पितृ देव और सूर्य-चंद्र की अमावस्या

By पं. संजीव शर्मा

तर्पण से पितृ दोष मिटता है और भाग्य के ताले खुलते हैं

पितृ देव अमावस्या: तर्पण पितृ दोष सूर्य-चंद्र और भाग्य उपाय

तर्पण मुहूर्त और मूल नियम

  • सर्वोत्तम अवसर: आश्विन कृष्ण पक्ष, पितृ पक्ष के 16 दिन
  • मुख्य तिथि: सर्व पितृ अमावस्या, महालय अमावस्या
  • नित्य साधना: प्रत्येक माह की अमावस्या
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष विशेष रूप से अनुकूल
  • समय: मध्याह्न काल 11 बजे से 2 बजे तक, ब्रह्म मुहूर्त में संकल्प
  • दिशा: दक्षिण मुख
  • वस्त्र: श्वेत या हल्का पीला स्वच्छ वस्त्र
  • पात्र: तांबा या कांस्य का कलश
  • अर्पण: जल, काले तिल, कच्चा दूध, चावल, जौ, कुशा
  • मंत्र: पितृ गायत्री, अवार्हनम, तर्पण मंत्र
  • दान: दूध, चावल, चीनी, श्वेत वस्त्र, गेहूं, गुड़
  • अवधि: पितृ पक्ष के 16 दिन या कम से कम अमावस्या का एक दिन
  • मूल अनुशासन: सत्य वचन, पितरों का स्मरण, जीवित वृद्धजनों का सम्मान, क्रोध और झगड़े का त्याग, दक्षिणा मुख ही तर्पण

जब सूर्य और चंद्र दोनों आंसू बहाएं

ज्योतिष में सूर्य पिता का कारक है। चंद्रमा माता का कारक है। जब ये दोनों ग्रह कुंडली में एक साथ पीड़ित होते हैं या राहु के प्रभाव में आते हैं तब भयंकर पितृ दोष बनता है। यह दोष केवल ग्रहों का खेल नहीं है। यह पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं, अनकहे शब्दों और टूटे वचनों का बोझ है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आता है।

हमारे पूर्वज केवल मृत आत्माएं नहीं हैं। वे पितृ देव बनकर हमें आशीर्वाद देते हैं। जब हम उन्हें भूल जाते हैं तब वे शांत नहीं रह पाते। उनका असंतोष हमारे जीवन में बाधा बन जाता है। संतान नहीं होती। विवाह में देरी होती है। धन आता है पर टिकता नहीं। स्वास्थ्य बिगड़ता है। मन में अशांति रहती है। ऐसा लगता है कि किस्मत के ताले बंद हैं।

आश्विन माह और हर माह की अमावस्या पर पितरों के निमित्त किया गया तर्पण उन तालों को खोलता है। तर्पण का अर्थ है तृप्त करना। जब हम जल और तिल अर्पित करते हैं तब पितर तृप्त होते हैं। जब पितर तृप्त होते हैं तब सूर्य और चंद्र दोनों शांत हो जाते हैं। जब सूर्य और चंद्र शांत होते हैं तब कुंडली का नवम भाव जागता है। नवम भाव भाग्य है। भाग्य जागता है।

पितृ दोष का वास्तविक अर्थ

पितृ दोष का अर्थ क्रोधित भूत नहीं है। इसका अर्थ है पारिवारिक ऋण। हमारे पूर्वजों ने हमें जीवन दिया। उन्होंने संघर्ष किया। उन्होंने त्याग किया। उन्होंने हमारे लिए रास्ता बनाया। यदि हम उनका ऋण नहीं चुकाते तब वह ऋण बाधा बन जाता है।

ज्योतिष में नवम भाव पितृ स्थान है। जब सूर्य, राहु, केतु या शनि नवम भाव में या नवमेश के साथ पीड़ित होते हैं तब पितृ दोष बनता है। सूर्य-राहु का योग विशेष रूप से कठिन माना गया है। यह योग पिता से मतभेद, पैतृक संपत्ति में विवाद और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य में कमी दर्शाता है।

चंद्रमा के साथ राहु या केतु होने पर मातृ पक्ष का दोष बनता है। ऐसे जातक भावनात्मक रूप से अस्थिर रहते हैं। नींद नहीं आती। मन में भय रहता है। माता का स्वास्थ्य बिगड़ता है। इन दोनों दोषों का मूल एक ही है। हमने अपने मूल को भुला दिया है।

पितृ दोष के प्रमुख संकेत

संकेत कारण समाधान
संतान में बाधा पारिवारिक ऋण तर्पण और पिंड दान
विवाह में देरी पूर्वज असंतोष श्राद्ध और दान
धन नहीं टिकता पितृ आशीर्वाद नहीं अमावस्या को तर्पण
स्वास्थ्य बिगड़ता है कर्मिक बोझ गायत्री और सूर्य अर्घ्य
मन में अशांति मातृ पक्ष दोष चंद्र को जल और शिव पूजा
सपने में पूर्वज आना पितृ इच्छा अधूरी तर्पण और भोजन दान
बार बार दुर्घटना पितृ शांति नहीं नारायण बलि और गया श्राद्ध

सूर्य-चंद्र और राहु का कर्मिक संबंध

सूर्य आत्मा है। चंद्र मन है। राहु भ्रम है। जब राहु सूर्य पर छाया डालता है तब आत्मा भटकती है। व्यक्ति अपने कर्तव्य को भूल जाता है। वह पिता का अपमान करता है। वह पूर्वजों का नाम मिटा देता है। वह अपने मूल को छोड़कर भागता है।

जब राहु चंद्र को ग्रसता है तब मन विचलित होता है। व्यक्ति भावनाओं में बहता है। वह माता का दुख नहीं समझता। वह वृद्धजनों का सम्मान नहीं करता। वह अपने ही घर में पराया हो जाता है।

अमावस्या का दिन सूर्य और चंद्र के मिलन का दिन है। इस दिन सूर्य और चंद्र एक ही राशि में होते हैं। यह दिन पितरों के लिए समर्पित है। इस दिन किया गया तर्पण सीधे पितृ लोक तक पहुंचता है। राहु की छाया इस दिन कमजोर होती है। पितर प्रसन्न होते हैं।

सूर्य-चंद्र-राहु के प्रमुख योग

योग प्रभाव उपाय
सूर्य-राहु पितृ दोष, पिता से दूरी रविवार को सूर्य अर्घ्य
चंद्र-राहु मानसिक अशांति, मातृ कष्ट सोमवार को चंद्र जल
सूर्य-शनि कर्मिक बोझ, देरी शनिवार को तिल दान
चंद्र-केतु वैराग्य, एकांत शिव पूजा और रुद्राक्ष
सूर्य-चंद्र-राहु गंभीर पितृ दोष पितृ पक्ष में तर्पण

तर्पण का विज्ञान और विधि

तर्पण केवल ритуал नहीं है। यह ऊर्जा विनिमय है। जब हम जल अर्पित करते हैं तब हम अपनी कृतज्ञता की ऊर्जा छोड़ते हैं। जब काले तिल डालते हैं तब हम अपने कर्मिक बोझ का एक अंश विसर्जित करते हैं। जब दक्षिण मुख बैठते हैं तब हम पितृ लोक से जुड़ते हैं।

सरल तर्पण विधि

क्रम कार्य भाव
1 स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें शुद्धि और समर्पण
2 दक्षिण मुख बैठकर कुशा बिछाएं पितृ आसन
3 तांबे के कलश में जल भरें पवित्रता
4 जल में काले तिल, चावल, जौ मिलाएं पितृ भोजन
5 ब्रह्म मुहूर्त में संकल्प लें इच्छा शुद्धि
6 पितृ गायत्री और अवार्हनम मंत्र पढ़ें आह्वान
7 अंजलि से जल दक्षिण दिशा में अर्पित करें तर्पण
8 गाय को रोटी खिलाएं और दान करें पितृ तृप्ति
9 अंत में शांत बैठकर धन्यवाद दें कृतज्ञता

पितृ गायत्री मंत्र

ॐ देवपितृभ्यो नमः ॐ पितृभ्यो नमः ॐ परमपितृभ्यो नमः

यह मंत्र तीन बार पढ़कर जल अर्पित करना चाहिए।

पितृ पक्ष और अमावस्या का महत्व

पितृ पक्ष 16 दिन का वह काल है जब पितर धरती पर आते हैं। वे अपने वंशजों को देखते हैं। यदि वंशज उन्हें याद करते हैं तब वे प्रसन्न होते हैं। यदि नहीं करते तब वे दुखी होकर लौट जाते हैं। यह दुख ही बाधा बन जाता है।

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में यह पक्ष आता है। इसमें प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक प्रत्येक तिथि का महत्व है। जिस तिथि को पूर्वज की मृत्यु हुई हो उस तिथि को श्राद्ध करना चाहिए। यदि तिथि ज्ञात नहीं है तब सर्व पितृ अमावस्या को सभी के लिए श्राद्ध करना चाहिए।

प्रत्येक माह की अमावस्या भी पितरों के लिए समर्पित है। इस दिन तर्पण करने से पितर सदैव प्रसन्न रहते हैं। यह नित्य कर्म होना चाहिए।

पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां

  • भद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध: पितृ पक्ष का आरंभ
  • प्रतिपदा से चतुर्दशी: प्रत्येक तिथि को संबंधित पूर्वज का श्राद्ध
  • महालय अमावस्या: सभी पितरों का सार्वभौमिक श्राद्ध
  • नवरात्रि आरंभ: पितृ पक्ष के पश्चात देवी पूजा

किन जातकों को यह साधना विशेष फल देती है

  • जिनकी कुंडली में सूर्य-राहु या चंद्र-राहु का योग हो
  • जो संतान लाभ, विवाह या धन में बाधा झेल रहे हों
  • जिनके पितर सपने में आते हों या असंतोष का अनुभव हो
  • जो पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य समस्या से ग्रसित हों
  • जिनका नवम भाव पीड़ित हो और भाग्य न चमके
  • जो मातृ पक्ष से जुड़े मानसिक रोग झेल रहे हों
  • जो पूर्वजों के प्रति कर्तव्य भूल गए हों

क्या नहीं करना चाहिए

  • तर्पण के समय क्रोध और झगड़ा नहीं
  • दक्षिण के अलावा अन्य दिशा में तर्पण नहीं
  • अपवित्र स्थान पर तर्पण नहीं
  • केवल दिखावे के लिए श्राद्ध नहीं
  • जीवित वृद्धजनों का अपमान नहीं
  • पितरों को केवल समस्या हल करने वाला नहीं समझना
  • पितृ पक्ष में मांस, मद्य और तमोगुणी भोजन नहीं

FAQ

पितृ दोष क्या है और कैसे बनता है?

पितृ दोष पारिवारिक ऋण है जो सूर्य, चंद्र या राहु के पीड़ित होने से कुंडली में बनता है। यह पूर्वजों के प्रति कर्तव्य में कमी से उत्पन्न होता है।

तर्पण कब और कैसे करना चाहिए?

अमावस्या और पितृ पक्ष में दक्षिण मुख बैठकर तांबे के कलश से जल, काले तिल और चावल अर्पित करें। पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें।

सूर्य-चंद्र-राहु का पितृ दोष पर क्या प्रभाव है?

सूर्य-राहु पितृ पक्ष को, चंद्र-राहु मातृ पक्ष को प्रभावित करता है। दोनों मिलकर गंभीर कर्मिक बाधा बनाते हैं।

पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां कौन सी हैं?

भद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक 16 दिन। सर्व पितृ अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण है।

क्या केवल तर्पण से पितृ दोष मिटता है?

तर्पण मूल उपाय है। इसके साथ दान, गायत्री जाप और जीवित वृद्धजनों का सम्मान आवश्यक है।

वह जल जो आंसू को शांत करता है

अमावस्या की रात आकाश में अंधेरा होता है। पर उसी अंधेरे में पितरों का प्रकाश जगता है। वे अपने वंशजों को देखते हैं। वे प्रतीक्षा करते हैं। एक कटोरी जल। कुछ काले तिल। एक सच्चा स्मरण। बस इतना ही चाहिए।

जब जातक तर्पण करता है तब उसकी आंखों से आंसू गिर सकते हैं। ये आंसू केवल दुख के नहीं होते। ये आंसू कृतज्ञता के होते हैं। ये आंसू उस ऋण के होते हैं जो कभी चुकाया नहीं गया। जब ये आंसू जल में मिलते हैं तब पितर तृप्त होते हैं।

सूर्य और चंद्र दोनों शांत हो जाते हैं। राहु की छाया हट जाती है। नवम भाव जागता है। भाग्य के ताले खुल जाते हैं। संतान होती है। विवाह होता है। धन टिकता है। स्वास्थ्य सुधरता है। मन शांत होता है।

यही तर्पण का विज्ञान है। यही पितृ देव का आशीर्वाद है। यही अमावस्या का रहस्य है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ