17 मुखी रुद्राक्ष का गहरा असर

By पं. नीलेश शर्मा

17 मुखी रुद्राक्ष से धन, करियर और आध्यात्मिक संतुलन

17 मुखी रुद्राक्ष लाभ, शक्ति और महत्व

सामग्री तालिका

जीवन में कभी अचानक ऐसा मोड़ भी आता है जब मन चाहता है कि मेहनत वही रहे पर भाग्य का दरवाजा थोड़ा अधिक खुल जाए। धन के अवसर बढ़ें, निर्णय साफ हों, संबंध संतुलित रहें और भीतर कहीं एक शांत भरोसा महसूस हो कि अदृश्य स्तर पर भी सुरक्षा मिल रही है। 17 मुखी रुद्राक्ष को ठीक इसी तरह के समय के लिए विशेष सहायक माना जाता है। इसे ऐसे रुद्राक्ष के रूप में देखा जाता है जो समृद्धि, सफलता, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति को एक साथ स्पर्श कर सकता है।

यह रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में आता है और पारंपरिक हिन्दू संस्कृति में इसे विशिष्ट स्थान दिया गया है। इसे भगवान विश्वकर्मा और देवी कात्यायनी से जुड़ा माना जाता है और ज्योतिषीय रूप से इसे शनि के लिए संतुलनकारी रुद्राक्ष माना जाता है। जो साधक अचानक आने वाली कृपा, धन, रचनात्मक सफलता और सूक्ष्म सुरक्षा की तलाश में हों, उनके लिए 17 मुखी रुद्राक्ष एक गहरी संभावना के रूप में देखा जाता है।

17 मुखी रुद्राक्ष क्या होता है

17 मुखी रुद्राक्ष एक प्राकृतिक बीज है जिसकी सतह पर सत्रह स्पष्ट प्राकृतिक रेखाएँ ऊपर से नीचे तक चलती हैं। इन्हीं रेखाओं को मुख कहा जाता है। प्रत्येक मुख को एक विशिष्ट आशीर्वाद और सूक्ष्म ऊर्जा का वाहक माना जाता है, जिस कारण यह रुद्राक्ष विविध क्षेत्रों में प्रभाव देने वाला माना जाता है।

यह रुद्राक्ष भगवान विश्वकर्मा से जोड़ा जाता है जिन्हें दिव्य स्थापत्य और सृजन के देवता के रूप में जाना जाता है। साथ ही इसे देवी कात्यायनी से भी जोड़ा जाता है जो शक्ति और इच्छा पूर्ति से संबंधित मानी जाती हैं। ज्योतिष में 17 मुखी रुद्राक्ष को शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को शांत करने वाला और शुक्र तथा बुध की ऊर्जा को संतुलित करने वाला रुद्राक्ष माना जाता है।

नीचे 17 मुखी रुद्राक्ष का संक्षिप्त परिचय सारणी में दिया गया है।

विषयविवरण
मुखों की संख्यासत्रह प्राकृतिक मुख
प्रमुख देवताभगवान विश्वकर्मा, देवी कात्यायनी
संबंधित ग्रहशनि, सहायक रूप से शुक्र और बुध
मुख्य क्षेत्रधन, करियर, सृजनात्मकता, संबंध, संतान, आध्यात्मिकता
श्रेणीअत्यंत दुर्लभ और उच्च ऊर्जा वाला रुद्राक्ष

17 मुखी रुद्राक्ष किन देव शक्तियों से जुड़ा है

विश्वकर्मा की सृजनात्मक कृपा और करियर में बढ़ोतरी

भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। 17 मुखी रुद्राक्ष को उनकी रचनात्मक शक्ति से जुड़ा माना जाता है। इस कारण यह रुद्राक्ष करियर में नवाचार, निर्णय क्षमता और कार्यक्षेत्र में नई दिशा देने वाले रुद्राक्ष के रूप में देखा जाता है। व्यवसाय, तकनीक, डिजाइन, निर्माण, कला या किसी भी रचनात्मक क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए यह विशेष सहायक माना जा सकता है।

देवी कात्यायनी की कृपा और इच्छा पूर्ति

देवी कात्यायनी को नवदुर्गा का एक शक्तिशाली रूप माना जाता है। 17 मुखी रुद्राक्ष को उनकी कृपा से जुड़ा माना जाता है, विशेष रूप से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ के संतुलित प्राप्ति के संदर्भ में। जो साधक उचित जीवनसाथी की प्राप्ति, वैवाहिक सुख, संतान की इच्छा, पारिवारिक स्थिरता और आंतरिक संतोष चाहते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष एक प्रबल सहायक माना जाता है।

शनि, शुक्र और बुध के साथ संबंध

ज्योतिषीय दृष्टि से 17 मुखी रुद्राक्ष को शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। शनि के कठिन समय जैसे साढ़ेसाती, ढइया या शनि महादशा में यह रुद्राक्ष बाधाओं को कम करने और स्थिरता देने वाला साधन माना जाता है। इसके साथ ही शुक्र से जुड़ी सुख समृद्धि और बुध से जुड़ी बुद्धिमत्ता व संचार क्षमता को भी यह संतुलित करने वाला माना जाता है।

नीचे तालिका में इन ऊर्जाओं का सार दिया गया है।

आध्यात्मिक / ज्योतिषीय पक्ष17 मुखी रुद्राक्ष से संबंध
भगवान विश्वकर्मासृजन, करियर विकास, नए प्रोजेक्ट में सफलता
देवी कात्यायनीधर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का संतुलन, विवाह और संतान सुख
शनि ग्रहबाधाओं में कमी, धैर्य, स्थिरता और कर्मिक संतुलन
शुक्र और बुधसुख, आकर्षण, बुद्धिमत्ता, संवाद और संबंधों में सामंजस्य

17 मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख लाभ

अचानक धन लाभ और समृद्धि की ऊर्जा

17 मुखी रुद्राक्ष को पारंपरिक रूप से अचानक धन लाभ से जुड़ा माना जाता है। व्यवसाय में अप्रत्याशित वृद्धि, निवेश में अच्छा लाभ, संपत्ति का मूल्य बढ़ना या किसी रूप में आर्थिक अवसरों का द्वार खुलना इसकी श्रेणी में माना जाता है। इसे एक प्रकार का धन आकर्षित करने वाला रुद्राक्ष माना जाता है, हालांकि यह केवल भाग्य नहीं बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की मानसिक क्षमता को भी मजबूत करता है।

जो लोग लंबे समय से प्रयास कर रहे हों पर परिणाम अपेक्षा के अनुसार न मिल रहे हों, उनके लिए यह रुद्राक्ष नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला माना जाता है। यह धन के साथ जिम्मेदारी का भाव भी मजबूत कर सकता है ताकि प्राप्त संसाधन स्थायी रूप से जीवन में टिक सकें।

करियर, प्रोजेक्ट और रचनात्मक कार्यों में सफलता

भगवान विश्वकर्मा की ऊर्जा से जुड़ाव के कारण 17 मुखी रुद्राक्ष को करियर और प्रोजेक्ट आधारित कार्यों में विशिष्ट सहायक माना जाता है। यह निर्णय लेने की क्षमता को स्पष्ट करने, नए विचारों को जन्म देने और जटिल काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

नए व्यवसाय शुरू करने वाले, स्टार्टअप, निर्माण या डिजाइन क्षेत्र में कार्यरत लोग, बड़े प्रोजेक्ट संभालने वाले प्रोफेशनल और पदोन्नति की दिशा में प्रयासरत कर्मचारी इस रुद्राक्ष से लाभ महसूस कर सकते हैं।

स्मरण शक्ति, फोकस और मानसिक स्पष्टता

यह रुद्राक्ष स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विचारों की स्पष्टता से भी जुड़ा माना जाता है। छात्रों, शोधकर्ताओं, विश्लेषणात्मक कार्य करने वालों और ऐसे पेशेवरों के लिए, जिन्हें लंबे समय तक गहन फोकस की आवश्यकता हो, 17 मुखी रुद्राक्ष मानसिक रूप से सहारा देने वाला साधन माना जाता है।

मानसिक उलझन, बार बार निर्णय बदलने की प्रवृत्ति या अनावश्यक चिंता की स्थिति में भी यह रुद्राक्ष विचारों को क्रम में लाने में मदद कर सकता है। इससे कार्यक्षमता बढ़ती है और गलत निर्णय की संभावना कम होती है।

संबंधों में सामंजस्य और वैवाहिक जीवन में संतुलन

देवी कात्यायनी के आशीर्वाद के कारण 17 मुखी रुद्राक्ष को सही जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाहिक जीवन में सौहार्द से भी जोड़ा जाता है। पुरानी परंपराओं में इसे उन युवाओं के लिए उपयोगी माना गया है जो उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश में हों या जिनकी शादी में विलंब हो रहा हो।

विवाह के बाद भी यह रुद्राक्ष दांपत्य जीवन में समझ, धैर्य और संवाद की गुणवत्ता बढ़ाने वाला माना जाता है। परिवार में आपसी सहयोग, सम्मान और भावनात्मक निकटता को संतुलित करने में यह सहायक माना जा सकता है।

संतान, परिवारिक सुख और वंश वृद्धि

जो दम्पति स्वस्थ संतान की इच्छा रखते हैं, उनके लिए 17 मुखी रुद्राक्ष शुभ माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह रुद्राक्ष संतान प्राप्ति, संतान के स्वास्थ्य और परिवारिक सुख में सहायक हो सकता है। हालांकि चिकित्सा की आवश्यकता अपनी जगह रहती है, फिर भी आध्यात्मिक स्तर पर यह रुद्राक्ष प्रार्थना और विश्वास के साथ एक समर्थ साधन माना जाता है।

आध्यात्मिक उन्नति, सुरक्षा और कर्मिक शुद्धि

17 मुखी रुद्राक्ष को आध्यात्मिक जागरूकता, ध्यान की गहराई और अंतर्ज्ञानी क्षमता से भी जोड़ा जाता है। इसे आज्ञा चक्र से संबंधित माना जाता है जो भौंहों के बीच स्थित ऊर्जा केंद्र है और अंतर्दृष्टि से जुड़ा माना जाता है। यह रुद्राक्ष ध्यान में बैठने पर विचारों को स्थिर करने और भीतर की आवाज़ को स्पष्ट सुनने में सहायक माना जा सकता है।

इसके साथ ही इसे नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र और ग्रह जनित बाधाओं से सुरक्षा देने वाला रुद्राक्ष भी माना जाता है। कुछ परंपराएँ इसे पुराने कर्मिक अवरोधों को धीरे धीरे हल्का करने और जीवन में नई दिशा देने वाला साधन मानती हैं।

नीचे तालिका में 17 मुखी रुद्राक्ष के मुख्य लाभों का सार दिया गया है।

लाभ का क्षेत्र17 मुखी रुद्राक्ष की भूमिका
धन और समृद्धिअचानक धन लाभ, निवेश व व्यवसाय में प्रगति
करियर और प्रोजेक्टनिर्णय क्षमता, नवाचार, तेज़ परिणाम
मानसिक क्षमतास्मरण शक्ति, एकाग्रता और स्पष्ट सोच
संबंध और विवाहजीवनसाथी की प्राप्ति, वैवाहिक सामंजस्य
संतान और परिवारस्वस्थ संतान की कामना और परिवारिक सुख
आध्यात्मिक उन्नतिध्यान की गहराई, अंतर्ज्ञान, नकारात्मकता से सुरक्षा
कर्मिक संतुलनपुराने अवरोधों में कमी और जीवन दिशा में सकारात्मक परिवर्तन

स्वास्थ्य से जुड़े लाभ

17 मुखी रुद्राक्ष को केवल धन या करियर के लिए ही नहीं, स्वास्थ्य और मनोभाव के संतुलन के लिए भी उपयोगी माना जाता है। विशेष रूप से शनि से जुड़े स्वास्थ्य संकटों में यह रुद्राक्ष मानसिक और सूक्ष्म स्तर पर सहारा देता है।

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

  • तनाव और थकान में कमी
  • शरीर की ऊर्जा में वृद्धि और आलस्य में कमी
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक
  • भावनात्मक संतुलन और मूड स्विंग में सुधार
  • शनि से जुड़े कठिन काल में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को हल्का करने में सहायक

नीचे सारणी में स्वास्थ्य पक्ष का संक्षिप्त सार दिया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्रसंभावित लाभ
तनाव और थकानमानसिक और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि
रोग प्रतिरोधक क्षमताशरीर के स्वाभाविक सुरक्षा तंत्र को मजबूती
भावनात्मक स्थितिमूड स्विंग में कमी और मानसिक स्थिरता
नींदगहरी और शांत नींद की दिशा में सहायता
शनि संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियाँसाढ़ेसाती या शनि दशा में स्वास्थ्य पर सकारात्मक सहारा

17 मुखी रुद्राक्ष के मंत्र और पूजा विधि

17 मुखी रुद्राक्ष के मंत्र

इस रुद्राक्ष को उत्सर्जित करने और अपनी ऊर्जा के साथ संरेखित करने के लिए मंत्र जप को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्यतः दो मंत्र सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं।

Om Hreem Hoom Namah

Om Namah Shivaya

इनमें से किसी एक मंत्र का चयन करके रुद्राक्ष को हाथ में लेकर या सामने रखकर कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना जाता है। इससे रुद्राक्ष की ऊर्जा अधिक जागृत और धारक के सूक्ष्म शरीर से जुड़ी हुई मानी जाती है।

शुद्धिकरण और पूजन की परंपरागत विधि

17 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे शुद्ध करना उचित माना जाता है।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया

  • स्वच्छ जल या गंगाजल से रुद्राक्ष को हल्के हाथ से धो लें
  • इच्छानुसार थोड़ी देर के लिए गाय के कच्चे दूध में रखकर फिर जल से धो लें
  • साफ सफेद कपड़े से धीरे से पोंछकर सुखा लें

पूजा और ऊर्जाकरण

  • रुद्राक्ष को साफ पूजन स्थल पर लाल या पीले कपड़े पर रखें
  • हल्का चंदन या कुंकुम का तिलक रुद्राक्ष पर लगाएँ
  • सफेद या पीले फूल चढ़ाएँ
  • घी का दीपक जलाकर उपरोक्त मंत्रों में से किसी एक का 108 बार जप करें
  • जप के बाद प्रार्थना करें कि यह रुद्राक्ष जीवन में सही दिशा और संतुलन देने वाला साधन बने

17 मुखी रुद्राक्ष कब और कैसे पहनें

शुभ दिन का चयन

17 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए सोमवार और शनिवार दोनों शुभ माने जाते हैं। सोमवार शिव की ऊर्जा से जुड़ा दिन माना जाता है और शनिवार शनि से संबंधित कठिनाई को संतुलित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसर भी धारण के लिए शुभ माने जाते हैं।

पहनने की विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ और सादे वस्त्र पहनें
  • रुद्राक्ष को पूजा स्थल पर रखकर दीप, अगरबत्ती और फूल अर्पित करें
  • चुना हुआ मंत्र 108 बार जप करें
  • रेशम या ऊन के धागे में रुद्राक्ष को पिरोकर गले में पहनें
  • चाहें तो इसे चाँदी या सोने के लॉकेट में जड़वाकर भी धारण कर सकते हैं
  • रुद्राक्ष को त्वचा के निकट रखना अच्छा माना जाता है ताकि सूक्ष्म स्तर पर संपर्क बना रहे

कुछ लोग इसे बाजू पर भी पहनते हैं, पर अधिकतर के लिए गले में हृदय के पास पहनना अधिक सामान्य माना जाता है।

17 मुखी रुद्राक्ष के Do’s और Don’ts

क्या करें

  • रुद्राक्ष को श्रद्धा, सम्मान और पवित्रता के भाव के साथ धारण करें
  • समय समय पर मंत्र जप करके इसकी ऊर्जा को जागृत रखें
  • रुद्राक्ष को साफ, सूखे और पवित्र स्थान पर उतारकर रखें जब धारण न कर रहे हों
  • धारण करते समय मन में सकारात्मक और संतुलित विचार रखें

क्या न करें

  • मांस, शराब या नशे से भरे व्यवहार के साथ रुद्राक्ष धारण करना उचित नहीं माना जाता
  • इसे दिखावे के लिए केवल आभूषण की तरह न पहनें
  • यदि रुद्राक्ष में गहरी दरार आ जाए या बीज टूट जाए तो उसे सम्मानपूर्वक प्रवाहित या भूमि में समर्पित करके नया रुद्राक्ष धारण करना बेहतर माना जाता है
  • बहुत अशुद्ध स्थानों पर जाते समय इसे पहनकर जाने से कई लोग बचते हैं

नीचे तालिका में Do’s और Don’ts का सार दिया गया है।

पक्षपालन करने योग्य बात
Do’sश्रद्धा, स्वच्छता, नियमित मंत्र जप, पवित्रता का ध्यान
Don’tsनशा, मांस सेवन, दिखावा, टूटे रुद्राक्ष का लगातार प्रयोग

परंपरा में 17 मुखी रुद्राक्ष की मान्यता

पुराने शास्त्रीय ग्रंथों में मुख्य रूप से 14 मुखी रुद्राक्ष तक का विस्तृत वर्णन मिलता है। बाद की परंपराओं में उच्च मुखों के रुद्राक्ष, विशेषकर 17 मुखी को देवी कात्यायनी और भगवान विश्वकर्मा से जोड़ा गया। इसी कारण इसे ऐसा रुद्राक्ष माना जाता है जो भौतिक और आध्यात्मिक, दोनों स्तरों पर संतुलन देने वाला है।

देवी कात्यायनी से जुड़े प्रसंगों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की बात की जाती है। 17 मुखी रुद्राक्ष भी इन्हीं चारों पुरुषार्थ के संतुलन की ओर संकेत करता है। जो साधक केवल धन या केवल वैराग्य की दिशा में नहीं बल्कि संतुलित जीवन जीना चाहते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष एक सुंदर विकल्प माना जाता है।

नीचे तालिका में पुरुषार्थ और इस रुद्राक्ष के संबंध को संक्षेप में दिखाया गया है।

पुरुषार्थ17 मुखी रुद्राक्ष से संबंध
धर्मसही मार्ग पर चलने की प्रेरणा और संयम
अर्थसमृद्धि, सुरक्षित धन और स्थायी प्रगति
कामसंतुलित इच्छाएँ, उचित रिश्ते और पारिवारिक सुख
मोक्षभीतर की शांति, जागरूकता और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा

17 मुखी रुद्राक्ष किन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है

हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग होती है, फिर भी कुछ स्थितियों में 17 मुखी रुद्राक्ष को विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

विशेष रूप से उपयुक्त

  • जो अचानक धन हानि, रुकावट या आर्थिक चिंता से घिरे हों
  • जो बड़े प्रोजेक्ट, कारोबार या रचनात्मक कार्य में बड़ी ज़िम्मेदारी संभाल रहे हों
  • जो शनि से प्रभावित कठिन समय जैसे साढ़ेसाती या शनि महादशा से गुजर रहे हों
  • जो उपयुक्त जीवनसाथी, वैवाहिक सामंजस्य या संतान सुख की कामना रखते हों
  • जो ध्यान, अंतर्ज्ञान और आत्मचिंतन में गहराई चाहते हों

नीचे तालिका में व्यक्ति और लाभ का संबंध दिया गया है।

व्यक्ति / स्थितिसंभावित लाभ
आर्थिक तनाव से जूझ रहे लोगनए अवसर, धन प्रवाह और स्थिरता में सहायता
बड़े प्रोजेक्ट या करियर की दौड़निर्णय क्षमता, फोकस और सफलता में बढ़ोतरी
शनि काल से परेशान व्यक्तिबाधाओं में कमी और मानसिक धैर्य
विवाह और संतान की इच्छा रखने वालेसंबंधों में सामंजस्य और परिवारिक सुख की दिशा
गहरे आध्यात्मिक साधकआज्ञा चक्र सक्रियता, अंतर्ज्ञान और सूक्ष्म सुरक्षा

17 मुखी रुद्राक्ष और व्यक्तिगत प्रयास का संतुलन

कई लोग यह मानकर बैठ जाते हैं कि रुद्राक्ष पहनते ही सब कुछ अपने आप बदल जाएगा। परंपरागत दृष्टि में रुद्राक्ष को सहायक साधन माना जाता है, न कि प्रयास का विकल्प। 17 मुखी रुद्राक्ष मार्ग में प्रकाश, सुरक्षा और अवसर की ऊर्जा दे सकता है, पर दिशा तय करने, मेहनत करने और निर्णय की जिम्मेदारी इंसान के हाथ में ही रहती है।

जब ईमानदार प्रयास, संयमित जीवनशैली, प्रार्थना और 17 मुखी रुद्राक्ष की ऊर्जा साथ चलती है, तभी इसका पूरा लाभ संभव माना जाता है। इस रुद्राक्ष को ऐसा साथी समझना अधिक उपयोगी है जो हर स्थिति में साथ चलता है और भीतर से साहस, स्पष्टता और संतुलन की याद दिलाता रहता है।


17 मुखी रुद्राक्ष FAQs - हिन्दी

प्रश्न 1. 17 मुखी रुद्राक्ष मुख्य रूप से किस लिए जाना जाता है

17 मुखी रुद्राक्ष को अचानक धन लाभ, करियर में तेज प्रगति, रचनात्मक सफलता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यह देवी कात्यायनी और भगवान विश्वकर्मा की कृपा से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इसे संतुलित समृद्धि देने वाला रुद्राक्ष माना जा सकता है।

प्रश्न 2. क्या 17 मुखी रुद्राक्ष शनि के दुष्प्रभाव को कम कर सकता है

पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह रुद्राक्ष शनि ग्रह की कठोरता को संतुलित कर सकता है। साढ़ेसाती, शनि महादशा या शनि से जुड़े संघर्षों में यह मानसिक धैर्य, स्पष्ट सोच और बाधाओं में कमी की दिशा में सहायक माना जाता है, हालांकि कर्म और प्रयास की जिम्मेदारी व्यक्ति की ही रहती है।

प्रश्न 3. क्या 17 मुखी रुद्राक्ष विवाह और संबंधों में भी मदद करता है

हाँ, इसे देवी कात्यायनी से जुड़ा माना जाता है, जिस कारण यह उचित जीवनसाथी की प्राप्ति, विवाह में विलंब की स्थिति और वैवाहिक संबंधों में संतुलन के लिए सहायक माना जा सकता है। साथ ही यह परिवार के भीतर संवाद और समझ बढ़ाने की दिशा में भी सहारा दे सकता है।

प्रश्न 4. 17 मुखी रुद्राक्ष कब पहनना शुभ माना जाता है

अधिकतर परंपराएँ सोमवार या शनिवार को इसे धारण करने को शुभ मानती हैं। विशेष रूप से सोमवार को शिव की कृपा और शनिवार को शनि के संतुलन के लिए यह दिन उपयुक्त माना जाता है। महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसर पर इसे धारण करना भी शुभ माना जाता है।

प्रश्न 5. क्या 17 मुखी रुद्राक्ष पहनने से चिकित्सा या सलाह की आवश्यकता समाप्त हो जाती है

नहीं। यह रुद्राक्ष आध्यात्मिक और मानसिक स्तर पर सहायक है पर चिकित्सा, डॉक्टरी सलाह और स्वस्थ जीवनशैली की आवश्यकता अपनी जगह बनी रहती है। इसे सहायक साधन की तरह देखें, उपचार का विकल्प नहीं।

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पं. नीलेश शर्मा

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