By अपर्णा पाटनी
गंडांत दोष का सत्य और शास्त्रीय शांति विधान

वैदिक ज्योतिष में जब कोई शिशु मूल नक्षत्र में जन्म लेता है तब उस कालखंड को विशेष सतर्कता और आध्यात्मिक उपचार की दृष्टि से देखा जाता है। मूल नक्षत्र गंडांत क्षेत्र में आता है इसलिए इसके दोष निवारण के लिए शास्त्रों में सुनिश्चित अनुष्ठान निर्धारित किए गए हैं।
| विवरण | शास्त्रीय नियम और विधान |
|---|---|
| नक्षत्र स्वामी और राशि | अधिपति ग्रह केतु धनु राशि शून्य से तेरह अंश बीस कला |
| अधिष्ठात्री देवी | निर्ऋति विनाश और विघटन की शक्ति |
| शांति अनुष्ठान समय | जन्म के 27वें दिन चंद्रमा के पुनः मूल नक्षत्र में आने पर |
| मुख्य सामग्रियां | 27 कुओं का जल 27 वृक्षों के पत्ते 27 स्थानों की मृत्तिका |
| मुख्य मंत्र जप | ॐ निर्ऋतये नमः और केतु मूल मंत्र 17000 जप |
| प्रमुख निषेध | पिता द्वारा शिशु का मुख शांति विधान से पूर्व न देखना |
| अनुशंसित दान | कृष्ण तिल कंबल उड़द लोहा और गौ सेवा |
आकाश मंडल में नक्षत्रों और राशियों के मिलन स्थल पर कुछ अत्यंत संवेदनशील ऊर्जा केंद्र होते हैं। जब कर्क से सिंह वृश्चिक से धनु और मीन से मेष राशि का संक्रमण होता है तब जल और अग्नि तत्व आपस में टकराते हैं। वृश्चिक राशि के अंतिम नक्षत्र ज्येष्ठा और धनु राशि के प्रथम नक्षत्र मूल के मिलन बिंदु को ज्येष्ठा मूल गंडांत अथवा अभुक्त मूल कहा जाता है।
इस संधि स्थल पर जीवात्मा का प्रवेश एक प्रचंड आध्यात्मिक उथल पुथल का संकेत देता है। भौतिक चेतना यहां जल तत्व की गहन संवेदनात्मक परतों को त्यागकर अग्नि तत्व के तेजस्वी सत्य की खोज में प्रवेश करती है। इस भीषण घर्षण के कारण ही नवजात शिशु के जीवन पर प्रारब्ध कर्मों का गहरा दबाव बनता है। प्राचीन ऋषियों ने इसे अमंगल नहीं अपितु गहन शोधन का समय माना है।
लोक मानस में देवी निर्ऋति को केवल सर्वनाश और दरिद्रता की शक्ति मानकर भय का वातावरण बना दिया जाता है। वैदिक ग्रंथों के अनुसार निर्ऋति वास्तव में वह शक्ति हैं जो जीवन के सड़े गले आधार को समूल नष्ट करती हैं। जब किसी वृक्ष की जड़ें भीतर से खोखली हो जाएं तब नई शाखाओं के विकास के लिए पुरानी जड़ों का कटना अनिवार्य हो जाता है।
जब तक व्यक्ति असत्य मान्यताओं को पकड़े रहता है तब तक निर्ऋति का प्रहार पीड़ादायक प्रतीत होता है। जैसे ही साधक आत्मसमर्पण कर आंतरिक रूपांतरण स्वीकार कर लेता है वही संहारक ऊर्जा परम मोक्षदायिनी शक्ति में बदल जाती है।
मूल नक्षत्र के प्रत्येक चरण का न केवल नवांश बदलता है अपितु उसके फल और शांति के नियम भी भिन्न हो जाते हैं।
मूल नक्षत्र में उत्पन्न दोष के निवारण हेतु 27 प्रकार के प्राकृतिक तत्वों का संकलन किया जाता है। प्रकृति के विभिन्न घटकों से ऊर्जा एकत्र करके उस नवजात जीव की ऊर्जा को संतुलित करना ही इस विधान का मूल उद्देश्य है।
यह प्रक्रिया जन्म के 27वें दिन आयोजित की जाती है। यदि किसी कारणवश उस दिन यह संभव न हो सके तो जब चंद्रमा पुनः मूल नक्षत्र में प्रवेश करे तब यह शांति कर्म अनिवार्य रूप से कर लेना चाहिए।
मूल नक्षत्र की ऊर्जा व्यक्ति को साधारण जीवन जीने के लिए नहीं अपितु गूढ़ सत्यों की खोज के लिए प्रेरित करती है। इस नक्षत्र में जन्मे लोग जीवन की गहराइयों में उतरने वाले असाधारण शोधकर्ता शल्य चिकित्सक अन्वेषक और तत्वज्ञानी बनते हैं। जब आरंभिक जीवन का संघर्ष समाप्त हो जाता है तब यही गंडांत दोष एक प्रचंड आंतरिक शक्ति के रूप में जाग्रत होता है। देवी निर्ऋति का आशीर्वाद प्राप्त होते ही विनाश की ज्वालाएं शांत होकर प्रज्ञा का प्रकाश बन जाती हैं और जातक अपने कुल का उद्धारक बनता है।
क्या मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले सभी जातकों का जीवन कष्टकारी होता है? नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। मूल नक्षत्र के आरंभिक चरण कुछ पारिवारिक संघर्ष ला सकते हैं किंतु उचित शांति विधान और आत्मसंयम से यह नक्षत्र जातक को तीव्र बुद्धि और उच्च पद प्रदान करता है।
मूल शांति पूजा किस दिन संपन्न करानी चाहिए? मूल शांति पूजा शिशु के जन्म के 27वें दिन जब चंद्रमा पुनः उसी नक्षत्र में आता है तब करानी चाहिए अथवा किसी अन्य शुभ मुहूर्त में जब मूल नक्षत्र विद्यमान हो।
माता पिता को शिशु का मुख देखने से क्यों रोका जाता है? मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में विशेष रूप से पिता की ऊर्जा और शिशु की गंडांत ऊर्जा के मध्य एक तीव्र घर्षण होता है जिसे शांति पूजा के पूर्व टालना शास्त्र सम्मत माना गया है।
देवी निर्ऋति की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय क्या हैं? नियमित रूप से भगवान गणेश और भैरव देव की उपासना करें काले तिल और जल से तर्पण करें और असहाय जीवों की सेवा करने से निर्ऋति देवी की पीड़ा शांत होती है।
मूल नक्षत्र के जातकों के लिए कौन सा करियर उत्तम माना जाता है? इस नक्षत्र के लोग शोध कार्य मनोविज्ञान पुरातत्व चिकित्सा शल्य क्रिया दर्शन शास्त्र और गुप्त विद्याओं के क्षेत्र में अद्वितीय सफलता प्राप्त करते हैं।
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