By पं. अमिताभ शर्मा
राशि अनुसार रक्षा करने वाले शिवलिंग और ग्रह दोष निवारण

वैदिक काल गणना में संपूर्ण आकाश मंडल 12 राशियों में विभाजित है। भगवान शिव केवल एक देवता नहीं अपितु स्वयं काल पुरुष और निराकार प्रकाश पुंज हैं। जब यह अनंत दिव्य प्रकाश ब्रह्मांड की 12 भौगोलिक और खगोलीय दिशाओं में स्थापित हुआ तब 12 ज्योतिर्लिंगों का प्राकट्य हुआ। प्रत्येक ज्योतिर्लिंग एक विशिष्ट राशि के ऊर्जा केंद्र को नियंत्रित करता है। जन्म कुंडली में जब चंद्रमा अथवा लग्न किसी विशेष राशि में स्थित होता है तब उस व्यक्ति का सूक्ष्म संबंध उस राशि के अधिष्ठाता ज्योतिर्लिंग से स्वतः स्थापित हो जाता है।
| राशि | राशि स्वामी ग्रह | संबंधित ज्योतिर्लिंग | भौगोलिक क्षेत्र | निवारित होने वाले मुख्य दोष |
|---|---|---|---|---|
| मेष | मंगल | सोमनाथ | प्रभास पाटन गुजरात | मानसिक अशांति और रक्त विकार |
| वृषभ | शुक्र | मल्लिकार्जुन | श्रीशैलम आंध्र प्रदेश | वैवाहिक कलह और आर्थिक बाधा |
| मिथुन | बुध | महाकालेश्वर | उज्जैन मध्य प्रदेश | अकाल मृत्यु भय और चर्म रोग |
| कर्क | चंद्रमा | ओंकारेश्वर | खंडवा मध्य प्रदेश | अवसाद और माता को कष्ट |
| सिंह | सूर्य | वैद्यनाथ | देवघर झारखंड | नेत्र विकार और मानहानि |
| कन्या | बुध | भीमाशंकर | खेड़ महाराष्ट्र | स्नायु दुर्बलता और ऋण संकट |
| तुला | शुक्र | रामेश्वरम | रामनाथपुरम तमिलनाडु | साझेदारी में हानि और शुक्र दोष |
| वृश्चिक | मंगल | नागेश्वर | द्वारका गुजरात | विष बाधा और कालसर्प दोष |
| धनु | बृहस्पति | काशी विश्वनाथ | वाराणसी उत्तर प्रदेश | गुरु चांडाल दोष और भाग्य बाधा |
| मकर | शनि | त्र्यंबकेश्वर | नासिक महाराष्ट्र | शनि साढ़ेसाती और पितृ दोष |
| कुंभ | शनि | केदारनाथ | रुद्रप्रयाग उत्तराखंड | दीर्घकालिक रोग और एकाकीपन |
| मीन | बृहस्पति | घृष्णेश्वर | औरंगाबाद महाराष्ट्र | संतान चिंता और मोक्ष मार्ग बाधा |
कुंडली के 12 भावों में ग्रह अपनी स्थिति के अनुसार शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं। जब किसी जातक की कुंडली में दूसरे और सातवें भाव के स्वामी सक्रिय होते हैं तब मारकेश दशा का निर्माण होता है। इसी प्रकार राहु और केतु की छाया से कालसर्प योग बनता है। शनि देव की साढ़ेसाती या ढैया जीवन में कर्मों की कठोर परीक्षा लेती है।
ग्रह केवल काल के आज्ञाकारी सेवक हैं और काल के स्वामी स्वयं महाकाल हैं। जब कोई साधक अपनी जन्म राशि के अनुसार निर्धारित ज्योतिर्लिंग की शरण में जाता है तब क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है। भगवान शिव की कृपा से मारक दशा का संकट दीर्घायु और आत्मिक बल में परिवर्तित हो जाता है।
प्रत्येक राशि का तत्व और उसके स्वामी ग्रह का स्वभाव एक विशेष प्रकार के संघर्ष को जन्म देता है। उस संघर्ष को शांत करने के लिए संबंधित ज्योतिर्लिंग की ऊर्जा अमृत की तरह कार्य करती है।
आकाश मंडल की उत्तरार्ध राशियां अधिक गूढ़ और दार्शनिक यात्रा का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन राशियों के जीवन में आने वाले प्रारब्ध कर्मों की शुद्धि के लिए भी शास्त्रों ने सटीक विधान बताए हैं।
भौतिक रूप से सभी ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए हर समय संभव नहीं होता। सनातन शास्त्रों में मानस पूजा को बाह्य पूजा से भी अधिक शक्तिशाली माना गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर के पूजा स्थल पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके अपने अभीष्ट ज्योतिर्लिंग का ध्यान करता है तो उसे तीर्थ के समान ही स्पंदन प्राप्त होते हैं।
ध्यान करते समय अपने हृदय चक्र अथवा आज्ञा चक्र में उस पावन शिवलिंग के स्वरूप की कल्पना करनी चाहिए। अपनी राशि के अनुसार संबंधित ज्योतिर्लिंग का नाम लेकर पंचाक्षरी मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। यह मानसिक क्रिया जातक के आभामंडल को एक अभेद्य सुरक्षा चक्र प्रदान करती है जिससे नकारात्मक ऊर्जाएं और ग्रह पीड़ाएं तत्काल शांत होने लगती हैं।
अपनी राशि के अनुकूल शिव साधना को दैनिक जीवन का अंग बनाना अत्यंत सरल और प्रभावी है। इसके लिए कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना श्रेयस्कर होता है।
इस सरल विधि को नियमित रूप से 40 दिन तक करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
ज्योतिर्लिंग केवल पाषाण प्रतिमाएं नहीं हैं बल्कि वे इस धरा पर साक्षात चिन्मय ऊर्जा के जीवंत स्तम्भ हैं। जब मानव चेतना अपनी राशि के अनुरूप सही ज्योतिर्लिंग के साथ लयबद्ध हो जाती है तब भाग्य का द्वार स्वतः खुल जाता है। कुंडली के समस्त ग्रह दोष उस परम चेतना के समक्ष नतमस्तक हो जाते हैं। शिव की शरण में जाने वाला व्यक्ति न केवल इस लोक में समस्त सुख और आरोग्यता को भोगता है बल्कि अंत काल में परम गति को भी प्राप्त करता है।
अपनी राशि के ज्योतिर्लिंग का पता कैसे लगाएं? अपनी जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में स्थित हो वही आपकी चंद्र राशि है और उसी राशि के अनुसार निर्धारित ज्योतिर्लिंग आपके प्रधान रक्षक शिवलिंग माने जाते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को अपनी जन्म राशि ज्ञात न हो तो वह किस ज्योतिर्लिंग की पूजा करे? यदि जन्म विवरण उपलब्ध न हो तो व्यक्ति अपने प्रसिद्ध नाम की राशि के अनुसार अथवा सीधे काशी विश्वनाथ या महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना कर सकता है।
मारकेश की दशा में ज्योतिर्लिंग साधना किस प्रकार रक्षा करती है? मारकेश काल मृत्यु तुल्य कष्ट देता है किंतु भगवान शिव मृत्युंजय हैं इसलिए अपनी राशि के ज्योतिर्लिंग का ध्यान और महामृत्युंजय जप करने से प्राण संकट टल जाता है।
क्या घर पर ही ज्योतिर्लिंग का मानसिक ध्यान करने से लाभ मिलता है? हाँ शास्त्रों के अनुसार सच्चे भाव से किया गया मानस पूजन और मंत्र जप भौतिक तीर्थ दर्शन के समान ही आध्यात्मिक और ज्योतिषीय लाभ प्रदान करता है।
ग्रह शांति के लिए शिवलिंग पर कौन सी वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए? ग्रह दोष शांत करने के लिए शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल, बेलपत्र, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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