By अपर्णा पाटनी
D16 चार्ट वाहन और सुरक्षा, D20 चार्ट आध्यात्मिक अभ्यास और उन्नति को दर्शाता है

जन्म कुंडली देखते समय अक्सर ध्यान लग्न, दशा और ग्रह योग पर चला जाता है, लेकिन गाड़ी चलाते समय सुरक्षा कैसी रहेगी या साधना और उपासना में मन कितना लगेगा, यह सवाल अलग स्तर के होते हैं। इन सूक्ष्म क्षेत्रों को समझने के लिए वैदिक ज्योतिष में दो विशेष विभाजन कुण्डलियाँ दी गई हैं। पहली है षोडशांश कुण्डली डी 16, जो वाहन सुख और वाहन से जुड़े जोखिम दिखाती है। दूसरी है विशांश कुण्डली डी 20, जो सिद्धि, उपासना और आध्यात्मिक झुकाव का सूक्ष्म चित्र देती है।
इन दोनों वर्ग कुण्डलियों का संबंध जीवन के ऐसे अनुभवों से है जिनमें एक ओर सुविधा और वैभव जुड़े हैं, तो दूसरी ओर सुरक्षा, साधना और आत्मिक उन्नति भी जुड़ी है। इसलिए जो साधक वाहन, यात्रा और दुर्घटना के संकेत समझना चाहें या अपनी आध्यात्मिक दिशा स्पष्ट करना चाहते हों, उनके लिए डी 16 और डी 20 दोनों चार्ट बहुत उपयोगी साबित होते हैं।
षोडशांश कुण्डली को डी 16 या कालांश भी कहा जाता है। यह विभाजन कुण्डली मुख्य रूप से वाहन सुख, साधनों की सुविधा और वाहन से जुड़े कष्टों का विश्लेषण करने के लिए उपयोग की जाती है।
इस चार्ट से सामान्यतः यह समझा जाता है कि
जब जन्म कुण्डली में वाहन से जुड़े संकेत देखें जाते हैं, तो अनुभवी ज्योतिषी डी 16 पर अवश्य दृष्टि डालते हैं, ताकि सतही योगों के पीछे छिपी सूक्ष्म स्थिति स्पष्ट हो सके।
षोडशांश कुण्डली की रचना एक निश्चित गणितीय पद्धति पर आधारित होती है।
पूरी राशि को 16 समान खंडों में इस प्रकार बाँटा जाता है।
| क्रम | डिग्री सीमा |
|---|---|
| 1 | 0° से 1° 52′ 30″ |
| 2 | 1° 52′ 30″ से 3° 45′ |
| 3 | 3° 45′ से 5° 37′ 30″ |
| 4 | 5° 37′ 30″ से 7° 30′ |
| 5 | 7° 30′ से 9° 22′ 30″ |
| 6 | 9° 22′ 30″ से 11° 15′ |
| 7 | 11° 15′ से 13° 07′ 30″ |
| 8 | 13° 07′ 30″ से 15° |
| 9 | 15° से 16° 52′ 30″ |
| 10 | 16° 52′ 30″ से 18° 45′ |
| 11 | 18° 45′ से 20° 37′ 30″ |
| 12 | 20° 37′ 30″ से 22° 30′ |
| 13 | 22° 30′ से 24° 22′ 30″ |
| 14 | 24° 22′ 30″ से 26° 15′ |
| 15 | 26° 15′ से 28° 07′ 30″ |
| 16 | 28° 07′ 30″ से 30° |
किसी भी ग्रह की राशि में डिग्री देखी जाती है और यह निर्धारित किया जाता है कि वह इन 16 भागों में से किस खंड में आता है। उस खंड की क्रम संख्या के अनुसार ही ग्रह की नई राशि डी 16 चार्ट में तय होती है।
केवल डिग्री विभाजन से काम पूरा नहीं होता। ग्रह किस नए चतुर्थांश या राशिभाग में जाए, यह राशि के स्वभाव पर भी निर्भर करता है। पाराशरी परंपरा में डी 16 के लिए एक प्रमुख नियम दिया गया है।
इसी क्रम में षोडशांश की क्रम संख्या के अनुसार आगे की राशियाँ गिनी जाती हैं और उस ग्रह की डी 16 में नई राशि निर्धारित हो जाती है।
एक अन्य मत के अनुसार नियम थोड़ा अलग है।
यह मत मंत्रेश्वर द्वारा वर्णित नियमों से मिलता जुलता माना जाता है। दोनों पद्धतियों का सार यही है कि ग्रह की मूल राशि, उसके विषम सम या चर स्थिर स्वभाव के आधार पर षोडशांश में उसकी नई राशि निकाली जाए।
व्यावहारिक रूप से जिस भी विधि से षोडशांश कुण्डली बनाई जाए, यदि गणना ठीक हो, तो परिणाम समान रहेंगे। आधुनिक सॉफ़्टवेयर आम तौर पर मानक पाराशरी नियमों का पालन करते हैं।
षोडशांश डी 16 में वाहन, यात्रा और सुरक्षा से जुड़े संकेत को पढ़ते समय कुछ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देना उपयोगी होता है।
जब दशा और गोचर इन बिंदुओं पर सक्रिय हों और साथ ही डी 1 में भी चौथे और आठवें भाव पर प्रभाव बन रहा हो तब वाहन ख़रीदने, यात्रा के निर्णय या जोखिमपूर्ण ड्राइविंग के विषय में अतिरिक्त सावधानी रखना बेहतर रहता है।
विशांश कुण्डली को डी 20 कहा जाता है। यह वर्ग कुण्डली सिद्धि, ध्यान और उपासना का सूक्ष्म मानचित्र मानी जाती है।
इस चार्ट से यह समझा जा सकता है कि
जब कोई साधक यह जानना चाहता हो कि उसकी आध्यात्मिक दिशा क्या है या किस प्रकार के जप और साधना से अधिक लाभ मिलेगा, तो डी 20 विश्लेषण अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन देता है।
विशांश कुण्डली की गणना भी निश्चित विभाजन पर आधारित है।
पूरी राशि के 20 खंड इस प्रकार हैं।
| क्रम | डिग्री सीमा |
|---|---|
| 1 | 0° से 1° 30′ |
| 2 | 1° 30′ से 3° |
| 3 | 3° से 4° 30′ |
| 4 | 4° 30′ से 6° |
| 5 | 6° से 7° 30′ |
| 6 | 7° 30′ से 9° |
| 7 | 9° से 10° 30′ |
| 8 | 10° 30′ से 12° |
| 9 | 12° से 13° 30′ |
| 10 | 13° 30′ से 15° |
| 11 | 15° से 16° 30′ |
| 12 | 16° 30′ से 18° |
| 13 | 18° से 19° 30′ |
| 14 | 19° 30′ से 21° |
| 15 | 21° से 22° 30′ |
| 16 | 22° 30′ से 24° |
| 17 | 24° से 25° 30′ |
| 18 | 25° 30′ से 27° |
| 19 | 27° से 28° 30′ |
| 20 | 28° 30′ से 30° |
किसी भी ग्रह की डिग्री देखकर यह पता किया जाता है कि वह इन 20 भागों में से किस विशांश में स्थित है और उस क्रम संख्या के आधार पर उसकी डी 20 में राशि बदलती है।
डी 20 में ग्रह किस नई राशि में जाएगा, यह केवल डिग्री विभाजन से नहीं बल्कि मूल राशि के चर स्थिर या द्वि स्वभाव होने से भी तय होता है।
इसके बाद ग्रह जिस विशांश क्रम में आता है, उसके अनुसार मेष, धनु या सिंह से आगे राशियाँ गिनकर डी 20 में उसकी नई राशि निर्धारित की जाती है।
उदाहरण के रूप में
इन नियमों से यह समझ में आता है कि विशांश कुण्डली में ग्रहों की स्थिति केवल डिग्री का नहीं बल्कि तत्व और गतिशीलता का भी मिश्रित परिणाम है।
विशांश डी 20 चार्ट को पढ़ते समय ध्यान इस बात पर रखा जाता है कि व्यक्ति का मन किन क्षेत्रों में स्थिर होगा।
जब कोई व्यक्ति मन की अशांति या साधना में रुकावट के बारे में पूछता है, तो डी 20 में इन ग्रहों और भावों की स्थिति काफी कुछ स्पष्ट कर देती है। यदि डी 20 में आध्यात्मिक योग मजबूत हों और दशा गोचर भी सहयोगी हों, तो साधना के मार्ग पर प्रगति तेज और संतोषजनक रह सकती है।
केवल डी 16 या डी 20 को अलग से देखने से पूरी तस्वीर नहीं बनती। इन्हें हमेशा डी 1 के साथ जोड़कर समझना चाहिए।
इन दोनों वर्ग कुण्डलियों के सहारे व्यक्ति अपने जीवन के उन क्षेत्रों के बारे में अधिक जागरूक हो सकता है जहाँ उसे अतिरिक्त सावधानी, आभार या अभ्यास की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
षोडशांश डी 16 चार्ट का मुख्य उपयोग क्या है
डी 16 का मुख्य उपयोग वाहन सुख, साधनों की सुविधा और वाहन से जुड़े कष्टों, दुर्घटनाओं या अचानक होने वाली घटनाओं की संभावना समझने में होता है। यह बताता है कि वाहन जीवन में सहयोगी साधन बनेंगे या बार बार तनाव और खर्च का कारण बन सकते हैं।
क्या डी 16 से दुर्घटना का निश्चित समय बताया जा सकता है
डी 16 दुर्घटना की संभावना और प्रवृत्ति तो दिखाता है, लेकिन निश्चित समय बताने के लिए जन्म कुण्डली, दशा, गोचर और मुहूर्त आदि को साथ में देखना आवश्यक होता है। इसे चेतावनी और सावधानी का संकेत मानना अधिक संतुलित दृष्टिकोण है।
विशांश डी 20 चार्ट किन लोगों के लिए सबसे अधिक उपयोगी है
डी 20 विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो साधना, उपासना, मंत्र जप, योग या आध्यात्मिक जीवन को गंभीरता से लेना चाहते हैं। इससे यह समझ में आता है कि कौन सा आध्यात्मिक मार्ग, समय और अभ्यास उनके स्वभाव के अधिक अनुरूप है।
क्या डी 20 से यह तय हो सकता है कि कोई बहुत धार्मिक होगा या नहीं
डी 20 व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रवृत्ति और साधना योग दिखाता है, लेकिन वास्तविक जीवन में यह प्रवृत्ति कर्म, वातावरण और व्यक्तिगत प्रयास से मिलकर विकसित होती है। अच्छे डी 20 योग के बावजूद अभ्यास न हो तो फल सीमित रह सकता है और सामान्य योग होते हुए भी निरंतर साधना से अच्छा परिणाम मिल सकता है।
डी 16 और डी 20 की जानकारी से व्यावहारिक रूप से क्या लाभ मिल सकता है
डी 16 से वाहन खरीद, यात्रा और सुरक्षा से जुड़े निर्णय अधिक जागरूक होकर लिए जा सकते हैं, जबकि डी 20 से साधना के लिए अनुकूल समय, उपयुक्त साधनाएँ और आध्यात्मिक दिशा स्पष्ट हो सकती है। दोनों चार्ट मिलकर भौतिक सुविधा और आध्यात्मिक प्रगति के बीच संतुलन बनाने में मदद करते हैं।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS