रुद्राक्ष को भारतीय संस्कृति में केवल एक आभूषण नहीं बल्कि एक जागृत बीज माना जाता है जो मन, शरीर और कर्म तीनों को प्रभावित करता है। प्राचीन ग्रंथों में रुद्राक्ष को शिव के करुणा भरे अश्रुओं का फल कहा गया है और इसी कारण इसका नाम रूद्र + अक्ष यानी रूद्र की आँख पड़ा।
यह लेख 1 से 21 मुखी रुद्राक्ष की उत्पत्ति, असली पहचान, धारण विधि, देवता, मंत्र, लाभ और राशि अनुसार उपयोग को एक जगह समेटकर सामने रखता है ताकि पाठक रुद्राक्ष को ज्ञान और जिम्मेदारी के साथ अपने जीवन में स्थान दे सके।
रुद्राक्ष की उत्पत्ति और धार्मिक आधार
शिवपुराण के अनुसार एक समय भगवान शिव गहन तप में लीन थे। तपस्या के बीच एक क्षण ऐसा आया जब संसार के कष्टों के प्रति करुणा से उनके नेत्र नम हो गए। उनकी आँखों से गिरी आँसुओं की बूंदें पृथ्वी पर गिरकर एक विशेष वृक्ष के रूप में पनप उठीं। इन्हीं वृक्षों पर जो फल उगते हैं उन्हें रुद्राक्ष कहा जाता है।
शिवपुराण के साथ साथ स्कंदपुराण, बालोपनिषद, रुद्रपुराण, श्रीमदभागवत और देवीभागवत जैसे अनेक ग्रंथों में भी रुद्राक्ष के महत्व और प्रकार का उल्लेख मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि रुद्राक्ष केवल किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक वैदिक धारा का हिस्सा है।
रुद्राक्ष के पेड़ कहाँ पाए जाते हैं
रुद्राक्ष एक विशिष्ट पहाड़ी वृक्ष का फल है।
- मुख्य रूप से इंडोनेशिया और नेपाल रुद्राक्ष के प्रमुख क्षेत्र माने जाते हैं
- नेपाल के पाली क्षेत्र के रुद्राक्ष आकार, दृढ़ता और ऊर्जा के कारण अत्यंत श्रेष्ठ माने जाते हैं
- इंडोनेशिया के रुद्राक्ष दाने लगभग 4 से 15 मिलीमीटर व्यास के होते हैं
- नेपाल क्षेत्र के दाने प्रायः 10 से 33 मिलीमीटर व्यास तक पाए जाते हैं
भारत में रुद्राक्ष के वृक्ष विशेष रूप से मथुरा, अयोध्या, काशी और मलयाचल पर्वत क्षेत्र में पाए जाते हैं।
रुद्राक्ष कैसे बनता है
रुद्राक्ष फल की बाहरी परत हटाने पर भीतर कठोर बीज मिलता है।
सरल प्रक्रिया
- वृक्ष से प्राप्त फल की ऊपरी गुदा और छिलका हटाएँ
- भीतर के कठोर बीज को अलग करें
- इस बीज को पानी में भिगोकर और साफ करके सुखाएँ
- सुखाने के बाद जो कठोर दाना बचता है वही रुद्राक्ष है
बीज की बाहरी सतह पर जो प्राकृतिक धारियाँ और विभाजन बने होते हैं वे ही उसके मुख यानी चेहरे कहलाते हैं।
असली रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें
बाज़ार में नकली और कृत्रिम रुद्राक्ष भी मिलते हैं इसलिए धारण से पहले पहचान बहुत जरूरी है।
प्राकृतिक संरचना और छेद
- शुद्ध रुद्राक्ष के भीतर प्राकृतिक रूप से रेशेदार संरचना होती है
- कई रुद्राक्षों में प्राकृतिक छेद भी उपस्थित होते हैं
- फल के भीतर संतरे की फांकों की तरह विभाजन होता है जिनके आधार पर मुखों की संख्या तय होती है
| जाँच बिंदु | क्या देखें |
|---|
| बाहरी धारियाँ | जितनी धारियाँ उतना मुख |
| अंदर बीज | एक्स रे में उतने ही खाने या बीज दिखाई दें |
| सतह | कहीं से टूटा फूटा या कीड़ा लगा न हो |
| अतिरिक्त दाने | कृत्रिम उभार या चिपके हुए हिस्से न हों |
सरल घरेलू परीक्षण
- सुई से बहुत हल्के हाथ से रुद्राक्ष को खुरचें
- यदि भीतर से प्राकृतिक रेशा निकले तो रुद्राक्ष असली होने की दिशा में संकेत देता है
- शुद्ध सरसों के तेल में लगभग दस मिनट हल्का गर्म करें
- असली रुद्राक्ष की चमक कुछ गहरी हो जाती है
- नकली की सतह फीकी पड़ सकती है
इन परीक्षणों के साथ विश्वसनीय स्त्रोत से ही रुद्राक्ष लेना सर्वोत्तम माना जाता है।
शिव रुद्राक्ष माला का जप और सिद्धि
भगवान शिव को रुद्राक्ष अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रुद्राक्ष माला से शिव मंत्र का शुद्ध नियम से जप करता है उसका मन धीरे धीरे स्थिर होता है और जीवन में शिवतत्त्व का संरक्षण बढ़ता है।
रुद्राक्ष माला सिद्ध करने का मंत्र
ईशानः सर्वभूतानां
रुद्राक्ष माला सिद्ध करने की विधि
- माला या मनके को पंचामृत में डुबोकर कुछ समय रखें
- साफ पानी से अच्छी तरह धो लें
- हर एक मणि पर ईशानः सर्वभूतानां मंत्र दस बार जपें
- मेरु मणि पर हाथ रखते हुए यह मंत्र जपें
- यदि एक ही रुद्राक्ष सिद्ध करना हो
- पहले पंचामृत से स्नान कराएँ
- षोडशोपचार से पूजा करें
- फिर इसे चांदी के डिब्बे में रखें
- महीने में एक बार उस पर सुगंधित इत्र की दो बूँद अवश्य डालें
इसी प्रकार की प्रक्रिया से किसी भी रुद्राक्ष या पूरी माला को सिद्ध किया जा सकता है।
रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते हैं
रुद्राक्ष कुल मिलाकर 21 प्रकार के बताए गए हैं। सामान्य उपयोग में 14 मुख तक के रुद्राक्ष अधिक प्रचलित हैं।
प्रत्येक मुख में विशेष देवता, नक्षत्र और ऋषि तत्व का वास माना जाता है। इसी आधार पर उनके जप, उपयोग और लाभ का निर्धारण होता है। 16 से 21 मुख तक के रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में गिने जाते हैं।
1 से 21 मुखी रुद्राक्ष देवता, मंत्र और मुख्य लाभ
नीचे तालिका में 1 से 21 मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख देवता और बीज मंत्र का सार दिया गया है।
| मुखी रुद्राक्ष | अधिष्ठाता देवता | मुख्य मंत्र |
|---|
| 1 मुखी | भगवान शिव | ॐ ह्रीं नमः |
| 2 मुखी | अर्द्धनारीश्वर, चंद्र | ॐ नमः |
| 3 मुखी | अग्नि, ब्रह्मा विष्णु महेश | ॐ क्लीं नमः |
| 4 मुखी | ब्रह्मा | ॐ ह्रीं नमः |
| 5 मुखी | पंचमुख महादेव, कालाग्नि रुद्र | ॐ ह्रीं क्लीं नमः |
| 6 मुखी | कार्तिकेय, शुक्र | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 7 मुखी | शनिदेव | ॐ हुं नमः |
| 8 मुखी | गणेश, राहु | ॐ हुं नमः |
| 9 मुखी | नवदुर्गा, भैरव | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 10 मुखी | भगवान विष्णु, यम | ॐ नमः शिवाय |
| 11 मुखी | एकादश रुद्र | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 12 मुखी | सूर्य देव | ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः |
| 13 मुखी | महालक्ष्मी | ॐ ह्रीं नमः |
| 14 मुखी | हनुमान | ॐ नमः |
| 15 मुखी | पशुपतिनाथ | ॐ श्रीं मनोवांछितं ह्रीं ॐ नमः |
| 16 मुखी | महाकाल | ॐ हौं जूं सः |
| 17 मुखी | मां कात्यायनी | ॐ ह्रीं हूं हूं नमः |
| 18 मुखी | पृथ्वी देवी | ॐ ह्रीं हूं एकत्व रूपे हूं ह्रीं ॐ |
| 19 मुखी | क्षीरसागर शायी नरायण | ॐ ह्रीं हूं नमः |
| 20 मुखी | नवग्रह, दिक्पाल, त्रिदेव | ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं ब्रह्मणे नमः |
| 21 मुखी | कुबेर | ॐ ह्रीं हूं शिव मित्राय नमः |
अब हर मुख को संक्षेप में समझते हैं।
1 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- सीधा संबंध भगवान शिव से
- अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है
- ब्रह्महत्या जैसे महादोष तक के शमन की मान्यता
- घर में दरिद्रता, आर्थिक संकट और उपद्रव दूर होने का विश्वास
- लक्ष्मी के स्थायी निवास की परंपरागत मान्यता
पहचान
- सामान्य रूप से आधे काजू जैसी आकृति
- सिर्फ एक धारी
- गर्म पानी में उबालने पर रंग न छोड़े
- सरसों के तेल में रखने पर रंग थोड़ा गहरा हो जाए
2 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध चंद्रमा और अर्द्धनारीश्वर से
- मन, भावनाओं और दांपत्य संतुलन पर विशेष प्रभाव
- सोमवार को धारण शुभ माना जाता है
मुख्य लाभ
- संचित पापों के क्षय की मान्यता
- दीर्घकालिक धारण से शिव समता की अवस्था प्राप्त करने का संकेत
- पारिवारिक जीवन में सुख और एकता
- मानसिक संतुलन और रचनात्मकता में वृद्धि
- बेहतर सोच विचार और निर्णय क्षमता
3 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- अग्नि और त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश से संबंध
- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों से जुड़ा
मुख्य लाभ
- पिछली और वर्तमान जन्म के पाप कर्मों से मुक्ति की मान्यता
- नकारात्मक विचार, अपराध बोध और हीन भावना में कमी
- रक्तचाप, कमजोरी और पेट संबंधी समस्याओं में सहयोग
4 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध ब्रह्मा जी से
- सृजन शक्ति और ज्ञान का प्रतीक
मुख्य लाभ
- मेधा, लेखन, वाणी और ज्ञान में वृद्धि
- प्रेत बाधा, नक्षत्र बाधा, तनाव और मानसिक उलझन में राहत
- पीत ज्वर, श्वास रोग, गर्भस्थ शिशु दोष और नपुंसकता में परंपरागत उपयोग
- चार फलों धन, धर्म, काम और मोक्ष का संतुलन
5 मुखी रुद्राक्ष महत्व, लाभ और विधि
- संबंध पंचमुख महादेव और कालाग्नि रुद्र से
- पंचकर्म सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह से जुड़ा
मुख्य लाभ
- दैहिक और भौतिक रोगों से सुरक्षा
- मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, एसिडिटी में पारंपरिक सहायक
- गुरु के प्रतिकूल प्रभाव को साधने में उपयोगी
धारण नियम
- सोने या चांदी में मढ़वाकर या सादे धागे में भी धारण कर सकते हैं
- पहले गंगाजल या दूध से शुद्ध करें
- शिव प्रतिमा के आगे धूप, दीप के साथ उपासना करें
- ॐ ह्रीं नमः मंत्र का 108 बार जप करें
- श्रावण मास या सोमवार धारण के लिए विशेष शुभ
- धारण कर श्मशान या शव यात्रा में जाने से बचें
पहचान
- पानी में उबालने पर रंग न छोड़े
- सरसों के तेल में रखने पर हल्का गहरा रंग दिखाई दे
6 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध कार्तिकेय और शुक्र से
- छह दिशाओं की प्रतिभा से जुड़ा
मुख्य लाभ
- बुद्धि, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि
- नेत्र रोगों जैसे मोतियाबिंद, दृष्टिदोष, रतौंधी में परंपरागत सहायक
- शौर्य, प्रेम और आकर्षण में वृद्धि
- मुख, गले और मूत्र संबंधी रोगों में लाभकारी माना जाता है
7 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध शनिदेव से
- सेवा, नौकरी और व्यापार करने वालों के लिए उपयोगी
मुख्य लाभ
- शनि के प्रतिकूल प्रभाव से राहत की मान्यता
- शारीरिक दुर्बलता, अंगहीनता, लकवा, मिर्गी जैसे रोगों में सहायक
- प्रगति, कीर्ति, धन और गुप्त धन की प्राप्ति की परंपरागत मान्यता
8 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध सिद्धिविनायक गणेश और राहु से
- विघ्नहर्ता ऊर्जा का प्रतीक
मुख्य लाभ
- राहु दोष से राहत
- तेजस्वी, बलशाली और बुद्धिमान व्यक्तित्व का विकास
- फेफड़े के रोग, त्वचा रोग, सर्पदंश भय में सहायक
- आंतरिक और बाहरी सौंदर्य में वृद्धि
- नाड़ी संबंधी रोगों से राहत
9 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध भैरव और नवदुर्गा से
- देवी अम्बे की कृपा का प्रतीक
मुख्य लाभ
- विवाह बाधा और संतानोत्पत्ति बाधा में राहत की मान्यता
- व्यापार में रुकावटों के समाधान में सहायक
- राहु दोष, नेत्र रोग, फोड़े फुंसी में परंपरागत उपयोग
- बच्चों में श्वास और नेत्र रोग से सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है
10 मुखी रुद्राक्ष महत्व और लाभ
- संबंध भगवान विष्णु और जनार्दन रूप से
- पूरे ब्रह्मांड के संचालक तत्व से जुड़ा
मुख्य लाभ
- धारणकर्ता और परिवार विष्णु की संरक्षण छत्रछाया में रहते हैं ऐसा माना जाता है
- यमराज की कृपा से अकाल मृत्यु के भय में कमी
- प्रसव काल में कमर में बांधने पर प्रसव पीड़ा में कमी की मान्यता
- मिर्गी, हकलाहट, सूखा रोग में सहायक उपयोग
- काला जादू, भूत प्रेत और अकेलेपन के भय से राहत
- तनाव और अनिद्रा की समस्या में सहयोग
- नवग्रह शांति और वास्तुदोष निवारण में महत्वपूर्ण
- कानूनी मामलों और व्यापारिक अड़चनों में सहारा
- सम्मान, शांति और सौंदर्य में वृद्धि
- कान और हृदय रोगों में पारंपरागत सहायक
धारण विधि
- रुद्राक्ष को गंगाजल से स्नान कराएँ
- चंदन लगाएँ, धूप दिखाएँ और सफेद फूल चढ़ाएँ
- शिवलिंग या शिव प्रतिमा से स्पर्श कराएँ
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का 11 बार जप करके धारण करें
11 से 21 मुखी रुद्राक्ष संक्षिप्त सार
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11 मुखी
- देवता: एकादश रुद्र
- लाभ: भाग्योदय, धन वृद्धि, शिव कृपा, जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्ति की दिशा, गंभीर रोगों में पारंपरागत सहायता
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12 मुखी
- देवता: सूर्य
- लाभ: एकमुखी के समान प्रभाव, हृदय, त्वचा, नेत्र रोगों में सहायता, उच्च रक्तचाप में उपयोगी, भय दूर करके निर्भीकता और आत्मतत्त्व को मजबूत करना, आर्थिक पक्ष सुदृढ़ करना
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13 मुखी
- देवता: महालक्ष्मी
- लाभ: साधना, सिद्धि और भौतिक उन्नति, कैंसर, रक्तचाप, लिंगदोष, योनिदोष से बचाव के पारंपरागत संदर्भ, महामारियों से रक्षा की मान्यता
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14 मुखी
- देवता: हनुमान
- लाभ: निर्भीकता, संकटों से रक्षा, दिग्विजय भाव, हृदय रोग, नेत्र रोग, अल्सर, मधुमेह और कैंसर में पारंपरागत सहायक
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15 मुखी
- देवता: पशुपतिनाथ
- लाभ: आर्थिक मनोकामनाओं की पूर्ति, अत्यंत दुर्लभ और उच्च श्रेणी का रुद्राक्ष
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16 मुखी
- देवता: महाकाल
- लाभ: काल भय से मुक्ति, सर्दी और कठोर मौसम के प्रभाव से सुरक्षा की मान्यता
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17 मुखी
- देवता: मां कात्यायनी
- लाभ: अलौकिक अनुभूतियों की दिशा में सहायता, साधक को विशेष शक्तियों की ओर ले जाने की परंपरागत मान्यता
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18 मुखी
- देवता: पृथ्वी
- लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता में वृद्धि, शिशु रोगों से निवारण में उपयोग
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19 मुखी
- देवता: क्षीरसागर शायी नारायण
- लाभ: व्यापार में उन्नति, भौतिक सुखों में वृद्धि
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20 मुखी
- देवता: नवग्रह, दिक्पाल, त्रिदेव
- लाभ: व्यापक ग्रह शांति, दिशाओं और देव ऊर्जा का संतुलन, अत्यंत दुर्लभ और उच्च प्रभाव वाला
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21 मुखी
- देवता: कुबेर
- लाभ: धन, वैभव, भोग और समृद्धि की प्राप्ति की परंपरागत मान्यता
राशि के अनुसार कौन सा रुद्राक्ष लाभकारी है
| राशि | अनुशंसित मुखी रुद्राक्ष |
|---|
| मेष | 3 मुखी |
| वृष | 6 मुखी |
| मिथुन | 4 मुखी |
| कर्क | 2 मुखी |
| सिंह | 12 मुखी |
| कन्या | 4 मुखी |
| तुला | 8 मुखी |
| वृश्चिक | 3 मुखी |
| धनु | 5 मुखी |
| मकर | 7 मुखी |
| कुम्भ | 8 मुखी |
| मीन | 10 मुखी |
यह संकेत सामान्य परंपरा के अनुसार हैं। किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर परामर्श लेना बेहतर रहता है।
रुद्राक्ष केवल फल नहीं जीवन मार्गदर्शक
रुद्राक्ष को यदि केवल वृक्ष का फल समझा जाए तो उसका अर्थ बहुत छोटा हो जाता है। शिवपुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित 21 मुखी रुद्राक्ष की विशेषताओं को ध्यान से देखें तो समझ आता है कि यह मनुष्य के जीवन में उपस्थित लगभग हर प्रकार की चुनौती के लिए प्रतीकात्मक सहारा देते हैं।
यह सहारा केवल बाहर से नहीं आता। रुद्राक्ष व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है, सोच को स्पष्ट करता है और कर्म को अधिक सजग बनाता है। जब श्रद्धा, ज्ञान और अनुशासन इन मनकों के साथ जुड़ जाते हैं तब यह साधारण बीज से आगे बढ़कर जीवन के मार्गदर्शक बन जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1 क्या हर व्यक्ति कोई भी मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकता है
हर रुद्राक्ष की अपनी ऊर्जा और प्रभाव क्षेत्र होता है। सामान्य रूप से 4, 5 और 6 मुखी रुद्राक्ष अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। उच्च मुख वाले रुद्राक्ष जैसे 12, 14 या 21 मुखी धारण करने से पहले अनुभवी मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।
प्रश्न 2 क्या रुद्राक्ष धारण करने से भाग्य तुरंत बदल जाता है
रुद्राक्ष का कार्य मन और कर्म को संतुलित करना है। परिणाम तुरंत चमत्कार की तरह नहीं दिखते। जब सोच, निर्णय और प्रयास बदलते हैं तभी परिस्थितियाँ धीरे धीरे बदलती हैं। इस प्रक्रिया में धैर्य और नियम दोनों आवश्यक हैं।
प्रश्न 3 क्या नकली रुद्राक्ष पहनने से कोई हानि होती है
नकली रुद्राक्ष में वह प्राकृतिक स्पंदन नहीं होता जो असली बीज में होता है। सीधी हानि न भी हो तो भी व्यक्ति श्रद्धा रखकर भी वास्तविक लाभ से वंचित रह जाता है। इसलिए पहचान पर समय देना और विश्वसनीय स्थान से ही रुद्राक्ष लेना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 4 क्या एक साथ कई मुखी रुद्राक्ष पहनना ठीक है
कई लोग विभिन्न मुखों के रुद्राक्ष एक साथ धारण करते हैं। यदि संयोजन सोच समझकर किया जाए तो यह संभव है। पर बिना समझ के अनेक मुख पहन लेने से ऊर्जा मिश्रित हो सकती है। बेहतर है उद्देश्य स्पष्ट हो और उसी के अनुरूप सीमित और संतुलित चयन किया जाए।
प्रश्न 5 रुद्राक्ष पहनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
रुद्राक्ष को सम्मान से रखना, अत्यधिक गंदे स्थानों में न ले जाना, अनावश्यक रूप से उतार कर यहाँ वहाँ न फेंकना और समय समय पर शुद्धिकरण करना मूल नियम हैं। कई लोग इसे स्नान, अंतरंग संबंध और अंत्येष्टि जैसे अवसरों पर हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखना उचित मानते हैं। श्रद्धा और पवित्रता जितनी अधिक होगी रुद्राक्ष का अनुभव उतना ही गहरा होगा।