D24 चतुर्विंशांश चार्ट क्या है और यह शिक्षा और ज्ञान कैसे दिखाता है

By पं. अमिताभ शर्मा

जन्म कुंडली में D24 चार्ट से शिक्षा, बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई समझें

D24 चतुर्विंशांश चार्ट: शिक्षा और ज्ञान की जानकारी

सामग्री तालिका

किसी भी जन्म कुंडली को ध्यान से देखें तो एक बात साफ दिखाई देती है। हर व्यक्ति के जीवन में शिक्षा, ज्ञान, बौद्धिक प्रगति और आध्यात्मिक समझ का स्तर अलग होता है। दो लोग एक ही डिग्री लेकर निकलते हैं, लेकिन किसी के लिए पढ़ाई सहज साधन बन जाती है और कोई बहुत संघर्ष के बाद भी संतुष्ट नहीं हो पाता। वैदिक ज्योतिष इसी अंतर को समझने के लिए एक विशेष वर्ग कुंडली देती है, जिसे D 24 चतुर्विंशांश कुंडली या सिद्धांश कहा जाता है।

यह D 24 चतुर्विंशांश कुंडली जन्म कुंडली का सूक्ष्म विभाजन है, जो शिक्षा, बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक ज्ञान के स्तर को गहराई से दर्शाती है। जिस तरह कोई सूक्ष्म लेंस किसी वस्तु की बारीक बनावट दिखा देता है, उसी तरह D 24 चार्ट व्यक्ति के शैक्षिक और ज्ञान संबंधी कर्मों का सूक्ष्म मानचित्र बनाता है।

D 24 चतुर्विंशांश चार्ट क्या है

वैदिक ज्योतिष में D 24 चार्ट को चतुर्विंशांश कुंडली कहा जाता है। संस्कृत शब्द चतुर्विंशांश का अर्थ होता है चौबीसवाँ भाग। यह नाम केवल प्रतीक नहीं बल्कि इसकी गणना की सच्चाई को भी बताता है, क्योंकि

  • प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है
  • D 24 में हर राशि को 24 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है
  • इस प्रकार हर भाग 1 अंश 15 मिनट का हो जाता है

इसी सूक्ष्म विभाजन पर आधारित होने के कारण इसे सिद्धांश भी कहा जाता है, क्योंकि यह ज्ञान, शिक्षा और सिद्धि यानी उपलब्धि के फल को सूक्ष्म रूप से दिखाता है। D 24 चार्ट का मुख्य संबंध

  • शिक्षा और शैक्षिक उपलब्धियों
  • बौद्धिक क्षमता और अनुसंधान शक्ति
  • आध्यात्मिक ज्ञान और साधना
  • पिछले जन्मों के विद्या संबंधी कर्म

से माना जाता है।

D 24 चार्ट का नाम D 24 क्यों रखा गया

वर्ग कुंडलियों के नामकरण की परंपरा बहुत सीधी है। जहाँ जिस चार्ट में राशि को जितने भागों में बाँटा जाता है, वही संख्या उसके नाम के साथ D के रूप में जोड़ दी जाती है।

नीचे तालिका में यह आसानी से समझा जा सकता है।

वर्ग कुंडली विभाजन की संख्या उपयोग का मुख्य क्षेत्र
D 1 1 संपूर्ण जीवन, मूल जन्म कुंडली
D 9 9 नवमांश, विवाह, धर्म, भाग्य
D 10 10 दशमांश, कर्म और पेशा
D 24 24 चतुर्विंशांश, शिक्षा और ज्ञान

D 24 में 30 अंश को 24 से विभाजित करने पर

  • 30 ÷ 24 = 1°15′

इसलिए हर चतुर्विंशांश 1 अंश 15 मिनट का हो जाता है। चतुर्विंशांश शब्द भी इसी 24 भागों की ओर संकेत करता है और यह बताता है कि यह चार्ट विद्या के अत्यंत सूक्ष्म पक्षों को पकड़ने के लिए बनाया गया है।

D 24 चतुर्विंशांश चार्ट किन विषयों को दर्शाता है

D 24 चार्ट का केंद्र बिंदु शिक्षा और ज्ञान है, लेकिन इसके भीतर कई स्तर काम करते हैं।

मुख्य क्षेत्रों को संक्षेप में इस प्रकार समझा जा सकता है।

शिक्षा और पढ़ाई
प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, विषय चयन, परीक्षा में सफलता, डिग्री, प्रमाणपत्र और बौद्धिक उपलब्धियाँ D 24 में स्पष्ट संकेत देती हैं।

बौद्धिक विकास और अनुसंधान
तार्किक क्षमता, विश्लेषण करने का ढंग, शोधप्रिय स्वभाव, नई जानकारी को ग्रहण करने की शक्ति और रचनात्मक सोच की दिशा भी इसी चार्ट से देखी जाती है।

आध्यात्मिक ज्ञान और साधना
केवल पुस्तकों में प्राप्त ज्ञान ही नहीं बल्कि साधना, ध्यान, जप और अंदर की समझ, यानी ज्ञान का आध्यात्मिक पक्ष भी D 24 के दायरे में आता है।

कर्म और विद्या का संबंध
पिछले जन्मों के विद्या संबंधी कर्म, गुरु से जुड़ाव, शिक्षा के माध्यम से बनने वाले कर्मिक संबंध और ज्ञान के कारण खुलने वाले अवसर भी इसी चार्ट से जुड़े होते हैं।

इसलिए चतुर्विंशांश का संबंध केवल स्कूल या कॉलेज की डिग्री तक सीमित नहीं रहता। यह उस सम्पूर्ण यात्रा को दिखाता है, जिसमें ज्ञान के हर रूप, साधना और अनुभव जुड़े होते हैं।

क्या D 24 चार्ट के अलग भेद होते हैं

कुछ वर्ग कुंडलियों के बारे में अलग अलग भेद या उप रूपों का उल्लेख मिलता है, लेकिन D 24 के संदर्भ में परंपरागत रूप से कोई अलग औपचारिक भेद नहीं बताए गए।

इसके स्थान पर ज्योतिषी विश्लेषण के अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं।

  • जब ध्यान केवल औपचारिक शिक्षा, डिग्री और करियर से जुड़ी पढ़ाई पर हो, तो D 24 को शैक्षिक विश्लेषण के रूप में देखा जाता है।
  • जब साधना, आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन, वेद, दर्शन और मंत्र सिद्धि पर ध्यान हो, तो यही D 24 आध्यात्मिक ज्ञान के दृष्टिकोण से पढ़ा जाता है।
  • जब दशा और गोचर के साथ D 24 को जोड़ा जाए, तो यह यह दिखा सकता है कि कौन से समय में शिक्षा, शोध, प्रतियोगी परीक्षा या आध्यात्मिक अध्ययन के लिए अधिक अनुकूलता बन रही है।
  • यदि किसी की शिक्षा विदेश में हो या किसी विशेष स्थान से जुड़ा शैक्षिक अनुभव हो, तो D 24 और D 4 या D 9 को साथ देख कर स्थानिक प्रभाव को समझा जाता है।

अर्थात D 24 का स्वरूप एक ही रहता है, केवल नज़रिया बदलने से फलित का केंद्र बदल जाता है।

D 24 चतुर्विंशांश की गणना का आधार

D 24 चार्ट की गणना खगोलीय गणित पर आधारित है। मूल सूत्र सरल है, लेकिन व्यावहारिक उपयोग में उसे ठीक तरह लागू करना आवश्यक होता है।

राशि का विभाजन कैसे होता है

  • प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है।
  • 30 अंश को 24 भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 1°15′ का होता है।

उदाहरण के लिए मेष राशि के भीतर चतुर्विंशांश इस प्रकार माने जा सकते हैं।

चतुर्विंशांश क्रम डिग्री सीमा
1 0°00′ से 1°15′
2 1°15′ से 2°30′
3 2°30′ से 3°45′
4 3°45′ से 5°00′
24 28°45′ से 30°00′

हर खंड किसी न किसी राशि से संबद्ध किया जाता है। परंपरागत विधियों में यह संबद्धता चर, स्थिर और द्वि स्वभाव राशियों के क्रम के साथ चलती है, ताकि खंडों के माध्यम से शिक्षा और ज्ञान से जुड़ी ऊर्जा की बारीक परतें सामने आ सकें।

ग्रहों और लग्न की स्थिति D 24 में कैसे ली जाती है

  • पहले D 1 यानी जन्म कुंडली में ग्रहों और लग्न की सटीक डिग्री देखी जाती है।
  • फिर यह तय किया जाता है कि ग्रह या लग्न अपनी राशि के भीतर किस 1°15′ वाले खंड में आता है।
  • उस खंड की क्रम संख्या के अनुसार और संबंधित नियमों के आधार पर यह तय किया जाता है कि वह ग्रह D 24 में किस राशि और किस भाव में जाएगा।

लग्न की गणना भी इसी प्रकार की जाती है, इसलिए D 24 में लग्न व्यक्ति के शैक्षिक जीवन की दिशा और उसकी बौद्धिक पहचान को दर्शाने लगता है।

व्यावहारिक रूप से आज अधिकांश ज्योतिषी सॉफ़्टवेयर की सहायता से D 24 कुंडली का निर्माण करते हैं, लेकिन इसके पीछे यही खगोलीय गणित सक्रिय रहता है।

D 24 चार्ट के मुख्य अंग कौन से हैं

चतुर्विंशांश कुंडली के भीतर भी वही 12 भाव, 9 ग्रह और लग्न होते हैं, लेकिन अर्थ शिक्षा और ज्ञान के संदर्भ में बदल जाते हैं।

मुख्य अंगों को इस तरह समझा जा सकता है।

लग्न और लग्नेश

D 24 में लग्न व्यक्ति की शैक्षिक प्रवृत्ति, सीखने की शैली और बौद्धिक पहचान को दिखाता है। यदि लग्न या लग्नेश शुभ ग्रहों जैसे गुरु, बुध, शुक्र से प्रभावित हो, तो पढ़ाई के प्रति स्वाभाविक रुचि, मानसिक सजगता और ज्ञान को आगे बढ़ाने की इच्छा मजबूत रहती है।

चतुर्थ भाव

D 24 में चतुर्थ भाव

  • प्रारंभिक शिक्षा
  • घर का शैक्षिक वातावरण
  • माता का सहयोग और पढ़ाई के लिए मन की शांति

को दर्शाता है। यदि चतुर्थ भाव या उसका स्वामी बलवान और शुभ हो, तो बचपन से ही पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल और स्थिरता मिलती है।

पंचम भाव

पंचम भाव उच्च शिक्षा, बुद्धि और रचनात्मकता से जुड़ा है।

  • पंचमेश की स्थिति
  • गुरु और बुध के साथ उसका संबंध

इस बात पर गहरा प्रभाव डालते हैं कि व्यक्ति किस प्रकार की उच्च शिक्षा में आगे जाएगा और उसमें कितनी सफलता पाएगा।

नवम भाव

नवम भाव का संबंध

  • उच्च शिक्षा
  • दर्शन और धर्म
  • आध्यात्मिक ज्ञान और गुरु से जुड़ाव

से होता है। नवमेश और D 24 में गुरु की स्थिति यह दिखाती है कि ज्ञान केवल पढ़ाई तक सीमित रहेगा या जीवन दर्शन के रूप में भी विकसित होगा।

ग्रहों की भूमिका

कुछ ग्रह D 24 में विशेष महत्व रखते हैं।

  • बुध बौद्धिक क्षमता, विश्लेषण, भाषा और संचार कौशल का कारक है।
  • गुरु उच्च ज्ञान, दर्शन, आध्यात्मिकता और शिक्षा के विस्तार का सूचक है।
  • चंद्र मन, स्मरण शक्ति और प्रारंभिक पढ़ाई से जुड़ा रहता है।
  • सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्वकारी सोच और निर्णय क्षमता को दिखाता है।
  • शनि, राहु, केतु कभी बाधाएँ, देरी और संघर्ष दिखा सकते हैं, लेकिन यदि सही रूप से उपयोग हों, तो गहन अनुसंधान, असामान्य विषयों और सूक्ष्म ज्ञान की दिशा में भी प्रेरित कर सकते हैं।

D 24 चार्ट का सरल फलित कैसे किया जाता है

चतुर्विंशांश कुंडली को पढ़ते समय कुछ सरल सूत्रों को ध्यान में रखने से विश्लेषण व्यवस्थित हो जाता है।

1. लग्न और लग्नेश का विश्लेषण

सूत्र के रूप में यह समझा जा सकता है कि

  • यदि D 24 में लग्नेश उच्च, स्व राशि या शुभ भाव में हो और उस पर गुरु, बुध या शुक्र की दृष्टि हो, तो शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में सफलता की संभावना मजबूत हो जाती है।

उदाहरण के रूप में यदि D 24 में लग्न मिथुन हो और मिथुन के स्वामी बुध कन्या में उच्च हो, तो व्यक्ति विश्लेषणात्मक, तर्कसंगत और अध्ययनप्रिय हो सकता है।

2. चतुर्थ भाव से प्रारंभिक शिक्षा

  • चतुर्थ भाव और उसके स्वामी की स्थिति से पता चलता है कि बचपन की पढ़ाई कितनी सहज रही और माता या घर का वातावरण कितना सहयोगी रहा।
  • यदि चतुर्थेश चंद्रमा कर्क में हो, तो भावनात्मक सुरक्षा, माता का स्नेह और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिलने के योग बनते हैं।

3. पंचम भाव से उच्च शिक्षा

  • पंचम भाव और पंचमेश के साथ गुरु और बुध की स्थिति उच्च शिक्षा की दिशा और सफलता को दिखाती है।
  • यदि पंचमेश गुरु धनु में स्थित हो, तो दर्शन, कानून, अध्यापन या उच्च विचार वाले विषयों में गहराई से जुड़ाव संभव है।

4. नवम भाव से आध्यात्मिक और उच्च ज्ञान

  • नवमेश और गुरु की स्थिति यह बताती है कि व्यक्ति उच्च शिक्षा के साथ साथ आध्यात्मिक या दार्शनिक ज्ञान की ओर कितना आकर्षित होगा।
  • यदि नवमेश सूर्य सिंह में हो, तो धर्म, नैतिकता और आत्मसम्मान पर आधारित ज्ञान का मार्ग मजबूत होता है।

5. ग्रहों की दृष्टि और योग

  • शुभ ग्रहों की दृष्टि शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्रों को समृद्ध बनाती है।
  • अशुभ ग्रहों की दृष्टि कभी कभी बाधाएँ खड़ी करती है, लेकिन साथ ही तप, धैर्य और गहराई लाने का काम भी करती है।

यदि D 24 में पंचम भाव में बुध हो और उस पर गुरु की दृष्टि हो, तो तकनीकी, विश्लेषणात्मक या वैज्ञानिक शिक्षा में विशेष सफलता के संकेत मिल सकते हैं।

6. दशा और गोचर के साथ D 24

समय के संदर्भ में D 24 को दशा और गोचर के साथ जोड़कर देखना बहुत उपयोगी रहता है।

  • जो ग्रह वर्तमान दशा में चल रहा हो, यदि वह D 24 में प्रथम, चतुर्थ, पंचम या नवम भाव जैसे शुभ भावों में हो, तो उस अवधि में शिक्षा, परीक्षा, रिसर्च या आध्यात्मिक अध्ययन के लिए अच्छे अवसर दिख सकते हैं।
  • उदाहरण के रूप में यदि किसी व्यक्ति पर गुरु की महादशा चल रही हो और गुरु D 24 में नवम भाव में स्थित हो, तो वह समय उच्च शिक्षा, शोध या आध्यात्मिक अध्ययन में प्रगति के लिए अनुकूल माना जा सकता है।

D 24 चतुर्विंशांश और पौराणिक संकेत

विद्या और ज्ञान से जुड़े विषयों में गुरू यानी बृहस्पति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पुराणों में बृहस्पति और तारा से जुड़ी कथा विद्या की शक्ति और मन के संतुलन को प्रतीक रूप से समझाती है। कथा का सार यह बताता है कि

  • गुरु ज्ञान और विवेक का प्रतीक हैं
  • चंद्र मन और भावनाओं का प्रतिनिधि है
  • जब मन और ज्ञान के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो जीवन में भ्रम और संघर्ष आता है
  • जब गुरु स्वरूप ज्ञान पुनः प्रबल होता है, तो मार्ग फिर स्पष्ट हो जाता है

D 24 चार्ट में गुरु और चंद्र की स्थिति शिक्षा और आध्यात्मिक प्रगति में इसी संतुलन को दिखाती है।

इसी संदर्भ में एक श्लोक का सार अक्सर बताया जाता है।

“यथा बृहस्पतिर्ज्ञानं ददाति सर्वं विश्वे, तथैव चतुर्विंशांशः शैक्षिकं फलं दर्शति।”

अर्थ यह कि जिस प्रकार बृहस्पति ज्ञान का दान करते हैं, उसी प्रकार D 24 चतुर्विंशांश चार्ट शिक्षा और विद्या के फल को सामने लाता है।

D 24 चतुर्विंशांश से जुड़े मंत्र

जो साधक D 24 में दिखने वाले शिक्षा और ज्ञान संबंधी योगों को संतुलित या मजबूत करना चाहें, उनके लिए ग्रह मंत्र सहायक माने जाते हैं। उदाहरण के रूप में

  • बुध के लिए मंत्र
    ॐ बुं बुधाय नमः
  • गुरु के लिए मंत्र
    ॐ बृं बृहस्पतये नमः
  • चंद्र के लिए मंत्र
    ॐ सों सोमाय नमः

इन मंत्रों का जप प्रायः 108 बार करने की परंपरा है और संबंधित ग्रह के दिन जप करना शुभ माना जाता है। जैसे बुध मंत्र के लिए बुधवार, गुरु मंत्र के लिए गुरुवार और चंद्र मंत्र के लिए सोमवार।

D 24 चार्ट का एक उदाहरणात्मक उपयोग

मान लें किसी जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर D 24 इस प्रकार बनती है कि

  • D 24 में लग्न वृश्चिक हो
  • सूर्य धनु में नवम भाव में हो
  • चंद्र कन्या में पंचम भाव में हो
  • बुध किसी लाभदायक भाव में हो और गुरु उससे शुभ संबंध में हो

ऐसी स्थिति में सामान्य संकेत यह हो सकते हैं कि

  • व्यक्ति गहन अध्ययन, रिसर्च और खोजपरक विषयों में रुचि रखेगा
  • उच्च शिक्षा के लिए दर्शन, कानून या उच्च स्तरीय अध्ययन की ओर रुचि बढ़ सकती है
  • विश्लेषणात्मक सोच मजबूत होगी और लिखने या पढ़ाने की क्षमता विकसित हो सकती है

फिर दशा और गोचर के आधार पर यह देखा जा सकता है कि किस समय शिक्षा और ज्ञान से जुड़े निर्णय लेने अधिक अनुकूल रहेंगे।

ज्ञान पथ के लिए D 24 की उपयोगिता

समग्र रूप से देखें तो D 24 चतुर्विंशांश कुंडली वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है, जो शिक्षा, बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक प्रगति की सूक्ष्म परतों को खोलता है।

  • इसकी गणना राशि के 24 भागों पर आधारित है, जिससे विद्या और ज्ञान के सूक्ष्म अंतर स्पष्ट दिखाई देते हैं।
  • लग्न, चतुर्थ, पंचम और नवम भाव के साथ साथ बुध, गुरु, चंद्र और सूर्य की स्थिति शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान दोनों को समझने में गहरा संकेत देती है।
  • पौराणिक संकेत, ग्रह मंत्र और दशा गोचर के साथ D 24 का अभ्यास व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि ज्ञान का उपयोग केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित न रहकर जीवन को अर्थपूर्ण बनाने की दिशा में कैसे किया जाए।

सही मार्गदर्शन और जागरूकता के साथ D 24 चार्ट शिक्षा और आध्यात्मिक जीवन दोनों को संतुलित और सशक्त बनाने में सहायक बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

D 24 चतुर्विंशांश चार्ट का मुख्य उपयोग क्या है
D 24 का मुख्य उपयोग शिक्षा, बौद्धिक क्षमता, उच्च अध्ययन, अनुसंधान प्रवृत्ति और आध्यात्मिक ज्ञान के संकेतों को समझने में होता है। यह चार्ट दिखाता है कि व्यक्ति ज्ञान के किन रूपों में अधिक सहज रहेगा और कहाँ प्रयास बढ़ाने होंगे।

क्या D 24 से पढ़ाई की सफलता या असफलता तय की जा सकती है
D 24 सफलता या चुनौतियों की प्रवृत्ति तो स्पष्ट दिखाता है, लेकिन अंतिम परिणाम हमेशा परिश्रम, वातावरण और समय की दशा गोचर के साथ मिलकर बनते हैं। यह चार्ट दिशा और क्षमता बताता है, प्रयास का स्थान अलग रहता है।

D 24 में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह कौन से माने जाते हैं
D 24 में बुध, गुरु, चंद्र और सूर्य को विशेष महत्व दिया जाता है। बुध बौद्धिक क्षमता, गुरु उच्च ज्ञान, चंद्र मन और स्मरण शक्ति और सूर्य आत्मविश्वास तथा नेतृत्वकारी सोच का संकेत देता है।

क्या D 24 केवल आध्यात्मिक ज्ञान के लिए ही उपयोग होता है
D 24 दोनों प्रकार के ज्ञान को दिखाता है। एक ओर औपचारिक और व्यावहारिक शिक्षा, दूसरी ओर आध्यात्मिक और दार्शनिक समझ। किस पक्ष पर जोर अधिक होगा, यह ग्रहों और भावों की स्थिति से स्पष्ट होता है।

D 24 की जानकारी से व्यावहारिक जीवन में क्या लाभ मिलते हैं
D 24 से यह समझने में मदद मिलती है कि किस प्रकार की पढ़ाई, कौन सा विषय, कौन सा समय और कौन सी साधना व्यक्ति के लिए अधिक अनुकूल है। इससे विषय चयन, उच्च शिक्षा की योजना, प्रतियोगी परीक्षाएँ, शोध कार्य और आध्यात्मिक अध्ययन जैसे निर्णय अधिक स्पष्ट और संतुलित हो सकते हैं।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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