By पं. नीलेश शर्मा
ललिता सहस्रनाम से नवम भाव जागता है और भाग्य चमकता है

पूजा मुहूर्त और मूल नियम
कुंडली में कभी ऐसा समय आता है जब सभी ग्रह अपने स्थान पर होते हैं फिर भी भाग्य का उदय नहीं होता। नौकरी मिलती है पर टिकती नहीं। विवाह होता है पर सुख नहीं। धन आता है पर रुकता नहीं। स्वास्थ्य ठीक है पर ऊर्जा नहीं। ऐसा लगता है कि जीवन एक सुंदर चित्र है जिसमें रंग सब हैं पर प्रकाश नहीं। शास्त्र इस स्थिति को केवल ग्रह दोष नहीं कहते। वे इसे नवम भाव की निद्रा कहते हैं।
नवम भाव भाग्य, धर्म, गुरु, उच्च शिक्षा, लंबी यात्रा और आध्यात्मिक झुकाव का कारक है। जब नवम भाव जागता है तब व्यक्ति को मार्ग मिलता है। जब नवम भाव सोता है तब सब कुछ होता है पर कुछ भी सार्थक नहीं लगता। ऐसे समय में केवल ग्रहों को मजबूत करना पर्याप्त नहीं। उस शक्ति को जगाना आवश्यक है जो ग्रहों के ऊपर है। वह शक्ति है माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी।
माँ ललिता को राजराजेश्वरी कहा गया है। वे 16 अक्षरों वाले श्रीविद्या मंत्र की स्वामिनी हैं। उनके तीन नेत्र सूर्य, चंद्र और अग्नि हैं। इन तीनों से वे ब्रह्मांड का संचालन करती हैं। सूर्य दृष्टि देता है। चंद्र मन देता है। अग्नि परिवर्तन देता है। जब तीनों नेत्र एक साथ खुलते हैं तब व्यक्ति केवल देखता नहीं। वह समझता है और बदलता है। यही भाग्य का वास्तविक अर्थ है।
श्रीविद्या का मूल मंत्र पंचदशी है जिसमें 15 अक्षर होते हैं। 16वां अक्षर श्रीं गुप्त बीज है। यह 16 कलाओं का प्रतीक है। चंद्रमा की 16 कलाएं हैं। वर्ष की 16 ऋतु तिथियां हैं। शरीर के 16 चक्र माने गए हैं। 16 अक्षर पूर्णता का प्रतीक हैं।
तीन नेत्रों का अर्थ गहरा है। पहला नेत्र सूर्य है। यह बाह्य जगत को देखता है। यह धन, पद और शरीर को देखता है। दूसरा नेत्र चंद्र है। यह भीतर के मन को देखता है। यह प्रेम, स्मृति और सपनों को देखता है। तीसरा नेत्र अग्नि है। यह सत्य को देखता है। यह झूठ को जलाता है। यह अज्ञान को भस्म करता है।
जब जातक केवल सूर्य नेत्र से जीता है तब वह केवल बाह्य सफलता चाहता है। जब केवल चंद्र नेत्र से जीता है तब वह केवल भावनाओं में बहता है। जब अग्नि नेत्र जागता है तब वह सत्य को सहन करना सीखता है। माँ ललिता तीनों नेत्रों को संतुलित करती हैं। इसलिए उनकी कृपा से न केवल भोग मिलता है वरन् भोग के बीच भी शांति मिलती है।
| नेत्र | देवता | क्षेत्र | फल |
|---|---|---|---|
| सूर्य | रवि | बाह्य जगत, धन, पद | भौतिक सफलता |
| चंद्र | सोम | मन, प्रेम, स्मृति | भावनात्मक शांति |
| अग्नि | वह्नि | सत्य, परिवर्तन, मोक्ष | आध्यात्मिक जागृति |
ज्योतिष में नवम भाव को धर्म भाव भी कहते हैं। धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं है। धर्म का अर्थ है वह नियम जिससे जीवन टिकता है। जब नवम भाव मजबूत होता है तब व्यक्ति को सही गुरु मिलता है। सही मार्ग मिलता है। सही समय पर सही निर्णय मिलता है। जब नवम भाव कमजोर होता है तब व्यक्ति भाग्य को कोसता है।
ललिता साधना नवम भाव को जगाने का उपाय है। श्रीयंत्र के नौ आवरण हैं। नवम आवरण केंद्र में बिंदु है। यह नवम भाव का प्रतीक है। जब साधक ध्यान में उस बिंदु तक पहुंचता है तब उसकी कुंडली का नवम भाव जागता है। इसलिए जो व्यक्ति ललिता सहस्रनाम का पाठ करता है और श्रीयंत्र की पूजा करता है उसे वह भाग्य मिलता है जो ग्रहों से भी ऊपर है।
जब ये संकेत कुंडली में बाधित हों तब ललिता साधना विशेष फल देती है।
ललिता सहस्रनाम ब्रह्मांड पुराण से प्राप्त 1000 नामों का स्तोत्र है। यह स्तोत्र केवल कीर्तन नहीं है। यह शक्ति का ध्वनि रूप है। प्रत्येक नाम देवी का एक रूप है। 1000 नामों का अर्थ है देवी के 1000 पहलू। जो व्यक्ति इन नामों को श्रद्धा से जपता है उसके भीतर देवी के 1000 रूप जागते हैं।
| क्रम | कार्य | भाव |
|---|---|---|
| 1 | स्नान कर लाल या पीला वस्त्र धारण करें | शुद्धि और समर्पण |
| 2 | पूर्व मुख बैठकर श्रीयंत्र या देवी चित्र रखें | देवी का आवास |
| 3 | घी दीप जलाएं और कुमकुम तिलक करें | तेज और शक्ति |
| 4 | लाल पुष्प और पंचामृत अर्पित करें | प्रेम और मिठास |
| 5 | सिंदूरारुण विग्रहं ध्यान श्लोक पढ़ें | देवी का स्वरूप |
| 6 | ललिता सहस्रनाम का पाठ करें | 1000 नामों का स्मरण |
| 7 | अंत में 5 से 10 मिनट मौन बैठें | शक्ति का अवशोषण |
| 8 | फल देवी को अर्पित करें | अहंकार का त्याग |
श्रीयंत्र या श्रीचक्र तंत्र का सर्वोच्च यंत्र है। इसमें नौ त्रिकोण हैं जो देवी के नौ रूप हैं। बाहर से भीतर की यात्रा भोग से मोक्ष तक है।
| आवरण | चक्र | देवी | फल |
|---|---|---|---|
| 1 | त्रैलोक्य मोहन | प्रसिद्धि और आकर्षण | बाह्य सफलता |
| 2 | सर्व आशा परipurak | इच्छा पूर्ति | मन की शांति |
| 3 | सर्व संक्षोभण | शत्रु नाश | रक्षा |
| 4 | सर्व सौभाग्य दायक | सौभाग्य और सौंदर्य | वैवाहिक सुख |
| 5 | सर्व अर्थ साधक | धन और समृद्धि | आर्थिक स्थिरता |
| 6 | सर्व प्रियंकर | प्रेम और मित्रता | संबंधों में मधुरता |
| 7 | सर्व काम प्रद | कामनाओं की पूर्ति | संतुष्टि |
| 8 | सर्व सिद्धि प्रद | सिद्धियां और शक्तियां | आध्यात्मिक बल |
| 9 | सर्व आनंद मय | परम आनंद और मोक्ष | अंतिम मुक्ति |
गृहस्थ के लिए बाहरी चार आवरणों की पूजा पर्याप्त है। भीतर के पांच आवरण गुरु दीक्षा के पश्चात साध्य हैं।
माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी कौन हैं?
माँ ललिता श्रीविद्या परंपरा की मुख्य देवी हैं। वे 16 अक्षरों वाली श्रीविद्या मंत्र की स्वामिनी हैं और सूर्य, चंद्र, अग्नि तीनों नेत्रों से ब्रह्मांड चलाती हैं।
श्रीविद्या 16 अक्षर मंत्र क्या है?
यह पंचदशी मंत्र है जिसमें 15 अक्षर होते हैं और 16वां श्रीं गुप्त बीज है। यह मंत्र गुरु दीक्षा के बिना नहीं जपा जाता।
ललिता सहस्रनाम पाठ से क्या फल मिलता है?
सभी पापों का नाश, इच्छा पूर्ति, रोगों से रक्षा, धन, वैवाहिक सुख, संतान और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्रीयंत्र की पूजा कैसे करें?
श्रीयंत्र पर कुमकुम तिलक, लाल पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। नौ आवरणों में से गृहस्थ बाहरी चार की पूजा कर सकता है।
क्या नवम भाव के लिए यह साधना फलदायी है?
हां। श्रीयंत्र का नवम आवरण नवम भाव का प्रतीक है। ललिता साधना से नवम भाव जागता है और भाग्य चमकता है।
श्रीयंत्र के केंद्र में एक बिंदु है। वहां कोई त्रिकोण नहीं। कोई रेखा नहीं। केवल शून्य है। उसी शून्य में सब कुछ भरा है। माँ ललिता उसी बिंदु में रहती हैं। जब साधक पाठ के बाद मौन बैठता है तब वह उसी बिंदु के पास जाता है।
भाग्य का उदय उसी बिंदु से होता है। ग्रह नक्षत्र चलते रहते हैं। पर उस बिंदु में समय थम जाता है। वहां न अतीत है न भविष्य। केवल वर्तमान है। केवल देवी हैं। केवल भक्त है। केवल प्रेम है।
जो व्यक्ति 40 दिन ललिता सहस्रनाम का पाठ करता है और श्रीयंत्र की पूजा करता है उसके जीवन में धीरे धीरे वही बिंदु उतरता है। बाहर सब कुछ चलता रहता है। पर भीतर एक शांति बैठ जाती है। यही भोग है। यही मोक्ष है। यही तीनों लोकों का सौंदर्य है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ