7 या 11 बार पाठ करें
  • मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करें शनिवार को शनि स्तोत्र पढ़ें
  • दिन भर सत्य वाणी और सेवा भाव का पालन करें

जब रुद्रावतार में मंगल और शनि मिलते हैं

हनुमान जी का जन्म अंजनी के गर्भ से हुआ। किंतु उनकी शक्ति का स्रोत शिव तत्त्व माना जाता है। शिव के 11 रुद्रावतारों में हनुमान को 11वाँ अवतार माना जाता है। रुद्र का अर्थ है वह शक्ति जो अंधकार को काटती है। मंगल उसी शक्ति का तेज है। शनि उसी शक्ति का अनुशासन है।

जब कुंडली में मंगल दोष होता है तो व्यक्ति के भीतर अत्यधिक ऊर्जा होती है। किंतु वह ऊर्जा सही दिशा नहीं पाती। विवाह में बाधा आती है। भूमि विवाद होता है। रक्त विकार हो सकता है। क्रोध अकारण फूट पड़ता है। हनुमान साधना इस ऊर्जा को धर्म की ओर मोड़ती है।

जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है तो व्यक्ति को कर्म का हिसाब चुकाना पड़ता है। देरी होती है। थकान होती है। अकेलापन महसूस होता है। हनुमान साधना इस अनुशासन को सेवा में बदलती है। सेवक भाव से शनि का भार हल्का होता है।

मंगल दोष के प्रमुख संकेत

मंगल दोष केवल एक भाव से तय नहीं होता। कुंडली में मंगल की स्थिति दृष्टि युति और नवमांश देखना आवश्यक है। फिर भी कुछ प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं।

संकेतसंभावित प्रभाव
विवाह में बाधादेरी असमंजस या संबंध टूटना
भूमि विवादसंपत्ति को लेकर कलह या कानूनी पचड़ा
रक्त विकाररक्तचाप रक्त की कमी या चोट लगना
अत्यधिक क्रोधछोटी बात पर प्रतिक्रिया और संघर्ष
दुर्घटना भयवाहन या मशीन से सावधानी की आवश्यकता
साहस की कमीनिर्णय लेने में भय या हिचकिचाहट

इन संकेतों का अर्थ हमेशा मंगल दोष नहीं होता। स्वास्थ्य जीवनशैली और सामाजिक परिस्थिति भी कारण हो सकते हैं। ज्योतिषीय निष्कर्ष के लिए पूरी कुंडली और वास्तविक जीवन दोनों देखना आवश्यक है।

साढ़ेसाती और ढैय्या का मानसिक अर्थ

साढ़ेसाती शनि का 7 वर्षीय चक्र है। यह चंद्रमा के ऊपर से गुजरता है। मन पर दबाव बढ़ता है। ढैय्या 2 वर्ष 6 माह का चक्र है। यह भी शनि का प्रभाव है। दोनों चक्र कर्म और अनुशासन का पाठ देते हैं।

मानसिक स्तर पर साढ़ेसाती में व्यक्ति को अपनी सीमाएँ दिखाई देती हैं। वही काम जो पहले आसान लगते थे अब भारी लगते हैं। रिश्ते परीक्षा में होते हैं। आर्थिक योजनाएँ धीमी होती हैं। यह समय आत्मचिंतन का है।

हनुमान चालीसा इस समय मन को सहारा देती है। प्रत्येक छंद एक नई शक्ति देता है। बजरंगबली का अर्थ है वज्र के समान अंग वाले। यह शरीर को दृढ़ और मन को अभेद्य बनाने की प्रार्थना है। संकट मोचन का अर्थ है संकट को हरने वाले। भय से मुक्ति की प्रार्थना है।

हनुमान चालीसा का रक्षा कवच

हनुमान चालीसा 40 छंदों का संग्रह है। प्रत्येक छंद हनुमान के बल बुद्धि और भक्ति का वर्णन करता है। चालीसा का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है। यह मन को एक लय में लाना है।

मंगल दोष में चालीसा क्रोध को साहस में बदलती है। शनि दोष में चालीसा थकान को धैर्य में बदलती है। दोनों दोषों में चालीसा भय को श्रद्धा में बदलती है।

चालीसा पाठ की सरल विधि इस प्रकार है।

  • स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर बैठें
  • हनुमान जी की प्रतिमा के सामने दीप जलाएँ
  • सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें
  • ॐ हं हनुमते नमः का 108 बार जप करें
  • चालीसा का स्पष्ट और शांत पाठ करें
  • अंत में अपनी बुद्धि और वाणी को धर्म के लिए समर्पित करें

यदि पूरा पाठ संभव न हो तो प्रतिदिन कुछ छंद पढ़े जा सकते हैं। नियमितता संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है।

सुंदरकांड का मंगल और शनि पर प्रभाव

सुंदरकांड रामचरितमानस का वह भाग है जिसमें हनुमान की लंका यात्रा सीता माता की खोज और विभीषण से मिलन की कथा है। इसमें हनुमान का साहस बुद्धि और भक्ति का वर्णन है।

मंगल दोष में सुंदरकांड पाठ करने से अत्यधिक ऊर्जा सही दिशा पाती है। हनुमान की लंका यात्रा व्यक्ति को सिखाती है कि बाधाएँ केवल बाहर नहीं होतीं। भीतर के रावण को भी हराना होता है।

शनि दोष में सुंदरकांड पाठ करने से धैर्य बढ़ता है। हनुमान की खोज यात्रा व्यक्ति को सिखाती है कि सत्य की खोज में देरी हो सकती है। किंतु सत्य अंततः मिलता है।

सुंदरकांड पाठ की सरल विधि इस प्रकार है।

  • मंगलवार को प्रातः स्नान के बाद बैठें
  • हनुमान जी को सिंदूर चमेली का तेल अर्पित करें
  • किष्किंधा कांड के अंतिम दोहे से पाठ आरंभ करें
  • सुंदरकांड का स्पष्ट और शांत पाठ करें
  • अंत में बूंदी के लड्डू या गुड़ चने का भोग लगाएँ

यदि पूरा पाठ संभव न हो तो प्रतिदिन कुछ कांड पढ़े जा सकते हैं। 11 मंगलवार लगातार पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

मंगलवार और शनिवार की पूजा विधि

मंगलवार को प्रातः स्नान के बाद लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की प्रतिमा के सामने सरसों तेल या चमेली के तेल का दीप जलाएँ। सिंदूर अर्पित करें। लाल पुष्प चढ़ाएँ। हनुमान चालीसा का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ करें। लाल मसूर का दान करें।

शनिवार को प्रातः स्नान के बाद काले या नीले वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की प्रतिमा के सामने सरसों तेल का दीप जलाएँ। सिंदूर अर्पित करें। काले तिल का दान करें। हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें। शनि स्तोत्र का पाठ करें।

दोनों दिनों में वाणी पर विशेष ध्यान रखें। झूठा वादा न करें। कटु व्यंग्य से बचें। किसी को कष्ट न दें। यही हनुमान जी की सबसे बड़ी पूजा है।

दान और व्यवहारिक उपाय

मंगल दोष और शनि दोष में दान विशेष फलदायी माना जाता है। दान से अहंकार टूटता है। कर्म शुद्ध होता है। ग्रह शांत होते हैं।

दानलाभ
लाल मसूरमंगल दोष शांति और रक्त विकार में राहत
गुड़ चनाशनि दोष शांति और मानसिक थकान में राहत
केलाहनुमान जी को प्रिय और साहस वृद्धि
सिंदूरमंगल तेज को सकारात्मक दिशा
चमेली का तेलशनि अनुशासन को सेवा में बदलना

व्यवहारिक उपाय भी महत्वपूर्ण हैं। मंगलवार को पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें। शनिवार को गौ माता की सेवा करें। बजरंग बाण का पाठ करें। बजरंग बाण मंगल और शनि दोनों के लिए प्रभावी माना जाता है।

ज्योतिष और व्यवहार का संतुलन

ग्रहों को भय का कारण बनाना ज्योतिष का उद्देश्य नहीं है। मंगल दोष हो तो व्यक्ति को अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करना चाहिए। शनि दोष हो तो व्यक्ति को अपने कर्म में अनुशासन लाना चाहिए।

हनुमान चालीसा मन को लय देती है। सुंदरकांड धैर्य देता है। दान अहंकार तोड़ता है। सेवा कर्म को शुद्ध करती है। सत्य वाणी ग्रहों को शांत करती है।

यदि विवाह में बाधा हो तो कुंडली मिलान कराएँ। यदि भूमि विवाद हो तो कानूनी सलाह लें। यदि रक्त विकार हो तो चिकित्सक की सहायता लें। यदि मानसिक थकान हो तो विश्राम और ध्यान करें। यही व्यवहारिक उपाय मंत्र के साथ चलते हैं।

क्या करें और क्या न करें

मंगल शनि दोष और हनुमान साधना में स्पष्ट सीमाएँ सहायक हैं।

करेंन करें
मंगलवार शनिवार को हनुमान पूजाकेवल भय से पूजा
सिंदूर और चमेली का तेल अर्पितसिंदूर का अनादर
लाल मसूर और गुड़ चना का दानदान का दिखावा
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठपाठ को केवल इच्छा पूर्ति का साधन
सत्य वाणी और सेवा भावझूठा वादा और चुगली
योग्य सलाह से उपायबिना कुंडली के रत्न पहनना

मूंगा मंगल का रत्न माना जाता है। नीलम शनि का रत्न माना जाता है। लेकिन इन्हें कुंडली में ग्रह की स्थिति भाव स्वामित्व युति और दशा देखकर योग्य ज्योतिषी की सलाह से ही धारण करना चाहिए।

साहस और धैर्य का वास्तविक अर्थ

हनुमान कृपा से साहस मिलना केवल अचानक बड़ी शक्ति प्राप्त होना नहीं है। साहस का सही अर्थ है सही समय पर सही निर्णय लेना। भूमि विवाद में धैर्य रखना। रक्त विकार में सावधानी बरतना। विवाह में असत्य से बचना।

हनुमान कृपा से धैर्य मिलना केवल चुप रहना नहीं है। धैर्य का सही अर्थ है कर्म में निरंतरता। शनि की देरी में विश्वास रखना। साढ़ेसाती में आत्मचिंतन करना। ढैय्या में सेवा भाव बनाए रखना।

सबसे बड़ा फल यह है कि व्यक्ति अपनी ऊर्जा का स्वामी बनता है। वह क्रोध को साहस में बदलता है। वह थकान को धैर्य में बदलता है। वह भय को श्रद्धा में बदलता है। यही हनुमान की उच्च अवस्था है।

वह रक्षा जो जीवन में बनी रहे

मंगलवार और शनिवार समाप्त हो तो हनुमान साधना को केवल पूजा स्थान तक सीमित न रखें। दिन भर बोलने से पहले सोचें। निर्णय लेने से पहले जाँचें। सेवा करने से पहले समझें। किसी की बात काटने के स्थान पर सुनें। शक्ति को सेवा में लगाएँ। यही हनुमान कवच का जीवन रूप है।

मंगल ऊर्जा है। शनि अनुशासन है। हनुमान दोनों का संतुलन हैं। जब ऊर्जा अनुशासन के अधीन होती है तब साहस धर्म का सहयोगी बनता है। धैर्य कर्म का मित्र बनता है। भय श्रद्धा में बदलता है। इसी संतुलन में हनुमान की वास्तविक कृपा प्रकट होती है।

FAQ

मंगल दोष और शनि दोष में कौन सा मंत्र जपें

मंगलवार को ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः और ॐ हं हनुमते नमः का जप करें। शनिवार को ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः और ॐ हं हनुमते नमः का जप करें।

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड कब पढ़ें

मंगलवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। शनिवार को हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें। प्रातः स्नान के बाद या सूर्यास्त के बाद पढ़ें।

मंगल दोष के प्रमुख संकेत क्या हैं

विवाह में बाधा भूमि विवाद रक्त विकार अत्यधिक क्रोध दुर्घटना भय और साहस की कमी मंगल दोष के संकेत हो सकते हैं। पूरी कुंडली देखकर ही निष्कर्ष निकालें।

साढ़ेसाती में हनुमान साधना कैसे करें

शनिवार को हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें। सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। काले तिल का दान करें। सत्य वाणी और सेवा भाव का पालन करें।

क्या मूंगा या नीलम पहनने से दोष दूर होता है

मूंगा मंगल का और नीलम शनि का रत्न माना जाता है। लेकिन इन्हें कुंडली में ग्रह की स्थिति देखकर योग्य ज्योतिषी की सलाह से ही धारण करना चाहिए।

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लेखक

पं. अभिषेक शर्मा

पं. अभिषेक शर्मा (63)


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