By पं. नरेंद्र शर्मा
नवदुर्गा के आशीर्वाद से भय, केतु दोष और बाधा निवारण के लिए 9 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

जब जीवन में बार बार डर, अनिश्चितता और अदृश्य रुकावटें सामने आने लगें तो कई लोग स्वाभाविक रूप से देवी की शरण में जाते हैं। 9 मुखी रुद्राक्ष को ऐसे ही समय के लिए बना हुआ दिव्य सहारा माना जाता है। यह रुद्राक्ष केवल एक पवित्र बीज नहीं बल्कि नवदुर्गा की शक्ति का प्रतीक माना जाता है जो साधक को साहस, संरक्षण और आन्तरिक स्थिरता का अनुभव करवाने में सहायक होता है।
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के करुणा भरे अश्रुओं से उत्पन्न हुए। इसी करुणा की धारा से निकला 9 मुखी रुद्राक्ष नारी शक्ति, शौर्य और आध्यात्मिक जागरण का संगम माना जाता है। सही विधि और श्रद्धा के साथ इसे धारण करने पर यह जीवन के मानसिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक तीनों स्तरों को स्पर्श करता है।
हिंदू धर्मग्रन्थ रुद्राक्ष को अत्यन्त पवित्र और दिव्य मानते हैं। शिव महापुराण के अनुसार जब भगवान शिव तपस्या और करुणा में डूबकर रोए तो उनके आँसुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। इन वृक्षों का वैज्ञानिक नाम Elaeocarpus ganitrus बताया गया है और ये मुख्य रूप से नेपाल, भारत के हिमालयी क्षेत्रों और इंडोनेशिया जैसी जगहों पर पाए जाते हैं।
जिस रुद्राक्ष पर नौ प्राकृतिक रेखाएँ या खांचे स्पष्ट रूप से बने हों, उसे 9 मुखी रुद्राक्ष कहा जाता है। इन नौ मुखों को माता दुर्गा के नौ रूपों से जोड़ा जाता है। इस दृष्टि से यह रुद्राक्ष साहस, शक्ति, संरक्षण और निडरता की सजीव स्मृति बनकर साधक के साथ चलता है।
नीचे सारणी 9 मुखी रुद्राक्ष की मूल जानकारी को संक्षेप में समेटती है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मुखों की संख्या | नौ प्राकृतिक रेखाएँ या खांचे |
| प्रतीक | नवदुर्गा, दुर्गा के नौ स्वरूप |
| मुख्य ग्रह | केतु से सम्बन्ध |
| मुख्य क्षेत्र | निडरता, संरक्षण, आध्यात्मिक उन्नति, केतु दोष शमन |
| वृक्ष का वैज्ञानिक नाम | Elaeocarpus ganitrus |
| प्रमुख क्षेत्र | नेपाल, भारत का हिमालयी क्षेत्र, इंडोनेशिया |
9 मुखी रुद्राक्ष को शास्त्रों में माता दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना गया है। इसे धारण करने से साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और भौतिक संतुलन के बीच सन्तुलित पुल तैयार होने की मान्यता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह रुद्राक्ष विशेष रूप से केतु के दोषों को शांत करने वाला और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। ग्रहों की बाधाएँ धीरे धीरे कम होती हैं और साधक को अपनी शक्ति स्वयं पहचानने में सहायता मिलती है।
नीचे दी गई सारणी इसके प्रमुख ज्योतिषीय लाभों को समेटती है।
| क्षेत्र | 9 मुखी रुद्राक्ष की भूमिका |
|---|---|
| नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा | दुष्ट शक्तियों, बुरी नजर और नकारात्मक तरंगों से सुरक्षा |
| महिलाओं के लिए लाभ | करियर उन्मुख महिलाओं की बुद्धि और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि |
| केतु दोष | केतु के अशुभ प्रभावों को घटाने में सहयोग |
| साहस और आत्मविश्वास | निडरता, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करना |
| करियर और व्यापार | नौकरी और व्यापार की बाधाओं में कमी, नए अवसरों का सहारा |
| दुर्घटना और असमय संकट | दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु के भय को कम करने में सहायक |
यह रुद्राक्ष दुष्ट शक्तियों, बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है। जो लोग बिना कारण भय, बेचैनी या किसी अनदेखे बोझ का अनुभव करते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष मानसिक और ऊर्जात्मक सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का आशीर्वाद साधक के चारों ओर एक सूक्ष्म सुरक्षा कवच जैसा वातावरण बनाता है। इससे व्यक्ति स्वयं को असहाय महसूस करने के बजाय अधिक सुरक्षित और स्थिर अनुभव कर सकता है।
जो महिलाएँ नौकरी, व्यवसाय या किसी भी पेशेवर क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं, उनके लिए 9 मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह बौद्धिक क्षमता, निर्णय शक्ति और नेतृत्व कौशल को सुदृढ़ करने वाला समझा जाता है।
कई बार सक्षम महिलाएँ भी आत्मसन्देह और समाजिक दबाव के कारण पीछे हट जाती हैं। यह रुद्राक्ष उनके भीतर यह विश्वास मजबूत कर सकता है कि वे सम्मान, सफलता और नेतृत्व की पूर्ण अधिकारी हैं।
केतु का अशुभ प्रभाव कई बार बिना कारण डर, मानसिक उलझन, वैराग्य और असंतुलित निर्णयों के रूप में सामने आता है। 9 मुखी रुद्राक्ष को केतु दोष शमन के लिए अत्यन्त प्रभावी उपायों में गिना जाता है।
इसे धारण करने से केतु की तीव्र, कटु और भ्रमित करने वाली ऊर्जा नरम और साधक के हित में काम करने वाली दिशा में परिवर्तित हो सकती है। इससे भय, अस्थिरता और मानसिक भटकाव की प्रवृत्ति घटने लगती है।
माता दुर्गा के नौ रूपों का आश्रय साधक के भीतर साहस और आत्मविश्वास का एक नया स्रोत खोल सकता है। यह रुद्राक्ष व्यक्ति को अपने निर्णयों के साथ खड़े रहने और कठिन परिस्थितियों में भी पीछे न हटने का संबल देता है।
निडरता का अर्थ लापरवाही नहीं बल्कि सजग साहस है। 9 मुखी रुद्राक्ष इसी सजग साहस का विकास करने वाला माना जाता है, जिससे व्यक्ति जोखिमों को समझकर आगे बढ़ने की क्षमता विकसित कर सकता है।
जो लोग व्यापार, नौकरी या किसी भी पेशेवर क्षेत्र में बार बार बाधाओं का सामना कर रहे हों, उनके लिए यह रुद्राक्ष मार्ग सुगम करने में सहायक माना जाता है। यह नए अवसरों के लिए मन और परिस्थितियों को तैयार करने वाला समझा जाता है।
यह रुद्राक्ष साधक को सही समय पर सही दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा दे सकता है। इससे करियर में स्थिरता और प्रगति का मार्ग धीरे धीरे स्पष्ट होने लगता है।
9 मुखी रुद्राक्ष के बारे में यह मान्यता भी है कि यह दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला रक्षक कवच बनता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जिनका काम अधिक यात्रा, जोखिम या अनिश्चित परिस्थितियों से जुड़ा हो।
नौ मुखी रुद्राक्ष को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यन्त उपयोगी माना गया है। यह केवल शरीर पर कार्य करने वाला साधन नहीं बल्कि मन और तंत्रिका तंत्र के माध्यम से स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाला मृदु सहारा माना जाता है।
नीचे सारणी इसके प्रमुख स्वास्थ्य लाभ दर्शाती है।
| स्वास्थ्य क्षेत्र | सम्भावित लाभ |
|---|---|
| मानसिक स्वास्थ्य | तनाव, चिंता और अवसाद में राहत |
| दर्द और शारीरिक पीड़ा | सिरदर्द, जोड़ों और शरीर के अन्य दर्द में सहारा |
| तंत्रिका तंत्र | नसों और नर्वस सिस्टम की मजबूती में सहयोग |
| गर्भावस्था से जुड़ा सहयोग | प्रसव पीड़ा में कमी, गर्भपात की आशंका से रक्षा |
| त्वचा | साफ, चमकदार और बेदाग त्वचा में सहायक |
9 मुखी रुद्राक्ष मन को शांत करने वाला महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। चिंता, अनिद्रा, बेचैनी और अवसाद जैसी मानसिक अवस्थाओं में यह रुद्राक्ष साधक के भीतर स्थिरता और आश्वासन की भावना जगाने वाला समझा जाता है।
जब मन पर बार बार नकारात्मक विचारों का बोझ रहता है तब यह रुद्राक्ष उन विचारों की तीव्रता को कम करने में मदद कर सकता है। इससे व्यक्ति जीवन की चुनौतियों को अधिक संतुलित दृष्टि से देख पाता है।
सिरदर्द, जोड़ों का दर्द और अन्य शारीरिक पीड़ाओं में भी 9 मुखी रुद्राक्ष को ऊर्जात्मक सहायक माना जाता है। यह शरीर की ऊर्जा को इस प्रकार संतुलित करने वाला समझा जाता है कि दर्द की अनुभूति हल्की हो सके।
यह सब पारम्परिक अनुभव पर आधारित है। किसी भी गंभीर या दीर्घकालीन दर्द में चिकित्सकीय निदान और उपचार आवश्यक रहता है।
यह रुद्राक्ष तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। नसों से जुड़ी कमजोरी, झुँझलाहट, हाथ पैरों में कंपन या अत्यधिक चिड़चिड़ापन जैसी स्थितियों में यह रुद्राक्ष मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर सहारा दे सकता है।
जब मन शांत रहता है तो नर्वस सिस्टम पर दबाव स्वाभाविक रूप से कम होता है। यही स्थिति शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को अधिक संतुलित बनाने में मदद करती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार 9 मुखी रुद्राक्ष गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पीड़ा कम करने और गर्भपात के खतरे से रक्षा करने में सहायक माना जाता है। यह माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए सुरक्षात्मक ऊर्जा का काम कर सकता है।
यह बात सदैव ध्यान में रहे कि गर्भावस्था एक संवेदनशील अवस्था है। इस अवधि में किसी भी रुद्राक्ष को धारण करने से पहले अनुभवी मार्गदर्शक और चिकित्सक दोनों की सलाह लेना विवेकपूर्ण है।
यह रुद्राक्ष त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी सहायक माना जाता है। बेदाग, चमकदार और स्वस्थ त्वचा के लिए इसे एक सूक्ष्म सहारे के रूप में देखा जाता है।
जब तनाव कम होता है और शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है तब त्वचा पर भी इसका प्रभाव स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है। फिर भी गंभीर त्वचा रोगों में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए।
नौ मुखी रुद्राक्ष रचनात्मक सोच और अंतर्ज्ञान को बढ़ाने वाला माना जाता है। कलाकार, लेखक, संगीत साधक और वे लोग जो किसी भी सृजनात्मक क्षेत्र में काम करते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष भीतर छिपी क्षमताओं को जगाने वाला माध्यम बन सकता है।
सहज ज्ञान या इन्ट्यूशन कई बार कठिन मोड़ पर सही मार्ग दिखाने का काम करता है। यह रुद्राक्ष इस क्षमता को जागृत और परिष्कृत करने में सहायक समझा जाता है।
जप, ध्यान और पूजा के समय 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मन का केंद्रित होना आसान हो सकता है। जब मन इधर उधर कम भटके और भीतर शांत रहे तब साधना की गहराई स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
यह रुद्राक्ष साधक को भीतर की यात्रा के लिए तैयार करता है ताकि वह बाहरी घटनाओं की उलझन से ऊपर उठकर स्वयं को बेहतर समझ सके।
क्रोध और चिड़चिड़ापन अक्सर असुरक्षा और भीतर के असंतुलन से पैदा होते हैं। 9 मुखी रुद्राक्ष मन को शांत कर आत्मिक संतुलन लाने वाला माना जाता है। इससे छोटी छोटी बातों पर भड़कने की प्रवृत्ति कम हो सकती है।
जब मन शांत होता है तो संवाद बेहतर होता है, रिश्ते सहज होते हैं और निर्णय अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार यह रुद्राक्ष व्यक्तिगत और पारिवारिक दोनों स्तरों पर सामंजस्य बढ़ाने में सहायक बन सकता है।
9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का व्यावहारिक साधन भी है।
इसे पहनने से नवदुर्गा का आशीर्वाद साधक के जीवन में साहस, शक्ति और स्थिरता का संचार करता है। नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और बार बार आने वाली बाधाओं से रक्षा की भावना मजबूत होती है। केतु ग्रह के दोष के कारण जो मानसिक भ्रम, अस्थिरता या अचानक उलझनें उत्पन्न होती हैं, उनमें भी यह रुद्राक्ष सहारा दे सकता है।
धन, समृद्धि और ऐश्वर्य का अनुभव केवल धन संचय से नहीं बल्कि मानसिक सम्पन्नता और आत्मसम्मान से भी जुड़ा होता है। यह रुद्राक्ष दोनों स्तरों पर सहायता देने वाला माना जाता है। राजनीति, व्यापार, नौकरी और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए यह सफलता, सम्मान और दीर्घकालिक प्रगति को सशक्त करने वाला साधन समझा जाता है।
9 मुखी रुद्राक्ष देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। यह साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, पर इसका प्रभाव तभी पूर्ण रूप में प्रकट होता है जब इसे सही विधि, शुभ समय और श्रद्धा के साथ धारण किया जाए।
रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसका शुद्धिकरण आवश्यक है। इसके लिए रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध या शहद से स्नान कराया जा सकता है। उसके बाद पुनः गंगाजल से धोकर साफ कपड़े पर रख दें।
शुद्धिकरण के बाद देवी दुर्गा और भगवान शिव का शांत मन से ध्यान करना उचित माना जाता है। यह प्रक्रिया रुद्राक्ष को बाहरी और आन्तरिक दोनों स्तर पर शुद्ध करने का प्रतीक है।
सोमवार और शनिवार को 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर पूजा करने के पश्चात इसे धारण करना श्रेष्ठ रहता है।
शुक्ल पक्ष में, जब चन्द्रमा वृद्धि की ओर हो, इस रुद्राक्ष को धारण करना और भी हितकारी माना जाता है। यह समय जीवन में प्रगति, उन्नति और वृद्धि के संकेत के रूप में देखा जाता है।
9 मुखी रुद्राक्ष को लाल या पीले रेशमी धागे में पिरोकर गले में पहनना श्रेष्ठ माना गया है। ये रंग ऊर्जा, शक्ति और सात्त्विकता के प्रतीक माने जाते हैं।
इच्छानुसार इसे सोने या चाँदी के लाकेट में जड़वाकर भी धारण किया जा सकता है। इसे माला के रूप में गले में पहनना सबसे सामान्य तरीका है, पर जो लोग चाहें वे इसे कंगन की तरह हाथ में भी धारण कर सकते हैं। मुख्य बात यह है कि रुद्राक्ष शरीर से स्पर्श बनाए रखे।
रुद्राक्ष धारण करने से पहले और बाद में मंत्र जाप अत्यन्त आवश्यक माना जाता है। 9 मुखी रुद्राक्ष का बीज मंत्र है
“Om Hrim Hum Namah”
इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने की परम्परा है। मंत्र जप रुद्राक्ष की ऊर्जा को सक्रिय करने और साधक की चेतना से जोड़ने का माध्यम माना जाता है। जप के बाद जब रुद्राक्ष धारण किया जाता है, तो उसका प्रभाव अधिक सहज और गहन रूप में अनुभव होने लगता है।
रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति के लिए सात्त्विक जीवनशैली अपनाना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है शराब, मांसाहार और अत्यधिक तामसिक भोजन से दूरी रखना। साथ ही झूठ, हिंसा और किसी भी प्रकार की बुरी आदतों से बचना भी इस जीवनशैली का हिस्सा है।
जब जीवनशैली शुद्ध और संयमित होती है तो रुद्राक्ष की शक्ति कई गुना बढ़कर कार्य करती है। साधक स्वयं भी अपने भीतर अधिक हल्कापन और स्पष्टता महसूस करता है।
कुछ परम्पराओं के अनुसार स्नान करते समय रुद्राक्ष उतार देना उचित माना जाता है ताकि साबुन या रसायनों का प्रभाव उस पर न पड़े। यदि कोई व्यक्ति इसे पहनकर ही स्नान करना चुनता है तो केवल स्वच्छ जल का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
रासायनिक तत्वों से रुद्राक्ष की सतह और ऊर्जा दोनों प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए सावधानी रखना समझदारी है।
श्मशान भूमि, अंतिम संस्कार या किसी भी अत्यन्त अपवित्र स्थान पर रुद्राक्ष धारण करके जाना वर्जित माना जाता है। ऐसे स्थानों की भारी और अशांत ऊर्जा रुद्राक्ष की शक्ति को कमजोर कर सकती है।
इन अवसरों पर रुद्राक्ष को उतारकर सुरक्षित और पवित्र स्थान पर रख देना उचित है। वापस आने के बाद स्नान कर के या कम से कम स्वच्छ होकर पुनः श्रद्धा के साथ धारण किया जा सकता है।
रुद्राक्ष को समय समय पर साफ करना भी आवश्यक है। इसे हल्के गुनगुने पानी से धोकर मुलायम कपड़े से पोंछ लिया जाए तो उसकी सतह पर जमी धूल और पसीना हट जाता है।
इसके बाद बहुत हल्के रूप में सरसों का तेल या घी लगा कर रुद्राक्ष की प्राकृतिक चमक और ऊर्जा को बनाए रखने की परम्परा भी कही जाती है। इससे रुद्राक्ष लम्बे समय तक सुरक्षित और ऊर्जावान बना रहता है।
9 मुखी रुद्राक्ष देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक है, इसलिए सामान्यतः इसे अत्यन्त शुभ और शक्तिशाली माना गया है। फिर भी यदि इसे गलत तरीके से, अशुद्ध अवस्था में या नकली रूप में धारण किया जाए तो कुछ नकारात्मक प्रभाव सामने आ सकते हैं।
यदि 9 मुखी रुद्राक्ष असली न हो या बहुत घटिया गुणवत्ता का हो तो यह ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ सकता है। नकली रुद्राक्ष धारण करने से लाभ न मिलना तो स्वाभाविक है, पर कई बार बेचैनी, सिरदर्द या मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ भी अनुभव हो सकती हैं।
इसीलिए 9 मुखी जैसे प्रभावकारी रुद्राक्ष को विश्वसनीय और प्रमाणित स्रोत से लेना बहुत आवश्यक है।
यदि रुद्राक्ष को बिना शुद्धिकरण के, अत्यन्त अपवित्र अवस्था में या गलत भाव के साथ धारण किया जाए तो यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। इससे चिड़चिड़ापन, नकारात्मक विचार और मानसिक अशांति बढ़ सकती है।
रुद्राक्ष को शुद्ध रखकर, पूजा स्थल के निकट या स्वच्छ स्थान पर रखना और धारण से पहले सरल पूजन करना इन समस्याओं से बचा सकता है।
शास्त्रों में रुद्राक्ष धारण करने के लिए जो नियम बताए गए हैं, उनका सम्मान करना आवश्यक है। यदि 9 मुखी रुद्राक्ष को बिना मंत्र जाप, बिना शुद्धिकरण या बिना किसी योग्य सलाह के पहन लिया जाए तो यह अपेक्षित सकारात्मक फल नहीं दे पाएगा।
विशेषकर जिन लोगों की कुंडली में केतु अत्यन्त कमजोर या जटिल स्थिति में हो, उन्हें यह रुद्राक्ष बिना परामर्श के नहीं पहनना चाहिए। उचित मार्गदर्शन के बाद धारण करने पर ही इसका लाभ पूर्ण रूप से मिल पाता है।
कुछ लोगों को रुद्राक्ष पहनने के बाद त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी हल्की समस्याएँ हो सकती हैं। यह अधिकतर धागे, धातु या साफ सफाई की कमी के कारण होता है, रुद्राक्ष स्वयं इसका कारण कम ही होता है।
यदि ऐसा हो तो कुछ समय के लिए रुद्राक्ष उतारकर त्वचा को आराम देना, धागा बदलना या साफ सफाई पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। यदि समस्या बनी रहे तो चिकित्सीय सलाह आवश्यक है।
श्मशान, अंतिम संस्कार या अत्यधिक अशुभ स्थानों पर रुद्राक्ष पहनकर नहीं जाना चाहिए। इन स्थानों की भारी ऊर्जा रुद्राक्ष पर भी प्रभाव डाल सकती है और धारणकर्ता के मन पर बोझ बढ़ा सकती है।
ऐसे समय इसे उतारकर सुरक्षित स्थान पर रखना और बाद में पुनः धारण करना ही शास्त्रीय परम्पराओं के अनुरूप माना गया है।
यह रुद्राक्ष उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो बार बार भय, मानसिक अस्थिरता, केतु दोष, अदृश्य बाधाओं या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान रहते हैं। करियर उन्मुख महिलाएँ, राजनीति, व्यापार, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े लोग भी इससे लाभ अनुभव कर सकते हैं।
हाँ, इसे दिन के समय नियमित रूप से पहनना लाभकारी माना जाता है। रात में सोते समय, स्नान करते समय या श्मशान और अत्यन्त अपवित्र स्थानों पर जाते समय इसे उतारकर सुरक्षित और पवित्र जगह पर रखना बेहतर है।
यदि जन्मकुंडली और जीवन परिस्थितियों के अनुसार आवश्यकता हो तो 9 मुखी के साथ अन्य मुखी रुद्राक्ष भी धारण किए जा सकते हैं। परन्तु यह संयोजन किसी जानकार के मार्गदर्शन से तय करना अधिक उचित है ताकि ऊर्जाओं में टकराव न हो।
कुछ लोगों को कुछ सप्ताह के भीतर ही मानसिक हल्कापन, बेहतर नींद या भय में कमी जैसी हल्की सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं। कुछ के लिए यह प्रक्रिया महीनों में धीरे धीरे प्रकट होती है। धैर्य, सात्त्विक जीवनशैली और नियमित मंत्र जप के साथ परिणाम अधिक स्थायी होते हैं।
यह रुद्राक्ष केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने में सहायक माना जाता है। इसे केतु दोष समाप्त करने का अकेला और पूर्ण उपाय नहीं माना जाता। सही कर्म, भक्ति, अनुशासन और अन्य उचित उपायों के साथ मिलकर यह रुद्राक्ष केतु से जुड़े कष्टों को काफी हद तक हल्का करने वाला सशक्त साधन बन सकता है।
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