By अपर्णा पाटनी
प्राणायाम से राहु की ऊर्जा सकारात्मक बनती है और मन शांत होता है

पूजा मुहूर्त और मूल नियम
हवा दो रूपों में चलती है। एक रूप मंद हवा का है। यह हवा पत्तों को हिलाती है। यह हवा सुगंध लाती है। यह हवा शीतल होती है। दूसरा रूप तूफान का है। यह हवा पेड़ तोड़ती है। यह हवा घर उखाड़ती है। यह हवा विनाशकारी होती है।
स्वाति नक्षत्र की ऊर्जा भी ऐसी ही है। जब यह नक्षत्र शांत होता है तब व्यक्ति स्वतंत्र, लचीला और बुद्धिमान होता है। जब यह नक्षत्र पीड़ित होता है तब व्यक्ति अनिश्चित, घबराया हुआ और भटका हुआ होता है।
वायु देव इस नक्षत्र के अधिष्ठाता हैं। राहु इसका स्वामी ग्रह है। वायु देव प्राण शक्ति देते हैं। राहु विस्तार और सीमा पार करने की इच्छा देता है। जब दोनों संतुलित होते हैं तब व्यक्ति नई राहें बनाता है। जब दोनों असंतुलित होते हैं तब व्यक्ति रास्ता भटक जाता है।
स्वाति नक्षत्र 27 नक्षत्रों में पंद्रहवां नक्षत्र है। यह 6 डिग्री 40 मिनट तुला से 20 डिग्री तुला तक फैला है। इसका स्वामी राहु है। इसके अधिष्ठाता देवता वायु हैं। इसका प्रतीक कोमल अंकुर या खड्ग है।
स्वाति का अर्थ है अत्यंत लाभकारी। यह नक्षत्र स्वतंत्रता प्रेम करता है। यह बंधन नहीं सहता। यह हवा की तरह चलता है। जहां रास्ता मिलता है वहां से निकल जाता है। इसलिए स्वाति नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति स्वतंत्र विचारों के होते हैं। वे किसी के दबाव में नहीं आते। वे अपनी शर्तों पर जीते हैं।
वायु तत्व दो राशियों में बसता है। मिथुन और तुला। मिथुन प्रथम वायु है। यह संचार की वायु है। तुला मध्य वायु है। यह संतुलन की वायु है। स्वाति तुला में है। इसलिए यह संतुलन चाहता है पर स्वतंत्रता नहीं छोड़ता।
| राशि | तत्व | गुण | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| मिथुन | वायु | द्विस्वभाव | संचार, बुद्धि, चलन |
| तुला | वायु | चर | संतुलन, न्याय, संबंध |
| कुंभ | वायु | स्थिर | आविष्कार, मानवता, स्थिरता |
| मेष | अग्नि | चर | साहस, नेतृत्व, शुरुआत |
| सिंह | अग्नि | स्थिर | गर्व, स्थिरता, अधिकार |
| धनु | अग्नि | द्विस्वभाव | ज्ञान, विस्तार, धर्म |
राहु को छाया ग्रह कहा गया है। यह ग्रह भ्रम देता है। यह ग्रह लालच देता है। यह ग्रह नशे की आदत देता है। पर राहु केवल बुरा नहीं है। राहु विस्तार भी देता है। राहु विदेशी ज्ञान देता है। राहु नवीनता देता है।
स्वाति नक्षत्र में राहु की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। जब व्यक्ति राहु के लालच को पहचानता है तब वह लालच से ऊपर उठता है। जब व्यक्ति राहु की भटकाव शक्ति को पहचानता है तब वह उसे नई खोज में लगाता है। जब व्यक्ति राहु की नशे की प्रवृत्ति को पहचानता है तब वह नशे का त्याग करता है।
वायु देव की स्तुति और प्राणायाम से राहु की ऊर्जा शांत होती है। प्राणायाम से श्वास नियंत्रित होता है। श्वास नियंत्रित होता है तब मन नियंत्रित होता है। मन नियंत्रित होता है तब राहु नियंत्रित होता है। नियंत्रित राहु सकारात्मक रूपांतरण देता है।
| संकेत | कारण | समाधान |
|---|---|---|
| अत्यधिक घबराहट | वायु असंतुलन | प्राणायाम और चंदन |
| अनिश्चितता | राहु भ्रम | ध्यान और संकल्प |
| बार बार रास्ता बदलना | अस्थिर वायु | नियमित दिनचर्या |
| नशे की आदत | राहु प्रभाव | नशा त्याग और मंत्र |
| भ्रम और বিভ्रंति | राहु पीड़ित | दुर्गा पूजा और दान |
| अति लालच | राहु अशांति | संतोष और दान |
| नींद न आना | वायु असंतुलन | नड़ी शोधन और मौन |
प्राणायाम केवल श्वास नहीं है। यह प्राण विनिमय है। जब हम गहरी सांस लेते हैं तब हम वायु देव की ऊर्जा को अंदर लेते हैं। जब हम धीरे धीरे सांस छोड़ते हैं तब हम अपने तनाव को बाहर निकालते हैं। जब हम सांस रोकते हैं तब हम अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करते हैं।
नड़ी शोधन प्राणायाम स्वाति नक्षत्र के लिए सबसे उपयुक्त है। इसमें बाईं नाड़ी से सांस लेते हैं। दाईं नाड़ी से सांस छोड़ते हैं। फिर दाईं नाड़ी से सांस लेते हैं। बाईं नाड़ी से सांस छोड़ते हैं। यह क्रम 5 से 10 मिनट तक करना चाहिए।
वायु देव के मंत्र भी सहायक हैं। ॐ वायवे नमः का जाप करने से वायु तत्व शांत होता है। ॐ रां राहवे नमः का जाप करने से राहु शांत होता है। दोनों मंत्रों का संयुक्त प्रयोग सबसे फलदायी है।
| क्रम | कार्य | भाव |
|---|---|---|
| 1 | शांत स्थान पर कुशा आसन बिछाएं | पवित्रता |
| 2 | सुखासन या पद्मासन में बैठें | स्थिरता |
| 3 | ॐ वायवे नमः 21 बार जाप करें | आह्वान |
| 4 | नड़ी शोधन 5 मिनट करें | वायु संतुलन |
| 5 | ॐ रां राहवे नमः 108 बार जाप करें | राहु शांति |
| 6 | 5 मिनट मौन बैठें | अवशोषण |
| 7 | श्वेत पुष्प और नारियल अर्पित करें | समर्पण |
| 8 | काले तिल का दान करें | कर्मिक शुद्धि |
स्वाति नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन है?
स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है और देवता वायु हैं। यह नक्षत्र 6 डिग्री 40 मिनट से 20 डिग्री तुला तक फैला है।
प्राणायाम से राहु की ऊर्जा कैसे बदलती है?
प्राणायाम से श्वास नियंत्रित होता है। श्वास नियंत्रित होता है तब मन नियंत्रित होता है। मन नियंत्रित होता है तब राहु सकारात्मक हो जाता है।
राहु के नकारात्मक प्रभाव के क्या संकेत हैं?
अत्यधिक घबराहट, अनिश्चितता, नशे की आदत, भ्रम, अति लालच और नींद न आना प्रमुख संकेत हैं।
वायु देव के कौन से मंत्र जपने चाहिए?
ॐ वायवे नमः और ॐ रां राहवे नमः प्रमुख मंत्र हैं। दोनों का संयुक्त प्रयोग सबसे फलदायी है।
क्या केवल प्राणायाम से सभी समस्याएं मिटती हैं?
प्राणायाम मूल उपाय है। इसके साथ सत्य वचन, नशा त्याग, नियमित दिनचर्या और दान आवश्यक है।
जब हवा सही दिशा में चलती है तब वह पाल भरती है। जब हवा गलत दिशा में चलती है तब वह तूफान बन जाती है। राहु की ऊर्जा भी ऐसी ही है। जब यह ऊर्जा सही दिशा में होती है तब यह व्यक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है। जब यह ऊर्जा गलत दिशा में होती है तब यह व्यक्ति को भटका देती है।
जब जातक प्राणायाम करता है तब उसकी सांसों में एक लय आती है। यह लय केवल श्वास की नहीं होती। यह लय वायु देव की कृपा की होती है। यह लय राहु की शांति की होती है। यह लय स्वाति नक्षत्र की होती है।
अनिश्चितता मिट जाती है। घबराहट शांत हो जाती है। मन स्थिर हो जाता है। राहु सकारात्मक हो जाता है। वायु तत्व संतुलित हो जाता है। प्राण शक्ति बढ़ जाती है। भाग्य चमक जाता है।
यही प्राणायाम का विज्ञान है। यही वायु देव का आशीर्वाद है। यही स्वाति नक्षत्र का रहस्य है।
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