By पं. संजीव शर्मा
विभिन्न मालाओं से मंत्र जाप के गहरे लाभ

मंत्र जप की परंपरा केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है। यह एक पूरा साधना मार्ग है जिसमें सांस की लय से लेकर बैठने की मुद्रा और हाथ में धारण की जाने वाली माला तक सब का अपना महत्व होता है। कई लोग वर्षों तक मंत्रों का जप करते रहते हैं पर मन में यही प्रश्न बना रहता है कि फल पूर्ण क्यों नहीं मिल रहा है। इस प्रश्न का उत्तर बहुत बार माला के सही चयन और उसके सही प्रयोग में छिपा रहता है।
मंत्रों के प्रभाव को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि हर माला किसी न किसी ग्रह और देवी देवता की ऊर्जा से जुड़ी होती है। जिस प्रकार दवा गलत मात्रा में या गलत समय पर लेने से लाभ कम और हानि अधिक हो सकती है उसी प्रकार गलत माला से किया गया जप भी कई बार मनचाहा परिणाम नहीं देता। इसलिए माला चुनते समय केवल सुंदरता या प्रचलन नहीं देखना चाहिए बल्कि यह समझना चाहिए कि कौन सी माला किस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है।
मंत्रों को वैदिक परंपरा में ध्वनि रूपी साधना माना गया है। सही उच्चारण के साथ मंत्र जप करने से साधक के आसपास और भीतर सूक्ष्म ऊर्जा जागृत होती है। माला इस प्रक्रिया में गिनती रखने का साधन भर नहीं है बल्कि वह उस ऊर्जा को स्थिर करने का माध्यम भी बनती है।
जप के दौरान मन अक्सर भटक जाता है। माला के मोती एक एक करके चलाने से ध्यान वर्तमान क्षण में लौट आता है। अंगुलियों के स्पर्श से मन में स्थिरता बढ़ती है और मस्तिष्क को संकेत मिलता है कि अब यह समय केवल साधना के लिए है। इसलिए माला और मंत्र दोनों एक दूसरे को पूरक बनाते हैं।
मंत्र जप को प्रभावी बनाने के लिए कुछ सरल पर कठोर अनुशासन आवश्यक हैं।
इन नियमों का पालन माला के चयन जितना ही आवश्यक है। अब विभिन्न मालाओं के गुण और उनके मंत्रों को क्रम से समझते हैं।
रुद्राक्ष माला शिव तत्व से जुड़ी मानी जाती है। रुद्राक्ष बीज प्राकृतिक रूप से बने होते हैं और उनमें पृथ्वी और आकाश दोनों की ऊर्जा का सुंदर संतुलन माना जाता है। इस माला को धारण कर या हाथ में लेकर बैठने पर मन अनायास भीतर की ओर मुड़ने लगता है।
रुद्राक्ष माला से प्रायः इन मंत्रों का जप किया जाता है।
इन मंत्रों का स्वरूप जीवन की कठिन परिस्थितियों से सुरक्षा और आंतरिक बल देने वाला माना जाता है। रुद्राक्ष माला से जप करने पर साधक को भगवान शिव के प्रति गहरा जुड़ाव महसूस हो सकता है। भय और असुरक्षा की भावना धीरे धीरे कम होती है और जीवन की अनिश्चितताओं से जूझने की शक्ति बढ़ती है।
| माला का नाम | संबंधित ग्रह या देवता | उपयुक्त मंत्र |
|---|---|---|
| रुद्राक्ष माला | भगवान शिव | ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र |
रुद्राक्ष माला उन लोगों के लिए विशेष उपयोगी मानी जाती है जिनके जीवन में अचानक संकट या स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां बार बार आती हैं। नियमित जप से मन में धैर्य और स्वीकार्यता बढ़ती है।
स्फटिक माला पारदर्शी और शीतल ऊर्जा वाली मानी जाती है। स्फटिक स्वयं एक शुद्ध रत्न है जो मन की अशांति को शांत करने में सहायक माना जाता है। इस माला से जप करने पर न केवल मानसिक स्थिरता मिलती है बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी धीरे धीरे सुधार के योग बनते हैं।
स्फटिक माला से प्रचलित मुख्य मंत्र इस प्रकार हैं।
इन मंत्रों का जप ज्ञान लक्ष्मी और शक्ति तीनों से जुड़ा हुआ माना जाता है। स्फटिक माला से किए गए जप से घर में लक्ष्मी कृपा बनी रहे ऐसा विश्वास किया जाता है। आर्थिक संकट के समय या निर्णय संबंधी भ्रम में भी यह माला मार्गदर्शन देने वाली मानी जाती है।
| माला | मुख्य उद्देश्य | लाभ |
|---|---|---|
| स्फटिक माला | लक्ष्मी कृपा, मानसिक शांति | आर्थिक स्थिरता, पवित्रता, एकाग्रता |
जो साधक नियमित रूप से स्फटिक माला से जप करता है उसे धीरे धीरे भीतर से हल्कापन और स्पष्टता का अनुभव होने लगता है।
मोती का सफेद रंग मन को तुरंत शांति की ओर ले जाता है। वैदिक परंपरा में मोती को चंद्र ग्रह का प्रतीक माना गया है। चंद्र मन भावनाओं और मानसिक संतुलन का ग्रह माना जाता है इसलिए मोती माला का संबंध सीधे मन की शांति से जुड़ जाता है।
मोती माला से इन मंत्रों का जप विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
इस माला से जप करने पर चंद्र ग्रह के शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। भावनात्मक अस्थिरता अनिद्रा या अत्यधिक चिंता से जूझ रहे लोगों के लिए यह माला सहायक मानी जाती है। चंद्र की शीतल ऊर्जा मन के उतार चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करती है।
| माला | संबंधित ग्रह | मुख्य मंत्र |
|---|---|---|
| मोती माला | चंद्र | ओम श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः |
जिनकी कुंडली में चंद्र कमजोर हो या मानसिक तनाव अधिक हो वे नियमित रूप से मोती माला से जप कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पन्ना माला का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। बुध बुद्धि तर्क संवाद और व्यापारिक कौशल का सूचक ग्रह है। जब विचारों में भ्रम हो निर्णय स्पष्ट न हो या शिक्षा और व्यवसाय में रुकावट आए तो पन्ना माला से जप को लाभदायक माना गया है।
पन्ना माला से सामान्यतः इस मंत्र का जप किया जाता है।
यह मंत्र बुध ग्रह की शांति और बल प्राप्ति के लिए प्रचलित है। जप के साथ यदि दैनिक जीवन में भी संवाद को साफ रखा जाए और असत्य से बचा जाए तो यह माला और अधिक प्रभावी मानी जाती है।
माणिक्य माला सूर्य से संबंधित मानी जाती है। सूर्य आत्मविश्वास पहचान नेतृत्व और जीवन ऊर्जा का ग्रह है। जब किसी व्यक्ति को स्वयं पर भरोसा कम हो जाए या जीवन की दिशा में उत्साह घटने लगे तो सूर्य की कृपा की आवश्यकता अधिक महसूस होती है।
माणिक्य माला से प्रचलित मंत्र इस प्रकार हैं।
इस माला से जप करने पर साधक को आंतरिक प्रकाश और साहस का अनुभव हो सकता है। सूर्य की ऊर्जा मन में स्पष्टता और कर्म में तेजी लाती है।
गोमती चक्र माला का प्रयोग विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन में किया जाता है। व्यापार वृद्धि धन प्राप्ति और समृद्धि की कामना से यह माला धारण की जाती है।
गोमती माला से सामान्यतः इस मंत्र का जप किया जाता है।
इस मंत्र का संबंध लक्ष्मी कृपा और धन वृद्धि से माना जाता है। व्यापार से जुड़े लोग या वे साधक जो आर्थिक स्तर पर स्थिरता चाहते हैं वे इस माला से जप कर सकते हैं।
| माला | मुख्य उद्देश्य | संबंधित मंत्र |
|---|---|---|
| स्फटिक माला | आर्थिक स्थिरता | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे, ॐ सरस्वत्यै नमः |
| गोमती माला | धन प्राप्ति व्यापार वृद्धि | ओम ह्रीं नमः |
तुलसी माला श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। तुलसी के बीजों से निर्मित यह माला भक्ति और पवित्रता का प्रतीक है। जो साधक विष्णु या उनके अवतारों की आराधना करते हैं वे तुलसी की माला को अनिवार्य रूप से उपयोग में लाते हैं।
तुलसी माला धारण करने और उससे जप करने से घर में शांति का वातावरण बनता है। विचार शुद्ध होते हैं और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। इस माला के बारे में मान्यता है कि इसके माध्यम से किया गया जप साधक के चारों ओर एक सूक्ष्म सुरक्षा कवच तैयार करता है।
तुलसी माला से सामान्यतः इस मंत्र का जप किया जाता है।
इस मंत्र से आत्मविश्वास में वृद्धि और भय में कमी आने की परंपरागत मान्यता है।
कमल गट्टे की माला अनेक बाधाओं को दूर करने वाली मानी जाती है। कमल स्वयं लक्ष्मी और शुद्धता का प्रतीक है और उसके बीजों से बनी माला साधना को गहरा बनाने में सहायक मानी जाती है।
कमल गट्टे की माला से प्रचलित मंत्र इस प्रकार हैं।
इन मंत्रों के जप से जीवन की अनेक परेशानियों के दूर होने की मान्यता है। यह माला विशेष रूप से उन साधकों के लिए उपयुक्त है जो शक्ति साधना या समस्याओं से मुक्ति के मार्ग पर चल रहे होते हैं।
| माला | संबंधित देवता या ग्रह | मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| रुद्राक्ष | शिव | भय से मुक्ति, स्वास्थ्य बल |
| स्फटिक | लक्ष्मी, सरस्वती | समृद्धि, ज्ञान, शांति |
| मोती | चंद्र | मानसिक संतुलन, भावनात्मक शांति |
| पन्ना | बुध | बुद्धि, निर्णय क्षमता |
| माणिक्य | सूर्य | आत्मविश्वास, ऊर्जा |
| गोमती चक्र | लक्ष्मी | धन और व्यापार वृद्धि |
| तुलसी | विष्णु | भक्ति, पारिवारिक सुख |
| कमल गट्टा | देवी | बाधा निवारण, साधना बल |
माला केवल साधन नहीं है इसे एक पवित्र उपकरण माना जाता है। इसलिए इसके उपयोग के समय कुछ नियमों का पालन आवश्यक है।
इन नियमों का उद्देश्य यह है कि जो ऊर्जा जप से निर्मित हो रही है वह स्थिर रहे और किसी प्रकार की नकारात्मकता उसमें मिश्रित न हो।
हर माला किसी न किसी ग्रह से जुड़ी होती है। यदि किसी ग्रह की ऊर्जा पहले से ही तनावपूर्ण हो और वही माला बिना विचार के हर मंत्र के लिए प्रयोग की जाए तो लाभ की अपेक्षा उल्टा परिणाम भी मिल सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी की कुंडली में सूर्य अत्यधिक उग्र स्थिति में हो और वह व्यक्ति लगातार माणिक्य माला से जप करे तो कई बार अहंकार या संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।
इसी प्रकार जब मंत्र किसी ग्रह को शांत करने के लिए किया जा रहा हो तो उस ग्रह से बहुत अधिक जुड़े रत्न की माला का प्रयोग हमेशा उचित नहीं होता। ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी मार्गदर्शक से सलाह लेकर ही माला का चयन करना बुद्धिमानी मानी जाती है।
जब उचित माला से सही मंत्र का जप किया जाता है तो साधना धीरे धीरे स्वाभाविक जीवन शैली बन जाती है। केवल पूजा के समय ही नहीं बल्कि रोजमर्रा के निर्णयों में भी वह शांति और संतुलन दिखाई देने लगता है जो भीतर के जप से जन्म लेता है।
हर रत्न की अपनी माला होती है और उस माला का प्रयोग उसी ग्रह से संबंधित मंत्र के लिए अधिक श्रेष्ठ माना जाता है। यदि किसी साधक का उद्देश्य सभी ग्रहों की स्थिति को अनुकूल बनाना है तो उसे यह समझकर चलना चाहिए कि हर ग्रह के लिए अलग साधना और कई बार अलग माला की आवश्यकता हो सकती है। यह जागरूकता ही जप को मात्र औपचारिकता से निकालकर जीवंत साधना में बदल देती है।
जो साधक माला धारण करना चाहते हैं वे किसी विश्वसनीय स्थान से माला प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही यह जान सकते हैं कि उनकी कुंडली के अनुसार कौन सी माला अधिक लाभकारी होगी। यदि रत्न या माला का चयन स्वयं से करना कठिन लगे तो किसी योग्य ज्योतिष मार्गदर्शक से परामर्श लेना उपयोगी होता है।
कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण यह बता सकता है कि किस ग्रह की माला किस मंत्र के साथ उपयोग करनी चाहिए और किससे बचना चाहिए। इस प्रकार माला और मंत्र दोनों मिलकर जीवन में शांति संतुलन और क्रमिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
मंत्र जप के लिए सबसे पहली माला कौन सी चुननी चाहिए
शुरुआत में तुलसी या रुद्राक्ष माला से जप करना सरल और सुरक्षित माना जाता है। दोनों माला मन को भक्ति और शांति की दिशा देती हैं।
क्या एक माला से पूरे जीवन मंत्र जप किया जा सकता है
यदि उद्देश्य एक ही प्रकार की साधना है तो संभव है। पर जब अलग ग्रह या अलग देवता के मंत्रों का जप किया जाए तो अलग माला चुनना बेहतर रहता है।
क्या जप वाली माला को दिन भर गले में पहनना उचित है
जिस माला से जप किया जाता है उसे सामान्य रूप से धारण न करना ही श्रेयस्कर है। जप के समय ही उसका उपयोग करना शुद्धता बनाये रखता है।
माला साफ या शुद्ध कैसे रखी जाए
माला को हमेशा स्वच्छ स्थान पर अलग से रखें। अत्यधिक नमी या गंदगी से दूर रखें और समय समय पर धूप या अगरबत्ती के धुएं से शुद्ध कर सकते हैं।
क्या बिना माला के भी मंत्र जप का फल मिलता है
माला जप की सहायता करती है पर मंत्र की शक्ति मन की एकाग्रता से भी प्रकट होती है। माला से जप अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित हो जाता है इसलिए उसका महत्व बढ़ जाता है।
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अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
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