By पं. नरेंद्र शर्मा
लाभ उपयोग मंत्र और देवता की विस्तृत जानकारी

रुद्राक्ष को भारतीय संस्कृति में केवल एक आभूषण नहीं बल्कि एक जागृत बीज माना जाता है जो मन, शरीर और कर्म तीनों को प्रभावित करता है। प्राचीन ग्रंथों में रुद्राक्ष को शिव के करुणा भरे अश्रुओं का फल कहा गया है और इसी कारण इसका नाम रूद्र + अक्ष यानी रूद्र की आँख पड़ा।
यह लेख 1 से 21 मुखी रुद्राक्ष की उत्पत्ति, असली पहचान, धारण विधि, देवता, मंत्र, लाभ और राशि अनुसार उपयोग को एक जगह समेटकर सामने रखता है ताकि पाठक रुद्राक्ष को ज्ञान और जिम्मेदारी के साथ अपने जीवन में स्थान दे सके।
शिवपुराण के अनुसार एक समय भगवान शिव गहन तप में लीन थे। तपस्या के बीच एक क्षण ऐसा आया जब संसार के कष्टों के प्रति करुणा से उनके नेत्र नम हो गए। उनकी आँखों से गिरी आँसुओं की बूंदें पृथ्वी पर गिरकर एक विशेष वृक्ष के रूप में पनप उठीं। इन्हीं वृक्षों पर जो फल उगते हैं उन्हें रुद्राक्ष कहा जाता है।
शिवपुराण के साथ साथ स्कंदपुराण, बालोपनिषद, रुद्रपुराण, श्रीमदभागवत और देवीभागवत जैसे अनेक ग्रंथों में भी रुद्राक्ष के महत्व और प्रकार का उल्लेख मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि रुद्राक्ष केवल किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक वैदिक धारा का हिस्सा है।
रुद्राक्ष एक विशिष्ट पहाड़ी वृक्ष का फल है।
भारत में रुद्राक्ष के वृक्ष विशेष रूप से मथुरा, अयोध्या, काशी और मलयाचल पर्वत क्षेत्र में पाए जाते हैं।
रुद्राक्ष फल की बाहरी परत हटाने पर भीतर कठोर बीज मिलता है।
सरल प्रक्रिया
बीज की बाहरी सतह पर जो प्राकृतिक धारियाँ और विभाजन बने होते हैं वे ही उसके मुख यानी चेहरे कहलाते हैं।
बाज़ार में नकली और कृत्रिम रुद्राक्ष भी मिलते हैं इसलिए धारण से पहले पहचान बहुत जरूरी है।
| जाँच बिंदु | क्या देखें |
|---|---|
| बाहरी धारियाँ | जितनी धारियाँ उतना मुख |
| अंदर बीज | एक्स रे में उतने ही खाने या बीज दिखाई दें |
| सतह | कहीं से टूटा फूटा या कीड़ा लगा न हो |
| अतिरिक्त दाने | कृत्रिम उभार या चिपके हुए हिस्से न हों |
इन परीक्षणों के साथ विश्वसनीय स्त्रोत से ही रुद्राक्ष लेना सर्वोत्तम माना जाता है।
भगवान शिव को रुद्राक्ष अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रुद्राक्ष माला से शिव मंत्र का शुद्ध नियम से जप करता है उसका मन धीरे धीरे स्थिर होता है और जीवन में शिवतत्त्व का संरक्षण बढ़ता है।
ईशानः सर्वभूतानां
इसी प्रकार की प्रक्रिया से किसी भी रुद्राक्ष या पूरी माला को सिद्ध किया जा सकता है।
रुद्राक्ष कुल मिलाकर 21 प्रकार के बताए गए हैं। सामान्य उपयोग में 14 मुख तक के रुद्राक्ष अधिक प्रचलित हैं।
प्रत्येक मुख में विशेष देवता, नक्षत्र और ऋषि तत्व का वास माना जाता है। इसी आधार पर उनके जप, उपयोग और लाभ का निर्धारण होता है। 16 से 21 मुख तक के रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में गिने जाते हैं।
नीचे तालिका में 1 से 21 मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख देवता और बीज मंत्र का सार दिया गया है।
| मुखी रुद्राक्ष | अधिष्ठाता देवता | मुख्य मंत्र |
|---|---|---|
| 1 मुखी | भगवान शिव | ॐ ह्रीं नमः |
| 2 मुखी | अर्द्धनारीश्वर, चंद्र | ॐ नमः |
| 3 मुखी | अग्नि, ब्रह्मा विष्णु महेश | ॐ क्लीं नमः |
| 4 मुखी | ब्रह्मा | ॐ ह्रीं नमः |
| 5 मुखी | पंचमुख महादेव, कालाग्नि रुद्र | ॐ ह्रीं क्लीं नमः |
| 6 मुखी | कार्तिकेय, शुक्र | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 7 मुखी | शनिदेव | ॐ हुं नमः |
| 8 मुखी | गणेश, राहु | ॐ हुं नमः |
| 9 मुखी | नवदुर्गा, भैरव | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 10 मुखी | भगवान विष्णु, यम | ॐ नमः शिवाय |
| 11 मुखी | एकादश रुद्र | ॐ ह्रीं ह्रुं नमः |
| 12 मुखी | सूर्य देव | ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः |
| 13 मुखी | महालक्ष्मी | ॐ ह्रीं नमः |
| 14 मुखी | हनुमान | ॐ नमः |
| 15 मुखी | पशुपतिनाथ | ॐ श्रीं मनोवांछितं ह्रीं ॐ नमः |
| 16 मुखी | महाकाल | ॐ हौं जूं सः |
| 17 मुखी | मां कात्यायनी | ॐ ह्रीं हूं हूं नमः |
| 18 मुखी | पृथ्वी देवी | ॐ ह्रीं हूं एकत्व रूपे हूं ह्रीं ॐ |
| 19 मुखी | क्षीरसागर शायी नरायण | ॐ ह्रीं हूं नमः |
| 20 मुखी | नवग्रह, दिक्पाल, त्रिदेव | ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं ब्रह्मणे नमः |
| 21 मुखी | कुबेर | ॐ ह्रीं हूं शिव मित्राय नमः |
अब हर मुख को संक्षेप में समझते हैं।
पहचान
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
धारण नियम
पहचान
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
मुख्य लाभ
धारण विधि
11 मुखी
12 मुखी
13 मुखी
14 मुखी
15 मुखी
16 मुखी
17 मुखी
18 मुखी
19 मुखी
20 मुखी
21 मुखी
| राशि | अनुशंसित मुखी रुद्राक्ष |
|---|---|
| मेष | 3 मुखी |
| वृष | 6 मुखी |
| मिथुन | 4 मुखी |
| कर्क | 2 मुखी |
| सिंह | 12 मुखी |
| कन्या | 4 मुखी |
| तुला | 8 मुखी |
| वृश्चिक | 3 मुखी |
| धनु | 5 मुखी |
| मकर | 7 मुखी |
| कुम्भ | 8 मुखी |
| मीन | 10 मुखी |
यह संकेत सामान्य परंपरा के अनुसार हैं। किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर परामर्श लेना बेहतर रहता है।
रुद्राक्ष को यदि केवल वृक्ष का फल समझा जाए तो उसका अर्थ बहुत छोटा हो जाता है। शिवपुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित 21 मुखी रुद्राक्ष की विशेषताओं को ध्यान से देखें तो समझ आता है कि यह मनुष्य के जीवन में उपस्थित लगभग हर प्रकार की चुनौती के लिए प्रतीकात्मक सहारा देते हैं।
यह सहारा केवल बाहर से नहीं आता। रुद्राक्ष व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है, सोच को स्पष्ट करता है और कर्म को अधिक सजग बनाता है। जब श्रद्धा, ज्ञान और अनुशासन इन मनकों के साथ जुड़ जाते हैं तब यह साधारण बीज से आगे बढ़कर जीवन के मार्गदर्शक बन जाते हैं।
प्रश्न 1 क्या हर व्यक्ति कोई भी मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकता है
हर रुद्राक्ष की अपनी ऊर्जा और प्रभाव क्षेत्र होता है। सामान्य रूप से 4, 5 और 6 मुखी रुद्राक्ष अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। उच्च मुख वाले रुद्राक्ष जैसे 12, 14 या 21 मुखी धारण करने से पहले अनुभवी मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।
प्रश्न 2 क्या रुद्राक्ष धारण करने से भाग्य तुरंत बदल जाता है
रुद्राक्ष का कार्य मन और कर्म को संतुलित करना है। परिणाम तुरंत चमत्कार की तरह नहीं दिखते। जब सोच, निर्णय और प्रयास बदलते हैं तभी परिस्थितियाँ धीरे धीरे बदलती हैं। इस प्रक्रिया में धैर्य और नियम दोनों आवश्यक हैं।
प्रश्न 3 क्या नकली रुद्राक्ष पहनने से कोई हानि होती है
नकली रुद्राक्ष में वह प्राकृतिक स्पंदन नहीं होता जो असली बीज में होता है। सीधी हानि न भी हो तो भी व्यक्ति श्रद्धा रखकर भी वास्तविक लाभ से वंचित रह जाता है। इसलिए पहचान पर समय देना और विश्वसनीय स्थान से ही रुद्राक्ष लेना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 4 क्या एक साथ कई मुखी रुद्राक्ष पहनना ठीक है
कई लोग विभिन्न मुखों के रुद्राक्ष एक साथ धारण करते हैं। यदि संयोजन सोच समझकर किया जाए तो यह संभव है। पर बिना समझ के अनेक मुख पहन लेने से ऊर्जा मिश्रित हो सकती है। बेहतर है उद्देश्य स्पष्ट हो और उसी के अनुरूप सीमित और संतुलित चयन किया जाए।
प्रश्न 5 रुद्राक्ष पहनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
रुद्राक्ष को सम्मान से रखना, अत्यधिक गंदे स्थानों में न ले जाना, अनावश्यक रूप से उतार कर यहाँ वहाँ न फेंकना और समय समय पर शुद्धिकरण करना मूल नियम हैं। कई लोग इसे स्नान, अंतरंग संबंध और अंत्येष्टि जैसे अवसरों पर हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखना उचित मानते हैं। श्रद्धा और पवित्रता जितनी अधिक होगी रुद्राक्ष का अनुभव उतना ही गहरा होगा।
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